मेरी धार्मिक माँ COMPLETE

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jay
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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by jay » 03 Nov 2017 20:38

अम्मा को ओर्गास्म आने वाला था , अम्मा ने मुझे तेज तेज करने को कहा. मैं तेज तेज धक्के लगाकर लंड को अम्मा की चूत में गहराई तक पेलने लगा. मैंने अम्मा की चूचियों में मुँह लगाया और ज़ोर से दाँत गड़ा दिए.

“एयेए…..आह…. बेटा….” अम्मा सिसकी.

अब अम्मा ऊपर को छोटे छोटे धक्के लगा रही थी . मैंने अम्मा का चुंबन लिया और उसकी जीभ को चूसा.
“आऐईयईईईईईईई………आआअहह…”

अम्मा ने अपनी कमर उठाकर टेडी कर दी और वो सिसकियाँ लेते हुए झड़ने लगी. उसने मेरी पीठ पर नाख़ून गड़ा दिए. कुछ पल तक ऐसे ही हवा में रुककर अम्मा ने कमर नीचे कर दी.

“रुक मत बेटा नही तो मेरी जान निकल जाएगी. मुझे दे दो बेटा.” अम्मा चिल्लाई.

अम्मा ने फिर से अपनी जांघें उठा ली. मैं अम्मा की जांघों को पकड़कर चूत में लंबे और जोरदार स्ट्रोक लगाने लगा. मुझे मालूम था अम्मा का ओर्गास्म पूरा नही हुआ है और पूरा ओर्गास्म निकालने के लिए उसको तेज तेज चुदाई की ज़रूरत है.

“हाँ … हाँ…....ऐसे ही मेरे बच्चे………….…बस थोड़ा और…………..थोड़ा और मेरे बच्चे…………....आआआ…….आअहह……....चिनुउऊुउउ…………..मैं गयी……....मुझे संभाल बेटा………...ओइईईईईईईईईई……….”

फिर अम्मा ने मुझे अपनी गिरफ़्त में जकड़ लिया. मैंने उसकी जांघों को छोड़ दिया और धक्के लगाकर अम्मा की चुदाई करते रहा. अम्मा के झड़ने से उसकी चूत से रस बहने लगा. चूत के अंदर बाहर लंड जाते समय रस से भीगकर फच………..फच……….फच की आवाज़ करने लगा.

अब अम्मा बेड में शांत पड़ गयी. उसके बदन से पसीना निकल रहा था. अम्मा की चूचियों के बीच मुंह रखकर मैं लेट गया.

अम्मा ने मेरे कंधों को पकड़कर मुझे थोड़ा ऊपर उठाया और मेरे चेहरे पर उंगलियाँ फिराने लगी. उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी, अब वो कोई दूसरी ही औरत बन चुकी थी. उसने अपनी जाँघो को उठाया और नितंबों को हिलाकर मुझे चुदाई की याद दिलाई.

मैं अम्मा के चेहरे को देखते हुए हल्के हल्के धक्के लगाकर चुदाई करने लगा.

“ओह चिनू, ऐसा विस्फोटक चरम मैने आज तक अनुभव नही किया.” सिसकियाँ लेते हुए अम्मा बोली.

मैंने मुस्कुराते हुए अम्मा का चुंबन लिया,” आई लव यू अम्मा.”

अम्मा ने मेरे चेहरे को पकड़ा और माथे का चुंबन लिया , फिर आँखो, नाक और होठों का चुंबन लेकर मेरे निचले होंठ को चूसने लगी.

अब मैं भी झड़ने के करीब था. मैंने लंबे स्ट्रोक लगाने शुरू किए. लंड को आधा बाहर निकालकर फिर एक झटके में अंदर घुसाने लगा. अम्मा की चूत की गहराई में जड़ तक मैं लंड को घुसा दे रहा था.

“आह चिनू भर दो मुझे….मेरे बच्चे..” अम्मा मेरा उत्साह बढ़ाते रही.

मुझे एहसास हुआ की हम बिना किसी गर्भनिरोध के ही चुदाई कर रहे हैं. अम्मा को गर्भ भी ठहर सकता है. मुझे चिंता हुई.

