खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete

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kunal
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खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete

Post by kunal » 10 Jan 2017 18:54

खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरीcomplete
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जानलेवा, तीखी गर्मी पड़ रही थी ।


जहाँ तक भी नजर जाती, सव कुछ सुलगता-सा लग रहा था ।


ये बंजर मेदान था और जमीन के साथ-साथ देखने से ऐसा लग रहा था, जैसे जमीन से धुआं निकल रहा हो, सूर्य जैसे अपनी सारी गर्मी इसी मैदान पर फेंक रहा हो । यूं तो हवा थमी-सी थी, पंरंतु एकाएक जव हवा उठती तो अपने साथ मैदान की मिट्टी को भी आगोश में लेकर उड़ा देती और वो धूल का छोटा-सा गुब्बार उड़ता हुआ दूर तक जाता दिखाई देता रहता ।


वो दो युवक थे जो इस जानलेवा गर्मी में वहां मौजूद थे ।


दोंनों की उम्र बीस-इक्कीस के करीब थी, परंतु वे फटेहाल थे । जिस्म पर पड़े कपडे फट रहे थे । बात इस तरह उलझे हुए थे जैसे उन्हें नहाए महीना बीत गया हो ।


पांवों में फटे जूते थे । गालो पर शेव के बाल भी बड़े हुए थे । उनकी हालत से स्पष्ट था कि लम्बे समय से भरपेट खाना भी उन्होंने. नहीं खाया है । कोई ट्रक उस मेदान में कूडा फेक गया होगा वे दोनों युवक उसी कूड़े की छानबीन कर रहे थे ।


वे इतने व्यस्त लग रहे थे कि तपती गर्मी का जैसे उन्हें अहसास ही नहीं हो रहा था ।

तभी एक युवक ने दूसरे से कहा।


“मंगलू! हमें दस दिन हो गए झुग्गी में गए ।"

" मैं मां से नहीं मिलूंगा । तुझे जाना है, तो जा ! मगंलू ने कहा ।


" क्यों ?"


"देख !" मंगलू अपने काम में व्यस्त बोला…" मां हमेशा बोलती रहती कोई काम करने को । वो समझती है कि मैं काम नहीं करना चाहता, जबकि मुझे काम मिलता नहीं । तेरे को तो सब पता है ।"
"इसमें मां का तो कोई कसूर नहीं ।" भानू ने कहा ।


"तो मेरी कहां गलती है? तू बेशक वापस चला जा, तेरा बापू अच्छा है ।"



"खाक अच्छा है ।" भानू ने मुंह बनाया-"दिन में पीता नहीं तो खाना भी खिलाता है, बात भी करता है । रात में जब पी लेता है तो गालियां देता है, मारता है । तूने तो देखा ही है, पचासों बार ।"


मंगलू कूडे के ढेर से छांट-छांटकर काम की चीजे एक तरफ रख रहा था ।


भानू भी ऐसा ही कर रहा था ।


"अगर मुझे कमाने की इच्छा न होती तो मैं कूड़े के ढेर में हाथ क्यों मारता? हम दोनों यही कोशिश कर रहे हैं कि यहां से इकट्ठा किए सामान को कबाडी के हाथ बेचकर दस-बीस रुपए मिल जाएंगे !"



"तू ठीक कहता है, लेकिन हमारी बात समझता कौन है?"


