खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete

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kunal
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 11 Jan 2017 21:57



"..आइए ..आइए ."। उन्हें देखते ही वो कह उठा----“हमारे होटल के कमरे आपको ज़रूर पसंद जाएंगे ।"


" हम यहां कमरा लेने नहीं जाए ।" सतपाल ने कहा ।


मोना चौधरी की निगाह आस-पास घूम रही थी ।


" तो जनाब?"



"मंगलू कहां है?”



"कौन मंगलूं ?"



"जो इस होटल में ठहरा हुआ है ।"


"इस होटल में मंगलू नाम का कोई भी शख्स नहीं ठहरा !"



"झूठ मत बोलो.. तुम !"



"जनाब रजिस्टर देख लीजिए ।" उसने रजिस्टर उसकी तरफ़ सरकाना चाहा ।



सतपाल ने पल भर के लिए आखें बंद की ।।


शैतान की दी जानकारी अभी भी काम कर रहीं थी । सतपाल को मंगलू एक कमरे में बैठा दिखा ।



उसने आंखें खोलीं और मोना चौधरी व मिथलेश से बोला ।



"आओ मेरे साथ ।"



वो तीनो होटल के भीतर की तरफ वड़ गए।


" ऐ जनाब कहाँ जा रहे हो ?" रिशेप्शन वाला हड़बड़ाकर बोला ।



मोना चौधरी ने अपने कपडों में फंसी रिवॉल्वर उसे दिखाकर कहा----" जुबान बंद रख और यहीं बैठा रह…वरना......!"


वो व्यक्ति फोरन गर्दन हिलाकर रह यया ।



मोना चौधरी तेजी से आगे बढी और सतपाल, मिथलेश के पास ने पहुंची ।



"कहां है, मंगलू. ..!"
" पहली मंजिल के कोने वाले कमरे मे ।।" सतपाल ने आगे बढते हुए कहा ।



"मेरे पलेट पर तो मंगलू को पहले पता चल गया था कि तुम लोग आ रहे हो । क्या अव मंगलू को हमारे आने का पता नहीं चलेगा?"



"पता चल सकता है ।"


"फिर तो वो सतर्क हो सकता है ।"


“कुछ भी हो सकता, है । हूमे सतर्क रहना होगा ।" सतपाल है गभीर स्वर में कहा ।



वो तीनों गैलरी मे आगे बढ रहे थै।

वो कमरा पास आता जा रहा था जहां मंगलू मौजूद था ।





मगलू होटल के उस कोने वाले कैमरे में बैठा था । उसने कमरे की खिड़कियां----दरवाजा बंद कर रखा था । कुर्सी पर बैठकर उसने आंखें बंद कर रखी थी कि तभी उसके कानों में जंगला की फुसफुसाहट पडी ।



"क्या कर रहा है मंगलू ?"



"..आराम !!" मंगलू के होंठ हिले !!



"तेरी किस्मत मे अब आराम नहीँ है।”



"क्यों?"


"हमारे दुश्मन आ रहे हैं !"



“दुश्मन ?" मंगलू की आंखें सिकुडी-"किसकी वात कर रहा है !"


"सतपात, मिथलेश और मोना चौधरी !"


"मोना चौधरी भी उनके साथ है?” मंगलू ने पूछा । ।"



" हां !"


" वो लोग मेरे से चाकू छीनना चाहते हैं?"



"मैं यहां से भाग जाता हू।”


" अब तू भाग नहीं सकेगा । वों होटल में आ गए हैं, टकराव तो होगा ही !"


" ओह, मै उन्हें मार दूगां !"


" तेरे लिए खतरा है !"
"कैसा खतरा?"


" उनके पास पवित्र शक्तियों के कवच हैं । उन पर शैतानी शक्ति का असर नहीं होगा ।"



… "ओह, फिर मैं क्या करूं ?"


" ये संकट का वक्त है । तेरे को शैतान के बेटे का चाकू बचाना है, जिसे ये छीन लेना चाहते हैं ।"


"तो क्या मुझे तीनों से टकराना पडेगा?"



" ऐसा भी सकता है ।"



"मेरे शरीर में इतनी ताकत नहीं है कि मैं तीनों से टकरा सकू ।" . . . मंगलू बोला ।



"जानता हूं । अब तेरे को ताकत कै साथ-साथ चालाकी से भी काम लेना होगा।"


"हूं !"



"तेरे को हर हाल में चाकू को बचाना है और मौका देखकर भाग जाना----समझा !"


"समझ गया ।"


"ध्यान रखना, वरना तीनों तुम्हें घेरकर पकड़ लेना चाहेंगे और चाकू तेरे से... !"



