ना होंगे जुदा…..यह वादा रहा

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rajaarkey
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ना होंगे जुदा…..यह वादा रहा

Post by rajaarkey » 20 May 2016 08:00

ना होंगे जुदा…..यह वादा रहा

“ तुम कातिल हो …तुम जल्लाद हो”
“ मैने तुमसे कैसे प्यार किया…मुझे समझ मे नही आता…मुझे क्या पता था, इस भोले भाले चेहरे के पिछे एक खूनी भेड़िया छुपा है”
“ घिन आती है मुझे, अपने आपसे ..इन खूनी हाथो ने मेरे चेहरे को छुआ था…मुझे बाहों मे जकड़ा था…छी …मुझे घिन आती है….और तुम पे थूकने का मन करता है”

“ चले जाओ मेरी नज़रो के सामने से..फिर कभी अपना ये भोला चेहरा मत दिखाना मुझे, जिस के भोलेपन मे पता नही कैसे मैं खो सी गयी थी”

उसके चेहरे पे दर्द भी था और नफ़रत भी…मुझे उसके चेहरे के दर्द को देख के दुख हो रहा था तो दूसरी तरफ किसी को उसकी आँखों मे नफ़रत देख के गुस्सा आ रहा था. जहाँ मुझे उसकी एस हालत पे तरस आ रहा था तो किसी को उसके बोल किसी नस्तर की तरह चुभ रहे थे.
“ कैसे होंगे तुम्हारे माँ बाप जिन्होने , अपने बेटे को किसी की जान लेने की आज़ादी दे रखी है…तुम कौन होते हो किसी की जान लेने वाले…”
“ मैं किस से बातें कर रही हूँ…एक हैवान से ..जिसे कोई मतलब नही है किसी के दर्द की..किसी के प्यार की …किसी के जज़्बात की…मेरी किस्मत इतनी खराब थी कि मुझे प्यार भी हुआ तो एक जानवर से..जिसे लोगों का खून करने का शौक है” वो अपनी भावनाओ को रोक नही पाई और उसके आँखो से नीर झरने लगे और उसके आगे कुच्छ नही बोल पाई वो, ….और बस वहाँ से पलटी और चली गयी उसने हमे बोलने का मौका भी नही दिया.
…………………………………………………….
वो काजल थी, जिसके आने से हमारी ज़िंदगी ने एक नया मोड़ लिया था…ये उसी का जादू था कि हुमने सराफ़ात की ज़िंदगी जीने की कोशिश सुरू की थी..

आज इस , बंद कोठरी मे लेटे हुए मैं बस उसी को याद कर रहा था….मुझे तो कभी ये भी समझ मे नही आया कि वो प्यार किसे करती थी मुझे या इसको , जिसे बस हमेशा गुस्सा ही आता है…और जब ये गुस्सा अपने चरम पे होता है..ये मेरी एक बात नही सुनता है…बस अपनी मन का करता है.
हमे एक साथ ही जीना था, ये मेरी मजबूरी थी…लेकिन मैने हमेशा ये कोशिश की इसको बदलने की…थोड़ा कामयाब भी हुआ..लेकिन आख़िरी बाज़ी हमेशा यही जीत जाता है.
“ क्या सोच रहा है…”
“ काजल के बारे मे..पता नही कैसी होगी वो, हमारे जैल आने के बाद ..उसका क्या हाल होगा पता नही” मुझे ऐसे लगा जैसे मैं अपने आप से बातें कर रहा हूँ…क्योकि उसने तो काजल के नाम पे अपना मूह मोड़ लिया..जैसे उसने हमेशा काजल से नफ़रत ही की है.
मैने उसे टोका “ क्या तुम उसको याद नही करते”
“ नही मैं उसे याद नही करता …और करना भी नही चाहता…मुझे तो बस यहाँ से बाहर निकल कर अपना बाकी का काम निपटाना है”
“छोड़ क्यों नही देते अब ये सब…क्या हम कुच्छ अच्छा काम नही कर सकते” मैने उसका दिल टटोलने की कोशिश की.
“ अबे चुप कर..क्या अच्छा और क्या बुरा…यही हमारी किस्मत है..जो हम कर रहे है, हमेशा भाषण देने लगता है…तेरे और उस लड़की मे कोई अंतर नही है…ज़्यादा याद आ रही है तो चला जा उसके पास…भूल गया, किस तरह से उसने बात कही थी उस दिन और उसी की वजह से हमे जेल हुई” उसने गुस्से से जैसे मुझे देखा मैं एक पल के लिए डर गया.

“ लेकिन उसने जो भी कहा उसमे ग़लत क्या है…वो हमारे इस खून ख़राबे वाले धंधे से खुश नही है..और हम ने उसे बताया भी नही था…उस बेचारी को जब पता चला उसने अपना गुस्सा निकाला हम पे…मुझे बहुत दुख है उस से अलग होके,

….मुझे उसकी फिकर हो रही है..उस दिन के बाद मिल भी नही पाया उस से..और आज इस बात को पूरे एक साल हो गये है.” मैं एक साँस मे अपनी बात कहता चला गया.

“ ज़्यादा मजनू बनने की ज़रूरत नही है, बस आराम से सो जा, अगर सब कुच्छ सही रहा तो कल हम लोग बाहर होंगे” उसने अपना चेहरा फिर से मोड़ लिया.

