कठपुतली -हिन्दी नॉवल complete

Jemsbond
Super member
Posts: 4040
Joined: 18 Dec 2014 12:09
Contact:

Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:05

पोर्च के नीचे मौजूद टैक्सी वाले ने
खिडकी खोली । मुझे अब भी याद है साव यहीं खड़े रहकर मैंने कांच से बाहर का सीन देखा था । टैक्सी वाले ने अटैची उठाकर डिक्की से रखनी चाही । उन साब ने उसे भी ऐसा करने से रोक दिया । अटैची खुद उठाकर डिक्की मे रखी । मैंने सोचा था ये शख्स फाईव स्टार के कल्चर से थोड़ा अलग है । यहां अाने वाले खुद अपने सामान को हाथ कहाँ लगातें हैं ?"


गोडास्कर ने उत्सुक्तापूर्बक पूछा----"क्या महसूस किया तुमने? क्या अटैची वजनी थी?"


" नहीं साब, जब बह आया था तब तो उसमे कोई खास वज़न नहीं था बल्कि मेरे ख्याल से तो खाली ही थी ।"



"क्या मतलब?"


"उसे मैं ही तो रुम नम्बर सेबिन जीरो सेबिन्टीन तक लेगया था ।"



"यानी अाते बक्त उसने अटैची को टैक्सी ड्राईवर को भी हाथ नहीं. लगाने दिया?"

" ऐसा ही हुआ था साब । बिल्कुल ऐसा ही हुआ था ।"



रिसेप्शनिस्ट बोली-----" सर आमतौर पर होता यह है कि जब किसी कस्टमर को चॉक आऊट करना होता है तो वह रुम ही से रिसेप्शन पर फोन करके एकाऊन्ट बनाने और सामान उठबाने के लिए वेटर को रुम में भेजने के लिए कहता है । मगर अमरसिंह ने बैसा कुछ नहीं किया! बह साढे बारह बजे अटैची सहित सीधा यहाँ आया । बौला--"एकाऊन्ट वना दो । मैं चॉक आऊट कर रहा हूं !" है भगवान । अब उसकी हर हरकत अलग ही नजर आ रही ।"'



"पक्का हो गया सर ! पक्का होगया । उत्साह से भरा प्रसाद खत्री कह उठा --" फिल्म का नाम याद नहीं आ रहा मगर ऐसा सीन किसी फिल्म में मैंने देखा ज़रूर है । एक शख्स खाली अटैची लेकर होटल में आया और एक लाश को उसमे कंचरे की तरह भरकर चला गया किसी को भनक तक नहीं लगी कि अटैची में लाश है । ठीक ऐसा ही हूआ होगा । वह खाली, अटैची लाया और उसमें लाश भरकर ले गया है !"


" किसकी?" गोडास्कर ने पूछा ।



"म-मुझे क्या पता?" गोडास्कर के सीधे सवाल पर वह बैखला गया --" फ फिल्म में वो लाश हैलन की थी ।"
" जब तक पूरी बात समझ ने न अाए तब तक चोंच मत खोला करो।"
गोडास्कर ने उसे डांटा-----''वहाँ भेज दूगा ज़हां एक भी नई फिल्म देखने को नहीं मिलेगी ।"


"ज-जी! मैं समझ गया । अाप जेल की बात कर रहे है न?"



गोडास्कर उसकी बात पर ध्यान दिए बगैर रिसेप्शनिस्ट ओर बदनसिंह से मुखातिब होता बोला----"क्या तुम अमरसिंह को पहचान सकते हो?" दोनों ने एक-दूसरे को देखा, फिर एक साथ कहा----" हां सर ।"


"रतिराम ।। "



"यस सर ।" एक कांस्टेबल तनकर ख़ड़ा हो गया ।



"गोडास्कर की जीप मे क्रिमिनल्स की एलबम्स पडी है, उन्हें उठा ला । "


" अभी लाया सर ।" कहने के बाद वह मुख्य द्वार की तरफ़ दौड़ता चला गया ।


"एक और ऐन्ट्री गोडास्कर का ध्यान अपनी तरफ खीच रही है।"कहते वक्त उसकी नीली आंखे कम्यूटर स्कीन पर स्थिर थीं---रुम नम्बर सेविन जीरो थर्टीन की । ये रूम शाम को पांच बजे किसी किशोर साहनी ने लिया और अमर सिंह के लगभग पीछे ही होटल से चला गया । "

गोडास्कर के कुछ कहने से पहले रतिराम एलवम्स लिए बहां पहुच गया ।

वे चार एलबम थीं । चारों काउन्टर पर रख दी । गोडास्कर ने रिसेप्शनिस्ट और बदनसि'ह से कहा--"एक-एक फोटो को ध्यान से देखो! अमरसिंह और किशोर साहनी की पहचानने की कोशिश करो ।" कहने के साथ उसने काउन्टर पर रखे कई फोनों में से एक का रिसीवर उठाया । वह नम्बर मिलाया जिसके जरिए रूम नम्बर सेबिन जीरो सेविन्टीन बुक कराया गया था ।
" जब तक पूरी बात समझ ने न अाए तब तक चोंच मत खोला करो।"
गोडास्कर ने उसे डांटा-----''वहाँ भेज दूगा ज़हां एक भी नई फिल्म देखने को नहीं मिलेगी ।"


"ज-जी! मैं समझ गया । अाप जेल की बात कर रहे है न?"



गोडास्कर उसकी बात पर ध्यान दिए बगैर रिसेप्शनिस्ट ओर बदनसिंह से मुखातिब होता बोला----"क्या तुम अमरसिंह को पहचान सकते हो?" दोनों ने एक-दूसरे को देखा, फिर एक साथ कहा----" हां सर ।"


"रतिराम ।। "



"यस सर ।" एक कांस्टेबल तनकर ख़ड़ा हो गया ।


"गोडास्कर की जीप मे क्रिमिनल्स की एलबम्स पडी है, उन्हें उठा ला । "


" अभी लाया सर ।" कहने के बाद वह मुख्य द्वार की तरफ़ दौड़ता चला गया ।


"एक और ऐन्ट्री गोडास्कर का ध्यान अपनी तरफ खीच रही है।"कहते वक्त उसकी नीली आंखे कम्यूटर स्कीन पर स्थिर थीं---रुम नम्बर सेविन जीरो थर्टीन की । ये रूम शाम को पांच बजे किसी किशोर साहनी ने लिया और अमर सिंह के लगभग पीछे ही होटल से चला गया । "

गोडास्कर के कुछ कहने से पहले रतिराम एलवम्स लिए बहां पहुच गया ।

वे चार एलबम थीं । चारों काउन्टर पर रख दी । गोडास्कर ने रिसेप्शनिस्ट और बदनसि'ह से कहा--"एक-एक फोटो को ध्यान से देखो! अमरसिंह और किशोर साहनी की पहचानने की कोशिश करो ।" कहने के साथ उसने काउन्टर पर रखे कई फोनों में से एक का रिसीवर उठाया । वह नम्बर मिलाया जिसके जरिए रूम नम्बर सेबिन जीरो सेविन्टीन बुक कराया गया था ।
पता लगा नम्बर पी .सी . ओं. का था ।। जब गोडास्कर को यह पता लगा'-…-पी. सी . ओ. ओबराय के बाहर' सडक के ठीक सामने है तो होठों पर कामयाबी की मुस्कान फैल गई दुसरा फोन किशोर साहनी के नाम के सामने लिखे नम्बर पर मिलाया । पता लगा'--टेलीफोन नम्बर ही नहीं, किशोर साहनी का पता भी 'फाल्स' है । रिसीवर वापस रखते वक्त उसने मेनेजर से कहा'-…“पेघ खुलने शुरू हो गए है मिस्टर मेनेजर । न किशोर साहनी का असली नाम किशोर साहनी था, न ही अमरसिंह का नाम अमरसिंह । दोनों कमरे फ़र्जी नाम-पतों के साथ बुक कराये गए थे और इतनी बात तो तुम्हारी बुद्धी में भी आती ही होगी कि जब फर्जी नाम के कमरे बुक कराए जाते हैं तो बुक कराने वाले का कनेक्शन 'गड़वड़ेशन" से होता है । अब पता ये लगाना है कि इनके असली नाम क्या थे?"



