मेरी धार्मिक माँ COMPLETE

अन्तर्वासना और कामुकता से भरपूर छोटी छोटी हिन्दी सेक्सी कहानियाँ
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jay
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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by jay » 26 Oct 2017 20:27

सुबह जल्दी मेरी नींद खुल गयी, बाहर अभी उजाला नही हुआ था. मैं बेड में लेटे हुए ही रात में हुई घटना के बारे में सोचने लगा. लेकिन मैं कुछ भी ठीक से नही सोच पा रहा था , दिमाग़ में कई तरह के विचार आ रहे थे. मुझे बहुत अपराधबोध हो रहा था लेकिन इस बात से भी मैं इनकार नही कर सकता था की जिस आनंद की मुझे अनुभूति हुई थी वैसी पहले कभी नही हुई. मैंने खुद से स्वीकार किया की अम्मा का इस घटना में कोई हाथ नही है, ये सब मेरी वजह से ही हुआ है. मेरी ही वजह से अम्मा इस पाप की भागीदार बनी , जिसके बारे में हमारे समाज में सोचा भी नही जा सकता.

यही सब सोचते हुए मुझे फिर से नींद आ गयी. सुबह बेड के हिलने से मेरी नींद खुली. मैं खिड़की की तरफ मुँह करके सोया हुआ था और अम्मा की तरफ मेरी पीठ थी. अम्मा के हिलने डुलने से मुझे लगा की वो बेड से उठ रही है. माँ ने बेड साइड लैंप ऑन किया. मैंने सामने दीवार पर लगे मिरर में देखा अम्मा बेड में पीछे टेक लगाकर बैठी है और उसने अपना चेहरा हाथों से ढका है. फिर वो सुबकने लगी और उसकी आँखो से आँसू बहने लगे. बीच बीच में वो, हे प्रभु ! हे ईश्वर ! भी जप रही थी.

मुझे बहुत बुरा लगा. क्या करूँ समझ नही आया इसलिए मैं चुपचाप वैसे ही लेटे रहा. मैंने फिर से मिरर में देखा तो , मेरे अंदर का जानवर फिर से सर उठाने लगा. मिरर में माँ की बड़ी छाती दिख रही थी. कुछ घंटे पहले रात में इन चूचियों को मैंने खूब चूसा था पर अभी नज़ारा कुछ और ही था.

जब माँ ने अपने हाथों से चेहरा ढका था तो मिरर में कुछ दिख नही पा रहा था पर जब उसने अपनी आँखे पोछी और हाथ नीचे कर दिए तो अम्मा की गदराई हुई छाती मुझे दिखने लगी. मुझे इस बात पे हैरानी हुई की माँ की चूचियां ज़्यादा ढली हुई नही थी. वो बड़ी बड़ी और गोल थी और उन्होने अपना आकार बरकरार रखा था. माँ ने अपना सर पीछे को किया हुआ था और उसके गहरी साँसे लेने से उसकी चूचियां हल्के से हिल रही थी. उसके कंधे , उसकी उठी हुई ठोड़ी , सब कुछ एकदम परफेक्ट था.

फिर वो सीधी होकर बैठ गयी और हाथ पीछे ले जाकर अपने बाल बाँधने लगी. उसने एक नज़र मेरी तरफ देखा. क्या मैंने उसे मुस्कुराते हुए देखा ? हाँ, वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी. फिर मैंने उसका हाथ अपने सर पे महसूस किया. उसने प्यार से मेरा सर सहलाया फिर मेरे गाल को सहलाया.
“ये तूने क्या कर डाला मेरे बच्चे “, अम्मा बोली.

मैंने मिरर में देखा अम्मा मेरे ऊपर झुक रही है. मैंने सोए हुए का नाटक करते हुए आँखे बंद कर ली. मैंने अम्मा की गरम साँसे अपनी गर्दन पर महसूस की. अम्मा ने अपने होंठ मेरी बाई कनपटी पर रख दिए और कुछ देर तक ऐसे ही वो अपने हाथ से मेरा सर सहलाती रही.

फिर उसने अपने होंठ हटाए और वो बेड से उठने लगी. मैंने अपनी आँखे खोली और मिरर में देखा लेकिन तब तक वो बेड से उठ चुकी थी.

मैंने कान लगाकर सुनने की कोशिश की , बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई. अम्मा बाथरूम में चली गयी है समझकर मैं जैसे ही सीधा लेटने को हुआ वो अचानक मिरर में मुझे दिख गयी. मैंने जल्दी से आँखे बंद कर ली. फिर थोड़ी सी खोलकर देखा. अम्मा घूमकर मेरी बेड की साइड में आई और फर्श से अपनी नाइटी उठाने लगी , जो मैंने रात में उतार कर फेंक दी थी. नाइटी को अपनी छाती से लगाकर वो सामने मिरर में अपने नंगे बदन को देखने लगी , उसकी पीठ मेरी तरफ थी.

वो दृश्य पागल कर देने वाला था. माँ अपनी पूरी नग्नता के साथ मिरर के सामने खड़ी थी . उसने अपनी नाइटी बेड में रख दी और अपने को देखा. वो थोड़ी साइड में घूमी और अपने को मिरर में देखने लगी. ऐसा ही उसने दूसरी तरफ घूमकर किया. फिर उसने अपनी चूचियों के नीचे हाथ रखे और उन्हे थोड़ा ऊपर उठाया , फिर थोड़ा हिलाया. चादर के अंदर ही मेरा पानी निकलने को हो गया. वो थोड़ी देर तक अपने को ऐसे ही मिरर में निहारती रही. शायद वो गर्व महसूस कर रही होगी की अभी भी उसका बदन ऐसा है की वो उसका जवान बेटा भी उस पर लटटू हो गया.

फिर वो थोड़ा पीछे हटी , मिरर में अपना पूरा बदन देखने के लिए. अब वो मेरे बिल्कुल करीब थी. उसके बदन से उठती खुशबू को मैंने महसूस किया. उसके पसीने और चूतरस की मिली जुली खुशबू से मैं मदहोश हो गया. कमरे में आती हुई सूरज की रोशनी मे उसका नंगा बदन चमक रहा था. कुछ समय के लिए मैं दुनिया को भूलकर अपनी देवी जैसी माँ को देखते रहा. उसकी टांगों और जांघों का पिछला भाग जो मेरी आँखों के सामने था , बिल्कुल गोरा और मांसल था. कमर से नीचे को उसके विशाल नितंब फैले हुए थे जो माँ के हिलने के साथ ही हिल डुल रहे थे. उसकी चूत के बड़े फूले हुए होठों से उसकी गुलाबी क्लिट ढक सी गयी थी. ज्यादातर गोरी औरतों की चूत भी काले रंग की होती है लेकिन उसकी गोरी थी. नाभि के नीचे वो उभरा हुआ भाग बड़ा ही मादक दिख रहा था.

मुझे लगा मेरी प्यारी अम्मा रति का अवतार है. एक आदमी को जो चाहिए वो सब उसमे था. लंबी टाँगे, अच्छा आकार लिए हुए चूचियां, बाहर को निकले हुए विशाल नितंब और नाभि के नीचे उभरा हुआ वो भाग.
मैं अम्मा को देखने में डूबा हुआ था तभी अम्मा झुकी और बेड से अपनी नाइटी उठाने लगी. उसके झुकने से उसके नितंबों के बीच की दरार से मुझे उसकी चूत दिखी. अब मेरा लंड पूरा मस्त हो चुका था. मेरा मूड हुआ की मैं वहीं पर ही अम्मा को चोद दूं. लेकिन इससे पहले की मैं उठ पाता अम्मा ने नाइटी अपने बदन पर डाल ली और वहाँ से चली गयी.

फिर बाथरूम का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई. मैंने बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ का इंतज़ार किया. फिर मैं उठ गया और टीशर्ट और शॉर्ट पहन लिया. कमरे में अकेला होने के बाद फिर से मेरे दिमाग़ में उथल पुथल होने लगी. मेरी इच्छाओं और नैतिकता के बीच द्वन्द्ध होने लगा. फिर मैंने सोचना छोड़कर दरवाज़ा खोला और बास्केट में से सुबह का अख़बार निकाल लिया. फिर नाश्ते का ऑर्डर देकर में अख़बार पढ़ने लगा. मौसम के बारे में लिखा था की उत्तर भारत में शीतलहर जारी है लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुझे कोई खुशी नही हुई. एक रात पहले जो मुझे मौसम खराब होने पर होटेल में रुकने की खुशी थी , वैसा अब महसूस नही हो रहा था , पता नही क्यूँ. तब मुझे एहसास हुआ की कल रात माँ के साथ जबरदस्त चुदाई के बाद अब मेरे और उनके बीच एक चुप्पी सी छा गयी है , जिसे मैं बर्दाश्त नही कर पा रहा था और मैं इसे खत्म करना चाहता था.

तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुला और माँ सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट पहने हुए बाहर आई. मेरी तरफ देखे बिना वो सूटकेस मे से अपनी साड़ी निकालने लगी. वो थोड़ी देर खड़ी रही फिर उसने कुर्ता और पैजामा निकाल लिया. वो कभी कभार ही कुर्ता पैजामा पहनती थी. माँ की तरफ सीधे देखने की मेरी हिम्मत नही हुई इसलिए मैं आँखों के कोने से उसे देखता रहा.

फिर मुझसे और टेंशन बर्दाश्त नही हुआ और मैं उठा और बाथरूम चला गया. बाथरूम में आकर मैंने देखा मेरा लंड मुरझा चुका है . अब मुझे उत्तेजना भी महसूस नही हो रही थी. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था. तभी मैंने अम्मा को कुछ मैगज़ीन्स और अख़बार का ऑर्डर देते हुए सुना. अम्मा को थोड़ी बहुत अँग्रेज़ी ही आती थी. फिर मैं नहाने लगा. ठंडा पानी जब मेरे बदन पर पड़ा तो काँपते हुए मेरे दिमाग़ की उथल पुथल गायब हो गयी. फिर टीशर्ट और शॉर्ट पहनकर मैं रूम में आ गया.