“ तो क्या तुम यहाँ से भागने का प्लान बना रहे हो…” मैने उसे टोकने की कोशिश की.

“ चुप बे साले….सो जा अब, दिमाग़ की माँ बेहन कर के रख दिया है इतनी देर से.” और मैने अपने ज़ुबान को जैसे सील लिया उसकी फुफ्कार से डर से..मुझे उसके गुस्से का पूरा अनुभव था.

लेकिन मेरा दिल अभी भी बार बार काजल के बारे मे सोचने पे मजबूर था, मैं अपने आपको एस सोच से बाहर नही कर पा रहा था.
अचानक रात के 2 बजे, किसी ने मुझे झकझोरा …और मुझे लगा …कि कोई मुझसे कुच्छ बोलने की कोशिश कर रहा है….
“चल निकल..अब बाहर जाने का टाइम हो गया”
…………………………………..
“ भाई…प्लीज़ मुझे एक बार मिलबा दे उस से..फिर तू जो कहेगा मैं करूँगा” मैने जैसे विनती की उस से.
“ साले मजनू की औलाद, अबे तुझे पता भी है..कि वो तुझसे प्यार भी करती है या नही..और उस दिन के बाद तो बिल्कुल भी नही” उसने मुझे गुस्से मे देखते हुए कहा.
“ चाहे जो भी हो…लेकिन मुझे एक बार उस से मिलके ही जाना है….”
मुझे भी असलियत नही मालूम थी कि वो आख़िर मुझसे प्यार करती थी या इस से…लेकिन उस दिन के बाद मुझे एस बात का ज़्यादा भरोसा था कि, अगर हम बदल गये तो वो हमे अपना लेगी, काजल को दुख था तो बस हमारे इस धंधे से…मैने उसकी आँखो मे आँसू देखे थे…उसे भी हमे खोने का दुख था.
“ मेरे पास टाइम नही है..तेरी इस बकबास काम के लिए..बहुत से काम निपटाने है, इसलिए बाहर आया हूँ” उसने फिर से मेरी बात अनसुनी करने की कोशिश की.
“मुझे पता है..कौन से काम बाकी है….लोगों का खून बहाने का…लेकिन तुमने तो जैसे कसम खाई है कि मेरी बात नही मनोगे, बस मैं ही बेवकूफ़ हूँ…जो तुम्हारे साथ ..तुम्हारे हर ग़लत काम मे साथ देता हूँ..लेकिन तुम मेरे किसी काम मे साथ नही दोगे” मैने मायूसी से कहा.
“ अब ज़्यादा दिमाग़ मत खराब कर मेरा….चल देखते है, लेकिन उस से मिलने के बाद अगर वो नही मानी तो मैं छोड़ूँगा नहीं उसे…ये बता देता हूँ” उसने फिर अपने ही अंदाज़ मे हामी भरी.
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“कौन है..रूको अभी आती हू” किसी औरत की आवाज़ आई और फिर दरवाजा खुला
लेकिन ये काजल नही थी ये उसकी सहेली थी..जो उसके साथ ही रहती थी, उसका नाम माया था. माया और काजल एक ही शहर से थे… और यहाँ मुंबई मे किराए के कमरे मे रहते हुए जॉब करते थे. हमारे संबंधो के बारे मे उसे पता था, यहीं सालों पहले हम इस घर पे काजल से मिलने आया करते थे.
उसने हमे देखा और …“ काजल नही है….” बोलते हुए दरवाजा बंद करने लगी …हम ने उसकी इस कोशिश को समझते हुए..दरवाजे को धकेला और घर के अंदर घुसते चले गये…

“ चुप चाप से हमे बता कि कहाँ है वो…बहुत जॅलील किया है उसने…और अब उस से कुच्छ पुछ्ने आए है..चल जल्दी से बुला उसे” मुझे उसके इसी तरीके से परेशानी थी, सीधी तरह से बात ही नही करता था…बस हमेशा गुस्से और ज़बरदस्ती से ही बात करता था. माया उसको ऐसे बोलते देख थोड़ी डर भी गयी थी..उसको भी पता चल गया था कि हम लोग, क़ातिल है और ये हमारा पेशा है.

“ मुझे नही मालूम…वो अब मेरे साथ नही रहती है” उसने डरते हुए कहा.

और तभी उसके गाल पे एक ज़ोर का थप्पड़ लगा और वो नीचे गिर पड़ी, उसके होठ से खून निकलने लगा था ..उसकी आँखों मे डर के भाव देख रहा था मैं..लेकिन मुझे रोकने की हिम्मत नही थी उसे…वो जैसे पागल हो गया था.
“ साली…बताती है या नही…कहाँ है वो तुम्हारी सहेली, जल्दी से बता दे अगर तू अपना भला चाहती है”
उसने ताबड तोड़ दो -तीन और थप्पड़ जमा दिए थे उसे…उसके चेहरे पे एक दो जगह से खून निकलने लगा था…और बेचारी रो रही थी..मुझे रोकने का मन कर रहा था..लेकिन मेरी सुनता कहाँ वो..उसपे तो जैसे पागलपन सवार हो जाता था..जब भी गुस्सा आता था.
कुच्छ देर मे सामने माया बहाल पड़ी थी…उसने माया को बालों से पकड़ रखा था.
“ अब बता दे..कहाँ गयी वो…नही तो बहुत बुरा हाल करूँगा तेरा”
“ तुम मुझे जान से भी मार दो तो नही बताउन्गी….वो जहाँ है खुस है अपनी ज़िंदगी से, तुमने एक बार उसकी ज़िंदगी पहले ही खराब की है…इस बार मैं नही करने दूँगी” माया ने हिम्मत जुटाते हुए उसके आँखों मे आँखें डाल कर बोली…लेकिन उसका गुस्सा इस से कम नही हुआ और बढ़ गया.