“चिनू…...काश की मैं गर्भ धारण कर सकती. तुम्हारे वीर्य से स्थापित गर्भ मेरे बच्चे. बेटा अपने वीर्य से मेरी योनि भर दो. आह …….चिनू भर दो मुझे.”

अब अम्मा सारे बंधनो से पार जा चुकी थी. वो खुलेआम अपनी भावनाओ का इज़हार कर रही थी. अम्मा की चूचियों को पकड़कर मैं जोरदार धक्के लगाने लगा.

“अम्मा…….मेरी प्यारी अम्मा………...मेरे वीर्य को ग्रहण करो मेरी माँ.”

“भर दो बेटा. अपनी अम्मा की योनि को अपने वीर्य से भर दो. ना जाने कितने जन्मों से ये योनि तुम्हारे वीर्य के लिए तरसती रही है. मेरे बच्चे भर दो मुझे.”

मैंने अम्मा की चूचियों को छोड़ दिया और उसकी गर्दन के नीचे हाथ डालकर उसे चूमने लगा. मेरे वीर्य से अम्मा की चूत भर गयी. अम्मा ने भी वीर्य को महसूस किया और अपने नितंबों को उठाकर वीर्य को ग्रहण किया. मेरे नितंबों को पकड़कर वो मुझे अपनी चूत पर पटकने लगी.

“ओह्ह चिनुउऊउ……….मैं फिर से गयी………………..” अम्मा ज़ोर से चीखी . उसको दूसरा ओर्गास्म आ गया.

मेरे शरीर से सारा वीर्य निकलकर अम्मा की योनि में चला गया.

जबरदस्त चुदाई के बाद हम दोनो बेड पर शांत पड़ गये. मैं अम्मा के बदन के ऊपर लेटा हुआ था. उसने अपनी बाँहों में मुझे जकड़ा हुआ था. अम्मा की चूत में अभी भी मेरा लंड घुसा हुआ था. मैंने फिर से धक्के लगाने की कोशिश की लेकिन अम्मा ने मुझे रोक दिया और शांत लेटे रहने को कहा.

मेरा लंड मुरझाकर अम्मा की चूत से बाहर निकल गया. अम्मा मुस्कुरायी और मुझसे हटने को कहा. मैं उसके ऊपर से सरककर बगल में लेट गया.

अम्मा बेड में बैठ गयी और अपनी फैली हुई जांघों के बीच देखने लगी,”चिनू देखो, तुमने क्या किया है.”

मैं उठकर देखने लगा. अम्मा की चूत से वीर्य निकलकर बेड में चादर पर गिर रहा था.

मैंने अम्मा को देखा , वो मुस्कुरायी,”मुझे दुख है मेरे बच्चे , ये तुम्हारा वीर्य बरबाद चला गया. शिवांगी के गर्भ में इससे एक सुंदर पुत्र पैदा हो गया होता. काश मैं भी गर्भधारण कर पाती.”

फिर झुककर अम्मा ने मेरे होठों का चुंबन ले लिया. मैंने अम्मा की चूत से वीर्य निकालकर उसकी चूचियों पर मल दिया. और उसकी चूत में उंगली करने लगा.

“एयेए…..आह चिनू. अब बस करो मैं थक गयी हूँ. इस उमर में कैसे तुम्हारा इतना साथ दे पाई मुझे खुद आश्चर्य हो रहा है. कहाँ से आई मुझ में इतनी शक्ति ?”

“अम्मा, आपकी सही सही उमर क्या है ?” मैंने पूछा.

“बेटा 18 बरस की उमर में मेरी शादी हो गयी थी और एक साल से पहले ही तुम हो गये थे. “ अम्मा मुस्कुराते हुए बोली और बेड से उठने लगी.

मैंने उसका हाथ पकड़ा,” इसका मतलब आप….”

अम्मा ने अपना हाथ छुड़ाया और बाथरूम में भाग गयी.

