खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete

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kunal
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 12 Jan 2017 13:41


तात्रिक बेलीराम रंजन तिवारी से बात करने के बाद समाधि पर बैठा और मंत्रों का उच्चारण करके उसने जंगला को अपने पास बुलाया ।



"मुझे कैसे याद किया बेलीराम?"



"मंगलू को मोना चौधरी के फ्लैट पर जाना होगा ।"


" क्यों?"



"वहां रंजन तिवारी मौजूद है । वो मंगलू को शेतान कै बेटे का चाकू दिखाएगा। मंगलू को पहचानना है कि ये वो ही चाकू है । कहीं मोना चौधरी दुसरा चाकू तो नहीं दे रही ।" बेलीराम ने कहा ।



"समझा । तो मोना चौधरी चाकू देने के लिए तैयार हो गई ।"



" तेरे को जो कहा है, बो ही कर । मंगलू को मोना चौधरी के फ्लेट पर भेज !"


@@@@@@@@@@@@


मोना चौधरी और रंजन तिवारी खामोश ही वहां बैठे थे ।


" तुम बेलीराम को कैसे जानते हो?" एकाएक मोना चौधरी ने पूछा ।।



" जानता हूं !" रंजन तिवारी ने छोटा-सा ज़वाब दिया !


"उसके लिए ऐसे ही काम करते हो?"




" पहली बार कर रहा हूं !"
"मैं तुम्हें दस-बीस लाख रुपया दे सकतीं हूं राधा के बदले ।" मोना चौधरी ने कहा ।



"बात पैसे की नहीं, श्रद्घा की है ।" रंजन तिवारी ने गभीर स्वर में कहा…“मैं बेलीराम की इज्जत करता हूं।”


"उस चाकू का महत्व जानते हो?”


"नहीं और जानना भी नहीं चाहता, मुझे बताना भी मत !"



" क्यों ?"



"कहीँ सुनकर मन में कोई लालच आ गया तो कोई गड़बड़ न कर दूं , इसलिए चाकू के बारे में नहीं जानना चाहता ।"


मोना चौधरी समझ गई कि सामने बैठा शख्स अपनी वात का -पक्का है ।


"चाकू कहां है?”


"मेरा दोस्त लेकर आ रहा है ।" मोना चौधरी ने कहा ।


तभी कॉलबेल बजी ।


मोना चौधरी ने आगे बढकर दरवाजा खोला तो चौकी ।


बाहर मंगलू खड़ा था ।


" तुम?"


मंगलं ने धक्का मारकर दरवाजा खोला और भीतर प्रवेश कर गया।



रंजन तिवारी की नजर भी दरवाजे की तरफ थी ।


" मैं मंगलू ।" मंगलू ने रंजन तिवारी से कहा ।


" बैठ जा ।" रंजन तिवारी बोला------"अभी चाकू आएगा तो तुम्हें पहचानना है कि बो, वो ही चाकू है, जिसकी हमें जरूरत है या फिर कोई दूसरा चाकू है ।"


@@@@@@@@@@@@



राधा और पारसनाथ पाच मिनट के हेर-फेर ने मोना चौधरी के फ्लैट पर पहुचे थे ।।



पारसनाथ साथ सतपाल और मिथलेश भी थे ।



"मोना चौधरी?" सतपाल भीतर आते ही बोला-----" क्या हो रहा हे?,.तुमने कहा था कि पारसनाथ से मैं वो चाकू ले लूं परंतु ये हमे यहां ले आया, जबकि पहले ये चाकू देने को तैयार था ।"



रंजन: तिवारी ने तीनों को देखा ।


तीनों ने मंगलू और रंजन तिवारी को देखा ।
तीनों ने मंगलू और रंजन तिवारी की देखा ।

" ये दोनों कौन हैं?" पारसनाथ ने चुभते स्वर में कहा ।


"रंजन तिवारी और वो मंगलू।"

पारसनाथ ने गहरी निगाहों से मंगलू को देखा ।


"मुझे चाकू दो मोना चौधरी!" सतपाल की निगाह भी मंगलू पर पड चुकी थी । मिथलेश की नजर भी । दोनों अब पहले से सतर्क दिखाई देने लगे थे, अलबत्ता मंगलू क्रो इस प्रकार वहा बैठे देखकर उन्हे हैरानी भी थी ।