कूड़े को छानने में दोनों के हाथ तेजी से काम कर रहे थे ।


तभी मंगलू का हाथ किसी ठोस चीज से टकराया ।


वो रुका ।


उसने उंगलियों में पकडकर उस चीज को बाहर खींच लिया ।


पुराने-से कपड़े में लिपटी वो पतली-लम्बी चीज लगी कोई । उसने फौरन कपड़े के बल खोलने शुरू कर दिए । कुछ ही पलो बाद, लेदर के केस में फंसा उसके हाथ में चाकू थमा था ।


जो कि दस इंच लम्बा और करीब डेढ़ इंच चौडा था । उस चाकू की धार एक तरफ़ थी ।


अब तक मंगलू चाकू को लेदर के केस से बाहर निकाल चुका था । चाकू का फल पुराना हो रहा था । उसके आगे के हिस्से पर अभी भी सूखा हुआ खून लगा हुआ था, जो कि पुराना होकर दाग जैसा लग रहा था । स्पष्ट था कि वहुत पहले चाकू का इस्तेमाल किया गया और उसे साफ किए विना केस में रख दिया गया । उस पर तब का लगा खून सूखकर काला पड़ा और फिर जंग जैसा लगने लगा था ।



"चंद कदम दूर कूड़े के ढेर के पास बैठा भानू कह उठा ।


"ये क्या है?"


"चाकू है, पुराना है लेकिन प्चास रुपए मिल जाएंगे । साफ करके बेच देंगे । तब चमक जाएगा ।"
"ठीक है । साफ कर दे चाकू को. . !" कहकर भानू अपने काम में व्यस्त हो गया ।


मंगलू चाकू को साफ करने लगा ।


उसी पल उसके कानों में सरसराती आवाज़ गूंजी ।


"ये क्या कर रहा है मंगलू?”


मंगलू के हाथ रूके ।



चौंककर उसने आस-पास देखा । कोई न दिखा ।


“क्या देख रहा है, मुझे दूढ़ रहा है? मैं नहीं दिखूंगा तेरे को !" शब्दों की सरसराहट पुन: कानों में पड्री ।



" कौन है तु?" मंगलू के होंठों से निकला ।


"भवतारा हूं मैं । शैतान का बेटा ।"


"कौन शैतान?"


भानू अपना काम छोड़कर हैरानी से उसे देखने लगा था ।



"किससे बातें कर रहा है?" भानू ने उससे पूछा ।



मंगलू ने उसकी बात का ज़वाब न दिया ।



“ये चाकू मेरा है ।" शब्दों की सरसराहट पुन: कानों में पडी ।



"तुम्हारा?" मंगलू आस-पास देखता, चेहरे का पसीना पोंछते हुए कह उठा ।


"हां मेरा । मैंने इसे वहुत छिपाकर रखा था, लेकिन आज ये कूड़े के ढेर में पहुंच--।"


"मैं तुम्हें चाकू नहीं दूगा ।"


" क्यों ?"


" ये अब मुझे मिला है, मेरा है । मैं इसे प्चास रुपए में बेच दूंगा । ये तुम्हारा नहीं है ।"



"तुम्हें दौलत चाहिए?”


"हां ।”



"में दूंगा…बहुत दौलत दूंगा, लेकिन तुम्हें मेरा एक काम करना होगा !"



"क्या ?"


" ये चाकू लेक़र मेरी बताई जगह पऱ आना होगा ।"


"मैं ऐसा करूंगा तो तुम मुझे दौलत दोगे?"


"हां । दौलत के साथ-साथ अपना आशीर्वाद भी दूगा । आशीर्वाद तो तुम्हें अभी से मिल गया है ।"
"आशीर्वाद से क्या होगा?"

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 10 Jan 2017 19:16

"तुम्हें अब कोई मार नहीं सकेगा । तुम मर नहीं सकोगे । भवतारा ने तुम्हें अपना लिया है । ये सब इसलिए हो रहा है कि मेरा चाकू तुम्हारे पास है और इसे लेकर तुम मेरी बताई जगह पर आने वाले हो ।" उसके कानों में सरसराहट गूंज रही थी-“तुम्हें चाहिए कि मुझे अपना गुरु मान लो ।"



"उससे क्या होगा?"



