कठपुतली -हिन्दी नॉवल complete

Jemsbond
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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:11

"तो तुम क्या यह समझी थी कि मैं केवल एक करोड़ मे ........



" मैं तो यही समझी थी । तभी तो लगा --- ये क्या बेवकूफी कर रहे हो ?"


" बेवकूफ सोने का अंडा देने बाली मुर्गी से रोज अंडा हासिल करने बाले नहीं ब्लकि वे होते है जो सारे अंडे हासिल करने के फेर में पड़कर बेचारी मुर्गी को हलाल भी कर डालते है । विनम्र हमारे लिए सोने के अंडे देने वाली मुर्गी है ।



"अब अाई बात समझ में । मारिया का सारा चेहरा जगमगा उठा था--'"वाकई तुम्हें मालूम है…क्या काम कैसे किया जाना चाहिये । अब लग रहा है, तुम्हें अपनी मदद के लिए बुलाकर मैंने गलती नहीं की मगर. . .


"मगर? "


"कह क्रिस्टी भी ठीक रही है । जब एक करोड के बदले में केवल पाजिटिब्ज दिए जाएंगे तो यह 'बखेडा' जरुर करेगा ।"


'कोई बखेडा नहीं करेगा बल्कि गिड़गिड़ाएगा हमारे पैरों में पडकर । जिसके हाथ में उसके गले के नाप का फांसी का फंदा हो, वह उसके सामने अकड़ा नहीं करता, गिड़गिड़ाया करता है । ब्लैकमेल होने वाले का दिल चूहे जैसा होता है । हम उसे हर बार यह आश्वासन देगे कि अगली बार निगेटिब्ज दे दिए जाएंगे और उसे हर बार झाँसे में अाना पडेगा । कुछ नहीं कर सकेगा वह । ब्लेकमेल होने बाले की विडम्बना ही यह होती है?"



"अगर इसी बीच उसे गोडास्कर ने दबोच लिया?" एक बार फिर क्रिस्टी ने सबाल उठाया ।



"हां । ऐसा हो गया तो सोने के अंडे देने वाली मुरगी हमारे हाथ से निकल जाएगी ।" नाटेने कहा--" बिंदू की हत्या के इल्जाम में उसे 'थर' ही लिया गया तो किससे बचने के लिए सोने के अंडे देगा?"
"इसलिए उसे जितनी जल्दी जितना ज्यादा निचोड़ लिया जाए उतना अच्छा है ।"



"मैं क्रिस्टी से सहमत हूं नाटे ।" मारिया ने कहा-गोडास्कर को तो देख ही लिया है तुमने । समझ गए होंगे-विनम्र ज्यादा दिन तक उसके पंजे से बचा नहीं रह सकता ।"’



"वह तो किसी जरूरी फोन के कारण यहाँ से चला गया ।"’ गोडास्कर की याद आने लगी-----'' वह एक तरह से दीदी को विज्जू का हत्यारा साबित का चुका था । मेरा तो ख्याल है-अगर वह ज्यादा देर यहां रहता तो फोटो और निगेटिब्ज भी बरामद कर लेता । ऐसा हो जाता तो...



नाटे ने उसकी बात काटकर क्या…"जो नहीं हुआ उसे सोच कर डरना बेवकूफी है क्रिस्टी डार्लिग ।"


" पर वह कहकर गया है-----" फिर आएगा और मेरा ख्याल है-बह अाएगा जरूर । दीदी उसकी नजर में संदिग्ध हैं?"


"जव अाएगा तब देखा जाएगा ।" नाटा बोला--"इस वक्त हमे उसके बारे में सोचकर दिमाग खराब नहीं करना चाहिए । वल्कि यह सोचना चाहिए एक करोड कैसे कमाने हैं?"



"इसमे सोचना क्या है?” मारिया ने कहा---" वह आएगा ।" एक करोड देकर जाएगा ।


"कहाँ आएगा?"


"यहीं जाएगा । और कहां?"



अब मैं कहूंगा साली साहिबा । हमे बुलाकर तुमने ठीक ही किया । वाकई तुम अकेली इस झमेले को नहीं सम्भाल सकती थी बल्कि अब तो खुलकर कहूंगा---कुछ कमाने की तो बात की दूर अपने आपको फंसा लेती तुम ।"


" वह कैसे ?"



"शिकार को अपना 'ठीया' नहीं दिखाया जाता ।"



"ओह ।" मारिया के मुंह से यही एक शब्द निकल सका ।



क्रिस्टी ने कहा-----" यहां नहीं तो कहां बुलाएंगे उसे ?"


"यही सव सोचने के लिए तो कह रहा हूं ?"
"मेरे ख्याल से उसे कम्पनी गार्डन में बुला लिया जाए ।" मारिया ने राय दी-----" रात के वक्त वहां सन्नाटा रहता है ।"


"नहीं ।"' नाटे ने प्रतिरोध किया ।"


"क्यों नहीं?"


" ऐसे किसी स्थान पर हमारे 'घिरने' का डर रहेगा ।"


" किसके द्वारा?"


"पुलिस के द्वारा ।"'



" प-पुलिस ?" क्रिस्टी कांप उठी----"' क-क्या पुलिस भी बीच मैं आ सकती है?"


"संभावना विल्कुल नहीं है । मगर चौकस हर खतरे का मुकाबला करने के लिए रहना चाहिये । इस किस्म के कामों का सिद्घान्त यही है !"


क्रिस्टी ने बोलना चाहा मगर मुंह से आवाज न निकल सकी ।


खीफ की मारी मारिया कह -" पुलिस को बीच मेंकहां से ले आए तुम? क्या वह अपने ब्लैकमेल होने की सूचना पुलिस को दे सकता हैं"


"कह चुका हूं-सम्भावना एक परसेन्ट भी नहीं है । जिसकी गर्दन खुद फंसी हो उसके तो खाकी वर्दी देखते ही पीते ढीले हो जाते है । मगर ऐसा सोचकर हमारा लापरवाह होना बेवकूफी होगी । ऐसे केसों में कई बार यह देखा गया है कि ब्लैकमेल होने वाला ब्लेक मेलर से निपटने के लिए अपने लेबल पर कोई तैयारी कर लेता है । ऐसे किसी भी खतरे से बचने के लिए हमें उसे किसी ऐसे स्थान पर बुलाना चाहिये जहां उसके द्वारा बिछाए गए किसी भी जाल की जानकारी पहले से हो सके ।"


मारिया बोली----"' कौन-सी जगह हो सकती है?"
"इस काम के लिए कोई सस्ता होटल ठीक रहेगा ।" नाटे ने कहा…"ऐसा होटल जो ज्यादा न चलता हो । हम अभी ही वहाँ एक कमरा बुक करा देगे । मगर कमरे में जाएंगे उस टाईम से केवल पन्द्रह मिनट पहले जो टाईम बिनम्र को देगें । उस समय से पहले तक कमरे ही की नहीं, सारे होटल की अच्छी तरह निगरानी करेगे । इस तरह अगर वह कोई जाल विछाता है तो हमारी नालिज में अा जाएगा । उस अवस्था मे हम दिए गए टाईम पर कमरेमे पहुंचेगे ही नहीं ।। उल्टे उसके मोबाईल पर फोन करके कहेंगे-हमे तेरी साजिश के बारे में सब पता है । यह सुनते ही पटूठे की हबा सरक जाएगी और फिर कभी हमारे खिलाफ कोई कदम उठाने की हिंम्मत नहीं करेगा । सब कुछ ठीक रहता है तो कोई बात ही नहीं । एक करोड झटकने के तुरन्त बाद कमरा छोडे देगे ।"'


"क्या कमरे में हम तीनो को मिलना है?"


"इस बोरे ने भी सोचना पड़ेगा ।"


"तो सोचो । हमारे पास टाईम कहां है?" .


नाटे ले "एक सिगरेट सुलगा ली । कश लगाने और वातावरण को दूषित करने के साथ आंखें बंद कर ली ।


मारिया और क्रिस्टी उसकी तरफ इस तरह देख रही थी जैसे कटघरे में खड़ा मुजरिम फैसला सुनाने के ' लिए तेयार जज की तरफ देखता है ।



काफी इंतजार के बाद भी जव वह कुछ नहीं बोला तो उद्विग्न होकर मारिया ने कहा-------" अब सोचते ही रहोगे या कहोगे भी?"


" उससे केवल तुम मिलोगी ।" उसकी बंद आखें खुलते ही क्रिस्टी पर जम गई ।


" म मै ?"


" हम दोंनो रहकर कमरे पर नजर रखेंगे ।"
" म - मगर मैं ।" क्रिस्टी अभी भी हकला रही थी--"क-क्या मैं यह काम का सकूंगी ?"