बाथरूम के दरवाज़े से बोली,” तुम मेरी उमर का हिसाब लगाते रहो लेकिन कुछ खाने का भी ऑर्डर दे दो. मुझे भूख लगी है. अपने प्यारे बच्चे का ख्याल रखने के लिए मुझे ताक़त की ज़रूरत है.” अम्मा शरारतभरी मुस्कान से मुझे आँख मारते हुए बोली और फिर बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया.

मैंने घड़ी में देखा, 11:45 का टाइम हुआ था. हे ईश्वर , 4 घंटे ! , 4 घंटे तक हमारा लंबा प्यार चला था. मैं मुस्कुराने लगा.

फिर मैंने खाने का ऑर्डर दिया और अम्मा की उमर का हिसाब लगाने लगा. जो अम्मा ने बताया था उसके हिसाब से अम्मा की उमर 52 या 53 वर्ष थी. हम चारो भाई बहिनो में मैं सबसे बड़ा था और सबसे छोटी बहिन मुझसे 7 साल छोटी थी. इसका मतलब 30 वर्ष की उमर तक अम्मा चार बच्चों की माँ बन चुकी थी. शायद उस समय अम्मा जितनी सुंदर रही होगी उसके हिसाब से पिताजी को अम्मा से दूर रहना मुश्किल लगता होगा.

तभी अम्मा ने बाथरूम से मुझे आवाज़ दी. बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था. मैं बाथरूम के अंदर चला गया. अम्मा बाथटब में खड़ी थी.

“आओ चिनू तुमको नहला दूं” अम्मा मुस्कुराते हुए बोली.

मैं बाथटब में गया और अम्मा का चुंबन लिया. और दूसरे हाथ से अम्मा की चूचियां दबाने लगा. अम्मा ने मेरा चुंबन लिया और फिर मुझे धकेलते हुए बोली,”पहले नहा लो बेटा.”

एक अच्छे बच्चे की तरह मैं अम्मा के सामने खड़ा हो गया. अम्मा ने मुझे घुमा दिया और मेरी पीठ पर साबुन लगाने लगी.

फिर नीचे को साबुन लगाते हुए उसका हाथ आगे मेरे लंड पर लगा.,” हे भगवान तुम तो फिर से तैयार हो.”

“मेरा ऐसा हाल नही था , ये तो आपके छूने से हो गया.” मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया.

अम्मा ने मुझे सीधा घुमाकर शावर चला दिया. फिर नहलाने के बाद तौलिए से मेरा बदन पोछने लगी. मैं चुपचाप खड़ा रहा और अम्मा को निहारते रहा. ऊपर का बदन पोछकर अम्मा नीचे को पोछने लगी. मैं दीवार से टेक लगाकर खड़ा हो गया , कुछ पल के लिए मैंने अपनी आँखे बंद कर ली.

तभी मेरे लंड पर गर्मी महसूस हुई . मैंने आँखे खोलकर देखा तो अम्मा ने लंड को मुँह में लिया हुआ था. वो भी क्या दृश्य था. मेरे मुँह से … आह निकली. अम्मा ने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और चूसने लगी. दूसरे हाथ से वो मेरी गोलियों को सहला रही थी. मैंने फिर से आँखे बंद कर ली.

अम्मा ने मुझसे टाँगे फैलाने को कहा. और मेरे नितंबों को पकड़ लिया. मेरा ओर्गास्म बनने लगा . तभी अम्मा ने अचानक मेरी गांड के छेद में अंगुली डाल दी और आगे पीछे करने लगी. शुरू में मुझे कुछ अजीब लगा लेकिन फिर मेरे आनंद में कई गुना बढ़ोतरी हो गयी.

“अम्मा…….मैं झड़ने वाला हूँ…….” और फिर मैंने अम्मा को हटाने की कोशिश की. अम्मा ने हाथ के इशारे से मुझे मना किया और लंड चूसते रही.

मेरे लंड से वीर्य की धार निकली और सीधे अम्मा के मुँह में गिरी . अम्मा लंड चूसते रही . वीर्य से उसका मुंह भर गया. खांसते हुए मुँह में हाथ लगाकर बड़ी मुश्किल से उसने वीर्य निगल लिया.

मैंने अम्मा को कंधे से पकड़कर उठाया,” अम्मा आपने थूक क्यूँ नही दिया ?”