" फिर मेरी सरपरस्ती में आ जाओगे जो काम करोगे, शैतान के लिए । तुम्हें वहुत दौलत दूगा ।"


"मुझे मंजूर है ।"


"अब तुम मेरे हुक्म के गुलाम बनने जा रहे हो ।"


"लेकिन मैं कैसे यकीन कर लूं कि ये चाकू तुम्हारा है?" एकाएक मंगलू'ने कहा ।



" तुम्हें ये जानने की जरूरत भी क्या है । तुम तो चाकू को पचास रुपए मे बेचने की सोच रहे थे और मैं तुम्हें इस चाकू के बदले बेपनाह दौलत देने जा रहा हूँ । अपनी सरपरस्ती भी तुम्हें देने जा रहा हूं ।"



“तुमने ये चाकू कहाँ रखा था?"



"ज़मीन के नीचे । छिपाकर । वो भी दस साल पहले की बात है । ये बाते फुर्सत में पूछना । अब खामोश हो जाओ । मेरा आशीर्वाद तुम्हें देने जा रहा हूं ।" इसके साथ ही सरसराहट कानों से पड़नी बंद होगई ।



अगले ही पल मंगलू को अपनी सांसों में अनजानी-सी महक का अहसास हुआ । मदहोश कर देने बाली महक थी वो । मगंलू को लगा जैसे किसी नशे में उतरता जा रहा हो ।



चंद पल-ऐसे ही रहे।


फिर मंगलू को लगा जैसे उसके शरीर के भीतर किसी अनजानी-सी शक्ति का संचार हो गया हो । उसने खुद को पहले से हल्का महसूस किया । भूख भी लग रही थी, जो कि एकाएक समाप्त हो गई ।



और वो महक जैसे उसकी सासों का हिस्सा बन गई हो । तभी भानू पास आया !



" तू किससे बात कर रहा ? क्या हुआ तुझे ?"


मगंलू ने भानू को देखा ।
मंगलु-की आंखों में अजीब-सी चमक पाकर भानू हैरान हुआ ।


"क्या हुआ तुझें?"



तभी मंगलू कानों में पुन् सरसराहट गूंजी ।


" मगंलू ......!"


" हां !"



" अब तू वहुत पैसे वाला बन जाएगा । तूने इस दोस्त को क्या करना है । मार दे इसे ।"


“कैसे ?"


"तेरे हाथ में मेरा चाकू हैं,वो निकाल और खत्म कर दे भानू को ....!"


"क्या हुआ ?" उलझन में फंसे भानू ने पूछा ।


तभी मंगलू ने दांत भींचकर चाकू वाला हाथ आगे किया और पूरा का पूरा फ़ल भानू के पेट में घुसेड़ दिया ।


भानू के होंठों से तीव्र चीख निकली ।


मंगलू ने चाकू वापस खींच लिया ।


भानू नीचे गिर गया ।


मंगलू के चेहरे पर खूंखारता के भाव नजर आ रहे थे ।


खून से सना चाकू थामे वो पुन: आगे बढा और तड़पते भानू पर झुका और चाकू की नोक से एक ही बार में भानू का गला काट दिया ।


भानू जोरों से पुन: चीखा, फिर तड़पने लगा ।


मंगलू खून से सना चाकू उसकी कमीज से साफ करने लगा तो कानों में सरसराहट पडी ।


"ये क्या कर रहा है?"


मंगलू एकाएक ठिठक गया ।


"चाकू पर से खून साफ़ कर रहा हूं।"


"इसी खून की तो मुझे ज़रूरत है । इसे साफ न कर । वापस केस में डाल ले ।"

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 10 Jan 2017 19:17


मंगलू ने चाकू को लैदर केस में बापस डाला । वो अपने मे अजीब-सी शक्ति का अहसास कर रहा था ।


भानू को वो नहीं मारना चाहता था, परंतु कोई शक्ति उससे ये काम करा रही थी ।


" खूब समझदार है । मेरा नाम रोशन करेगा मेरी दुनिया में तेरा स्वागत है !"