नाश्ता आ चुका था और अम्मा चाय डाल रही थी. मैंने रूम सर्विस को लांड्री के लिए कहा और खिड़की से बाहर झाँकने लगा. हमारे रूम के सामने नीचे स्विमिंग पूल था, मैं बच्चों को तैरते हुए देखने लगा.

अम्मा ने नाश्ते के लिए बुलाया तो मैं उनके सामने बैठ गया. मैंने सीधे अम्मा की आँखो में देखा. उन्होने नज़रें घुमा ली और सैंडविच की प्लेट मेरी तरफ सरका दी. मैंने सैंडविच उठा लिया और खाने लगा. जब भी मैं अम्मा की ओर देखता की वो क्या सोच रही है तो वो अपनी नज़रें घुमा लेती. लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था की जब मैं उसको नही देख रहा होता था तो वो मुझे देख रही होती थी. नाश्ता भी ख़तम हो गया और हमारे बीच टेंशन बना रहा. कोई कुछ नही बोला.

नाश्ता खत्म होते ही , लांड्री के लिए वेटर आ गया. मैंने उसको कपड़ों का बैग दिया और अम्मा से पूछा,” अम्मा आपको कुछ और देना है लांड्री के लिए ?”

अम्मा ने सिर्फ़ ‘नही’ कहा . फिर जैसे ही वेटर जाने को मुड़ा तो उन्होने सूटकेस से 2 नाइटी निकालकर लांड्री बैग में डाल दी.

उसके जाते ही रूम साफ करने के लिए आया आ गयी. मैं बैठे हुए सोचने लगा , अब क्या किया जाए.

रूम की सफाई करने के बाद आया ने ट्राली मे से 2 साफ चादर निकाली और बेड से पुरानी चादरें हटा दी. मैं आया को ऐसे ही देख रहा था तभी उसने पुरानी चादर को अपनी नाक पर लगाकर सूँघा. उसमे एक बड़ा सा दाग लगा हुआ था. मुझे इतनी शरम आई की मैंने मुँह फेर लिया और नीचे स्विमिंग पूल को देखने लगा. तभी आया अम्मा से कन्नड़ में कुछ बोलने लगी.

मैं मुड़कर उसे देखने लगा , तभी वो टूटी फूटी हिन्दी मे धीमे से अम्मा से बोली,” भगवान अयप्पा के आशीर्वाद से आपको ऐसी बहुत सी रातें बिताने को मिले.”

फिर ऐसा कहते हुए आया ने अम्मा को वो चादर पर लगा धब्बा दिखाया. अम्मा डर गयी. उसने सोचा रात मे जो हुआ , वो सब आया समझ गयी है. उसने जल्दी से 500 का नोट निकाला और आया के हाथ में थमा दिया. ताकि आया खुश हो जाए और अपना मुँह बंद रखे और अपने साथ काम करने वालों को कुछ ना बताए.
आया ने खुश होकर वो नोट अपने माथे से लगाया और बोली,” भगवान तुम दोनो को खुश रखे.” और फिर वो चली गयी.

उसके जाते ही अम्मा ने मुझे देखा , शरम से उसका पूरा चेहरा सुर्ख लाल हो गया था. मैं दौड़कर उसके पास गया और कंधों से उसे पकड़ लिया. अम्मा ने मेरी आँखों में देखा और अपनी नज़रें फर्श की तरफ झुका ली.मैंने अपने आलिंगन में अम्मा को कस लिया और वो सुबकने लगी. मैं कुछ भी नही बोल पाया और उसे अपने से चिपकाए रखा.

फिर मैं उसे बेड के पास ले गया और बेड पर बिठा दिया. और उसकी पीठ बेड के हेडबोर्ड पर टिका दी. खुद उसके सामने बैठ गया.

“तुमने मेरे साथ ऐसा क्यूँ किया ? क्या तुम्हारे मन में लंबे समय से मेरे लिए वासना थी या फिर मेरे व्यवहार में ऐसा कुछ था जिससे ये घटना हुई ?”

मैं सीधे अम्मा की आँखो में नही देख पाया. मैं दूसरी तरफ देखता रहा.

अम्मा ने मेरे कंधे पकड़कर मुझे अपनी तरफ घुमाया,” बताओ बेटा. कल रात जो हुआ उसके बारे में बहुत सी बातें करनी है , जाननी है.”

मुझे चुप देखकर अम्मा ने मुझे ज़ोर से झिझोड़ दिया,” मुझसे बात करो बेटा. मैं बर्बाद हो गयी हूँ. हम दोनो ही इस घटना से प्रभावित हुए है.”

“अम्मा, मैंने कभी आपको ऐसी नज़र से नही देखा. लेकिन जब आप बाथरूम में थी और आपने मुझसे नाइटी माँगी थी, जिस दिन हम बंगलोर आए थे…….” और फिर मैंने पूरी बात अम्मा को बता दी की कैसे कैसे मेरी काम इच्छा बढ़ती चली गयी.

पूरी बात सुनकर वो अपने को दोष देने लगी और रोने लगी.

मैंने कहा,” अम्मा ये बात सही है की उस दिन बाथरूम में आपको देखकर ही ये भावना मेरे अंदर आई. लेकिन जो कुछ हुआ उसके लिए आप अपने को दोषी क्यूँ ठहरा रही हैं. आपने तो होनी को टालने की पूरी कोशिश की थी लेकिन आप भी इंसान हैं और शारीरिक इच्छाओं के आगे आपने समर्पण कर दिया.”

एक गहरी साँस लेकर वो बोली,” चिनू, सिर्फ़ एक पल की कमज़ोरी से मेरा सब कुछ छिन गया. हे ईश्वर! मैंने ऐसा होने कैसे दिया .”

फिर सुबकते हुए वो कहने लगी,”अपने ही बेटे की नज़रों में मैं अपना रुतबा खो चुकी हूँ. मैं अब वो माँ नही रही जो तुम्हारे लिए पूजनीय थी जिसकी तुम इज़्ज़त करते थे. आज से मैं तुम्हारी नज़रों मे ऐसी चरित्रहीन औरत हूँ जो इस उमर में भी अपनी टाँगे फैला देती है.”

“अम्मा प्लीज़ , ऐसा ना कहो. मैं अब आपको और भी ज़्यादा प्यार करता हूँ. आप ये बात समझ लो की बिना इज़्ज़त के प्यार नही हो सकता. आप मेरे लिए वो देवी हो जिसके चरणों में मेरा सब कुछ अर्पित है. प्यार , इज़्ज़त और ज़रूरत पड़ी तो मेरी जिंदगी भी. मैंने कभी अपनी माँ के साथ संभोग के लिए नही सोचा था लेकिन फिर भी ये हो गया. ये हमारे भाग्य में था. या तो हमें इसे स्वीकार कर लेना चाहिए या फिर रोते चिल्लाते रहें, कोसते रहें लेकिन भाग्य में जो होगा वो होकर रहेगा.”

मेरी बात सुनकर अम्मा ने रोना बंद कर दिया और आश्चर्य से बोली,” क्या तुम मुझे ये समझाना चाहते हो की जो कुछ हुआ वो सही था और हमें इस पाप को करते रहना चाहिए ? अपनी काम इच्छाओं को सही ठहराने के लिए भाग्य का बहाना बनाना चाहिए ?”

Subah jaldi meri nind khul gayi, bahar abhi ujala nahi hua tha. Mai bed mein lete hue hi raat mein hui ghatna ke bare mein sochne laga. Lekin mai kuch bhi theek se nahi soch pa raha tha , dimaag mein kai tarah ke vichar aa rahe the. mujhe bahut apradhbodh ho raha tha lekin is baat se bhi mai inkar nahi kar sakta tha ki jis anand ki mujhe anubhuti hui thi waisi pehle kabhi nahi hui. Mene khud se swekar kiya ki amma ka is ghatna mein koi hath nahi hai, ye sab meri wajah se hi hua hai. Meri hi wajah se amma is paap ki bhagidar bani , jiske baare mein hamare samaj mein socha bhi nahi ja sakta.

Yahi sab sochte hue mujhe phir se nind aa gayi. subah bed ke hilne se meri nind khuli. Mai khidki ki taraf munh karke soya hua tha aur amma ki taraf meri peeth thi. amma ke hilne dulne se mujhe laga ki wo bed se uth rahi hai. Maa ne bed side lamp on kiya. Mene samne dewar par lage mirror mein dekha amma bed mein piche take lagakar baithi hai aur usne apna chehra hathon se dhaka hai. Phir wo subakne lagi aur uski aankho se aansu behne lage. Beech beech mein wo, hai prabhu ! hai ishwar ! bhi jap rahi thi.

Mujhe bahut bura laga. Kya karu samajh nahi aaya isliye mai chupchap waise hi lete raha. Mene phir se mirror mein dekha to , mere andar ka janwar phir se sar uthane laga. Mirror mein maa ki badi chati dikh rahi thi. kuch ghante pehle raat mein in chuchiyon ko mene khoob chusa tha par abhi nazara kuch aur hi tha.

Jab maa ne apne hathon se chehra dhaka tha to mirror mein kuch dikh nahi pa raha tha par jab usne apni aankhe pochi aur hath niche kar diye to amma ki gadrai hui chati mujhe dikhne lagi. mujhe is baat pe hairani hui ki maa ki chuchiyan jyada dhali hui nahi thi. wo badi badi aur gol thi aur unhone apna aakar barkarar rakha tha. Ma ne apna sar piche ko kiya hua tha aur uske gehri sanse lene se uski chuchiyan halke se hil rahi thi. uske kandhe uski uthi hui thodi , sab kuch ekdum perfect tha.

