खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

kunal
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 12 Jan 2017 13:43



"मंगलू ।" जंगला की फुसफूसाहट मगलू के कानों मे गूंजी …" अब तो तेरे को खुश होना चाहिए कि चाकू मिल गया ।"



"मैं खुश हूं ।" मंगलू के होंठ हिले ।


मगलू इस वक्त भीढ़-भरे फुटपाथ पर तेजी से आगे बढा जा रहा था ।।



"क्या तूने सोचा था कि चाकू मिल जाएगा !"



"मैंने ये सोचा था कि मैं चाकू लेकर रहूंगा ।"


"तात्रिक बेलीराम के इशारे पर कितनी आसार्नी से मिल गया । बेलीराम बहुत करामाती इंसान है ।"


"बताया था तुमने ।" मंगलू की नजरें हर तरफ जा रही थीं--“ अब मैंने कहां जाना है?"



"शैतान के बेटे से पूछकर आता हूं ।"


"तू तो कह रहा था कि शैतान का बेटा व्यस्त है ।"


" व्यस्त है, लेकिन अब हमारी बात भी जरूरी है । कहीं चाकू फिर से हाथ से निकल गया तो ?"


"ठीक है पूछ शैतान के बेटे से !"

मंगलू फुटपाथ पर आगे बढा जा रहा था ।


मोना चौधरी के फ्लैट से वो काफी दूर आ गया था । मोना चौधरी का उसे जरा भी डर नहीं था ।


ना ही खयाल था मोना चौधरी का । वो तो मगलू के दिमागं से निकल चुकी थी ।



ऐसे मंगलू कैसे सोच सकता था कि मोना चौधरी उसका पीछा कर रही है ।




आगे बढती मोना चौधरी की निगाह एकटक मंगलू पर थी । भीड़-भरे फुटपाथ पर वो मगलू से दस कदम पीछे थी । ऐसे में मंगलू पलटकर देखता तो भी मोना चौधरी नजर न आ पाती ।


वैसे भी चलती भीड़ मंगलू को इतना मोका ही कहां देने वाली थी कि वो पीछे देख सके ।



मौना चौधरी के चेहरे पर गंभीरता, भी थी और कठोरता भी ।।



तभी उसका मोबाइल बजा ।


मोना चौधरी फोन निकलकर बात की ।दुसरी तरफ पारसनाथ था ।



‘तुम कहां हो मोना चौधरी?" पारसनाथ की आवाज कानों में पड्री ।



"व्यस्त हूं ।"


" शायद तुम मंगलू के पीछे हो?"



"हां ।"



"खतरा हो जाएगा, अगर उसंने तुम्हें देख लिया । तुमने उससे . चाकू ले लिया तो वो पुन: राधा को पकड़ लेगे ।"



"राधा को तुम अपनी पत्नी सितारा के पास छोड़ दो ।"



"ठीक है ऐसा ही करता हूं । मुझें बताओ, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हू।"



“जरूरत पडने पर तुम्हें फोन करूगी पारसनाथ !" कहकर मोना चौधरी ने फोन बंद करके जेब मे डाला । आगे बढते उसकी निगाह बराबर मगलू पर थी । वो मगंलू का पीछा किसी हालत में नहीं. छोड़ना चाहती थी और उचित मौका मिलने पर उससे वो चाकू ले लेना चाहती थी ।


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जंगला की फुसफुसाहट मंगलू कें कानों में गूंजी ।


"मैं आ गया मंगलू ।"


"शेतान के बेटे से बात हुई?"


" हां,बो सच में बहुत व्यस्त है !"


"मेरे बारे में क्या कहा उसने ?"



"तुम्हें चाकू के साथ तांत्रिक बेलीराम के पास पहुचना होगा !"



"मुझे क्या पता कि बेलीराम किधर हैं जो !"



" मै हूं ना । मै बताऊंगा रास्ता…तू चिंता क्यों करता है?"


"ठीक है बता ।"


"बेलीराम इस शहर से दूर रहता है । तेरे को स्टेशन पहुचना है। वहा से ट्रेन पकड़नी है !"


