एक अनोखा बंधन compleet

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Re: एक अनोखा बंधन

Postby rajaarkey » 13 Oct 2014 14:29

एक अनोखा बंधन--29

गतान्क से आगे.....................

जब दिल में बहुत ज़्यादा ख़ुसी हो तो अक्सर आँखो की नींद खो जाती है. दिल हर वक्त बेचैन सा रहता है. ऐसा ही कुछ हो रहा था आदित्य और ज़रीना के साथ.एक तो चुंबन की खुमारी थी उपर से होने वाली शादी की ख़ुसी. दोनो पर अजीब सा नशा कर दिया था प्यार ने.

अचानक ज़रीना को कुछ ख़याल आया, “आदित्य हम जब से मार्केट से आयें हैं यही पड़े हैं. क्या हमने खाना खाया?”

“अरे खा लेंगे खाना भी. जब तुम पास हो तो भूक प्यास किस कम्बख़त को लगती है.”

“अरे कैसी बात कर रहे हो. खाना खा कर हमे जल्दी सो जाना चाहिए. सुबह जल्दी उठ कर हमें तैयार भी तो होना है.” ज़रीना ने कहा.

“मैं तो किसी भी वक्त उठ कर मॅनेज कर लूँगा. तुम लड़कियों को ही वक्त लगता है तैयार होने में.”

“मेरी शादी हो रही है…तैयार होने में वक्त तो लगेगा ना.”

“अछा बाबा मैं ऑर्डर देता हूँ. तुम एक गरमा गरम चुंबन तैयार रखो. खाने के बाद स्वीट डिश की तरह काम आएगा.”

“जी हां जनाब बिल्कुल. मेरा तो यही काम रह गया है. चलिए अपना रास्ता देखिए… मुझे और भी बहुत काम हैं.”

“काम कैसा काम?”

“मुझे बहुत कुछ सोचना है कल के बारे में. मुझे ये भी नही पता अभी कि शादी के लिए तैयार कैसे होना है.”

“हो जाएगा सब…तुम चिंता मत करो…मैं खाने का ऑर्डर देता हूँ…क्या लोगि तुम.”

“मॅंगा लो कुछ भी ज़्यादा भूक तो है नही.”

“ओके.” आदित्य ने फोन उठा कर खाने के लिए बोल दिया.

खाना खाने के बाद ज़रीना बिस्तर पर पसर गयी और बोली, “अब यहा कोई भी आने की जुर्रत ना करे. हमें नींद आ रही है.”

“हहहे….झूठ बोल रही हो तुम.नींद नही आने वाली आज…चाहे कुछ कर लो तुम. मेरी बाहों में रहोगी तो शायद नींद आ भी जाए. अकेले तो बिल्कुल भी नही सो पाओगि तुम”

“कुछ भी हो यहा नही आओगे तुम अब.”

“कोई बात नही जान. आज रात छ्चोड़ देता हूँ तुम्हे अकेला. कल से देखता हूँ कैसे भगाओगि मुझे तुम बिस्तर से.”

“कल की कल देखेंगे.” ज़रीना ने होंटो पर प्यारी सी मुश्कान बिखेर कर कहा.

प्यार ने धीरे धीरे एक हसीन कामुक रस भर दिया था दोनो की जींदगी में. इन्ही बातों के कारण ज़रीना आदित्य से शरमाने लगी थी. हर पल उनका रिश्ता नया रूप ले रहा था और नये रंग में रंग रहा था. प्यार हर तरह के रंग भरने की कोशिस करता है प्रेमियों की जींदगी में. ज़रीना खुस थी मगर अपने संस्कारों के कारण झीजक और शरम उसके अस्तित्व को घेरे हुवे थी. ये बातें उसके चरित्र की सुंदरता को और ज़्यादा बढ़ाती थी. आदित्य भी अंजान नही था अपनी ज़रीना के इस स्वाभाव से. मन ही मन मुश्कूराता था वो ज़रीना की इन बातों पर. तभी तो उसे छेड़ता था बार बार. काम रस भी प्रेमियों की जींदगी में उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की प्रेम रस.

ज़रीना करवटें बदलती रही रात भर. बड़ी मुश्किल से आँख लगी थी उसकी. यही हाल आदित्य का भी था. ज़रीना तो सुबह 5 बजे ही उठ गयी. 6 बजे आदित्य की आँख खुली तो उसने देखा कि ज़रीना गुम्सुम और उदास बैठी है बिस्तर पर. आदित्य ज़रीना के पास आया और बोला, “क्या हुवा जान…इतनी परेशान सी क्यों लग रही हो?”