Phir wo sidhi hokar baith gayi aur hath piche le jakar apne baal bandhne lagi. usne ek nazar meri taraf dekha. Kya mene use muskurate hue dekha ? haan, wo mujhe dekhkar muskura rahi thi. phir mene uska hath apne sar pe mehsoos kiya. usne pyar se mera sar sehlaya phir mere gaal ko sehlaya.
“ye tune kya kar dala mere bacche “, amma boli.

Mene mirror mein dekha amma mere upar jhuk rahi hai. Mene soye hue ka natak karte hue aankhe band kar li. Mene amma ki garam sanse apni gardan par mehsoos ki. Amma ne apne hoth meri bayi kanpat par rakh diye aur kuch der tak aise hi wo apne hath se mera sar sahlati rahi.

Phir usne apne hoth hataye aur wo bed se uthne lagi. mene apni aankhe kholi aur mirror mein dekha lekin tab tak wo bed se uth chuki thi.

Mene kaan lagakar sunne ki koshish ki , bathroom ka darwaza khulne ki awaz aayi. Amma bathroom mein chali gayi hai samajhkar mai jaise hi sidha letne ko hua wo achanak mirror mein mujhe dikh gayi. mene jaldi se aankhe band kar li. Phir thodi si kholkar dekha. Amma ghoomkar meri bed ki side mein aayi aur farsh se apni nighty uthane lagi , jo mene raat mein utar kar fenk di thi. nighty ko apni chati se lagakar wo samne mirror mein apne nange badan ko dekhne lagi , uski peeth meri taraf thi.

Wo drishya pagal kar dene wala tha. Maa apni puri nagnta ke sath mirror ke samne khadi thi . usne apni nighty bed mein rakh di aur apne ko dekha. Wo thodi side mein ghumi aur apne ko mirror mein dekhne lagi. aisa hi usne dusri taraf ghoomkar kiya. phir usne apni chuchiyon ke niche hath rakhe aur unhe thoda upar uthaya , phir thoda hilaya. Chadar ke andar hi mera pani nikalne ko ho gaya. Wo thodi der tak apne ko aise hi mirror mein niharti rahi. Sayad wo garv mehsoos kar rahi hogi ki abhi bhi uska badan aisa hai ki wo uska jawan beta bhi us par lattu ho gaya.

Phir wo thoda piche hati , mirror mein apna pura badan dekhne ke liye. Ab wo mere bilkul kareeb thi. uske badan se uthti khusboo ko mene mehsoos kiya. uske pasine aur chutras ki mili juli khusboo se mai madhosh ho gaya. Kamre mein aati hui suraj ki roshni me uskananga badan chamak raha tha. Kuch samay ke liye mai duniya ko bhulkar apni devi jaisi maa ko dekhte raha. Uski tango aur janghon ka pichla bhag jo meri aankhon ke samne tha , bilkul gora aur mansal tha. Kamar se niche ko uske vishal nitamb faile hue the jo maa ke hilne ke sath hi hil dul rahe the. uski choot ke bade phule hue hothon se uski gulabi clit dhak si gayi thi. jyadatar gori aurton ki choot bhi kale rang ki hoti hai lekin uski gori thi. nabhi ke niche wo ubhra hua bhag bada hi madak dikh raha tha.

Mujhe laga meri pyari amma rati ka avtaar hai. Ek aadmi ko jo chahiye wo sab usme tha. Lambi tange, accha aakar liye hue chuchiyan, bahar ko nikle hue vishaal nitamb aur nabhi ke niche ubhra hua wo bhaag.

Mai amma ko dekhne mein dooba hua tha tabhi amma jhuki aur bed se apni nighty uthane lagi. uske jhukne se uske nitambon ke beech ki darar se mujhe uski choot dikhi. Ab mera lund pura mast ho chuka tha. Mera mood hua ki mai wahin par hi amma ko chod dun. lekin isse pehle ki mai uth pata amma ne nighty apne badan par daal li aur wahan se chali gayi.

Phir bathroom ka darwaza band hone ki awaz aayi. Mene bathroom se pani girne ki awaz ka intzaar kiya. Phir mai uth gaya aur tshirt aur short pahan liya. Kamre mein akela hone ke baad phir se mere dimaag mein uthal puthal hone lagi. meri icchaon aur naitikta ke beech dwandh hone laga. Phir mene sochna chodkar darwaza khola aur basket mein se subah ka akhbaar nikal liya. Phir naste ka order dekar mein akhbaar padne laga. Mausam ke bare mein likha tha ki uttar bharat mein sheetlahar jari hai lekin ascharyjanak roop se mujhe koi khushi nahi hui. Ek raat pehle jo mujhe mausam kharab hone par hotel mein rukne ki khushi thi , waisa ab mehsoos nahi ho raha tha , pata nahi kyun. Tab mujhe ehsaas hua ki kal raat maa ke sath jabardast chudai ke baad ab mere aur unke beech ek chuppi si cha gayi hai , jise mai bardast nahi kar pa raha tha aur mai ise khatam karna chahta tha.

Tabhi bathroom ka darwaza khula aur maa sirf bra aur petticoat pehne hue bahar aayi. Meri taraf dekhe bina wo suitcase me se apni saree nikalne lagi. wo thodi der khadi rahi phir usne kurta aur pyjama nikaal liya. Wo kabhi kabhar hi kurta pyjama pahanti thi. maa ki taraf sidhe dekhne ki meri himmat nahi hui isliye mai aankhon ke kone se use dekhta raha.

Phir mujhse aur tension bardast nahi hua aur mai utha aur bathroom chala gaya. Bathroom mein aakar mene dekha mera lund murjha chuka hai . ab mujhe uttezna bhi mehsoos nahi ho rahi thi. mujhe kuch samajh nahi aa raha tha. Tabhi mene amma ko kuch magazines aur akhbaar ka order dete hue suna. Amma ko thodi bahut angrezi hi aati thi. phir mai nahane laga. Thanda pani jab mere badan par pada to kanpte hue mere dimaag ki uthal puthal gayab ho gayi. phir tshirt aur short pahankar mai room mein aa gaya.

Nasta aa chuka tha aur amma chai daal rahi thi. mene room service ko laundry ke liye kaha aur khidki se bahar jhankne laga. Hamare room ke samne niche swimming pool tha, mai bacchon ko terte hue dekhne laga.

Amma ne naste ke liye bulaya to mai unke samne baith gaya. Mene sidhe amma ki aankho mein dekha. Unhone nazren ghuma li aur sandwich ki plate meri taraf sarka di. Mene sandwich utha liya aur khane laga. Jab bhi mai amma ki or dekhta ki wo kya soch rahi hai to wo apni nazren ghuma leti. Lekin mujhe aisa lag raha tha ki jab mai usko nahi dekh raha hota tha to wo mujhe dekh rahi hoti thi. nasta bhi khatam ho gaya aur hamare beech tension bana raha. Koi kuch nahi bola
.
Nasta khatam hote hi , laundry ke liye waiter aa gaya. Mene usko kapdon ka bag diya aur amma se pucha,” amma aapko kuch aur dena hai laundry ke liye ?”

Amma ne sirf ‘nahi’ kaha . phir jaise hi waiter jane ko muda to unhone suitcase se 2 nightie nikalkar laundry bag mein daal di.

Uske jate hi room saaf karne ke liye aaya aa gayi. mai baithe hue sochne laga , ab kya kiya jaye.

Room ki safai karne ke baad aaya ne trolly me se 2 saaf chadar nikali aur bed se purani chaderin hata di. Mai aaya ko aise hi dekh raha tha tabhi usne purani chadar ko apni naak par lagakar sungha. Usme ek bada sa daag laga hua tha. Mujhe itni sharam aayi ki mene munh fer liya aur niche swimming pool ko dekhne laga. Tabhi aaya amma se kannada mein kuch bolne lagi.

Mai mudkar use dekhne laga , tabhi wo tuti futi hindi me dhime se amma se boli,” bhagwan ayappa ke ashirwad se aapko aisi bahut si raatein bitane ko mile.”

Phir aisa kehte hue aaya ne amma ko wo chadar par laga dhabba dikhaya. Amma dar gayi. usne socha raat me jo hua , wo sab aaya samajh gayi hai. Usne jaldi se 500 ka note nikala aur aaya ke hath mein thama diya. Taki aaya khush ho jaye aur apna munh band rakhe aur apne sath kaam karne walon ko kuch na bataye.

Aaya ne khush hokar wo note apne mathe se lagaya aur boli,” bhagwan tum dono ko khush rakhe.” Aur phir wo chali gayi.

Uske jate hi amma ne mujhe dekha , sharam se uska pura chehra shurkh laal ho gaya tha. Mai daudkar uske paas gaya aur kandhon se use pakad liya. Amma ne meri aankhon mein dekha aur apni nazren farsh ki taraf jhuka li.mene apne alingan mein amma ko kas liya aur wo subakne lagi. mai kuch bhi nahi bol paya aur use apne se chipkaye rakha.

Phir mai use bed ke pass le gaya aur bed par bitha diya. Aur uski peeth bed ke headboard par tika di. Khud uske samne baith gaya.

“tumne mere sath aisa kyun kiya ? kya tumhare man mein lambe samay se mere liye wasna thi ya phir mere vyahar mein aisa kuch tha jisse ye ghatna hui ?”

Mai sidhe amma ki aankho mein nahi dekh paya. Mai dusri taraf dekhta raha.

Amma ne mere kandhe pakadkar mujhe apni taraf ghumaya,” batao beta. Kal raat jo hua uske baare mein bahut si baatein karni hai , janni hai.”

Mujhe chup dekhkar amma ne mujhe jor se jhinjhod diya,” mujhse baat karo beta. Mai barbaad ho gayi hun. hum dono hi is ghatna se prabhawit hue hai.”

“amma, mene kabhi aapko aisi nazar se nahi dekha. Lekin jab aap bathroom mein thi aur aapne mujhse nighty mangi thi, jis din hum bangalore aaye the…….” aur phir mene puri baat amma ko bata di ki kese kese meri kaam iccha badti chali gayi.