“ मैं देखता हूँ कैसे नही बताती है…और हम ने उसकी ज़िंदगी बर्बाद नही की है…उसकी वजह से आज हमे जैल तक जाना पड़ा..उसने हमे गिरफ्तार कराया …एक बार मिलना पड़ेगा उस से..चल जल्दी से बता नही तो अब मैं तेरे साथ वो करूँगा जो तू सोच भी नही सकती”
“ कुच्छ भी कर लो..मैं नही बताउन्गी की वो कहाँ है” माया को भरोसा था अपने पे..लेकिन जो कुच्छ आगे हुआ उसका भरोसा नही था उसे…
एक हाथ से माया के बाल पकड़े हुए उसने ….और माया के शर्ट को अपने दूसरे हाथ से पकड़ा और खिचता चला गया. माया की शर्ट किसी काग़ज़ के टुकड़े की तरह उसके शरीर से अलग होती चली गयी. शर्ट के नीचे मे उसने वाइट कलर की ब्रा पहनी हुई थी, जो ज़्यादा देर तक माया की उन्नत उरोज को क़ैद करके नही रख सकी और उसके परिंदे आज़ाद होते ही अपनी घटा बिखेरने लगे…उसके उजले और सुनहरे कबूतर हमारी आँखो के सामने फडफडा रहे थे.

“ तुम इतने कमिने हो…इसका अंदाज़ा नही था मुझे..काजल तुमको क़ातिल समझ रही थी..लेकिन तुम तो उस से भी गये गुज़रे हो…किसी औरत को तुम प्यार नही कर सकते…किसी का प्यार नसीब नही होगा तुम्हे. तुम एक हैवान हो, और आज तुमने अपनी हैवानियत की हद पार कर दी” ये बोलते हुए माया ने उसके चेहरे पे थूक दिया. माया की इस हरकत ने उसके गुस्से को हवा दे दी.

“ तुमने मेरी हैवानियत देखी नही है….अभी दिखाता हूँ….” और उसने माया के उरोज को बेदर्दी से दबाते हुए ….उसकी स्कर्ट को भी निकाल फेका. उसके सामने मे माया बस एक पैंटी मे लेटी हुई थी और उस से कुच्छ भी ना करने का गुहार लगा रही थी.
“ प्लीज़ कुच्छ तो शर्म करो…कुच्छ तो इंसानियत बची होगी तुम मे…छोड़ दो मुझे, मेरी ज़िंदगी को भी बर्बाद ना करो…प्लीज़ छोड़ दो मुझे” माया ने उस से विनती की.

उसकी ये हालत मुझसे भी नही देखी जा रही थी…लेकिन मैं मजबूर था, मेरी हिम्मत नही थी कि मैं रोक पाता उसे. और उसने अपने हाथ नही रोके और माया की पैंटी को भी उसके शरीर से अलग कर दिया.
मुझसे चुप नही रहा गया ..और मैने उसे रोकने की अंतिम कोशिश की…
“क्या कर रहे हो तुम…अब तक केबल क़ातिल थे, अब बलात्कारी भी बन जाओगे..कितने नीचे गिरोगे तुम..और साथ मे मुझे भी कितना गिरना पड़ेगा”
“ साले तू चुप कर..ये सब तेरी वजह से हो रहा है….ना तू प्यार और अच्छी ज़िंदगी की रट लगाता और ना ये नौबत आती….अब बस चुप-चाप देख मैं क्या कर रहा हूँ” उसने मुझे फिर से चुप होने को मजबूर कर दिया.