" करने को खास कुछ है ही नहीं । केवल फोटो देने है उसे । वह अधमरा हो जाएगा । रुपया तुम्हारे कदमों में डाल देगा । फोटो मागेंगा । तुम उसे पकडा दोगी ।



"और जव निगेटिब्ज मांगेगा ?"


'" कहोगी--फिलहाल निगेटिब्ज मेरे पास नहीं है । मेरे साथियों के पास है । अगर मेंने कोई बखेडा किया तो वे पुलिस को दे देंगें ।इतना ही उसके होसले पस्त हो जाएगें । उससे बोलोगी--"निगेटिब्ज मेरे साथी खुद तुम्हारे पास पहुंचा देंगे इतना सुनकर उसके पास वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा ।"



"म-मगर. . यह काम तुम खुद क्यों नहीं कर लेते"'



उससे फौन पर बात की थी । मर्दानी आवाज सुनी थी उसने । रकम लेने तुम पहूंचोगी । इससे उसे लगेगा-----ब्लेकमेलर अकेला नहीं है । और. ..यही मैसेज देना हमारा मकसद है । उसे "डिमोरलाईज रखना है । जितना डिमोरलाईंज रहेगा, उतनी ही उसके द्वारा हमारे खिलाफ कोई कदम उठाने की सम्भावना कम रहेगी । बल्कि 'इम्प्रेशन' तो हमे ऐसा देना चाहिये जैसे यह किसी बडे गिरोह के चंगुल में फंस गया है । अपनी बातो से तुम ऐसा हीं शो' करोगी ताकि हर क्षण हमारे दबाव में रहे ।"



"नाटे ।" क्रिस्टी ने चापलुसी--सी की---" क्या यह काम दीदी मुझसे बेहतर नहीं करेगी?"



"दूसरी किस्त साली साहिवा को ही लेनी है । हर बार नया चेहरा देखकर ही तो उसे लगेगा कि . . .


" क्रिस्टी ठीक कह रही है नाटे । मैं यह काम इससे मेहतर तरीके सै कर लूंगी।"मारिया ने कहा ।



"जो फैसला मैंने लिया है खूब सोच-समझ कर लिया है ।" नाटे के लहजे में अजीब किस्म की दृढता थी-----" एक करोड ऐठने के अलावा हमे उससे एक और काम भी निकालना है ।"


‘"एक और काम?"


"उससे उगलवाना है कि उसने विंदूकी हत्या क्यों की?"


"इस बात से हमे क्या लेना देना?"
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:12

"मेरा सिद्घान्त है-जिस मामले में घुसो, सिर देकर पूरी तरह घुस जाओ । अधूरे घुसे तो मात खाओगे ।"


"क्या मतलब ? "


" हमें यह मालुम होगा कि उसने विंदू की हत्या की मगर ऐसा क्यों किया, यह नहीं जानते । ये अधूरी जानकारी कभी-भी हमारी कमजोरी बन सकती है । इस कमजोरी को दूर करने के लिए हमें पूरी जानकारी होना जरूरी है ।"


"'ठीक है ।" मारिया ने कहा----" उसके मुंह से यह उगलवाने की भी पूरी क्रोशिश करूंगी ।"



"तुम भूल चुकी हो साली साहिबा । इस सच्चाई को कबूल कर लो । तुम खुबसुरत किसी भी एेंगल से नही लगति । जबकि इस काम के लिए मर्दको चुम्बक की तरह अपनी तरफ खीचने बाली लड़की चाहिये । ठीक वैसी, क्रिस्टी है । क्रिस्टी डार्लिंग ।"'



नाटे ने मारिया के बारे में जो कहा था उसे सुनकर वह अंदर ही अंदर सुलगकर रह गई । औरत चाहै जितनी बुढिया हो जाए, ऐसे शब्द सुनना बिल्कुल पसंद नहीं करेगी । अपनी सुलगन को उसने कुछ यू बयान किया…'इस काम के लिए भला क्रिस्टी जैसी लडकी की क्या ज़रूरत पड़ने वाली है?"


" तुम भूल रही हो, विनम्र एक जवान लड़का है ।"


"तो?"

"तुम यह भी भूल रही होे-ज़वानी मोम की तरह होती है । देखने मे मोम भले ही चाहे जितना सख्त नजर आए मगर क्रिस्टी जैसे जिस्म से उठने वाली लो उसे पिघलाका रख देती है । विनम्र जैसा मोम जब पिघलता है तो बहता चला जाता है । उस अवस्था में उससे यह सब उगलवाया जा सकता है जिसे सामान्य अवस्था में भूलकर भी अपनी जुबान पर न लाता ।"



क्रिस्टी गुर्रा-सी उठी…"क्या तुम यह कहना चाहते हो, मुझे उसे अपने बिस्तर पर खींचना है ?"




" शुक्रिया । तुम कम शब्दों सब कुछ समझ गई । जरुरत पडेतो ऐसा करने से भी हिचकना नहीं है ।"



"शर्म करो नाटे । शर्म करो । कहीं पागल तो नहीं हो गए तुम । जानते भी हो क्या बके चले जा रहे हो? मैं तुम्हारी पत्नी हूं और तुम मुझसे कह रहे हो......


"अच्छी तरह जानता हूं डार्लिग ।" उसकी बात काटकर नाटा कहता चला गया---"मामला करोडों का नहीं, अरबों का है । ज़रा सी चूक होते ही अरबों रुपये हाथ से निकल जाएंगे और अधूरी जानकारी होने पर ऐसी चूक कभी भी हो सकती है । यह चूक न हो, इसके लिए हमें पूरो जानकारी चाहिये और उसके लिए विनम्र के साथ बिस्तर पर थोडी उछलकूद कर भी लोगी तो मेरे 'प्वाइंट आँफ व्यू' से तुम्हारा कुछ घिस नहीं जाएगा ।"’

क्रिस्टी इस तरह नाटे को देखती रह गई जैसे 'अजनबी' को देख रही हो ।
"प-प्लीज । प्लीस गोडास्कर ।" मनसब वड़ी मुश्किल से गिडगिड़ा पा रहा था----"वस करो । मैं और नहीं खा सकता !"




'पता नहीं लोग खाने से इतने डरते क्यो हैं?" गाजर चवाते गोडास्कर ने कहाा----गोडास्कर का मानना है अादमी साला धरती पर अाता ही खाने के लिए है । देख ही रहा है---गोडास्कर भी तेरे साथ लगातार खाए चला जा रहा । रुक क्यों गया । दौलतराम । खिला खिलाकर ही तो सेवा करनी है इसकी ।"


दौलतराम ने मेज पर रखी थाली से खिचडी का एक और चम्मच भरा । मनसब के मुंह की तरफ बढाया ।।



मनसव ने कसकर मुह वंद कर लिया ।


ऐसा पहली बार नहीं किया था उसने ।


पिछले आधे घंटे से ऐसा ही कर रहा था । तव से, जब से उसने महसूस किया---पेट में ज़रा भी जगह नहीं बची है । नाक तक भर गया । शुरू में , यानी के तब जब खाने से भरी थाली उसके सामने रखी गई, खाने लिए कहा गया तो कुछ समझ नहीं पाया था । वह एक बार नहीं अनेक बार पुलिस के चंगुल में फंसा था । भूखा ही रखा गया था उसे । और गोडास्कर ।। वह मनसब को सबसे अलग पुलिसिया लगा ।

छत्तीस व्यंज़नों से सजी थाली पेश कर दी गई वडे़ प्यार से खाने के लिए कहा गया । गोडास्कर की 'हरकत' का रहस्य तो उसकी समझ में ही तब अाया जव पेट भरकर खा चुका ।


थाली एक तरफ सरकाने के साथ कहा----'बस ।' गोडास्कर ने तुरन्त कहा…'क्या बात करते हो मनसब मियां ।
अभी तुमने खाया ही क्या है? दौलतराम, शायद हाथ थक गए है मनसब मियां के । अपने हाथ से खिला ?" दौलतराम किसी भी मुजरिम को टांर्चर करने के गोडास्कर के इस विचित्र तरीके से पूर्ण परिचित था । सो अब उसने अपने साथ से "ना-ना करते' मनसव को खिलाना शुरू कर दिया । जब उसने ज्यादा विरोध किया तो हाथ कुर्सी के हत्थों के साथ बांध दिए गए । दलिया उसके हलक में उतार दिया । फिर, खिचडी मंगाई गई और अब यहीं उसके मेट से उड़ेलने की केशिश की जा रही थी । जैसा कि लिखा जा चुका हे---पिछले अाधे घंटे से मनसब हर चम्मच पर कसकर मुंह बंद कर लेता । दौलतराम का काम था---जबरदस्ती मुंह खुलवाना और खिचडी से भरी चम्मच उसमें ठूंस देना । दांत -ताजे टूटे थे । जख्मी थे । चम्मच उनसे टकराती तो मारे दर्द के मनसब बिलबिलाने लगता । उसी बीच चम्मच की खिचडी उसके हलक में उड़ेल दी जाती । इस बार भी दौलतराम ने यही किया । जब मनसब दर्द के कारण चीख" रहा था तो गोडास्कर ने. कहा--""पुलिस बालों को बहूत बदनाम करते हैं लोग । कहत्ते हें----हवालात में खाने को नहीं देते । भूखा मार देते हैं । गोडास्कर का मकसद पुलिस के मस्तक पर लगे कलंक के इसी धब्बे को धोना है । खिला दौलतराम और खिला मनसब मियां को । इतना खिला जितना दुनिया की कोई सास अपने दामाद को न खिला सके ।"