"य-ये-ये था वह शख्स !" एलबम देखता बदनसिंह कह उठा । सबका ध्यान उस तरफ आकर्षित हो गया । जिस फोटो पर उसने उंगली रख रखी थी उसके नीचे 'मनसब' लिखा था । गोडास्कर की नीली आंखों में जुगनू से जगमगा उठे । अमरुद में एक और बुड़क मारा उसने ।।। जबड़ा जुगाली करने बाले अंदाज में चलाता बोला…"कौन है ये…अमरसिंह या किशोर साहनी?"



" य-यह बही है सहवा अटैची वाला ।"


"यानी अमरसिंह?" गोडास्कर ने रिसेप्शनिस्ट की तरफ देखा----" तुम क्या कहती हो?"


" बदनसिंह ठीक कह रहा है ।" उसने इस तरह कहा जैसे समझ न पा रही हो कि "शिनाख्त" करके वह ठीक कर रही है या गलत?


"वैरी गुड ।" गोडास्कर का मुह अब काफी तेजी से चलने लगा था-और देखो, मुमकिन है किशोर साहनी भी इसी में मिले ।"



वदनसि'ह एलबम के पन्ने पलटने लगा ।


गोडास्कर ने एक बार फिर रिसीवर उठाया । एयरपोर्ट की इन्कवायऱी पर फौन किया । अपना परिचय देने के बाद --"चेन्नई जाने वाली रात की फ्लाईट में वेटिंग नम्बर टुवेन्टी फाईव के कस्टूमर का नाम क्या था ? जबाब मिलां-"फ्लाईट से फूल अाई थी । यहां से कोई यात्री प्लेन में नहीं चढा और वेटिंग नम्बर टुवेन्टी फाईव तो टिकट भी इंशू नहीं किया गया ।'
जवाय सुनते ही गोडास्कर ने रिसीवर क्रेडिल पर रखा और मैंनेजर से कहा-------"होटल की तलाशी ले रही पुलिस टुकडी को खबर पहुचा दो-------सर्च बंद कर दे ।


मैनेजर तो चाहता ही यह था । उसने फोरन असिस्टेन्ट मेनेजर को 'सर्च टुकडी’ के पास जाकर गौडास्कर का हुक्म सुनाने के लिए कहा।


असिस्टेन्ट मैनेजर तुरन्त लिफ्ट की तरफ लपका ।



"नहीं!" दूसरा आदमी इनसे नहीं है ।" बदनसिंह ने अंतिम एलबम देखते हुए कहा ।



"मतलब वह सफेदपोश था ।" गोडास्कर वडबड़ाया एेसा सफेदपोश जो अभी पुलिस एलबम तक नहीं पहुच सका है।। खैर वहुत जल्द गोडास्कर उसे भी एलबम में पहुचा देगा "



"इंस्पेक्टर ।" मेनेजर ने कहा---“इजाजत दे तो मैं आपसे एक बात पूछू ?"



"पूछ लो ।" गोडास्कर ने इस तरह कहा जैसे उस पर एहसान किया हो ।



"आप कर क्या रहे हैं? किसकी लाश की तलाश है आपको ?"



"छोडो मैनेजर. गोडास्कर का इरादा यहाँ एक और लाश गिराने का बिस्कूल नहीं हैं जानता हूं सुनते ही हार्ट फेल हो जाएगा। "



कहने के लिए मेनेजर को कुछ सूझा नहीं ।।



तभी बहां दौलतराम आगया । गोडास्कर का मुंह चढा । उसने सैल्यूट मारा । गोडास्कर ने डांटा----"क्यों बे, यहां सब काम में लगे हैं! तुम कहा मटरगश्ती मार रहा था?"



"आप ही ने तो भेजा था सर ।"


" कहां?"


" यह पता लगाने के लिए कि यहाँ से पहले बिज्जू को कहाँ देखा गया ?"


" क्या पता लगा ?"


दौलतराम ने कहा ---- " मारिया बार में ।।।। मारिया के पास ।"
*****************
दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
*****************
Jemsbond
Super member
Posts: 4040
Joined: 18 Dec 2014 12:09
Contact:

Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:07

गोडास्कर का नाम सुनते ही तीनों हड़बड़ा गये।


चेहरे पीले पड़ गए थे ।


होश फाख्ता ।।


खडे रह गए जैसे टी . बी. पर चल रही सी डी अटक गई हो !


मारे खौफ के थरथर कांप रही क्रिस्टी के मुंह से निकला --" गोडस्कर यहां कैसे पहुंच गया ?"


"तुम कह रही थी वह यहां पहुँच ही नहीं सकता ?" नाटे की रूह फना थी ।


और मारिया।


बेचारी मारिया ।


"क्या जवाब देती?


उसे खुद समझ नहीं अा रहा था वह आफ्त कहाँ से टपक पड़ी ?


लग रहा था--शायद उसने गलत सुना है बाहर से कुछ और कहा गया है ।


परन्तु ।


‘क्या हुआ मोहतरमा ।?" वही अवाज पुंनं उभरी…" गोडासक़र का नाम सुनकर सांप सूंघ गया क्या ?


'रही-सही कसर भी पूरी हो गई '


नाटे ने लपककर सेंन्टर टेवल पर फैले फोटो समेटे । हइबड्राहट वाले अंदाज मैं¸ उसे छूपाने के लिए चारों तरफ नजर दोडाई ।।


"यहां यहां ।" फुसफुसाती हुई क्रिस्टी ने फर्श पर बिछे क्लीन का एक कोना उठा दिया ।।


मगर नहीं ।


" नाटे ने फोटो वहाँ नहीं छूपाए । शायद ज़गृह ज्यादा सुरक्षित नहीं लगी थी ।


फोटों उसने सोफे की दरारों में हाथ डालकर अस्टर के पीछे ठूंस दिये !!



गोडास्कर की आवाज पुन: उभरी-“क्या बात है मारिया डार्लिग ! दरवाजा खोलने में इतनी देरी क्यों?"


क्रिस्टी दरबाजा खोलने के लिए लपकी ।







मारिया ने झपटकर उसकी बांह पकडी । फूसफुसाई ---" अभी नहीं ।"


क्रिस्टी जहाँ की तहाँ खड़ी रह गई।



मारिया लपकती हुई स्टोर मे पहुंची सारे निगेटिव उठाकर वक्षस्थल ने ठूंसे । पानी की ट्रै लिए भागती बाथरूम में गई सारा पानी बाशवेसिन में डाला । ट्रै एक तरफ़ फेंकी । वापस रूम में जाकर दरवाजा खोलने का इशारा किया ।



तभी, नाटे की नजर मारिया के वक्षस्थल से झांक रहे निगेटिव के कोने पर पडी । नाटे ने आगे बढ़ कर हाथ से उसको अंदर कर दिया । तो मारिया उसकी हरकत पर सकपका गई घी ।


उधर, क्रिस्टी दरवाजे के नजदीक पहुच तो गई मगर उसे खोलने का साहस नहीँ कर सकी ।


दिमाग में ख्याल र्कौधा- दरवाजा खोलते ही उसके सामने, ठीक सामने गोडास्कर खड़ा होगा ।


नहीं । बह उसका सामना नहीं कर सकेगी ।


वह उसे देखते ही बेहोश हो जाएगी ।।



और फिर


वही क्यों?