Puri baat sunkar wo apne ko dosh dene lagi aur rone lagi.

mene kaha,” Amma ye baat sahi hai ki us din bathroom mein aapko dekhkar hi ye bhawna mere andar aayi. Lekin jo kuch hua uske liye aap apne ko doshi kyun thahra rahi hain. Aapne to honi ko talne ki puri koshish ki thi lekin aap bhi insaan hain aur sharirik icchaon ke aage aapne samarpan kar diya.”

Ek gehri saans lekar wo boli,” chinu, sirf ek pal ki kamzori se mera sab kuch chin gaya. Hai ishwar! Mene aisa hone kese diya .”

Phir subakte hue wo kehne lagi,”apne hi bete ki nazron mein mai apna rutba kho chuki hun. Mai ab wo maa nahi rahi jo tumhare liye pujniya thi jiski tum izzat karte the. aaj se mai tumhari nazron me aisi charitrahin aurat hun jo is umar mein bhi apni tange faila deti hai.”

“amma please , aisa na kaho. Mai ab aapko aur bhi jyada pyar karta hun. Aap ye baat samajh lo ki bina izzat ke pyar nahi ho sakta. Aap mere liye wo devi ho jiske charno mein mera sab kuch arpit hai. Pyar , izzat aur jarurat padi to meri jindagi bhi. Mene kabhi apni maa ke sath sambhog ke liye nahi socha tha lekin phir bhi ye ho gaya. Ye hamare bhagya mein tha. Ya to hamein ise swekaar kar lena chahiye ya phir rote chillate rahe , koste rahein lekin bhagya mein jo hoga wo hokar rahega.”

Meri baat sunkar amma ne rona band kar diya aur ascharya se boli,” kya tum mujhe ye samjhana chahte ho ki jo kuch hua wo sahi tha aur hame is paap ko karte rehna chahiye ? apni kaam icchaon ko sahi thahrane ke liye bhagya ka bahana banana chahiye ?”

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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by jay » 29 Oct 2017 15:26

“अम्मा क्या सही है क्या ग़लत, इसका फ़ैसला मैं या आप नही कर सकते हैं. ये बस यूँ ही हो गया और मुझे इसका कोई अफ़सोस या दुख नही है. आप अपने को देखिए , आपने विरोध करने की कोशिश की थी लेकिन कही गहराई में आपके अंदर कुछ था जिसने आपके विरोध को कमज़ोर कर दिया और उसके बाद आपने भी यौनसुख का भरपूर आनंद लिया. अम्मा आप चाहे माने या ना माने लेकिन आपके अंदर भी कुछ ख़ालीपन या शून्य था जिसके बारे में आप खुद अंजान थीं. “

“अम्मा मेरी आँखो में देखिए और मुझसे कहिये की जो कुछ हुआ उसके बाद आप मुझसे घृणा करती हैं और आप इसे जारी नही रखना चाहती हैं. मेरी सौगंध लीजिए अम्मा , उसके बाद मैं कभी आपको परेशान नही करूँगा. मेरे हृद्य मे आप मेरी काम की देवी की तरह रहेंगी लेकिन मैं आपसे फिर कभी संभोग के लिए नही कहूँगा. बताइए मुझे अम्मा .“ मेरी आँखो से आँसू बहने लगे.

अम्मा ने अपनी बड़ी बड़ी आँखो से मुझे देखा और बड़बड़ाई ,” हे ईश्वर !”
वो मुझे ऐसे ही देखती रही जैसे मुझे नही बल्कि मेरे अंदर मेरी आत्मा में कुछ देख रही हो.

फिर मैं अम्मा के नज़दीक़ बैठ गया , अम्मा ने थोड़ा खिसककर मुझे जगह दी. मैंने अपनी बाँह अम्मा से लपेटकर उन्हे अपनी ओर खींचा. अम्मा ने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया और मेरी छाती पर अपनी बाँह लपेटकर मुझे पकड़ लिया. मैंने अम्मा के चेहरे को सहलाया तो उनके मुँह से एक सिसकारी निकली और मेरे बदन में अपना चेहरा छुपा लिया.

अम्मा को अपने से लगाए हुए मैं बैठा रहा. उस समय कुछ ऐसी फीलिंग थी जैसा पहले कभी महसूस नही हुआ था. वो वासना नही थी, प्यार भी नही था, एक अजीब सी भावना थी , क्या था मुझे भी नही पता. अब मेरे अंदर कोई अपराधबोध या इच्छाओं के बीच संघर्ष नही रह गया था. सब साफ हो चुका था की मुझे अम्मा की पूजा और उनसे प्यार करने की अपनी दैवीय ज़िम्मेदारी को निभाना है.

अम्मा और मेरे शारीरिक संबंध के बावजूद , अम्मा का रुतबा और उनके लिए इज़्ज़त पहले जैसी ही रही. अम्मा को ऐसे पकड़े रहने और उनकी चूचियों के मेरे बदन से दबने से मुझे उत्तेजना आ रही थी , लेकिन उसके माँ होने की भावना भी मेरे मन में आ रही थी. किसी भी औरत के साथ मैं इस अवस्था में होता तो उत्तेजना की भावना तो आती लेकिन वो एमोशनल फीलिंग नही आती जो अम्मा के साथ आ रही थी.

मैंने अपने अंगूठे से अम्मा के होठों को छुआ. छूने पर उनके होठों में हुए कंपन को मैंने महसूस किया. मैंने धीरे से निचले होंठ को अलग किया और थोड़ा सा अंगूठा अंदर डाला. उन्होने अपने होठों से मेरे अंगूठे का हल्का चुंबन लिया.

मैंने अम्मा की ठोड़ी ऊपर उठाई , अब अम्मा सीधे मेरी आँखो में झाँक रही थी. उनके होंठ खुले हुए थे. मैंने अम्मा की आँखो में देखा और अपने होंठ अम्मा के होठों से मिला दिए. अम्मा के बदन में कंपन हुआ. मैंने उनके मुँह में जीभ घुसा दी. अम्मा ने कोई विरोध नही किया और मजबूती से मुझे पकड़े रखा.हम चुंबन लेते रहे. अम्मा अपनी तरफ से ज़्यादा कुछ नही कर रही थी. उसने अपनी जीभ से मेरे होठों को छुआ और कभी कभार मेरे निचले होंठ को अपने होठों मे भर लेती थी .

थोड़ी देर तक ये हल्का फुल्का प्यार, चुंबन ऐसे ही चलता रहा. फिर मैंने अम्मा के कुर्ते के बटन खोलने शुरू किए. अम्मा बिल्कुल जड़वत हो गयी. उसका पूरा बदन अकड़ गया. मैंने अपने हाथ रोक दिए , कुछ पल बाद जब अम्मा का बदन ढीला पड़ने लगा. तो मैंने फटाफट बटन खोल दिए और अपनी उंगलियों से चूचियों का ऊपरी हिस्सा सहलाने लगा. अम्मा ने मेरे कंधे को कस के पकड़ लिया और दूसरे हाथ से मेरी पीठ को पकड़कर मुझे आलिंगन कर लिया.

मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर अम्मा की चूचियों को सहलाने लगा. मैंने कुर्ते के बाहर से अम्मा की नाभि को सहलाया. फिर मैंने कुर्ते के नीचे से अंदर हाथ घुसाने की कोशिश की लेकिन कुर्ता अम्मा के नीचे दबा हुआ था. अम्मा ने थोड़ा सा अपने नितंब ऊपर को उठाए और मैंने कुर्ता उनके नीचे से हटा दिया. फिर मैंने नीचे से कुर्ते के अंदर हाथ डाला तो अपने पेट पर मेरे हाथों के स्पर्श से अम्मा ने सिसकारी ली. कुछ पल तक मैं अम्मा के मुलायम पेट पर हाथ फिराता रहा और उनकी नाभि को सहलाता रहा. फिर मैं ऊपर को बढ़ा और उसकी चूचियों को छुआ.

एक बार फिर से अम्मा का बदन अकड़ गया. लेकिन उसने कोई विरोध नही किया. मुझे टाइट पकड़े हुए वो सिसकारी ले रही थी. अम्मा की ब्रा के ऊपर से ही मैंने दोनो चूचियों को धीरे से दबाया.

फिर मैंने अम्मा के होठों को चूमा और एक हाथ पीछे ले जाकर ब्रा के हुक खोल दिए. ब्रा की क़ैद से चूचियों को आज़ाद करके मैं उन्हे दबाने और सहलाने लगा. अंगूठे और बीच वाली उंगली के बीच निपल को दबाकर मैंने धीरे से मसला. अम्मा के मुँह से , ओह…माँ! निकला और वो बेड पर पीछे को लेट गयी. मैं भी कोहनियों के बल अम्मा के पास लेट गया. हम दोनो की नज़रें मिली और फिर उसने अपनी आँखे बंद कर ली.

मैंने अम्मा का कुर्ता उतारने की कोशिश की. अम्मा ने अपनी बाँहे उठाकर मुझे मदद की. जैसे ही मैंने कुर्ता उतारा अम्मा ने अपनी बाँह आड़ी रखके चूचियां ढक ली. मैंने अम्मा का चुंबन लिया और उसकी बाँह हटा दी. मैंने उसकी बड़ी चूचियों को मसला और ऐरोला और निपल को जीभ से चाटा. निप्पल पर मेरी जीभ लगते ही अम्मा ने ज़ोर से सिसकारी ली और अपनी बाँह मेरे ऊपर रख दी.

अब हम प्रेमी जोड़े की तरह से थे. अम्मा की शरम और हिचकिचाहट दूर हो चुकी थी.वो धीरे धीरे मेरा साथ दे रही थी. वो एक ऐसी शर्मीली लड़की की तरह व्यवहार कर रही थी जिसे पहली बार छुआ गया हो.

