मेरी धार्मिक माँ COMPLETE

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jay
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मेरी धार्मिक माँ COMPLETE

Post by jay » 13 Oct 2017 15:54

मेरी धार्मिक माँ





मैं किसी कहानी को हिन्दी में लिखते समय अपने हिसाब से मॉडिफाइ करके लिखता हूँ , लेकिन इस कहानी को बिना बदले लिख रहा हूँ क्यूंकी पंडितजी के अनुसार ये सच्ची घटना है. अब आप लोग डिसाइड कर लेना, क्या है क्या नही. चलो शुरू करते हैं.

मैं उत्तर भारत के एक ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखता हूँ. मेरी दो बहनें और एक भाई है. अपने भाई बहिनो में मैं सबसे बड़ा हूँ. हम चारो भाई बहिनो की शादी हो चुकी है. मैं अपनी पत्नी और 4 वर्ष के बेटे के साथ अपने माता पिता के साथ ही रहता हूँ. मेरे पिताजी का अच्छा ख़ासा बिज़नेस है. हमने इंजिनियरिंग प्रॉडक्ट्स की डिस्ट्रिब्युटरशिप ले रखी है और हम दोनो बाप बेटे मिलकर कारोबार चलते हैं. कारोबार से अच्छा पैसा आ जाता है. जो हमारे लिए पर्याप्त है. मेरा छोटा भाई अपने परिवार के साथ विदेश में रहता है.

ये बात दिसंबर 2009 की है, तब उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी. उन दिनों जाड़ों में हमारा कारोबार थोड़ा सुस्त चल रहा था. इसी दौरान मेरी माँ ने दक्षिण भारत में तिरुपति और रामेश्वरम जाने की इच्छा जाहिर की. 15 जनवरी , को त्योहार के दिन वो वहाँ मंदिर में दर्शन करना चाह रही थी. मेरे पिताजी की तबीयत ठीक नही थी तो उन्होने मुझसे माँ के साथ जाने को कहा. मेरा जाने का मन नही था तो मैं टालमटोल करने लगा. मैं थोड़ा परिवारिक आदमी हूँ और परिवार से दूर यात्रा करने का मेरा मन नही हो रहा था. लेकिन माँ ने जाने की ज़िद पकड़ ली तो मुझे भी मजबूरन हामी भरनी पड़ी. फिर ये निर्णय लिया गया की जब मौसम थोड़ा ठीक होगा तब हम दोनो माँ बेटे जाएँगे. मेरी टाल मटोल देखकर मेरी पत्नी मुझे चिढ़ाती रही की तुम अपने पुत्र होने का कर्तव्य नही निभा रहे हो और तुम्हें अपनी माँ को उनकी इच्छानुसार दर्शन के लिए ले जाना चाहिए.

जब मौसम थोड़ा ठीक हुआ तो हमने अपने शहर से देल्ही के लिए ट्रेन का सफ़र किया और फिर देल्ही एयरपोर्ट से दक्षिण भारत में मदुरै के लिए फ्लाइट पकड़ी. वहाँ से हमने एक कार बुक कराई जो पूरी यात्रा के लिए हमने अपने पास रखी. दक्षिण भारत में मौसम अच्छा था. हम पहले रामेश्वरम गये और फिर वहाँ से तिरुपति गये. तिरुपति में माँ ने मुझसे सर के बाल सफाचट करवाने को कहा. मैंने भी इस यात्रा का आनंद लिया था तो बिना किसी लाग लपेट के माँ की इच्छा अनुसार सर शेव करवा लिया.

तिरुपति दर्शन के बाद हमारी वापसी यात्रा शुरू हुई. जो कार हमने यात्रा के शुरू में मदुरै से बुक करवाई थी , उसी से हम बंगलोर पहुँच गये. तकरीबन 4:30 pm पर हम बंगलोर पहुँचे और सीधे चान्सररी पेविलियन जो की मेरा फेवरेट होटेल है , वहाँ आ गये. लंबी धार्मिक यात्रा अब संपन्न हो चुकी थी. रूम में आकर नहाने के बाद मैंने थोड़ा आराम कर लिया.

फिर पीने के मूड से मैं होटेल की बार में चला गया. माँ अभी आराम कर रही थी , थकान से उसे नींद आ गयी थी. मैंने रूम की चाभी ली और चुपचाप चला आया ताकि माँ की नींद डिस्टर्ब ना हो. बार में थोड़ा पीने के बाद मुझे अपने बीवी बच्चों की याद आने लगी. घर की याद आने पर मेरा मूड ऑफ हो गया. फिर मैंने माँ को फोन किया की आपने डिनर कर लिया. माँ बोली बेटा मैं तो तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ. मुझे शरम आई की मैं यहाँ बार में मज़े कर रहा हूँ और रूम में माँ मेरा इंतज़ार कर रही है. मैंने कहा , मैं आ रहा हूँ और फटाफट रूम में आ गया. जब मैंने चाभी से रूम खोला तो माँ वहाँ नही थी.

फिर बाथरूम से माँ के भजन गाने की आवाज़ आई तो मैं समझ गया माँ नहाने गयी है. मैं सोफे में बैठ के टीवी देखने लगा.

करीब 10 मिनिट बाद माँ ने आवाज़ लगाई,” चिनू मेरी नाइटी पकड़ा दो.”(चिनू मेरा घर का नाम है).

मैंने बेड से नाइटी उठाई और बाथरूम के दरवाज़े पर जाकर माँ को आवाज़ लगाई. माँ ने थोड़ा सा दरवाज़ा खोला और नाइटी पकड़ने के लिए अपना हाथ दरवाज़े से बाहर निकाला. मैं नाइटी पकड़ाने के लिए थोड़ा आगे को आया और उसी क्षण से मेरी दुनिया बदल गयी.

बाथरूम ऐसे बना हुआ था की उसमे बाई तरफ शावर था और दाई तरफ वॉश बेसिन और ड्रेसर था. जब माँ ने दरवाजे के पीछे छिपकर सिर्फ़ हाथ बाहर निकाला तो सामने मिरर में मुझे वो पूरी नंगी दिखाई दी.

आगे बताने से पहले मैं अपनी माँ के बारे में बता दूं. मेरी माँ की उमर लगभग 52 – 53 वर्ष है और वो कोई हुस्न की परी या ऐसी कुछ नही है. वो एक साधारण हाउसवाइफ है. उमर के हिसाब से ही उसकी कमर पर चर्बी चढ़ी हुई है. यहाँ की औरतों की अपेक्षा उसकी हाइट थोड़ी ज़्यादा है , 5’5 की . बड़ी चूचियां , और चौड़े नितंब जो इस उमर की औरतों के होते हैं. देखने में वो साधारण ही है पर उसका रंग एकदम साफ है , बिल्कुल गोरी चिट्टी है.

दरवाज़े पर खड़े होकर जब मैंने माँ को एकदम नग्न देखा तो मैं देखता ही रह गया. उसकी बड़ी बड़ी गोरी चूचियां जो 50 की उमर पार करने के बाद भी ज़्यादा झुकी हुई नही थी. जवान लड़कियों के जैसे ऊपर को भी नही थी पर ज़्यादा ढली हुई भी नही थी. माँ दरवाज़े के पीछे थोड़ा साइड में होकर खड़ी थी तो मुझे चूचियों के बीच में गुलाबी ऐरोला और मोटे निपल भी दिख रहे थे. उसकी जांघें बड़ी बड़ी और मांसल थी और लंबी गोरी टाँगे मुझे दिखी. साइड में होने से उसकी नाभि के नीचे का V शेप वाला भाग मिरर में नही दिख रहा था.

मैं हाथ में नाइटी पकड़े मिरर में माँ को नग्न देख रहा था तभी माँ की आवाज़ से मुझे होश आया.
माँ थोड़ा झुंझलाते हुए बोली,” क्या कर रहे हो , नाइटी देते क्यों नही.”

उसे पता ही नही था की मैंने मिरर में उसे नंगी देख लिया है. मैंने उसे नाइटी पकड़ाई और फिर टीवी देखने लगा.

अब मेरे मन में मिलीजुली भावनाए आने लगी. एक तरफ तो जो मैंने देखा उससे मैं उत्तेजित हो गया था और दूसरी तरफ अपनी माँ के बारे में ऐसा सोचने से मुझे गिल्टी फीलिंग भी आ रही थी. मुझे अपने ऊपर बहुत शरम आई लेकिन माँ की वो नग्न छवि जो मैंने मिरर में देखी वो मेरे मन से हट ही नही रही थी. मेरे दिमाग़ का एक हिस्सा कह रहा था की अपनी माँ को नग्न देखकर उत्तेजित होना ग़लत बात है , तो दूसरा हिस्सा वही नग्न छवि दिखाकर मुझे फिर से उत्तेजित कर दे रहा था.

माँ को लेकर मेरे मन में पहले कभी कोई ग़लत बात नही रही इसलिए अब जो मेरे दिमाग़ में चल रहा था वो मेरे लिए असहनीय हो गया. माँ के बारे में कुछ सेक्स कहानियाँ मैंने पढ़ी थी पर मैं सोचता था की ये परवर्ट लोगों की फैंटसीज हैं और कुछ नही. कोई अपनी माँ के साथ कैसे संबंध बना सकता है ?

लेकिन अब मुझे क्या हुआ था. क्यूँ मेरे मन में अपनी माँ के नग्न रूप को देखकर उत्तेजना आई ?

टीवी के आगे बैठकर मैं यही सब सोच रहा था , तभी माँ अपनी स्लीवलेस वाइट कॉटन नाइटी पहनकर बाथरूम से बाहर आई. नाइटी से सिर्फ़ उसकी बाहें दिख रही थी बाकी पूरा बदन ढका हुआ था. अपने गीले बालों में जो उसकी आधी पीठ तक पहुँच रहे थे , वो मुझे सुंदर लग रही थी.

उसकी तरफ देखते हुए मुझे फिर वही नग्न छवि दिखाई देने लगी. लाख कोशिश करने पर भी अब माँ को देखने पर वही नग्न छवि मेरी आँखो के आगे आ जा रही थी.

माँ ने नहाकर ब्रा नही पहनी थी इसलिए जब वो चलती तो उसकी बड़ी चूचियां इधर उधर हिल रही थी. पहले की बात होती तो मैं कभी इस तरफ ध्यान नही देता पर अब सब कुछ बदल चुका था. मैं अब माँ को ध्यान से देख रहा था. माँ शीशे के आगे खड़ी होकर बाल बनाने लगी और उसके हाथ हिलाने से हिलती हुई चूचियों को मैं देखने लगा.

तभी माँ ने कहा की डिनर ऑर्डर कर दो तो मैं होश में आया. माँ ने कहा की उसे हल्का खाना खाने का मन है , तो मैंने सिर्फ़ सलाद और सूप ऑर्डर कर दिए. फिर हम टीवी में न्यूज़ देखते हुए डिनर करने लगे.

मेरा दिमाग़ अभी भी कहीं खोया हुआ था और मैं टीवी की तरफ खाली देख रहा था , उसमे क्या आ रहा था क्या नही मुझे कुछ पता नही. तभी माँ की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी. उसने कुछ कहा पर ध्यान कहीं और होने से मुझे साफ सुनाई नही दिया. मुझे ऐसा लगा जैसे माँ की आवाज़ कहीं दूर से आ रही है.

अब माँ थोड़ी इरिटेट हो गयी और नाराज़गी से बोली,” तुम्हें इतना नही पीना चाहिए कि सामनेवाला क्या कह रहा है ये भी तुम्हें सुनाई ना दे.”

उसकी झिड़की से मैं एकदम से चौंक गया. उसे क्या पता था की मैंने ज़्यादा पिया नही है बल्कि कुछ देखा है , जिससे मेरा मन विचलित हो गया था.

मैं बोला,” आई ऍम सॉरी अम्मा. पीने से नही बल्कि सफ़र की वजह से मैं थक गया हूँ. इसलिए आपकी बात नही सुनी.”

फिर मैंने माँ की तरफ देखा और सीधी मेरी नज़र उसकी क्लीवेज पर पड़ी , जो उसकी नाइटी के गले से ब्रा ना होने से दिख रही थी. ज़्यादा नही दिख रहा था पर जब वो सूप पीने को आगे को झुकती तो चूचियों का उपरी हिस्सा दिख जा रहा था. अपने को माँ की चूचियों को ताकते पाकर मुझे अपने को थप्पड़ मारने का मन हुआ लेकिन कितनी भी कोशिश कर लूँ पर मैं माँ के बदन को तकने से अपने को नही रोक पा रहा था. एक ही दिन में ना जाने मुझे क्या हो गया था. आज 33 वर्ष की उमर में पहली बार माँ को ऐसे देख रहा था जो पहले हमेशा मेरे लिए पूजनीय माँ रही थी.

तभी माँ ने मेरा ध्यान टीवी में आ रही न्यूज़ की तरफ दिलाया की उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है और ज़्यादातर एयरपोर्ट कोहरे की वजह से अगले कुछ दिन के लिए बंद हैं. टीवी में देल्ही एयरपोर्ट में परेशान पैसेंजर्स को दिखाया जा रहा था जिनकी फ्लाइट्स कैंसिल हो गयी थी.

अब मुझे मौका मिल गया. मैंने माँ पर खीझ उतारते हुए कहा,” देखो अम्मा, मैंने पहले ही कहा था की इस बार मौसम बहुत खराब है , यात्रा पर नही जाते हैं पर आपने मेरी एक नही सुनी . अब देख लो टीवी में. लोग एयरपोर्ट में पड़े हुए परेशान हैं. फ्लाइट्स कैंसिल हो गयी हैं.”

माँ शांत स्वर में बोली ,” चिनू , जब तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ था तो मैंने प्रार्थना की थी की अगर तुम जिंदा बच गये तो मैं तिरुपति और रामेश्वरम के दर्शन करने जाऊँगी. तुम क्या सोचते हो की तुम अगर मेरे साथ नही आते तो मैं यहाँ नही आती ? मैं तब भी आती और अकेली ही आती .”

माँ की बात सुनकर मुझे बुरा लगा और मैंने उनसे अपनी खीझ उतारने के लिए माफी माँगी.

कुछ समय पहले की बात है मैं बाथरूम में गिर पड़ा था और किसी चीज़ से सर टकराने से वहीँ बेहोश हो गया. मेरे सर से खून बहता रहा. और जब मुझे हॉस्पिटल ले जाया गया तो काफ़ी देर हो गयी थी और बहुत सारा खून बह गया था. करीब 15 दिन लगे थे मुझे ठीक होने में. माँ उसी एक्सीडेंट की बात कर रही थी.

मेरे माफ़ी मांगने पर माँ उठी और मेरे पास बैठ गयी. प्यार से मुस्कुराते हुए उसने मेरा सर पकड़कर अपनी छाती से लगा लिया. कुछ देर के लिए मैं दुनिया को भूल गया और एक बच्चे की तरह उससे लिपटकर सिसकने लगा. मुझे रोते देखकर माँ ने मुझे और कसकर अपने से चिपटा लिया और कुछ कहकर मुझे चुप कराने की कोशिश करने लगी. उसने क्या बोला मैं अपने सिसकने की वजह से नही सुन पाया.

माँ सोच रही थी की मैं इसलिए गिल्टी फील कर रहा हूँ की मैंने उसकी यात्रा के लिए मना किया था , जबकि माँ ये यात्रा मेरे लिए ही कर रही थी. लेकिन मेरे रोने का कारण कुछ और ही था. मुझे बहुत गिल्टी फीलिंग आ रही थी की माँ मेरे एक्सीडेंट की वजह से ये यात्रा कर रही है, और मैं उस पूजनीय माँ को नग्न देखने के बाद उत्तेजित हो रहा था , उसके बदन को ताक रहा था.

लगभग 10 मिनिट बाद मैं शांत हुआ और मुझे होश आया तो मैंने पाया की मेरा सर माँ की छाती पर टिका हुआ है. होश में आते ही फिर वही ख्याल आने लगे. उसकी नाइटी थोड़ी नीचे को हो गयी थी तो मेरी आँखों को नाइटी के गले से माँ की चूचियां ऊपर से दिखने लगी. मेरा दायां गाल तो चूची पर ही दबा हुआ था. मैंने दोनो हाथों से माँ को आलिंगन किया हुआ था. और जिस हाथ से माँ के दाएं कंधे को पकड़ा हुआ था , उस हाथ की कुहनी माँ की दायीं चूची के निपल पर दब रही थी. मेरे ऊपर फिर से वासना हावी हो गयी और मैं सारी दुनियादारी भूलकर जैसे ही अपने होंठ माँ की नाइटी के गले से झांकती चूचियों पर लगाने को हुआ तभी माँ ने मुझे सीधा कर दिया और बोली,” चिनू अब सो जाते हैं.”