@@@@@@@@@@@@



धड़.......धड़.....धड.... .ट्रेऩ पटरियों पर दौड रही थी । ट्रेन जब पटरी बदलती तो शोर एकाएक बढ़ जाता । ट्रेन क्रो चले आधा घंटा हो चुका था । मोना चौधरी ट्रेन में जहाँ बैठी थी, उससे दस फीट पर मंगलू बेठा था, पर मगलू की इस तरफ पीठ होने की वजह से वो मोना चौधरी की न देख पाया था । मगलू ने जब टिकट लो तो उसने टिकट देने वाले से पूछ लिया था कि नीली कमीज वाले व्यंक्ति ने कहां की टिकट ली और वहीं की टिकट उसने खुद ले ली थी ।



इस वक्त मोना चौधरी के चेहरे पर गंभीरता थी ।



उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि बो कुछ व्याकुल-सी है ।



मोना चौधरी ने फोन निकाला और सतपाल का फोन नम्बर मिलाने लगी ।


कुछ पलों तक दूसरी तरफ़ बेल होती रही, फिर सतपाल की आवाज कानों में पडी ।



"हैलो !"


" मै मोना चौधरी !"


सतपाल की तरफ से कोई आवाज न आई ।


"सतपाल ।।"



" तुमने गलत किया मोना चौधरी!"


" राधा की जिन्दगी बचानी ज़रूरी थ्री ।उन्होंने राधा को पकड लिया था । वो चाकू मांग रहे थे।"
"तुम नहीं जानती कि तुमने कितनों की जिन्दगी खतरे में डाल दी ! अगर भवतारा को : जीवन मिल गया तो वो इंसानों का खून पीने लगेगा । बहुत लोग बेमौत मरेंगे ।" सतपाल का गंभीर स्वर कानों में पड़ा ।



"मुझे भी इस बारे में चिंता है !"



"तुम चिंता' करके क्या कर सकती हो अब-कुछ भी नहीं ।"



"मैं इस वक्त ट्रेन में बैठी , मंगलू के पीछे हू ।"



"मंगलू के पीछे?" सतपाल चौंकता स्वर कानों में पड़ा ।



"हां ।"



"मंगलू किस जगह पर जा रहा है ट्रेन में बैठकर?” मोना चौधरी ने बताया ।



"ओह्न तो बो चाकू लेकर तांत्रिक बेलीराम के पास जा रहा है ।"


" उस ,जगह पर बेलीराम रहता है?"


" हां । तुम्हारा क्या इरादा है कि तुम ?"



"मैँ मंगलू से चाकू पाने की चेष्टा करूंगी । जहाँ मोका मिला वहां. . . !"



" यै खतरनाक होगा । शैतानी 'शक्तियां मंगलू की सहायता कर रही हैं !" सतपाल की व्याकुल. आवाज कानों में पडी ।



"तुम्हारा दिया धागा अभी भी मेरे गले में है ।" मोना चौधरी ने कहा ।



"वो धागा एक हद तक ही तुम्हें शैतानी शक्तियों से बचा सकता हैं। तुम अपने को खतरे में डाल लोगी ।"


"मंगलू से चाकू छीनना भी तो जरूरी है ।"


कुछ पलो के लिए फोन पर खामोशी रही ।


"इस बार चाकू हाथ लग गया तो फौरन. तुम्हें दे दूंगी ।" मोना चौधरी ने कहा ।



" चाकू हासिल करना अव आसान नहीं लगता ।"



"जो होगा सामने आ जाएगा ।"



"मैं भी यहाँ के लिए चल रहा हू । प्लेन से आता हूं । तुम्हें स्टेशन पर ही मिलूंगा । दो होंगे तो अच्छी तरह मंगलू का मुकाबला करके उससे चाकू लिया जा सकता है ।"



"मंगलू के लिए मैं अकेली ही..!"
" तुम ये क्यों भूल जाती हो कि मंगलू के आस-पास शैतानी शक्तियां भी हैं ।"


मोना चोधरी ने कुछ नहीं कहा ।



"स्टेशन पर मिलूंगा तुमसे ।" कहकर उधर से सतपाल ने फोन बदकर दिया था ।


मोना चौधरी ने मंगलू की तरफ देखा !"