“आदित्य दुल्हन की तरह सजना मुझे आता ही नही. समझ में नही आ रहा की क्या करूँ.”

“हे जान परेशान क्यों होती हो. तुम तो बिना सजे सँवरे ही मेरे दिल पर सितम धाती हो. ज़्यादा कुछ करने की ज़रूरत नही है. थोड़ा बहुत सज लो काम बन जाएगा.”

“मज़ाक मत करो. जींदगी भर हमारे साथ मेमोरी रहेगी इस दिन कि. मैं दुल्हन की तरह दिखना चाहती हूँ आदित्य.”

“अछा मैं कुछ करता हूँ तुम चिंता मत करो.” आदित्य ने कहा.

आदित्य ने होटेल रिसेप्षन पर इस बारे में बात की. रिसेप्षनिस्ट ने एक लड़की को फोन मिलाया, “हाई जिम्मी…यहा एक लड़का लड़की ठहरे हुवे हैं होटेल में. दोनो आज मंदिर में शादी कर रहे हैं. क्या तुम लड़की को दुल्हन की तरह सज़ा दोगि आकर.”

“दोनो घर से भागे हुवे हैं क्या?” जिम्मी ने पूछा.

“उस से कुछ फरक पड़ेगा क्या?”

“नही वैसे ही पूछ रही हूँ. मैं आ रही हूँ 30 मिनिट में.”

“ओके थॅंक यू सो मच.” रिसेप्षनिस्ट ने कहा.

“बात बन गयी…वो आ रही है आधे घंटे में.”

“थॅंक यू सो मच डियर. आपका नाम क्या है.”

“आइ आम मनीष फ्रॉम शिमला. हमारे होटेल की ब्रांच शिमला में भी है. शादी के बाद हनिमून के लिए आप वाहा आ सकते हैं. हम आपके लिए स्पेशल कन्सेशन देंगे.”

“सो नाइस ऑफ यू मनीष जी. कभी वक्त लगा तो ज़रूर आएँगे.”

आदित्य वापिस कमरे में आ गया और बोला, “सब इंटेज़ाम हो गया है. तुम्हे सजाने के लिए एक लड़की आ रही है, जिम्मी नाम है उसका.मैं नहा धो कर तैयार हो जाता हूँ जल्दी से वो आएगी तो मुझे बाहर जाना होगा.”

“हां हां तुम जल्दी करो कही हम लेट ना हो जायें. 11 बजे मंदिर पहुँचना है याद है ना.”

“जानेमन मैं तो तैयार हो जाउन्गा अभी…सारा वक्त तो तुम्हे ही लगना है हहेहहे.” आदित्य मुश्कूराता हुवा वॉशरूम में घुस्स गया.

आदित्य नहा कर नये कपड़े पहन कर बाहर आया तो देखा कि सोफे पर एक लड़की बैठी है.

“आदित्य ये जिम्मी है. अब तुम बाहर जाओ जल्दी मुझे भी तैयार होना है.
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Re: एक अनोखा बंधन

Postby rajaarkey » 13 Oct 2014 14:29

आदित्य ने जिम्मी को गुड मॉर्निंग विश किया और चुपचाप बाहर आ गया. कोई 10 बजे जिम्मी रूम से बाहर निकली और बोली, “तुम्हारी दुल्हन तैयार है…जाओ देख लो जाकर. तुम्हे ऐतराज ना हो तो क्या शादी में मैं भी आ सकती हूँ.”

“मुझे भला क्यों ऐतराज़ होगा. हम वैसे भी अकेले हैं. कोई साथ होगा तो अछा ही लगेगा.” आदित्य ने जिम्मी को उस मंदिर का पता बता दिया जहा शादी होने जा रही थी.

“थॅंक्स…मैं पूरे 11 बजे वाहा पहुँच जाउन्गि. बाइ.” जिम्मी ने कहा.

आदित्य कमरे में आया तो ज़रीना को देखता ही रह गया, “ऑम्ग मेरी ज़रीना आज कतल कर देगी मेरा. अफ क्या लग रही हो तुम.”

ज़रीना ने अपना चेहरा हाथो में छुपा लिया शरम के मारे, “मुझे छेड़ो मत ऐसे नही तो शादी नही करूँगी तुम्हारे साथ.”

“अच्छा” आदित्य शरारती अंदाज़ में ज़रीना की तरफ बढ़ा.

“छूना मत मुझे… सारा मेक अप खराब हो जाएगा.” ज़रीना पीछे हट-ते हुवे बोली.

“प्लीज़ जान थोड़ा करीब तो आने दो. बहुत प्यारी लग रही हो तुम. सच में बहुत सुंदर सजाया है जिम्मी ने तुम्हे. तुम्हे मेरी नज़र ना लग जाए.” आदित्य ने कहा.