हमारे सामने मे माया नंगी ज़मीन पे लेटी थी और रोती हुई , हाथ जोड़े हुए, अपने आपको छोड़ देने की गुहार लगा रही थी….लेकिन उसकी किसी गुहार का उसके उपर कोई असर नही था..और मेरे उपर था तो मैं बेबस था.
वो अब माया ले उपर लेट चुका था…और उसके अंगों से बेदर्दी से खेल रहा था….माया रोती जा रही थी…और उसे छोड़ देने की गुज़ारिश कर रही थी.
उसने पॅंट खोलनी सुरू की ही थी कि माया ने अपना हौसला खो दिया
….
“ प्लीज़ अब बस…छोड़ दो मुझे मैं बताती हूँ उसका पता….छोड़ दो मुझे प्लीज़” उसने पता बताया और अब फिर मुझे बोलने का मौका मिला.
“ अब छोड़ दो इसे…” मैने उसे प्यार से कहा और उसने इस बार मेरी बात मान ली और उसके उपर से उठ गया.
“ लेकिन उसकी शादी हो गयी है…और वो खुश है अपनी ज़िंदगी से, क्यों उसकी ज़िंदगी मे फिर से आग लगाना चाहते हो” माया ने फिर से हमें समझाने की कोशिश की और अपने कपड़े संभालने लगी…लेकिन उसकी बात सुन ने का वक्त नही था उसके पास और बिना उसकी पूरी बात सुने ही..वो बाहर निकल गया.
लेकिन मैने उसकी बात सुन ली थी और मेरा मन भर आया था ये सुनके कि काजल की शादी हो चुकी है..और अब वो किसी और की हो चुकी है…मेरे सोचने समझने की हालत नही थी, मैं बस उसके ख़यालों मे खोया ही था और वो बस पागलों की तरह बढ़े जा रहा था ..उस पते की तरफ.
……………………………………………..
“ तुम कब तक आओगे…”
“ सॉरी…आज थोड़ा लेट हो जाउन्गा ..मेरी जान..और कोई बात तो नही”
“ नही कोई ऐसी बात नही…बस ऐसे ही …मैं इंतेज़ार करूँगी खाने पे…शायद कोई दरवाजे पे है…एक मिनिट रूको कॉल करती हू”
और दरवाजा खुला और सामने ….काजल खड़ी थी, जिसे देखने के लिए मैं इतना बेताब था, एक साल के इंतेज़ार के बाद आज मैने उसे देखा था…थोड़ी बदली सी थी, लेकिन वही भोली सी सूरत, वही आँखें जिसमे हमेशा डूब जाने का दिल करता था, लेकिन उसकी माँग मे सिंदूर देख के मैं अपने आपको उस ख्याल से बाहर किया.

“ क्या करने आए हो यहाँ..और तुमने जो माया के साथ किया है..उसने मुझे सब कुच्छ बता दिया है…कैसे इंसान हो तुम…उस बेचारी ने क्या बिगाड़ा था तुम्हारा..मैने तुम्हे पोलीस के हवाले किया था उस दिन और उसी दिन सारे नाते तोड़ दिए थे..फिर क्यों मिलना चाहते थे मुझसे” दवाजे के बीच खड़े हुए काजल तो थोड़ा भी डर नही था कि आगे क्या हो सकता है…
अगले ही पल ….एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पे पड़ा और वो नीचे ज़मीन पे गिर गयी…मुझे भी इस बात का एहसास नही था, थप्पड़ उसके गाल पे पड़ा दिल मेरा कराह उठा.

उसने अपने कदम काजल की तरफ बढ़ाए और उसने अपने दोनो हाथो से उसके गले को पकड़ा और और उसे उठाया….
“ तुमने क्या समझ रखा है…हमे, तुम इस दिल के साथ जब चाहोगी खेल के उसे तोड़ के चली जाओगी, और हम कुच्छ नही कहेंगे…बड़ी ग़लती की तूने दिल्लगी कर के”
मैने काजल को इस हाल मे देखा तो मेरे अंदर भी विरोध के सुर जाग उठे…

“क्या कर रहे हो तुम..छोड़ दो उसे, मुझे कोई शिकायत नही है उस से, अगर वो खुश है..तो मैं खुश हूँ” मैने उसे रोकते हुए कहा.
“ साले ..फिर से बोला तू…आज तेरी वजह से ये सब हुआ है…तेरे एस भोलेपन की वजह से इसने हमारे साथ खेला और फिर …..आज मैं इसे नही छोड़ूँगा, तू बीच मे मत आ” उसने दहाड़ते हुए कहा.
“ मैने कुच्छ ग़लत नही किया, तुमने मेरे साथ ग़लत किया था…तुमने अपना सच छुपाया मुझसे, और जब मुझे सच्चाई पता चली..मैने वो पोलीस को बता दी…मैं जैसा जीना चाहती हूँ..मैं जी सकती हूँ..छोड़ो मुझे, दर्द हो रहा है मुझे” काजल ने विनती की.
“ उसे छोड़ दो और चलो यहाँ से….” अभी मैं जैसे उसे आदेश दे रहा था और इस बात ने उसे और गुस्सा दिला दिया.
“ आज तो मैं इसे ख़त्म करके ही जाउन्गा….इसकी वजह से तू भी मेरे से उँचे स्वर मे बात करने लगा है….ना रहेगा बाँस …और ना बजेगी बाँसुरी….आज तो इसका मरना तय है” उसने ये बोलते हुए अपने जेब मे रखे रिवॉल्वार को बाहर निकाला.
मेरी नज़र उसके इस हरकत पे गयी,और मेरा खून खौल उठा….
“ तू ये क्या कर रहा है..मैने आज तक तेरी हर बात मानी है….आज मेरी बात मान और छोड़ दे उसे”
मैने फिर से उसे आदेश देते हुए रोकने की कोशिश की….लेकिन उसका हाथ उठा और उसने रिवॉल्वार के ट्रिग्गर पे अपना हाथ रखा
“ तेरी ये हिम्मत कि तू मुझसे ऐसे बात करे …मैं तुझको ही पहले चुप करा दूँगा फिर इसको”
रिवॉल्वार से गोली निकली और इस से पहले कि मैं कुच्छ बोल पाता…गोली मेरे दिमाग़ को चीरती हुई निकल गयी. मेरी आँखे बंद होने लगी थी, उस बंद आँखो से मैने काजल की तरफ देखा वो बदहवास सी बस मेरी तरफ देख रही थी…और आज इस रिस्ते का अंत हो रहा था, आज के बाद मैं उसे नही देख पाउन्गा. उसके फोन की रिंग टोन बज रही थी….
“ ना होंगे जुदा…ये वादा रहा”
सच मे हम दोनो काजल से जुदा हो रहे थे..लेकिन आपस मे नही, हम ने एक साथ ज़िंदगी की शुरुआत की थी..साथ साथ हर कदम चले, हर जुर्म साथ किया, साँसे साथ ली, केबल हमारी सोच अलग थी, मैं उस से कभी जीत नही पाया, उसके गुस्से के आगे मैं हमेशा हार जाता था ..लेकिन आज मैने आवाज़ उठाई और साथ साथ ज़िंदगी की अंतिम साँस ले रहे थे.
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“ रुस्तम …वो फाइल देना कल वाले स्यूयिसाइड का”
“ क्या साहेब ..क्या पागलपंति की उस आदमी ने, साला पागलख़ाने से भाग के…. अपने लवर के घर जाके…. अपने आपको शूट किया”
इनस्पेक्टर काले ने मुस्कान बिखेरी और बोला “ अबे तूने प्यार नही किया ना कभी, नही समझेगा…साले ये मजनू होते ही ऐसे है….पहले एक क़ातिल से पागल बना और फिर अपना ही खून अपने हाथो ….सिरफिरे होते है सब के सब….क्या नाम था उसका”
“ रोहन …कोई आगे पिछे नही…बचपन से ही थोड़ा खिसका हुआ था, डॉक्टर ने बताया है…कि अपने आप से ही बातें किया करता था वहाँ पागलख़ाने मे” रुस्तम ने बताया.
“ आज प्यार ना करता तो कैसे जेल जाता…मोस्ट वांटेड साइको किल्लर था…और आज मारा ना जाता” इनस्पेक्टर ने चैन की साँस ली.