“अपने भक्त पुत्र के वीर्य को कैसे बहा दूं. तेरा वीर्य अमूल्य है मेरे लिए. धीरे धीरे आदत पड़ जाएगी. तब आसानी से पी सकूँगी.” अम्मा मुस्कुराते हुए बोली और मेरे होठों का चुंबन ले लिया.

अम्मा के होठों से मुझे अपने ही वीर्य का स्वाद आया. मैंने अम्मा को कसकर आलिंगन कर लिया, उसकी बड़ी चूचियां मेरी छाती से दब गयी.

मैंने अम्मा की चूत को चूसकर उसे सुख देने की कोशिश की लेकिन उसने मुझे रोक दिया.

“चलो बेटा , कमरे में चलो और कपड़े पहन लो. बहुत सी बातें करनी हैं. हमने अपने बदन नंगे करके एक दूसरे को दिखा दिए. अब हमें अपनी आत्मा को भी ऐसे ही खोलकर दिखाना है. एक पुरुष की तरह तुम्हें जानना है, समझना है और तुम भी एक स्त्री की तरह मुझे समझो, मुझे जानो. अच्छा या बुरा लेकिन हमें बहुत सी बातें करनी हैं.”

मैंने हामी भरी और हम दोनो बाथरूम से बाहर आ गये.

समाप्त

Amma ko orgasm aane wala tha , amma ne mujhe tej tej karne ko kaha. Mai tej tej dhakke lagakar lund ko amma ki choot mein gehrai tak pelne laga. Mene amma ki chuchiyon mein munh lagaya aur jor se daant gada diye.

“aaa…aah beta…” amma siski.

Ab amma upar ko chote chote dhakke laga rahi thi . mene amma ka chumban liya aur uski jeebh ko chusa.

“aaaiiiiiiiiii………aaaaahhhhhhhhhhhh…”

Amma ne apni kamar uthakar tedi kar di aur wo siskiyan lete hue jhadne lagi. usne meri peeth par nakhoon gada diye. Kuch pal tak aise hi hawa mein rukkar amma ne kamar niche kar di.

“ruk mat beta nahi to meri jaan nikal jayegi. Mujhe de do beta.” Amma chillayi.

Amma ne phir se apni janghe utha li. Mai amma ki janghon ko pakadkar choot mein lambe aur jordar stroke lagane laga. Mujhe malum tha amma ka orgasm pura nahi hua hai aur pura orgasm nikalne ke liye usko tej tej chudai ki jarurat hai.

“ haan …haan…..aise hi mere bacche.. ……bas thoda aur………….thoda aur mere bacche…..aaaaaa…aaahh…..chinuuuuuuu……..main gayi…..mujhe sambhal beta……….oiiiiiiiiiiii….”

Phir amma ne mujhe apni giraft mein jakad liya. Mene uski janghon ko chod diya aur dhakke lagakar amma ki chudai karte raha. Amma ke jhadne se uski choot se ras behne laga. Choot ke andar bahar lund jate samay ras se bhigkar Phuch…. Phuch…… Phuch ki awaz karne laga.

Ab amma bed mein shant pad gayi. uske badan se pasina nikal raha tha. Amma ki chuchiyon ke beech muh rakhkar mai let gaya.

Amma ne mere kandhon ko pakadkar mujhe thoda upar uthaya aur mere chehre par ungliyan firane lagi. uske chehre par muskurahat thi, ab wo koi dusri hi aurat ban chuki thi. usne apni jangho ko uthaya aur nitambon ko hilakar mujhe chudai ki yaad dilayi.

Mai amma ke chehre ko dekhte hue halke halke dhakke lagakar chudai karne laga.
“oh chinu, aisa visphotuk charam maine aaj tak anubhav nahi kiya.” siskiyan lete hue amma boli.

Mene muskurate hue amma ka chumban liya,” I love you amma.”

Amma ne mere chehre ko pakda aur mathe ka chumban liya , phir aankho, naak aur hothon ka chumban lekar mere nichle hoth ko chusne lagi.