अभी भी मंगलू की पीठ उसकी तरफ़ थी ।


ट्रेन तेजी से दौड्री जारही थी।



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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 12 Jan 2017 13:44



सतपाल ने मिथलेश को सारी बात बताईं ।


"शायद मोना चौधरी मंगलं से चाकू लेने में कामयाब न हो सके ।"


उसके होंठों से निकला ।



"तभी तो मैं वहीं जा रहा हूं !"


"मोना चौधरी ने चाकू उसके हवाले करके बहुत गलत काम किया ।" मिथलेश ने गहरी सांस ली ।



"जो हो गया, हमें उस पर ज्यादा नहीं सोचना चाहिए ।" सतपाल ने गंभीर स्वर में कहा…

-" हमें सिर्फ ये कोशिश करनी है कि अपने चाकू के सहारे भवतारा पुन जीवित न हो । इसके लिए वो चाकू हमें हासिल करना होगा । मोना चौधरी की ये समझदारी ही है कि के मगलू के पीछे है और हमे फोन किया, वरना हमे मगलू का पता ही न चलता कि बो कहां गया ।"



मिथलेश चुप-सा उसे देखता रहा 1


"में एयरपोर्ट जा रहा हूं । वहां के लिए घंटे-भर बाद एक प्लेन जाएगा ।" मिथलेश ने मोबाइल फोन निकाला और नम्बर मिलाने लगा ।


" किसे फोन कर रहे हो?"


"राजन को !"


" हो सकता है, उसके फोन की चाजिंग खत्म...!"


"वेल हो रही है ।" कान से लगाए मिथलेश कह उठा !!




फिर मिथलेश के कानों मे राजन का मद्धिम-सा स्वर पडा ।


"हेलो !"



" तुम कहाँ हो?" मिथलेश ने कहा।



" तात्रिक वेलीराम के डेरे पर हूं। साधु के वेष में ! मुझे रहने को झोंपड़ा मिल गया है और यहां पर बिजली भी है । फोन चार्ज कर सकता हूं ।" राजन की आवाज कानों में पडी ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby Kamini » 12 Jan 2017 13:53

Superb update KUNAL
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 09 Apr 2017 19:54

"ये तो अच्छी बात है. । तांत्रिक बेलीराम की नजदीकी पाने की चेष्टा करो और उस पर नजर रखो । मेरे ख्याल में मंगलू भी चाकू के साथ बेलीराम के पास ही पहुच रहा है, तुम देखना के मंगलू वहां आने के बाद वो क्या करता है ?"


"ठीक है खबर पाते ही फोन करूँगा ।" मिथलेश फोन बंद करते सतपाल से बोला ।


"राजन साघू के वेष में है,बेलीराम के डेरे पर वहाँ उसे झोपडा मिल गया है, जहां बिज़ली भी है।"


"ठीक है तुम राजन के कांन्टेक्ट में रहना । मैं चलता हूं !"



"जो भी हो मुझे खबर कर देना ।"



" हां, तब तक तुम शैतान के बेटे भवतारा के बारे में किताबों से जानने की चेष्टा करो । भवतारां के बोरे में कई किताबों में जिक्र होगी । हमे कई नई जानकारियां मिल सकती हैं ।"


मिथलेश ने सिर हिला दिया ।


सतपाल वहां से बाहर निकल गया ।



@@@@@@@@@@@@@@@@@


सतपाल शाम आठ बजे उस स्टेशन पर पहुचा जहाँ पर मंगलू ने टिकट लिया था । सतपाल जानता था कि इस स्टेशन से बेलीराम के डेरे तक रास्ता जाता था । कुछ दिन पहले ही तो वो बेलीराम के डेरे पर से होकर आया था ।


उसने स्टेशन पर बने रेस्टहाउस में ही रात-भर रहने को कमरा लिया और मोना चौधरी को फोन किया फौरन ही मोना चौधरी से बात हो गई ।


"मैं स्टेशन पर पहुच गया हूं।" सतपाल ने बताया ।



"ठीक है ।"


"मंगलू की क्या पोजीशन है?"