दौलतराम ने पुन: चम्मच खिचडी से भरी ।



"बसं-वस करो!" मनसब गिडगिड़ा उठा है ।



चम्मच में खिचडी लिए दौलतराम ने गोडास्कर की तरफ देखा । जैसे पूछ रहा हो' "क्या करूं ?"
"तो बता ।" गाजर चिंगलते गोडास्कर ने कहा'-"इतनी ब्यूटीफुल लड़की का क्रियाकर्म किसने किया?"


"म-मैंने?" '


" क्यों ?"


"उसे इस धंधें में लाने वाला मैं था । उसकी हर 'डेट' पर मेरा कमीशन होता था ।" यह स्टोरी मनसब गिरफ्तार होने के तुरन्त बाद तेयार कर चुका था----'"मगर धीरे-धीरे हरामजादी ने मुझे किनारे लगाना शुरू कर दिया । और अब तो अाजाद होकर धंधा करने लगी थी । एक पैसा नहीं देती थी मुझे । मांगता तो गंदी-गंदी गालियाँ बकने लगती थी ।"



"इसीलिए तूने उसे खलास कर दिया?"


"हां ।"


"चल । खलास कर दिया । ये तो ठीक किया । मगर उसे अटैची मैं भरे क्यों घूम रहा था?"


"क-क्या मतलब? "


"अभी इसकी समझ ने ‘मतलब' नहीं आ रहा दौलतराम । खिचड़ी और खिला ।"



"न-नहीं ।" मनसव भयाक्रांत अंदाज में चीख पड़ा ।



"तो उगल लाश सुईट में ही पड़ी क्यों नहीं रहने दी ? वहां से लाश के साथ उसकी माला के सारे मोती चुने? सफाई क्यों की?"



"ताकि किसी को पता न लग सके वह मर चुकी है । मैं उसे हमेशा के लिए समुद्र में गर्त करने के लिए ले जा रहा था ।"



“क्यों कर रहा था ऐसा? लाश सुईट से मिल भी जाती तो तेरी सेहत पर क्या फ़र्क पड जाता? किसी को ख्वाब तो आ नहीं जाता सुईट में जाकर उसकी हत्या तूने की है ।"



"यही डर था मुझे । यह कि यदि उसकी लाश मिल गई तो पुलिस सीधे-सीधे मुझे ही दबोचेगी ।"


"क्यों? "


“मेरा उसका झगडा जो चल रहा था?"


"चल । कुछ देर के लिए गोडास्कर मान लेता है कि तू सत्यवादी राजा हरित्रचंद्र का वंशज है । अब ये बता---पिछली रात विंदू सुइंट में किससे मिलने गई थी?"


"इस बारे में कुछ नहीं पता ।"


"क्यों नहीं पता?"
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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:13

"मुझें पौने बारह बजे पता लगा----"आज बिंदू की डेट ओबराय होटल के सुईट नःसेविन जीरो थर्टीन में है ।।। मैंनें फौरन फोन करके सेबिन्थ फ्लोर पर फर्जी नाम से रुम नम्बर सेविन जोरो सेविन्टीन बुक करा दिया ।"


"फोन कहाँ से किया था?"


“होटल के बाहर एक पी .सो .ओ है । वहीं से ।



"आगे बढ ।"'



"कुछ देर बाद अटैची लेकर वहां पहुच गया ।"


"यानी पहले ही प्लान वना चुका था------उसे मारकर अटैची में भर लाएगा ।"


"हां । मैं वहां पूरा प्लान बनाकर ही गया था ।"


फिर?"


"अटैची अपने कमरे में रखी । सुईट की तरफ गया । 'की हाल' से झांका । उस वक्त बिंदू अकेली थी । मैंने कालबेल दबा दी । उसने दरवाजा खोला । दरवाजा खुलते ही मैंने, उसे कोई भी मौका दिए बगैर गर्दन दवा दी । और अपने हाथ तभी हटाए जब मर चुकी । मेरे हाथों में उलझकर उसकी माला टूट गई थी । कार्पेट पर मोती बिखर गए थे ।।

वहां से अपने कमरे में अाया । अटैची लेकर पुन: सुईट में गया । लाश उसमें ठूंसी । सारे मोती चुने । उसे भी उसके मोबाईल सहित अटैची में बंद किया । और होटल छोड़ दिया ।।"



" अपने दोनों पैरो पर सवाल फिर वही खड़ा होता है--अटैची लिए वयो घूम रहा था? लाश समुद्र में ही गर्त करनी थी तो रात ही क्यों नहीं करदी? वयो यह रात अपने परमानेन्ट ठिकाने यानी अजंता होटल के रुम नम्बर आठ में गुजारी?"



"मैं पुलिस की प्रतिक्रिया देखना चाहता था ।"


"कैसी प्रतिक्रिया ।"


"पुलिस को बिंदूके मर्डर के बारे में पता लगता है या नहीं?"


"वया पाया?"


"जी न्यूज़' पर देखा---तुम केवल इस नतीजे पर पहुच सके कि किसी ने बिंदूको किडनैप कर लिया है मैं अपनी सफलता पर मुस्कुरा उठा ।"'
" अगर गोडास्कर इस नतीजे पर पहुंच जाता कि विंदुकी हत्या कर दी गई तो उस अवस्था में तू क्या करता ।"


"'लाश को अजंता के कमरे ही में छोड़कर हमेशा के लिए गायब हो जाता ! यह शहर, वल्कि शायद देश ही छोड़ देता ।"’


"क्यों?”


“क्योंकि समझ चुका होता-----अब लाश के मिलने ना मिलने से कोई फर्क नहीं पड़ता । जव तुम समझ ही चुके हो विंदू की हत्या कर दी गई है तो तुम्हारा अगला कदम मुझे गिरफ्तार करना होगा । उस अवस्था में विंदू की लाश को गायब करने की जगह खुद को गायब करके ही खुद को वचा सकता था ।"


, ‘काफी कम समय में काफी "सॉलिठ' कहानी 'गड़' ली तूने ।"


"ज-जी?" मनसब चिंहू्का ।


" देखा दौलतराम, क्या जमाना आ गया है । पहले लोग कानून के डर से अपने द्वारा किए गए जुर्म को दूसरो के मत्थे मंढा करते थे । अब दूसरो के जुर्म अपने मत्थे मंढ़ने लगे हैं । जुर्म भी हत्या जैसा । ऐसा इसलिए हुआ है क्योकि लोगों में कानुन का भय या खौफ नहीं रह गया । कानून का डर जब खत्म हो जाता तो ऐसा ही होता है इसे मालूम है…यह यहां, हवालात में चाहे जो कहे मगर कोर्ट में गवाह सबूतों के अभाव में छूट जाएगा । फांसी या उम्रकैद की तो बात ही दूर , अदालत इसे एक पल की सजा नहीं दे सकेगी । इसीलिए किसी के द्वारा की गई हत्या का इल्जाम अपने सिर ले रहा है । क्यों मनसव मिंया, इस काम के तुम्हें कितने पैसे मिले?"


मनसब का चेहरा फ़क्क पड़ गया ।
अब से पहले वह यही सोच रहा या…"गोडास्कर को 'चलाने' में कामयाब है । लग भी ऐसा रहा था जेसे गोडास्कर उसकी हर बात पर यकीन करता चला जा रहा हो मगर उसकी अंतिम बात ने तो उसके होश ही उड़ा दिए । पटूठा वहीँ. . .'एक्यूरेट’ वहीं कह रहा था जो वह कर रहा था । मनसब समझ नहीं पा रहा था गोडास्कर ने यह बात किस बेस पर कह दी ? कहां चूक हो गई उससे? खुद को नियंत्रित करने की कोशिश की । बोला------'' क्या बात कर रहे हो इंस्पेक्टर साहब । भला मैं क्यों किसी और के द्वारा किया गया जुर्म अपने सिर लेने लगा?"