Ab mai bhi jhadne ke kareeb tha. Mene lambe stroke lagane suru kiye. Lund ko aadha bahar nikaalkar phir ek jhatke mein andar ghusane laga. Amma ki choot ki gehrayi mein jad tak mai lund ko ghusa de raha tha.

“ohh chinu bhar do mujhe….mere bacche..” amma mera utsah badate rahi.

Mujhe ehsas hua ki hum bina kisi garhnirodh ke hi chudai kar rahe hain. Amma ko garbh bhi thahar sakta hai. Mujhe chinta hui.

“chinu….kash ki mai garbh dharan kar sakti. Tumhare virya se sthapit garbh mere bacche. Beta apne virya se meri yoni bhar do. Aah….chinu bhar do mujhe.”

Ab amma sare bandhano se par ja chuki thi. wo khuleaam apni bhawnao ka izhaar kar rahi thi. amma ki chuchiyon ko pakadkar mai jordar dhakke lagane laga.

“amma….meri pyari amma…….mere virya ko grihan karo meri maa.”

“bhar do beta. Apni amma ki yoni ko apne viry se bhar do. Na jane kitne janamo se ye yoni tumhare viry ke liye tarasti rahi hai. Mere bacche bhar do mujhe.”

Mene amma ki chuchiyon ko chod diya aur uski gardan ke niche hath dalkar use chumne laga. Mere viry se amma ki choot bhar gayi. amma ne bhi viry ko mehsoos kiya aur apne nitambon ko uthakar viry ko grihan kiya. mere nitambon ko pakadkar wo mujhe apni choot par patakne lagi.

“ohhchinuuuu….mai phir se gayi………” amma jor se chikhi . usko dusra orgasm aa gaya. mere sharir se sara virya nikalkar amma ki yoni mein chala gaya.

Jabardast chudai ke baad hum dono bed par shant pad gaye. Mai amma ke badan ke upar leta hua tha. Usne apni banhon mein mujhe jakda hua tha. Amma ki choot mein abhi bhi mera lund ghusa hua tha. Mene phir se dhakke lagane ki koshish ki lekin amma ne mujhe rok diya aur shant lete rehne ko kaha.

Mera lund murjhakar amma ki choot se bahar nikal gaya. amma muskurayi aur mujhse hatne ko kaha. Mai uske upar se sarakkar bagal mein let gaya.

Amma bed mein baith gayi aur apni faili hui janghon ke beech dekhne lagi,”chinu dekho, tumne kya kiya hai.”

Mai uthkar dekhne laga. Amma ki choot se virya nikalkar bed mein chadar par gir raha tha.

Mene amma ko dekha , wo muskurayi,”mujhe dukh hai mere bacche , ye tumhara viry barbad chala gaya. shivangi ke garbh mein isse ek sundar putra paida ho gaya hota. Kash mai bhi garbhdharan kar pati.”

Phir jhukkar amma ne mere hothon ka chumban le liya. Mene amma ki choot se viry nikalkar uski chuchiyon par mal diya. Aur uski choot mein ungli karne laga.

“aaa…aah chinu. Ab bas karo main thak gayi hoon. Is umar mein kaise tumhara itna sath de payi mujhe khud ascharya ho raha hai. Kahan se aayi mujh mein itni shakti ?”

“amma, aapki sahi sahi umar kya hai ?” mene pucha.

“beta 18 varas ki umar mein meri shadi ho gayi thi aur ek saal se pehle hi tum ho gaye the. “ amma muskurate hue boli aur bed se uthne lagi.

Mene uska hath pakda,” iska matlab aap….”

Amma ne apna hath chudaya aur bathroom mein bhag gayi.

Bathroom ke darwaze se boli,” tum meri umar ka hisab lagate raho lekin kuch khane ka bhi order de do. Mujhe bhook lagi hai. Apne pyare bacche ka khyal rakhne ke liye mujhe takat ki jarurat hai.” Amma sharat bhari muskaan se mujhe aankh marte hue boli aur phir bathroom ka darwaza band kar diya.

Mene ghadi mein dekha, 11:45 ka time hua tha. Hey ishwar 4 ghante ! , 4 ghante tak hamara lamba pyar chala tha. Mai muskurane laga.