दूनिया का सबसे कठिन काम बो ही क्यो करे ?

नाटा या मारिया क्यों नहीं ?


वह पीछे हट गई ।।


इस बार दरबाजा भड़भड़ाया गया । साथ ही गोडास्कर की आबाज़ उभरी-"गोडास्कर कों दरवाजा तोड़ने में दो मिनट लगेंगे ।"


क्रिस्टी को 'पस्त' होती देखकर नाटा लपका । ' एक झटके से दरवाजा खोल दिया उसने । साथ ही चीखा-चीखा --" क्या मुसीबत......


और बस । ।

उसने इतना ही कहा ।

अागे के शब्द खा गया ।


मुद्रा ऐसी बना ली जैसे ’पुलिस' को देखकर हड़ब्रड्रा गया हो ।

जैसे दरवाजा खोलने से पहले विल्कुल न जानता हो कि खटखटाने वाला 'पुलिसिया' है । मुह से हैरत में भरी
आबाज निकली ।



" प पुलिस । यहां पुलिस क्यों ...


वाक्य एक बार फिर जानबूझकर अधूरा छोड़ दिया ।


चेहरे पर हैरत के भाव लिए वह गोडास्कर को देखता रह गया था । उस गोडास्कर को जो दरवाजे पर खड़ा सडक कू्टने वाला इंजन-सा लग रहा था ।


मूली खा रहा था बह ।


जबड़ो को चलाता हुआ अपनी नीली आंखी से नाटे को इस तरह देखता रहा जैसे चिडियाघर के पिजरे में लंगूर को देख रहा हो ।


गोडास्कर ने बगैर कुछ कहे कदम आगे बढ़ा दिये ।


नाटा उसके रास्ते से हट गया ।

मुली चिंगलाते गोडास्कर ने नाटे के बाद मारिया को घूरा , उसके बाद क्रिस्टी और फिर उसकी नीली आंखें सारे कमरे का निरीक्षण करने लगी ।


किसी के भी कुछ ना बोलने के कारण कमरे में सन्नाटा था ।


बंलेड की धार जैसा पैना सन्नाटा ।।


गोडास्कर का कुछ भी न बोलना उनके लिए ज्यादा 'जानलेवा' साबित होरहा था। है ।


छूपाने की लाख चेष्टाओं के वावजूद घबराहट उनके चेहरों पर कब्जा जमाए हुए थी ।।।


मूली का अंतीम सिरा मुहं में ठूंसने के बाद पत्ते टेवल पर डालते गोडास्कर ने पूछा खाने केलिए कुछ है?"


"क-क्यो नहीं?"खुद को नोर्मल दर्शाने की लाख क्रोशिशो कै बावजूद मारिया का लहजा कांप रहा था-“क-क्या खाएंगे आप?"
*****************
दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
*****************
Jemsbond
Super member
Posts: 4040
Joined: 18 Dec 2014 12:09
Contact:

Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:08

वैसे तो गोडास्कर के नांम पर पूरा का पूरा आदमी 'गटक' सकता है , मगर फिलहाल वह खा लुंगा जो आप प्यार से खिलाएंगी ।"


मारिया को लगा अगर वह बोलने की कोशिश करेगी तो मुंह से साफ लफ्ज नहीं निकल सकेंगे । अतः कुछ भी कहने के विचार को स्थगित करके फ्रि्ज की तरफ बड़ी । महसूस किया--टांगे हाथी की सूंड सी होने के बावजूद कांप रही थीं ।। फ्रिज से वे ट्रै उठाई जिसमें छ: सात पेस्ट्री रखी थी । पूरी ट्रे गोडास्कर के सामने टेबल पर लाकर रख दी ।।


गोडास्कर ने एक पेस्ट्री उठाई और मुंह मीठा करना शुरु कर दिया ।


फिर ।।



वह इस तरह पेस्ट्री में 'मग्न' हो गया जैसे कमरे में अपने अलावा किसी अन्य की मौजूदगी से परिचित ही न दो । उसकी हरकत मारिया, क्रिस्टी और नाटे को "दहशत" में डुबोए दे रही थी । जब उसने वैरी पेस्ट्री उठा ली और तव भी कुछ नहीं बोला तो पागल-सी सी चुकी मारिया ने पूछ ही लिया ---" क्या हम जान सकते हैं, आप यहां क्यों आए हैं । "



"यूंही ।" पस्ट्री खाते गोडास्कर ने कहा--" आज कोई खास काम नहीं था न तो सोचा…क्यों ना मारिया डार्लिग के बार मैं ही टहला जाए ।"


मारिया चुप । कहने के लिए कुछ सुझा ही नंहीं ।




"और फिर, तुम्हारा यह कैमरा भी तुम तक पहुचाना था । " कहने के साथ उसने जेब से कैमरा निकालकर सेन्टर टेबल पर रख दिया ।


" क-कैमरा?" मारिया चिहुकी । चौकने का कारण था-कैमरा उसी का था मगर इस बात को भला वह कबूल कैसे कर सकती थी अतः लहजे को स्थिर रखने की कोशिश के साथ बोली----"'म-मेरा कैमरा?"


"क्या ये तुम्हारा नहीं है?"


"न-नहीं ।"


"झूठ बोल रही हो डार्लिग ।"


"झठ । भ…भला मैं झूठ क्यों बोलूंगी ?"


"यही ।" उसने "यही ' पर जोर दिया---" यही तो सोचना पडेगा अब गोडास्कर को ।। अखिर क्यों झूठ बोल रही हो तुम । कैमरा साधरण नहीं है । अंधेरे तक में फोटो खींच सकता है । कीमत एक लाख रूपये है । भला कोई क्यों अपने एक लाख रुपये के कैमरे को अपना होने से इंकार करेगा । "
"अजीब बात कह रहे हैं अाप । मैं कह चुकी हैं---कैमरा मेरा नहीं है ।


"मुसीबत ही ये है डार्लिंग ।" गोडास्कर ने चौथी पेस्ट्री खत्म करने के साथ कहा---गोडास्कर के सामने से झूठ साला ठीक उसी उसी तरह 'सिर पर पेैर' रखकर भागता है जैसे शेर के सामने से हिरन ।"


"क्या मतलब?"



"ऐसा कैमरा अभी इंडिया में नहीं पाया जाता । जिसे चाहिए, बाहर से 'अायात' करना पडता है । आयात हुई चीज पर कस्टम डूयूटी लगती है इस पर भी लगी । जापान से मंगाया गया था इसे और कस्टम रिकार्ड के मुताबिक मंगाने वाली थी तुम । रिकार्ड में तुम्हारा पूरा नाम-पता और इस कैमरे का नम्बर लिखा हा ।"



मारिया के होश उड गए ।


अकेली मारिया के ही क्यों


इस एहसास ने क्रिस्टी और नाटे की भी हवा उडा दी थी कि मारिया पकड़ी जा चुकी है ।



मारिया की 'बेवकूफी' पर झूंझलाकर रह गए वे । भला नम्बर एक के कैमरे-को अपना कुबूल न करने की तुक ही क्या थी? मारिया को भी गलती का एहसास हुआ । मुंह से केवल इतना ही निकल सका---"य-यह कैमरा आपको कहाँ से मिला?"



''बिज्जू की जेब से ।"



मारिया के मुंह से केवल इतना ही निकल सका…"ब-बिज्जू !"