" पूछा तो है…कितना पैसा मिला?"


"पैसे के लिए कोई फांसी पर चढने के लिए तेयार नहीं हो जाता ।"


"इसका जवाब भी दे चुका हू ।" तुम्हें मालूम है 'कोर्ट' से तुम्हें कोई सजा नहीं हो सकेगी ।"



"क-किस बेस पर कह रहे है इतनी वडी बात?"


"ये रहा बेस ।" कहने के साथ गोडास्कर ने अपनी जेब से एक कागज निकालकर उसकी आंखो के सामने लहराया---" यह बिंदूकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट है । साफ लिखा है-हत्या रात नौ से दस बजे की बीच हूई । जबकि तू वकौल अपने और होटल के रिकार्ड के मुताबिक वहाँ पहुचा ही ग्यारह के बाद था । बता----कैसे कर थी तूने हत्या?"


मनसब के मुंह परं अलीगड़ का ताला लटक गया ।


कोई जवाय नहीं धा उसके पास ।।

पोस्मार्टम रिपोर्ट की मौजूदगी में कह भी क्या सकता था?
"अब बता---किसका इल्याम अपने सिर ले रहा था?"

मनसब अब भी चुप रहा ।

"गोडास्कर के ख्याल से अब तुझे समझ जाना चाहिए -- चुप रहने से काम चलने वाला नहीं है । इस सवाल का जवाब देना ही पडेगा । वरना दौलतराम तुझे खिचडी खिला -खिलाकर मार डालेगा ।"

पेट तो पहले ही जाम था मनसब का । अब दिमाग भी जाम हो गया । चक्रधर चौबे का नाम लेने का मतलब था-उससे मिलने बाली हर रकम पर पानी फिर जाना । बावजूद इसके इतना तो समझ ही चुका था…वह चाहे जो कह ले, चाहे जो कर ले…-गोडास्कर को अपने हत्यारे होने का विश्वास नहीं दिला सकता । उसे तो क्या, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मौजूदगी में किसी को भी उसकी बात पर यकीन नहीं आना था । अपनी बची-कुची रकम को बचाने के लिए एक ही तरकीब सूझी । . यह कि बात को गोल कर जाए । उसी नीति के तहत बोला'-""मुझे फोन पर सुईट से लाश हटाने का काम मिला था ।

"इसी पर न? " कहने के साथ गोडास्कर ने अपनी जेब से एक
मोबाईल निकाल कर दिखाया ।

मोबाईल उसी का था । सो, कहना पड़ा-“हाँ ।"

"कितने वजे फोन आया था?"


" करीब दस बजे ।"


"यानी रूम नम्बर सेविन जीरो सेविन्टीन वुक कराने स पहले ।

" 'हां !"

" अब मुख्य सवाल ।" गोडास्कर पुनः गाजर "कतऱी' और उसे चबाता हुआ बोला-"फोन करने बाला कौन था?

" मुझे नहीं पता ।"


गोडास्कर को सवाल करने से पहले पता था तू यही ज़वाब देगा । यह जानते-बूझने के बावजूद यहीं कहेगा कि गोडास्कर तो क्या गधे का बच्चा भी तेरे जबाब पर यकीन नहीं कर सकता । यकीन करने की बात ही नही है । भला ऐसा बेवकूफ़ भी दुनिया में कोई होगा जो यह जाने बगैर किसी होटल के सुईट से लाश गायब करने जैसा खतरनाक काम कर रहा कि उस काम को कराने वाला कौन है । ऐसे काम बाकायदा रकम-बकम तय होने के बाद होते है ।"


"रकम फोन ही पर तय हे गृईं थी ।"

" कितनी?"
मनसब के जो मुंह में अाया कह दिया--"पचास हजार ।"


"और तू निक्ल पड़ा काम करने ।”


"हां ।"


"बगैर रकम लिए, बगैर फोन करने बाले का नाम जाने?"


"उसने कहा था------" मैं कौन हूं इस बात तूंम्हें कोई मतलब नहीं होना चाहिए ।। तुम्हें मतलब होना चाहिये रकम से । वह तुम्हें सुईट नम्बर सेविन जीरो सेविन्टीन ने रखी मिल जाएगी ।"


" मिली ?"

" हां ।"

"कहां है?"


" सॉरी । यह मैं नहीं बता सकता । जो जुर्म किया है उसकी सजा भूगतने के बाद मेरे काम आएगी ।"


गोडास्कर मुस्कराया ।


बोला--" तू जानता है दौलतराम ने अगर एक चम्मच खिचडी और तेरे पेट में उतार थी तो दौलत का पता तू फौरन उगल देगा मगर गोडास्कर उस रकम के बोरे में जानने को ज़रा भी इंन्ट्रस्टिड नहीं है । गोडास्कर इंन्ट्रस्टिड है उस शख्स के बारे में जानने में जिसने तुझे काम सौपा।"



कह चुका हूं । मैँ उसके बारे में कुछ नहीं जानता ।"

"जबकि गोडास्कर तेरे बताए बगैर जान सकता है ।"


मनसब के चेहरे पर आश्चर्य के भाव उभर अाए । मुह से निकला-----" क- कैसे ?"


" इस मोबाईल से ।" गोडास्कर ने कहा'----"'तुझ जैसे अनपढ मुजरिम इसका इस्तेमाल तो करने लगे मगर यही नहीं जानते, यह सब उगल देता है ।कुछ नहीं 'पचता' इसके पेट मे ।" कहने के वाद गौडास्कर का अंगूठा मोबाईल के बटनों पर थिरकने लगा । कुछ ही देर में उसकी स्क्रीन पर एक नम्बर नजर अाने लगा । उसे देखते ही गोडास्कर ने पुन: कहा---'ये ले! अब ये बता रहा है कि दस बजे इस फोन पर किस नम्बर से फोन किया गया था । ये भी किसी का मोबाईल
नम्बर है । और ये ले । " कहने के साथ उसने 'रिडायल' का बाला बटन दबा दिया---"गोडास्कर ने मिला दिया उसे फोन? अभी पता लग जाएगा तुले काम किसने सौंपा था ।"

मनसव के होश उड़ गए थे ।

यह तो उसने सोचा था कि गोडास्कर एक खुर्राट पुलसिया है ।
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Jemsbond
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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:13


मगर इतना खुर्राट होगा इसकी तो उसने कल्पनां तक नहीं की थी । वह यह कहता रहा…हत्यारा मैं हूं मगर इसने साबित कर दिया-हत्यारा तू हौ ही नहीं सकता । वह चक्रधर चौबे का नाम बताने के तैयार नहीं था, पटृठा खुद ही नाम पता करने के नजदीक है ।



उस वक्त यह हैरत से मुंह फाडे़ गोडास्कर की तरफ देख रहा था ।जब एक आंख दबाने के साथ गोडास्कर ने कहा----"बैल जा रही है! अभी रिसीव नहीं करं रहा । स्क्रीन पर नम्बर पड़ने की केशिश कर रहा होगा । गोडास्कर को मालूम है----अपने मोबाईल की सक्रीन पर तेरे मौबाईल का नम्बर देखते ही वह फौरन रिसीव करेगा ।"


मनसब का दिल 'धाड़-धाड़' करके बजता रहा ।।



फिर, दूसरी तरफ से फोन रिसीव करने के साथ कहा गया-----" हां मनसब, क्या रहा?"


"लाश मैं समुंद्र में फेंक आया हूं ।" गोडास्कर के मुंह से अपनी आवाज सुनकर मनसब उछल ही पड़ा ।।



" बैरी गुड ।" आवाज चक्रधर की थी---"कही कोई गड़बड़ तो नहीं हुई?"


"नहीं ।”

" ओ.के। कल मेरे आफिस में जाकर अपनी रकम ले जाना ।"


"कौन से आँफिस में?"

