कठपुतली -हिन्दी नॉवल complete

Jemsbond
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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Post by Jemsbond » 10 Jan 2017 17:19




पूरी तरह खामोश था यह ।


चेहरा पत्थर की तरह सख्त और भावहीन नजर आ रहा था । काच की गोलियों की तरह चमकीली मगर बेजान आंखें सिर्फ और सिर्फ कुंती देबी की आंखों में झांक रहीं थी । जब वह कुंती द्वारा बार-बार झंझोड़े जाने के बाबजूद 'सोया' सा रहा तो



गोडास्कर बोला-----" हजूर शायद अभी भी यह सोच रहे हैं---- ये नहीं बताएंगे तो गोडास्कर को पता नहीं लगेगा कि हत्या वाली रात ये कहाँ थे जबकि गोडास्कर इस सवाल का जबाब पहले पा चुका है पाने के बाद ही यहाँ "धमका" है ।।
"तो तुम्ही बता दो कहां थे भैया? " कुंती देवी उसकी तरफ घूमी ।।




"ओबराय होटल के रूम नम्बर सेविन जीरी थर्टी थ्री में।" विस्कुट खाते गोडास्कऱ ने कहा----"आपकी जानकारी के लिए बता दूं--यह रूम उस सुईट के ठीक सामने है जहाँ विनम्र बिंदू से मिला था जहाँ बिदूं की हत्या हुई ।। यह कमरा मिस्टर चक्रधर चौबे ने अपने असली नाम से नहीं बल्कि किशोर साहनी के नाम से लिया था । क्यों चौबे जी, गलत तो नहीं कहा गौडास्कर ने?"




चक्रधर चौबे को लगा-अब कुछ भी कहने से कोई फायदा नहीं है ।।


बिस्कुट चबाता पुन: गोडास्कर ही बोला---" गेडास्कर गलत हो ही नहीं सकता क्योंकि यह बात मुह से निकालने से पहले चौबे जी का फोटो होटल के स्टाफ को दिखा चुका है । तस्दीक कर चुका है ।। किशोर साहनी की सुरत यही है ।"


"तुम बोलते क्यों नहीं भैेया ।" कुंती एक बार फिर चीखी----"कहते क्यो नहीं यह सब बकवास है?"


"दुनिया का नियम है-माताजी, आदमी की चुप्पी उसकी स्वीकृति होती है । अब एक ही जगह "अटके" रहने की जगह चौबे जी से यह पूछा जाना चाहिए ---इन्होंने किशोर साहनी के नाम से सुईट के ठीक सामने वाला रूम क्यों लिया ?"


"क्यों लिया?" पहली बीर बिनम्र के मुंह से निकला ।


"गोडास्कर से पूछ रहे हो तो बताए देता हूं ।" उसने एक और बिस्कुट मुह में डालने के साथ कहा'---" इन जनाब को पहले ही मालूम था तुम नौ बजे सुईट में बिदू से मिलने वाले हो । इन्होंने शाम के पांच बजे से अपने कमरे मे डेरा डाल दिया ।
जब तुंम वहाँ पहुंचे ये हुजूर "की होल' से गैलरी का सारा दृश्य देख थे । तुमने खुद बताया-तुम वहाँ ज्यादा देर नहीं रहे । विंदू कै समर्पण को ठूकराकर बापस अा गए । तुम्हारे निकलते ही मामा अपने कमरे से बाहर आये सुईट की बैल बजाई । बिंदू ने दरवाजा खोला । इन्होंने उसे कुछ भी-समझने का मौका दिए वगैर गर्दन दबा ली । यह मर गई । मगर इस बीच उसकी माला टूट चुकी थी । कार्पेट पर मोती बिखर गए । तभी किसी तरह इन्हें पता चला कमरे में एक शख्स और है । वह बिज्जूथा । उसके पास मोजूद कैमरा देखते ही ये समझ गए-उसने बिंदू की हत्या के फोटो खींचे लिए हैं । अब, इनके पास विज्जू की भी ईह लीला समाप्त कर देने के अलावा कोई चारा नहीं था ।

विज्जू को निपटा देना इनके लिए बिंदू को निपटा देने से भी आसान था ।।वही किया । कैमरे की रील निकालकर अपनी जेब में डाल ली ।। और उसकी लाश को लिफ्ट के कुए मे फेक दिया।।



"गोडास्कर । " बिनम्र ने कहा---"यह तुम किस वेस पर कह रहे हो ? "


"गोडास्कर ने अगले लफ्ज नहीं उगले थे ।" कहने के बाद 'गेप’ देने केलिए उसने बिस्कुट मुह में सरकाया और बोलना शुरू किया-----" कत्ल के बाद इन्होंने अपने एक चेले को फोन किया ।। जिसका पेशा ही ऐसे कामों को अंजाम देने का है जैसा ये उससे कराना चाहते थे ।। उसका नाम मनसब है ।। "


" मनसव !" विनम्र ने नाम दोहराया ।


" जी हां ।। मनसब के मोबाइल पर अपने मोबाइल से फोन किया था इन्होंने ।। बेस नः पहला यह ही है दोनों के मोबाइल और कंट्रोल रूम का रिकार्ड बता देगा इन्होने किस वक्त मनसब को फोन करके कितनी देर क्या बात की ? उस रिकार्ड के मुताबिक मनसब को सुईट से बिंदू की लाश हटाने का काम सौंपा था ।
इस काम को मनसब आसानी से कर सके, इस कारण उसके लिए रूम नम्बर सेविन जीरो सेबिन्टीन बुक कराया । यह काम करते वक्त इन्होंने इतनी सावधानी जरूर वरती कि कमरे की बुकिंग अपने मोबाईल से न कराकर पी . सी. ओं. के फोन से कराई । उस पी. सी. ओ से जो ओबराय के ठीक सामने सडक के उस पार है । ऐसा इसलिए किया ताकि होटल के रिकार्ड में इनके मोबाईल का नम्बर दर्ज न हो सके ।। ये…खुद किशोर साहनी के नाम से रुम नम्बर सेवन जीरो थर्टी में ठहरे हैं, यह बात मनसव को भी नहीं बताई । पी. सी . ओ. से फोन करने के बाद उजरत बापस कमरे में आ गए । हालस्कि जिक्र कर चुका हूं फिर भी एक बार पुन: बता देना मुनासिब होगा-------मनसब का कमरा अमरसिंह के नाम से ठीक दस पैंतीस पर कराया गया । मनसव ग्यारह बजे होटल पहुचा।। बारह बजकर तीस मिनट पर चॉक आऊट कर गया । बेस नम्बर टू---"गोडास्कर की इस बात की तस्दीक खुद होटल का रिकार्ड बनेगा ।। मनसब बहां एक अटैची के साथ पहुंचा था । ऐसी अटैची के साथ जिसमें बिंदू जैसी लड़की की लाश मोड़ तोड़कर रखा जा सकै । होटल का एक कर्मचारी गवाह है-अटैची जब लाई गई तो खाली थी लेकिन जब ले जाई गई तो भरी हुई थी । कहने का मतलब---डेढ़ धंटा मनसव ने विंदूकी लाश को अटैची में पैक करने, कार्पेट पर बिखरे मोती चुनने और कमरे की स्फाई करने में खर्च किया क्योंकि चौवे जी ने उससे कहा था…-किसी को सुईट में वारदात का पता न लग सके । मनसव अपना काम करके आराम से निकल गया । उस वक्त होटल का स्टाफ कल्पना तक नहीं कर पाया कि अटैची में लाश है ।। और फिर जो होटल में हुआ सब वताता चला गया गोडास्कर ।।



अमर सिंह को उन्होने मनसब के रूप में पहचाना था । इससे आगे गोडास्कर की जानकारी काम आई।।

गोडास्कर जानता था --- छटे हुए बदमाश मनसब का ना कोइ घर बार है , ना फैमली ।। यह परमानेट रूप से होटल अजंता के रूम नः आठ में रहता है ।

और दोलत राम को निगरानी का काम दिया । जैसे ही सुचना मिली मनसब को घेर लिया गया । बिंदू की लाश ही नहीं , उसका मोबाईल और माला के मोती भी मिल गये हैं ।।


वातावरण मे तनाब पूर्ण खामोशी छा गई ।

सचमुच गोडस्कर ने सबका मुहं बंद कर दिया था ।।


एकाएक चक्रधर चौबे ने पूछा ---" क्या मनसब इस वक्त तुम्हारी हवालात में है ?"