मैंने दोनो हाथों में चूचियां पकड़कर ज़ोर से दबा दिया. अम्मा ने ……. आह भरी और आँखे खोल के मुझे देखा. मेरा सर पकड़कर वो मेरे चेहरे को नज़दीक़ लाई और मेरा चुंबन लेते हुए मेरे मुँह के अंदर जीभ डाल दी. अब हम दोनो जोरदार तरीके से चुंबन लेने लगे. उसने मेरे गालों और माथे को चूमा और फिर से होठों को बेतहाशा चूमने लगी.

मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर अम्मा के पेट पर फिराया और फिर पैजामे के एलास्टिक के अंदर हाथ डाल दिया. मैंने उठकर अम्मा की आँखो में देखा. अम्मा ने शांति से मुझे देखा उसके चेहरे पर कोई भाव नही थे. मेरा हाथ पैजामे के अंदर नीचे को बढ़ता गया और अम्मा के चेहरे के भाव बदलते गये.

जैसी ही मेरे हाथ ने उसकी चूत को छुआ, अम्मा ने अपने निचले होंठ को दाँतो से काट लिया और अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया.

मैंने दूसरे हाथ से अम्मा का मुँह घुमाकर सीधा कर दिया और अम्मा की चूत के उभरे हुए भाग को हथेली में पकड़ लिया. अम्मा ने अपनी आँखे कस कर बंद कर रखी थी.

“अम्मा मुझे देखो.” लेकिन उसने आँखे नही खोली.

मैंने ज़ोर से अम्मा की चूत को अँगुलियों से पकड़कर दबा दिया.“अम्मा प्लीज़.”

अम्मा ने अपनी आँखे खोल दी और मुझे देखा. उसकी आँखो में कामोन्माद दिखा. चूत की दरार की पूरी लंबाई पर मैं उंगली फिराने लगा ऊपर से नीचे तक. अम्मा अपने होठों को काटने लगी, उसने अपनी ठोड़ी ऊपर उठा ली और उसकी जांघें ढीली पड़ गयी.

अम्मा की गीली चूत में मैंने बीच वाली उंगली डाल दी.
“ऊऊओ…ऊओफफ्फ़…माँ!” अम्मा ने सिसकारी ली और अपनी बाँहों में भरके ज़ोर से मेरे होठों का चुंबन ले लिया.

अम्मा ने अपनी जांघें थोड़ी फैला दी. मैंने दो उंगलियाँ डालकर चूत में अंदर बाहर करना शुरू किया. अम्मा ने मेरे होंठ काट लिए और मेरे मुँह में अपनी जीभ घुमाने लगी.

मैं नीचे को जाकर अम्मा के तने हुए निपल को होठों के बीच लेकर बच्चे की तरह चूसने लगा. फिर और नीचे को जाकर अम्मा के पेट पर जीभ फिराने लगा. अम्मा की चूत में ऊँगली करना जारी रखते हुए मैंने उनके मुलायम पेट पर दांतो से हल्के हल्के काट लिया.
अम्मा ऊह…….ओह…..आह…… करती रही.

मैंने अम्मा की चूत से उंगलियाँ बाहर निकाल ली और उनके पैजामे को नीचे खिसकाने लगा. पैजामा उनके नीचे दबा हुआ था इसलिए मैं नीचे नही कर पाया. मैंने उनकी नाभि पर जीभ फिराई और उन्होने थोड़ा सा बदन उठाकर पैजामा उतारने दिया. मैंने घुटनो तक पैजामा खींच लिया. और फिर मैं उनके ऊपर लेट गया.
मैंने कोहनियों के बल ऊपर उठकर अम्मा को देखा , अम्मा ने अपनी नज़रें नही हटाई. उसकी गहरी आँखो में शांति का भाव था. उसके चेहरे पर मुझे हल्की सी मुस्कुराहट दिखी. उसने दोनो हाथों से मेरी टीशर्ट पकड़ी और सर के ऊपर से उतार दी.

अब अम्मा के हाथ मेरी पूरी पीठ को सहला रहे थे. कंधों से लेकर नीचे नितंबों तक. अम्मा अब अपनी नज़र फेर नही रही थी वो सीधे मेरी आँखो में देख रही थी.

फिर मैं अंगूठे से अम्मा की क्लिट को मसलने लगा और दो उंगलियाँ चूत के अंदर बाहर करने लगा.

अम्मा ने अपने होंठ काट लिए और कमर ऐंठ कर टेडी कर दी,”ऊऊओ……..ओह! चिनू बर्दाश्त नही हो रहा है. इतनी दूर ले आए हो की अब वापस नही लौट सकती. प्रेम या वासना , फ़र्क़ बहुत कम होता है मेरे बेटे. मुझे स्वयं अपने ही भाव का भान नही है. तुम अपने को समझो. अगर सब उन्माद ही है तो तुम्हें मेरी सौगंध, ये आख़िरी बार ही होगा. बेटा मुझे और नीचे मत गिराना.”

“ ये क्या है यह तो मैं भी नहीं जानता अम्मा, संभवतः यह प्रेम और वासना में से कुछ भी नहीं है. यह तो उपासना है. अब मैं आपको हिंदू दर्शन पर व्याख्यान तो नहीं दे सकता, बोलिये शिवलिंग क्या है, लिंग और योनि का समागम ही तो है, जो की सृष्टि की रचना का आधार है. अम्मा मैं आपकी योनि को अपना लिंग समर्पित करता हूँ , जहाँ से मेरा जन्म हुआ था उस चक्र को पूर्ण करने के लिए. “

“बोलिये अम्मा, आप कहती हैं की ये पाप है. तब तो क्या संसार के सभी प्राणी अपने माता पिता के पाप का फल हैं. बच्चे के जन्म पर खुशियाँ क्यों, संतान पाप का फल है या परमात्मा का वरदान. अब ये मत कहना की किसे संभोग का अधिकार है और किसे नही. पिताजी जिन्हें आपने विवाह के पहले ना देखा था ना ही प्रेम किया था. वो आपके साथ संभोग कर सकते हैं, उनका आपके साथ यौन संबंध हो सकता है तो फिर आपके अपने शरीर से ही उत्पन्न आपकी संतान का प्रेम , शरीर पर आकर पाप क्यूँ हो जाता है ? बताए अम्मा , ऐसा क्यूँ है ? आपके पास इसका जवाब शायद ना हो लेकिन मुझे तो ये किसी प्रकार का पाप नही लगता है, आपसे संभोग तो मुझे उपासना लगता है.”

“उफ बेटा , कुछ ही घंटो में दार्शनिक हो गये . सच ही कहते हैं पुरुष का दिमाग़ उसकी टाँगों के बीच होता है.” अम्मा शरारतभरी मुस्कान से बोली और मुझे नीचे को खींचकर चूमने लगी.

“amma kya sahi hai kya galat, iska faisla mai ya aap nahi kar sakte hain. Ye bas yunhi ho gaya aur mujhe iska koi afsos ya dukh nahi hai. Aap apne ko dekhiye , aapne virodh karne ki koshish ki thi lekin kahi gehrayi mein aapke andar kuch tha jisne aapke virodh ko kamzor kar diya aur uske baad aapne bhi younsukh ka bharpoor anand liya. Amma aap chahe mane ya na mane lekin aapke andar bhi kuch khalipan ya shunya tha jiske baare mein aap khud anjaan thi.

“amma meri aankho mein dekhiye aur mujhse kahiye ki jo kuch hua uske baad aap mujhse grihna karti hain aur aap ise jari nahi rakhna chahti hain. Meri saugandh lijiye amma , uske baad mai kabhi aapko pareshan nahi karunga. Mere hridya me aap meri kaam ki devi ki tarah rahengi lekin mai aapse phir kabhi sambhog ke liye nahi kahunga. Bataiye mujhe amma .“ meri aankho se aansu behne lage.

Amma ne apni badi badi aankho se mujhe dekha aur badbadayi ,” he ishwar !”
Wo mujhe aise hi dekhti rahi jaise mujhe nahi balki mere andar meri aatma mein kuch dekh rahi ho.

Phir mai amma ke nazdeeq baith gaya , amma ne thoda khisakkar mujhe jagah di. Mene apni banh amma se lapetkar unhe apni or khincha. Amma ne mere kandhe par apna sar rakh diya aur meri chati par apni banh lapetkar mujhe pakad liya. Mene amma ke chehre ko sehlaya to unke munh se ek siskari nikli aur mere badan mein apna chehra chupa liya.

Amma ko apne se lagaye hue mai baitha raha. Us samay kuch aise feeling thi jaisa pehle kabhi mehsoos nahi hua tha. Wo wasna nahi thi, pyar bhi nahi tha, ek ajeb si bhawna thi , kya tha mujhe bhi nahi pata. Ab mere andar koi apradhbodh ya icchaon ke beech sangharsh nahi reh gaya tha. Sab saaf ho chuka tha ki mujhe amma ki puja aur unse pyar karne ki apni deviye jimmedari ko nibhana hai.

Amma aur mere sharirik sambandh ke bavjood , amma ka rutba aur unke liye izzat pehle jaisi hi rahi. Amma ko aise pakde rehne aur unki chuchiyon ke mere badan se dabne se mujhe uttezna aa rahi thi , lekin uske maa hone ki bhawna bhi mere man mein aa rahi thi. kisi bhi aurat ke sath mai is awastha mein hota to uteezna ki bhavna to aati lekin wo emotional feeling nahi aati jo amma ke sath aa rahi thi.

Mene apne anguthe se amma ke hothon ko chua. Chune par unke hothon mein hue kampan ko mene mehsoos kiya. mene dhire se nichle hoth ko alag kiya aur thoda sa angutha andar dala. Unhone apne hothon se mere anguthe ka halka chumban liya.

Mene amma ki thodi upar uthayi , ab amma sidhe meri aankho mein jhank rahi thi. unke hoth khule hue the. mene amma ki aankho mein dekha aur apne hoth amma ke hotho se mila diye. Amma ke badan mein kampan hua. Mene unke munh mein jeebh ghusa di. Amma ne koi virodh nahi kiya aur majbooti se mujhe pakde rakha.hum chumban lete rahe. Amma apni taraf se jyada kuch nahi kar rahi thi. usne apni jeebh se mere hothon ko chua aur kabhi kabhar mere nichle hoth ko apne hothon me bhar leti thi .