माँ उठी और सोने चली गयी. बेड पर लेटते ही वो खर्राटे लेने लगी.



Mai kisi kahani ko hindi mein likhte samay apne hisab se modify karke likhta hun , lekin is kahani ko bina badle likh raha hun kyunki panditji ke anusar ye sacchi ghatna hai. Ab aap log decide kar lena kya hai kya nahi. Chalo shuru karte hain.

Mein uttar bharat ke ek brahman pariwar se talluk rakhta hun. Meri do bahine aur ek bhai hai. Apne bhai bahino mein mai sabse bada hun. Hum charo bhai bahino ki shadi ho chuki hai. Mai apni patni aur 4 varsh ke bete ke sath apne mata pita ke sath hi rehta hun. Mere pitaji ka accha khasa business hai. Humne engineering products ki distributorship le rakhi hai aur hum dono baap bete milkar karobar chalate hain. Karobar se accha paisa aa jata hai. Jo hamare liye paryapt hai. Mera chota bhai apne pariwar ke sath videsh mein rehta hai.

Ye baat december 2009 ki hai, tab uttar bharat mein kadake ki thand pad rahi thi. Un dino jadon mein hamara karobar thoda sust chal raha tha. Isi dauran meri maa ne dakshin bharat mein tirupati aur rameshwaram jane ki iccha jahir ki. 15 january , ko tyohar ke din wo wahan mandir mein darshan karna chah rahi thi. Mere pitaji ki tabiyat theek nahi thi to unhone mujhse maa ke sath jane ko kaha. Mera jane ka man nahi tha to mai talmatol karne laga. Mai thoda parivarik aadmi hun aur parivar se dur yatra karne ka mera man nahi ho raha tha. Lekin maa ne jane ki jid pakad li to mujhe bhi majburan hami bharni padi. Fir ye nirnay liya gaya ki jab mausam thoda theek hoga tab hum dono maa bete jayenge. Meri talmatol dekhkar meri patni mujhe chidati rahi ki tum apne putra hone ka kartavya nahi nibha rahe ho aur tumhe apni maa ko unki icchanusar darshan ke liye le jana chahiye.

Jab mausam thoda theek hua to hamne apne sahar se delhi ke liye train ka safar kiya aur fir delhi airport se dakshin bharat mein madurai ke liye flight pakdi. Wahan se humne ek car book karayi jo puri yatra ke liye humne apne pass rakhi. Dakshin bharat mein mausam accha tha. Hum pehle rameshwaram gaye aur phir wahan se tirupati gaye. Tirupati mein maa ne mujhse sar ke baal safachat karwane ko kaha. Mene bhi is yatra ka anand liya tha to bina kisi lag lapet ke maa ki iccha anusar sar shave karwa liya.

Tirupati darshan ke baad hamari wapsi yatra suru hui. Jo car humne yatra ke suru mein madurai se book karwayi thi , usi se hum bangalore pahunch gaye. Takriban 4:30 pm par hum bangalore pahunche aur sidhe chancery pavilion jo ki mera favourite hotel hai , wahan aa gaye. Lambi dharmik yatra ab sampann ho chuki thi. Room mein aakar nahane ke baad thoda aaram kar liya.

Phir pine ke mood se mai hotel ki bar mein chala gaya. Maa abhi aaram kar rahi thi , thakan se use nind aa gayi thi. Mene room ki chabhi li aur chuchap chala aaya taki maa ki nind disturb na ho. Bar mein thoda pine ke baad mujhe apne biwi bacchon ki yaad aane lagi. Ghar ki yaad aane par mera mood off ho gaya. Phir mene maa ko phone kiya ki aapne dinner kar liya. Maa boli beta mai to tumhara intzar kar rahi hun. Mujhe sharam aayi ki mai yahan bar mein maze kar raha hun aur room mein maa mera intzar kar rahi hai. Mene kaha , mai aa raha hun aur fatafat room mein aa gaya. Jab mene chabhi se room khola to maa wahan nahi thi.

Phir bathroom se maa ke bhajan gane ki awaz aayi to mai samajh gaya maa nahane gayi hai. Mai sofe mein baith ke TV dekhne laga.

Kareeb 10 minute baad maa ne awaz lagayi,” chinu meri nightie pakda do.”(chinu mera ghar ka naam hai).

Mene bed se nightie uthayi aur bathroom ke darwaze par jakar maa ko awaz lagayi. Maa ne thoda sa darwaza khola aur nightie pakadne ke liye apna hath darwaze se bahar nikala. Mai nightie pakdane ke liye thoda aage ko aaya aur usi chan(pal) se meri duniya badal gayi.

Bathroom aise bana hua tha ki usme bayi taraf shower tha aur dayi taraf wash basin aur dresser tha. Jab maa ne darwaje ke piche chipkar sirf hath bahar nikala to samne mirror mein mujhe wo poori nangi dikhayi di.

Aage batane se pehle mai apni maa ke bare mein bata dun. Meri maa ki umar lagbhag 52 – 53 varsh hai aur wo koi husn ki pari ya aisi kuch nahi hai. Wo ek sadharan housewife hai. Umar ke hisab se hi uski kamar par charbi chadi hui hai. Yahan ki aurton ki apeksha uski height thodi jyada hai , 5’5 ki . badi chuchiyan , aur chaude nitamb jo is umar ki aurton ke hote hain. dekhne mein wo sadharan hi hai par uska rang ekdum saaf hai , bilkul gori chitti hai.

darwaze par khade hokar jab mene maa ko ekdum nagn dekha to mai dekhta hi rah gaya. Uski badi badi gori chuchiyan jo 50 ki umar paar karne ke baad bhi jyada jhuki hui nahi thi. Jawan ladkiyon ke jese upar ko bhi nahi thi par jyada dhali hui bhi nahi thi. Maa darwaze ke piche thoda side mein hokar khadi thi to mujhe chuchiyon ke beech mein gulabi aerola aur mote nipple bhi dikh rahe the. uski janghe badi badi aur mansal thi aur lambi gori tange mujhe dikhi. Side mein hone se uski nabhi ke niche ka V shape wala bhag mirror mein nahi dikh raha tha.

Mai hath mein nightie pakde mirror mein maa ko nagn dekh raha tha tabhi maa ki awaz se mujhe hosh aaya.

Maa thoda jhunjhlate hue boli,” kya kar rahe ho , nightie dete kyon nahi.”

Use pata hi nahi tha ki mene mirror mein use nangi dekh liya hai. Mene use nightie pakdayi aur phir TV dekhne laga.

Ab mere man mein milijuli bhawnaye aane lagi. ek taraf to jo mene dekha usse mai uttezit ho gaya tha aur dusri taraf apni maa ke bare mein aisa sochne se mujhe guilty feeling bhi aa rahi thi. Mujhe apne upar bahut sharam aayi lekin maa ki wo nagn chavi jo mene mirror mein dekhi wo mere man se hat hi nahi rahi thi. Mere dimag ka ek hissa keh raha tha ki apni maa ko nagn dekhkar uttezit hona galat baat hai , to dusra hissa wahi nagn chavi dikhakar mujhe phir se uttezit kar de raha tha.

Maa ko lekar mere man mein pahle kabhi koi galat baat nahi rahi isliye ab jo mere dimag mein chal raha tha wo mere liye asahniya ho gaya. Maa ke bare mein kuch sex kahaniyan mene padi thi par mai sochta tha ki ye pervert logon ki fantasies hain aur kuch nahi. Koi apni maa ke sath kese sambandh bana sakta hai ?

Lekin ab mujhe kya hua tha. Kyun mere man mein apni maa ke nagn roop ko dekhkar uttezna aayi ?

TV ke aage baithkar mai yahi sab soch raha tha , tabhi maa apni sleevless white cotton nightie pahankar bathroom se bahar aayi. Nightie se sirf uski bahen dikh rahi thi baki pura badan dhaka hua tha. Apne gile balon mein jo uski aadhi peeth tak pahunch rahe the , wo mujhe sundar lag rahi thi.

Uski taraf dekhte hue mujhe phir wahi nagn chavi dikhayi dene lagi. lakh koshish karne par bhi ab maa ko dekhne par wahi nagn chavi meri aankho ke aage aa ja rahi thi.

Maa ne nahakar bra nahi pahni thi isliye jab wo chalti to uski badi chuchiyan idhar udhar hil rahi thi. Pahle ki baat hoti to mai kabhi is taraf dhyan nahi deta par ab sab kuch badal chuka tha. Mai ab maa ko dhyan se dekh raha tha. Maa shishe ke aage khadi hokar baal banane lagi aur uske hath hilane se hilti hui chuchiyon ko mai dekhne laga.

Tabhi maa ne kaha ki dinner order kar do to mein hosh mein aaya. Maa ne kaha ki use halka khana khane ka man hai , to mene sirf salad aur soup order kar diye. Phir hum TV mein news dekhte hue dinner karne lage.

Mera dimag abhi bhi kahin khoya hua tha aur mein TV ki taraf khali dekh raha tha , usme kya aa raha tha kya nahi mujhe kuch pata nahi. Tabhi maa ki awaz mere kano mein padi. Usne kuch kaha par dhyan kahin aur hone se mujhe saaf sunayi nahi diya. Mujhe aisa laga jese maa ki awaz kahin dur se aa rahi hai.

Ab maa thodi irritate ho gayi aur narajgi se boli,” tumhe itna nahi pina chahiye ki samnewala kya keh raha hai ye bhi tumhe sunayi na de.”

Uski jhidki se mai ekdum se chaunk gaya. Use kya pata tha ki mene jyada piya nahi hai balki kuch dekha hai , jisse mera man vichlit ho gaya tha.

Mai bola,” I am sorry amma. Pine se nahi balki safar ki wajah se mai thak gaya hun. Isliye aapki baat nahi suni.”

Phir mene maa ki taraf dekha aur sidhi meri nazar uski clevage par padi , jo uski nightie ke gale se bra na hone se dikh rahi thi. Jyada nahi dikh raha tha par jab wo soup pine ko aage ko jhukti to chuchiyon ka upari hissa dikh ja raha tha. Apne ko maa ki chuchiyon ko takte pakar mujhe apne ko thappad marne ka man hua lekin kitni bhi koshish kar lu par mai maa ke badan ko takne se apne ko nahi rok pa raha tha. Ek hi din mein na jane mujhe kya ho gaya tha. Aaj 33 varsh ki umar mein pehli baar maa ko aise dekh raha tha jo pehle hamesha mere liye pujniya maa rahi thi.

Tabhi maa ne mera dhyan TV mein aa rahi news ki taraf dilaya ki uttar bharat mein kadake ki sardi pad rahi hai aur jyadatar airports kohre ki wajah se agle kuch din ke liye band hain. TV mein Delhi airport mein pareshan passengers ko dikhaya ja raha tha jinki flights cancel ho gayi thi.

Ab mujhe mauka mil gaya. Mene maa par khijh utarte hue kaha,” dekho amma, mene pehle hi kaha tha ki is baar mausam bahut kharab hai , yatra par nahi jaate hain par aapne meri ek nahi suni . ab dekh lo TV mein. Log airport mein pade hue pareshan hain. Flights cancel ho gayi hain.”

Maa shant swar mein boli,” chinu , jab tumhara accident hua tha to mene prarthna ki thi ki agar tum jinda bach gaye to mai tirupati aur rameshwaram ke darshan karne jaungi. Tum kya sochte ho ki tum agar mere sath nahi aate to main yahan nahi aati ? mai tab bhi aati aur akeli hi aati .”

Maa ki baat sunkar mujhe bura laga aur mene unse apni khijh utarne ke liye maafi mangi.

Kuch samay pahle ki baat hai mai bathroom mein gir pada tha aur kisi cheese se sar takrane se wahi behosh ho gaya. Mere sar se khoon behta raha. Aur jab mujhe hospital le jaya gaya to kaafi der ho gayi thi aur bahut sara khoon beh gaya tha. Kareeb 15 din lage the mujhe theek hone mein. Maa usi accident ki baat kar rahi thi.

Mere mafi mangne par maa uthi aur mere pass baith gayi. Pyar se muskurate hue usne mera sar pakadkar apni chati se laga diya. Kuch der ke liye mai duniya ko bhool gaya aur ek bacche ki tarah usse lipatkar sisakne laga. Mujhe rote dekhkar maa ne mujhe aur kaskar apne se chipta liya aur kuch kehkar mujhe chup karane ki koshish karne lagi. usne kya bola mai apne sisakne ki wajah se nahi sun paya.

Maa soch rahi thi ki mai isliye guilty feel kar raha hun ki mene uski yatra ke liye mana kiya tha , jabki maa ye yatra mere liye hi kar rahi thi.Lekin mere rone ka karan kuch aur hi tha. Mujhe bahut guilty feeling aa rahi thi ki maa mere accident ki wajah se ye yatra kar rahi hai, aur mai us pujniya maa ko nagn dekhne ke baad uttezit ho raha tha , uske badan ko taak raha tha.

Lagbhag 10 minute baad mein shant hua aur mujhe hosh aaya to mene paya ki mera sar maaki chati par tika hua hai. Hosh mein aate hi phir wahi khyal aane lage. Uski nightie thodi niche ko ho gayi thi to meri aankhon ko nightie ke gale se maa ki chuchiyan upar se dikhne lagi. mera daya gaal to chuchi par hi daba hua tha. Mene dono hathon se maa ko alingan kiya hua tha. Aur jis hath se maa ke daye kandhe ko pakda hua tha , us hath ki kuhni maa ki dayi chuchi ke nipple par dab rahi thi. Mere upar phir se wasna havi ho gayi aur mein sari duniyadari bhoolkar jaise hi apne hoth maa ki nightie ke gale se jhantkti chuchiyon par lagane ko hua tabhi maa ne mujhe sidha kar diya aur boli,” chinu ab so jate hain.”

Maa uthi aur sone chali gayi. Bed par let te hi wo kharrate lene lagi.

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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by jay » 13 Oct 2017 15:55



माँ के सो जाने के बाद मैं सोफे पर बैठे हुए आज दिन में जो घटित हुआ उसके बारे में सोचने लगा. एक ही दिन में मैं ‘अच्छा चिनू’ से ‘बुरा चिनू’ बन चुका था. मैं वही पर बैठे हुए, बाथरूम में पानी से भीगी हुई पूरी नंगी माँ की छवि को याद करते हुए, मूठ मारने लगा. फिर जब मुझे लगा कि अब मेरा निकलने वाला है तो मैं बाथरूम की तरफ चल दिया.

जब मैं सोफे से उठा तो मैंने एक नज़र अम्मा के ऊपर डाली. अम्मा दायीं तरफ करवट लेकर सोई हुई थी. उसका बायां घुटना मुड़ा हुआ था जिससे नाइटी खिसककर जांघों के ऊपरी भाग तक आ गयी थी. शायद रूम हीटिंग की वजह से नींद में उसको गर्मी महसूस हुई होगी और माँ ने रज़ाई से पैर बाहर निकाल दिए थे. माँ की पूरी टाँगे नीचे से लेकर , जहाँ से नितंबों का उभार शुरू होता है, वहाँ तक पूरी नंगी थी.

मैं बाथरूम जाना छोड़कर वहीं पर खड़ा माँ की नग्नता को देखने लगा. फिर मेरा हाथ मेरे लंड पर चला गया और बेशरम बनकर मैंने वहीं बेड के पास खड़े होकर मूठ मारना शुरू कर दिया. फिर जब मेरे लंड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ी तो आनंद से मेरी आँखे बंद हो गयी थी. रोकने की कोशिश करने के बावजूद एक हल्की सी आह मेरे मुँह से निकल गयी. फिर मुझे आशंका हुई की कहीं मेरा वीर्य माँ के जांघों के ऊपर तो नही पड़ गया है ? इस ख़याल से मुझे एक अजीब सी उत्तेजना आई , लेकिन थोड़ी घबराहट भी हुई.

एक बार मैंने सोचा की लाइट ऑन करके देखूं , फिर मैंने बेडरूम की लाइट ऑन करने के बजाय बाथरूम का दरवाज़ा खोल दिया. बाथरूम से लाइट की रोशनी में देखा वीर्य की कुछ बूंदे माँ की जांघों के अंदरूनी हिस्से पर पड़ी थी. मैंने सोचा अगर पोंछ दूँ और माँ उठ गयी तो परेशानी में पड़ जाऊंगा. या फिर ऐसे ही रहने दूँ , ये अपनेआप थोड़ी देर में सूख जाएगा और सुबह माँ उठकर नहा लेगी तो धुल जाएगा. इन दोनो में से मुझे एक चुनना था , या तो पोंछ दूँ या फिर ऐसे ही रहने दूँ.