"दीदी ।" नाटे ने आगे बढकर कहा-"मैंने पहले ही कहा था… पुलिस से झूठ बोलने की जरूरत नहीं है ।"


मारिया और क्रिस्टी चौकीं। उनकी समझ मे नहीं आया नाटा क्या कहना चाहता है ।

गोडास्कर ने पांचवीं पेस्ट्री उठाने के साथ नीली आंखे नाटे पर स्थिर कर दी । बोला------" यानी तुम सच उगलने को तैयार हो ।"


"जी ।" नाटे ने अपने दिमाग में घूमड़ रही स्टोरी सैट की ।


सबसे पहले अपना परिचय दो ।"



मेरा नाम नाटा है ।"


"'बैरी गुड । बहूत कम लोंगो के नाम उनके साचों पर फिट बैठते हैं । आगे बोलो ।।
"ये क्रिस्टी है । मारिया की बहन । मेरी पत्नी ।"


“जोडी नहीं जमीं।" गोडास्कर ने पांचवी पेस्ट्री पेट में उतारनी शुरु कर दी थी-----" लगूंर की बगल में हूर वाली कहावत हो गई खैर गोडास्कर को इससे क्या लेना? ये बताओ तुम तीनों यहां,इस बंद कमरे में क्या खिचडी पका रहे थे । "


" मुझे और| क्रिस्टी को मारिया दीदी ने बुलावा था ।"


" कोइ खास वजय ?"



कुछ भी कहने से पहले नाटे ने मारिया की तरफ देखा ।। मारिया और क्रिस्टी को भी लगा -नाटा टूट चुका है। हकीकत उगलने वाला है । मगर नाटे ने वहूत संतुलित लहजे में कहना शुरु किया…"मारिया ने आपके द्वारा ओंबराय मे की गई कार्यवाही टी.वी. पर देख ली थी । उसे देखकर ये धबरा गई । घबराकर हमे फोन किया । हम आए तो इन्होंने बताया----"बिज्जू मुझसे कैमरा उधार मांगकर ले गया था । मैंने टी. वी. पर देखा-----वह मर चुका है । पुलिस मुझ तक पहुच सकती है । कहीं मैं भी किसी झमेले में न फंस जाऊं? इन हालात में ये क्या करें यही विचार-विमर्श करने हमें बुलाया था । मेऱी सलाह थी सच्चाई कबूल कर लेनी चाहिए । ये फंस जाने के डर से हिचक रही थी । तभी अाप अा गए और...



" अोह !.......तो इस कारण गोडास्कर के आगमन पर आप तीनों की हवा शंट हुई जारही थी?"



"ज-जी ।" नाटा खुद ही अपनी कहानी पर आशिक हो गया ।


"अब सवाल ये उठता है-गोडास्कर के दर्शन करते ही तुमने ऐसा क्यों दर्शाया जैसे दरवाजा खोलने से पहले नहीं जानते थे की बंद दरबाजे के उसपार पुलिस है।"



"सॉरी इंस्पेक्टर ।" एक बार फिर नाटे ने बात सम्भाली----मगर यकीन मानो इसके पीछे "फस जाने' के डर के अलावा और कोई कारण नहीं है ।
यह यच है -- दीदी आपके गोडास्कर कहा जाते ही समझ गई थी कि बाहर अाप यानी इंस्पेक्टर गौडास्कर है । मैं दरवाजा खोलने के लिए अागे बढा । इन्होंने यह कहकर रोक दिया…"वह मुझे गिरफ्तार कर लेगा ।" ये तरह डर गई थी । मेरा और क्रिस्टी का कहना था --- ' दरबाजा तो खोलना ही पडेगा । और फिर जब आपने बिज्जू-को कैमरा देने सै अलाबा कुछ किया ही नहीं है, तो डर क्यों रही हो ?'
इन्हें सेटिसफाईड करनेके चक्कर में दरवाजा खोलने में देर हुई । खुद को 'अंजान' अापके इसी सवाल से बचने के लिए दर्शाया था कि…'दरवाजा खोलने मैं देर क्यों हुई ?' हम दर्शाना चलते थे कि-हमें मालुम ही नहीं था बाहर पुलिस है ।"



"होशियार हो नाटे मियां । काफी होशियार हो तुम । शायद इसलिए मारिया डार्लिग ने तुम्हें अपनी मददृ के लिए बुलाया था । तुमने तो एक ही सांस में उन सवालो के जवाब भी उगल डाले जो गोडास्कर ने अभी पूछे ही नहीं? हां , पूछता जरूर और तुम पहले ही ताड़ गए गोडास्कर क्या-क्या पूछने वाला है? वाकई! जरूरत से ज्यादा होशियार हो मगर..... ।" बात अधूरी छोडकर गोडास्कर ने पेस्ट्री में एक और बुड़क मारा और बात आगे वढाई----" गोडास्कर के ख्याल से बेवकूफ वही होता है जो जरूरत से ज्यादा होशियार हो । अपना ही उदाहरण ले तो-------जिस स्टोरी की आड़ में तुम असलियत को छुपाने की कोशिश कर रहे हो वह , खुद वेहद 'बोदी' है क्योंकि सवाल ये उठता है----" बिज्जू एक टके का आदमी नहीं था । यह तुम्हारी मारिया दीदी के पीस अाया । कैमरा मांगा । मारिया ने उसके हाथ एक लाख का कैमरा पकड़ा दिया । क्यों मारिया डार्लिग, क्या इतनी मूर्ख हो ?"


"मैंउसे नहीं दे रही थी। " मारिया को लगा,उसे नाटे की तैयार की गई स्टोरी ही बचा सकती है, इसलिए उसी को पुख्ता बनाने के लिए कहती चली गई…“मगर हाथ जोड़ने लगा । पैर पड गया । गिडगिडाने लगा । कहने लगा…"तुम मुझे एक दिन के लिए कैमरा दे दोगी तो मेरी जिन्दगी संवर जाएगी ।"


"तुमने पूछा होगा------" कैसे सवंर जाएगी जिंदगी ?"


"हां । पूछा था ।"


"जबाव क्या मिला?"


उसने कहा------"' मत पूछो मारिया । बत इतना समझ लो----"एक बड़ा दांव खेलने वाला हूं । अगर यह दांव सीधा पड़ गया तो करोडों में खेलूंगा । यह दांव खेलने के लिए मुझे उस कैमरे की जरूरत है जो अंधेरे से भी फोटो खीच सकता हो । इस बात को तुम यूं भी कह सकती दो कि उस केमरे के बगैर यह दांव खेला नहीं जा सकता । मुझे कुछ फोटो खीचने हैं, जहाँ खींचने हैं मुमकिन है वहाँ अंधेरा हो ।"


"और बिज्जू की बाते सुनकर दीदी को लालच अा गया ।" मौका मिलते ही कमान एक बार फिर नाटे ने सम्भाल ली थी ।
*****************
दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
*****************
Jemsbond
Super member
Posts: 4040
Joined: 18 Dec 2014 12:09
Contact:

Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:08

गोडास्कर को अगला सवाल करने का मौका दिए बगैर वह कहता चला गया---“इन्होंने कहा-----"'तुम मेरे कैमरे की मदद से करोडो कमाने वाले हो तो उसमे मेरा हिस्सा भी होना चाहिये । बिज्जू ने फौरन 'हां' कर दी । बोला------" तुम्हें मुंहमागी कीमत देने को तैयार हूं । बोलो…क्या चाहिये?" दीदी ने कहा-----' जो तुम कमाओ उसमे आधा । बिज्जू इसकै लिए तैयार नहीं हूआ । वह चाहता था एक 'अमाउन्ट तय कर लिया जाए । काफी दैर तक सौदेबाजी होती रही । अंत में दीदी ने कहा---"मेरा कैमरा एक लाख का है । दो लाख मेरे हाथ पर रखा उसके बाद तू इससे जो चाहे कमाता रह ।' बिज्जू 'खेल' गया । बोला…"तुम जानती हो---इस वक्त मेरे पास दो लाख तो क्या दो फूटी कोडी तक नहीं है । हां, दांव ठीक बैठ जाने के बाद की स्थिति ठीक विपरीत होगी । तब दीदी ने पांच लाख की मांग रखी । इनका ख्याल था…पांच लाख मांगेंगी तो तीनं चार लाख के बीच कहीं सौदा पट जाएगा मगर विज्जू ने एक ही झटके मे पांच की मांग मान ली तो । मन ही मन ये भी झूम उठी । पांच लाख मिलने का लालच कमं नहीं था । इन्होंने एक बार फिर बिज्जू से पूछा--क्या कहां क्या दांव खेलने बाला है मगर इस बारे में उसने कुछ नहीं बताया ।"