ज़रीना बस हल्का सा मुश्कुरा दी आदित्य की बात पर और बोली, “हमें चलना चाहिए आदित्य. कही हम लेट ना हो जायें. देल्ही के ट्रॅफिक का कोई भरोसा नही है.”

“एक मिनिट ज़रा जी भर कर देख तो लेने दो मुझे अपनी दुल्हनिया को.” आदित्य ने कहा.

“उफ्फ तुम्हारे देखने के चक्कर में हमारी शादी ना डेले हो जाए.”

“क्या बात है बड़ी जल्दी में हो शादी की. लगता है मुझे जला कर राख करने की जल्दी है तुम्हे. अच्छी बात है. मैं खुद तड़प रहा हूँ खाक में मिल जाने के लिए.” आदित्य ने कहा.

“आदित्य तुम मुझे बार-बार इन बातों में मत उलझाया करो. हम लेट हो रहे हैं और तुम्हे मज़ाक सूझ रहा है.”

“ओके ओके जान अब गुस्सा मत करो. तुम वैसे ही बहुत प्यारी लग रही हो. गुस्सा करोगी तो जान निकल जाएगी मेरी. गुस्से में तो तुम और ज़्यादा प्यारी लगती हो. चलो चलते हैं. मैने एक टॅक्सी कर ली है मंदिर तक जाने के लिए.”

“ठीक है चलो अब ज़्यादा देर मत करो.”

ज़रीना और आदित्य हंसते मुश्कूराते होटेल से बाहर आए और टॅक्सी में बैठ कर मंदिर की तरफ चल दिए. जब वो मंदिर पहुँचे तो हैरान रह गये. मंदिर सज़ा हुवा था.

“लगता है कोई और कार्यकरम भी है मंदिर में.” आदित्य ने कहा.

“आदित्य कोई गड़बड़ तो नही होगी ना.”

“अरे नही पागल कोई गड़बड़ नही होगी. मंदिर के पंडित जी मुझे भले व्यक्ति लगे. ज़्यादा ओल्ड नही हैं वो. यंग पुजारी हैं. तभी शायद उन्होने हमारे प्यार को समझा.” आदित्य ने कहा.

आदित्य और ज़रीना मंदिर की सीढ़ियाँ चढ़े ही थे कि उन्हे पंडित जी मिल गये.

“नमस्कार पंडित जी” आदित्य ने कहा. ज़रीना ने भी सर हिला कर नमस्कार किया.

“आओ आदित्य आओ. हम तुम्हारा ही इंतेज़ार कर रहे थे. तुम कह रहे थे कि तुम्हारा यहा कोई नही मगर देखो भगवान की क्या लीला है. तुम दोनो की कहानी सुन कर बहुत लोग इकट्ठा हो गये हैं यहा पर. मुझे उम्मीद है तुम दोनो को बुरा नही लगेगा.”

“नही पंडित जी कैसी बात कर रहे हैं आप.”

“आओ मैं सभी से तुम्हारा परिचय करवाता हूँ.”

“अपना परिचय भी दे दीजिए पंडित जी.” आदित्य ने कहा.

“मेरा नाम रवि है आदित्य. आओ बाकी मित्रो से भी मिल लो.” रवि ने कहा.

“आओ ज़रीना.” आदित्य ने ज़रीना से कहा. ज़रीना थोड़ी घबराई सी लग रही थी.

अगले ही पल उन्हे बहुत सारे लोगो ने घेर लिया.

“ये हैं आलोक जी. इन्हे जैसे ही मैने बताया कि तुम दोनो की शादी है कल तो मेरे बोलने से पहले ही कन्यादान के लिए तैयार हो गये.ये ही कन्यादान करेंगे.” रवि ने कहा.

“और मैं खुद को ख़ुसनसीब समझूंगा.” आलोक ने कहा.

“ख़ुसनसीब तो हम समझेंगे खुद को आलोक जी.” आदित्य ने कहा.

ज़रीना और आदित्य ने आलोक को हंस कर हाथ जोड़ कर नमस्कार किया.

“ये हैं जावेद जी. ये यहा हैं तो चिंता की कोई बात नही है. ये तो तुम दोनो को फरिश्ता मानते हैं”

आदित्य और ज़रीना ने जावेद को हंस कर हाथ जोड़ कर नमस्कार किया.

“ये है मिनी. हम इसे छुटकी कहते हैं.”

मिनी ने आगे बढ़ कर ज़रीना को गले लगा लिया और बोली, “मैं तुम्हारी तरफ से हूँ शादी में. खुद को अकेली मत समझना.”