Thodi der tak ye halka phulka pyar, chumban aise hi chalta raha. Phir mene amma ke kurte ke button kholne suru kiye. Amma bilkul jadwat ho gayi. uska pura badan akad gaya. Mene apne hath rok diye , kuch pal baad jab amma ka badan dhila padne laga. To mene fatafat button khol diye aur apni ungliyon se chuchiyon ka upari hissa sehlane laga. Amma ne mere kandhe ko kas ke pakad liya aur dusre hath se meri peeth ko pakadkar mujhe alingan kar liya.

Mai apne hath ko niche le jakar amma ki chuchiyon ko sehlane laga. Mene kurte ke bahar se amma ki nabhi ko sehlaya. Phir mene kurte ke niche se andar hath ghusane ki koshish ki lekin kurta amma ke niche daba hua tha. Amma ne thoda sa apne nitamb upar ko uthaye aur mene kurta unke niche se hata diya. Phir mene niche se kurte ke andar hath dala to apne pet par mere hathon ke sparsh se amma ne siskari li. Kuch pal tak mai amma ke mulayam pet par hath firata raha aur unki nabhi ko sehlata raha. Phir mai upar ko bada aur uski chuchiyon ko chua.

Ek baar phir se amma ka badan akad gaya. Lekin usne koi virodh nahi kiya. mujhe tight pakde hue wo siskari le rahi thi. amma ki bra ke upar se hi mene dono chuchiyon ko dhire se dabaya.

Phir mene amma ke hothon ko chuma aur ek hath piche le jakar bra ke hook khol diye. Bra ki qaid se chuchiyon ko azad karke mai unhe dabane aur sehlane laga. Anguthe aur beech wali ungli ke beech nipple ko dabakar mene dhire se masla. Amma ke munh se , oh…maa! nikla aur wo bed par piche ko let gayi. mai bhi kohniyon ke bal amma ke pass let gaya. Hum dono ki nazren mili aur phir usne apni aankhe band kar li.

Mene amma ka kurta utarne ki koshish ki. Amma ne apni banhe uthakar mujhe madad ki. Jaise hi mene kurta utara amma ne apni banh aadi rakhke chuchiyan dhak li. Mene amma ka chumban liya aur uski banh hata di. Mene uski badi chuchiyon ko masla aur aerola aur nipple ko jeebh se chata. Nipplepar meri jeebh lagte hi amma ne zor se siskari li aur apni banh mere upar rakh di.

Ab hum premi jode ki tarah se the. amma ki sharam aur hichkichahat dur ho chuki thi.wo dhire dhire mera sath de rahi thi. wo ek aise sharmili ladki ki tarah vyavhar kar rahi thi jise pehli baar chua gaya ho.

Mene dono hathon mein chuchiyan pakadkar jor se daba diya. Amma ne …….aah bhari aur aankhe khol ke mujhe dekha. Mera sar pakadkar wo mere chehre ko nazdeeq layi aur mera chumban lete hue mere munh ke andar jeebh daal di. Ab hum dono jordar tareeke se chumban lene lage. Usne mere gaalon aur mathe ko chuma aur phir se hothon ko betahasha chumne lagi.

Mene apna hath niche le jakar amma ke pet par firaya aur fir pyjame ke elastic ke andar hath daal diya. Mene uthkar amma ki aankho mein dekha. Amma ne shanti se mujhe dekha uske chehre par koi bhav nahi the. mere hath pyjame ke andar niche ko badta gaya aur amma ke chehre ke bhav badalte gaye.

Jaisi hi mere hath ne uski choot ko chua, amma ne apne nichle hoth ko danto se kaat liya aur apna munh dusri taraf ghuma liya.

Mene dusre hath se amma ka munh ghumakar sidha kar diya aur amma ki choot ke ubhare hue bhag ko hatheli mein pakad liya. Amma ne apni aankhe kas kar band kar rakhi thi.

“amma mujhe dekho.” Lekin usne aankhe nahi kholi.

Mene zor se amma ki choot ko hatheli se daba diya. “amma please.”

Amma ne apni aankhe khol di aur mujhe dekha. Uski aankho mein kamonmaad dikha. Choot ki darar ki puri lambai par mai ungli firane laga upar se niche tak. Amma apne hothon ko katne lagi, usne apni thodi upar utha li aur uski janghe dhili pad gayi.

Amma ki gili choot mein mene beech wali ungli daal di.
“ooooo…ooofff…maa!” amma ne siskari li aur apni banhon mein bharke jor se mere hothon ka chumban le liya.

Amma ne apni janghe thodi faila di. Mene do ungliyan dalkar choot mein andar bahar karna suru kiya. amma ne mere hoth kaat liye aur mere munh mein apni jeebh ghumane lagi.

Mai niche ko jakar amma ke tane hue nipple ko hothon ke beech lekar bacche ki tarah chusne laga. Phir aur niche ko jakar amma ke pet par jeebh firane laga. Amma ki choot mein ungli karna jari rakhte hue mene unke mulayam pet par daanto se halke halke kaat liya.

Amma ooo…ohh…..aaaa..aaahhhh karti rahi.

Mene amma ki choot se ungliyan bahar nikaal li aur unke pyjame ko niche khiskane laga. Pyjama unke niche daba hua tha isliye mai niche nahi kar paya. Mene unki nabhi par jeebh firayi aur unhone thoda sabadan uthakar pyjama utarne diya. Mene ghutno tak pyjama khinch liya. Aur phir mai unke upar let gaya.

Mene kohniyon ke bal upar uthkar amma ko dekha , amma ne apni nazren nahi hatayi. Uski gehri aankho mein shanti ka bhav tha. Uske chehre par mujhe halki si muskurahat dikhi. Usne dono hathon se meri tshirt pakdi aur sar ke upar se utar di.

Ab amma ke hath meri puri peeth ko sehla rahe the. kandhon se lekar niche nitambon tak. Amma ab apni nazar fer nahi rahi thi wo sidhe meri aankho mein dekh rahi thi.

Phir mai unguthe se amma ki clit ko masalne laga aur do ungliyan choot ke andar bahar karne laga.

Amma ne apne hoth kaat liye aur kamar aith kar tedi kar di,”ooooo…oooh ! chinu bardast nahi ho raha hai. Itni dur le aaye ho ki ab vapas nahinlaut sakti. Prem ya wasna , farq bahut kam hota hai mere bete. Mujhe swayam apne hi bhaw ka bhan nahi hai. Tum apne ko samjho. Agar sab unmad hi hai to tumhein meri saugandh, ye akhiri baar hi hoga. Beta mujhe aur niche mat girana.”

“ Ye kya hai yeh to main bhi nahin janta Amma, sambhavtah yeh prem aur vasna mein se kuch bhi nahin hai. Yeh to Upasna hai. Ab main aapko Hindu Darshan par vyakhyan to nahin de sakta, boliye shivling kya hai, Ling aur yoni ka samagam hi to hai, jo ki srishti ki rachna ka adhar hai. Amma mai aapki yoni ko apna ling samarpit karta hun , jahan se mera janam hua tha us chakra ko purna karne ke liye. “

“Boliye Amma, aap kehti hain ki ye paap hai. tab to kya sansar ke sabhi prani apne mata pita ke pap ka phal hain. Bachche ke janm par khushiyan kyon, santan pap ka phal hai ya Parmatma ka vardan. Ab ye mat kehna ki kise sambhog ka adhikar hai aur kise nahi. Pitaji jinhein aapne vivah ke pahle na dekha tha na hi prem kiya tha. Wo aapke sath sambhog kar sakte hain, unka aapke sath yaun sambandh ho sakta hai to phir aapke apne shareer se hi utpann apki santan ka prem , shareer par akar paap kyun ho jata hai ? bataye amma , aisa kyun hai ? aapke paas iska jawab sayad na ho lekin mujhe to ye kisi prakar ka paap nahi lagta hai, aapse sambhog to mujhe upasana lagta hai.”

“uff beta , kuch hi ghanto mein darshnik ho gaye . sach hi kehte hain purush ka dimaag uski tangon ke beech hota hai.” Amma shararatbhari muskan se boli aur mujhe niche ko khinchkar chumne lagi.
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(ज़िद (जो चाहा वो पाया) complete).
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
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(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by Kamini » 30 Oct 2017 22:15

Matt update

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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by jay » 31 Oct 2017 20:15

Kamini wrote:
30 Oct 2017 22:15
Matt update
thanks
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Re: मेरी धार्मिक माँ

Post by jay » 31 Oct 2017 20:16

मैंने अम्मा के पैजामे के एलास्टिक में अपने पैर का अंगूठा फसाया और पैजामे को नीचे को खींच दिया. अम्मा ने अपने पैरों को हिलाकर पैजामे को अपने पैरो से निकाल दिया. अब मेरी प्यारी अम्मा मेरी बाँहों में बिल्कुल नग्न थी. लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुझे कोई जल्दबाज़ी नही थी , एक पुरुष और स्त्री नग्न होकर जैसे एक दूसरे के ऊपर टूट पड़ते हैं , वैसा कुछ भी नही था. मैं शांत भाव से आगे बढ़ रहा था. अपना शांत भाव देखकर मुझे खुद हैरानी हो रही थी. तभी मुझे अम्मा को पूर्ण रूप से देखने की इच्छा हुई. और मैं बेड से उठकर थोड़ी दूर खड़ा हो गया और अम्मा को देखने लगा.

मुझे ऐसे देखते हुए पाकर अम्मा ने अपने को ढकने की कोशिश की. मैंने नीचे झुककर अम्मा को रोका,”अम्मा मुझे रति के रूप की ये छवि देखने दो. प्लीज़ मुझे इस दृश्य को देखने से वंचित मत कीजिए.”