.........दा एंड.......


Naa honge juda…..yeh vada raha
“ tum katil ho …tum jallad ho”
“ maine tumse kaise pyar kiya…mujhe samajh me nahi aata…mujhe kya pata tha, es bhole bhale chehre ke pichhe ek khooni bhediya chhupa hai”
“ ghin aati hai mujhe, apne aapse ..en khooni hatho ne mere chehre ko chhua tha…mujhe bahon me jakra tha…chhee …mujhe ghin aati hai….aur tum pe thukne ka man karta hai”
“ chale jao meri najro ke samne se..phir kabhi apna ye bhola chehra mat dikhana mujhe, jis ke bholepan me pata nahi kaise main kho si gayi thi”
Uske chehre pe dard bhi tha aur nafrat bhi…mujhe uske chehre ke dard ko dekh ke dukh ho raha tha to dusri taraf kisi ko uski ankhon me nafrat dekh ke gussa aa raha tha. Jahan mujhe uski es halat pe taras aa raha tha to kisi ko uske bol kisi nastar ki tarah choobh rahe the.
“ kaise honge tumhare maa baap jinhone , apne bête ko kisi ki jaan lene ki aazadi de rakhi hai…tum kaun hote ho kisi ki jaan lene wale…”
“ main kis se baten kar rahi hu…ek haiwaan se ..jise koi matlab nahi hai kisi ke dard ki..kisi ke pyar ki …kisi ke jazbaat ki…meri kismat itni kharaab thi ki mujhe pyar bhi hua to ek janwar se..jise logon ka khoon karne ka shauk hai” vo apni bhavnao ko rok nahi payi aur uske ankho se neer jharne lage aur uske aage kuchh nahi bol payi vo, ….aur bas wahan se palti aur chali gayi usne hume bolne ka mauka bhi nahi diya.
…………………………………………………….
Vo kajal thi, jiske aane se hamari zindagi ne ek naya mod liya tha…ye usi ka jadoo tha ki humne sarafat ki zindagi jine ki koshish suru ki thi..
Aaj es , band Kothari me lete huye main bas usi ko yaad kar raha tha….mujhe to kabhi ye bhi samajh me nahi aaya ki vo pyar kise karti thi mujhe ya isko , jise bas hamesha gussa hi aata hai…aur jab ye gussa apne charam pe hota hai..ye meri ek baat nahi sunta hai…bas apni man ka karta hai.
Hume ek saath hi jina tha, ye meri majboori thi…lekin maine hamesha ye koshish ki isko badalne ki…thoda kamyab bhi hua..lekin akhiri bazi hamesha yehi jeet jata hai.
“ kya soch raha hai…”
“ kajal ke bare me..pata nahi kaisi hogi vo, hamare jail aane ke baad ..uska kya haal hoga pata nahi” mujhe aise laga jaise main apne aap se baten kar raha hu…kyoki usne to kajal ke naam pe apna muh mod liya..jaise usne hamesha kajal se nafrat hi ki hai.
Maine use toka “ kya tum usko yaad nahi karte”
“ nahi main use yaad nahi karta …aur karna bhi nahi chahta…mujhe to bas yahan se bahar nikal kar apna baki ka kaam niptana hai”
“chhor kyon nahi dete ab ye sab…kya hum kuchh achha kaam nahi kar sakte” maine uska dil tatolne ki koshish ki.
“ abe chup kar..kya achha aur kya bura…yehi hamari kismat hai..jo hum kar rahe hai, hamesha bhashan dene lagta hai…tere aur us ladki me koi antar nahi hai…jyada yaad aa rahi hai to chala ja uske paas…bhul gaya, kis tarah se usne baat kahi thi us din aur usi ki wajah se hume jail huyi” usne gusse se jaise mujhe dekha main ek pal ke liye dar gaya.
“ lekin usne jo bhi kaha usme galat kya hai…vo hamare is khoon kharabe vale dhandhe se khus nahi hai..aur humne use bataya bhi nahi tha…us bechari ko jab pata chala usne apna gussa nikala hum pe…mujhe bahut dukh hai us se alag hoke, ….mujhe uski fikar ho rahi hai..us din ke baad mil bhi nahi paya us se..aur aaj es baat ko pure ek saal ho gaye hai.” Main ek saans me apni baat kahta chala gaya.
“ jyada majnu banne ki jaroorat nahi hai, bas aaram se so ja, agar sab kuchh sahi raha to kal hum log bahar honge” usne apna chehra phir se mod liya.
“ to kya tum yahan se bhagne ka plan bana rahe ho…” maine use tokne ki koshish ki.
“ chup be sale….so ja ab, dimag ki maa behan kar ke rakh diya hai itni der se.” aur maine apne juban ko jaise sil liya uski fufkar se dark e..mujhe uske gusse ka pura anubhav tha.