लेकिन माँ की जांघों पर हाथ फेरने की मेरी इच्छा ने मुझे रिस्क लेने पर मजबूर कर दिया. मैंने एक छोटा सा टावल लिया और फर्श पर झुक गया. धीरे से मैंने टावल से वीर्य को पोंछ दिया. झुकने पर मुझे परफ्यूम की सी महक आई. मेरे ख़याल से माँ ने पसीने की गंध को दूर करने के लिए परफ्यूम यूज़ किया होगा. वो खुशबू माँ की जांघों के ऊपरी हिस्से पर नाक लगाने से आ रही थी. मैं कुछ देर तक बैठे हुए उस खुशबू को सूंघता रहा.

अब मुझे माँ के साथ संभोग करने की तीव्र इच्छा होने लगी. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुझे इसमे गंदा या ग़लत कुछ भी महसूस नही हो रहा था. वो मेरे लिए अब भी पूजनीय माँ थी.

वहीं फर्श पर बैठे हुए ही मुझे नींद आ गयी. पता नही कैसे जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा की माँ अब सीधी लेटी हुई सो रही थी. उसकी टाँगे अभी भी पूरी ऊपर तक खुली हुई थी. रज़ाई उसने पूरी एक तरफ को फेंक दी थी. मैं खड़ा हुआ और कुछ देर तक माँ को देखता रहा फिर बेड में सोने के लिए लेट गया.

लेकिन नींद नही आ रही थी. मैं सोचने लगा जब हम घर पहुँच जाएँगे तो घर पर परिवार के सभी लोग होंगे और मुझे माँ के साथ अकेले रहने का मौका नही मिलेगा. और माँ को ऐसे सोए देखना तो दुर्लभ ही हो जाएगा.

मैं सोचने लगा कुछ दिन और घर से दूर कैसे रहा जाए. एक ख़याल मन में आया की खराब मौसम का सहारा लेकर वापसी यात्रा को थोड़ा लंबे रास्ते से ले जाऊं जिससे कुछ और रात मुझे माँ के साथ होटेल में काटने को मिले. यही सब सोचते हुए मैं सो गया.

सुबह जब नींद खुली तो माँ साड़ी पहन रही थी. लाल रंग के बॉर्डर वाली सफेद सिल्क की साड़ी में माँ अच्छी लग रही थी. मेरी नज़र उसके ब्लाउज पर पड़ी. ब्लाउज के अंदर उसकी बड़ी चूचियों का शेप दिख रहा था. जब तक वो साड़ी पहनते रही मैं ध्यान से उसे देखता रहा. फिर मैं उठ गया और जाने को तैयार होने लगा.

होटेल वालों ने कार से हमें एयरपोर्ट पहुँचा दिया. वहाँ पता चला की हमारी जेट एयरवेज की फ्लाइट कैंसिल हो गयी है. हमने जेट के स्टाफ से किसी और फ्लाइट में सीट देने के लिए पूछा तो उन्होने मना कर दिया. मैंने पिताजी को फोन किया तो उन्होने कहा की टिकट का रिफंड ले लो और जब मौसम खुल जाए तो फ्लाइट ले लेना. मैंने बाकी एयरलाइन्स के काउंटर पर भी पूछताछ की , इस सब में 5 pm हो गया और हम बुरी तरह से थक चुके थे. इंडियन एयरलाइन के काउंटर पर एक अधेड़ उमर की लेडी ने मुझे 3 दिन बाद का टिकट लेने को कहा. इससे पहले जो फ्लाइट्स जाएँगी उनमे पैसेंजर्स की भीड़ देखते हुए टिकट मिलना मुश्किल होगा. या फिर रोज़ रोज़ एयरपोर्ट आकर पता करो. मैंने उस लेडी की बात मान ली और उसने हमें 3 दिन बाद के टिकट दिए वो भी वेटलिस्टिंग में , लेकिन उसने कहा की सीट्स मिल जाएँगी तब तक.

मैंने माँ को ये बात बताई तो उसका चेहरा लटक गया. मैंने उसे दिलासा दी,” अम्मा हम कोई जंगल में बिना खाना और पानी के भटक थोड़ी गये हैं. बंगलोर इतना बड़ा शहर है . हम आराम से कुछ दिन यहाँ गुजार सकते हैं.”

माँ चेयर से उठी और कहने लगी सुबह से वेट करते करते मेरी कमर दर्द हो गयी है. पूरा दिन एयरपोर्ट में बैठे हुए वो थक गयी थी और मैं तो एक काउंटर से दूसरे काउंटर दौड़ने में ही था.

माँ ने कहा होटेल में अब रूम खाली है की नही , पता तो करो. मैंने होटेल फोन किया की हम वापस आ रहे हैं तो उन्होने कहा की हमारी एक कार एयरपोर्ट पर किसी गेस्ट को छोड़ने गयी हुई है , उसके ड्राइवर से हम आपको होटेल वापस लाने को कह देते हैं .

जब हम अपने रूम में पहुँचे तो 8 pm हो चुका था. सुबह से रात तक हम दोनो एयरपोर्ट में चक्कर लगाकर थक चुके थे.
नहाने के बाद मैंने अम्मा से कहा , मैं अभी थोड़ी देर में आता हूँ.

अम्मा मुस्कुरायी और बोली, ठीक है , लेकिन ज़्यादा मत पीना हाँ.

मैंने कहा , हाँ अम्मा नही पियूँगा और रूम से बाहर आ गया.

बार में आने के बाद मैं ड्रिंक करने लगा. अब मुझे अम्मा के साथ 3 दिन होटेल में बिताने थे. ड्रिंक करते हुए मैं सोचने लगा मैं अम्मा के साथ संभोग करने की अपनी इच्छा कैसे पूरी करुं. लेकिन कोई तरीका नही सूझ रहा था. थोड़ी देर बाद मैं वापस रूम में आ गया.

माँ बेड में लेटकर टीवी देख रही थी. उसने एक स्लीवलेस नाइटी पहनी हुई थी जो उसके घुटनो तक उठी हुई थी. मैं माँ के सामने सोफे पर बैठ गया. फिर मैंने डिनर का ऑर्डर दे दिया. माँ टीवी देख रही थी और मैं चुपचाप माँ की सुंदरता को निहार रहा था.

जैसे ही डोर बेल बजी तो मैं दरवाजा खोलने को उठा. अचानक माँ बेड से उठी और बाथरूम में चली गयी. जब वेटर डिनर देकर चला गया तो मैंने माँ को आवाज़ दी. जब माँ बाथरूम से बाहर आई तो मुझे एहसास हुआ की माँ वेटर के सामने रूम में क्यूँ नही रही.

Maa ke so jane ke baad mai sofe par baithe hue aaj din mein jo ghatit hua uske bare mein sochne laga. Ek hi din mein mai ‘accha chinu’ se ‘bura chinu’ ban chuka tha. Mai wahi par baithe hue, bathroom mein pani se bhigi hui puri nangi maa ki chavi ko yaad karte hue, muth marne laga. Phir jab mujhe laga ki ab mera nikalne wala hai to mai bathroom ki taraf chal diya.

Jab mai sofe se utha to mene ek nazar amma ke upar dali. Amma dayi taraf karwat lekar soyi hui thi. Uska baya ghutna muda hua tha jisse nightie khiskkar janghon ke upari bhag tak aa gayi thi. Sayad room heating ki wajah se nind mein usko garmi mehsoos hui hogi aur maa ne rajai se pair bahar nikal diye the. maa ki puri tange niche se lekar , jahan se nitambon ka ubhar suru hota hai, wahan tak poori nangi thi.

Mai bathroom jana chodkar wahin par khada maa ki nagnta ko dekhne laga. Phir mera hath mere lund par chala gaya aur besharam bankar mene wahin bed ke pass khade hokar muth marna suru kar diya. Phir jab mere lund ne viry ki pitchkari chodi to anand se meri aankhe band ho gayi thi. Rokne ki koshish karne ke bawjood ek halki si aah mere munh se nikal gayi. Phir mujhe ashanka hui ki kahin mera viry maa ke janghon ke upar to nahi pad gaya hai ? is khayal se mujhe ek ajeeb si uttezna aayi , lekin thodi ghabrahat bhi hui.

Ek baar mene socha ki light on karke dekhu , phir mene bedroom ki light on karne ke bajay bathroom ka darwaza khol diya. Bathroom se light ki roshni mein dekha viry ki kuch bunde maa ki janghon ke andruni hisse par padi thi. Mene socha agar poch du aur maa uth gayi to pareshani mein pad jaunga. Ya phir aise hi rehne du , ye apneaap thodi der mein sookh jayega aur subah maa uthkar naha legi to dhul jayega. in dono mein se mujhe ek chunna tha , ya to poch du ya phir aise hi rehne du.

Lekin maa ki janghon par hath ferne ki meri iccha ne mujhe risk lene par majboor kar diya. Mene ek chota sa towel liya aur farsh par jhuk gaya. Dhire se mene towel se viry ko poch diya. Jhukne par mujhe perfume ki si mahak aayi. Mere khayal se maa ne pasine ki gandh ko dur karne ke liye perfume use kiya hoga. Wo khusboo maa ki janghon ke upari hisse par naak lagane se aa rahi thi. Mai kuch der tak baithe hue use khusboo ko sunghta raha.

Ab mujhe maa ke sath sambhog karne ki tivra iccha hone lagi. lekin ascharyajanak roop se mujhe isme ganda ya galat kuch bhi mehsoos nahi ho raha tha. Wo mere liye ab bhi pujniy maa thi.

wahin farsh par baithe hue hi mujhe nind aa gayi. pata nahi kaise jab meri nind khuli to mene dekha ki maa ab sidhi leti hui so rahi thi. Uski tange abhi bhi puri upar tak khuli hui thi. Rajai usne puri ek taraf ko phenk di thi. Mai khada hua aur kuch der tak maa ko dekhta raha phir bed mein sone ke liye let gaya.

Lekin nind nahi aa rahi thi. Mai sochne laga jab hum ghar pahunch jayenge to ghar par pariwar ke sabhi log honge aur mujhe maa ke sath akele rehne ka mauka nahi milega. Aur maa ko aise soye dekhna to durlabh hi ho jayega.

Mai sochne laga kuch din aur ghar se dur kaise raha jaye. Ek khayal man mein aaya ki kharab mausam ka sahara lekar wapsi yatra ko thoda lambe raste se le jaun jisse kuch aur raat mujhe maa ke sath hotel mein katne ko mile. Yahi sab sochte hue mai so gaya.

Subah jab nind khuli to maa saree pahan rahi thi. Laal rang ke border wali safed silk ki saree mein maa acchi lag rahi thi. Meri nazar uske blouse par padi. Blouse ke andar uski badi chuchiyon ka shape dikh raha tha. Jab tak wo saree pahante rahi mai dhyan se use dekhta raha. Phir mai uth gaya aur jane ko tayyar hone laga.

Hotel walon ne car se humein airport pahuncha diya. Wahan pata chala ki hamari jet airways ki flight cancel ho gayi hai. Humne jet ke staff se kisi aur flight mein seat dene ke liye pucha to unhone mana kar diya. Mene pitaji ko phone kiya to unhone kaha ki ticket ka refund le lo aur jab mausam khul jaye to flight le lena. Mene baki airlines ke counter par bhi puchtach ki , is sab mein 5pm ho gaya aur hum buri tarah se thak chuke the. indian airline ke counter par ek adhed umar ki lady ne mujhe 3 din baad ka ticket lene ko kaha. Isse pehle jo flights jayengi unme passengers ki bheed dekhte hue ticket milna mushkil hoga. Ya phir roz rozairport aakar pata karo. Mene us lady ki baat maan li aur usne hamein 3 din baad ke ticket diye wo bhi waitlisting mein , lekin usne kaha ki seats mil jayengi tab tak.

Mene maa ko ye baat batayi to uska chehra latak gaya. Mene use dilasa di,” amma hum koi jungle mein bina khana aur pani ke bhatak thodi gaye hain. Bangalore itna bada sahar hai . hum aaram se kuch din yahan gujar sakte hain.”

Maa chair se uthi aur kehne lagi subah se wait karte karte meri kamar dard ho gayi hai. Pura din airport mein bethe hue wo thak gayi thi aur mai to ek counter se dusre counter daudne mein hi tha.

Maa ne kaha hotel mein ab room khali hai ki nahi , pata to karo. Mene hotel phone kiya ki hum wapas aa rahe hain to unhone kaha ki hamari ek car airport par kisi guest ko chodne gayi hui hai , uske driver se hum aapko hotel wapas lane ko keh dete hain .

Jab hum apne room mein pahunche to 8pm ho chuka tha. Subah se raat tak hum dono airport mein chakkar lagakar thak chuke the.
nahane ke baad mene amma se kaha , mai abhi thodi der mein aata hun.

Amma muskurayi aur boli, theek hai , lekin jyada mat pina haan.

Mene kaha , haan amma nahi piyunga aur room se bahar aa gaya.

Bar mein aane ke baad mai drink karne laga. Ab mujhe amma ke sath 3 din hotel mein bitane the. drink karte hue mai sochne laga mai amma ke sath sambhog karne ki apni iccha kaise puri karu. Lekin koi tarika nahi soojh raha tha. Thodi der baad mai wapas room mein aa gaya.

Maa bed mein letkar TV dekh rahi thi. Usne ek sleeveless nightie pehni hui thi jo uske ghutno tak uthi hui thi. Mai maa ke samne sofe par baith gaya. Phir mene dinner ka order de diya. Maa TV dekh rahi thi aur mai chucpchap maa ki sundarta ko nihar raha tha.

Jaise hi door belll baji to mai darwaja kholne ko utha. Achanak maa bed se uthi aur bathroom mein chali gayi. Jab waiter dinner dekar chala gaya to mene maa ko awaz di. Jab maa bathroom se bahar aayi to mujhe ehsaas hua ki maa waiter ke samne room mein kyun nahi rahi.
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jay
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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by jay » 17 Oct 2017 08:47

जैसे ही डोर बेल बजी तो मैं दरवाजा खोलने को उठा. अचानक माँ बेड से उठी और बाथरूम में चली गयी. जब वेटर डिनर देकर चला गया तो मैंने माँ को आवाज़ दी. जब माँ बाथरूम से बाहर आई तो मुझे एहसास हुआ की माँ वेटर के सामने रूम में क्यूँ नही रही.


उसने जो नाइटी पहनी थी वो उसके घुटनो से कुछ ही इंच नीचे तक थी और बड़े गोल गले वाली स्लीवलेस थी. उसने ब्रा पहनी हुई थी और उस बड़े गोल गले से क्लीवेज दिख रही थी. नये जमाने की औरतों के लिए तो ये कुछ भी नही था पर अम्मा शायद दूसरे आदमियों के सामने इस नाइटी में असहज महसूस कर रही थी. तभी वो वेटर के अंदर आने से पहले बाथरूम चली गयी.

अम्मा ने बाथरूम से आकर मुझे अपनी नाइटी को देखते हुए पाया तो वो बोली,” बाकी सब गंदी हो गयी हैं , यही बची है. कल लांड्री के लिए कपड़े देने होंगे.”

मैंने कहा,” कोई बात नही अम्मा. ठीक तो है.”

डिनर करने के बाद मैंने बाथरूम जाकर बेड में लेटने के लिए बरमूडा पहन लिया. बाथरूम से आकर मैंने देखा माँ ने ब्रा उतार दी है और धोने के कपड़ो के ढेर में उसे रख रही है. मैं जब उसके पास खड़ा हुआ तो उसके बड़े गले के अंदर झाँकने पर चूचियां साफ दिख रही थी. वास्तव में अम्मा के लिए वो नाइटी सही नही थी.

तभी अम्मा बोली,” चिनू तुम्हारे पास कोई पेनकिलर है तो दो, एयरपोर्ट में दिन भर कुर्सी में बैठने से मेरी कमर दर्द कर रही है.”

मैंने दिक्लोफ़ेनाक और त्रिका पानी के साथ अम्मा को दी. फिर मैंने पूछा,” अम्मा चाय पियोगी ?”

उसने मना कर दिया तो मैंने अपने लिए चाय ली और बेड में बैठकर पीने लगा और फिर हम सो गये.