" अब मैं क्या करूं ?" मंगलू बोला ।
"ये चाकू लेकर तुझे मेरे पास आना है ।”


" तू किधर है भवतारा?" मंगलू ने पूछा ।


“पश्चिम दिशा की तरफ चलना शुरू कर दे । मैं तेरे को रास्ता बताता रहूंगा ।"


“ठीक ।" मंगलू ने चाकू वाला लैदर केस मुट्ठी में जकड़ा और उस मैदान से पश्चिम दिशा की तरफ़ बढ गया ।



मोना चौधरी बहुत तेज गति से कार चला रही थी ।


पारसनाथ के पास पहुंचना था उसे ।

पारसनाथ ने किसी ऐसे आदमी को पकड़ रखा था जिससे उसे कुछ पुछना था । इस वक्त सडकों पर भीढ़ कम थी वाहनों की । गर्मी इतनी ज्यादा थी कि आज लोग घर में ही रहना पसंद कर रहे थे । जिन्हें वहुत जरूरी काम था, वो ही घर से निकल रहे थे ।



गर्मी की वजह से कार का ए .सी . भी बढिया ढंग से काम न कर रहा था । फिर भी कार के ए .सी . से इतना फायदा था कि पसीना नहीं बह रहा था ।



सड़क खाली थी । कार की गति तेज थी ।


एकाएक मोना चौधरी के हाथ-पांव फूल गए ।

सड़क के किनारे से चलता हुआ कोई एकाएक सडक के बीचोबीच आ गया था ।


वो और कोई नहीं मंगलू था । हाथ में जिसने केस में बंद चाकू थाम रखा था । वो तो सडक के किनारे किनारे पैदल जा रहा था कि एकाएक कानो में पड़ने वाली सरसराहट ने उसे आदेश दिया कि वो सड़क पार करे । यही वजह थी कि मंगलू उसी पल आगे वढ़ना छोड़कर सड़क पार करने लगा था और मस्तिष्क में उठते विचारों की वजह से वो इस कदर व्यस्त था कि सडक पर नजर डालने का उसे ध्यान ही न रहा ।



ध्यान तब आया जब कारों के ब्रेक चीखे । मंगलू ने कार की तरफ़ देखा जो कि सिर पर आ चुकी थी । उसने कार से बचना चाहा था । परंतु उसी पल घड़ाम!


कार उससे टकराई और अगले ही पल वो कार में उलझता चला गया । फिर फौरन ही कार रुकी, परंतु तव तक मंगलू का काम हो गया था । "
मोना चौधरी सिर से लेकर पांव तक काप उठी थी ।


ये क्या हो गया उससे? अपनी जिन्दगी में जाने कितनों की जान ली थी, याद नहीं था, परंतु इस तरह किसी को कार से कुचलकर मारना, उसके लिए बडी बात थी ।


आज पहली बार उसने खुद को कांपता-सा महसूस किया था ।


सवाल ये नहीं था कि गलती उसकी थी, जो एकाएक ही उसकी कार के सामने सड़क पर आ गया था । मुद्दा ये था कि उसकी कार के नीचे आकर किसी की जान चली गई । जिस बुरी तरह से कार की टक्कर उसे लगी थी, वो किसी भी सूरत में जिन्दा नहीं बचा रह सकता था ।


मोना चौधरी दरवाजा खोलकर बाहर निक्ली ।


अव तक अन्य वाहन भी रुकने लगे थे ।।


दरवाजे को खुला छोड़कर ही आगे बढी और सारा नजारा देखते ही उसका दिल धक से रह गया । मंगलू मरा पड़ा था । कार के नीचे आकर कुचला गया था । कार का पहिया गर्दन पर चढ गया था ।


टाग पर भी चोट आई लग रही थी । उसकी आखें बंद थी । सबसे खास बात तो ये थी कि लेदर केस में फंसा चाकू अभी तक उसके हाथ में दबा हुआ था ।


मोना चौधरी ने भी उस लेदर केस को देखा।


वो सामान्य-सा लेदर केस था ।


मोना चौधरी के चेहरे पर दुख-ही-दुख नजर आ रहा था ।


अपने वाहन रोककर वहीं पाच-सात लोग इकट्ठा हो गए थे ।



" तुमने मार दिया इसे ।।"


" मोना चौधरी ने गर्दन घुमाकर देखा । उसके पास ही चालीस बर्ष की औरत खडी थी ।


"ये अचानक मेरी कार के सामने आ गया था ।"


"तुम्हें कार धीमे चलानी चाहिए थी । मैंने देखा, तुम कार बहुत तेज चला रही थी ।"


"मुझें दुख है इसकी मौत का !"