तभी दरवाजे पर थपथपाहट पडी ।



"लो आ गए वो !" जंगला की फुसफुसाहट कानों में पड्री । मंगलू की आंखें बंद दरवाजे पर जा टिकी ।।


"तीनों बाहर हैं, मैं देख, आया हूं ।" जंगला की सरसराहट पुनः … कानों में पडी ।



दरवाजे पर पुनः थपथपाहट पडी ।



मंगलू उठा शांत भाव से दरवाजे की तरफ़ बढ़ गया । उसकी आखों में चमक विद्यमान थी ।



" चाकू बचाना है तुमने ।" जंगला की फुसफुसाहट पुन: कानों में पडी।


मंगलू ने सिटकनी हटाई और दरवाजा खोला ।


सामने सतपाल, मिथलेश और मोना चौधरी खडी थी ।



" यही है मंगलू !" सतपाल ने मोना चौधरी से पूछा ।


"हा ।"


सतपाल की गंभीर निगाह मंगलू पर जां टिकी ।
"हम तुम्हें ही तलाश कर रहे थे मंगलू..!"



"मालूम है मुझे ।" मगलू मुस्करा पड़ा--"पता था कि तुम आ रहे हौ ।"


"तो ये भी पता होगा कि हम क्यों आए है?” सतपाल का स्वर शात था ।


"हा ।"



“शैतान के बेटेका चाकू हमें दे दो।"



"नहीं दूंगा ।"


"तुम हमसे झगडा करने की हिम्मत नहीं रखते!"



" चाकू नहीं दूंगा, मैं !"


उसी पल सतपाल उस पर झपट पड़ा ।


मिथलेश सतपाल का साथ देने लगा ।


वे तीनों इसी तरह हाथापाई में भीतर चले गए ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

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kunal
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 11 Jan 2017 21:58



मोना चौधरी वहीं खडी रही । सतपाल ने कहा कि वे आसानी से मंगलू को संभाल लेंगे ।



यही वजह थी कि मोना चीथरी ने बीच मे दखल न दिया । कमरे के भीतर उठा-पटक की आबाजे आ रही थी ।


तभी कुछ दूर रिसेप्शन वाला आदमी दिखा । मोना चौधरी को वहीं खडी पाकर खिसक गया ।


करीब दो मिनट हुए थे मोना चौधरी को वहां खडी हुए कि तभी कमरे के भीतर से मगंलू निकला और फूर्ती से उसने बाहर से दरवाजा बंद कर दिया और पलटकर भागा ।


मोना चौधरी ने उसकी टांगों में टांग फंसा दी ।



मंगलू लडखडाकर छाती के बल गिरा और तुरंत ही संभलकर खडा हो गया ।


भीतर से दरवाजा मिड़भिड़ाया जाने लगा । ,



मोना चौधरी का पूरा ध्यान मगतू पर था ।



"मेरा घूंसा तुम भूल गई क्या?” मंगलू उठा ।



"याद है ।" मोना चौधरी सतर्क स्वर में बोली ।।


" मेरे रास्ते मे मत आओ । जाने दो मुझें।"



"मैं चाहती हूं कि तुम एक बार फिर ही घूंसा मारो" । मोना चौधरी उसकी तरफ़ बढी ।


“अबकी बार जान से मार दूंगा तुझे ।" पुन गुर्राया मंगलू।
" मार मुझे !"



मंगलू दात र्मीचकर मोना चौधरी पर झपटपड़ा ।


मोना चौधरी ने उसे रोका और उसके पेट में घूंसा मारा ।


मंगलू कराहकर दोहरा हो गया तो मोना चौधरी ने जोरों से उसे पीछे से धक्का दिया तो वो लुढककर दो-तीन कदम दूर जा गिरा ।


मोना चौधरी के चेहरे पर कठोरता थी ।


मंगलू संभला और अगले ही पल उसकी निगाह मोना चौधरी के गले मे मौजूद धागे पर जा टिकी ।।



"समझा, मेरी शक्ति का तेरे पर असर नहीं होगा ।" मगंलू कठोर स्वर में बोला…“ये धागा उतार, !."