लगभग 10 मिनिट बाद वो बोली,” चिनू बेटा, कमर दर्द से मुझे नींद नही आ रही है. मेरी कमर और पैरो में मालिश कर दोगे ?”

मैंने कहा,” ठीक है अम्मा.”

फिर मैंने बेड लैंप को स्विच ऑन कर दिया और माँ के पैरों के पास आ गया. माँ बायीं करवट लेकर मेरी बेड की तरफ लेटी हुई थी. उसकी छोटी नाइटी घुटनो तक खिसक गयी थी और बड़े गले से चूचियों का ऊपरी भाग बाहर निकला हुआ था. बेड लैंप की रोशनी अम्मा के ऊपर पड़ रही थी और फिर से मुझे अम्मा के साथ संभोग की इच्छा होने लगी.

जब मैं उसके पैरों के पास बैठा तो वो पीठ के बल सीधी होकर लेट गयी. मैंने उसका पैर अपनी गोद में रख लिया और उसकी मालिश करने लगा.

थोड़ी देर ऐसे ही पैरों की मालिश के बाद अम्मा को आराम महसूस हुआ. वो बोली, “चिनू बेटा, भगवान तुमको मेरी बाकी बची उमर दे दे. तुम्हारे जैसा सेवा करने वाला बेटा मिला है , मैं और तुम्हारे पिताजी भाग्यशाली हैं.”

कोई और समय होता तो माँ का आशीर्वाद सुनकर मैं भावुक हो जाता. पर इस समय वासना मुझ पर हावी थी. मैं कुछ नही बोला. चुपचाप पैरों की मालिश करता रहा.

कुछ देर बाद मैंने अम्मा से घुटने मोड़ने को कहा. अम्मा ने जब घुटने मोड़े तो अब उसके पैर उल्टा V की शेप में थे. जिससे नाइटी घुटनो से नीचे को जांघों की तरफ खिसक गयी थी. ये नज़ारा देखकर मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. मैं उसकी टाँगों के पिछले भाग की मालिश करने लगा.

अम्मा अभी भी हल्की आवाज़ में आशीर्वाद देती जा रही थी. हालाँकि उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी की शब्द सुनाई नही दे रहे थे. शायद मेडिसिन और मालिश के असर से वो मुँह ही मुँह में बुदबुदा रही थी. फिर मैं थोड़ा सा खिसका और घुटने से नीचे को उसकी दायीं जाँघ की मालिश करने लगा. जब मेरा हाथ उसकी नाइटी तक पहुँचा तो मैं रुक गया. मैं नाइटी को ऊपर करके और ऊपर तक जाँघ की मालिश करना चाह रहा था पर इतनी हिम्मत मुझमे नही थी की उसकी नाइटी ऊपर कर दूं. तो मैं घुटने से आधी जाँघ तक मालिश करने लगा. कुछ देर तक मैं ऐसे ही पंजो से घुटने तक और घुटने से आधी जाँघ तक मालिश करते रहा.

फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी मुझे उम्मीद नही थी. अम्मा ने कहा,” भगवान सबको तुम्हारे जैसा बेटा दे.” और अपना बायां पैर सीधा कर दिया. अब उसका बायां पैर सीधा था और दायां पैर घुटने से मुड़ा हुआ खड़ा था. इससे मुझे उसकी जांघों के जोड़ तक दिखने लगा. अब मेरी धड़कने बहुत बढ़ गयी.

मैंने जांघों के बिल्कुल ऊपरी हिस्से तक मालिश करना शुरू कर दिया. जिससे नाइटी और ऊपर खिसक गयी. मैं मालिश करते हुए अम्मा की मांसल जांघों पर ऊपर तक हाथ फिराने लगा. फिर ऐसे ही मैंने बायीं जाँघ की भी मालिश की.

लगभग 15 मिनिट बाद अम्मा बोली,” चिनू अब मेरी कमर की मालिश कर दो.”

और वो घूमकर पेट के बल लेट गयी.

अब जो नज़ारा मेरे सामने था उसे देखकर मैं दंग रह गया. जब अम्मा उल्टा लेटी तो उसकी नाइटी उसके और ऊपर खिसक गयी. उसके पैर पूरे नंगे थे और जहाँ से नितंब शुरू होते हैं , उससे थोड़ा ऊपर तक सब खुला था. अब मैं अम्मा के ऊपर से आँखे हटा ही नही पा रहा था. उसकी गोरी जांघें और नितंबों का निचला हिस्सा मेरी आँखों के सामने था. नितंबों के बीच की दरार के निचले हिस्से से अम्मा की चूत का कुछ भाग भी दिख रहा था. थोड़ी देर तक मैं ऐसे ही देखता रहा.

फिर मुझे होश आया. मैंने सोचा खाली देखने से क्या होगा. मुझे कुछ करना होगा. लेकिन किस्मत कितनी देर तक मेरा साथ देगी. 33 वर्ष की उमर में अम्मा के साथ एक ग़लत हरकत और जिंदगी भर के लिए मैं श्रापित हो जाता. मेरी जिंदगी दांव पर लगी थी. लेकिन मैं उस मोड़ पर पहुच चुका था जहाँ पर मेरी इच्छाओं ने मुझे वश में कर लिया और मैंने अपने को दांव पर लगा दिया.

बिना ज़्यादा सोचते हुए मैं अम्मा की जांघों के दोनो तरफ पैर रखकर उसकी कमर और पीठ को उंगलियों से दबाने लगा. अंगूठे और उंगलियों से कमर को दबाकर मालिश करने से उसकी नाइटी थोड़ा थोड़ा करके और ऊपर होने लगी और कुछ देर बाद अम्मा के बड़े बड़े गोरे नितंब आधे नंगे हो गये.

मैं उसकी पीठ और कमर को उंगलियों और अंगूठे से दबाकर मालिश करता रहा पर मैंने उसके खुले हुए नितंबों को नही छुआ. अब मेरा लंड पूरा मस्त होकर तन चुका था और बरमूडा के कोने से सुपाड़ा बाहर झाँक रहा था. मैं अम्मा के नितंबों की तरफ थोड़ा ऊपर खिसकर पीठ की मालिश करने लगा.

मैं अपनी तरफ से पूरी सावधानी बरत रहा था और अच्छी मालिश कर रहा था ताकि अम्मा को आराम महसूस हो. क्या पता आगे क्या होने वाला था ?

धीरे धीरे मैंने अम्मा की नाइटी कमर तक खिसका दी. अब अम्मा के विशाल नितंब पूरे नंगे थे. फिर मैंने हिम्मत करके नाइटी के अंदर हाथ डालकर उसकी कमर और पीठ के निचले हिस्से पर हाथ फिराते हुए मालिश शुरू कर दी. मैं आगे झुक के मालिश कर रहा था और मेरा लंड अम्मा के नंगे नितंबों पर फिसल रहा था. अब मैं बहुत उत्तेजित हो गया था. संभोग की मेरी इच्छा तीव्र हो चुकी थी. अब मेरा धैर्य जवाब देने लगा था. मैंने हाथ कमर से नीचे उसके नितंबों पर भी फेरने शुरू कर दिए.

फिर मैं रीड की हड्डी पर मालिश करते हुए अम्मा के कंधों की मालिश करने लगा. अम्मा की बड़ी चूचियां उसके शरीर से दबी हुई थी और साइड्स से कुछ हिस्सा दोनो तरफ निकला हुआ था. साइड्स पर हाथ फिराते हुए मैंने उन पर भी हाथ फेर दिया. अम्मा ने हल्के से ऊऊऊओ…ह की आवाज़ निकाली. मैं घबरा गया और जल्दी से हाथ हटाकर उसके कंधों की मालिश करने लगा. तभी मेरा लंड फिसलकर अम्मा के नितंबों के बीच दरार में चला गया. लंड से प्री-कम निकल रहा था और वो अम्मा के विशाल नितंबों के बीच घुस गया. मुझे बहुत उत्तेजना हो रही थी और मेरे लंड के अम्मा के नितंबों के बीच घुसने से बहुत आनंद महसूस हो रहा था.

दवाई और मालिश का असर उस पर हुआ था लेकिन मेरे ख़याल से अब अम्मा को भी पता चल चुका था. लेकिन शायद वो शॉक और ऐम्बर्रेसमेंट से कुछ बोल नही पाई. अपने नितंबों के बीच अपने बेटे का लंड महसूस करके वो अवाक रह गयी होगी.

लेकिन मैं अब सारी सीमाएँ लाँघ चुका था. मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था. मैं अपने लंड को अम्मा के नितंबों के अंदर रगड़ने लगा. मुझे लगा अब मेरा वीर्य निकल जाएगा.

वासना पूरी तरह मुझ पर हावी हो चुकी थी. मेरा पूरा ध्यान सिर्फ़ अम्मा के साथ संभोग पर था. मैंने अपना बरमूडा नीचे खिसका दिया और अम्मा की नाइटी उसकी गर्दन तक ऊपर खींच दी. अब अम्मा पीछे से पूरी नंगी थी. मैं अम्मा के ऊपर लेट गया.

मैं अम्मा की गर्दन को चूमने लगा , उसकी बाँहों को चूमा और साइड्स से उसकी चूचियों को मलने लगा. मैंने अपने लंड को पकड़ा और नितंबों के बीच और अंदर घुसाने की कोशिश की. मुझे एक छेद में अपना लंड घुसता महसूस हुआ. मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया. लेकिन फिर मुझे महसूस हुआ वो अम्मा की चूत का छेद नही बल्कि उसकी गांड का छेद था. लेकिन मैं कोई परवाह ना करते हुए अंदर घुसाने को ज़ोर लगाने लगा.

तभी अम्मा का बदन काँपा और वो आश्चर्य भरे स्वर में चिल्लाई,” आइईई…माँ, चिनुउऊउउ…ये क्या .“
अम्मा पलटने की कोशिश करने लगी. मैं अपने हाथों पर उठ गया और उसे मेरे नीचे सीधा हो जाने दिया. जैसे ही वो सीधी हुई , मैं फिर से उसके ऊपर लेट गया. अम्मा ने मुझे देखा , उसकी आँखो में अविश्वास और शॉक के भाव थे.

मेरे हाथ अम्मा की चूचियों पर थे और मेरा लंड उसकी चूत के ऊपर था. मैं अम्मा की चूचियां दबाने लगा और मुझे लगा की मेरा वीर्य निकलने वाला है तो मैं उसकी चूचियों को पकड़े हुए , अपने नितंब उठाकर अम्मा के ऊपर धक्के मारने लगा. लंड चूत के अंदर नही गया था, मैं खाली ड्राइ हमपिंग कर रहा था, कुछ ही धक्कों में मेरे लंड से इतने दिनों का जमा किया हुआ वीर्य निकलकर अम्मा की नाभि के पास पेट में गिरने लगा.

अम्मा ने मेरा वीर्य अपने पेट पर गिरते महसूस किया. उसने अपनी आँखे बंद करके , एक गहरी सांस ली और बोली,” ये क्या किया तुमने.”

मुझे इतना तेज ओर्गास्म आया की कुछ पल के लिए मुझे होश ही नही रहा. मैं अम्मा की चूचियों के बीच मुँह घुसाए लेटा रहा. जब मुझे होश आया तो मैं ऐम्बर्रेसेड और घबराया हुआ था. मुझे समझ नही आया अब कैसे रियेक्ट करूँ.

मेरी दुनिया अब बदल चुकी थी. अम्मा के साथ मेरा संबंध अब बदल चुका था. क्या अम्मा के साथ पवित्र रिश्ता नष्ट हो जाएगा या फिर ये और भी मजबूत रिश्ते की शुरुआत थी ?

धीरे धीरे मुझे अपनी स्थिति का आभास हुआ. मैं अम्मा के ऊपर लेटा हुआ था और अम्मा के पेट में गिरा हुआ वीर्य गोंद की तरह से हमारे बदन को आपस में चिपकाए हुए था. मेरे लंड उसके पेट के निचले हिस्से में दबा हुआ था. अम्मा की छोटी छोटी झाँटे मुझे लंड के आख़िरी सिरे पर चुभ रही थी. अब फिर से मेरा लंड खड़ा होने लगा. मेरे दिमाग़ से उलझने निकल गयी और अम्मा के साथ संभोग करने की इच्छा ज़ोर मारने लगी.

मैंने सर उठाकर देखा , अम्मा की नाइटी उसके गले तक ऊपर थी. उसने अपना मुँह बायीं तरफ को मोड़ा हुआ था और उसकी आँखे बंद थी. बायां हाथ उसने अपनी चूचियों के ऊपर रखा था और दायां हाथ उसके कंधे से पीछे था और उसकी अंगुलियां मेरी अंगुलियों से मिली हुई थी. मुझे ध्यान ही नही था की मैंने अम्मा का दायां हाथ ऐसे पकड़ रखा है. मैंने उसका हाथ छोड़ दिया और उसके बायीं तरफ बेड पर खिसक गया और सर उठाकर अम्मा को देखने लगा.

बेड लैंप की धीमी रोशनी में मैंने देखा अम्मा उठने की कोशिश कर रही थी. वो अपनी कोहनियों के सहारे थोड़ा उठी और सीधे मेरी आँखों में झाँका.

उसकी बड़ी बड़ी आँखें मुझे किसी सागर के जैसे लगी. मैं उन्हे चूमने को बढ़ा. उसने अपना चेहरा घुमा लिया. मैंने उसका चेहरा पकड़ा और थोड़ा ज़ोर लगाकर अपनी तरफ घुमाया. फिर मैंने अपनी आँखे बंद करके अम्मा की आँखे चूम ली.

तभी अम्मा बोली,” चिनू अब रहने दो, जो हुआ उसे भूल जाओ.”

फिर वो बेड से उतरने को हुई. मैंने अपने दाएं हाथ को उसकी छाती पर लपेटा और उसे उठने नही दिया. फिर मैंने उसकी कोहनिया सीधी कर दी और उसे फिर से लिटा दिया. अम्मा ने विरोध किया पर मैंने ज़ोर लगा के उसे लिटा दिया.

फिर मैं अम्मा के होठों को चूमने लगा. मैंने उसके होठों को अपनी जीभ से खोलने की कोशिश की लेकिन उसने अपने होंठ नही खोले. फिर मैं बारी बारी से उसके ऊपरी और निचले होंठ को चूमने लगा. मैंने अपना बायां हाथ अम्मा की गर्दन के नीचे डाला हुआ था और दाएं हाथ से मैं उसकी चूचियां दबाने लगा. इससे उसकी सिसकारी निकल गयी.

अम्मा ने बहुत ज़ोर लगाकर मुझे ऊपर हटाया और बोली,”ऊफ़ चिनू, कुछ शरम करो बेटा, मैं तुम्हारी माँ हूँ. यहीं रुक जाओ और आगे मत बढ़ो.”

फिर बोली,” शिवांगी (मेरी पत्नी) और बच्चे के बारे में सोचो बेटा. मैं क्या मुँह लेकर जाऊँगी उनके सामने. मान जाओ चिनू.”

Jaise hi door belll baji to mai darwaja kholne ko utha. Achanak maa bed se uthi aur bathroom mein chali gayi. Jab waiter dinner dekar chala gaya to mene maa ko awaz di. Jab maa bathroom se bahar aayi to mujhe ehsaas hua ki maa waiter ke samne room mein kyun nahi rahi.


Usne jo nightie pehni thi wo uske ghutno se kuch hi inch neeche tak thi aur bade gol gale wali sleevless thi. Usne bra pehni hui thi aur us bade gol gale se cleavage dikh rahi thi. Naye jamane ki aurton ke liye to ye kuch bhi nahi tha par amma sayad dusre admiyon ke samne is nightie mein asahaj mehsoos kar rahi thi. Tabhi wo waiter ke andar aane se pehle bathroom chali gayi.

Amma ne bathroom se aakar mujhe apni nightie ko dekhte hue paya to wo boli,” baki sab gandi ho gayi hain , yehi bachi hai. Kal laundry ke liye kapde dene honge.”

Mene kaha,” koi baat nahi amma. Theek to hai.”

Dinner karne ke baad mene bathroom jakar bed mein letne ke liye bermuda pahan liya. Bathroom se aakar mene dekha maa ne bra utar di hai aur dhone ke kapdo ke dher mein use rakh rahi hai. Mai jab uske pass khada hua to uske bade gale ke andar jhakne par chuchiyan saaf dikh rahi thi. Vastav mein amma ke liye wo nightie sahi nahi thi.

Tabhi amma boli,” chinu tumhare pass koi painkiller hai to do, airport mein din bhar kursi mein baithne se meri kamar dard kar rahi hai.”