Lekin mera dil abhi bhi baar baar kajal ke bare me sochne pe majboor tha, main apne aapko es soch se bahar nahi kar pa raha tha.
Anachak raat ke 2 baje, kisi ne mujhe jhakjhora …aur mujhe laga …ki koi mujhse kuchh bolne ki koshish kar raha hai….
“chal nikal..ab bahar jane ka time ho gaya”
…………………………………..
“ bhai…please mujhe ek baar milba de us se..phir tu jo kahega main karunga” maine jaise vinti ki us se.
“ sale majnu ki aulaad, abe tujhe pata bhi hai..ki vo tujhse pyar bhi karti hai ya nahi..aur us din ke baad to bilkul bhi nahi” usne mujhe gusse me dekhte huye kaha.
“ chahe jo bhi ho…lekin mujhe ek baar us se milke hi jana hai….”
Mujhe bhi asaliyat nahi malum thi ki vo akhir mujhse pyar karti thi ya es se…lekin us din ke baad mujhe es baat ka jyada bharosha tha ki, agar hum badal gaye to vo hume apna legi, kajal ko dukh tha to bas hamare es dhandhe se…maine uski aankho me aanshu dekhe the…use bhi hume khone ka dukh tha.
“ mere paas time nahi hai..tere es bakbas kaam ke liye..bahut se kaam niptane hai, isliye bahar aaya hu” usne phir se meri baat ansuni karne ki koshish ki.
“mujhe pata hai..kaun se kaam baki hai….logon ka khoon bahane ka…lekin tumne to jaise kasam khayi hai ki meri baat nahi manoge, bas main hi bewakoof hu…jo tumhare saath ..tumhare har galat kaam me saath deta hu..lekin tum mere kisi kaam me saath nahi doge” maine mayusi se kaha.
“ ab jyada dimag mat kharab kar mera….chal dekhte hai, lekin us se milne ke baad agar vo nahi mani to main chhodunga nahin use…ye bata deta hu” usne fir apne hi andaz me hami bhari.
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“kaun hai..ruko abhi aati hu” kisi aurat ki awaaj aayi aur phir darwaja khula
Lekin ye kajal nahi thi ye uski saheli thi..jo uske saath hi rehti thi, uska naam maya tha. Maya aur kajal ek hi sehar se the… aur yahan Mumbai me kiraye ke kamre me rahte huye job karte the. Hamare sambandho ke bare me use pata tha, yehi salon pehle hum es ghar pe kajal se milne aaya karte the.
Usne hume dekha aur …“ kajal nahi hai….” Bolte huye darwaja band karne lagi …humne uski es koshish ko samajhte huye..darwaje ko dhakela aur ghar ke andar ghuste chale gaye…
“ chup chap se hume bata ki kahan hai vo…bahut jaleel kiya hai usne…aur ab us se kuchh puchhne aaye hai..chal jaldi se bula use” mujhe uske isi tarike se pareshani thi, sidhi tarah se baat hi nahi karta tha…bas hamesha gusse aur jabardasti se hi baat karta tha. Maya usko aise bolte dekh thodi dar bhi gayi thi..usko bhi pata chal gaya tha ki hum log, qatil hai aur ye hamara pesha hai.
“ mujhe nahi malum…vo ab mere saath nahi rehti hai” usne darte huye kaha.
Aur tabhi uske gaal pe ek jor ka thapar laga aur vo niche gir padi, uske hoth se khoon nikalne laga tha ..uski ankhon me daar ke bhav dekh raha tha main..lekin mujhe roknne ki himmat nahi thi use…vo jaise pagal ho gaya tha.
“ Sali…batati hai ya nahi…kahan hai vo tumhari saheli, jaldi se bata de agar tu apna bhala chahti hai”
Usne tabar tor do -teen aur thapar jama diye the use…uske chehre pe ek do jagah se khoon nikalne laga tha…aur bechari ro rahi thi..mujhe rokne ka man kar raha tha..lekin meri sunta kahan vo..uspe to jaise palalpan sawar ho jata tha..jab bhi gussa aata tha.
kuchh der me samne maya behal padi thi…usne maya ko balon se pakad rakha tha.
“ ab bata de..kahan gayi vo…nahi to bahut bura haal karunga tera”
“ tum mujhe jaan se bhi maar do to nahi bataungi….vo jahan hai khus hai apni zindagi se, tumne ek baar uski zindagi pehle hi kharab ki hai…es baar main nahi karne dungi” maya ne himmat jutate huye uske ankhon me ankhen daal kar boli…lekin uska gussa es se kam nahi hua aur badh gaya.
“ main dekhta hu kaise nahi batati hai…aur humne uski zindagi barbaad nahi ki hai…uski wajah se aaj hume jail tak jana pada..usne hume girftaar karaya …ek baar milna padega us se..chal jaldi se bata nahi to ab main tere saath vo karunga jo tu soch bhi nahi sakti”