" ये बात पुलिस से कहना ।"



"पुलिस !" मोना चौधरी चौकी । आस-पास देखा ।
"भागना मत । हम तुम्हें भागने नहीं देगे !" उस औरत ने कहा, फिर वहां खडे लोगों से बोली------" मेरे ख्याल में ये भागने की सोच रही है ।इसे भागने मत देना । मैं पुलिस को फोन करती हूं।" कहकर वो औरत वहां से हट गई।



पुलिस के चक्कर में पड़ने का मोना चौधरी का कोई इरादा नहीं था । पुलिस ने उसे पकड लिया तो वो ये भी पहचान जाएगी कि वो मोना चौधरी है ।


तभी एक युवक पास पहुंचा और धीमे स्वर में बोला ।



"यहां खडी क्या कर रही हो । खिसक लो । पुलिस आ गई तो पकड़ी जाओगी ।"



" मै भी यही सोच रही हूं।" मोना चौधरी ने गंभीर स्वर में कहा ।



"तुम्हारी कार का नम्बर बहुतों ने नोट कर लिया होगा ।" युवक बोला । "



"कार मेरे नाम पर रजिस्टर्ड नहीं है ।" मोना चौधरी ने कहा और मंगलू पर नजर डालकर पलटने लगी कि ठिठकी ।


उसने मंगलू की पलकों में कम्पन देखा था ।


"ये जिन्दा है ।" मोना चौधरी के होंठों से निकला ।


"नहीं मर चुका है ।"


"मैंने पलकें हिलते देखी हैं?"


"तुम्हारा दिमाग खराब हो गयाहै ।" युवक ने मुंह बनाया ।


मोना चौधरी की निगाह एकटक मंगलू-पर थी ।


"वो देखो ।" मोना चौधरी तेज स्वर में बोली------" हाथं की उंगली हिली है ।"


" हां , मैंने भी देखा है ।" वहां खड़े अन्य व्यक्ति ने भी कहा ।



"इसे उठाकर मेरी कार में डालो, मैं इसे अस्पताल में ले जाती हूं। जल्दी करो !" मोना चौधरी के कहते ही वो युवक और दो अन्य आदमी नीचे पड़े मंगलू को उठाने लगे । मोना चौधरी ने कार का पीछे का दरवाजा । खोला । तीनों मंगलू को उठाकर लाए और कार की पीछे की सीट पर लिटा दिया । अजीब बात तो ये थ्री कि चाकू वाला लैदर केस अभी भी उसकी मुट्ठी में ज्रकड़ा हुआ था ।


कार के दरवाजे बंद किए गए ।


मोना चौधरी ड्राइविंग सीट पर बैठी और ज़ल्दी से कार आगे बढ़ा दी
बीस मिनट वाद मोना चौधरी ने कार को शहर के नामी हाँस्पिटल के इमरजेंसी गेट के सामने ले जाकर रोका और जल्दी से दरवाजा खोलकर पीछे की सीट पर निगाह डाली ।



उसी पल ठिठक गई मोना चौधरी।


हैरत से उसकी आंखें फैल गई ।

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 10 Jan 2017 19:18



मंगलू पिछली सीट पर आराम से बैठा था ।


"त-----तुम?" मोना चौधरी के होठों से अजीब-सा स्वर निकला…" होश में आ गए?"