“थॅंक यू मिनी.” ज़रीना ने कहा.

“ये हैं विवेक जी. तुम दोनो की कहानी सुन कर बहुत भावुक हो गये थे. दिल के बहुत अच्छे हैं. बिज़ी होने के बावजूद भी ये यहा आने से खुद को रोक नही पाए.”

“ये हैं सिकेन्दर जी. ये यहा खुशी खुशी केटरिंग का इंटेज़ाम कर रहे हैं.”

“केटरिंग.” आदित्य हैरान रह गया.

“हां केटरिंग. तुम दोनो की शादी है..पार्टी तो होनी ही चाहिए ना.”

“जी हां सरकार खाने पीने का अपनी तरफ से अच्छा परबंध किया है.”

आदित्य और ज़रीना ने हाथ जोड़ कर सिकेन्दर का शुक्रिया किया.

क्रमशः...............................
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Re: एक अनोखा बंधन

Postby rajaarkey » 13 Oct 2014 14:30

Ek Anokha Bandhan--29

gataank se aage.....................

Jab dil mein bahut jyada khusi ho to aksar aankho ki neend kho jaati hai. dil har vakt bechain sa rahta hai. aisa hi kuch ho raha tha aditya aur zarina ke saath.ek to chumban ki khumaari thi upar se hone wali shaadi ki khusi. Dono par ajeeb sa nasha kar diya tha pyar ne.

Achaanak zarina ko kuch khayaal aaya, “aditya hum jab se market se aayein hain yahi pade hain. Kya hamne khaana khaya?”

“arey kha lenge khaana bhi. Jab tum paas ho to bhook pyas kish kambakhat ko lagti hai.”

“arey kaisi baat kar rahe ho. Khaana kha kar humein jaldi sho jaana chaahiye. Subah jaldi uth kar hamein taiyaar bhi to hona hai.” zarina ne kaha.

“main to kishi bhi vakt uth kar manage kar lunga. Tum ladkiyon ko hi vakt lagta hai taiyaar hone mein.”

“meri shaadi ho rahi hai…taiyaar hone mein vakt to lagega na.”

“acha baba main order deta hun. tum ek garma garam chumban taiyaar rakho. Khaane ke baad sweet dish ki tarah kaam aayega.”

“ji haan janaab bilkul. Mera to yahi kaam rah gaya hai. chaliye apna raasta dekhiye… mujhe aur bhi bahut kaam hain.”

“kaam kaisa kaam?”

“mujhe bahut kuch sochna hai kal ke baare mein. Mujhe ye bhi nahi pata abhi ki shaadi ke liye taiyaar kaise hona hai.”

“ho jaayega sab…tum chinta mat karo…main khaane ka order deta hun…kya logi tum.”

“manga lo kuch bhi jyada bhook to hai nahi.”

“ok.” aditya ne phone utha kar khaane ke liye bol diya.

Khaana khaane ke baad zarina bistar par pasar gayi aur boli, “ab yaha koyi bhi aane ki jurrat na kare. Hamein neend aa rahi hai.”

“hehehe….jhut bol rahi ho tum.neend nahi aane wali aaj…chaahe kuch kar lo tum. Meri baahon mein rahogi to shaayad neend aa bhi jaaye. Akele to bilkul bhi nahi sho paaogi tum”

“kuch bhi ho yaha nahi aaoge tum ab.”

“koyi baat nahi jaan. Aaj raat chhod deta hun tumhe akela. Kal se dekhta hun kaise bhagaaogi mujhe tum bistar se.”

“kal ki kal dekhenge.” Zarina ne honto par pyari si mushkaan bikher kar kaha.

pyar ne dheere dheere ek hasin kaamuk ras bhar diya tha dono ki jeendagi mein. Inhi baaton ke kaaran zarina aditya se sharmaane lagi thi. har pal unka rishta naya roop le raha tha aur naye rang mein rang raha tha. pyar har tarah ke rang bharne ki koshis karta hai premiyon ki jeendagi mein. zarina khus thi magar apne sanskaaron ke kaaran jhijak aur sharam ushke astitav ko ghere huve thi. ye baatein ushke charitra ki shundarta ko aur jyada badhaati thi. aditya bhi anjaan nahi tha apni zarina ke ish sawbhaav se. man hi man mushkurata tha vo zarina ki in baaton par. Tabhi to ushe chedta tha baar baar. Kaam ras bhi premiyon ki jeendgi mein utna hi mahatavapuran hai jitna ki prem ras.