"नहीं उतारूंगी।"


अगले ही पल मगंलू पल्टा और दौड़ पड़ा ।




पल-भर के लिए मोना चौधरी उसकी इस हरकत पर हक्की-बक्की रह गई ।



दूसरे ही पल वो मंगलू के पीछे दौडी ।।


तब मगंलू गैलरी के कोने में मुड़ने ही जा रहा था कि मोना चौधरी ने उस पर छलांग लगा दी और उससे जा टकराई । दोनो ही नीचे गिरते चले गए । मगलू का माथा पास की रेलिंग से टकराया और खून की रेखा बह निकली।


दोनों अव एक-दूसरे के सामने खडे थे ।



“मै तुझे जाने नहीं दूगीं ।" मोना चौधरी सख्त स्वर में बोली----" चाकू मेरे हवाले कर दे ।"

मोना चौधरी को मौत की सी नजरों से घूरते, मंगलू ने जेब में हाथ डाला और चाकू निक्राल लिया ।



चाकू लेदर केस में लिपटा हुआ था । मंगलू ने लेदर केस से बाहर चाकू निकाला और केस एक तरफ फेंक दिया । मंगलू की आंखों में वहशी भाव मंडराते स्पष्ट नजर आ रहे थे ।




“मैं तेरे को मार दूंगा ।"


मोना चौधरी के दात भिंच गए ।


"अपने गले में पड़ा नीले रंग का धागा उतार दे !"


"क्यों?"


"मैं कहता है उतार ये धागा ।"


" नहीं ।"
अगले ही पल मंगलू चाकू के साथ मोना चौधरी पर झपट पड़ा ।


उसने चाकू मोना चौधरी के पेट में घुसेड़ देना चाहा ।



परंतु मोना ने फुर्ती से खुद को बचाया ओंर जोरदार ठोकर चाकू थामे हाथ वाली कलाई पर मारी । मंगलू के होंठो से कराह निकली और चाकू वाला हाथ खुलता चला गया ।


चाकू टन टन की आवाज के साथ फर्श पर जा गिरा ।


मंगलू पागलों की तरह चाकू की तरफ़ झपटा।


मोना चौधरी ने पूरी ताकत से जूते की ठोकर उसके पेट में मारी ।


मंगलू के होंठों से पीडा भरी चीख निकली और डकराता हुआ वो फर्श पर जा गिरा । ऐसे ही पड़ा रहा । बेदम-सा हो गया था वो, रह-रहकर सांसे ले रहा था ।



मोना चौधरी ने नीचे निरा चाकू उठा लिया । पास ही गिरे पड़े लेदर केस को उठाकर चाकू उसके भीतर डाला और उसे अपने कपडों में छिपा लिया ।



मोना चौधरी अब निकल जाना चाहती थी यहां से ।


सतपाल और मिथलेश को उस कमरे से निकालने में वक्त बर्बाद नहीं करना चाहती थी । मंगलू मुसीबत के रूप में पुन: उसके सामने खड़ा हो सकता था । . …


तभी उसे मंगलू उठता हुआ दिखा । वो आगे वढी और जोरदार ठोकर मंगलू की कनपटी पर मारकर वहां से निकलती चली गई ।





मंगलू बेहोश न हुआ था । होश में था और मोना चौधरी के भागते कदमों की आवाजें वो सुन रहा था । कुछ पलों बाद कदमों की आवाजें कानों में पड़नी बंद हो गई ।


कनपटी पर ठोकर पड़ने की वजह से सिर और चेहरा बुरी तरह दर्द कर रहा था । माथे से खून की पतली-सी धार निकलकर, आंखों तक पहुंचते हुए ठहर गई थी ।



चंद पलों बाद थोडा-सा संयत हुआ तो उठा वो ।


"गंवा दिया चाकू तूने ।" जंगला का नाराज स्वर उसके कानों में फुसफुसाहट भरे ढंग में पड़ा ।


"उसके गले में पवित्र ताकतों वाला धागा था, मेरी ताकत ने उस पर असर नहीं किया ।"


"जो भी हुआ, बुरा हुआ । मोना चौधरी वो चाकू ले गई ।"


"मुझे दुख है ।"
"शेतान के बेटे को उस चाकू की जरूरत है । उसके विना वो जिंदा कैसे होगा ?"


"जानता हूं ।"


"अब तूने वो चाकू पाना है ।"


"हां , मैं उस चाकू को मोना चौधरी से वापस पा लूंगा ।" मंगलू ने क्रोध भरे स्वर में कहा ।



"बाथरूम में जाकर अपना चेहरा धो, उसके बाद बाहर आना ।"


"हां !"



"शैतान के बेटे को तूने खुश करना है, मोना चौधरी से चाकू वापस लेकर ।”


"मैं ऐसा ही कसंगा ।"
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 11 Jan 2017 21:59



मगंलू पास के एक कमरे में घूसा । खाली था वो कमरा । वहां उसने अपने मुँह पर छीटें डालकर धोया और माथे के जख्म को देखा, जो कि कट के रूप में था । फिर उस कमरे से बाहर आ गया ।


"उस होटल से बाहर निकल । सतपाल और मिथलेश कमरे में बंद वो कभी भी वाहर आ सकते हैं।"


मंगलू ने सिर हिलाकर तेजी से कदम आगे बढा दिए । जब वो रिसेप्शन के आगे से निकला तो वहां वो ही आदमी मोजूद था ।


"वो लड़की तो गई ।" वो मंगलू से बोला…"बाकी दोनों कहाँ है। कहीं उन्हें तुमने मार तो नहीं दिया?"