"हां ।"


" "तुम धायल होगे------मै अभी डॉक्टर. .!" मोना चौधरी ने कहना चाहा ।


"मैं ठीक हूं । मुझे कोई चोट नहीं लगी ।" मंगलू ने शात स्वर में कहा ।



"ये कैसे हो सकता है?"


"यहां से चलो । मुझे डॉक्टर की जरूरत नहीं है ।"


मोना चौधरी कुछ पल अनिश्चित-सी खडी रही !


"क्या सोच रही हो?”


"तुम्हारे बारे में कि तुम कैसे ठीक हो गए । तुम तो जख्मी थे ।"



" कितनी बार कहूं कि मैं ठीक हूं।" मगंलू का स्वर तीखा हो गया ।


मोना चौधरी ने गहरी निगाहों से उसे देखा ।


"चलो यहां से !"


अजीब-सी हालत में फंसी मोना चौधरी वापस स्टेयरिंग सेट पर बैठी और कार आगे बढा दी ।


देखते-ही-देखते कार अस्पताल से निकलकर, सड़क पर आ गई ।



"मंगलू. !" तभी भवतारा की फुसफुसाहट, उसके कानों पडी ।


"हां ।" मंगलू के होंठ हिले ।


मंगलू की मद्धिम-सी आवाज सुनकर मोना चौधरी ने शीशे के द्वारा पीछे बैठे मंगलू को देखा ।



"मेरी शक्तियों ने तुम्हें ठीक कर दिया है, परंतु अभी तुम्हें आराम की जरूरत है 1"



"मुझें क्या हुआ था?" मगलु ने पूछा ।


" तुम मर गये थे. .।" भवतारा की फुसफुसाहट कानों मे पड़ी ।
मंगलू ने गहरी सांस ली ।



" क्या हुआ ?" वो ही अवतारा की सरगोशी ।


"मुझे भी कुछ समय पहले कुछ अजीब-सा महसूस हुआ था । मुझे लगा जैसे जलती हुई जगह में पहुच गया हूं । वहां हर तरफ आग ही आग लगी है । लोग चीख-पुकार कर रहे । जाने क्या कह रहे थे बो, मेरी समझ में न आया ।"


" तुम नर्क में पहुच गए थे ।"


"नर्क मे?"


"हां । मौत के पश्चात तुमने नर्क में प्रवेश किया था । नर्क का ही दृश्य था, जो तुमने बताया ।"



"ओह तो मैं सच में मर गया था?”



"हां, परंतु मैंने तुम्हें नर्क से वापस भेजकर तुम्हारी जान बचा ली । तुम आसानी से नहीं मर सकते । तुमने शैतान के बेटे भवतारा की सरप्ररस्ती कबूल कर ली है । मेरे हुक्म के गुलाम बन चुके हो तुम और मैं अपने गुलामों की खूब देखभाल करता हूं । क्योकि मेरे गुलाम सलामत रहेंगे, मेरे हक में बढिया काम करेगे तो मेरा नाम और भी ज्यादा होगा ।"


मंगलू ने कुछ नहीं कहा ।


"मृत्यु में प्रवेश करने के वजह से तुम कमजोर पड़ गए हो । अगले तीन दिन तक तुम्हें आराम करना होगा । उसके बाद तुम पहले के तरह स्वस्थ हो जाओगे ।"



"कहां आराम करूं मैं ?"



"जो युवती कार चला रही है, इसके घर में आराम करो तीन दिन तक?”



“ये मुझे अपने घर ले जाएगी?"


"तुम कहो इसे-बात करो ।"



मोना चौधरी बारम्बार शीशे के द्वारा पीछे बैठे मंगलू को देख रही थी और हैरान थी कि वो किससे बाते करं रहा है ।


मंगलू की मद्धिम-सी आवाज उसके कान में पड़ रही थी ।


“सुनो !" मंगलू बोला…" क्या नाम है तुम्हारा?"



" मोना चौधरी. . .!"