Zarina karvate badalti rahi raat bhar. Badi mushkil se aankh lagi thi ushki. Yahi haal aditya ka bhi tha. Zarina to subah 5 baje hi uth gayi. 6 baje aditya ki aankh khuli to ushne dekha ki zarina gumsum aur udaas baithi hai bistar par. Aditya zarina ke paas aaya aur bola, “kya huva jaan…itni pareshaan si kyon lag rahi ho?”

“aditya dulhan ki tarah sajna mujhe aata hi nahi. Samajh mein nahi aa raha ki kya karun.”

“hey jaan pareshaan kyon hoti ho. Tum to bina saje sanvre hi mere dil par sitam dhaati ho. Jyada kuch karne ki jaroorat nahi hai. Thoda bahut saj lo kaam ban jaayega.”

“majaak mat karo. Jeendagi bhar hamaare saath memory rahegi ish din ki. main dulhan ki tarah dikhna chaahti hun aditya.”

“acha main kuch karta hun tum chinta mat karo.” Aditya ne kaha.

Aditya ne hotel reception par ish baare mein baat ki. receptionist ne ek ladki ko phone milaaya, “hi jimmy…yaha ek ladka ladki thahre huve hain hotel mein. Dono aaj mandir mein shaadi kar rahe hain. Kya tum ladki ko dulhan ki tarah saja dogi aakar.”

“dono ghar se bhaage huve hain kya?” jimmy ne pucha.

“ush se kuch farak padega kya?”

“nahi vaise hi puch rahi hun. Main aa rahi hun 30 minute mein.”

“ok thank you so much.” Receptionist ne kaha.

“baat ban gayi…vo aa rahi hai aadhe ghante mein.”

“thank you so much dear. Aapka naam kya hai.”

“I am manish from shimla. Hamaare hotel ki branch shimla mein bhi hai. Shaadi ke baad honeymoon ke liye aap vaha aa sakte hain. Hum aapke liye special concession denge.”

“so nice of you manish ji. Kabhi vakt laga to jaroor aayenge.”

aditya vaapis kamre mein aa gaya aur bola, “sab intezaam ho gaya hai. Tumhe sajaane ke liye ek ladki aa rahi hai, jimmy naam hai ushka.main naha dho kar taiyaar ho jaata hun jaldi se vo aayegi to mujhe baahar jaana hoga.”
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Re: एक अनोखा बंधन

Postby rajaarkey » 13 Oct 2014 14:30

“haan haan tum jaldi karo kahi hum late na ho jaayein. 11 baje mandir pahunchna hai yaad hai na.”

“jaaneman main to taiyaar ho jaaunga abhi…saara vakt to tumhe hi lagna hai hehehehe.” Aditya mushkurata huva washroom mein ghuss gaya.

Aditya naha kar naye kapde pahan kar baahar aaya to dekha ki sofe par ek ladki baithi hai.

“aditya ye jimmy hai. Ab tum baahar jaao jaldi mujhe bhi taiyaar hona hai.”

Aditya ne jimmy ko good morning wish kiya aur chupchaap baahar aa gaya. Koyi 10 baje jimmy room se baahar nikli aur boli, “tumhari dulhan taiyaar hai…jaao dekh lo jaakar. Tumhe aitraaj na ho to kya shaadi mein main bhi aa sakti hun.”

“mujhe bhala kyon aitraaz hoga. Hum vaise bhi akele hain. Koyi saath hoga to acha hi lagega.” Aditya ne jimmy ko ush mandir ka pata bata diya jaha shaadi hone ja rahi thi.

“thanks…main pure 11 baje vaha pahunch jaaungi. Bye.” Jimmy ne kaha.

Aditya kamre mein aaya to zarina ko dekhta hi rah gaya, “omg meri zarina aaj katal kar degi mera. Uff kya lag rahi ho tum.”

zarina ne apna chehra haatho mein chupa liya sharam ke maare, “mujhe chedo mat aise nahi to shaadi nahi karungi tumhaare saath.”

“acha” aditya sharaarti andaaz mein zarina ki taraf badha.

“chuna mat mujhe… saara make up kharaab ho jaayega.” Zarina peeche hat-te huve boli.

“please jaan thoda karib to aane do. Bahut pyari lag rahi ho tum. Sach mein bahut shunder sajaaya hai jimmy ne tumhe. Tumhe meri nazar na lag jaaye.” Aditya ne kaha.

Zarina bas halka sa mushkura di aditya ki baat par aur boli, “hamein chalna chaahiye aditya. Kahi hum late na ho jaayein. Delhi ke traffic ka koyi bharosa nahi hai.”

“ek minute jara jee bhar kar dekh to lene do mujhe apni dulhaniya ko.” Aditya ne kaha.

“uff tumhaare dekhne ke chakkar mein hamaari shaadi na delay ho jaaye.”