"मान गए नाटे उस्ताद ।" गोडास्कर ने पांचवीं पेस्ट्री खत्म कर डाली---'' एक वारं फिर तुमने गोडास्कर के सम्भावित सवालों का सही-सही अनुमान लगा लिया और सबाल किए जाने से पहले ही ज़वाब दे डाले । जवाब भी ऐसे जो माहोल मे फिट बैेठ जाएं । यानी कि मारिया ने फक्कड़ विज्जू को कैमरा यूंही नहीं दे दिया बल्कि पांच लाख के लालच में फंसकर एक लाख का कैमरा दांव पर लगाया । यह बात कही ही इसलिए गई है ताकि 'जंचे' बात सुनने बाले को लगे---' हां, ऐसा हों सकता है । मारिया मूर्ख नहीं थी । वल्कि लालच ये फंस गई थी लेकिन इसी से निकलकर एक और सवाल सामने आता है । यह कि--- यह बात मारिया डार्लिग के अलावा किसी को मालूम नहीं थी कि बिज्जू किसी ऐसे मिशन पर काम कर रहा है जिससे उसे करोंरो की कमाई होने की उम्मीद है ।"



"ऐसा कैसे कहा जा सकता है? "


"क्यों नहीं कहा जा सकता?"


" मुमकिन हे-इस बात को कोई अन्य भी किसी दूसरे 'सोर्स’ से जानता हो !"
"और बिज्जू का क्रियाकर्म करके उसी ने रील कब्जा ली हो ।" बात. गोडास्कर ने पूरी कर दी-----" यही कहना चाहते हो न तुम?"



" क- क्या मतलब?" नाटा सकपकाया ।



"मतलब साफ है नाटे उस्ताद । तुम एक बार फिर समझ गए गोडास्कर कहना यह चाहता है--बिज्जू का कत्ल करके कैमरे की रील गायब ही वह कृर सकता है जिसे उसक मिशन के बारे में पहले से मालूम हो । तुम्हारी कहानी से मारिया वह 'करेक्टर' बनकर उभरती है । "




" आप बेवजह मुझ पर शक कर रहे हैं ।" मारिया ने कहा---" मुझे नहीं मालूम था वह कब, कहां क्या करने वाला है? नाटा बताही चुका है--मेरे बार-बार पूछने के बावजूद बिज्जू ने इस सवाल का जबाव नहीं दिया था ।'"



" इतनी सीधी तो तुम भी नहीं हो डार्लिग कि सारे सवालों के ज़वाब हासिल किए बगैेर उसे कैमरा पकड़ा दो ।"



"कहा तो है इंस्पेक्टर दीदी ने पांच लाख के लालच में. . .

"सुन चुका हूं नाटे उस्ताद । सुन चुका हूं । एक ही बात को बारम्बार दोहराने की जरूरतें नहीं है । नाटे की बात पूरी होने से पहले ही इस बार गोडास्कर के हलक से गुर्राहट-सी निकली । नाटे को "घरती पर ला देने' का निश्चय करने के साथ वह कहता चला गया…"अव जरुरत तुम्हें यह समझाने की है कि तुम्हारी बातों का गोडास्कर पर असर क्या पड़ा ? कान खोलकर सुनो--- तुम्हारी बाते सुनने से पहले गोडास्कर को मारिया के कातिल होने का शक तक था जबकि चालाकी भरी बाते सुनने के बाद विश्वास हो चला कि बिज्जू की कातिल यही है इसीलिए .............



"क-क्या बात कर रहे ही इंस्पेक्टर?" मारिया के होश उड गए थे--'"भ-भला मैं एक औरत बिज्जू का कत्ल कैसे कर सकती है?"


" क्यो?" गोडस्का ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा---"क्या कंमी है तुममें?"


" ज-जी ?"


"हटटी-कटटी गो । मजबुत् हो । मर्दमार । जबकि बिज्जू बेचारा मरियल-सा था ।"



'इंस्पैक्टर ।” एक बार फिर नाटे ने दखल दिया----" आप बगैर किसी सबूत के किसी पर इल्जाम नहीं लगा सकते ।"
"सबूत ।” गोडास्कर ने इस शब्द को चबाया और चबाने के बाद शायद आगे भी कुछ कहना चाहता था कि जेब में पड़ा मोबाईल बज उठा ।



जो कहना चाहता था उसे कहने का बिचार स्थगित करके हाथ जेब में डाला । मोबाईल निकाला । ओन करके कान से लगाते हुए कहा---“गोडास्कर ।"



"मनसब मिल गया है सर ।" आवाज कांस्टेबल दौलतराम की थी ।



'"मिल गया है?" गोडास्कर मारे खुशी के उछल पड़ा--""क्रहां हैं"


"वहीँ था सर जहाँ आपने सम्भावना व्यक्त की थी ।"



"था से क्या मतलब । अब कहां है?"



" वह एक गाड़ी में है । महात्मा गांधी रोड की तरफ जा रहा है । मैं टैक्सी से पीछा कर रहा हूं ।"



"बैरी गुड । क्या उसके पास अटैची भी है?"


"मैंने अटैची उसे अपनी गाडी की डिक्की में रखते देखा है सर ।"



"पीछा करते रहो । मोवाईल द्वारा सम्पर्क मैं रहना और कंट्रोल रूम में फोन कर दो । कोशिश उसे पेरने की होनी चाहिए । गोडास्कर बगैर टाईम गंवाए उसी रुट पर पहुच रहा है ।" कहने के साथ` उसने मोबाईल आँफ किया । जेब में डाला । एक हाथ में छटी, दुसरे में सातवीं पैस्ट्री उठाई और नाटे से कहा---"सुबूतों की बाते अगले 'एपीसोड’ में करेगे नाटे उस्ताद । इस वक्त गोडास्कर को शुटिंग के लिए इसी सीरियल की दूसरी लोकेशन पर पहुचना है ।कहने के बाद किसी को भी कुछ बोलने का मौका दिए बगैर वह लपकता-सा दरवाजे से बाहर निकलगया ।



मारिया, क्रिस्टी और नाटे ने राहत की ऐसी सांस ली जैसे फांसी चड़ने से बच गए हों ।
"दिमाग खराब हो गया है गोडास्कर का । . .पागल हो गया है वो ।" मारे गुस्से के कुंती देवी का बुरा हाल धा…“भैया के बारे में कुछ जानता भी है जो यह सव बके चला गया । दुनिया में मामाओं के नाम पर कंस और शकुनी ही नहीं हुये है । उनका "ऐग्याम्पिल' देकर दुनिया के सारे मामाओं को विलेन ठहरा देने से वडी बेयकूफी भला क्या हो सकती है ?

और चक्रधर ! चक्रधर भैया के बारे में जानता भी है वह कुछ !!