"मैं मंगलू हूं।”



"तुम अभी किससे बाते कर रहे थे?" मोना चौधरी ने पूछा ।
मैं किसी से भी नहीं ।"



"तुम बातें कर रहे थे !"



"शक में न पडो । मेरी आदत है, अपने से बाते करते रहने की !'


मोना चौधरी के चेहरे पर संदेह की परछाइयां व्याप्त थी ।



" तुम मेरी कार के नीचे आकर लगभग मर ही गए थे ! मैंने जब देखा तो तुम मेरे हुए थे !"




मंगलू हंस पड़ा !!



"क्यों हंसे?”



" अगर मैं मर गया था तो फिर जिंदा कैसे हो गया? मरे हुए भला कभी जिन्दा होते हैं!"



"तुम धायल भी हुए थे । कई जगह से तुम्हारा खून निक्ला ।"



“अच्छा फिर?"



"फिर तुम अचानक ही ठीक हो गए।”



"अच्छा मजाक कर लेती हो । तुम्हें खुश होना चाहिए कि तुम्हारी कार के नीचे आकर मैं मरा नहीं !"



"खुश हूं ।" मोना चौधरी के माथे पर उलझन के बल नजर आ रहे थे ।



" मेरी तबीयत ठीक नहीं है । मुझे तीन दिन आराम करना है ।" मंगलू ने कहा ।



" तो ?"



"मेरा कोई धर नहीं है । क्या मैं तुम्हारे घर पर आराम कर सकता हु!" मगंलू ने कहा ।




“ठीक, मैं तुम्हें अपने घर ले चलती हूं।"



"मेहरबानी… !"



"ये तुमने हाथ में क्या पकड रखा है?"



"चाकू है ।"



“क्यों पकडा है?"



"ये मेरा नहीं, किसी का है । उसे वापस लौटाना है ।" मंगलू ने कहा ।



"इस तरह चाकू पकडकर सड़को पर घूमोगे तो पुलिस पकड लेगी ।"



मंगलू चुप रहा।

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 10 Jan 2017 19:19



"तुम्हारे कपडे वहुत गंदे है ।"
"जानता हूं । तुम चाहो-तो मुझें नए कपडे ले देना । मैं महीने भर से नहाया भी नहीं । तुम्हारे घर में नहाने को पानी है?"



"वहुत है । तुम सारा दिन नहा सकते हो?"


कार तेजी से दौडी जारही थी।



“मंगलू !" एकाएक उसके कानों में भवतारां की फुसफुसाहट , गूंजी…“अव तीन दिन तुम इसके घर पर ही आराम करोगे । एक बात मेरी खास याद रखना कि तुम इन तीन दिनों में किसी भी हाल में घर से बाहर नहीं निक्लोगे ।"


" .… "ठीक है ।"



"और मेरी अमानत यानी क्रि इस चाकू को अपने पास सुरक्षित ही रखोगे ।"



"तुम तो ऐसे का रहे हो जैसे कहीं जा रहे हो?"



"हां, मुझे किसी दूसरे काम में भी व्यस्त होना है, परंतु मेरी अदृश्य शक्तियां तुम्हारे भीतर मौजूद रहेगी और जरूरत पड़ने पर मैं भी तुम्हारे पास आ जाऊंगा । अव तुम मेरी सरपरस्ती में हो । तुम्हें डरने की जरूरत नहीं । जहाँ शेतान का बेटा भवतारा होता है, वहां कोई खतरा नहीं आता !"


मंगलू खामोश रहा ।



मोना चौधरी कार ड्राइव करते कह उठी ।


"तुम अब फिऱ किसी से बातें कर...?"



"कितनी बार कहू कि मुझें अपने से बाते करने की आदत है । लोग मन-ही-मन सोचते हैं, परंतु मै सोचता नहीं, बोलता हूं । मेरे लिए ये सामान्य बातं है, तुम्हें चिंता नहीं करनी चाहिए ।"



मोना चौधरी जानती थी कि बहुत अजीब बाते उसके-सामने आ रही हैं । ये मर गया, परंतु फिर जिन्दा हो गया । घायल था ये, परंतु अब कहीं कोई जख्म नजर नहीं आ रहा ।


मिनटों में सारे जखत्म कहां चले गये !!