“kya baat hai badi jaldi mein ho shaadi ki. lagta hai mujhe jala kar raakh karne ki jaldi hai tumhe. Achi baat hai. Main khud tadap raha hun khaak mein mil jaane ke liye.” Aditya ne kaha.

“aditya tum mujhe baar-baar in baaton mein mat uljhaya karo. Hum late ho rahe hain aur tumhe majaak sujh raha hai.”

“ok ok jaan b gussa mat karo. Tum vaise hi bahut pyari lag rahi ho. Gussa karogi to jaan nikal jaayegi meri. Gusse mein to tum aur jyada pyari lagti ho. Chalo chalte hain. Maine ek taxi kar li hai mandir tak jaane ke liye.”

“theek hai chalo ab jyada der mat karo.”

Zarina aur aditya hanste mushkuraate hotel se baahar aaye aur taxi mein baith kar mandir ki taraf chal diye. Jab vo mandir pahunche to hairaan rah gaye. Mandir saja huva tha.

“lagta hai koyi aur kaaryakaram bhi hai mandir mein.” Aditya ne kaha.

“aditya koyi gadbad to nahi hogi na.”

“arey nahi paagal koyi gadbad nahi hogi. Mandir ke pandit ji mujhe bhale vyakti lage. Jyada old nahi hain vo. Young pujari hain. Tabhi shaayad unhone hamaare pyar ko samjha.” Aditya ne kaha.

Aditya aur zarina mandir ki seedhiyan chadhe hi the ki unhe pandit ji mil gaye.

“namaskaar pandit ji” aditya ne kaha. Zarina ne bhi sar hila kar namaskaar kiya.

“aao aditya aao. Hum tumhaara hi intezaar kar rahe the. Tum kah rahe the ki tumhaara yaha koyi nahi magar dekho bhagvaan ki kya leela hai. Tum dono ki kahaani shun kar bahut log ikkatha ho gaye hain yaha par. Mujhe ummeed hai tum dono ko bura nahi lagega.”

“nahi pandit ji kaisi baat kar rahe hain aap.”

“aao main sabhi se tumhaara parichay karvaata hun.”

“apna parichay bhi de dijiye pandit ji.” Aditya ne kaha.

“mera naam ravi hai aditya. Aao baaki mitro se bhi mil lo.” Ravi ne kaha.

“aao zarina.” Aditya ne zarina se kaha. Zarina thodi ghabraayi si lag rahi thi.

Agle hi pal unhe bahut saare logo ne gher liye.

“ye hain alok ji. Inhe jaise hi maine bataaya ki tum dono ki shaadi hai kal to mere bolne se pahle hi kanyadan ke liye taiyaar ho gaye.Ye hi kanyadaan karenge.” Ravi ne kaha.

“aur main khud ko khusnasib samjhunga.” Alok ne kaha.

“khusnasib to hum samjhenge khud ko alok ji.” Aditya ne kaha.

Zarina aur aditya ne alok ko hans kar haath jod kar namaskaar kiya.

“ye hain jawed ji. Ye yaha hain to chinta ki koyi baat nahi hai. Ye to tum dono ko farishta maante hain”

Aditya aur zarina ne jawed ko hans kar haath jod kar namaskaar kiya.

“ye hai mini. Hum ishe chutki kahte hain.”

Mini ne aage badh kar zarina ko gale laga liya aur boli, “main tumhari taraf se hun shaafi mein. Khud ko akeli mat samajhna.”

“thank you mini.” Zarina ne kaha.

“ye hain vivek ji. Tum dono ki kahaani shun kar bahut bhaavuk ho gaye the. Dil ke bahut ache hain. Busy hone ke baavjud bhi ye yaha aane se khud ko rok nahi paaye.”

“ye hain sikendar ji. Ye yaha khisi khusi catering ka intezaam kar rahe hain.”

“catering.” Aditya hairaan rah gaya.

“haan catering. Tum dono ki shaadi hai..party to honi hi chaahiye na.”

“ji haan sarkar khaane peene ka apni taraf se acha parbandh kiya hai.”

Aditya aur zarina ne haath jod kar sikendar ka shukriya kiya.

kramashah...............................
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Re: एक अनोखा बंधन

Postby rajaarkey » 13 Oct 2014 14:31

एक अनोखा बंधन--30

गतान्क से आगे.....................

“ये हैं सौरव दा. इन्होने कोल्ड ड्रिंक का परबंध किया है यहा पर. इतनी गर्मी में कोल्ड ड्रिंक सभी को थोड़ी राहत देगी.”

“आदित्य और ज़रीना ने सौरव का भी हाथ जोड़ कर शुक्रिया अदा किया.