" शुक्र है ऊपर बाले का । आपने अपने गूंगे ना होने का सबूत तो दिया ।"

चक्रधर एक बार फिर चुप कर गया ।


इस बार गोडस्कर ने दौलतराम से कहा --" देख क्या रहा है दौलतराम । हजुर को ले जाकर बाहर खड़ी सरकारी जीप में बैठा ।"



पुलिस टीम चक्रधर चौबे को लेकर लॉबी के दरबाजे की तरफ बढ़ चुकी थी । गोडस्कर भी उनके साथ था ।।।।
रात के दस वजें।

विनम्र की टेक्सी सुनसान इलाके में एक मकान के बाहर रुकी । मकान करीब दो सौ गज में वना हुआ था दु मंजिला । ब्लैक मेलर के रूप में इस बार एक नई लड़की ने फोन किया था । उसने यहीं कहा था-उस मकान के चारों तरफ दूर-दूर तक खाली जगह पडी है ।। दूसरा कोई मकान नहीं है । मकान-दु-मंजिला है और वाहर लगी नेम प्लेट पर 'बसेरा' लिखा है ।



विनम्र ने टैक्सी मे बैठे ही बेठे नेम प्लेट पर नजर डाली ।


ग्रेनाईट पत्थर पर ब्रास के वड़े-वड़े अक्षरों में लिखा "वेसरा' बहां मौजूद अॉन बल्ब के कारण साफ नजर आया ।


विनम्र को कोई शक नहीं रह गया --वह वहां पहुंच चुका है, जहां बुलाया गया था ।



टैक्सी से बाहर निकला ।


ड्राईवर की मदद से खिडकी से अटैची निकलवाई । इस बार उसमें दो करोड़ थे ।।


फोनपर ब्लैक मेलर लड़की ने कहा था---" इस बार दो करोड़ लाने होगे तुम्हें। करोड़ फोटुओं की कीमत । एक करोड पहली बार की गई चालाकी का जुर्माना ।। साथ ही चेतावनी दी गई थी--" उम्मीद है समझ गये होंगे । तुम्हारी कोई भी चालाकी हमारी नजरों से छूप नहीं सकेगी । इस बार अगर कोई हरकत की गई तो अगली बार तीन करोड लाने होंगे ।"


विनंम्र ने कोई सफाई नही दी थी ।


नहीं कहा कि दाढी वाले से उसका कोई सम्बन्थ नहीं था ।

उन सब बातो का अंब कोई मतलब भी नही रह गया था । विनम्र को फोटुओं की जरूरत थी और उसके लिये दो करोड़ तो क्या, इससे कई गुना ज्यादा भी खर्च कर सकता था।। हां एक बात जरुर बार-बाऱ _ उसके मस्तिस्कै में गूंज रहीं थी । वह बात जो चक्रधर चौबे को ब्लैक मेल कर रहे पवन प्रघानं ने कही थी्--" हर ब्लेक मेलर एक जौक होता है ।वह सोने के अंड़े देने वाली मुर्गी को एक ही झटके से हलाल कर देने की बेवकूफी कभी नहीं करता बल्कि जौक बंनकर सारा खून पीने में विश्वास रखता है ।" यही है बात वाद में चक्रधर चौबे ने भी कही थी ।



विनम्र निश्चय कर चुका था…वह अपने साथ ऐसी कोई भी हरकत नहीं होने देगा ।। दो करोड मे सभी फोटो और
नेगेटिव उसे देगा तो ठीक वर्ना सख्ती से पेशं आएगा । अंटेची में विनम्र दो
करोड रुंपये लाया था तो जेब में रिवॉल्बर पडा था ।


दुढ़ निश्चय करके आया था वह--रिवींल्बर का भी इस्तेमाल करना पड़ा तो चूकैगा नहीं ।। निश्चय करते वक्त वह कांप-सा उठा था परन्तु सोचा था---जिस झमेले में फ'स गया है उससे निकलने के लिए हिम्मत तो दिखानी ही पडेगी । मजबूरी है । न तो फोटुओं को कोर्ट तक पहुचने देगा, न ही ब्लेक मेलर जौक बनने देगा ।


इनमे से किसी भी बात क्रो वह अफोर्ड नहीं कर सकता था । टैक्सी बाले को विदा करने के बाद विनम्र बसेरा के गेट की तरक बड़ा।।


अपने पहियों पर चलती अटैची उसके पीछे थी । डोरी विनम्र के हाथ मे ।


फौन पर कह दिया गया था------"बैल बजाने की कोई जरूरत नहीं है दरबाजा खोलकर सीधा अंदर चले आना ।"


विनम्र ने बैसा ही किया।।
लोहे वाला गेट खोलकर छोटी सी गैलरी मे पहुंचा ।। वहां खटारा भी नजर आने वाली मारूति वेन खड्डी थी ।


गैलरी में इमारत के अदर जाने के लिए लकडी का एक दरवाजा था ।

वह खुला हुआ था ।



विनम्र समझ गया---उसी के लिए खुला रखा गया है ।। अटैची को घसीटता वह अंदर दाखिल हो गया । मुश्किल से चार-पाच कदम चलने के बाद खुद को लाबी मे पाया । बहुत कम रोशनी थी वहां । अभी चारों तरफ का निरीक्षण कर ही रहा था कि वातावरण में फोन वाली लड़की की ख़नखनाती सी आबाज गूंजी-"उस कमरे में चले आओं मिस्टर विनम्र जिसकी लाईट आंन है ।।"


विनम्र ने चारों तरफ नजर दौड़ाई ।।।


लाबी में चार कमरों के दरबाजे थे ।।


चारों बंद । केवल एक रोशनदान के कांच पर रोशनी नजर अा रही थी, बाकी तीन एक लाबी में रोशन बल्ब के कारण चमक रहे थे ।।


विनम्र का दिल धाड़-धाड़ कर के बजने लगा था ।।
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

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Jemsbond
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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Post by Jemsbond » 10 Jan 2017 17:20

निर्देश के मुताबिक रोशनी बाले कमरे की तरफ बढ़ा ।। दरवाजे के नजदीक पहुंचकर हाथ किबाड़ पर रखा तो बह खुलता चला गया ।



सामने, ठीक सामने एक डबल बैड था। । डबल बेड पर दाहिनी कोहनी के बल एक लडकी लेटी थ्री । अंत्यत सुंदर थी बह । विनम्र नहीं जानता था उसका नाम क्रिस्टी है । उसके जिस्म पर 'ग्रे' कलऱ का ऐसे कपडे का लिबास था जो कमरे मैं मौजूद रोशनी के सम्पर्क से आकर हैं-जगह जगह से झिलमिला रहा था । उस लिबास को बिनम्र कोई नाम नहीं दे सका है कंधे से शुरू होकर यह लडकी की जांघों पर खत्म हो जाता था । जांघों पर भी काफी उपर ।। धड़ और टांगो के जोड़ से बस जरा ही नीचे ।
शुरू बहां से जहाँ से बक्ष प्रदेश की शुरूआत थी ।


यह भी कहा जाए तो गलत न होगा---वक्षों का ऊपरी हिस्सा थोडा-थोड़ा चमक रहा था ।


विनम्र को लगा---इस कमरे में न सही मगर मकान में इसके साथी जरूर होगें । लड़की के साथ की गई जरा-सी सख्ती पर वे इसकी मदद के लिए आ धमकैगे । वे इतने आराम से कमरे में न आ सके इसके लिए जरूरी है, वह दरवाजे को अंदर से बंद कर ले । इस बारे में सोच ही रहा था कि… "


"आओं मिस्टर विनम्र । आ जाओं ।" कहती हुई लडकी बैड से उठी । उसके होठों पर मोहक मुस्कान थी ।


विनम्र बगैर उससे कुछ कहे अटैची की डोरी छोड़कर घूमा और अगले पल उसने दरवाजा बंद करके डंडाला लगा दिया । अपना काम करके वापस लड़की की तरफ घूमा ।


लड़की ने अपने होठो पर मोहक मुस्कान चिपकाए रखकर पूछा-"ऐसा क्यों किया तुमने."'