मेरी प्रार्थना सुनकर अम्मा शांत पड़ गयी. उसने अपने घुटने मोड़ लिए और कमर थोड़ी टेडी करते हुए हाथ फैला लिए. अम्मा उस पोज़ में खजुराहो के मंदिरों में गढ़ी हुई किसी नारी की तरह कामुक लग रही थी. और उसके चेहरे की मुस्कुराहट देखकर तो मेरा पानी ही निकलने को हो गया.

मैंने अपना शॉर्ट उतार दिया और अम्मा के बगल में लेट गया. एक हाथ अम्मा की गर्दन के नीचे डालकर मैंने उसे चुंबन के लिए अपनी ओर खींचा. अम्मा ने चुंबन में पूरा साथ देते हुए मेरे मुँह में जीभ घुसा दी. उसके हाथ मेरी नंगी पीठ को, कंधे से लेकर नितंबों तक सहलाने लगे. मेरे नितंबों के बीच की दरार पर अम्मा ने उंगलियाँ फिराई. मेरे नितंबों को उसने दबाया और सहलाया. अब हमारे बीच अपराधबोध जैसी कोई भावना नही रह गयी थी , ये इतना आनंददायक था की मैं बिना संभोग किए हुए ही दिन भर अम्मा के साथ ऐसे ही लेटे रह सकता था. मेरे लिए जैसे समय रुक सा गया था. आनंद के उन पलों को मैं लंबा खींचना चाहता था, ऐसा लग रहा था की ये पल कभी ख़तम ही ना हो.

मैंने अम्मा का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया. अम्मा ने पहले हल्के से लंड को छुआ फिर हल्के से पकड़ लिया. कुछ पल बाद, जो मुझे बहुत लंबे लगे, उसने मेरी गोलियों को सहलाना शुरू किया.मैंने अपना सर उठाकर अम्मा को देखा.

“मुझे गर्व है की तुम मेरे ही शरीर से उत्पन्न हो “, मेरे लंड पर हाथ फिराते हुए अम्मा बोली. फिर उसने लंड को ज़ोर से दबाया और मेरा सर नीचे को खींचकर अपनी छाती में दबा लिया.

अम्मा की चूचियों के बीच से सर उठाकर मैं नीचे को बढ़ा और उसकी जांघों के बीच आ गया. अम्मा की चूत में मुँह लगाने से पहले ही उसने मुझे रोक दिया.

“चिनू आज आनंद का समय नही है. आज बेटा मुझे लाज और संसारिकता की इस दुर्गम नदी के पार ले चलो. आनंद के अवसर तो और भी आएँगे. इससे पहले की मेरा साहस टूट जाए , आज मुझे बहा के ले चल बेटा .”

अम्मा की चूत में जीभ घुसाने की अपनी इच्छा को रोकते हुए मैं ऊपर को बढ़ा और उसकी जाँघो के ऊपर झुक गया. अपनी जाँघो को फैलाकर अम्मा ने मुझे जगह दी. लंड को हाथ से पकड़कर मैंने अम्मा की चूत के होठों और क्लिट पर रगड़ना शुरू किया. अम्मा ने अपनी कमर उठा दी और क्लिट को रगड़ने से वो सिसकारी लेने लगी.

“हे माँ, इस अलौकिक संसर्ग की अनुमति माँग रहा हूँ. मुझे, अपने पुत्र को, अपनी योनि में स्वीकार कीजिए माँ.” अम्मा के दोनो तरफ हाथ रखकर मैंने अम्मा की आँखो में देखा , जिनमे आनंद और आँसू दोनो ही मुझे दिखा.

“आओ , मेरा उपभोग करो बेटा. तुम्हारी माँ तुम्हारा स्वागत करती है. परंतु तुमको सौगंध है अपने उत्तरदायित्व और मर्यादा का पालन करने की.” ऐसा कहते हुए अम्मा ने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के छेद पर लगा दिया. अपने नितंबों को थोड़ा ऊपर करके उसने मुझे धक्का देने का इशारा किया.

मैंने धीरे से लंड को अम्मा की चूत के अंदर डाला . अम्मा की चूत के होठों ने फैलकर मेरे लंड को अंदर घुसने दिया. बहुत ही आनंद की अनुभूति हो रही थी. फिर मैंने पूरा लंड बाहर निकालकर अम्मा की कमर पकड़कर एक झटके में जड़ तक चूत में घुसा दिया.

अम्मा के मुँह से लंबी सिसकारी निकली. मैंने सर उठाकर अम्मा को देखा. वो अपने होंठ काट रही थी और कमर टेडी कर रखी थी. लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ की उसकी आँखे बंद नही थी. वो सीधे मेरी आँखो में देख रही थी. वो मुझे देखती रही फिर उसने मेरे लिए अपनी बाँहे उठा दी. मैं अम्मा की बाँहो में आ गया और अपने होंठ उसके होठों से मिला दिए. अम्मा की चूत की गर्मी अपने लंड पर महसूस करते हुए मैंने अम्मा के मुँह में जीभ घुसा दी.

फिर मैं धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने लगा. अम्मा ने अपनी टाँगे उठाकर मेरी कमर पर लपेट दी. इशारे को समझते हुए मैं लंबे स्ट्रोक लगाकर अम्मा की चुदाई करने लगा. आधे से ज़्यादा लंड बाहर निकालकर मैं एक झटके से अंदर घुसा दे रहा था. जिससे अम्मा का बदन हिल जा रहा था. अम्मा की आँखो में देखते हुए मैं ऐसा करते रहा. अम्मा अपने निचले होंठ को काटते हुए “ऊओफफ्फ़……आअहह…ओह…बेटा….उम्म्म्म” करती रही. अम्मा की सिसकारियों से मैं बहुत उत्तेजित हो गया लेकिन अपने ऊपर काबू रखते हुए मैंने धीमे धीमे चुदाई जारी रखी.

अम्मा की चूत में लंड घुसाए रखकर मैं अम्मा के पूरे बदन को देखने लगा. मैंने अपने लंड को देखा जो अम्मा की चूत में घुसा हुआ था. मैंने थोड़ा अंदर डाला और फिर बाहर निकाल लिया. मेरी प्यारी अम्मा की चूत के रस से लंड पूरा भीग गया था. वोही चूत जो कल तक मेरे लिए असंभव थी, वोही चूत जिससे मेरा जन्म हुआ था. उस फीलिंग को शब्दों में बयान नही किया जा सकता. मैंने अम्मा की जांघों पर हाथ फिराया और ज़ोर से माँस को दबा दिया. अम्मा को देखा , वो मुस्कुरा रही थी.

“जो तुम्हारी आँखों में देख रही हूँ वो पाप नही हो सकता मेरे बेटे. मुझे आज तक आभास नही हुआ की क्या ऐसा है जिसकी मुझे तलाश थी. पर अदभुत पूर्णता का आभास हो रहा है. ऐसा लग रहा है की मुझे इसका इंतज़ार था. आ मेरे बेटे पूर्ण कर दे अपनी माँ को.” ऐसा कहते हुए अम्मा ने अपनी जांघें उठा दी और अपने नितंबों को ऊपर को मोड़कर अपनी चूत ऊपर उठा दी. मैंने अपने दोनो हाथों पर वजन डालकर चूत पर गहरे धक्के मारने शुरू किए. इस पोज़ में बहुत गहराई तक चूत के अंदर लंड घुस जा रहा था. धक्कों से अम्मा की चूचियां हिलने लगी और उसने अपनी ठोड़ी ऊपर उठा दी.

“उफ़फ्फ़ माँ, आआहह बेटा……....भर दो मुझे बेटा. मुझे विश्वास नही हो रहा की मैं ये कर रही हूँ लेकिन मुझे अच्छा लग रहा है. एयेए……आह……. बेटा.”

अम्मा ने मुझे और तेज़ी से करने को कहा. अब मैं अम्मा की तेज तेज चुदाई करने लगा. अम्मा ने अपना सर उठाकर लंड को चूत में घुसते देखा. फिर उसने अपनी बाँहे मेरी पीठ में लपेटकर मुझे अपनी ओर खींचा. मैं नीचे आकर अम्मा की चूचियों के निपल को चूसने लगा. इससे अम्मा का आनंद कई गुना बढ़ गया.

“पी लो बेटा. काश आज भी मेरे स्तनों में दूध होता.”

मैंने ज़ोर से निपल को चूसा.

“एयाया…….आह चिनू.” अम्मा सिसकी.

अम्मा की चुदाई करते हुए दोनो चूचियों को मैंने खूब चूसा. ऐसा आनंद मुझे पहले कभी नही आया था.

अब अम्मा ने अपने हाथ मेरे नितंबों पर रख दिए और उनको कसके पकड़कर वो मुझे अपनी ओर खींचने लगी. और हर धक्के के साथ उसकी सिसकारी निकल जा रही थी. मुझे अभी भी लगता है , काश मैं उस दृश्य को कैमरे में क़ैद कर पाता. (हालाँकि बाद में घर में हमारे संबंधों के दौरान मैंने इच्छा प्रकट की थी , हमारी चुदाई को रेकॉर्ड करने की और वो तैयार हो गयी थी. और जब उसने रेकॉर्डिंग देखी तो फिर जब भी हम चुदाई करते वो हैंडीकैम से रेकॉर्ड करने को कहती)

अचानक अम्मा ने अपने नितंबों को ऊपर उछालना शुरू किया, मेरे हर धक्के का जवाब वो नीचे से देने लगी. हमारे बदन के टकराने की आवाज़ पूरे कमरे तैयार गूंजने लगी. वो इतनी ज़ोर से अपने नितंबों को ऊपर उछाल रही थी की उसका साथ देना मेरे लिए मुश्किल हो गया. ठप ठप ठप की आवाज़ के साथ अम्मा की सिसकारियाँ कमरे तैयार गूंजने लगी.