"वो वहीं अपनी जगह पर बैठा है । मेरी नजर उस पर ही है । मोना चौधरी को आबाज उसके कानों में पडी ।


"ये ट्रेन सुवह छः बजे स्टेशन पर पहुंचेगी । अव हम सुबह ही मिलेगे । कोई खास बात हो हो फोन कर देना ।"


"ठीक है।"



सतपाल ने फोन बंद कर दिया । चेहरे पर सोचों के भाव नजर आ रहे थे । वो सोच रहा था कि अगर मगलू से वो चाकू हासिल कर ले तो पाच मिनट का वक्त वहुत होगा, उस चाकू को बेकार , करने के लिए । इसके लिए उसे चाकू को हाथ में पकड़कर चद खास मंत्रों का उच्चारण करना पडेगा कि उस चाकू का असर खत्म हो जाएगा ।



फिर भवतारा चाकू के दम पर पुन जीवित नहीं हो सकेगा ।


और कुछ वक्त के लिए भवतारा का खतरा लोगों पर से हट जाएगा ।


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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 09 Apr 2017 19:56

"ये तो अच्छी बात है. । तांत्रिक बेलीराम की नजदीकी पाने की चेष्टा करो और उस पर नजर रखो । मेरे ख्याल में मंगलू भी चाकू के साथ बेलीराम के पास ही पहुच रहा है, तुम देखना के मंगलू वहां आने के बाद वो क्या करता है ?"


"ठीक है खबर पाते ही फोन करूँगा ।" मिथलेश फोन बंद करते सतपाल से बोला ।


"राजन साघू के वेष में है,बेलीराम के डेरे पर वहाँ उसे झोपडा मिल गया है, जहां बिज़ली भी है।"


"ठीक है तुम राजन के कांन्टेक्ट में रहना । मैं चलता हूं !"



"जो भी हो मुझे खबर कर देना ।"



" हां, तब तक तुम शैतान के बेटे भवतारा के बारे में किताबों से जानने की चेष्टा करो । भवतारां के बोरे में कई किताबों में जिक्र होगी । हमे कई नई जानकारियां मिल सकती हैं ।"


मिथलेश ने सिर हिला दिया ।


सतपाल वहां से बाहर निकल गया ।



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सतपाल शाम आठ बजे उस स्टेशन पर पहुचा जहाँ पर मंगलू ने टिकट लिया था । सतपाल जानता था कि इस स्टेशन से बेलीराम के डेरे तक रास्ता जाता था । कुछ दिन पहले ही तो वो बेलीराम के डेरे पर से होकर आया था ।


उसने स्टेशन पर बने रेस्टहाउस में ही रात-भर रहने को कमरा लिया और मोना चौधरी को फोन किया फौरन ही मोना चौधरी से बात हो गई ।


"मैं स्टेशन पर पहुच गया हूं।" सतपाल ने बताया ।



"ठीक है ।"


"मंगलू की क्या पोजीशन है?"


"वो वहीं अपनी जगह पर बैठा है । मेरी नजर उस पर ही है । मोना चौधरी को आबाज उसके कानों में पडी ।


"ये ट्रेन सुवह छः बजे स्टेशन पर पहुंचेगी । अव हम सुबह ही मिलेगे । कोई खास बात हो हो फोन कर देना ।"


"ठीक है।"



सतपाल ने फोन बंद कर दिया । चेहरे पर सोचों के भाव नजर आ रहे थे । वो सोच रहा था कि अगर मगलू से वो चाकू हासिल कर ले तो पाच मिनट का वक्त वहुत होगा, उस चाकू को बेकार , करने के लिए । इसके लिए उसे चाकू को हाथ में पकड़कर चद खास मंत्रों का उच्चारण करना पडेगा कि उस चाकू का असर खत्म हो जाएगा ।



फिर भवतारा चाकू के दम पर पुन जीवित नहीं हो सकेगा ।


और कुछ वक्त के लिए भवतारा का खतरा लोगों पर से हट जाएगा ।

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 09 Apr 2017 19:57

सुबह के पांच बज रहे थे ।


भोर का उजाला फूटने को ही था रात की कालिमा घीरे धीरे छंटती जा रही थी । ट्रेन धड़-घड़ धड़ पटरियों पर दौडती जा रही थी ।


मंगलू आधी मिली सीट पर नीद में डूबा हुआ था कि तभी उसके कानो में फुसफुसाहट पडी ।



"मंगलू ।"



मंगलू फोरन हड़बड़ाकर उठ गया । उसने आस-पास देखा ।


"मैं हूं जंगला।"


" कह !" मंगलू नीद से भरीं आंखें मलता हुआ कह उठा ।


"खूब नींद ली !"