"ताकि हमारी बाते कोई और न सुन सके ।" विनम्र के पास जबाव तैयार था ।



वह खिलखिलाकर हंस पड्री । बिनम्र को लगा-संगमरमर के फर्श पर कांच की गोलियां बिखरती चली गई हैं । हंसने के बाद बोली--" हम दोनों के अलावा यहाँ कोई नहीं है ।"


विनम्र को उसका कथन सफेद झूठ लगा ।


जबकि लड़की उसकी तरफ बढी ।


पैरो में ऊंची एडी की सैंडिल होने के कारण चलने से उसके सारे जिस्म में अजीब-सा 'लोच' पैदा होरहा था ।



लिबास के अंदर वक्ष पानी के भरे गुव्वारेकी तरह थरथराते नजर अाए ।




जाहिर था-वह ब्रा पहने हुए नहीं थी ।


विनम्र को लगा--यह उसे लुभाने की कोशिश कर रही है ।


अब तो उसके होठो पर मोजूद मुस्कान भी बिनम्र को निमन्त्रण सा देती लगी ।


और यहीं क्षण था । यहीं क्षण था जब अज्ञात आबाज उसके दिमाग की दीवारो से टकराई----"मार डाल विनम्र मार डाल इसे! मरने के बाद बह वेहद खूबसूरत लगेगी । उससे कई गुना ज्यादा खूबसूरत । जितनी अब लग रहीं है ।"
विनम्र घबरा गया ।

सिर को जोरदार झटका दिया । अंदाज ऐसा था _जैसे दिमाग में गूंज रही आवाज को छिटका देना चाहता हो ।


लड़की अत्यंत नजदीक अा गई थी । तिरछी नजरों से उस पर 'तीर' सा चलाती बोली-----" काम की कोई भी बात करने से पहले मैं तुम्हें यह बता देना जरूरी समझती हूं कि इस वक्त इस मकान मे हम दोंनो के अलावा कोई नहीं है ।"


"क-क्यो?" दिमाग में गूंज रही आबाज को अनसुनी करने का प्रयास करते विनम्र ने पूछा--"तुम्हरे साथी कहां हैं?"


"यहां नहीं हैं ।"


" वजह ?"


"मैँ उनकी गेर जानकारी में तुमसे मिल रही हूं ।"


विनम्र को उसकी इस बात पर चौंक जाना पड़ा । मुंह से निकला--""ऐसा क्यों?"


दिल जो जा गया है तुम पर ।" कहने के साथ उसने अपनी दोनो नंगी बांहें विनम्र के गले में डाल दीं---"मैँ नहीं चाहती तुम हमेशा उनकी अंगुलियों के इशारे पर नाचने बाली कठपुतली वने रहो ।"


"गर्दन दबा दे विनम्र ।गर्दन दबादे इसक्री!" आवाज दहाड्री---" क्या
सुराहीदार गर्दन है । मजा अा जाएगा । " खुद को आवाज़ के प्रभाव से निकालने का अधकचरा प्रयास करते विनम्र ने कहा---" क्या मतलब? क्या कहना क्या चाहती हो तुम ?"



"होशियार वे होते हैं डार्लिग जो कम शब्दों में पूरी बात समझ जाएं ।" उसने अपनी आंखें विनम्र की आंखों मे डालते हुए कह--"मेरे साथियों का प्लान तुमसे एक-दो या दस-बीस किश्ते लेने के बाद भी निगेटिव ऩ सौपने का है । वे तुम्हें नीबू की तरह सारी जिन्दगी निचौड़ने की योजना वनाए बैठे हैं । मुझे उनकी यह बात पसंद नहीं अाई । क्यों पसंद नहीं अाई, बता चुकी हूं ।। दिल आ गया है तुम पर । और क्रिस्टी का दिल जिस पर आ जाए उसे हासिल करके ही रहती है ।। इसलिए उसे सबसे छूप कर मैंने. . .सिर्फ मैंने तुम्हें यहां बुलाया है । मैं तुम्हें इस पहली किस्त साथ ही सारे निगेटिव और फोटो देने के लिए तेयार हूं ।"
' एक बार फिर दिमाग में गूज रही आबाज से खुद क्रो वचाते बिनम्र ने कहा------'' ऐसा है तो फोटो निगेटिब्ज मेरे हवाले करो । खुद चेक कर सकती हो।। अटैची मैं पूरे दो करोड रुपए हैं ।"


"मैं चेक करने की जरुरत नहीं समझती ।"


" तो फोटो और निगेटिब्ज मेरे हबाले ......"



" शर्तें है मेरी ।" क्रिस्टी ने उसकी बात काटकर कहा---"छोटी छोटी केवल दो शर्ते ।"


" क-केसी शर्ते?" अज्ञात आवाज को दबाने के प्रयास में विनम्र का सारा शरीर पसीने-पसीने हो गया था । "



" पहली----" बताना होगा, तुमने बिंदू की हत्या क्यों की?"


" दूसरी?"


" मेरे तन में लगी वह आग बुझानी होगी जो उसी क्षण सें मेरे अंदर सुलग रही हैजव मैंने तुम्हें पहली बार देखा था ।" कहने के साथ विनम्र के इतने नजदीक आ गई कि विनम्र अपने सीने पर उसके बक्षो की गुदगुदाहट महसूस करने लगा ।


" क-कब कब पहली बार देखा था तुमने मुझे?" वह वड़ी मुश्किल से पूछ सका ।।


"जब तुम होटल नारंग पहुचे थे ।। तुम भले ही मुझे न देख सके हो मगर मैनें बहां खड़ी अपनी वैन के अंदर से तुम्हें देखा था । मेरे घुटे हुए साथियोॉ से अपनी जिंदगी आजाद करना चाहते हो तो बताओ विनम्र, तुमने बिंदू की हत्या क्यो की और उसके बाद मुझे अपनी गोद में उठाकर बैठ पर ले जाओ ।। मेरी इच्छा पूरी कर दो ।। मैं सारे पोजिटिव ही नहीँ सारे निगेटिव भी तुम्हारे हबाले कर दूगीं ।"



"क-कैसे?" क्या तुम्हरे साथी तुम्हें…


"यह मेरा काम है । मुझे उनसे कैसे निपटना है ?" इन शब्दों के तुरन्त बाद उसने विनम्र का सिर एक झटके में इस तरह अपनी तरफ खींचा जैसे बिल्ली ने रबड़ी से भरी हांडी खींची हो । अपने होंठ विनम्र के होठों पर रख दिये उसने ।।


और विनम्र ।।।
उसके जहन में कोई दहाड़ा ---" ये लड़की तुझे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रही है विनम्र । ऐसी हर लड़की का एक ही अंजाम होना चाहिए । मौत ।। मर जाना चाहिए इसे! ऐसी लड़कि्या मरने के बाद ज्यादा सुन्दर लगती हैं ।"



"नहीं ।" विनग्र आबाज से लड़ पड्रा----"मैं ऐसा नहीं कर सकता । तुम्हारी कठपुतली बनकर एक और हत्या नहीं कर सकता मैं । क्यों मार डालू इसे? यह एक बेकसुर लड़की है ।"



"वेकुसूर ।" आवाज ने व्यंग्य सा किया------" ये बेकुसूर हैं? ये! जो
तुझ पर अपने यौबन का हथियार चला रही है । ऐसी हर लडकी कुसूरवार होती है गथे! ऐसी हर लड़की को मर जाना चाहिए मार डाल इसे ।"



"नहीं मैं तेरा गुलाम नहीं हूं ।। नहीं मरूंगा ।" ऐस सोचकर विनम्र ने क्रिस्टी को धक्का दिया ।।