Mene diclofenac aur trika pani ke sath amma ko di. Phir mene pucha,” amma chai piyogi ?”

Usne mana kar diya to mene apne liye chai li aur bed mein baithkar pine laga aur phir hum so gaye.

Lagbhag 10 minute baad wo boli,” chinu beta, kamar dard se mujhe nind nahi aa rahi hai. Meri kamar aur pairo mein malish kar doge ?”

Mene kaha,” theek hai amma.”

Phir mene bed lamp ko switch on kar diya aur maa ke pairon ke pass aa gaya. Maa bayi karwat lekar meri bed ki taraf leti hui thi. Uski choti nightie ghutno tak khisak gayi thi aur bade gale se chuchiyon ka upari bhag bahar nikla hua tha. Bed lamp ki roshni amma ke upar pad rahi thi aur phir se mujhe amma ke sath sambhog ki iccha hone lagi.

Jab mai uske pairon ke pass baitha to wo peeth ke bal sidhi hokar let gayi. Mene uska pair apni god mein rakh liya aur uski malish karne laga.

Thodi der aise hi pairon ki malish ke baad amma ko aaram mehsoos hua. Wo boli,” chinu beta, bhagwan tumko meri baki bachi umar de de. Tumhare jaisa sewa karne wala beta mila hai , mai aur tumhare pitaji bhagyashali hain.”

Koi aur samay hota to maa ka ashirwad sunkar mai bhawuk ho jata. Par is samay wasna mujh par hawi thi. Mai kuch nahi bola. Chupchap pairon ki maalish karta raha.

Kuch der baad mene amma se ghutne modne ko kaha. Amma ne jab ghutne mode to ab uske pair ulta V ki shape mein the. jisse nightie ghutno se niche ko janghon ki taraf khisak gayi thi. ye nazara dekhkar mera dil jor jor se dhadakne laga. Mai uski tangon ke pichle bhag ki maalish karne laga.

Amma abhi bhi halki awaz mein ashirwad deti ja rahi thi. Halanki uski awaz itni dhimi thi ki sabd sunayi nahi de rahe the. sayad medicine aur maalish ke asar se wo munh hi munh mein budbuda rahi thi. Phir mein thoda sa khiska aur ghutne se niche ko uski dayi jangh ki malish karne laga. Jab mera haath uski nightie tak pahuncha to mai ruk gaya. Mai nightie ko upar karke aur upar tak jangh ki malish karna chah raha tha par itni himmat mujhme nahi thi ki uski nightie upar kar dun. To mein ghutne se aadhi jangh tak malish karne laga. Kuch der tak mai aise hi panjo se ghutne tak aur ghutne se aadhi jangh tak malish karte raha.

Phir kuch aisa hua jiski mujhe ummed nahi thi. Amma ne kaha,” bhagwan sabko tumhare jaisa beta de.” Aur apna baya pair seedha kar diya. Ab uska baya pair sidha tha aur daya pair ghutne se muda hua khada tha. Isse mujhe uski janghon ke jod tak dikhne laga. Ab meri dhadkane bahut bad gayi.

Mene janghon ke bilkul upari hisse tak malish karna suru kar diya. Jisse nightie aur upar khisak gayi. mai maalish karte hue amma ki mansal jhanghon par upar tak hath firane laga. Phir aise hi mene bayi jangh ki bhi malish ki.

Lagbhag 15 minute baad amma boli,” chinu ab meri kamar ki malish kar do.”
Aur wo ghumkar pet ke bal let gayi.

Ab jo nazara mere samne tha use dekhkar mai dang reh gaya. Jab amma ulta leti to uski nightie uske aur upar khisak gayi. uske pair pure nange the aur jahan se nitamb suru hote hain , usse thoda upar tak sab khula tha. Ab mein amma ke upar se aankhe hata hi nahi pa raha tha. Uski gori janghe aur nitambon ka nichla hissa meri ankhon ke samne tha. Nitambon ke beech ki darar ke nichle hisse se amma ki choot ka kuch bhag bhi dikh raha tha. Thodi der tak mai aise hi dekhta raha.

Phir mujhe hosh aaya. Mene socha khali dekhne se kya hoga. Mujhe kuch karna hoga. Lekin kismat kitni der tak mera sath degi. 33 varsh ki umar mein amma ke sath ek galat harkat aur jindagi bhar ke liye mai shrapit ho jata. Meri jindagi daav par lagi thi. Lekin mai us mod par pahuch chuka tha jahan par meri icchaon ne mujhe vash mein kar liya aur mene apne ko daav par laga diya.

Bina jyada sochte hue mai amma ki janghon ke dono taraf pair rakhkar uski kamar aur peeth ko ungliyon se dabane laga. Anguthe aur ungliyon se kamar ko dabakar malish karne se uski nightie thoda thoda karke aur upar hone lagi aur kuch der baad amma ke bade bade gore nitamb aadhe nange ho gaye.

Mai uski peeth aur kamar ko ungliyon aur anguthe se dabakar malish karta raha par mene uske khule hue nitambon ko nahi chua. Ab mera lund pura mast hokar tan chuka tha aur bermuda ke kone se supada bahar jhank raha tha. Mai amma ke nitambon ki taraf thoda upar khiskar peeth ki malish karne laga.

Mai apn taraf se puri savdhani barat raha tha aur acchi malish kar raha tha taki amma ko aaram mehsoos ho. Kya pata aage kya hone wala tha ?

Dhire dhire mene amma ki nightie kamar tak khiska di. Ab amma ke vishal nitamb pure nange the. phir mene himmat karke nightie ke andar hath dalkar uski kamar aur peeth ke nichle hisse par hath firate hue malish suru kar di. Mai aage jhuk ke malish kar raha tha aur mera lund amma ke nange nitambon par fisal raha tha. Ab mai bahut uttezit ho gaya tha. Sambhog ki meri iccha tivra ho chuki thi. Ab mera dhairya jawab dene laga tha. Mene hath kamar se niche uske nitambon par bhi ferne suru kar diye.

Phir mein reed ki haddi par malish karte hue amma ke kandhon ki malish karne laga. Amma ki badi chuchiyan uske sharir se dabi hui thi aur sides se kuch hissa dono taraf nikla hua tha. Sides par hath firate hue mene un par bhi hath fer diya. Amma ne halke se ooooooo…h ki awaz nikali. Mai ghabra gaya aur jaldi se hath hatakar uske kandhon ki malish karne laga. Tabhi mera lund fisalkar amma ke nitambon ke beech darar mein chala gaya. Lund se precum nikal raha tha aur wo amma ke vishal nitambon ke beech ghus gaya. Mujhe bahut uttezna ho rahi thi aur mere lund ke amma ke nitambon ke beech ghusne se bahut anand mehsoos ho raha tha.

Dawai aur maalish ka asar us par hua tha lekin mere khayal se ab amma ko bhi pata chal chuka tha. lekin sayad wo shock aur embarrassemennt se kuch bol nahi payi. Apne nitambon ke beech apne bete ka lund mehsoos karke wo awak reh gayi hogi.

Lekin mai ab sari seemayen langh chuka tha. Mujhe bahut hi accha mehsoos ho raha tha. Mai apne lund ko amma ke nitambon ke andar ragadne laga. Mujhe laga ab mera virya nikal jayega.

Wasna puri tarah mujh par havi ho chuki thi. Mera pura dhyan sirf amma ke sath sambhog par tha. Mene apna bermuda niche khiska diya aur amma ki nightie uski gardan tak upar khinch di. Ab amma piche se puri nangi thi. Mai amma ke upar let gaya.

Mai amma ki gardan ko chumne laga , uski banhon ko chuma aur sides se uski chuchiyon ko malne laga. Mene apne lund ko pakda aur nitambon ke beech aur andar ghusane ki koshish ki. Mujhe ek ched mein apna lund ghusta mehsoos hua. Mene thoda aur jor lagaya. Lekin phir mujhe mehsoos hua wo amma ki choot ka ched nahi balki uski gand ka ched tha. Lekin mai koi parwah na karte hue andar ghusane ko jor lagane laga.

Tabhi amma ka badan kanpa aur wo ascharya bhare swar mein chillayi,” aiyeeee…..maaa, chinuuuuu…ye kya .“

Amma palatne ki koshish karne lagi. mai apne hathon par uth gaya aur use mere niche sidha ho jane diya. Jaise hi wo sidhi hui , mai phir se uske upar let gaya. Amma ne mujhe dekha , uski aankho mein awiswas aur shock ke bhav the.
Mere hath amma ki chuchiyon par the aur mera lund uski choot ke upar tha. Mai amma ki chuchiyan dabane laga aur mujhe laga ki mera viry nikalne wala hai to mai uski chuchiyon ko pakde hue , apne nitamb uthakar amma ke upar dhakke marne laga. Lund choot ke andar nahi gaya tha, mai khali dry humping kar raha tha, Kuch hi dhakkon mein mere lund se itne dino ka jama kiya hua viry nikalkar amma ki nabhi ke pass pet mein girne laga.

Amma ne mera virya apne pet par girte mehsoos kiya. Usne apni aankhe band karke , ek gehri sans li aur boli,” ye kya kiya tumne.”

Mujhe itna tej orgasm aaya ki kuch pal ke liye mujhe hosh hi nahi raha. Mai amma ki chuchiyon ke beech munh ghusaye leta raha. Jab mujhe hosh aaya to mai embarrased aur ghabraya hua tha. Mujhe samajh nahi aaya ab kese react karu.
Meri duniya ab badal chuki thi. Amma ke sath mera sambandh ab badal chuka tha. Kya amma ke sath pavitra rista nasht ho jayega ya phir ye aur bhi majboot riste ki suruwat thi ?

Dhire dhire mujhe apni sthiti ka abhas hua. Mai amma ke upar leta hua tha aur amma ke pet mein gira hua viry gond ki tarah se hamare badan ko aapas mein chipkaye hue tha. Mere lund uske pet ke nichle hisse mein daba hua tha. Amma ki choti choti jhante mujhe lund ke aakhiri sire par chubh rahi thi. Ab phir se mera lund khada hone laga. Mere dimag se uljhane nikal gayi aur amma ke sath sambhog karne ki iccha jor marne lagi.

Mene sar uthakar dekha , amma ki nightie uske gale tak upar thi. Usne apna munh bayi taraf ko moda hua tha aur uski aankhe band thi. Baya hath usne apni chuchiyon ke upar rakha tha aur daya hath uske kandhe se piche tha aur uski anguliyan meri anguliyon se mili hui thi. Mujhe dhyan hi nahi tha ki mene amma ka daya hath aise pakad rakha hai. Mene uska hath chod diya aur uske bayi taraf bed par khisak gaya aur sar uthakar amma ko dekhne laga.

Bed lamp ki dhimi roshni mein mene dekha amma uthne ki koshish kar rahi thi. Wo apni kohniyon ke sahare thoda uthi aur sidhe meri aankhon mein jhanka.

Uski badi badi aankhen mujhe kisi sagar ke jaise lagi. mai unhe chomne ko bada. Usne apna chehra ghuma liya. Mene uska chehra pakda aur thoda jor lagakar apni taraf ghumaya. Phir mene apni aankhe band karke amma ki aankhe choom li.

Tabhi amma boli,” chinu ab rehne do, jo hua use bhool jao.”

Phir wo bed se utarne ko hui. Mene apne daye hath ko uski chati par lapeta aur use uthne nahi diya. Phir mene uski kohniya sidhi kar di aur use phir se lita diya. Amma ne virodh kiya par mene jor laga ke use lita diya.

Phir mai ama ke hothon ko choomne laga. Mene uske hothon ko apni jeebh se kholne ki koshish ki lekin usne apne hoth nahi khole. Phir mai baari baari se uske upari aur nichle hoth ko chumne laga. Mene apna baya hath amma ki gardan ke niche dala hua tha aur daye hath se mai uski chuchiyan dabane laga. Isse uski siskari nikal gayi.

Amma ne bahut jor lagakar mujhe upar hataya aur boli,”oof chinu, kuch sharam karo beta, main tumhari maa hun. Yahin ruk jao aur aage mat badho.”

Phir boli,” shivangi(meri patni) aur bachche ke bare mein socho beta. Main kya munh lekar jaungi unke samne. Maan jao chinu.”
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jay
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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by jay » 18 Oct 2017 13:50

अम्मा के उठने बैठने और लेटने से उसकी बड़ी चूचियां खूब हिल डुल रही थी , उनको देखकर मैं मस्त हो जा रहा था. अम्मा ने मेरे कंधे पकड़े हुए थे अपने से दूर हटाने के लिए. मैंने ज़ोर लगाकर अपने कंधों से अम्मा के हाथ हटाए और झुककर निपल मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा. दूसरे निपल को मैंने अपने अंगूठे और उंगली के बीच दबा लिया और उसे घुमाने लगा. मेरी छेड़छाड़ से अम्मा के दोनो निपल तनकर टाइट हो गये. अम्मा अपना सर दायीं बायीं तरफ हिलाने लगी और उसके मुँह से हल्की सिसकारी भी निकल जा रही थी. उसने फिर से मुझे कंधे पकड़कर अपने ऊपर से हटाना चाहा, लेकिन मैं उसकी चूचियों और निपल से छेड़छाड़ करते रहा. कुछ समय बाद अम्मा ने मुझे धक्का देना बंद कर दिया और आँखे बंद किए हुए ,”मत करो चिनू……हे भगवान…उफफफफ्फ़…” ऐसे बोलने लगी.

शायद अब उसका शरीर उसके दिमाग़ से अलग दिशा में रियेक्ट कर रहा था. अब उसका विरोध हाथों से नही हो रहा था , वो सिर्फ़ आँखे बंद किए हुए ‘मत करो’ बड़बड़ा रही थी. क्या उसके अंदर की औरत की कामइच्छा जाग गयी थी या सामाजिक मान्यताओ, बंधनो के विपरीत जाकर अपने सगे बेटे द्वारा माँ के नंगे बदन को स्पर्श किए जाने से वो रोमांचित महसूस कर रही थी ?

मैंने अपने पैर के पंजे से अम्मा की टाँगे फैला दी और उसके ऊपर लेट गया. मेरे लंड ने अम्मा की चूत को छुआ. अम्मा के मुँह से ज़ोर से आवाज़ निकली,” अरे …….”.

मैं थोड़ा ऊपर खिसक गया अब मेरा लंड अम्मा की नाभि पर आ गया. मैंने अपनी हथेलियों में अम्मा का चेहरा पकड़ा और उसे अपने मुँह की तरफ घुमाया. अम्मा ने आँखे खोल दी और सीधे मेरी आँखो में झाँका.

“अम्मा, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ. आज मुझे मत रोकिए. मैं औरत नही माँ और देवी के रूप में आपको पाना चाहता हूँ.”

“चिनू अब इससे आगे मत बढ़ो, सब बर्बाद हो जाएगा. तुम इतने छोटे नही हो की इसका परिणाम ना समझ सको. माँ से संभोग नही किया जाता. तुम्हारी यौन इच्छा ने तुमको पागल कर दिया है. बेटा अपने ऊपर काबू रखो. ये पाप मत करो.”

“कुछ नही बदलेगा अम्मा. ये तो मानव प्रेम की पराकाष्ठा है. जिस संभोग में सृष्टि की रचना निहित है वो पाप कैसे हो सकता है ? मेरा आपके साथ संभोग वासना नही पूजा है.”

“चुप रहो चिनू. ये प्रेम नही वासना है. माँ और बेटे के प्रेम में ऐसे संबंध नही होते. तुम मेरे शरीर से अपनी काम इच्छा शांत करना चाहते हो और उसके लिए ये तार्क़ दे रहे हो. तुम कैसे भूल सकते हो की मैं तुम्हारी माँ हूँ. जिस योनि को तुम भोगना और अपमानित करना चाहते हो वही तुम्हारे जन्म की कारक है.”

“अम्मा, माँ और बेटे का प्यार ही निस्वार्थ होता है. संभोग तो प्रेमियों के प्रेम की पराकाष्ठा है. फिर माँ बेटे के बीच यदि ये हो तो बुरा क्यूँ है ? बेटा तो माँ के शरीर से ही बना है फिर वही शरीर बेटे के लिए अप्राप्य क्यूँ है ? आपकी योनि का भोग और अपमान तो मैं सोच भी नही सकता. सिर्फ़ योनि ही क्यों मैं तो आप से संपूर्ण प्रेम की याचना कर रहा हूँ. ऐसी पूर्णता जो एक माँ ही बेटे को दे सकती है. ऐसा निस्वार्थ काम पति-पत्नी , प्रेमी-प्रेमिका या किसी और संबंध में संभव नही. स्त्री और पुरुष के बीच केवल माँ और बेटे का संबंध ही पूर्ण है बाकी हर तरफ तो वासना और स्वार्थ ही है .”