मुझे ऐसा लगा की अब अम्मा अपने ओर्गास्म के नज़दीक़ है. अपनी जांघों के बीच वो मुझे किसी गुड्डे की तरह ऊपर उछाल रही थी.

“चिनू………..आह…………बेटे तेज करो…………..ऊऊहह……....बेटा मैं मझधार में हूँ , मुझे पार करा दे मेरे बच्चे.”

अम्मा के कहने का मतलब था मुझे ओर्गास्म आने वाला है, तेज धक्के लगाकर मुझे ओर्गास्म दिला दो.
Mene amma ke pyjame ke elastic mein apne pair ka angutha fasaya aur pyjame ko niche ko khinch diya. Amma ne apne pairon ko hilakar pyjme ko apne pairo se nikaal diya. Ab meri pyari amma meri banhon mein bilkul nagn thi. lekin ascharyajank roop se mujhe koi jaldbaji nahi thi , ek purush aur stree nagn hokar jaise ek dusre ke upar tut padte hain , waisa kuch bhi nahi tha. Mai shant bhav se aage bad raha tha. Apna shant bhav dekhkar mujhe khud hairani ho rahi thi. tabhi mujhe amma ko purn roop se dekhne ki iccha hui. Aur mai bed se uthkar thodi dur khada ho gaya aur amma ko dekhne laga.

Mujhe aise dekhte hue pakar amma ne apne ko dhakne ki koshish ki. Mene niche jhukkar amma ko roka,”amma mujhe rati ke roop ki ye chavi dekhne do. Please mujhe is drishya ko dekhne se wanchit mat kijiye.”

Meri prarthna sunkar amma shant pad gayi. usne apne ghutne mod liye aur kamar thodi tedi karte hue hath faila liye. Amma us pose mein khajuraho ke mandiron mein gadi hui kisi nari ki tarah kamuk lag rahi thi. aur uske chehre ki muskurahat dekhkar to mera pani hi nikalne ko ho gaya.

Mene apna short utar diya aur amma ke bagal mein let gaya. ek hath amma ki gardan ke niche dalkar mene use chumban ke liye apni or khincha. Amma ne chumban mein pura sath dete hue mere munh mein jeebh ghusa di. uske hath meri nangi peeth ko, kandhe se lekar nitambon tak sehlane lage. Mere nitambon ke beech ki darar par amma ne ungliyan firayi. Mere nitambon ko usne dabaya aur sehlaya. Ab hamare beech aprathboth jaisi koi bhavna nahi reh gayi thi , ye itna ananddayak tha ki mai bina sambhog kiye hue hi din bhar amma ke sath aise hi lete reh sakta tha. Mere liye jaise samay ruk sa gaya tha. Anand ke un palon ko mai lamba khinchna chahta tha, aisa lag raha tha ki ye pal kabhi khatam hi na ho.

Mene amma ka hath pakda aur apne lund par rakh diya. Amma ne pehle halke se lund ko chua phir halke se pakad liya. Kuch pal baad, jo mujhe bahut lambe lage, usne meri goliyon ko sehlana suru kiya.mene apna sar uthakar amma ko dekha.

“mujhe garv hai ki tum mere hi sharir se utpann ho” , mere lund par hath firate hue amma boli. Phir usne lund ko jor se dabaya aur mera sar niche ko khinchkar apni chati mein daba liya.

Amma ki chuchiyon ke beech se sar uthakar mai niche ko bada aur uski janghon ke beech aa gaya. amma ki choot mein munh lagane se pehle hi usne mujhe rok diya.

“chinu aaj anand ka samay nahi hai. Aaj beta mujhe laj aur sansarikta ki is durgam nadi ke par le chalo. Anand ke awsar to aur bhi ayenge. isse pehle ki mera sahas tut jaye , aaj mujhe baha ke le chal beta .”

Amma ki choot mein jeebh ghusane ki apni iccha ko rokte hue mai upar ko bada aur uski jangho ke upar jhuk gaya. apni jangho ko failakar amma ne mujhe jagah di. lund ko hath se pakadkar mene amma ki choot ke hothon aur clit par ragadna suru kiya. amma ne apni kamar utha di aur clit ko ragadne se wo siskari lene lagi.

“hey maa, is alaukik sansarg ki anumati mang raha hun. Mujhe, apne putra ko, apni yoni mein swikar kijiye maa.” Amma ke dono taraf hath rakhkar mene amma ki aankho mein dekha , jinme anand aur aansu dono hi mujhe dikha.

“aao , mera upbhog karo beta. Tumhari maa tumhara swagat karti hai. Parantu tumko saugandh hai apne uttardayitva aur maryada ka palan karne ki.” Aisa kehte hue amma ne mere lund ko pakda aur apni choot ke ched par laga diya. Apne nitambon ko thoda upar karke usne mujhe dhakka dene ka ishara kiya.

Mene dheere se lund ko amma ki choot ke andar dala . amma ki choot ke hothon ne failkar mere lund ko andar ghusne diya. Bahut hi anand ki anubhuti ho rahi thi. phir mene pura lund bahar nikalkar amma ki kamar pakadkar ek jhatke mein jad tak choot mein ghusa diya.

Amma ke munh se lambi siskari nikli. Mene sar uthakar amma ko dekha. Wo apne hoth kaat rahi thi aur kamar tedi kar rakhi thi. lekin mujhe ascharya hua ki uski aankhe band nahi thi. wo sidhe meri aankho mein dekh rahi thi. wo mujhe dekhti rahi phir usne mere liye apni banhe utha di. mai amma ki banho mein aa gaya aur apne hoth uske hothon se mila diye. Amma ki choot ki garmi apne lund par mehsoos karte hue mene amma ke munh mein jeebh ghusa di.

Phir mai dhire dhire lund ko andar bahar karne laga. Amma ne apni tange uthakar meri kamar par lapet di. ishare ko samajhte hue mai lambe stroke lagakar amma ki chudai karne laga. Aadhe se jyada lund bahar nikalkar mai ek jhatke se andar ghusa de raha tha. Jisse amma ka badan hil ja raha tha. Amma ki aankho mein dekhte hue mai aisa karte raha. Amma apne nichle hoth ko katte hue “ooofff……aaahhh…ohhhhh…beta….ummmm” karti rahi. Amma ki siskariyon se mai bahut uttezit ho gaya lekin apne upar kabu rakhte hue mene dhime dhime chudai jari rakhi.

Amma ki choot mein lund ghusaye rakhkar mai amma ke pure badan ko dekhne laga. Mene apne lund ko dekha jo amma ki choot mein ghusa hua tha. Mene thoda andar dala aur phir bahar nikal liya. Meri pyari amma ki choot ke ras se lund pura bheeg gaya tha. Wohi choot jo kal tak mere liye asambhav thi, wohi choot jisse mera janam hua tha. Us feeling ko sabdon mein bayan nahi kiya ja sakta. Mene amma ki janghon par hath firaya aur jor se mans ko daba diya. Amma ko dekha , wo muskura rahi thi.

“jo tumhari aankhon mein dekh rahi hun wo paap nahi ho sakta mere bete. Mujhe aaj tak abhas nahi hua ki kya aisa hai jiski mujhe talash thi. par adbhut purnta ka abhash ho raha hai. Aisa lag raha hai ki mujhe ishka intezar tha. Aa mere bete purn kar de apni maa ko.” Aisa kehte hue amma ne apni janghe utha di aur apne nitambon ko upar ko modkar apni choot upar utha di. mene apne dono hathon par wajan dalkar choot par gehre dhakke marne suru kiye. Is pose mein bahut gehrayi tak choot ke andar lund ghus ja raha tha. Dhakkon se Amma ki chuchiyan hilne lagi aur usne apni thodi upar utha di.

“ufff maa, aaaahhhhh beta……..bhar do mujhe beta. Mujhe viswas nahi ho raha ki mai ye kar rahi hun lekin mujhe accha lag raha hai. Aaa…aah beta.”

Amma ne mujhe aur teji se karne ko kaha. Ab mai amma ki tej tej chudai karne laga. Amma ne apna sar uthakar lund ko choot mein ghuste dekha. Phir usne apni banhe meri peeth mein lapetkar mujhe apni or khincha. Mai niche aakar amma ki chuchiyon ke nipple ko chusne laga. Isse amma ka anand kai guna bad gaya.

“pe lo beta. Kash aaj bhi mere stanon mein doodth hota.”

Mene jor se nipple ko chusa.

“aaaaa…aaah chinu.” Amma siski.

Amma ki chudai karte hue dono chuchiyon ko mene khoob chusa. Aisa anand mujhe pehle kabhi nahi aaya tha.

Ab amma ne apne hath mere nitambon par rakh diye aur unko kaske pakadkar wo mujhe apni or khinchne lagi. aur har dhakke ke sath uski siskari nikal ja rahi thi. mujhe abhi bhi lagta hai , kash mai us drishya ko camera mein qaid kar pata. (halaki baad mein ghar mein hamare sambandhon ke dauran mene iccha prakat ki thi , hamari chudai ko record karne ki aur wo tayyar ho gayi thi. aur jab usne recording dekhi to phir jab bhi hum chudai karte wo handycam se record karne ko kehti).

Achanak amma ne apne nitambon ko upar uchalna suru kiya, mere har dhakke ka jawab wo niche se dene lagi. hamare badan ke takrane ki awaz pure kamre mein gujne lagi. wo itni jor se apne nitambon ko upar uchal rahi thi ki uska sath dena mere liye mushkil ho gaya. THAP THAP THAP ki awaz ke sath amma ki siskariyan kamre min gujne lagi.

Mujhe aisa laga ki ab amma apne orgasm ke nazdeeq hai. Apni janghon ke beech wo mujhe kisi gudde ki tarah upar uchal rahi thi.

“chinu….aah …bete tej karo……..oooohhhhh…..beta mai majhdhar mein hun , mujhe par kara de mere bacche.”

Amma ke kehne ka matlab tha mujhe orgasm aane wala hai, tej dhakke lagakar mujhe orgasm dila do.
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