क्रिस्टी बूरी तरह लडखडा़ गई गिरते-गिरते बची थी वह ।। चेहरे पर हैरानगी के असंख्य भाव उभर अाए।। किसी मर्द से ऐसी हरकत की उम्मीद क्रिस्टी हरगिज़ नहीं कर सकती थी । भला उसे बिनम्र के दिमाग में चल रहे ’घमासान' के बारे में क्या इल्म हो सकता था ? उसने
तो केवल यहीं देखा…बिनम्र का चेहरा भटृटी में पड़े कोयले-सा दहक रहा था । पसीना यूं वह रहा था जैसे बारिश मे खड़ा हो । जो शख्स इस.
वक्त वासना के आग मे सुलगता होना चाहिए था वह गुस्से की ज्वाला में धधकता नजर आ रहा था । अभी तक उसके जहन में चल रही लडाई, जुवान पर आ गई जो ताकत लड़की को मार डालने ,कै लिए प्रेरित कर रही थी उसका विरोध करता विनम्र दहाड़ उठा'--'"चली जा लडकी! भाग जा यहां से । वरना मैं तेरा खून कर दूंगा ।"


क्रिस्टी के होश फाख्ता हो गए ।


मारे खौफ के थरथर कांपने लगी वह ।।


भूल गई नाटे ने उसे क्या काम सौपा था ।। याद था तो केबल यह चेहरा इस वक्त उसके सामने था । इतना भयानक चेहरा था वह कि क्रिस्टी सचमुच दरवाजे की तरफ़ सरकने लगी ।।

" ये तू क्या बेवकूफी कर रहा है विनम्र? क्या बेवकूफी का रहा है ये ?" उसके दिमाग पर टक्कर मारती आवाज चिंघाडी---" देख वह दरवाजे की तरफ बढ रही है ।। यहाँ है निकल कर भाग गई तो फिर किसी शरीफ को अपने यौबन के जाल मैं फंसा लेगी । फिर किसी देवी का हक छीन लेगी । खत्म कर दे ।खत्म कर दे । खत्म कर दे इसे ।


'खमोश ।' उसकी अपनी आवाज ने अंजानी आवाज का विरोध किया ---" नहीं मारूगा उसे ।। तुम्हारी कठपुतली बनकर नहीं रहूंगा ।। मैं आजाद हूं ।। मेरा अपना एक स्वंत्त्र अस्तित्व है !"
इस तरह ।


विनय ने अज्ञात ताकत से लड़ने की कोशिश की ।


उस कोशिश के तहत चेहरा विकृत होता चला गया । बैसा रूप लेता चला गया । जिसने क्रिस्टी को अपने सिर पर मंडराती मौत का एहसास करा दिया ।।


सहमी हुई वह कुछ और तेजी के साथ दरवाजे की तरफ बढ़ने लगी ।

'वह जा रही है विनम्र । रोक उसे खत्म कर दे खेल ' अंजानी ताकत फिर चीखी---"ऐसी लडकियों का खेल हमेशा के लिए खत्म होना ही चाहिए । तु इसीलिए तो धरती पर अाया है पगले । इसीलिए तो ज़न्म हुआ है तेरा ।मिटा दे इस कंलक को।'

और ।।



विनम्र की आवाज पुरजोर कोशिश के बावजूद हार गई ।


अज्ञात आवाज जीत गई ।


तभी तो उसके 'पाश' में वंधा वह क्रिस्टी की तरफ बढा । मुह से भैडिए की भी गुर्राहट निक्ली---बैइन्ताह सुन्दर हो तुम । गजब की सेक्सी । लड़की, तेरी आंखें बहुत चमकदार हैं मगर इनमे भरी हुई ये "ज्पोति' मुझे पसंद नहीं । मुझे पसंद है-वेजान आंखें । जिनमें चमक तो हो, मगर ज्योति न हो । कंचे जैसी आंखें । वे ही पसंद हैं मुझे ।"

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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Post by Jemsbond » 10 Jan 2017 17:21



" व--बिनम्र।। बिनम्र ।।" भयभीत क्रिस्टी नजरें उसके चेहरे पर जमाये, सहमी हुई दरवाजे की तरर्फ सरक रही थी---'क-क्या हो गया है तुम्हें? ये तुम क्या कह रहे हो?"



दांत पीसते विनम्र ने कहा'--'"तू यह जानना चाहती है न कि मैंने बिदु की हत्या क्यों की? तो सुन-मुझे मरते वक्त किसी लड़की का जिन्दगी के लिए छटपटाना बहुत अच्छा लगता है । मैं वो रोमांचकारी मंजर एक बार फिर देखना चाहता हूं लड़की । तेरी ये सुराहीदार गर्दन कुछ और लम्बी हो जाएगी । आ । मैं तेरी गर्दन दबा दूं ।"



भयाक्रांत क्रिस्टी चीख पड़ी---“वचाओ...... .बचाओं!"'


उसी क्षण ।


किसी ने कमरे का बंद दरवाजा बहुत जोर से पीटा ।


साथ ही एक मर्दानी दहाड़ गूंजी-----"दरवाजा खोलो ।।"
परन्तु ।।


अब विनम्र पर किसी आवाज का कोई प्रभाव नहीं पड़ा ।।


किसी 'बाहरी' आवाज को अब मानो वह सुन ही नहीं पा रहा था ।।



दिलो-दिमाग और पूरे वजूद पर अब केवल एक ही आवाज का कब्जा था।।


उस आवाज का, जो उसके जेहन में गूंज रही थी । जो बार--बार 'लडकी' को मारने के लिए प्रेरित कर रही थी ।


दरवाजे के उस तरफ़ से नाटे की आवाज सुनकर क्रिस्टी के हौंसले में थोड़ा इजाफा हुआ ।


दरवाजा खोलने के लिए वह उस तरफ़ झपटी ही थी कि विनम्र कबूतरी पर झपटने वाले बाज की तरह लपका । अगले पल-क्रिस्टी की नाजुक गर्दन उसके मजबूत हाथों की गिरफ्त में थी ।


क्रिस्टी छटपटाई ।


वह उसकी गिरफ्त से निकलने की कोशिश कर रही थी । मुह से "गूं-गूं'' की आवाज निकलने लगी ।


दरवाजा अब जुनूनी अवस्था में पीटा जाने लगा था । मानो उसे तोड़ डालने की केशिश की जा रही तो । मर्दानी आवाजं के साथ ही अब एक जनानी आवाज भी बार-बार दरवाजा खोलने के लिए चिल्लाने लगी । वह आवाज मारिया की थी मगर, विनम्र पर जरा भी फर्क नहीं पड़ा । उस शख्स पर फर्क पड़ना भी क्था था जिसे वे आवाजे सुनाई ही नहीं दे रही थी ।

अपनी ही दुनियां मे खोया था वह । क्रिस्टी की गर्दन दबाता, दांत , भींचे कह रहा था---"हां । अब अा रहा है मजा । वाह । क्या तड़पन है तेरी । तड़प । और तड़प । वाहा ।। तेरी ये बाहर को उबलती हुई आखै कितनी आकर्षक लग रही हैं । देख, तेरी जीभ बाहर निकल अाई है । कुत्ते की जीभ की तरह लटक रही है ये । वाह ! क्या मंजर है । कुतिया ही तो है तू ! तुझे मर जाना चाहिए । तू इसी लायक है । तू इसी लायक है ।

बार--बार यही शब्द दोहराता विनम्र अपने हाथो की पकड मजबूत और मजबूत करता चला गया ।


और फिर ।


" क्रिस्टी के हाथ-पांव ढीले पड़ गए । कोई छटपटाहट बाकी नहीं रही गई उनमें ।। गर्दन खरगोश की गर्दन की तरह उसके हाथों के बीच झूलती रह गई ।।
विनम्र ने जब राख हुआ चेहरा, फ़टी हुई आंखें और लटकी हूई जीभ देखी तो मस्तिष्क को झटका सा लगा ।