चक्रधर भैया वो शख्स हैं जो उस वक्त मेरा और तेरा 'सम्बल' बने थे जब हमारा क्रोई नही रहा था । बेसहारा हो गए थे हम । मैं पूरी तरह टूट चुकी थी । तू केव्रल पांच साल का था । तेरे पिता हमे छोडकर चले गए।। हमारी तरह भारद्वाज कंस्ट्रवशन कम्पनी भी लावारिस हो गई थी ।।

मुझमे उसे सम्मालने क्री क्षमता नही थी । उस वक्त अगर अागे वढ़कर चक्रधर भैया ने बिज़नेस की कमान न सम्भाली होती तो सबकुछ गैर ही लूटकर खा जाते । उन्होंने तेरे पिता की कमी पूरी की । बिजनेस सम्भाला । हमारी ढाल वने । ऐसी ढाल जिसकी वज़ह से तेरे पिता की मौत के साथ ही सबकुछ बरबाद होने से बच गया । इतना ही नहीं, उन्होंने तुझे पकाडा । एल अल बी और बिजनेस मैनेजमेंट कराया और जब महसूस किया-तू सब कनछ सम्भाल सकता है तो सारे बिजनेस की कमान यह कहते हुए तुझे सौंप दी कि---" विनम्र वेटे,' लम्बे संघर्ष के बाद आज मैं अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हुआ हूं । आज़ "भारद्वाज कंस्ट्रक्शन कम्पनी: का मालिक तू है । वे एक साधारण कर्मचारी की तरह अाफिस में बैठते हैं ।


और गोडास्कर उन्हे....उ़न्हें कंस कहता है । शकुनी से तुलना करता है । ऐसा सोचता है कि चक्रधर भैया ने 'भारद्वाज कंस्ट्रक्शन कम्पनी' कब्जाने केलिए तुझे किसी लडकी की हत्या के षडृयन्त्र में फंसाने की कोशिश की है ।‘"


"'मां, मैनें यह सब । बल्कि इससे भी ज्यादा ही कहा । श्वेता कन्विन्स' थी । उसने भी गोडास्कर को समझाने की केशिश की कि मामा ऐसा नहीं कर सकते मगर वह 'कन्विन्स' नहीं हूअा । हां, चुप जरूर हो गया था । उसके होठों पर ऐसी मुस्कान थी जैसे मैं और श्वेता बचकानी बाते कररहे हों।"



" फोन मिला उसे ।। मेरे पास बुला । मैं उससे बात करूंगी ।"



"किसे बुलाया जा रहा है कुंती? किससे बात करने के लिए इतनी उतावली हो रही हो?" इन शब्दों के साथ चक्रधर चौबे ने बंगले की लाबी ने कदम रखा ।



अचानक उसके प्रवेश पर कुंती और विनम्र सकपका गए । फिर कुंती ने कहा…"देरव्र लो भैया, कैसा अनर्थ हो रहा है जमाना ऐसा आ गया है कि जो चाहे जिसके बारे मे, चाहे जो कह डाले ।"




"सुनूं तो सही ।" चक्रधर चौबे मुस्कररया---"'किसने किसके बारे में क्या कह दिया?"








*****************
दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
*****************
Jemsbond
Super member
Posts: 4040
Joined: 18 Dec 2014 12:09
Contact:

Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:10

"गोडास्कर का कहना है…-तुमने एक लडकी की हत्या कर दी है।" कुंती अभी तक गुस्से में थी ।।


चक्रधर का जहन फिरकनी की तरह घूम गया…"हत्या ?"


"और वह हत्या तुमने विनम्र को फंसाने के उददेश्य से की । इसीलिए की ताकि विनम्र फांसी चढ जाए और "भारद्वाज कंस्ट्रक्शन कम्पनी' के मालिक तुम बन जाओ । "



" ये क्या पहेलियां बुझा रही हो कुंती?" कहने के साथ चक्रधर ने बहुत ही गहरी नजरों से कुंती की तरफ़ देखा था…'क्या कह रही हो तुम? मेरी समझ में कुछ नहीं अा रहा ।"



"आप चिंता न करो मामा ।" विनम्र बोला------''मै जानता हू। यह कवल गोडास्कर की कल्पनाओं की उड़ान है ।"


"पर पता तो लगे---आखिर बात क्या है?" वह लगातार कुंती के तरफ देखता चीख पड़ा---किसकी हत्या हो गई है? मैं किस तरह , विनम्र को फांसी के फंदे पर पहुचाने की कोशिश कर रहा हूं ।"'



"किसी भी तरह नहीं मामा ।" विनम्र ने कहा----" प्लीज़, अाप इस बारे में सोचकर अपना दिमाग खराब न करे ।"



"मैं तुमसे पूछ रहा हूं कुंती । तुमसे ।" चक्रधर ने कुंती के दोनों कंधों को पकडकर उसे झंझोड़ा । "



"भैया ।" कुंती बोली…"नापाल नाम के किसी ठेकेदार ने कल रात बिजनेस मीटिंग के काम पर विनम्र को ओबराय होटल के सुईट नम्बर सेविन जीरो थर्टीन में बुलाया था ।"



"क्या हुआ वहां?"



इधर विनम्र चुप हुआ उधर सभी आशाओं के विपरीत चक्रधर चौबे के होठो पर गहरी मुस्कान उभर अाई । बोला----" ओह !! तो ये बात है । मैं तो डर ही गया था ।"


"क-क्या मतलब मामा" विनम्र हैरान रह गया---"क्या ये चिंता की बात नहीं कि गोडास्कर........



"नहीं विनम्र बेटे । चिंता की कोई बात नहीं है? चिंता की बात तब होती जब गोडास्कर किसी 'वेस' पर कोई बात कह रहा होता । मैं तो यही समझा था कि उसके हाथ मेरे खिलाफ़ कोई सबूत लग गया है मगर नहीं, तुम्हारी बातो से जाहिर है------उसके हाथ कोई सबूत नहीं लगा है । उसने जो कहा।। एक पुलिसमेन होने के नाते कहा । पुलिस के सोचने का यह तरीका सदिंयों पुराना है , सदियों से चला आ रहा है ।













जब उन्हे लगता है ---किसी को फंसाने की केशिश की गई है तो सबसे पहले पुलिस की नजर उसके दुश्मनों पर या उन पर जाती है जिन्हें कुछ लाभ होने वाला हो । ऐसे लोगों पर शक करना पुलिस की फितरत है । इसमे शक नहीं, तुम्हें फंसाने की कोशिश की गई है । और इसमे भी शक नहीं उसकी नजर में तुम्हारे फंसाने पर सबसे ज्यादा मुझे ही होगा ।"



" पर भैेया । "' कुंती देबी के लहजे में उनकी भन्नाहट साफ प्रदर्शित हो रही थी-----" उसे पता होना चाहिए "भारद्वाज कंस्ट्रक्शन कम्पनी' की जिस कुर्सी पर विनम्र अाज बैठा है, अाप ही का बैठाया हुआ है । अाप ऐसा न चाहते या आपको उस कुर्सी का लालच होता तो आपको विनम्र को किसी जाल में फंसाने की जरूरत नहीं यी । आप तो वहुत पहले, आसानी से यह काम कर सकते थे । न मैं कुझ कर पाती; न बिनम्र । बिनम्र उस वक्त केवल था ही पांच साल का ।'"



"मैें फिर कहूंगा कुंती । पुलिस वालों के सोचने का नजरिया ऐसा नहीं होता ।" चक्रधर कुन्ती की आंखों से आंखे डालकर इस तरह कहता चला गया जेसे उसे समझाने का प्रयत्न कर रहा हो---"उनका नजरिया यही होता है जिस नजरिए से गोडास्कर सोच रहा है । तुम घबराओ मत । मुझे कुछ नहीं होगा । और. .विनम्र की कीमत पर कुछ भी होगया तो यया फ़र्क पड़ता है? चिंता की बात ये नही जिस पर तुम तीनो चिंतित हो रहे हो बल्कि ये है कि विनम्र नागपाल के झांसे में फंसकर ओबराय गया । तुम्हें वहाँ नहीं जाना चाहिए था बेटे । न गए होते तो यह सबं होता ही नहीं । " मुझे क्या मालूम था मामा कि वहां..........