मंगलू बाहर निकलता चला गया ।


"अब कहां जाएगा ?" जंगला की फुसफुसाहट कानों में पडी ।


" मोना चौधरी के पास, उससे चाकू वापस लेकर रहूगा ।"


"वो इस तरह वापस नहीं देगी, । दूसरा रास्ता इस्तेमाल करना होगा।"



“कैसा दूसरा रास्ता?" मंगलू के होंठ हिले ।


"सोचना पडेगा ।"


“मैं मोना चौधरी से ले लूंगा वापस चाकू....!"



"कोशिश करके देख ले ।"



मंगलू घंटे बाद मोना चीथरी के फ्लैट पर था । फ्लैट का दरवाजा बंद था तो उसने चुपके से पीछे की खिड़की का इस्तेमाल किया और फ्लैट के भीतर जा पहुचा ।



परंतु मोना चौधरी फ्लैट में नहीं थी ।

मोना चौधरी सीधी पहुंची थी पारसनाथ के पास ।


उस वक्त शामं के चार बज रहे थे । आज के दिन में दूसरी बार उनकी मुलाकात हो रही थी । मोना चौधरी को वहां आया पाकर पारसनाथ फौरन उसके पास पहुचा ।



"तुम यहाँ-------कोई खास बात है क्या?"



"हां ।"



"तुमने तो सतपाल के साथ रहना था !"



"उसके साथ ही थी। यहां आओ।" मोना चौधरी और पारसनाथ रेस्टोरेंट के एक कोने में पहुचे ।



"बात क्या है?"



मोना चौधरी ने कपडों में छिपा वह चाकू निकाला, जो के लेदर केस मेँ था !"




"ये क्या ?" पारसनाथ की आंखें सिकूहीं ।



“ये चाकू है ! "


“चाकू-ओह क्या तुमने शैतान के बेटे का चाकू पा लिया?" पारसनाथ चौंका ।


"सहीसमझे।”



" मुझे यकीन नहीं आ रहा ।" पारसनाथ ठगा-सा खड़ा रह गया ।


" बो ही चाकू है, मैंने मंगलू से छीना है । हमने मंगलू को दूंढ़ निकाला था ।" मोना चौधरी ने गंमीर स्वर में कहा ।



पारसनाथ ने चाकू थाम लिया ।


"ये तुम रख लो ।"



" मै ?"



"हां, ये चाकू खास है शैतान के बेटे के लिए, वो इसे पाने की पुन: कोशिश करेगा, जब तक उसे चाकू वापस नहीं मिलेगा, तब तक वो मुझे नुकसान-नहीं पहुंचाने वाला । इसे तुम रखो ।"




पारसनाथ ने चाकू थाम लिया ।।



… दोनों के चेहरों पर गंभीरता थी ।


"किसी को पता न चले कि शैतान के बेटे का चाकू तुम्हारे पास है ।।" मोना चौधरी ने कहा ।


"मैं किसी को क्यों बताऊं, लेकिन चाकू की तलाश में वे लोग मुझ तक भी पहुच सकते हैं ।"
"कैसे ? "


" वे आसानी से जान सकते है कि हम-तुम दोस्त हैं ।"


"ऐसा हो सकता है, तुम चाकू को अपने पास रखो और अपने काम में व्यस्त रहो ।"



"सतपाल कहां है?"



मोना चौधरी ने सतपाल और मिथलेश के बारे में बताया ।।



" इसका मतलब कि सतपाल नहीं जानता कि चाकू तुम्हारे पास है?"



"अभी तक तो नहीँ।"



“तुम्हें सतपाल को बताना चाहिए" । "



“वक्त नहीं मिला बताने का । मैं मंगलु से चाकू झपटकर भाग आई और सीधा यहाँ पहुंची ।। मगंलू मुझे ढूंढ रहा होगा कि चाकू पा सके । चाकू कौ पाने की इच्छा से वो मेरे फ्लैट तक भी अवश्य गया होगा !"


पारसनाथ ने अपने हाथ में दबे चाकू को देखा ।



"मैं चलती हूं । तुम चाकू को सुरक्षित रख दो ।"


इसके बाद मोना चौधरी वहां से बाहर आ गई । तभी उसका मोबाइल फोन बज उठा ।
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rajsharma
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by rajsharma » 11 Jan 2017 22:04

kya bat hai dost bahut badhiya maza aa gaya
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

Jemsbond
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by Jemsbond » 12 Jan 2017 10:54

Congratulation bro
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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