अम्मा ने कुछ जवाब देने के लिए होंठ खोले , लेकिन मैंने उसको मौका नही दिया. मैंने उसके होठों से अपने होंठ चिपका दिए और अपनी जीभ उसके मुँह में घुसा दी. अम्मा ने अपना मुँह दूसरी तरफ घुमाना चाहा पर मेरे हाथों की पकड़ ने उसे चेहरा घुमाने नही दिया. थोड़ी देर बाद वो शांत पड़ गयी. मैंने उसके गाल चूमे फिर गर्दन चूमी और फिर से होठों को चूमने लगा. अब वो पहले के जैसे अपने होंठ टाइट बंद नही कर रही थी, मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ पर अब वो होंठ खुले रख रही थी. मेरे चूमने का वो कोई जवाब नही दे रही थी पर विरोध भी नही कर रही थी.

अम्मा मेरी बाँहो में थी उसके बदन पर सिर्फ़ एक कपड़ा था जो मैंने उसकी गर्दन तक ऊपर खींच दिया था. एक तरह से वो पूरी नंगी ही थी. अम्मा ने अब समर्पण कर दिया था , उसको थोड़ी उत्तेजित और कोई विरोध ना करते देखकर मैंने उसे किसी प्रेमी की तरह अपनी बाँहों में पकड़ा और उसके बदन को हर जगह चूम लिया. अम्मा चुपचाप आँखे बंद किए लेटी थी और मेरे चूमने से किसी किसी समय उसकी सिसकारी निकल जा रही थी.

फिर मैंने उसकी नाइटी गर्दन से ऊपर खींचने की कोशिश की उसने थोड़ा विरोध किया पर मैं नही माना और नाइटी निकालकर बेड पर रख दी. अब अम्मा पूरी तरह से नंगी थी. फिर मैंने अपनी टीशर्ट भी निकाल दी और नंगा हो गया.

मेरे टीशर्ट उतारते समय अम्मा चाहती तो उठकर बेड से उतर कर जा सकती थी. लेकिन वो शांत लेटी रही ना ही उसने अपने अंगो को छुपाने या ढकने की कोशिश की. इससे मेरी हिम्मत बढ़ गयी , मुझे लगा की अब अम्मा भी मेरा साथ दे रही है. और मेरे अंदर जो थोड़ा बहुत अपराधबोध था वो खत्म हो गया.

फिर मैं अम्मा की चूचियों को हाथों से सहलाने लगा और उनके ऐरोला पर जीभ घुमाने लगा. दोनो चूचियों के बीच की घाटी को भी मैंने चूमा और अपने दोनो गालों पर अम्मा की चूचियों का मुलायम स्पर्श महसूस किया.

फिर मैं नीचे की तरफ बढ़ा और नाभि के पास पेट को चूमा. नाभि को चूमते ही अम्मा के बदन में कंपकंपी हुई. मैं थोड़ा और नीचे बढ़ा और अम्मा के शेव किए झाँटों के छोटे छोटे बाल मुझे चेहरे पर चुभे. अम्मा ने तुरंत अपनी जांघें चिपका ली. फिर भी चूत की दरार के उपरी हिस्से पर मैंने जीभ लगाई . फिर मैंने अम्मा की जाँघो को ढीला पड़ते महसूस किया. एक हाथ से अम्मा की एक चूची को दबाए हुए दूसरे हाथ की बड़ी वाली उंगली मैंने अम्मा की चूत में डाल दी.

अम्मा का बदन काँपा और वो चीखी,” चिनूनूनू………..तुम पागल हो गये हो क्या ?”

उसकी चूत पूरी गीली थी, जिससे पता चलता था की वो भी उत्तेजित हो रखी थी. मैंने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया और उंगली को चूत के अंदर बाहर करने लगा. एक अंगुली से उसकी क्लिट को भी रगड़ने लगा. वो थोड़ा रिलैक्स हुई तो मैंने उसकी जांघें थोड़ा फैला दी और अपनी जीभ से उसकी क्लिट को छेड़ने लगा. मैंने अपने होठों में अम्मा की चूत के बड़े होठों को लिया और उन्हे चूमा और दांतो से थोड़ा खींचा. फिर मैं उसकी चूत के अंदर जीभ डालकर अम्मा का कामरस पीने लगा.

अम्मा के मुँह से हल्की सी चीख निकली ,” ऊऊ…उूउउफफफफ्फ़……..चिनू, ये क्या हो गया तुम्हें. क्या कर दिया तुमने.”

मैंने उसकी क्लिट को होठों में पकड़कर खींचा और उसकी चूत के फूले हुए होठों को भी होठों से पकड़कर बाहर को खींचा.

“ऊऊओ….ऊऊओफफ्फ़…हे भगवान…मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा , क्या करूँ मैं.” अम्मा सिसकी.

फिर अम्मा ने अपना हाथ मेरे सर पे रखा और उसे सहलाने लगी . फिर धीरे से मेरे गाल छुए. मैं सोच रहा था अम्मा अब मुझे धक्का देकर अपनी चूत से मेरा मुँह हटा देगी. लेकिन उसने मुझे नही हटाया. शायद मेरा वैसा करना उसे भी अच्छा लग रहा था. इससे मेरे मन को शांति मिली.

मैं बीच की दो अंगुली डालकर तेज़ी से अम्मा की चूत में अंदर बाहर करने लगा. और साथ ही साथ उसकी क्लिट को अपनी जीभ से छेड़ता रहा. अब अम्मा की साँसे भारी हो चली थी. मैंने महसूस किया की अम्मा थोड़ा थोड़ा अपने नितंबों को ऊपर को कर रही थी. अगर मेरी पत्नी होती तो उत्तेजना में अपने नितंबों को ऊपर उछालकर मेरे मुँह पर रगड़ देती लेकिन अम्मा शरम से ऐसा नही कर पा रही थी. लेकिन फिर भी हल्का नेचुरल मूवमेंट मैंने महसूस किया.

अम्मा की चूत से बहुत कामरस निकल रहा था. और उसकी गंध से मैं पागल हुआ जा रहा था. अचानक अम्मा ने अपने घुटने उल्टा V शेप में मोड़ लिए और अपने पैरों के पंजों के बल पर अपनी गांड को मेरे मुँह और अंगुलियों पर (जो उसकी चूत के अंदर थी) तीन चार बार उछाला . उसने अपनी चूत को मेरे मुँह पर दबाया . उसको बहुत तेज ओर्गास्म आ गया था. फिर वो झड़ गयी .

“आआआ……ऊऊहह……चिनू , कहीं का नही छोड़ा तूने मुझे.”

झड़ने के बाद अम्मा की चूत से रस बहने लगा और मैंने सब रस चाट लिया. फिर अचानक से उसने अपनी टाँगे मेरी पीठ में लपेट दी और मुझे टाँगों से जकड़ लिया.

उसके मुँह से एक चीख निकली,” हे ….ईए…..… हे ईश्वर …..ये क्या हो गया …”

मुझे उसकी आवाज़ घुटी घुटी लगी . मैंने उसकी चूत से अपना सर ऊपर उठाकर उसके चेहरे की ओर देखा. उसने तकिये को अपने चेहरे पर दबा रखा था. उसका बदन काँपने लगा. और फिर से चूत रस बहाते हुए वो एक बार और झड़ गयी.

फिर वो कोहनियों के बल उठकर बेड में बैठ गयी. मेरा चेहरा उसकी जांघों के बीच दबा हुआ था. लेकिन उसके बैठने से मैं अम्मा की चूत तक नही पहुँच पा रहा था. फिर अम्मा ने कुछ ऐसा किया जिस पर मुझे विश्वास ही नही हुआ.

अम्मा कोहनी के बल पीछे को झुकी , उसने अपनी जांघें फैलाई और अपने नितंबों को थोड़ा उठाकर मेरे मुँह के पास अपनी चूत लगा दी. अपने दूसरे हाथ से उसने मेरा सर अपनी चूत पर दबा दिया. मैंने दोनो हाथों से अम्मा के नितंबों को पकड़ा और चूत से बहते रस को चाट लिया. फिर मैंने अम्मा के चूतरस से भीगी हुई अंगुली को उसकी गांड के छेद में डाल दिया. अम्मा ने थोड़ा अपने को उठाया और अपनी चूत को मेरे मुँह पर धकेला.

मैंने गांड के छेद के अंदर उंगली अंदर बाहर करनी शुरू की.

अम्मा चिल्लाई,”आइईई………ईई…, कुछ बाकी नही रखोगे क्या ?”

फिर उसने थोड़ा और रस बहाया , वो थोड़ा कांपी और फिर शांत पड़ गयी. उसका ओर्गास्म खत्म हो चुका था. वो फिर से बेड पर पीछे को धड़ाम से लेट गयी.

“चिनू मेरे बच्चे, क्यूँ किया तुमने ये ? एक पल ने सारा कुछ बदल दिया .” फिर वो हल्के हल्के सुबकने लगी.

मेरा हाथ अभी भी उसके नितंबों के नीचे दबा था. फिर मैंने अपनी उंगली गांड से बाहर निकल ली. अम्मा की गीली हो गयी जांघों के अंदरूनी हिस्से को मैं चूमने और चाटने लगा.

मैं उसके पैरों के बीच से उठा और नीचे जाकर उसके पैर के अंगूठे को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा. फिर मैं उसके पैरों को चूमते हुए ऊपर को बढ़ा. जब मैं अम्मा के घुटनो के पास पहुँचा तो उसने थोड़ा सा अपनी टाँगे फैला दी. और मैं उसकी जांघों पर हाथ फिराने लगा.

फिर मैं और ऊपर को बढ़ा. और अपना मुँह अम्मा की चूत पर रख दिया. अम्मा फिर थोड़ा हिली और उसने अपनी जांघें थोड़ी फैलाई. मैंने फिर से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.

अम्मा की साँसे फिर से भारी होने लगी. उसके होठों से सिसकारियाँ निकलने लगी. वो फिर से अपने नितंबों को हल्के से ऊपर को करने लगी.

“मेरी जान मत लो बेटा. चिनू अब बस भी करो.”

Amma ke uthne baithne aur letne se uski badi chuchiyan khoob hil dul rahi thi , unko dekhkar mai mast ho ja raha tha. Amma ne mere kandhe pakde hue the apne se dur hatane ke liye. Mene jor lagakar apne kandhon se amma ke hath hataye aur jhukkar nipple munh mein bhar liya aur use choosne laga. Dusre nipple ko mene apne anguthe aur ungli ke beech daba liya aur use ghumane laga. Meri chedchad se amma ke dono nipple tankar tight ho gaye. Amma apna sar dayi bayi taraf hilane lagi aur uske munh se halki siskari bhi nikal ja rahi thi. Usne phir se mujhe kandhe pakadkar apne upar se hatana chaha, lekin mai uski chuchiyon aur nipple se chehchad karte raha. Kuch samay baad amma ne mujhe dhakka dena band kar diya aur aankhe band kiye hue ,”mat karo chinu…….hai bhagwan….ufffff….” aise bolne lagi.

Sayad ab uska sharir uske dimag se alag disha mein react kar raha tha. Ab uska virodh hathon se nahi ho raha tha , wo sirf aankhe band kiye hue ‘mat karo’ badbada rahi thi. Kya uske andar ki aurat ki kamecha jag gayi thi ya samajik manyatao, bandhano ke viprit jakar apne sage bete dwara maa ke nange badan ko sparsh kiye jane se wo romanchit mehsoos kar rahi thi ?

Mene apne pair ke panje se amma ki tange faila di aur uske upar late gaya. Mere lund ne amma ki choot ko chua. Amma ke munh se jor se awaz nikli,”areee….”.

Mai thoda upar khisak gaya ab mera lund amma ki nabhi par aa gaya. Mene apni hatheliyon mein amma ka chehra pakda aur use apne munh ki taraf ghumaya. Amma ne aankhe khol di aur sidhe meri aankho mein jhanka.

“amma, mai aapse bahut pyar karta hun. Aaj mujhe mat rokiye. Mai aurat nahi maa aur devi ke roop mein apko pana chahta hun.”

“chinu ab isse aage mat badho, sab barbad ho jayega. tum itne chote nahi ho ki iska parinam na samajh sako. Maa se sambhog nahi kiya jata. Tumhari yaun iccha ne tumko pagal kar diyahai. Beta apne upar kaboo rakho. Ye paap mat karo.”

“kuch nahi badlega amma. Ye to manav prem ki parakastha hai. Jis sambhog mein srishti ki rachna nihit hai wo paap kaise ho sakta hai ? mera aapke sath sambhog vasna nahi puja hai.”

“chup raho chinu. Ye prem nahi wasna hai. Maa aur bete ke prem mein aise sambandh nahi hote. Tum mere shareer se apni kaam iccha shant karna chahte ho aur uske liye ye tarq de rahe ho. Tum kaise bhool sakte ho ki mai tumhari maa hun. Jis yoni ko tum bhogna aur apmanit karna chahte ho wahi tumhare janm ki karak hai.”

“amma, maa aur bete ka pyar hi niswarth hota hai. Sambhog to premiyon ke prem ki parakastha hai. Phir maa bete ke beech yadi ye ho to bura kyun hai ? beta to maa ke sharir se hi bana hai phir wahi sharir bete ke liye aprapya kyun hai ? aapki yoni ka bhog aur apmaan to mai soch bhi nahi sakta. sirf yoni hi kyon mai to aap se sampurna prem ki yachna kar raha hun. Aise purnta jo ek maa hi bete ko de sakti hai. Aisa niswarth kaam pati-patni , premi-premika ya kisi aur sambandh mein sambhav nahi. Stri aur purush ke beech kewal maa aur bete ka sambandh hi purna hai baki har taraf to wasna aur swarth hi hai .”

Amma ne kuch jawab dene ke liye hoth khole , lekin mene usko mauka nahi diya. Mene uske hothon se apne hoth chipka diye aur apni jeebh uske munh mein ghusa di. Amma ne apna munh dusri taraf ghumana chaha par mere hathon ki pakad ne use chehra ghumane nahi diya. Thodi der baad wo shant pad gayi. mene uske gaal chume phir gardan chumi aur phir se hothon ko chomne laga. Ab wo pehle ke jaise apne hoth tight band nahi kar rahi thi, mujhe thoda ascharya hua par ab wo hoth khule rakh rahi thi. Mere chumne ka wo koi jawab nahi de rahi thi par virodh bhi nahi kar rahi thi.

Amma meri banho mein thi uske badan par sirf ek kapda tha jo mene uski gardan tak upar khinch diya tha. Ek tarah se wo puri nangi hi thi. Amma ne ab samarpan kar diya tha , usko thodi uttezit aur koi virodh na karte dekhkar mene use kisi premi ki tarah apni banhon mein pakda aur uske badan ko har jagah choom liya. Amma chupchap aankhe band kiye leti thi aur mere chumne se kisi kisi samay uski siskari nikal ja rahi thi.

Phir mene uski nightie gardan se upar khichne ki koshish ki usne thoda virodh kiya par mai nahi mana aur nightie nikalkar bed par rakh di. Ab amma puri tarah se nangi thi. Phir mene apni t shirt bhi nikaal di aur nanga ho gaya.

Mere t shirt utarte samay amma chahti to uthkar bed se utar kar ja sakti thi. Lekin wo shant leti rahi na hi usne apne ango ko chupane ya dhakne ki koshish ki. Isse meri himmat bad gayi , mujhe laga ki ab amma bi mera sath de rahi hai. Aur mere andar jo thoda bahut apradhbodh tha wo khatam ho gaya.

Phir mai amma ki chuchiyon ko hathon se sahlane laga aur unke aerola par jeebh ghumane laga. Dono chuchiyon ke beech ki ghati ko bhi mene chuma aur apne dono gaalon par amma ki chuchiyon ka mulayam spash mehsoos kiya.

Phir mai nicho ki taraf bada aur nabhi ke pass pet ko chuma. Nabhi ko chumte hi amma ke badan mein kanpkanpi hui. Mai thoda aur niche bada aur amma ke shave kiye jhanto ke chote chote baal mujhe chehre par chubhe. Amma ne turant apni janghe chipka li. Phir bhi choot ki darar ke upari hisse par mene jeebh lagayi . phir mene amma ki jangho ko dhila padte mehsoos kiya. Ek hath se amma ki ek chuchi ko dabaye hue dusre hath ki badi wali ungli mene amma ki choot mein daal di.