और बस ।


आगे कुछ न कह सका वह ।।


जेब में पड़ा मोबाईल बज उठा था ।


उसने मोबाईल निकाला । आँन किया । कान से लगाने के साथ कहा-------" यस ।"



" विनम्र से बात करनी है ।'" आवाज ऐसी थी जैसे टीन ही पत्ती को पत्थर पर रगड़ा जा रहा हो ।



" बोल रहा हूं ।" विनम्र ने कहा----कहिए अाप कौन हैं?"



पत्थर पर : टीन की पत्ती रगड्री गई…" वह जिसके पास बिज्जू के कैमरे गायब होने वाली रील है ।"
"क्या?" विनम्र पुरी तरह हकला उठा । पलक झपकते ही उसके मस्तष्क पर ढेर सारा पसीना उभर आया या । घबराहट छुपाने के लिए तेजी से घूमा । पीठ चक्रधर चौबे और कुन्ती की तरफ की । इतना ही नहीं, उसने दरवाजे की तरफ बढते हुए मोबाईल पर कहा था--"क्या कह रहे हो तुम? आबाज ठीक नहीं आ रही ।"



"बिज्जू द्वारा सुईट नम्बर सेविन जोरो थर्टीन मै खीचे गए फोटो इस वक्त मेरे सामने पड़े है ।"


" त--तों-"' बह लाँबी से बाहर निकल अाया था ।



"एक करोड़ देकर फांसी के फंदे से बच सकते हो ।"



"म-मतलब क्या है तुम्हारा?" बिनम्र के होश फाख्त हुए जा रहे थे ।



"बनने की कोशिश मत करो मिस्टर विनम्र । मेरी बातों का मतलब जितनी अच्छी तरह तुम समझ सकते हो उतनी अच्छी तरह फिलहाल दूनिया का कोई दूसरा आदमी नहीं समझ सकता । हा, अगर मेरे द्वारा फोटो 'फ्लैश' कर दिए जाएं तो दुनिया के बच्चे-बच्चे की समझ में मेरी बातों का मतलब आ जायेगा ।। "



" हो कौन तुम और कहां से बोल रहे हो?”



"कौन हूं यह बता चुका हूं । बोल एक पी सी ओ से रहा हूं । "


"क्या चाहते हो ?"


"यह भी बता चुका हूं ।" उसने धीमे लहजे में कहा --"एक करोड की रकम किसी की जेब में नहीं पड़ी होती ।"



"इसीलिए फोन किया है शाम तक इंतजाम कर लो ।"


"पहुचना कहां है?"


"बाद में बताया जाएगा ।" कहने के बाद दूसरी तरफ़ से सम्बन्य विच्छेद कर दिया गया ।
अचानक मनसब को महसूस हुआ------एक पुलिस जीप उसका पीछा कर रही है ।



यह अहसास उसकी अब तक की निश्चिन्ता पर बिजली गिराने के लिए काफी था । दिलो--दिमाग पर थोड्री-सी घबराहट हाभी होने लगी । नजर बार-बार बैक मिरर की तरफ उठ रही यी बल्कि अगर यह कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा कि अब वह आगे की जगह पीछे ज्यादा देख रहा था । पुलिस जीप पिछले चौराहे से पीछे लगी थी । और कई चौराहे पार करने के बावजूद उसके पीछे ही थी । फिर भी, यह पुष्टि करना अावश्यक था कि जीप उसी का पीछा कर रही है क्योकि दिमाग में एक ख्याल यह भी उभरा था…"मुमकिन है पुलिस जीप "अपने रास्ते' जा रही हो और वह व्यर्थ भ्रमित होकर कोई बेवकूफी कर बैठे । जिनके मन मे चोर होता है वे डरकर अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते है ।



अजंता होटल से निकलने के बाद उसका रुख समुद्र तट की तरफ़ था । उसने सोचा था…कार द्वारा समुद्र तट परे पहुंचेगा । यहीं से एक स्टीमर किराए पर लेगा ।। अटैची सहित समुद्र में दूर निकल जाएगा ।' किनारे से बहुत दूर ।


और वहां, अटैची खोलकर लाश समुद्र में डाल देगा ।


मुशकिल से बारह घटे में मांसाहारी मछलियां लाश को चट कर डालेंगी ।


अटैची को किसी दूसरी जगह लुढका देगा ।


खेल खत्म ।


वह जानता था-लाश ही न मिले तो केस की आधी जान अपने-अाप निकल जाती है । उसे पूरा विश्वास था--इस आसान काम को वह पूरे 'आराम' से कर लेगा । मगर पुलिस जीप ने दिमाग मे खलबली मचा दी थी । वह उसी के पीछे है या "अपने रास्ते' जा रही है

' यह जाचने के लिए एक चौराहे से अपनी 'एस्टीम' दाई तरफ़ मोड ली ।


थोड़ा जागे बढ़कर फिर दाईं तरफ और फिर थोड़ा अागे बढकर पुन दाई तरफ । अंतत घूमकर उसी चौराहे पर पहुंच गया जहां से पहली बार दाई तरफ मुडा था ।।


पुलिस जीप भी उसके पीछे उसी चौराहे पर पहुच गई ।।
पुष्टि हो गई…जीप 'अपने रास्ते' पर नहीं है उसका पीछा किया जा रहा है । जीप अगर 'अपने रास्ते' पर होती तो घूमकर उसी चौराहे पर अा जाने का कोई मतलब नहीं था ।

इतना ही नहीं, पुलिस जीप के अलावा एक टैक्सी को भी उसनें
घूमकर उसी चौराहे पर अाते देखा था ।



याद अाया------यह टैक्सी होटल अजंता से ही उसके पीछे थी ।

अब ।


कोई शक नहीं रहा कि पीछा किया जा रहा है । पुष्टि होते ही स्वाभबिक रूप से मनसब के दिमाग पर हडबड़ाहट हावी गई इस बार चौराहा पार करते वक्त एक्सीलेटर पर पैर का दवाब बढता चला गया।


अभी तक सामान्य गति से चल रही एस्टीम दौड़ने लगी ।


साथ ही दौड़ने लगी-पुलिस जीप और टैक्सी । उनकी रफ्तार भी एस्टीम की रफ्तार के अनुपात में वढ़ती चली गई थी ।


मनसब समझ नहीं पा रहा था----------पुलिस उसका पीछा क्यों कर रही है मगर कर रही है, इस बात की पुष्टि हो चुकी थी । और. .अब लक्ष्य केवल एक ही था---पुलिस को चकमा । किसी भी तरह उनकी आंखों से ओझल हो जाना ।।।



इसी प्रयास में वह कईं चौराहे पार कर गया ।



.. अब मंजिल समुद्र तट नही थी।


जिधर सडक थोडी खाती नजर अाती-------एस्टीम को उधर ही घूमा देता , पुलिस जीप और टैक्सी लगातार उसके पीछे थी ।

वातावरण में पुलिस साईरन की आवाज गूंजने लगी ।

*****************
दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
*****************
Jemsbond
Super member
Posts: 4040
Joined: 18 Dec 2014 12:09
Contact:

Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:11

एक चौराहे पर दो अन्य जीपों ने घेरने की केशिश की ।


एक दाई तरफ से अाई थी । दुसरी बाई तरफ से । पीछा करने वाली पीछे ही थी । "


मनसब के जबड़े कस गए । "रेड लाईट' तक की परवाह नहीं की उसने । चौराहा पार करके एस्टीम को नाक की सीध में दोड़ाता चला गया । उस चौराहे के बाद उसके पीछे तीन जींपे और एक टैक्सी थी । पुलिस साईरन का शोर निरन्तर तेज होता जा रहा था ।


जो खेल कुछ देर तक 'लुक-छिप' का चल रहा था ।


वह खुल गया । शहर की सड़क्रो पर खुल्लम-खुल्ला भागदौड़ होने लगी ।
साधारण लोग भी समझ गए…पुलिस किसी मुजरिम को घेरने की कोशिश कर रही है । जिधर से भी एस्टीम और एस्टीम के पीछे का काफीला गुजरता उसी तरफ हलचल-सी मच जाती ।


मनसब समझ चुका था'---जैसे भी हुई, गडबड हो चुकी है । उससे भी ज्यादा गडबड लाश के साथ पकडे जाने पर हो सकती थी ।


इसलिये पुलिस को चकमा देने की भरपूर कोशिश कर रहा था ।



" धांय .. धांय ... धांय । "

पीछे से लगातार गोलियां चलाई जाने लगी ।


एक चौराहा पार करते वक्त उसने चौथी पुलिस जीप को देखा ।।


वह सरासर रोंग साईड पर थी ।


दौड़ती हुई सीधी उसकी ही तरफ आ रही थी !