“ kuchh bhi kar lo..main nahi bataungi ki vo kahan hai” maya ko bharosa tha apne pe..lekin jo kuchh aage hua uska bharosa nahi tha use…
Ek hath se maya ke baal pakde huye usne ….aur maya ke shirt ko apne dusre hath se pakda aur khichta chala gaya. Maya ke shirt kisi kaagaz ke tukre ki tarah uske shareer se alag hote chale gaye. Shirt ke niche me usne white colour ki bra pehni huyi thi, jo jyada der tak maya ki unnat uroj ko qaid karke nahi rakh saki aur uske parinde aazad hote hi apni ghata bikherne lage…uski ujali aur sunehri kabootar hamare ankho ke samne farfara rahe the.
“ tum itne kamine ho…iska andaja nahi tha mujhe..kajal tumko qatil samajh rahi thi..lekin tum to us se bhi gaye gujre ho…kisi aurat ko tum pyar nahi kar sakte…kisi ka pyar naseeb nahi hoga tumhe. Tum ek haiwan ho, aur aaj tumne apni haiwaniyat ki had paar kar di” ye bolte huye maya ne uske chehre pe thuk diya. Maya ki es harkat ne uske gusse ko hawa de di.
“ tumne meri haiwaniyat dekhi nahi hai….abhi dikhata hu….” Aur usne maya ke uroj ko bedardi se dabate huye ….uski skirt ko bhi nikal feka. Uske samne me maya bas ek panty me leti huyi thi aur us se kuchh bhi na karne ka guhar laga rahi thi.
“ please kuchh to sharm karo…kuchh to insaniyat bachi hogi tum me…chhor do mujhe, meri zindagi ko bhi barbad na karo…please chhor do mujhe” maya ne us se vinti ki.
Uski ye halat mujhse bhi nahi dekhi ja rahi thi…lekin main majboor tha, meri himmat nahi thi ki main rok pata use. Aur usne apne hath nahi roke aur maya ki panty ko bhi uske shareer se alag kar diya.
Mujhse chup nahi raha gaya ..aur maine use rokne ki antim koshish ki…
“kya kar rahe ho tum…ab tak kebal qatil the, ab balatkari bhi ban jaoge..kitne niche giroge tum..aur saath me mujhe bhi kitna girna padega”
“ sale tu chup kar..ye sab teri wajah se ho raha hai….na tu pyar aur achhi zindagi ke rat lagata aur na ye naubat aati….ab bas chup-chap dekh main kya kar raha hu” usne mujhe fir se chup hone ko majboor kar diya.
Hamare samne me maya nangi jameen pe leti thi aur roti huyi , hath jore huye, apne aapko chhor dene ki guhar laga rahi thi….lekin uski kisi guhar ka uske upar koi asar nahi tha..aur mere upar tha to main bebas tha.
Vo ab maya le upar let chukka tha…aur uske angon se bedardi se khel raha tha….maya roti ja rahi thi…aur use chhor dene ki gujarish kar rahi thi.
Usne pant kholne suru kiye hi the ki maya ne apna hausla kho diya ….
“ please ab bas…chhor do mujhe main batati hu uska pata….chhor do mujhe please” usne pata bataya aur ab phir mujhe bolne ka mauka mila.
“ ab chhor do ese…” maine use pyar se kaha aur usne es baar meri baat maan li aur uske upar se uth gaya.
“ lekin uski shadi ho gayi hai…aur vo khush hai apni zindagi se, kyon uski zindagi me fir se aag lagana chahte ho” maya ne fir se hume samjhane ki koshish ki aur apne kapde sambhalne lagi…lekin uski baat sun ne ka bakt nahi tha uske paas aur bina uski puri baat sune hi..vo bahar nikal gaya.
Lekin maine uski baat sun li thi aur mera man bhar aaya tha ye sunke ki kajal ki shadi ho chuki hai..aur ab vo kisi aur ki ho chuki hai…mere sochne samjhne ki halat nahi thi, main bas uske khayalon me khoya hi tha aur vo bas paglon ki tarah badhe jar aha tha ..us pate ki taraf.
……………………………………………..
“ tum kab tak aaoge…”
“ sorry…aaj thoda let ho jaunga ..meri jaan..aur koi baat to nahi”
“ nahi koi aisi baat nahi…bas aise hi …main intezar karungi khane pe…shayad koi darwaje pe hai…ek minute ruko call karti hu”
Aur darwaja khula aur samne ….kajal khari thi, jise dekhne ke liye main itna betab tha, ek saal ke intezar ke baad aaj maine use dekha tha…thodi badli si thi, lekin wahi bholi si surat, wahi ankhen jisme hamesha doob jane ka dil karta tha, lekin uski maang me sindoor dekh ke main apne aapko us khyal se bahar kiya.