Amma ka badan kanpa aur wo chikhi,”chinooo…..tum pagal ho gaye ho kya ?”

Uski choot puri gili thi, jisse pata chalta tha ki wo bhi uttezit ho rakhi thi. Mene uski baat ka koi jawab nahi diya aur ungli ko choot kee andar bahar karne laga. Ek anguli se uski clit ko bhi ragadne laga. Wo thoda relax hui to mene uski janghe thoda faila di aur apni jebh se uski clit ko chedne laga. Mene apne hothon mein amma ki choot ke bade hothon ko liya aur unhe chooma aur danto se thoda khicha. Phir mai uski choot ke andar jeebh dalkar amma ka kaamras pine laga.

Amma ke munh se halki si cheekh nikli ,” oooo…uuuufffff……..chinu, ye kya ho gaya tumhe. Kya kar diya tumne.”

Mene uski clit ko hothon mein pakadkar khincha aur uski choot ke phoole hue hothon ko bhi hothon se pakadkar bahar ko khincha.

“ooooo….ooooofff….hey bhagwan….mujhshe bardast nahi ho raha , kya karu mai.” Amma siski.

Phir amma ne apna hath mere sar pe rakha aur use sahlane lagi . phir dhire se mere gaal chue. Mai soch raha tha amma ab mujhe dhakka dekar apni choot se mera munh hata degi. Lekin usne mujhe nahi hataya. Sayad mera waisa karna use bhi accha lag raha tha. Isse mere man ko shanti mili.

Mai beech ki do anguli dalkar teji se amma ki choot mein andar bahar karne laga. Aur sath hi sath uski clit ko apni jeebh se chedta raha. Ab amma ki sanse bhari ho chali thi. Mene mehsoos kiya ki amma thoda thoda apne nitambon ko upar ko kar rahi thi. Agar meri patni hoti to uttezna mein apne nitambon ko upar uchalkar mere munh par ragad deti lekin amma sharam se aisa nahi kar pa rahi thi. Lekin phir bhi halka natural movement mene mehsoos kiya.

Amma ki choot se bahut kaamras nikal raha tha. Aur uski gandh se mai pagal hua ja raha tha. Achanak amma ne apne ghutne ulta V shape mein mod liye aur apne pairon ke panjon ke bal par apni gand ko mere munh aur anguliyon par (jo uski choot ke andar thi) teen char baar uchala . usne apni choot ko mere munh par dabaya . usko bahut tej orgasm aa gaya tha. Phir wo jhad gayi .

“aaaaaa…….oooohhhhhhhhh…….chinu , kahin ka nahi chhoda tune mujhe.”

Jhadne ke baad Amma ki choot se ras behne laga aur mene sab ras chat liya. Phir achanak se usne apni tange meri peeth mein lapet di aur mujhe tangon se jakad liya.

Uske munh se ek cheekh nikli,” hai…eeeee…. Ye …ishwar …..ye kya ho gaya …”

Mujhe uski awaz ghuti ghuti lagi . mene uski choot se apna sar upar uthakar uske chehre ki or dekha. Usne takiye ko apne chehre par daba rakha tha. Uska badan kanpne laga. Aur phir se choot ras bahate hue wo ek baar aur jhad gayi.

Phir wo kohniyon ke bal uthkar bed mein baith gayi. mera chehra uski janghon ke beech daba hua tha. Lekin uske baithne se mai amma ki choot tak nahi pahunch pa raha tha. Phir ammane kuch aisa kiya jis par mujhe viswas hi nahi hua.

Amma kohni ke bal piche ko jhuki , usne apni jhanghe failayi aur apne nitambon ko thoda uthakar mere munh ke pass apni choot laga di. Apne dusre hath se usne mera sar apni choot par daba diya. Mene dono hathon se amma ke nitambon ko pakda aur choot se behte ras ko chat liya. Phir mene amma ki chootras se bhigi hui anguli ko uski gand ke ched mein daal diya. Amma ne thoda apne ko uthaya aur apni choot ko mere munh par dhakela.

Mene gand ke ched ke andar ungli andar bahar karni suru ki.

Amma chillayi,”aaiyeeee……….eeee…, kuch baki nahi rakhoge kya ?”

Phir usne thoda aur ras bahaya , wo thoda kanpi aur phir shant pad gayi. uska orgasm khatam ho chuka tha. Wo phir se bed par piche ko dhadam se let gayi.

“chinu mere bacche, kyun kiya tumne ye ? Ek pal ne sara kuch badal diya .” phir wo halke halke subakne lagi.

Mera hath abhi bhi uske nitambon ke niche daba tha. Phir mene apni ungli gand se bahar nikal li. Amma ki gili ho gayi janghon ke andruni hisse ko mai chomne aur chatne laga.

Mai uske pairon ke beech se utha aur niche jakar uske pair ke anguthe ko apne munh mein bhar liya aur chusne laga. Phir mai uske pairon ko chumte hue upar ko bada. Jab mai amma ke ghutno ke pass pahuncha to usne thoda sa apni tange faila di. Aur mai uski janghon par hath firane laga.

Phir mai aur upar ko bada. Aur apna munh amma ki choot par rakh diya. Amma phir thoda hili aur usne apni janghe thodi failayi. Mene fir se uski choot ko chatna suru kar diya.

Amma ki sanse phir se bhari hone lagi. uske hothon se siskariyan nikalne lagi. wo phir se apne nitambonko halke se upar ko karne lagi.

“meri jaan mat lo beta. Chinu ab bas bhi karo.”
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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by jay » 22 Oct 2017 14:23

मैं ऊपर की ओर बड़ा और अम्मा की साइड में लेट गया. मैंने अपना बायां हाथ अम्मा की गर्दन के नीचे डाला और दाएं हाथ से उनके कंधे को धीरे धीरे सहलाने लगा. फिर मैंने साइड से चूची को चूमा और निपल को होठों में भर लिया. मेरे चूसने से अम्मा के निपल सख़्त होने लगे. अम्मा के मुँह से हल्की सी ऊओ…ऊवू की आवाज़ निकली लेकिन उन्होने मुझे रोका नही.

फिर मैं थोड़ा खिसका और अम्मा का दायां हाथ जो उन्होने अपने पेट पर रखा हुआ था , उसको पकड़कर अपने लंड पर लगाया. अम्मा ने पहले तो लंड को पकड़ा फिर झटक दिया. अम्मा ने कुछ सेकेंड्स के लिए ही मेरे लंड को पकड़ा, लेकिन जिस आनंद की अनुभूति मुझे हुई उसे मैं शब्दों में बयान नही कर सकता.

अम्मा ने अपना चेहरा दूसरी तरफ किया हुआ था और वो चुपचाप थी. अब मैंने आगे बढ़ने का निश्चय किया और मैं अम्मा के ऊपर आ गया. अम्मा समझ गयी , उसने उठने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे टाइट पकड़े रखा और अपने होंठ उसके होठों से मिला दिए.

कुछ पल बाद वो शांत हो गयी और उसने अपने होंठ खोल दिए. उसने मेरा स्वागत किया या समर्पण कर कर दिया , मुझे नहीं मालूम . मैंने उसकी चूचियों को सहलाया, निपल को चूसा , ऐरोला पर जीभ फिराई और उसे चूमा और चाटा. फिर मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपने लंड को अम्मा की गीली चूत की दरार पर रगड़ना शुरू किया.

अम्मा ने दोनो हाथ पीछे ले जाकर बेड का हेडबोर्ड पकड़ लिया और चिल्लाई,” चिनू ये मत कर बेटा. मैं हाथ से तुम्हारा कर दूँगी पर बेटा अब इस सीमा को मत लाँघ.”

मैंने अम्मा को ओर्गास्म दिलाया था और अब अम्मा उसके बदले मुझे हस्तमैथुन का प्रस्ताव दे रही थी. इसका मतलब ये था की वो ये महसूस या कबूल कर रही थी की उसे ओर्गास्म आ चुका है तो चिनू को भी ओर्गास्म निकालने की ज़रूरत है. उसका ये प्रस्ताव ही मुझे प्रोत्साहित करने के लिए काफ़ी था. अब मुझे चुनाव करना था, या तो मैं उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लूँ या फिर अम्मा मेरी इच्छा के आगे समर्पण कर दे.

मुझे जवाब ना देते देखकर अम्मा बोली,” चिनू बहुत पछताओगे बेटा, बाद में. मान जाओ.”

मैंने अम्मा के होठों को चूमा और बोला,” अगर ऐसे ही करना है तो मुँह से कर दीजिए.”

अम्मा ने कहा,”नहीं , लाओ हाथ से कर दूं.” और फिर अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ लिया. मैंने थोड़ी सी जगह दी और अम्मा ने हाथ से मूठ मारनी शुरू कर दी. मैंने महसूस किया की अम्मा अनमने ढंग से हस्तमैथुन नही कर रही थी बल्कि वास्तव में वो मेरे लंड को सहला रही थी और सहलाते हुए सिसकियाँ ले रही थी.

इससे मैं और भी उत्तेजित हो गया. मैंने थोड़ी देर तक अम्मा को ऐसे ही करने दिया. मैं उसकी चूचियों को मुँह में भरकर चूसने लगा और उसकी चूत में उंगली डालकर तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा. अम्मा सिसकारियाँ ले रही थी , उसके मुँह से निकलती उन सिसकारियों से मैं उत्तेजना से पागल हो गया. मैंने उसकी कलाई पकड़ी और अपने लंड से उसका हाथ हटा दिया और फिर से उसके ऊपर आ गया.

अम्मा बोली, “तुम नही मानोगे?”

लेकिन उसके बोलने की टोन से मुझे लगा की असलियत में वो चाहती है की मैं आगे बढूं , क्या उसका विरोध दिखावे के लिए ही था और वो चाहती थी की मैं आगे बढूं या फिर मैंने ग़लत समझा ? जो भी हो.

मुझे मालूम था यही सही समय है. मैंने अपने घुटनो से अम्मा की टाँगे फैला दी और उसकी जांघों के नीचे अपने घुटने रख दिए. इसे उसकी जांघें मेरी जांघों के ऊपर आ गयी. मैंने अपने लंड को अम्मा की चूत की दरार की पूरी लंबाई में ऊपर से नीचे तक रगड़ना शुरू किया.

अम्मा की आँखे बंद थी और साँसे इतनी भारी थी की उसकी चूचियां ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी. मैं अब रुक नही सका. अम्मा की चूत के फूले हुए होठों को अलग करते हुए लंड को मैंने चूत के छेद पर लगा दिया. उसकी चूत की गर्मी से ऐसा लग रहा था जैसे मैंने किसी स्टोव में लंड को रख दिया है. जैसे ही मैंने अंदर घुसाने को धक्का दिया, अम्मा ने झटके से ऊपर को खिसकने की कोशिश की , होनी को टालने का ये उसका अंतिम प्रयास था.

“चिनुऊऊ….नहीं……रुक जाओ बेटा. मान जाओ…..ना…नहीं……आआहह…..आअहह….ऊऊऊ…उउउफ़फ्फ़ माँ..”

एक धक्के से मैंने समाज के सबसे पवित्र माने जाने वाले बंधन को तोड़ दिया.

आधी लम्बाई तक लंड अंदर जा चुका था. मैं रुका और लंड को वापस बाहर खींचा और फिर एक झटके में जड़ तक अंदर घुसा दिया.

अम्मा सिसकी,”ऊऊऊहह..……माँ ”

मैं कुछ पल के लिए रुका. अपनी आँखे बंद की और आनंद की उस भावना को महसूस किया. अम्मा की गहरी और गरम चूत की दीवारों ने मेरे लंड को जकड़ रखा था. चूत के अंदर बहुत मुलायम महसूस हो रहा था.

फिर मैंने आँखे खोलकर अम्मा को देखा. बड़ा मनमोहक दृश्य था . उसकी जांघें फैली हुई थी, टाँगे मुड़ी हुई थी. और उसके छोटी छोटी साँसे लेने से उसकी छाती और पेट हिल रहे थे. उसने अपनी बाँहे ऊपर उठा रखी थी और हाथों से बेड का हेडबोर्ड पकड़ रखा था. जिससे उसकी चूचियां ऊपर को उठी हुई थी. उसके बड़े निपल ऊपर को तने हुए आमंत्रण दे रहे थे. बेड लैंप की हल्की रोशनी में उसका पूरा गोरा नग्न बदन चमक रहा था.

मैं थोड़ा आगे को झुका , उसकी जांघों को थोड़ा और ऊपर उठाया और अम्मा के दोनो तरफ अपने हाथ रख दिए. फिर थोड़ा और नीचे सर झुकाकर मैंने अम्मा की नाभि को चूमा. फिर धीमे लेकिन लंबे स्ट्रोक लगाकर अम्मा की चुदाई करने लगा.

मैंने नीचे देखा, जहाँ पर हमारे जिस्म एक में मिल रहे थे, मेरा लंड चूत के रस से पूरा भीगा हुआ था. मैं लंड को पूरा बाहर निकालकर फिर तेज झटके से अंदर घुसाकर धक्के मारने लगा.

अम्मा का पूरा बदन मेरे धक्कों से हिलने लगा. वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी.

“हे माँ, उफ़फ्फ़ तुम कितने निर्दयी हो.”

मुझे मालूम था ऐसे तेज तेज करने से मैं ज़्यादा देर तक नही ठहर पाऊँगा. इसलिए मैं अम्मा के बदन पर लेट गया और फिर धीमे लेकिन गहरे धक्के लगाने लगा. मैंने उसकी चूचियों को मुँह मे भर लिया और चूसने लगा. मेरे चूसने और काटने से चूचियां लाल हो गयी.

मैंने अपना चेहरा ऊपर बढ़ा के अम्मा के होठों को चूमा. अम्मा अब कोई विरोध नही कर रही थी, विरोध का दिखावा भी नही. जैसे ही मेरे होठों ने उसके होठों को छुआ उसने मेरी जीभ का स्वागत करने के लिए अपने होंठ खोल दिए.

अब मैं सहारे के लिए अम्मा के कंधों को पकड़कर चुदाई करने लगा. हर धक्के के साथ कुछ अजीब सी फीलिंग आ रही थी. मैंने कभी खुद को इतना उत्तेजित और इतना आनंदित नही महसूस किया था. अब इस पोज़िशन मे मैं तेज तेज शॉट नही लगा पा रहा था. और जड़ तक लंड नही घुस पा रहा था क्यूंकी मैं आगे को झुका हुआ था. तभी अचानक अम्मा ने अपनी जांघें ऊपर की ओर फैला दी , जिससे मेरे लिए ज़्यादा जगह बन गयी और उसकी चूत के ऊपर उठने से मेरा लंड अब जड़ तह गहरा घुसने लगा.

इससे हमारे बीच की रही सही शरम भी ख़त्म हो गयी , मुझे मालूम चल गया था की अम्मा भी अच्छे से चुदाई चाह रही है. मैंने दुगने उत्साह से धक्के लगाने शुरू कर दिए.

मैंने अपना सर उठाया और धीरे से कहा,” आई लव यू अम्मा.”

अम्मा ने एक सिसकारी लेकर उसका जवाब दिया.

मेरे हर धक्के से उसके मुँह से ऊवू……आआअहह…की आवाज़ें निकल रही थी.

हर धक्के के साथ उसके बदन से मेरे बदन के टकराने से ठप ठप ठप की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी. अम्मा के मुँह से निकलती ऊओ…आअहह….उफ़फ्फ़ माँ …की आवाज़ों का संगीत मुझे और भी उत्तेजित कर दे रहा था.

अम्मा भी अब कामोन्माद में थी. उसकी जीभ उसके मुँह में घूम रही थी. अम्मा ने मेरा निचला होंठ अपने मुँह में दबा लिया और उसे चूसने लगी. उसके दांतो के अपने होंठ पर गड़ने से मुझे पता चल गया की अम्मा अपने दूसरे ओर्गास्म के करीब है. अपनी धार्मिक माँ को कामोन्माद में इतना उत्तेजित देखना मेरे लिए हैरान करने वाला था. मैंने उसके बदन के निचले भाग के हल्के हल्के मूवमेंट को महसूस किया. और अपने धक्कों को उस के हिसाब से एडजस्ट कर दिया.