बडी तेजी से उसके बजूद पर हाबी जुनून सा उतरता चला गया । ऐसा महसूस किया उसने जिस्म के अंदर से कोई परछाई निकलकर अभी-अभी बाहर गई हो ।


क्रिस्टी की गर्दन को अपने हाथो में देखकर यूं चौंका जैसे अपनी हथेली पर रखे दहकते अंगारे को देखकर चौंका हो ।


"है भगवान ।"' दिमाग में वाक्य कौधें-----"ये क्या हो गया? कैसे हो गया? क्या कर डाला मैंने ? "



घबराकर उसने क्रिस्टी की गर्दन से हाथ हटा लिए ।


लाश 'धाड' की आवाज के साथ फर्श पर जा गिरी ।


अब वह फटी-फटी आंखों से लाश को देख रहा था । हेरानियां ही हैरानियां थी उसके चेहरे पर ।


दिमाग मे उसकी अपनी आवाज गूंज रही थी----'तूने एक और हत्या कर डाली विनम्र बिंदू की तरह तुने इस लड़की को भी मार डाला ।'


पहली बार ध्यान बंद दरवाजे पर पड़ रही चोटों पर गया ।


कानो में मारिया और नाटे की आवाजें घुसी ।


याद अाया------वह यहाँ ब्लैक मेलर को दो करोड रुपये देने आ्या था । "लडकी ने उसे लुभाने की केशिश की और ........ उसके बाद का सब कुछ उसे एक स्वप्न की तरह याद था । स्वन टूटा तो मरी हुई लडकी की गर्दन हाथों में झूल रही थी ।


वह समझ गया---दरवाजे के उस पार लड़की के साथी हैं ।


दरवाजा तोड़ने की कोशिश वही कर रहे है ।


अगर वह उनके हाथ पड़ गया तो मारा जाएगा या जेल की हवा खायेगा । बौखलाकर उसने चारो तरफ़ देखा----तलाश किसी ऐसी खिडकी की थी जिसके के जरिए कमरे से भाग सके मगर, ऐसा काई रास्ता नहीं था । खिड़की थी जरूर लेकिन उस पर मंजबूत ग्रिल लगी हुई थी । और फिर उसने सोचा'-"भागने से क्या होगा? इसके साथियों ने उसे इसकी हत्या करते देख लिया है । वे पुलिस को सब कुछ बता देगे ।



बिज्जू के द्वारा खीचें गए फोटो भी हैं उनके पास ।

फोटुओं के सामने अाने का मतलब है------उसका खेल खत्म ।


नहीं । वह खेल इतनी आसानी से खत्म नहीं होने देगा ।


कुछ करना होगा ।
क्या कर सकता है ?


एक ही रास्ता है---किसी भी तरह फोटो हासिल किए जाये ।



विनम्र इस नतीजे पर पहुंचा ही था कि वातावरण में' धड़ाम की जोरदार आवाज गूंजी ।


किवाड़ क्रमरे कै फर्श पर आगिरा था।



किसी भी खतरे का मुकाबला करने के लिए विनम्र ने जेब से रिवॉल्बर निकाल लिया ।


एक चार फुटा शख्स ओंर वेहद मोटी औरत उसके सामने थे । चेहरे पर दहशत लिए चौखट के उस पार खड़े वे फ़टी-फटो आंखी से लड़की कीलाश को देख रहे थे । लाश के देखते ही देखते नाटे पर जाने कैसा जुनून सवार हुआ कि विनम्र की तरफ देखता हुआ दहाड उठ-----" तुने -मेरी बीवी को मार डाला हरामजादे ! मेरी क्रिस्टी को मार डाला तूने ?"


नाटा गेंडै की तरह गुर्राकर उसपर झपटा ।।

गुस्से की ज्यादती के कारण उसे विनम्र के हाथ में मौजूद रिवॉल्बर तक नजर नहीं आया था ।


और ......


बौखलाहट में हां -- उसे विनम्र की बौखलाहट ही कही जाएगी । अंगुली ने ट्रेगर दबा दिया ।


" धांय ।"


सारा मकान दहल उठा ।


एक दहकता शोला नाटे के दिल में धुस गया ।


उस वक्त हबा में था । हबा में ही पलटियां सी खाई और मुंह से निकली अंतिम चीख के फर्श पर पर पड़े किबाड़ पर जा गिरा ।।

मारिया ने जा नाटे का जब यह हाल देखा तो दरवाजे ही पर सै "बचाओ बचाओ' चीखती हुई पलटक्रर लॉबी की तरफ भागी ।।।


विनम्र चीखा ---" रूक जाओं ! भागने की कोशिश की तो गोली मार दूंगा ! "


जहां की तहां खड़ी रह गयी मारिया ।।

यु जैसे जादुके जोर से स्थिर कर दी गई हो ।
भला मरने से कौन नहीं बचना चाहता । विनम्र के बगैर कुछ कहे उसने समर्पण की मुद्रा में दोनो हाथ हवा में उठा दिए ।



उसकी इस हरकत पर विनम्र का हौंसला बढ़ा । हुक्म सा दिया'---" मेरी तरफ़ घूमो!"



मारिया ने आदेश का पालन किया ।


उफ्फ! मौत का खौफ क्या होता है, अगर किसी को यह देखना होगो इस वक्त मारिया के चेहरे को देखे।।।


पूरी तरह निस्तेज । बेजान । कान्ति विहीन चेहरा ।

श्मशान की राख-सी उड़ती नजर आ रही थी यहाँ ।


ब्लेड मारा जाए तो खून का एक कतरा तक बरामद न हो सके ।


मारिया जीवित थी मगर आंखों मे जीवन का कोई चिन्ह नजर नहीं आ रहा था । उसकी इस हालत ने विनम्र में साहस का संचार किया ।


रिवॉल्वर उसी पर ताने धीरे धीरे उसकी तरफ बढा ।


मारिया को वह यमराज के दूत से कम नजर नहीं आ रहा था ।


वह, जो आहिस्ता-आहिस्ता उसके नजदीक बेहद नजदीक आ गया ।


उस वक्त मारिया के जिस्म ने खून की जगह मौत का खौफ़ गर्दिश कर रहा था जब विनम्र ने रिवॉल्वर की दहकती नाल उसके माथे के बीचों-बीच रख कर कहा---“बिज्जू द्धारा खींचे गए फोटो और उनके निगेटिब्ज कहां है ?"


मरने से बचने की अभिलाषा ने मारिया से कहलवाया ।

" म- मेरे 'बार' में । बार में मौजुद मेरे पर्सनल बेडरुम में ।।"
" बस करो.. बस करो। प्लीज ।" इलैक्ट्रीक शॉक्स ने चक्रधर चौबे को मानो तोड़ डाला------"कुबूल करता हूं । विंदु की हत्या मैंने ही की है । मैंने ही गला दबाकर मारा था उसे ।"


" क्यो?" टमाटर खाते गोडास्कर ने पूछा ।


"कारण वही है जिस तक तुम पहले ही पहुंच चुके हो ।" इलेक्ट्रिक चेयर पर बैठा चक्रधर चौबे हाल वैहाल हो चुका----"मैं उसकी हत्या के ईल्जाम में विनम्र को फंसाना चाहता था ताकि मुकम्मल
'भारद्वाज कंस्ट्रक्शन कम्पनी" उसी तरह मेरे कब्जे में आ जाए जिस तरह मेरे द्वारा विनम्र को सोंपने से पहले थी ।"


"अगर तुम यही स्थिति बहाल करना चाहते थे तो विनम्र को सौंपी ही क्यों थी? सारा होल्ड तो तुम्हारा था ही ।
विनम्र को अपने नीचे काम करने पर मजबूर कर सकते थे ।"



" ब-बताता है । सव कुछ बता दूंगा । मगर प्लीज, पहले उसे वहाँ से हटा दो । मैं और नहीं सह सकता ।" कहने के साथ उसने गर्दन से उस कांस्टेबल की तरफ इशारा किया जो इलेक्ट्रिक मशीन के नजदीक खड़ा था ।



गोडास्कर के इशारे पर बार--बार बहीं चक्रधर चौबे को इलैक्ट्रिक शाक दे रहा था ।



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Jemsbond
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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Post by Jemsbond » 10 Jan 2017 17:21