“ kya karne aaye ho yahan..aur tumhe jo maya ke saath kiya hai..usne mujhe sab kuchh bata diya hai…kaise insaan ho tum…us bechari ne kya bigada tha tumhara..maine tumhe police ke hawale kiya tha us din aur usi din sare naate tod diye the..fir kyon milna chahte the mujhse” dawaje ke beech khare huye kajal to thoda bhi daar nahi tha ki aage kya ho sakta hai…
Agle hi pal ….ek jordar thapad uske gaal pe pada aur vo niche jameen pe gir gayi…mujhe bhi es baat ka ehsaas nahi tha, thapad uske gaal pe pade dil mera karah utha.
Usne apne kadam kajal ki taraf badhaye aur usne apne dono hatho se uske gale ko pakda aur aur use uthaya….
“ tumne kya samajh rakha hai…hume, tum es dil ke saath jab chahogi khel ke use tod ke chali jaogi, aur hum kuchh nahi kahenge…badi galti ki tune dillagi kar ke”
Maine kajal ko es haal me dekha to mere andar bhi virodh ke sur jag uthe…
“kya kar arhe ho tum..chhod do use, mujhe koi sikayat nahi hai us se, agar vo khus hai..to main khus hu” maine use rokte huye kaha.
“ sale ..phir se bola tu…aaj teri wajah se ye sab hua hai…tere es bholepan ki wajah se isne hamare saath khela aur fir …..aaj main ese nahi chhodunga, tu beech me mat aa” usne daharte huye kaha.
“ maine kuchh galat nahi kiya, tumne mere saath galat kiya tha…tumne apna sach chhupaya mujhse, aur jab mujhe sachai pata chali..maine vo police ko bataa di…main jaisa jina chahti hu..main ji sakti hu..chhoro mujhe, dard ho raha hai mujhe” kajal ne vinti ki.
“ use chhod do aur chalo yahan se….” abhi main jaise use aadesh de raha tha aur es baat ne use aur gussa dila diya.
“ aaj to main ise khatm karke hi jaunga….iski wajah se tu bhi mere se uche swar me baat karne laga hai….na rahega baans …aur na bajegi bansuri….aaj to iska marna tai hai” usne ye bolte huye apne jeb me rakhe revolver ko bahar nikala.
Meri najar uske es harkat pe gayi,aur mera khoon khaul utha….
“ tu ye kya kar raha hai..maine aaj tak teri har baat mani hai….aaj meri baat maan aur chhod de use”
Maine phir se use aadesh dete huye rokne ki koshish ki….lekin uska hath utha aur usne revolver ke trigger pe apna hath rakha
“ teri ye himmat ki tu mujhse aise baat kare …main tujhko hi pahle chup kara dunga fir isko”
Revolver se goli nikali aur es se pehle ki main kuchh bol pata…goli mere dimag ko chirti huyi nikal gayi. Meri aankhe band hone lagi thi, us band aankho se maine kajal ki taraf dekha vo badhawas si bas meri taraf dekh rahi thi…aur aaj es riste ka ant ho raha tha, aaj ke baad main use nahi dekh paunga. Uske phone ki ring tone baj rahi thi….
“ Na honge juda…ye vada raha”
Sach me hum dono kajal se juda ho rahe the..lekin aapas me nahi, humne ek saath zindagi ki suruat kit hi..saath saath har kadam chale, har jurm saath kiya, saanse saath li, kebal hamari soch alag thi, main us se kabhi jeet nahi paya, uske gusse ke aage main hamesha haar jata tha ..lekin aaj maine aawaj uthayi aur saath saath zindagi ke antim saans le rahe the.
…………………………………………………………….
“ rustam …vo file dena kal vale suicide ka”
“ kya saaheb ..kya pagalpanti ki us aadmi ne, sala pagalkhane se bhag ke…. apne lover ke ghar jake…. Apne aapko shoot kiya”
Inspector kale ne muskan bikheri aur bola “ abe tune pyar nahi kiya na kabhi, nahi samjhega…sale ye majnu hote hi aise hai….pehle ek qatil se pagal bana aur fir apna hi khoon apne hatho ….sirfire hote hai sab ke sab….kya naam tha uska”
“ rohan …koi aage pichhe nahi…bachpan se hi todha khiska hua tha, doctor ne bataya hai…ki apne aap se hi baaten kiya karta tha wahan pagalkhane me” rustam ne bataya.
“ aaj pyar na karta to kaise jail jata…most wanted psycho killer tha…aur aaj mara na jata” inspector ne chain ki saans li.

.........THE END.......
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