"बताया तो था ।" झुंझलाकर कहा गया…"भारद्धाज कंस्ट्रक्शन कम्पनी की मेन बांच में ।"

"ठीक है । मैं कल बारह बजे आऊंगा ।।" कहने के बाद मोबाईल आँफ करते वक्त गोडास्कर के होठों पर जैसी मुस्कसान थी जैसे लोकसभा मे विश्वास मत हासिल करते वक्त खिचडी सरकार के प्रधानमंत्री के होठों पर होती है । बोला---“लो मनसव मियां,उखाड़ तो गोडास्कर की पूंछ । गोडास्कर ने तो नाम भी पता कर लिया । चक्रधर चौबे कहते है उसे ।"

मनसब उसकी तरफ यूं देखता रह गया था जैसे हाडसांस के इंसान को नहीं, खुदा के बनाए हुए सबसे अदूभुत करिश्में को देख रहा हो ।
" गड़वड़ ।" खटारा हो चुकीं मारूति वेन के ड्राईविंग सीट पर बैठे नाटे के मुंह से निकला------''हंडरेड परसेन्ट गडबड है ।"



"क्या गडबड नजर जा रही है तुम्हें?" बगल वाली सीट पर बैठी मारिया ने पूछा ।



"तुमने नहीं देखा, कुछ देर पहले होटल के गेट पर एक मर्सडीस रूकी थी । उसका पिछला दरवाजा खोलकर एक आदमी बाहर निकला ।

उसके चेहरे पर धनी मूंछ-दाड़ी थी अांखों पर काले लेंसों वाला चश्मा । सिर पर फैल्ट हैट था है जिस्म पर ओवरकोट और गर्म पतलून । हाथ में छड्री लिए वह होटल के अंदर चला गया जबकि मर्सडीज उसे वहा छोडकर जा चुकी है । उसके कांच काले थे इसलिए मैं ड्राईवर की शक्ल नहीं देख सका ।"



“पर इसमें गडबड़ वाली क्या बात है? यह होटल है, कोई भी आ सकता है ।"



" तुम भूल रही हो, यह शहर का सबसे थर्ड क्लास होटल है । मर्सडीज वाला क्या करने जाएगा?"



"ब-बात तो ठीक है ।" मारिया ने कहा मगर फिर अपनी ही बात काटती-सी हड़वड़ाई-----"लेकिन यह हमारा बहम भी तो हो सकता है । मुमकिन है वह अपने ही किसी काम से अाया हो हमारे मामले से कोई तालुक न हो ।" उसकी हड़बड़ाहट सुन नाटे ने कहा-" हां । हो तो ऐसा भी सकता है । हमारी हालत चोर की दाढ़ी मे तिनका बाली हैं।"


"तो ?"


"तो क्या?"



"कैसे पता लगे यह विनम्र द्वारा बिछाए गए किसी जाल का हिस्सा है या अपने किसी काम से अाया है?"



"पता लगाकर अाता हूं ।" कहने के साथ नाटे ले एक झटके से ड्राईविंग डोर खोला ।


मारिया ने पूछना चाहा--"कैसे पता . . .


सेन्टेन्स अधूरा रह गया ।


नाटेने ने सुनने की कोंशिश नहीं की थी ।


मारूति के आगे से गुज़रने के बाद वह होटल के गेट की तरफ वढ़ गया ।


शहर के सबसे थर्ड कलास और बदनाम होटल के गेट की तरफ ।


होटल नारंग था उसका नाम । वैन उसके गेट के ठीक सामने, सड़क के पार खडी थी । बदनाम उस दिन के बाद वह ज्यादा ही हो गया था । जिस दिन पुलिस ने छापा मारकर एक मे हो रहीं " ब्ल्यू फिल्म " की शूंटिंग की पूरी टीम पकड़ी थी ।"
अखबारों के जरिए यह खबर सारे शहर में फैल गई थी । खास तो होटल नारंग पहले ही कुछ नहीं चलता था, उस बदनामी के बाद तो लोगों ने उसकी तरफ़ रुख ही करना बंद कर दिया । अब तो बस वह बाहर से अाने बाले उन यात्रियों के बूते पर चल रहा था जिन्हें उसकी 'शोहरत' के बारे में पता नहीं होता था ।


अपने काम के लिए नाटे ने अच्छी तरह सोच-समझकर उस होटल को चुना था । शहर स् दूर, सुनसान इलाके मे था यह ।



मारिया अपनी सीट पर बैठी होटल के गेट की तरफ़ बढ़ रहे नाटे की पीठ देखती रही । वह 'बेपैदी' के लोटे की तरह लुढ़कता सा सड़क पार कर गेट में समा गया ।


अब बह नजर नहीं आरहा था ।। वह, जो गेट पार करते ही होटल के काऊन्टर पर जा खड़ा हुआ ।

मज़बूरी थी ।


काउन्टर गेट से लगभग सटा हुआ था ।


"अ-आप। अाप मिस्टर गिरधर?" काउन्टर के पीछे खड़े मरियल से शख्स ने कहा---"आप तो साढे दस बजे जाने बाले थे न?"


"हां !" नाटा बोला-------" कहा तो मैंने ऐसा ही था ।"


अभी तो साढे नौ ही बजे है ।" उसने दीवार पर लटक रही आदम जमाने की बाल क्लॉक पर नजर डाली ।


"तो क्या हुआ, क्या मुझे एक घंटे पहले अपने कमरे की चाबी नहीं मिलेगी?"


"क्यों नहीं मिलेगी? ऐसा कब कहा मैंने?" कहने के साथ उसने हाथ बंढाकर "की बोर्ड' से एक चाबी उतारी और उसे काउन्टर पर रखता हुआ बोला।।'--"रूम नम्बर दो सौ दो ।"


चाबी समेटते हुए नाटे ने कहा-'"मेरे अलावा आज इस होटल में शायद कोई और नहीं ठहरा है !"



"क्या बात का रहे है मिस्टर गिरधर, रूम नम्बर दो सौ पांच एक लडकी ने बुक कराया है । क्या नाम है उनका ।' बड़बड़ाने के से अंदाज में उसने काउन्टर पर पड़े रजिस्टर पर नजर दौड़ाई; फिर एक जगह अटकता हुआ …-"नीलम । हाँ । नीलम बत्रा नाम है उनका । पौने ग्यारह बजे अपने कमरे का चार्ज लेगी ।"
नाटा समझ वह --वह क्रिस्टी की बात कर रहा है । उसने यहां अपना नाम नीलम बत्रा ही लिखवाया था ।। होटल नारंग के कमरे के कमरे की फोन पर नहीं हेती थी कस्टमर को खुद जाना पडता था ।

अपने मतलब की बात निकलवाने के लिये नाटे ने कहा-- " वस मेरे अलावा इतने वडे होटल मैं केवल निलम ठहरी हैं."


" दौ सौ छः में अभी अभी एक साहब गये हैं ।" अपने होटल की साख वचाने के लिये मरियल शख्स को कहना पड़ा ।।

"'ओ. के. ।" कहने के साथ नाटा हंसा ।

मुडा ।

और चाबी हाथ में लिये सीढि़यों की तरफ बढ़ गया ।

वह सेक्न्ड फ्लोर पर पहुंचा ।


अपने यानी रूम नम्वर दो सौ तीन की तरफ बढ़ा ।

दो सौ पांच यानी वह कमरा जिससे उनके प्लान के मुताबिक क्रिस्टी और विनम्र को मिलना था, सामने था । दो सौ पांच के सामने वाला कमरा उसने लिया ही इसलिए था ताकि क्रिस्टी और विनम्र की मुलाकात पर ठीक से नजर रखी जा सके ।


गैलरी में केवल साठ वाट के बल्ब का प्रकाश था ।

काफी मद्धिम ।


नाटे ने देखा-------दो सौ छ: -- दो सौ पांच के ठीक बगल वाला कमरा था । उसके अंदर की लाइट "ओंन' थी ।



पहले नाटा अपने कमरे के दरवाजे की तरफ बढा । फिर जाने क्या सोचकर ठिठका । सतर्क निगाहों से गैलरू का निरीक्षण किया । किसी तरफ कोई नहीं था ।


दवे पांव दो भी छ: के बंद दरवाजे के नजदीक पहुचा ।


झुका ओंर. . .आंख "की होल' पर रख थी ।


अंदर का दृश्य देखते ही रोमांचित होउठा।
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Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:14

दाढी बाले ने अभी-अभी अपने चेहरे से दाढी उतारकर सस्ती सी सेन्टर टेबल पर डाली थी ।। फैल्ट हैट पहले ही से सिर पर नहीं था ।


वह कोई अधेड़ आयु का शख्स था ।

और अगले पल ।

अगले पल तो रोंगटे ही खड़े हो गए नाटे के ।।


यह तब की बात है जब अधेड ने ओवर कोट उतारकर पलंग पर डाला ।


नाटे के रोंगटे उसके कुल्हे पर लटक रहे होलेस्टर को देखकर खड़े हुए थे । हौंलेस्टर से रिवाल्वर की मूठ झांक रही थी ।


अब कोई शक नहीं रह गया ।।


गड़बड़ थी, और यकीनन थी ।


निश्चित रूप से वह शख्स टाईम से पहले उन्हीं से निपटने के मकसद से यहाँ पहुंचा था ।


अब नाटे को यहीं खड़े रहने या कुछ और देखने की कोई जरूरत नहीं थी । वह दवे पांव दरवाजे के नजदीक से पीछे हटा है महसूस किया------दिल 'धक्क-धक्क' की आवाज पैदा कर रहा है । अपने कमरे की तरफ़ बढने की भी कोई कोशिश नहीं की ।


सीढियां उतरने के दरम्यान और काउन्टर तक पहुचते-पहुचते उसने खुद को सामान्य कर लिया था ।
उसे देखते ही मरियल से ने कहा---'अरे! मिस्टर गिरधर । आप इतनी जल्दी वापस आ गए?"