मौत के पश्चात ये जीवित कैसे हो गया?


और ये बातें करने के अंदाज में ये अपने से क्या बाते करता है



बहुत बातें न समझ में आने वाली थी ।



" धर में और कोन कौन-हैं?" मंगलू ने पूछा ।


" कोइ नहीं ।"
" अकेली हों"


"हां !"



"मां-बाप ?"


"नहीं हैं ।"



" शादी?"


"नहीं की !"



"लेकिन तुम खूबसूरत हो । मुझे अच्छी लगने लगी हो ।" मंगलू मुस्कराया ।



“क्या तुम मेरे घर पर मेरी खूबसूरती देखने चल रहे हो?” मोना चौधरी ने पूछा ।


"मुझें तीन दिन आराम करना है । नए कपडे ले देना । शेव करने का सामान तो तुम्हारे घर पर होगा ही ।"


" मैं क्या शेव करती हू जो मेरे पास शेव का सामान होगा ही?" मोना चौधरी ने शांत स्वर में कहा ।




“नहीं है तो बाजार से ले लो ।" मंगलू मुस्कराया।



" कुछ देर बार मोना चौधरी ने एक दुकान के सामने कार रोकी और उतरकर दुकान मे चली गई । दस मिनट बाद शेव के सामान के साथ वापस आई और भीतर बैठकर कार को पुन आगे बढा दिया ।।



"तुममें मुझे क्यों कोई अजीब बात लग रही है!" मोना चौधरी ने कहा ।



"मुझमें कुछ भी अजीब नहीं है । तुम क्या करती ही?”



"तुम्हें मेरे काम से क्या मतलब? तुमने तीन दिन आराम करने के लिए, मेरे धर में जगह मागी तो जगह तुम्हें दे रही हूं । इससे ज्यादा मेरे भीतर घुसने की चेष्टा न करो ।"



"अहसान नहीं कर रही मुझ पर तुमने मुझें कार कै नीचे, कुचला । इसी से मेरी तबीयत खराब हुई है । अगर मैं मर गया होता अब तक तुम्हें पुलिस ने पकड़ लिया होता ।"


" ये बात है तो शाबाशी किसे मिले----तुम्हें कि तुम मरे नहीं या मैंने तुम पर पूरी तरह कार नहीं चढाई?" मोना मुस्करा पडी ।



मगलू खिडकी से बाहर देखने लगा । "
"कभी तुम मेरे परिवार के बारे में पूछते हो तो कभी शादी के बारे में ! कभी मेरी खूबसूरती की तारीफ़ करने लगते हो और तुम्हारी हालत देखकल लगता है जैसे तुमने दस दिन से खाना न खाया हो।”



" अब सव ठीक हो जाएगा ।" मंगलू बड़बड़ा उठा ।।



"क्या ठीक हो जाएगा?" मोना चौधरी ने उसकी बड़बड़ाहट सुन ली थी। शीशे में से मंगलू को देखा ।।



मंगलू मुस्कराया और बेहद रहस्यमय लगा ।


कुछ देर बार ही मोना मंगलू के साथ अपने अपार्टमेंट पर आ पहुंची थी ।
मोना चौधरी सीढियां चढकर अपने फलैट के दरवाजे पर पहुंची, पीछे मंगलू था उसके एक हाथ में लेदर केस था चाकू सहित और दूसरे हाथ में शेव के सामान का लिफाफा था ।



मोना चौधरी ने दरवाजे पर चाबी लगाई कि नंदराम की आवाज कानों से पड्री ।


“साईं, ये तेरे को किया हो गया है नी.. .!"

मोना चौधरी ने गर्दन घुमाकर देखा।

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