उसके किसी भी तरफ इतना गैप नहीं था कि मनसब एस्टीम को उसकी बगल से निकाल सकता ।।।


मनसब ने जोर से ब्रैक पैडल दबाया ।।


वातावरण टायरों की चीख -पुकार से दहल गया ।।

मगर कैसे ?


कैसे रूकती एस्टीम ।


ब्रैक लगाये जाने से पहले उसकी रफ्तार ही इतनी तेज थी कि टायरों पर घिसटती चली गई ।।


उसकेबाद ।।


एक पल ।


केवल एक पल के लिए मनसब सामने से दोडी चली आ रही जीप की ड्राईविंग सीट पर बैठे गोडास्कर को देख पाया ।


अगले पल ।।


" धड़ाम ।" की जोरदार आवाज से वातावरण दहल उठा ।


एस्टीम ही नहीं, जीप भी हवा में कलाबाजियां खाती चली गई ।।



मनसब ने अपने जिस्म को हवा में तैरते पाया । उसे नहीं मालूम था--------ड्राईविंग सीट स वह हवा मे कैसे पहुच गया और फिर कैसे धाड़ से सड़क पर जागिरा ।

मुंह से चीख निकल गई ।


चेतना ने लुप्त होना चाहा ।।।


मगरा ।।


मनसब ने संघर्ष किया ।।


उठा ।। जिधर रास्ता मिला दौड़ा ।


ठिठका तब जब ठीक सामने गोश्त का पहाड खड़ा नजर आया ।


वह गोडास्कर था।


आम चूस रहा था वह ।।


"है भगवाना' मनसब के जहन में एक ही ख्याल कौधां ----'ये ' " आदमी है या बुलडोजर?


अंब उसने गोडास्कर को डॉज देकर निकल जाना चाहा ।


परन्तु ।।।


हाथी की सूंड जैसी टांग झूमी ।।


भारी बूट लहौर के हथोड़े की तरह पीठ से ट्रकराया ।


उसने हार नहीं मानी ।।


पुनः उठा ।


दौड़ा ।


मगर तभी ।।


महसूस किया ।।


बुलडोजर उसके सिर के उपर से होता हुआ गुजरा है ।
अगले पल गोडास्कर फिर उसके सामने खड़ा आम चूस रहा था ।


दरअसल वह हवा में कलाबाजियां खाता हुआ ऊपर से गुजरकर 'धम्म' से पुन: उसके ठीक सामने आ खड़ा हुआ था ।


मनसब यकीन ही नहीं कर पाया…इतने भारी शरीर का मालिक यह चमत्कार भी कर सकता है । अाम चूसते गोडास्कर ने कहा---"दांत सलामत रखना चाहता है तो भागने की केशिश मत कर ।"


" मगर कैसे? ’ बच निकलने की कोशिश मनसव भला कैसे न करता?


एक बार फिर उसने कतराकर निकल जाना चाहा और ईनाम स्वरूप जबड़े पर लोहे का मुगदर-सा पड़ा ।


हालांकि वह मुगदर नहीं गोडास्कर के दाएं हाथ का घूसा था ।


एक ही घूंसा मनसब के कई दांत तोड़ गया ।।


मुह से खून बहने लगा ।


वह सडक पर पड़ा फड़फड़ा रहा था ।



कई पुलिस वालो ने लपककर पकड़ा । सहारा देकर उठाया ।। उनमें दौलतराम भी था । उसने सामने खडे अाम चूस रहे गोडास्कर से कहा-------कितनी बार कहा है साव आप इंसानों से नहीं, शैतानों से उलझा करे । देखिए-----एक ही घूसे में क्या हालत बना दी बेचारे की । कितने दांत झड़ गए हैं, गिनने में कई साल लगेगें?"



"गोडास्कर ने इस गधे से कहा था-भागने की कोशिश न करे ।" कहने के बाद वह फिर अाम चूसने लगा था ।


दर्द से विलविलता मनसब केवल इतना देख सका । एस्टीम और उससे टकराई जीप "धू-धू करके जल रही है।


एक तरफ अटैची खुली पडी थी ।

दूसरी तरफ बिंदू की लाश ।


बह उसी पोजीशन में है जैसी अटैची के अन्दर थी । चारों तरफ भीड लगी हुई है । लोग अाखें फाड़-फाड़कर सडक पर मोजूद दृश्य को देख रहे है ।

बस । इतना देखतें के बाद मनसव बेहोश हो गया ।
" मेरे ख्याल से डिमांड तुमने कम की है ।"


" क्या मतलब ? "



" कम से कम पांच करोड तो मांगे ही जाने चाहिएं थे ।"


नाटा इस तरह मुस्कराया मानो मारिया ने बेवकूफी भरी बात कही हो । बोला--" सितार के तार को उतना ही कसा जाना चाहिए साली साहिबा कि यह टूट न सके । तार ही टूट जाए तो सितार नहीं बजता ।"


"मैं समझी नहीं, क्या कहना चाहते हो ?"


" एक करोड देने के लिए वह फौरन तैयार हो गया । पूछने लगा---" कहां पहुंचना है? उसे लग रहा होगा---पि'ड काफी सस्ते में छूट रहा है जवकि इससे ज्यादा मांगता तो 'अटक' सकता था ।

अटकने का मतलब था मोलमाव शुरु हो जाना और फिलहाल वह हमारे फेवर मैं न होता?"


" ल-लेकिन ।" मारिया ने अटकते हुए कहा---'"एक करोड तो बहुत कम हैं । मैंने तो अरबों कमाने के ख्वाब . .


'"अरबो ही आएंगे साली साहिबा" । अरबों ही कमाएगे । " पैशेंस’ तो रखो ।"



"मगर कैसे?" जव तुम उसे सारे फोटों सौंप दोगे तो…


" फोटो ही सौपने न ।" एक बार फिर उसने मारिया की बात बीच में काटी…" निगेटिब्ज तो नहीं ।"’


"क्या मतलब?"


"एक करोड मे उसे केवल पौजिटिब्ज मिलेगे । वे पोजिटिब्ज जो उस ववत तक चाहे जितने तेयार किए जा सकते है जब तक निगेटिब्ज हमारे कब्जे में है ।"



"यह बात तो विनम्र भी जानता होगा ।" क्रिस्टी ने कहा----वह पौजिटिब्ज के एक करोड क्यों देने लगा?"



"'देगा और बचा पड़ा रहेगा ।" नाटे कै होठो पर कुटिल मुस्कान थी------. खेल में ऐसा ही होता है । एक बार नहीं, अनेक बार करोड-करोड देने होंगे उसे वह भी केवल पाजिटिब्त के बदले ।"



"ओह । " मारिया की आंखें चमक उठी…"तो तुम्हारा इरादा उसे लम्बे समय तक ब्लैकमेल करते रहने का है?"
*****************
दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
*****************

Return to “Thriller Stories”

Who is online

Users browsing this forum: No registered users and 1 guest