"कोई काम याद आ गया ।" बताने के साथ उसने चाबी काउन्टर पर रखी ।।



"अब कितने बजे आएंगे?" मरियल मैन ने पूछा ।


दरवाजा पार करते नाटे ने कहा-मै ग्यारह बजे ।"


कुछ कहने के लिए मरियल मैन ने मुह खोला मगर जिससे कहना चाहता था वह गायब हो गया ।।



नाटा होने के कारण नाटा लम्बे-लम्बे कदम तो नहीं रख सकता था मगर फुर्ती से उतनी देर में दो कदम जरूर रख सकता या जितनी देर मे लम्बा व्यक्ति एक टाइम रखता । कहने का मतलब ये---नाटा पलक झपकते ही सडक क्रास करके वेन के नजदीक पहुचा । एक झटके से ड्राईविंग डोर खोला और दरवाजा वापस बन्द करता हुआ 'धम्म' की आवाज के साथ ड्राइंविंग सीट पर जा गिरा ।


"क्या हुआ" उसकी हालत देखकर मारिया का लहजा लऱज उठा था ।।


"शक सही निकला ।" वह हांफ रहा था---" भारी गड़बड़ है ।"


मारिया ने उद्विग्न होकर पूछा--"बताओं तो सही, क्या गड़बड़ है !"


उसकी दाढी-मूंछ नकली हैं।रिवॉल्वर है उसके पास ।”


"र-रिवॉल्वर?" मारिया हकला गई ।


"ठहरा भी दो सौ छः में है दो सौ पांच के ठीक बरावर में ।"


"पूरी बात बताओं । प्लीज !"


नाटे ने पूरा वृतांत विस्तारपूर्वक सुना दिया ।


नाटा तो केवल उद्वेलित था । मारिया 'अा्तकिंत' नजर आने लगी । बस एक ही सेटैन्स _निकला उसके मुह से---" यहां से चलो नाटे ।"

" क्यों ?"


"खतरा है ।"’


"'फिलहाल इतना घबराने की जरूरत नहीं है । भला हमें क्या खतरा हो सकता है । होटल मैं नहीं है हम । होटल के बाहर खड्रै है । उसे क्या पता विनम्र को ब्लैकमेल करने बाले हम ही हैं । खतरा हमारे 'एक्शन' में अाने पर होगा ।"

"इन हालात में हमारा 'एक्शन' क्या होगा?"
" वही, जो पहले से सोच रखा है ।" कहने के साथ उसने अपने घिसे-पिटे कोट की जेव से मोबाईल निकाला । 'मारिया बार' का पर्सनल नम्बर डायल किया । फोन उठाया गया । क्रिस्टी की आबाज उभरी---"हैलो । "



"मैं बोल रहा हूं क्रिस्टी ।"


"हाँ । बोलो ।" क्रिस्टी का लहजा वेहद शुष्क था ।


"‘प्रोग्राम कैंसल ।"


चौकी हूई| अवाज--" क्या मतलव?"


"तुम्हें वहां नहीं जाना है ।"


"मगर क्यों---कोई खास बात हुई क्या?"


"तुम्हे तो खुश होना चहिए । पहले ही आज के प्रोग्राम को लेकर मरी जा रही थी ।"


"मेरे कारण तो प्रोग्राम कैंसिल किया नहीं होगा तुमने । असली वजह बताओ ।"


"वही आकर बताएंगे ।"


"कब आओगे?"


"ग्यारह के बाद ।"


"ग्यारह बजे तो विनम्र से मुलाकात फिक्स थी है जब प्रोग्रा्म ही कैंसिल हो गया है तो इतने लेट क्यों आओगे?"


" एक तो एक करोड से अचानक वन गई दूरी । दूसरे क्रिस्टी के सवाल । नाटा झुंझला उठा…"सवाल पर सवाल दाग कर दिमाग खराब मत करो क्रिस्टी । जो कह रहा हूं उसे ध्यान से सुनो--तुम्हें यहां नहीं अाना है मगर होटल नारंग रिसेप्शन पर फौन करके कहो…


" तुम थोड़ी लेट हो । पौने ग्यारह की जगह सबा ग्यारह बजे पोहुंचोगी । और कहना-ग्यारह बजे मेरा एक मेहमान पहुंचेगा । उसे कमरे की चाबी दे दी जाए । साथ ही मेरे सवा ग्यारह बजे पहुचने का मेसेज भी दिया जाए ।उससे कहा जाए--- वह कमरे में बैठकर इंतजार करे ।"


" पर जब मुझे वहां पहुचना ही नहीं है तो बिनम्र को इंत्जार कराने का क्या फायदा?"


"सवालों में मत उलझो क्रिस्टी । केवल वह करो जो कह रहा हूं । तुम समझ गई न क्या करना है?"


" हां ।"
" गुड , अभी फोन कर दो ।" कहने के बाद क्रिस्टी को कोई सवाल करने का मौका दिए बगैर उसने कनेक्शन आफ कर दिया ।


नाटे ने क्रिस्टी से जो कुछ कहा उसे मारिया ने वहुत ध्यान से सुना था ।


समझ न सकी-----वह कर क्या रहा है?


क्या सोच रहा है?


इसीलिए, जब वह मोबाईल बापस जेब में रख रहा था तो बोली…“तुमने क्रिस्टी द्वारा रिसेप्शन पर ‘मेसेज' क्यों छुड़वाया?"


"देखना तो होगा-- यहां क्या क्या होता है और फिर, विनम्र की अक्ल भी दुरुस्त करनी होगी । "



"मैं समझी नही । क्या कहना चाहते हो?"


नाटे ने हाथ बढाकर 'वेन' के डैशबोर्ड से गोल्ड फंलैक का पैकिट निकाला और लाईटर उठाया । सिगरेट सुलगाई । सिगरेट मारिया ने भी सुलगा ली थी ।


पहला कश लेने के बाद नाटा धुंआ उगलता हुआ बोला---'मेरे दिमाग में बहुत सी बाते घूम रही हैं समझ नहीं आरहा कहां से शुरु करूं । मुझे उम्मीद नहीं थी यह लड़का पहली ही किस्त पर हमें घेरने की कोशिश करेगा । सोचा था--कई किस्त चुकता करने के बाद भी जब निगेटिव नहीं मिलेगे तो परेशान होकर कोई कोशिश कर सकता है, मगर यह तो पहली ही किस्त देने को तैयार नजर नहीं अाता । तभी तो हमसे निपटने का इंतजाम किया है ।। यह इंतजाम उसने कर ही लिया है तो हमारे लिए भी उसे सबक सिखाना जरुरी हो गया है । ऐसा नहीं कर पाये तो एक कौडी तक झटकना नामुमकिन हो जाएगा । और सबक सिखाने के लिए सबसे पहले उसके जाल को समझना जरूरी है ।"



"मेरी समझ में अभी भी नहीं आ रहा, तुम क्या कह रहे हो?"


"'सबसे पहले यह जानना जरुरी है…नकली दाढ़ी मूंझ वाला कौम है ?"


"पुलिस वाला होगा? और कौन हो सकता है?"



"नहीं ।" वह पुलिस वाला नहीं लगता । खुद फ़सा हुआ आदमी पुलिस की मदद नहीं लेता । और फिर, पुलिस के घेरने का तरीका जरा अलग होता है । घेरा अगर पुलिस का होता तो वह अकेला नहीं होता । सादे लिबास में ही सही, होटल के आसपास भी पुलिस वाले नजर जा रहे होते जबकि यहाँ दूर-दूर तक हमारे अलावा कोई नहीं है !"
"अभी टाईम ही क्या हुआ है । क्या पता ग्यारह बजते-बजते होटल को घेर लिया जाए ।"


"हां । ऐसा हो सकता है मगर यह पुलिस का आदमी है तो ऐसा जरुर होगा और यदि हुआ तो खतरा भांपते ही हमारे पास यहाँ से रफू-चक्कर हो जाने के अलाबा कोई चारा नहीं होगा । चिंता मत करो । हम ऐसा ही करेगे । मगर पहले ही भाग जाना बेवकूफी होगी । थोड़ी हिम्मत और साहस से तो हमे काम लेना ही होगा । खतरा भी उठाना होगा । बहरहाल, मामला अरबों का है और फिर, एक बार फिर कहूंगा-"मुझें यह पुलिस बाला नहीं लगता ।"


"और कौन हो सकता है?"