Phir mene khane ka order diya aur amma ki umar ka hisab lagane laga. Jo amma ne bataya tha uske hisab se amma ki umar 52 ya 53 varsh thi. hum charo bhai bahino mein mai sabse bada tha aur sabse choti bahin mujhe 7 saal choti thi. iska matlab 30 varsh ki umar tak amma char bacchon ki maa ban chuki thi. sayad us samay amma jitni sundar rahi hogi uske hisaab se pitaji ko amma se dur rehna mushkil lagta hoga.

Tabhi amma ne bathroom se mujhe awaz di. bathroom ka darwaza thoda khula hua tha. Mai bathroom ke andar chala gaya. amma bathtub mein khadi thi.

“aao chinu tumko nehla dun” amma muskurate hue boli.

Mai bathtub mein gaya aur amma ka chumban liya. Aur dusre hath se amma ki chuchiyan dabane laga. Amma ne mera chuban liya aur phir mujhe dhakelte hue boli,”pehle naha lo bata.”

Ek acche bacche ki tarah mai amma ke samne khada ho gaya. amma ne mujhe ghuma diya aur meri peeth par sabun lagane lagi.

Phir niche ko sabun lagate hue uska hath aage mere lund par laga.,” hey bhagwan tum to phir se tayyar ho.”

“mera aisa haal nahi tha , ye to aapke chune se ho gaya.” mene muskurakar jawab diya.

Amma ne mujhe seedha ghumakar shower chala diya. Phir nehlane ke baad tauliye se mera badan pochne lagi. mai chupchap khada raha aur amma ko niharte raha. Upar ka badan pochkar amma niche ko pochne lagi. mai dewar se tek lagakar khada ho gaya , kuch pal ke liye mene apni aankhe band kar li.

Tabhi mere lund par garmi mehsoos hui . mene aankhe kholkar dekha to amma ne lund ko munh mein liya hua tha. Wo bhi kya drishya tha. Mere munh se …aaah nikli. Amma ne hath se mere lund ko pakda aur chusne lagi. dusre hath se wo meri goliyon ko sehla rahi thi. mene phir se aankhe band kar li.

Amma ne mujhse tange failane ko kaha. Aur mere nitambon ko pakad liya. Mera orgasm banne laga . tabhi amma ne achanak meri gand ke ched mein anguli dal di aur aage piche karne lagi. suru mein mujhe kuch ajeeb laga lekin phir mere anand mein kai guna badotari ho gayi.

“amma…mai jhadne wala hun…” aur phir mene amma ko hatane ki koshish ki. Amma ne hath ke ishare se mujhe mana kiya aur lund chooste rahi.

Mere lund se viry ki dhar nikli aur sidhe amma ke munh mein giri . amma lund chooste rahi . viry se uska muh bhar gaya. khaste hue munh mein hath lagakar badi mushkil se usne viry nigal liya.

Mene amma ko kandhe se pakaadkar uthaya,” amma aapne thuk kyun nahi diya ?”

“apne bhakt putra ke viry ko kaise baha dun. Tera viry amulya hai mere liye. Dhire dhire aadat pad jayegi. Tab aasani se pe sakungi.” Amma muskurate hue boli aur mere hothon ka chumban le liya.

Amma ke hothon se mujhe apne hi viry ka swad aaya. Mene amma ko kaskar alingan kar liya, uski badi chuchiyan meri chati se dab gayi.

Mene amma ki choot ko chooskar use sukh dene ki koshish ki lekin usne mujhe rok diya.

“chalo beta , kamre mein chalo aur kapde pahan lo. Bahut si baatein karni hain.
Hamne apne badan nange karke ek dusre ko dikha diye. Ab hamein apni aatma ko bhi aise hi kholkar dikhana hai. Ek purush ki tarah tumhe janna hai, samajhna hai aur tum bhi ek stri ki tarah mujhe samjho, mujhe jano. Accha ya bura lekin hamein bahut si baatein karni hain.”

Mene hami bhari aur hum dono bathroom se bahar aa gaye.

THE END
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