"हां सो गया था । तूने क्यों उठा दिया !"


सामने बैठे आदमी ने मंगलू को देखा तो यही सोचा ।


सुबह-सुबह भगवान का नाम ले रहा है ।


"मोना चौधरी कल से ही तेरे पीछे है ।" जंगला की फुसफुसाहट कानो में पड्री।



"मेरे पीछे------?" मंगलू के होठों से निकला !


”इसी तरह बैठा रह । पीछे मत देखना । कुछ पीछे बैठी मोना चौधरी । इधर ही देख रही है ।



मगलू शांत-सा बैठा रहा ।


"ज़ब से तू उसके घर से चाकू लेकर निकला था । तभी वो तेरे पीछे लग गई थी ।"



“तूने पहले क्यों नहीँ बताया था !"

"क्या फायदा होता बताने का । तू बेचैन रहता । नींद भी ठीक तरह से न ले पाता । अब तो तेरे को इसलिए बताया कि कुछ देर में ही स्टेशन आने वाला है । तू नीचे उतरेगा तब मोना चौधरी तेरे से चाकू लेने की केशिश करेगी ।"


" वो पागल है , जो ऐसा सोचती है ।" मंगलू कठोर स्वर में बोला।


"वो पागल नहीं समझदार है । दृढ़ इरादों वाली है मोना चौधरी ।”


"मैँ अभी उसे... !"



"पागल मत वन । तू उसे कुछ मी नहीं, कहेगा । मस्त रह । तेरा काम चाकू को सुरक्षित रखना हैं।"


"मैं मोना चौधरी को मार दूगा ।"


"मार दे। मैं तेरे साथ हूं ।” मंगलू उठा ।


"कहा जा रहा है?"


"बाथरूम मेँ…वहां टेप के साथ बांध रखा चाकू निकालकर जेब में रखूंगा । मोना चौधरी को मारना जो है ।"


"ठीक है ।"


मंगलू बाथरूम की तरफ बढ़ गया ।


ट्रेन दौडी जा रही थी ।


"पीछे मत देखना मोना चौधरी तेरे को देख रही है ।" मंगलू बाथरुम में जाकर बंद हो गया ।


दो मिनट बाद बाहर निकला ।



"निकाल लिया चाकू ?"


"हाँ ! "

"अब चुपचाप वापस जाकर अपनी सीट पर बैठ जा । जब स्टेशन आएगा, बता दूंगा !"


मंगलू वापस अपनी सीट पर जा बैठा । एक बार भी उधर नहीँ देखा, जिधर मोना चौधरी बैठी थी ।


@@@@@@@@@@@@@@@@@


स्टेशन पर रुकी ।


मंगलू ट्रेन से प्लेटफार्म पर उतरा ।


डिब्बे के दूसरे दरवाजे से मोना चौधरी नीचे उतरी । नजर मंगलू पर थी । काफी लोग थे उतरने वाले । चढने वाले भी थे । ठीक-ठीक ही भीड़ थी प्लेटफार्म पर । मोना चौधरी मंगलू पर भी नजर रख रही थी और सतपाल को भी तलाश कर रही । "

मंगलू को प्लेटफार्म के बाहर की तरफ जाते देखा तो मोना चौधरी उसका पीछा करने लगी । यही वो वक्त था कि सतपाल पीछे से आकर मोना चीधरी की बगल में चलने लगा । "



"मंगलू कहाँ है?" सतपाल ने पूछा ।।


“बो उधर, काफी आगे ।" आगे बढती मोना चौधरी कह उठी । सतपाल ने मंगलू को पहचाना, पीठ की तरफ़ से ।



"उसे तुम पर शक तो नहीं हुआ !"



"आज हमें हर हाल मे चाकू उससे लेकर रहना है ।"


सतपाल ने दात भींचकर कहा ।


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