"शायद विनम्र का कोई ऐसा दोस्त जिसे वह इतने गहरे राज में भी राजदार बना सकता है ।"


" काश, ऐसा ही हो ।’" मारिया ने प्रेयर-सी की---"वहं पुलिस वाला न निकले । अगर उसने पुलिस को इन्वाल्व कर लिया होगा एक पैसा हाथ नहीं लगेगा । हमारी आशाओं पर पानी फिर जाएगा ।"'


" देख लो साली साहिबा ।। मेरी सतर्कता और तरकीब काम आा गई न हम यहां की चौक्सी ना कर रहे होते, न ही विनम्र द्वारा बिछाए गऐ जाल का पता लगता, पता तभी लगता जब हम उसमे फंस चूकै होते ।"


वे इसी किस्म की बाते करते रहे ।।



समय गुजरता गया ।।
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Re: कठपुतली -हिन्दी नॉवल

Postby Jemsbond » 10 Jan 2017 17:15



निगाहे बराबर वेन से बाहर का निरीक्षण करती रही थी । ऐसी कोई सदिग्ध बात नजर नहीं अाई जिसके कारण उसे यहाँ से हटना पडता ।



" ठीक ग्यारह बजे । " होटल के सामने एक टैक्सी रुकी ।


पिछला गेट खोलकर विनम्र बाहर निकला ।



दोनों ने देखा----उसके हाथ में एक अटैची थी ।


लालच में डूबी मारिया ने कह उठी----"वह रुपये लाया है ।"
‘"क्या पता अटैची में रुपये है या कुछ और ।" नाटा बड़वड़ाया ।


"रुपए ही होंगे । देखो---काफी वजन है उसमे । विनम्र मुश्किल से उठा पा रहा है ।"



"हूं ।" विनम्र को गेट की तरफ बढ़ते देखते नाटे ने कहा ।

'"तुम्हें पूरा यकीन है न, यह नकली दाढ़ी मूंझ वाला हमारे ही चक्कर में था ।"


"हाँ ।"


“कही ऐसा तो नहीं, वह अपने ही किसी चक्कर से हो । हमारे मामले से कोई मतलब ही न हो उसका और हम बेवजह भ्रमिल होकर एक करोड रुपए का नुकसान कर ले ।।"


नाटे ने होटल का गेट पार करके अंदर चले गए बिनम्र से नज़रे हटाकर मारिया की तरफ देखा । हल्की-सी मुस्कान उभरी उसके होठों पर बोला---तुम औरतों का भी जवाब नहीं । एक पल में इतना घबरा जाओगी कि साथ बाले के हाथ-पैर फूला दोगी । दूसरे पल इतना हौंसला दिखाओंगी कि साथ बाला दंग रह जाए ।"


"क्या मैं गलत कह रही हूं ।"


"यह तुम नहीं, तुम्हारा लालच बोल रहा है ।"


"क्या तुम लालची नहीं हो? तुम्हारा मन नहीं कर रहा उस अटैची में भरी दौलत को अपनी बनाने का?"


"लालची भी हूं और मन भी कर रहा है मगर इस सबमे फंस कर अपना विवेक खोने को तैयार नहीं हूं।

जबकि तुम अटैची देखकर वौरा चुकी हो । तुम जो यह पता लगते ही यहाँ एक पल भी ठहरने को तेयार नहीं थी कि दाढी वाले के पास रिवॉल्वर भी है । अचानक तुममें इतना हौंसला अा गया । यह केवल लालच के कारण अाया है ।।। नाटा कहता चला गया----“यह दावा पेश करने का मेरे पास कोई कारण नही है कि नकली दाढ़ी बाले का सम्बन्ध हमारे ही झमेले से है ।। बेशक वह
अपने ही किसी ऐसे चक्कर में भी हो सकता है जिसका हमसे कोई मतलब न हो मगर इस 'आशा' के बूते पर से कोई रिस्क नहीं ले सकता । अगर उसका सम्बन्थ हमारे ही झमेले से हुआ तो लेने के देने पड़ जाएंगे ।"


मारिया चुप रही ।







"निराश मत हो । देर-सवैर वही नहीं, वैसी कई अटैचियां हमारी होने वाली हैं मगर तब जब हम "पेशेन्स' रखें । एक-एक कदम फूंक-फूंककर उठाएं । तुमने सड़कों पर लगे बोर्ड देखे होंगे जिन पर लिखा होता है-"सावथानी हटीं, दुर्घटना घटी ।' लिखा तो वह केवल ड्राईवरों के लिए जाता है मगर गोर करें तो जिन्दगी जी रहे हर शख्स के लिए ने सावधानी हटते ही दुर्घटना घट जाती है । इस मामले में सावधानी हटते ही दुर्घटना ऐसी घटेगी कि अरबपति बनने की जगह या तो जेल में नजर अाएंगे या नकली दाढ़ी वाले की गोली खाकर कहीं ओंधें मुंह पडे होंगे ।"



" त-तुम तो डरा रहे हो मुझे ।"


"डरा नहीं रहा डार्लिंग । समझा रहा हूं ।" कहने के साथ उसने बेन स्टार्ट करके आगे बढा थी ।


"कहां जा रहे हो?" मारिया ने पूछा ।



"किसी पी सी ओं. पर ।"'


"क्यो?"


"करोड रुपए से भरी अटैची का इन्तजाम करने ।"


"क-क्या मतलब?"


"उसे फोन करूंगा । डराऊंगा उसे । ताकि यदि इस बार उसने कोई चाल चली हो तो अगली बार न चले । शराफ़त से अटैची हमारे हवाले कर दे ।"


"फोन ही करना है तो तुम्हारे पास मोबाईल है ।"



" कूढ़ मगज हो तुम । मोबाईल का इस्तेमाल हमे फंसा सकता है ।" कहने के साथ उसने स्पीड बढ़ा दी ।
विनम्र को पहली बार पता लगा करोड रुपए अगर पांच सै के नोटो की सूरत में भी हों, तब भी उनसे काफी वजन होता है । अटैची को मुश्किल से उठाए काउन्टर पर पहुंचा । उसे देखते ही मरियल मैन ने अपने लम्बे-लम्बे ओंऱ मैले दांत दिखाते हुए कहा--'"आप मिस्टर विनम्र हैं न?


विनम्र को आश्चर्य हुआ । मुह से निकला-------" मगर, आपको कैसे मालूम?"


वह खी-खी' करके हंस पड़ा । ऐसा करते वक्त दांत कुछ ज्यादा ही स्पष्ट नजर अाए ।


"की बोर्ड' से रूम नम्बर दो सै पांच की चाबी उतारकर काउन्टर पर रखने के साथ कहा--"नीलम बत्रा मेमसाब का फोन अाया था । उन्होंने कहा"--ग्यारह बजे मिस्टर विनम्र अाएंगे । पूरे ग्यारह ही बजे हैं । वहुत "पंचुअत' हैं आप ।"

"नीलम बत्रा?" विनम्र यह सोचने के साथ बडबड़ाया-"क्या उसकी मुलाकात किसी लड़की से होने वाली है?"



"जी हां । वे सवा ग्यारह बजे पहुच जाएगी । अाप रूम मे वेट करें ।। मरियल मेैन ने चाबी उसकी तरफ सरकाते हुए कहा-----" रूम नः दो सौ पांच ।"


बिनय सोच रहा था---"कमरे में जाकर इंतजार करे या नहीं । अभी निश्चय नही कर पाया था कि मरियल मेैन ने पूछा----"तब तक कमरे में भिजवाऊ सर ?"

'विनम्र की लगा---इस शख्स को बोलने की बीमारी है । यहां रहा तो पन्द्रह मिनट में दिमाग 'चटृट' कर जाएगा ।इस वक्त वैसे ही उसे यह सोचना था कि इन हालात से कैसे निपटना है ।। अत. रूम में जाकर
वेट करने का निश्चय करने के साथ पूझा---"क्या ऐसा कौई हैे जौ मेरी
अटैची रुम में पहुंचा सकै?"