गोडास्कर ने अपने उस हाथ से कांस्टेबल को मशीन से दूर हटने का इशारा किया जिसमें टमाटर था ।


कांस्टेबल एक तरफ हट गया ।।



गोडास्कर ने टमाटर में एक और "बुड़क' मारने के साथ कहा----"चालू हो जाओं मामा जानी ।"


"विनम्र के पिता यानी मेरे जीजा की मौत के बाद व्यापार को सम्भालने वाला क्योकि कोई और नहीं था इसलिए मुझें मौका मिला । अगर ये कहूं तब भी गलत नहीं होगा, जिस तरह बिल्ली के भाग्य से कभी-कभी छींका टूट जाता है । उसी तरह जमा-जमाया बिजनेस मेरी झोली में अा गिरा था । खुद को बहन और भांजे का सबसे वड़ा शुभचिन्तक दर्शाया और मुकम्मल कंस्ट्रक्शन कम्पनी का मालिक वन बैठा । मुझे उस वक्त विनम्र को पालने-पोसने और पड़ाने-लिखाने में कोई बुराई नजर नहीं अाई । अाज कह सकता हूं ---मैं दूरदर्शिता से काम नहीं ले सका या । पहला झटका तब लगा जब विनम्र जवान हो गया । अमेरिका से बिजनेस मेनेजमेन्ट का कोर्स करके वापस अाया । कुंती कहने लगी--------" भैया वह वक्त अा गया है जब हमे विनम्र की अमानत उसे सोंप देनी चाहिए । वहुत मेहनत कर ली आपने । अब आपके आराम का बक्त्त अाया है । विनम्र मेहनत बनेगा और अाप चेन से लाइफ़ इन्जॉय करेगे । मैं कुंती की इस किस्म के बातो को सुनकर टालता रहा मगर कब तक टाल सकता था? उन बातों को ज्यादा अनसुनी करने का मतलब था-मेरी नीयत पर कुंती को शक हो जाना । एक दिन ऐसा आ ही गया जब मुझें सारी बागडोर विनम्र को सौंपनी पड़ी । उस वक्त भी ज्यादा झटका नहीं लगा था ।


कारण

विनम्र की यह कहना था---"काम भले ही मैं देखूंगा । मामा असली मालिक आप ही रहेगे ।" मेरा दिल उस वक्त गदगद हौगया था ।।।
सोचा था---कमान विनम्र को सौंपकर मैं कोई ज्यादा बड़ी भूल नहीं कर रहा हूं ।' बहरहाल, एक दिन बाप को भी बेटे के जबान हो जाने पर सव कुछ उसी के हवाले करना होता है मगर थीरे-धीरे मेरी समझ में यह अाता चला गया'----बातो और 'प्रैक्टिकल‘ में बड़ा फर्क होता है । मैं यह नहीं कहूंगा कि विनम्र या कुंती ने मुझे उपेक्षित किया ।। बस यूं समझो-उपेक्षित होता चला गया मैं । बात स्वाभाविक भी थी । कम्पनी का मालिक तो बहीं होता है जो मालिक बाले काम करे । वे सारे काम विनम्र कर रहा था । सो, स्टाफ की नजरों मैं बही मालिक था । अब किसी की आखों में मैं अपने लिए वह सम्मान नहीं देखता था जो देख पाने की आदत मालिक रहते पड़ गई थी। वस । ऐसे ही हालात मुझे कचोटने लगे मालिक का सम्मान पाने की इच्छा बलवती होती चली गई यह काम तभी हो सकता था जब्र विनम्र न रहे । झूठ नहीं बोलूंगा ।। । कई बार विनम्र की हत्या करने का ख्याल भी दिमाग मे आया परन्तु अंजाम देने का साहस न जुटा सका । उस दिन मैंने अपने षडृयंत्र का ताना-बाना बुन लिया । जिस दिन एक -स्टाफ मेम्बऱ से पता लगा-नागपाल ने विनम्र को ओबराय में बुलाया है और बतोर रिश्वत बह उसे लडकी पेश करने वाला है । मैंन सोचाे -खांत्मा विनम्र का नहीं, लड़की का करना चाहिए इस तरीके से कि हत्या के इल्जाम मैं विनम्र फंस जाए । उसके बाद मैंने जो कुछ जैसे किया, वह तुम जानते ही हो ।" इतना कहकर चक्रधर शांत होगया ।



“फिर भी बताओ-कैसे, क्या किया?"


"मैँ अपने कमरे के दरवाजे के "की होल' से सुईट के दरवाजे पर नजर रखे हुए था । ज्यादा विस्तार में न जाकर अगर केवल यह बता दू तो शायद आपके लिए काफी होगा कि आधे घंटे के अंदर मैं विनम्र के वापस जाने पर चौंका था । क्योंकि जो दावत बिदू के रुप मैं उसे दी गई थी वह इतनी जल्दी खत्म नहीं होनी चाहिए थी । यह तो मुझे बाद में पता लगा----विनम्र ने विदु की दावत ठुकरा दी थी । तव बाद अाया सुईट से निकलते वक्त विनम्र थोडा भन्नाया हुआ था । उस ववत मैंने इस बात पर बस ध्यान नहीं दिया था । देता भी कैसे? दिमाग तो अपने प्लान को कामयाब करने में उलझा हुआ था । उसी के तहत सुईट के दरवाजे पर पहुचा । कालबेल बजाई । बिंदू ने दरवाजा खोला था । अपने सामने एक अजनबी को देखकर अभी, वह ठीक से चौंकी भी नहीं थी कि मैंने झपटकर उसकी गर्दन दबा दी और तभी छोडा़ जब वह मर चुकी थी ।।
जब वह मर चुकी । हत्या के वाद सोचा---पुलिस को उसकी गर्दन से मेरी अगुलियों के निशान मिल जायेगे । बाथरूम में गया । एक टॉवल लाया । लाश की गर्दन से अपनी अंगुली के निशान साफ किए और फिर गर्दन के चारों तरफ इस तरह लपेट दिया जेसे हत्या उसी से दवाकर की गई हो ।"




" बिज्जु-तुम्हारे पंजे में कैसे फंस गया?"



"बात तब की है जब में बिंदू की लाश पर टांबल लपेट रहा था ।" ' चक्रधर चौबे इस तरह कहता चला गया जैेसे यह सव कहना उसकी मजबूरी हो-----"परछाई सी सुईट के बेडरूम से निकलकर मुख्य द्वार की तरफ लपकी । मैं चौंका । वह डरा जा था । इतना काफी था-उसने मेरे हाथो से होती बिंदू की हत्या देखी है । मैं झपटा । जेब से डोरी निकलकर उसके गले में डाली और…

'एक मिनट । गोडारकर ने टोका । सारा टमाटर गडप किया ओंर पूछा…"डोरी तुम्हारी जेब में कहाँ से आगई?"



"घ-घर से लेकर चला था ।" चक्रधर चौबे थोडा गड़बड़ाया ।


टिमाटर चबाते गोडास्कर ने अगला सवाल पूछा ।


" किसलिए?"


"म-मेरा इरादा बिंदू को उसी डोरी से खत्म करने का था । "


' "मगर खत्म किया विज्जू को ?"


" हां । "


"ओंर बिदू की ईह लीला हाथों से समाप्त कर दी?"

"वता चूका हूं । "


"बता तो चुके हो मामा जानी मगर बात जम नहीं रहीं ।" इन शब्दों के साथ गोडास्कर कुर्सी से खड़ा होगया ।


चक्रधर चौबे के मुंह से लड़खड़ाती आवाज निकली-----" मतलब?"