,, ये हैं राज शर्मा मेरे दोस्त आज ही किसी काम से मेरे पास आए थे जब इन्होने तुम्हारे प्यार के बारे मे सुना तो तुमसे मिलने के लिए बेताब हो गये ये कहानियाँ लिखते है और अब तुम्हारी कहानी को भी ये अपने ब्लॉग पर डालने वाले है

आदित्य और जरीना ने राज शर्मा को हाथ जोड़ कर प्रणाम किया

“ये हैं मनोज जी. इतने खुश हैं आपकी शादी से की सुबह से यही के चक्कर काट रहे हैं.”

आदित्य और ज़रीना ने मनोज को हंसते हुवे हाथ जोड़ कर प्रणाम किया.

“ये हैं नाइस विका जी. इतने खुस है ये तुम दोनो की शादी से कि संगीत का आयोजन कर दिया है इन्होने यहा. हल्का-हल्का मध्यम म्यूज़िक चलता रहेगा ताकि मंदिर में किसी को तकलीफ़ ना हो.”

आदित्य और ज़रीना ने हाथ जोड़ कर विका को भी नमस्कार कहा.

“ये हैं मनीष जी. इन्होने शादी के फोटोस खींचने का जिम्मा ले लिया है.” रवि ने कहा.

आदित्या और ज़रीना ने मनीष को भी हाथ जोड़ कर नमस्कार कहा.

“ये हैं रोहन जी. राजनीति में अच्छी पकड़ है इनकी मगर फिर भी एलेक्षन हार गये. ये भी ख़ुसी ख़ुसी आए हैं यहा”

आदित्य और ज़रीना ने रोहन को भी हाथ जोड़ कर नमस्कार किया.

“लास्ट बट नोट दा लिस्ट ये हैं रोहित पांडे. बहुत बिज़ी थे ये भी. लेकिन शादी में आने से खुद को रोक नही पाए.”

आदित्य और ज़रीना ने रोहित को भी हाथ जोड़ कर नमस्कार किया.

“वैसे आप इन सबको कैसे जानते हैं पंडित जी.” आदित्य ने पूछा.

“यू ही एक दिन अचानक मिल गये थे सभी. कब दोस्ती हो गयी पता ही नही चला. चलो अब शुभ मुहूरत का वक्त निकला जा रहा है. आओ जल्दी से पहले तुम दोनो के फेरे करवा दूं बातें तो होती रहेंगी.” रवि ने कहा.

रवि उनको मंडप की तरफ ले जा ही रहा था कि जिम्मी भी आ गयी. साथ में होटेल के रिसेप्षनिस्ट मनीष भी थे.

रवि आदित्य और ज़रीना को मंडप में ले आया और उन दोनो को अग्नि के सामने बैठने को कहा. ज़रीना और आदित्य ने एक दूसरे की तरफ देखा. दोनो की ही आँखे नम थी. ये ख़ुसी के आँसू थे. आदित्य ने ज़रीना का हाथ थाम लिया और उसे बैठने का इशारा किया.

पूरा एक घंटा लगा पूरे प्रोसेस में. सभी लोग उन दोनो के हर फेरे पर ताली बजा रहे थे. आदित्य और ज़रीना ने सोचा भी नही था कि इतनी रोनक लग जाएगी उनकी शादी में. उनकी शादी धूम धाम से हो रही थी. फेरो के बाद सभी ने मंदिर के एक कोने में इकट्ठा हो कर सवादिस्ट खाने का आनंद लिया.

खाना इतना था कि मंदिर में आ रहे दूसरे लोग भी खाना खा सकते थे. कुछ खा भी रहे थे. आदित्य और ज़रीना ने मंदिर के बाहर बैठे ग़रीब लोगो को अपने हाथो से खाना दिया. बहुत खुस थे दोनो इश्लीए भगवान के हर बंदे के साथ अपनी ख़ुसी बाँटना चाहते थे.

सभी का हाथ जोड़ कर शुक्रिया करके आदित्य और ज़रीना टॅक्सी में बैठ कर होटेल की तरफ चल दिए.दोनो के चेहरे पर शुकून था और एक प्यारी सी मुश्कान हर वक्त उनके चेहरे पर चिपकी हुई थी.
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Re: एक अनोखा बंधन

Postby rajaarkey » 13 Oct 2014 14:31

“कितने अच्छे लोग थे सभी. आलोक भैया तो बहुत एमोशनल हो रहे थे कन्यादान के वक्त.” ज़रीना ने कहा.

“हां इन लोगो के आने से जो रोनक लगी उसे हम जींदगी भर नही भूल पाएँगे. हम तो तन्हा चले थे होटेल से लोग जुड़ते गये कारवाँ बनता गया.”