ऐसा करने से अम्मा बहुत उत्तेजित हो गयी. उसने बेड का हेडबोर्ड छोड़ दिया और अपनी बाँहे मेरी पीठ पर लपेट ली. अब वो मुझे बेतहाशा चूमने लगी और मेरे हर धक्के का जवाब अपने नितंबों को ऊपर उछालकर देने लगी. जब मैं ऊपर को आ रहा होता था तो वो नीचे पड़ी रहती थी लेकिन जब मैं नीचे को जाता था तो वो अपने नितंब उठाकर पूरा मेरे लंड को अपने अंदर ले लेती थी. फिर उसका बदन अकड़ने लगा. मैं समझ गया अब अम्मा को ओर्गास्म आने वाला है.

फिर अम्मा ने अपने हाथों से मेरे नितंबों को पकड़ लिया उसके नाख़ून मेरे माँस में गड़ रहे थे. वो मेरे नितंबों को पकड़कर अपनी चूत पर ज़ोर ज़ोर से पटककर धक्के देने लगी.

अब वो मेरे पर भारी पड़ने लगी थी. उसने मजबूती से अपने पैर बेड पर रखे हुए थे और मेरे नितंबों तो कसके पकड़कर वो नीचे से इतनी तेज धक्के मार रही थी की मुझे उसका साथ देने में मुश्किल होने लगी. मेरे नितंबों पर गडते उसके नाख़ून दर्द करने लगे थे. अपने ओर्गरस्म के आने से पहले अम्मा कामोन्माद से बहुत ही उत्तेजित हो गयी थी.

फिर वो चीखी,” ओह चिनुउऊउउ…सम्भालो हमको…आआअररररज्ग्घह……”

वो झड़ने लगी , मैं भी झड़ने ही वाला था. मैंने बेरहमी से अम्मा की चूचियां मसल डाली, उसके कंधों पर दाँत गड़ा दिए. और पूरी तेज़ी से धक्के मारने लगा.

अम्मा चीखी,”ऊूउउ…उफ़फ्फ़…मेरी जान ही ले लोगे क्या ..”

फिर अम्मा ने अपनी कमर उठाकर टेढ़ी कर दी और एक चीख उसके मुँह से निकली,”आऐईयईई…….ईईईईईए….मा…”

उसकी तेज चीख से मैं घबरा गया , कोई सुन ना ले. मैंने उसका मुँह अपने मुँह से बंद कर दिया.
अम्मा ने अपनी जाँघो को मेरे नितंबों पर लपेट कर मुझे जकड़ लिया. तभी मेरा वीर्य निकल गया. मैं धक्के लगाते रहा और अम्मा की चूत को अपने वीर्य से भर दिया.

अम्मा का बदन काँपने लगा. फिर वो शांत पड़ गयी और झड़ने के बाद मैं भी शांत होकर उसके ऊपर ही लेट गया. मेरा लंड अभी भी अम्मा की चूत के अंदर था.

अम्मा अपना मुँह मेरी गर्दन के पास लाई और हल्के से मेरी गर्दन चूमने लगी. अपने हाथ से वो मेरे नितंबों को सहलाने लगी. वो देर तक मेरे कंधे, मेरी पीठ को सहलाती रही. मैं उसके ऊपर पड़े हुए ही सोने लगा. उसके सहलाने से मेरी आँखे बंद होने लगी.

तभी वो हिली और अपने दायीं तरफ खिसकने लगी. मैं उसके ऊपर से उठकर उसके बगल में लेट गया.
मैंने अम्मा को देखा , वो मुझको ही देख रही थी . आँसू भरी आँखो से सीधे उसने मेरी आँखो में झाँका.

उसने मुझे अपनी तरफ खींचा और अपनी बड़ी छाती में मेरा चेहरा छुपा लिया.
“कैसे हो गया ये सब बेटा? तूने तो मार ही डाला मुझे चिनू. अब क्या होगा ?”

अपनी इच्छा पूरी हो जाने के बाद अब वास्तविकता से सामना था. अम्मा की बात का मेरे पास कोई जवाब नही था. मैं भी उतना ही कन्फ्यूज़ और चिंतित था. बात को जारी रखने की मेरी हिम्मत नही थी. इसलिए मैंने अपनी बाँहो को अम्मा के बदन में लपेटा. उसकी चूचियों के बीच की घाटी को चूमा. और अम्मा की छाती में चेहरा छुपा के किसी बच्चे की तरह सुरक्षित महसूस करते हुए सो गया.

भाग 1 समाप्त . अब अगले अपडेट से भाग 2 शुरू होगा.

Mai upar ki or bada aur amma ki side mein let gaya. Mene apna baya hath amma ki gardan ke niche dala aur daye hath se unke kandhe ko dhire dhire sehlane laga. Phir mene side se chuchi ko chuma aur nipple ko hothon mein bhar liya. Mere chusne se amma ke nipple sakht hone lage. Amma ke munh se halki si ooo…oooh ki awaz nikali lekin unhone mujhe roka nahi.

Phir mai thoda khiska aur amma ka daya hath jo unhone apne pet par rakha hua tha , usko pakadkar apne lund par lagaya. Amma ne pehle to lund ko pakda phir jhatak diya. Amma ne kuch seconds ke liye hi mere lund ko pakda, lekin jis anand ki anubhuti mujhe hui use mein sabdon mein bayan nahi kar sakta.

Amma ne apna chehra dusri taraf kiya hua tha aur wo chupchap thi. Ab mene aage badne ka nischay kiya aur mai amma ke upar aa gaya. Amma samajh gayi , usne uthne ki koshish ki lekin mene use tight pakde rakha aur apne hoth uske hothon se mila diye.

Kuch pal baad wo shant ho gayi aur usne apne hoth khol diye. Usne mera swagat kiya ya samarpan kar diya, mujhe nahi malum. Mene uski chuchiyon ko sahlaya, nipple ko chusa , aerola par jeebh firayi aur use chuma aur chata. Phir mene apna hath niche le jakar apne lund ko amma ki gili choot ki darar par ragadna suru kiya.

Amma ne dono hath piche le jakar bed ka headboard pakad liya aur chillayi,”chinu ye mat kar beta. Main hath se tumhara kar dungi par beta ab is seema ko mat langh.”

Mene amma ko orgasm dilaya tha aur ab amma uske badle mujhe hastmathun ka prastav de rahi thi. Iska matlab ye tha ki wo ye mehsoos ya kabool kar rahi thi ki use orgasm aa chuka hai to chinu ko bhi orgasm nikalne ki jarurat hai. Uska ye prastav hi mujhe protsahit karne ke liye kaafi tha. Ab mujhe chunav karna tha, ya to mai uska prastav swekar kar lu ya phir amma meri iccha ke aage samarpan kar de.

Mujhe jawab na dete dekhkar Amma boli,” chinu bahut pachtaoge beta, baad mein. Maan jao.”

Mene amma ke hothon ko chuma aur bola,” agar aise hi karna hai to munh se kar dijiye.”

Amma ne kaha,”nahin , lao hath se kar dun.” Aur phir apna hath niche le jakar mere lund ko pakad liya. Mene thodi si jagah di aur amma ne hath se muth marni suru kar di. Mene mehsoos kiya ki amma anmane dhang se hastmethun nahi kar rahi thi balki vastav mein wo mere lund ko sehla rahi thi aur sehlate hue siskiyan le rahi thi.

Isse mai aur bhi uttezit ho gaya. Mene thodi der tak amma ko aise hi karne diya. mai uski chuchiyon ko munh mein bharkar choosne laga aur uski choot mein ungli dalkar teji se andar bahar karne laga. Amma siskariyan le rahi thi , uske munh se nikalti un siskariyon se mai uttezna se pagal ho gaya. Mene uski kalai pakdi aur apne lund se uska hath hata diya aur phir se uske upar aa gaya.

Amma boli, “tum nahi manoge?”

Lekin uske bolne ki tone se mujhe laga ki asaliyat mein wo chahti hai ki mai aage badhu , kya uska virodh dikhave ke liye hi tha aur wo chahti thi ki mai aage badhu ya phir mene galat samjha ? jo bhi ho.

Mujhe malum tha yahi sahi samay hai. Mene apne ghutno se amma ki tange faila di aur uski janghon ke niche apne ghutne rakh diye. Ise uski janghen meri janghon ke upar aa gayi. mene apne lund ko amma ki choot ki darar ki puri lambai mein upar se niche tak ragadna suru kiya.

Amma ki aankhe band thi aur sanse itni bhari thi ki uski chuchiyan jor jor se hil rahi thi. Mai ab ruk nahi saka. Amma ki Choot ke phule hue hothon ko alag karte hue lund ko mene choot ke ched par laga diya. Uski choot ki garmi se aisa lag raha tha jaise mene kisi stove mein lund ko rakh diya hai. Jaise hi mene andar ghusane ko dhakka diya, amma ne jhatke se upar ko khisakne ki koshish ki , honi ko talne ka ye uska antim prayas tha.

“chinuuu….nahin……ruk jao beta. Maan jao…..nah…nahin……aaaahhhhhh…..aaahh….oooooo…uuufff maaa..”

Ek dhakke se mene samaj ke sabse pavitra mane jane wale bandhan ko tod diya.

Aadhi lumbai tak lund andar ja chuka tha. Mai ruka aur lund ko wapas bahar khicha aur phir ek jhatke mein jad tak andar ghusa diya.

Amma siski,”oooooohhhhhhh…..Maa”

Mai kuch pal ke liye ruka. Apni aankhe band ki aur anand ki us bhawna ko mehsoos kiya. Amma ki gehri aur garam choot ki dewaron ne mere lund ko jakad rakha tha. Choot ke andar bahut mulayam mehsoos ho raha tha.

Phir mene aankhe kholkar amma ko dekha. Bada manmohak drishya tha. Uski jhanghe faili hui thi, tange mudi hui thi. Aur uske choti choti sanse lene se uski chati aur pet hil rahe the. usne apni banhe upar utha rahi thi aur hathon se bed ka headboard pakad rakha tha. Jisse uski chuchiyan upar ko uthi hui thi. Uske bade nipple upar ko tane hue amantran de rahe the. bed lamp ki halki roshni mein uska pura gora nagn badan chamak raha tha.

Mai thoda aage ko jhuka , uski jhanghon ko thoda aur upar uthaya aur amma ke dono taraf apne hath rakh diye. Phir thoda aur niche sar jhukakar mene amma ki nabhi ko chuma. Phir dhime lekin lambe stroke lagakar amma ki chudai karne laga.
Mene niche dekha, jahan par hamare jism ek mein mil rahe the, mera lund choot ke ras se pura bhiga hua tha. Mai lund ko pura bahar nikalkar phir tej jhatke se andar ghusakar dhakke marne laga.

Amma ka pura badan mere dhakkon se hilne laga. Wo jor jor se siskariyan lene lagi.

“hai maa, ufff tum kitne nirdayi ho….”

Mujhe malum tha aise tej tej karne se mai jyada der tak nahi thahar paunga. Isliye mai amma ke badan par let gaya aur phir dhime lekin gehre dhakke lagane laga. Mene uski chuchiyon ko munh mein bhar liya aur choosne laga. Mere chusne aur katne se chuchiyan laal ho gayi.

Mene apna chehra upar bada ke amma ke hothon ko chuma. Amma ab koi virodh nahi kar rahi thi, virodh ka dikhawa bhi nahi. Jaise hi mere hothon ne uske hothon ko chua usne meri jeebh ka swagat karne ke liye apne hoth khol diye.

Ab mai sahare ke liye amma ke kandhon ko pakadkar chudai karne laga. Har dhakke ke sath kuch ajeeb si feeling aa rahi thi. Mene kabhi khud ko itna uttezit aur itna anandit nahi mehsoos kiya tha. Ab is position me mai tej tej shot nahi laga pa raha tha. Aur jad tak lund nahi ghus pa raha tha kyunki mai aage ko jhuka hua tha. Tabhi achanak amma ne apni janghe upar ki or faila di , jisse mere liye jyada jagah ban gayi aur uski choot ke upar uthne se mera lund ab jad tah gehra ghusne laga.

Isse hamare beech ki rahi sahi sharam bhi khatam ho gayi , mujhe malum chal gaya tha ki amma bhi acche se chudai chah rahi hai. Mene dugne utsah se dhakke lagane suru kar diye.

Mene apna sar uthaya aur dhire se kaha,” I love you amma.”

Amma ne ek siskari lekar uska jawab diya.

Mere har dhakke se uske munh se oooh……aaaaahhhh…ki awazen nikal rahi thi.
Har dhakke ke sath uske badan se mere badan ke takrane se THAP THAP THAP ki awaz pure kamre mein goojne lagi. amma ke munh se nikalti ooohhh…aaahhh….ufff maa …ki awazon ka sangeet mujhe aur bhi uttezit kar de raha tha.

Amma bhi ab kamonmaad mein thi. Uski jeebh uske munh mein ghoom rahi thi. Amma ne mera nichla hoth apne munh mein daba liya aur use chusne lagi. uske danto ke apne hoth par gadne se mujhe pata chalgaya ki amma apne dusre orgasm ke kareeb hai. Apni dharmik maa ko kamonmaad mein itna uttezit dekhna mere liye hairan karne wala tha. Mene uske badan ke nichle bhag ke halke halke movement ko mehsoos kiya. Aur apne dhakkon ko us ke hisaab se adjust kar diya.

Aisa karne se amma bahut uttezit ho gayi. usne bed ka headboard chod diya aur apni banhe meri peeth par lapet li. Ab wo mujhe betahasha chumne lagi aur mere har dhakke ka jawab apne nitambon ko upar uchalkar dene lagi. jab mai upar ko aa raha hota tha to wo niche padi rehti thi lekin jab mai niche ko jata tha to wo apne nitamb uthakar pura mere lund ko apne andar le leti thi. Phir uska badan akadne laga. Mai samajh gaya ab amma ko orgasm aane wala hai.

Phir amma ne apne hathon se mere nitambon ko pakad liya uske nakhoon mere mans mein gad rahe the. wo mere nitambon ko pakadkar apni choot par jor jor se patakkar dhakke dene lagi.

Ab wo mere par bhari padne lagi thi. Usne majbooti se apne pair bed par rakhe hue the aur mere nitambon to kaske pakadkar wo niche se itni tej dhakke mar rahi thi ki mujhe uska sath dene mein mushkil hone lagi. mere nitambon par gadte uske nakhoon dard karne lage the. apne orgarsm ke aane se pehle amma kamonmaad se bahut hi uttezit ho gayi thi.

Phir wo chikhi,” oh chinuuuuu…sambhalo humko…aaaaarrrrggghhhhhh……”

Wo jhadne lagi , mai bhi jhadne hi wala tha. Mene berahmi se amma ki chuchiyan masal dali, uske kandhon par daant gada diye. Aur puri teji se dhakke marne laga.

Amma chikhi,”oouuuuu…ufff…meri jaan hi le loge kya ..”

Phir amma ne apni kamar uthakar tedi kar di aur ek chikh uske munh se nikli,”aaaiiiii…….iiiyeeeee….maa…”

Uski tej chikh se mai ghabra gaya , koi sun na le. Mene uska munh apne munh se band kar diya.

Amma ne apni jangho ko mere nitambon par lapet kar mujhe jakad liya. Tabhi mera viry nikal gaya. Mai dhakke lagate raha aur amma ki choot ko apne viry se bhar diya.

Amma ka badan kanpne laga. Phir wo shant pad gayi aur jhadne ke baad mai bhi shant hokar uske upar hi let gaya. Mera lund abhi bhi amma ki choot ke andar tha.

Amma apna munh meri gardan ke pass layi aur halke se meri gardan chumne lagi. apne hath se wo mere nitambon ko sahlane lagi. wo der tak mere kandhe, meri peeth ko sahlati rahi. Mai uske upar pade hue hi sone laga. Uske sahlane se meri aankhe band hone lagi.

Tabhi wo hili aur apne dayi taraf khisakne lagi. mai uske upar se uthkar uske bagal mein let gaya.

Mene amma ko dekha , wo mujhko hi dekh rahi thi . aansu bhari aankho se sidhe usne meri aankho mein jhanka.

Usne mujhe apni taraf khincha aur apni badi chati mein mera chehra chupa liya.

“kese ho gaya ye sab beta? Tune to mar hi dala mujhe chinu. Ab kya hoga ?”

Apni iccha puri ho jane ke baad ab vastvikta se samna tha. Amma ki baat ka mere pass koi jawab nahi tha. Mai bhi utna hi confuse aur chintit tha. Baat ko jari rakhne ki meri himmat nahi thi. Isliye mene apni banho ko amma ke badan mein lapeta. Uski chuchiyon ke beech ki ghati ko chuma. Aur amma ki chati mein chehra chupake kisi bacche ki tarah surakshit mehsoos karte hue so gaya.

Part 1 samapt . ab agle update se Part 2 shuru hoga.
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