'"मामला थोड़ा उल्टा बल्कि थोड़ा नहीं पूरा का पूरा ही उल्टा हो गया है ।" कहने के साथ गौडास्कर ने टॉर्चर रूम मैं चहलकदमी सी शुरू कर दी । जेब से ट्रपल फाईव का चॉकलेट निकालता हुआ बोला------ "डोरी का इस्तेमाल तुम्हें बिंदू को मारने में करना चाहिए था , बकौल आपके जैसा कि सोचकर गए थे क्योंकि उसका मर्डर करते वक्त तुम शान्त दिमाग थे । मानसिक रूप से मर्डर करने के लिए तैयार थे । तुम्हें मालूम था-दृरवाजा खुलेगा । सामने बिंदू होगी ।
उसका क्रियाकर्म करना है । गोडास्कर के ख्याल से तो डोरी उस वक्त हाथ में तैयार होनी चाहिए थी क्योकि उसे लाये ही बिंदू पर इस्तेमाल करने के लिए थे मगर यूज नहीं की और फिर यूज की तो वहां के जहां उसे यूज करने का होश ही नहीं होना चाहिए था । बिज्जू का कत्ल अचानक करना पड़ा । हड़बड़ाहट में करना पड़ा । तुम्हरि पास डोरी निकालने का वक्त कहाँ रहा होगा उस वक्त । उसका कल्ल भी हाथों से होना चाहिए था । बिंदू का डोरी से । यहां सब उल्टा-पुल्टा है । नहीं ।" उसने चाकलेट में बूड़क मारने के साथ कहा---"बात ज़मी नहीं दोस्त । इसने कोई पेच है ।" चक्रधर चौबे के चेहरे पर हवाईयां उड़ने लगी थी । बोला------" जो मैंने किया या हालत ने मुझसे कराया बह बता रहा हूं। अब आपको यह जम नहीं रहा तो इसमे मैं क्या कर सकता हूं ?"


" जानता हूं मामा जानी, तुम कुछ नहीं कर सकते । करना तो सब कुछ गोडास्कर को ही पड़ेगा । खैर !! ये बताओ-उसके बाद क्या हुआ? तुम्हें कब और कैसे पता लगा कि विज्जू ने फोटो खींचे हैं?''


"भागते वक्त कैमरा उसके हाथ में था जो उसकी मौत से पहले ही क्रापेंट पर गिर क्या था । उसे देखने के बाद कुछ भी समझने की जरूरत बाकी नहीं रह गई थी । मैंने कैमरा उठाया । शटर खौला । रील निकालकर अपनी जेब के हवाले की और कैमरा बंद करके बिज्जू की जेब से ठूंस दिया । उसके बाद अाप जानते ही हैं, बिज्जू की लाश को ।


"रील कहाँ है?" गोडास्कर ने चाकलेट 'कुतरी' ।



"उसे मैं जला चुका हूं ।" चौबे के पास जवाब तैयार था ।


"शाबास । काफी अच्छा जवाब सोच रखा था । यहां अाकर तुमने गोडस्कर की बधिया बैठा दी । अागे बड़ने के सारे रास्ते बंद कर दिए ।"


" क्या मतलब?"



"मतलब सीधा है मामा जानी । काफी घुटे हुए हो तुम । पहले ही सोच चुके हो----जो बयान टॉर्चर चेयर पर दिया है, कोर्ट के कटघरे में खड़े होकर उस सबसे मुकर जाना है । एक ही बात कहनी है-हवालात में तुमने जो कुछ कहा पुलिस ने टॉर्चर करके जबरदस्ती कहलवाया था । यह सब झूठ है और.... .यह सब सच है, यह साबित करने बाला गौडास्कर के पास कोई प्रूफ नहीं होगा । नहीं मामा जानी, गोडास्कर इतना वड़ा गधा नहीं है । तुम्हें कोर्ट में पेश करने से पहले गोडास्कर के पास इस बयान को सच साबित करने बाला प्रूफ होगा ताकि तुम मुकर ना सको और
प्रूफ बिज्जू द्वारा खींचे गए फोटुओं से शानदार क्रोई हो नहीं सकता । नतीजा ये ---- तुम्हें बताना होगा, फोटो या रील कहां हैं?"


"कह चुका है । रील मैने जला दी । भला ऐसी चीज को छोड़ता ही क्यों जो मेरे गले का फंदा वन सकती थी?"

"'हवलदार ।" गोडास्कर ने इलैक्ट्रानिक मशीन के नजदीक खडे़ शख्स को पुकारा ।




"यस सर ।" वह मुस्तेद था ।


"समझ ही गए होगें , मामा जानी को खुराक की जरूरत है ।"


समझ चक्रधर चौबे भी गया गोडास्कर क्या कह रहा है । उधर हवलदार मशीन के स्वीच की तरफ बढा इधर आतंकित चौबे चीख पड़ा।


" प प्लीज । ऐसा मत करो गोडास्कर । मैं सच कह रहा हूं । रील मेरे पास नहीँ हैे ।"


अागे के शब्द चीख में तब्दील हो गए । सारा शरीर विधुत तरंगों से थरथरा उठा था ।


उसके बाद तो मानो यह सिलसिला ही चल पड़ा । हवलदार इलेैक्ट्रिक शाक दे रहा था । चक्रधर चौबे बार-बार कह रहा धा-‘रील मेरे पास नहीं है हूँ चाकलेट खाते गेडास्कर को रील चाहिए थी । रील जव चक्रधर चौबे पर थी ही नहीं तो वे कहां से देता?


अंतत: 'चीखता-चिल्लाता' चौबे बेहोश हो गया ।


यहीं वक्त था जब हवालात का दरवाजा खुला ।। दौलतराम नजर
अाया ।।।



गोडास्कर उस पर घुड़का----" तुं कहां था वे?"



"आप ही ने तो भेजा था सर । फिंगर प्रिंटृस एक्सपर्ट के पास ।"



"औह ।। हां । याद अाया । क्या खबर लाया वहां से?"



दौलतराम जानता था…यह गोडास्कर की स्टाईल है, वरना याद उसे सव रहता था । बोला----"रिपोर्ट अापकी मेज पर रखी है सर ।"


‘रिपोर्ट वहां है तो गोडास्कर यहां क्या कर रहा है? ' कहने के साथ बुलडोजर-सा दरवाजा की तरफ लुढ़का ।



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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Post by Jemsbond » 10 Jan 2017 17:22


कुछ देर बाद उसकी टेबल पर रखा टेबल लेम्म अॉन था । वह फिंगर चिप्स चबाता हुआ कुर्सी पर बैठा रिपोर्ट का अध्ययन कर रहा था ।।।
एकाएक उसने अपना भारी-भरकम चेहरा उपर उठाया । मेज के उस पार सावधान की मुद्रा में खडे़ दौलतराम से कहा ।



"इस बार तो गोडास्कर भी गच्चा खा गया दौलतराम?”



"ग-गच्चा? और अाप! नहीं सर । मैं नहीं मान सकता ।"



"अबे जब गोडास्कर ही मान रहा है तो तेरे मान लेने से कौन सा तेरी शान घट जाएगी ।"



" ज- जी ?" वह सकपकाया ।



" इलैक्ट्रिक चेयर पर पड़ा जो शख्स कुछ देर पहले हाय-हा्य कर रहा था, कातिल बह नहीं है ।"



"क-वया बात कर रहे है सर?" दौलतराम उछल पड़ा -----"मैं नहीं मान सकता । आपसे और गलती । हो ही नहीं. . .




"हो चुकी है दौलत राम । गल्ती तो हो चुकी है और हो भी गई है तो अनर्थ नहीं हो गया । गोडास्कर भी इंसान है है आसमान से उतरा फरिश्ता नहीं है । इंसान तो साला है ही गलतियों का पुतला ।"



"मगर सर, इतनी बड्री बात आप कह किस वेस पर रहे है?”



"बेस सामने पड़ा है गोडास्कर के । ये रिपोर्ट । सुईट के अंदर से नागपाल की अंगुलियों के निशान मिले है।। बिंदू के निशान मिले है । बिनम्र और बिज्जू के निशान मिले हैं ।। नहीं मिले है तो मामा जानी के निशान नहीं मिले है । एक ही मतलब हैं इस बात का । यह शख्स सुईट के अंदर गया ही नहीं । गया होता तो कहीं न कहीं से निशान जरूर मिलते ।"



" सर । हो सकता है उसने अपने निशान मिटा दिए हो ?"