“आदित्य बहुत खर्चा किया लोगो ने हमारे लिए. हमें कुछ तो देना चाहिए था उन्हे.”

“मैने पंडित जी से पूछा था पर उन्होने मना कर दिया. उन्होने कहा कि हमारे प्यार के बदले में तुम हमें कुछ दोगे तो ये व्यापार बन जाएगा. प्लीज़ इसे प्यार ही रहने दो.”

“ह्म्म बहुत अच्छा लगा इन लोगो का साथ.”

“हां सही कहा.”

अचानक बाते करते करते ज़रीना बिल्कुल खामोश हो गयी. उसने अपना चेहरा खिड़की की तरफ घुमा लिया.

“क्या हुवा जान…अचानक चुप क्यों हो गयी.”

ज़रीना ने आदित्य की तरफ मूड कर देखा. उसकी आँखे नम थी. वो ख़ुसी के आँसू नही लग रहे थे.

आदित्य ने ज़रीना के हाथ पर हाथ रखा और बोला, “क्या बात है जान…क्या मुझसे कोई भूल हो गयी.”

“नही आदित्य तुमसे कोई भूल नही हुई. बस यू ही उदास हूँ.”

आदित्य ने टॅक्सी में होने के कारण कुछ और पूछना सही नही समझा. जब वो होटेल पहुँचे तो कमरे में आते ही ज़रीना फूट पड़ी. रोते हुवे वो सोफे पर बैठ गयी.

“क्या हुवा जान…कुछ बताओ तो सही.”

“अम्मी-अब्बा और फ़ातिमा की याद आ रही है आज आदित्य. अपने अम्मी-अब्बा के गले लग कर रोना चाहती थी मैं आज पर वो इस दुनिया में नही हैं. कितनी बदनसीब हूँ मैं.”

आदित्य ज़रीना के सामने फार्स पर बैठ गया और उसका हाथ थाम कर बोला, “जान तुम्हारा दर्द समझ सकता हूँ. हम दोनो ने अपने पेरेंट्स को एक साथ खोया है. अगर तुम्हारे अम्मी अब्बा और मेरे मम्मी पापा जींदा होते तो बहुत ज़्यादा नाराज़ होते हम दोनो से. मगर मुझे यकीन है कि हम एक ना एक दिन मना ही लेते उनको.”

“हां आदित्य वही तो. वो नाराज़ रहते मगर इस दुनिया में तो रहते. कभी ना कभी हम उन्हे मना ही लेते. तुम्हे नही पता कैसे संभाला मैने खुद को मंदिर में. ये दंगे क्यों होते हैं आदित्य. कोई इन्हे रोकता क्यों नही.”

“भीड़ जब पागल हो जाती है तो उसे रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है. और जब भीड़ किसी के बहकावे में आ जाए तो स्तिथि और भी गंभीर हो जाती है. ये दंगे क्यों होते हैं नही कह सकता क्योंकि इतना ज्ञानी नही हूँ मैं. हां इतना ज़रूर कह सकता हूँ क़ि दंगे इंसान को हैवान बना देते हैं. मैने तुम्हे बताया था ना कि जब मुझे अपने मम्मी पापा की मौत का पता चला तो मेरा खून खोल उठा था. मेरे अंदर बदला लेने की आग भड़क उठी थी. मैं भी भीड़ में शामिल हो जाना चाहता था. लेकिन फ़ातिमा का रेप नही देख पाया ज़रीना. मुझे यही लगा कि किसी के साथ ऐसा नही होना चाहिए. 5 लोग भूके भेड़ियों की तरह नोच रहे थे उसे.”

“बस आदित्य बस प्लीज़ चुप हो जाओ…नही सुन सकती ये सब. बहुत प्यार करती हूँ मैं फ़ातिमा से. उसके बारे में ऐसा कुछ नही सुन सकती.”

“सॉरी जान तुमने सवाल किया तो बातों बातों में ये बात आ गयी ज़ुबान पर. छ्चोड़ो अब ये सब. मैं हूँ ना तुम्हारे साथ.”

“हां तुम हो तभी तो जींदा हूँ आदित्य.”

“आज इतने ख़ुसी के दिन क्या ऐसे उदास रहोगी.”

“सॉरी अचानक ख़याल आया तो रोक नही पाई मैं खुद को. मंदिर में सब लोग थे तो खुद को संभाले हुवे थी. सबके सामने नही रोना चाहती थी. तुम्हारे सामने खुद को संभाल नही पाई क्योंकि पता है मुझे की तुम संभाल लोगे मुझे.”
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