"क्यों नहीं सर । हमारे होटल में सारे इंतजाम है ।" कहने के साथ उसने जोर से किसी 'बिरजू' को आवाज लगाई ।।

विरजूके नाम पर करीब अटृठारह साल का एक लडका दौड़ता हुया आया । उसने गंदा-सा नेकर और शर्ट पहन रखी ही । मरियल मैन ने उसे अटैची रुम में पहुचाने का हुक्म दिया ।
लॉक विनम्र ने खोला । अगला कदम बढाते ही उसने खुद को ऐसे कमरे मैं पाय जिसमें धूल भरा , बुरी तरह घिस चुका लाल रंग का कार्पेट बिछा था ।
कई जगह से फट भी चुका था । एक निहायत हीं सस्ता बैड ओर वैड पर जो चादर विछी थी वह थी तो धुली हुई परन्तु इतनी गंदी और सलवटेदार कि बैठना तो दूर विनम्र को उसकी तरफ देखना गंवारा न हुआ ।

बिरजू ने अटैची पलंग के नजदीक कार्पेट पर रख दी और जाने केलिए मुड़ा । विनंम्र ने उसे रोका ।


यह सोचकर दस का नोट दिया कि उसने इतनी मेहनत की है और. . .ऐसा करना मानो उसके जीवन की सबसे भूल थी । बिरजू बेहद खुश हो गया । दस का नोट हाथ में लेकर बल्लियों उछलने लगा । जोर-जोर से पूछने लगा-----" क्या लाऊं साहव? विनम्र को हर बार कहना पड़ा-'कुछ नहीं' मगर विरजू माना ही नहीं । तव तक पूछता रहा जब तक विनम्र झुंझलाकर चीख नहीं पड़।



"तुमने सुना नहीं क्या, कुछ नहीं चाहिए? तव कहीं जाकर बिरजू सहमा । घूमा और हवा के झोके की तरह कमरे से बाहर चला गया ।



विनम्र को लगा-------"जैसे जकड़ा हुआ सिर अाजाद हुआ हो । दरवाजा बंद किया ।


घूमा ।


कमरे में कहीं कोई खिड़की नहीं थी ।

हर तरफ दीवारे ही दीवारे ।


विनम्र का दम-सा घुटने लगा मगर कर क्या सकता था?


ब्लेक-मेलर के अाने तक यहाँ रहना मजबूरी थी ।


कुछ देर बाद कोट की जेव में पड़ा मोबाईल बज उठा । हौले से चोंका । उसे बाहर निकाला । स्कीन पर नजर अा रहा नम्बर पढा । नम्बर अंजाना था । फिर भी "ग्रीन बटन' दबाया । कान से लगाने के साथ बोला--"हेंलो ।"


सर्द लहजै में कहा गया-"बहुत चालाक समझते हो खुद को?"


" कौन ?"



"अच्छा ।" गुर्राहट उभरी------" अब यह भी बताना होगा?"


"ओह ।" ब्लैक मेलर की अाबाज पहचानते ही विनम्र ने क्हा--"त-तुम?"
'"हां मैं । मैं बोल रहा हूं ।"आबाज ऐसी थी जो जैसे फोन के दुसरी तरफ बैठा वह विनम्र का लहू जमा देना चाहता हो---" मेरी अाबाज को अपने जेहन में सेट कर लो । फिर कभी इस आवाज को सुनकर 'कौन' मत कहना ।"



" मुझे इस वक्त तुम्हारा फोन अाने की उम्मीद नहीं थी ।"


" क्यों ?"


" तुम्हें तो इस वक्त फोटुओं के साथ यहां होना चाहिए था । नारंग होटल रूम नम्बर दो भी पाच में ।"



पुन: गुर्राकर कहा क्या'-""बेवकूफ समझते हो मुझे?”


" क्या मतलब? "



"मिस्टर विनम्र । ऊपर वाले ने अपने पास तीन आंखें रखी, बाकी सबको दो आंखे दी हैं मगर मेरे सारे जिस्म पर आंखें ही आंखें है । कुछ छुपा नहीं रह सकता मुझसे । सबकुछ देख लेता है ।"


विनम्र चकराया । बोला-------" क्या कह रहे हो तुम? मेरो समझ में कुछ नहीँ आरहा?”



"ये फोटों जब पुलिस कमिशनर की टेबल पर पड़े होंगे तो सब समझ में आ जाएगा ।"



रोंगटे खड़े हो गए विनम्र के ।।। एक बार को तो सारे जिस्म में झुरझुरी-सी दौड़ गई मगर शीघ्र ही खुद को संभालकर आत्मविश्वास भरे स्वर में बोला-----'' क्यों, क्यो पुलिस कमिश्नर की टेबल पर पहुंचेगे?"


"क्यों नहीं पहुंचेगे?"


"मुंह मांगी कीमत दे रहा हूं ।। तूने एक करोड मांगा । इस कमरे में बुलाया । मैं रकम लेकर पहुंच गया हूं ।। फिर क्यों तुम उन फोटुओं को मेरे अलावा किसी अन्य के पास पहुचाओगे ?"



"ओहा तो यह भी बताना पडेगा?"



"पता नहीं तुम इतने नाराज क्यो हो? अरे भई मैं तो सही समय पर पहुच गया हूं । नहीं अाए तो तुम्ही नहीं जाए ।"


"मुझे क्या वहीं मरने के लिए जाना था?"


" म-मरने के लिए?" विनम्र की बुद्धि चकराकर रह गई । "


" तुम्हें कौन मारने बाला था?"


"जरूरत से ज्यादा चालाकी हमेशा दुख देती है मिस्टर विनम्र । यह बात हमेशा याद रखना । अगर तुम यह सोच रहे हो कि मुझे तुम्हारे द्वारा बिछाए गए जाल की जानकारी नहीं है तो यह तुम्हारी बेवकूफी है ।"


" म- मैंने । मैंने कोई जाल बिछाया है?" विनम्र की समझ में कुछ नहीं आ रहा था---"भला मैं किसके खिलाफ क्या जाल बिछाऊंगा ?"
" तुमने मेरे खिलाफ जाल बिछाया है । यह खुशफहमी पालकर कि तुम मुझे फंसा सकते हो ।"



"क-क्या बात कर रहे हो तुम? तुम्हारे खिलाफ़ कोई जाल बिछाने की मैं पोजीशन में ही कहाँ हूं?"



"बावजूद इसके तुमने ऐसी जुर्रत की है ।"



"उफ्फ! पता नहीं क्या वहम हो गया है तुम्हें । यकीन मानो------" ऐसा कुछ नहीं किया ।"



"क्या समझते हो तुम ? तुम कहोगे और मैं यकीन कर लूगा?"



"पर पता तो लगे, किया क्या है?"



"सुनना ही चाहते हो तो सुनो-----" मुझे रूं नम्बर दो भी छ: में ठहरे शख्स की जानकारी है ।"'



" रूम नम्बर दो भी छः?"



"क्यों, सरक गई न ? यह सोचकर हो गए न होश फाख्ता कि मुझे उसके बारे में जानकारी कैसे मिल गई? ज़वाब एक ही हैमिस्टर विनम्र । तुम मेरे पहले शिकार नहीं हो । मेरा तो धंधा ही तुम जेसे लोगों के दौलत पर ऐश करना है । खुद भी गिनना चाहूं तो शायद गिन न सकू कि अपने अब तक के जीवन मे कितने लोगों को ब्लैक मेल किया है । अगर अपनी आंखें बंद रखा करता । तुम जैसे गधों के झांसों में अाने वाला होता तो इतने दिनों से इस धंधे में जमा न होता । बहुत पहले किसी की गोली से मर-खप गया होता । आज मैं अपने धंधे का किंग हू वह केवल इसलिए क्योंकि कोई मुझे धोखा नहीं दे सकता ।"



" मुझे बोलने का जरा भी मोका दिए बगैर पता नहीं तुम क्या-क्या कहे चले जा रहे हो ।। मारे हैरत के विनम्र का बुरा हाल था--"यकीन क्यों नहीं करते । मैंने, तुम्हें फंसाने के लिए कोई जाल नहीं बिछाया ।



"सिर्फ फंसाने के लिए नहीं मिस्टर विनम्र । मुझे मार डालने के लिए जाल बिछाया है । रूम नः दो सो छ: में तुम्हारे आदमी के पास मैंने अपनी आंखों से रिवॉल्वर देखी है ।"



"'रि-रिवॉल्वर ।" विनम्र हकला गया--""क-क्या बात कंर रहे हो?कौन ठहरा है वहां?" "

"यह भी मैं बताऊंगा"' लहजा जहर में बुझा था ।

'विश्वास करो । मुझे नहीं पता वह कौन है त-तुम उसे मेरा आदमी समझ रहे हो जबकि मुझें इतना तक नहीं मालूम् कि वहां कोई ठहरा हुआ भी है ।भला मै...........
"बस मिस्टर विनम्र बस ।" गुर्राकर कहा गया--"वहुत हो चुकी एंक्टिग । मैं इन झासों में आने वाला नहीं हूं ।जानता हूं --- पकड़े जाने पर तुम जैसे लोग इसी तरह बौखलाते हैं । वहुत बोल चुके । अव मेरी सुनो पहली वेबकूफी मानकर माफ कर रहा हूं !
कान खोल कर सुनो -- कल फिर फोन करूंगा । बताऊंगा पैसे लेकर कहां आना है ।"

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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

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यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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