'"मिटाता तो मिटाने के निशान होते ।वे भी नहीं हैं उस पोजीशन में इन चारों के निशान भी कहीं न कहीं से मिटे हुए जरुर होने चाहिएं थे । नहीं दौलतराम । गोडास्कर मान ही नहीं सकता कि मामा जानी सुईट गए थे ।"




"तो फिर उन्होंने हत्याएं करनी क्यों कुबूल कर ली ?"




"गोडास्कर तुझे इलाक्ट्रिक चेयर पर बैठ देता है । दो चार झटकों से ज्यादा झटके नहीं देने पड़ेंगें । गोडास्कर तेरे सामने खडा होगा और तू कुबूल कर लेगा कि कि तूने गोडास्कर का कत्ल एक साल पहले करके दो गज जमीन के नीचे दफना चुका है ।"


दौलतराम के जिस्म में झुरझुरी-सीं दौड़ गई बोला---"कह तो आप ठीक रहे हैं सर ।"


"अब दूसरी ठीक बात सुन ।"
" सुनाइए ! "



"बिज्जू का कत्ल भी मामा जानी ने नहीं किया ।"



"तो मामा जानी ने किया क्या है सर?"



"उस पर खोपडी बाद में घुमाएंगे । फिलहाल किस्सा इस रिपोर्ट का है । रिपोर्ट कह रही है…कैमरे पर भी मामा जानी की अंगुलियों का कोई निशान नहीं है । जबकि कहलवा तो गौडास्कर ने उससे यह भी लिया है कि विज्जू का कत्ल करने के बाद उसके कैमरे से रील उसी ने निकाली थी । जो गोडास्कर ने चाहा, कहता गया वेचारा । अटका बहां जंहा मजबूरी थी ।।। रील जव उसके पास है ही नहीं तो दे कहाँ से देता ?"




"तो रोल किस पर है सर ?"


" किसी लड़की पर !"


" लड़की पर?"



"कैमरे पर बिज्जूके अलावा केवल एक लड़की की अगुलियों कै निशान है "



" बिन्दू के अलावा इस केस में और कौन-सी लडकी आ घुसी?"




" म-मारिया ।" गोडास्कर मेज पर जोरदार घुसा मारने के साथ एक झटके से खडा हो गया--'"मारिया ही हो सकती है वहां या उसकी वहन । क्या नाम था उसका? शायद क्रिस्टी । गोडास्कर को उन दोनों की अंगुलियों के निशाने लेने होंगे ।"


"इस वक्त सर?"


"क्यों इस बत्त क्या हुआ ?"


"रात कै बारह बज रहै है ।"


"तू बार-बार भूल जाता है दौलतराम ? याद रखा कर । पुलिस वालो की ड्यूटी चीबीस घंटे की होती है । तू यहीं रह ।। सीट सम्भाल गौडास्कर की । गोडास्कर मारिया बार, यूं गया और यूं अाया ।" कहने के बाद दौलतराम को वह अफिस के दरबाजे से बाहर निकलता नज़र अाया । उसे यूं लगा-जैसे नजदीक से हबा का झोंका गुजरा हो ।
" य-यकीन करो मेरा ! मेरा यकीन करो मेरा ! " पीले जर्द चेहरे बाली
मारिया का लहजा कांप रहा था--"मैंने सब कुछ तुम्हें दे दिया है । निगेटिब्ज की पूरी रील और सारे पोजिटिव । अब इन फोटुओं का मेरे पास कोई प्रिन्ट नहीं है ।"


रिवॉल्वर उसके मस्तक पर रखै विनम्र गुर्राया--"अगर इनमे से एक भी फोटो का एक भी प्रिंट तेरे पास निकल आया तो. . .



"नहीं निकलेगा । कसम खाकर कह सकती हूं ।। सव तुम्हें सौंप दिए है ।"



इस वक्त वे "मारिया बार' के बेसमेन्ट में स्थित मारिया के पर्सनल बेडरूम में अामने-सामने खड़े थे ।। सच्चाई ये है कि बिनम्र को अब इस खेल में आनन्द अा रहा था है अानन्द आने का कारण था-मारिया की हालत ।


बह तो यह सोचा करता था कि अगर किसी पर रिवॉल्वर तान दिया जाए तो उसकी सिटृटी-पिटृटी गुम हो जाएगी मगर हालत इतनी बदतर भी हो सकती है जितनी मारिया की थी , ऐसी कल्पना कभी नहीं कर पाया था । बिंदू ओर क्रिस्टी के कत्ल उससे किसी और ताकत ने कराए थे । नाटे को हडबडी मे गोली मार बैठा था । मारिया के मस्तक पर हालात ने रिवॉत्वर रखवाया था ।


उस वक्त बह और करता भी क्या मगर, उसके बाद के सारे खेल ने उसे आनन्दित कर दिया था । मारिया के चेहरे पर मौत के खौफ की कालिख देखी थी उसने ।


रिवॉल्वर की नोक पर मारिया को मकान से बाहर निकाला । गेलरी में खडी वैन की ड्राईविंग सीट पर बैठाया । उसकी कनपटी पर रिवॉल्वर रखकर बगल वाली सीट पर बैठ गया था । उसने कहा’-"गाडी स्टार्ट कर ।" तो उसने स्टार्ट कर दी । इतना ही नहीं, सारे रास्ते उसके आदेशों का इस तरह पालन करती रही जैसे सर्कस में रिंग मास्टर के कोडे़ पर शेर करता है ।


वेन उसके अादेश पर मारिया बार के बाहर रुकी ।।


ग्यारह बज चुके थे ।


बार बंद हो चुका था । स्टाफ़ का कोई आदमी नहीं था यहां और फिर जिस 'शराफत' के साथ मारिया उसे अपने बेडरूम में लाई । एक ही बार के कहने पर सारे पोजिटिब्ज और निगेटिव की रील सोंप दी ।


उससे बिनप्र को लगा---"सब कुछ कितनी आसानी से हो गया । बह सब कुछ जिसके बारे में यकीन ही नहीं थी ।। जिस काम के बह दो करोड तो क्या, उससे कई गुना ज्यादा तक खर्च करने को तेयार था बह फ्री में हो गया ।

कितने आराम से ।


दो करोड से भरी अटैची अभी भी वेन से पड़ीं थी ।


ये खूब रही । भला इससे आसान रास्ता और क्या हो सकता है?


चाहे जिसके सिर पर रिबॉल्बर रखो और चाहे जो करा लो ।



वस ।।



थोड़ी सी हिम्मत की जरुरत होती है ।
उसे यकीन था…मारिया सच बोल रही है ।



सब कुछ सौप चुकी है उसे । कुछ छुपाने या झूठ बोलने की स्थिति में ही कहां थी बेचारी?


अब विनम्र के सामने समस्या थी तो केवल एक ।


मारिया का क्या करें?


जीवित कैसे छोड सकता था उसे?


छोड़ने का मतलब था----अब तक के किए-कराए धरे पर पानी फेर देना ।


उस जैसी 'गवाह’ को भला कैसे छोड़ा जा सकता था । जबकि वह बेचारी उसके रिवॉल्वर की नोंक पर नाची ही अपनी जान बचाने के लिए थी । वह वच नहीं सकती थी । विनम्र को इस बात का अफसोस था ।


हालात को शायद मारिया ने भी अच्छी तरह 'रीड' कर लिया था । तभी तो कहा-----" व-- विनम्र मैं तुमसे वादा करती हूं --आज ही रात से शहर और फिर यह देश ही छोड़ दूंगी । कहीं और जाकर बस जाऊंगी । किसी ऐसी जगह जहां इण्डियन पुलिस के हाथ कभी मुझ तक न पहुच सकें?" मुस्करा उठा विनम्र !!


मरने के डर से किस कदर डर गई है बेचारी । सोचा-------" हां , एक सूरत इसे जीवित छोड़ देनेे की हो सकती है ।" बाएं हाथ में मोजूद फोटो और रील जेब में सरकाए ही थे कि…


बंद दरवाजे पर दस्तक पड़ी ।
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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