मोना के चेहरे पर गंभीरता नजर आने लगी थी


मोना चौधरी ने पारसनाथ की तरफ़ हाथ बढाया तो पारसनाथ ने अपने कपडों में छिपा रखा, लैदरकैस युक्त चाकू निकाला और, मोना चौधरी के हाथ पर रख दिया । उस चाकू को देखते ही मंगलू की आखों में चमक आ ठहरी थी ।



"यही है चाकू?" रंजन तिवारी ने मंगलू से पूछा।


"लगता तो यहीं है । एक बार हाथ में लेकर देख लूं तो..।"



"हाथ में भी आ जाएगा । थोड़ी देर रुकना पडेगा।"



" चाकू मुझे दो मोना चौधरी!" सतपाल ने तेज स्वर में कहा ।



मोना चौधरी ने गभीर निगाहों से सतपाल को देखा, फिर कहा ।



" ये चाकू मैंने तुम्हें ही देनां था सतपाल! "



"देना था…क्या मतलब?"


" इस चाकू को पाने के लिए मंगलू और उसके साथी ने मेरे दोस्त की पत्नी का अपहरण कर लिया है । उसे वापस पाने के लिए ये चाकू इन लोगों को लौटाना होगा ।" मोना चौधरी का स्वर गंभीर थे। ।


सतपाल ने मगलू को देखा ।



मंगलू के चेहरे पर जहरीली मुस्कान नृत्य कर रही थी ।



“तुम पागल तो नहीं हो गई ।" एकाएक मिथलेश भडककर कह उठा है।।


"इसमे मागत होने की क्या बात है?" मोना चौधरी का स्वर कठोर हो गया ।



"एक की जान बचाने के लिए, तुम कितनों की जिन्दगी खतरे मैं डाल रही हो । चाकू इन्हें दे देने का मतलब है शैतान के बेटे का जीबत हो जाना ! शैतान के बेटे के जीवित होने, पर वो जाने, कितनी ही जाने......!"
"मुझें राधा को सलामत वापस पाना है ।" मोना चौधरी ने कठोर … स्वर में कहा ।



"एक को बचाने के लिए तुम बहुत जाने खतरे में डाल रही हो ।"


"राधा को बचाना मेरे लिए बहुत जरूरी है ।"


"तुम समझ नहीं पा रही कि शैतान का बेटा जिन्दा हो गया तो कैसा कहर बरपा देगा ।" सतपाल गुस्से से बोला----"इसी चाकू से जिन्दा होगा ।"



"मैं माफी चाहती हूं।” मोना चौधरी गंभीर दुढ़ता भरे स्वर में कह उठी…"इस वक्त मैं तुम लोगों की बात नहीँ मान सकती ।"


सतपाल ने मोना चौधरी से चाकू छीनना चाहा ।


मोना चौधरी फुर्ती से पीछे हट गई ।

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 12 Jan 2017 13:42



"ये क्या हो रहा है?” रंजन तिवारी ने पूछा।

" नहीं समझ में आ रहा तो चुपचाप बैठे रहो ।" मंगलू ने शात स्वर से कहा ।


मोना चौधरी सतपाल को घूरते हुए कह उठी।


"फिर चाकू छीनने की कोशिश मत करना ।"


सतपाल मिथलेश क्रोध से भरे बेबस-से लग रहे थे ।


" राधा कहां है?" मिथंलेश कह उठा ।


"आ जाएगी अभी ।"


" वहाँ सब खामोश थे, परंतु' उनमे तनाव भंरी खामोशी छाई हुंई थी।


यही वो ववत्त था जब चार आदमियों के बीच फंसी राधा ने भीतर प्रवेश किया ।


" मोना चौधरी।" राधा उसे देखते ही कह उठी…"ये देखो , ये मुझे तंग कर रहें हैं।"



मोना चौधरी का चेहरा कठोर पड़ गया ।


"इन्होंने तुम्हें कुछ कहा तो नहीं?”



"कहते तो इनकी टागें न तोडड देती ।" राधा ने मुह बनकर कहा ।



सतपाल और मिथलेश व्याकुल नजर आ रहे थे । दोनों की नजरें मिली, फिर मोना चौधरी के हाथ में दवे चाकू को देखा । वो चाकू छीन लेना चाहते थे , परंतु हालात इस हक में न थे ।।



मगंलू के अलावा वहां छ: लोग थे और इधर मोना चौधरी और पारसनाथ थे ।



आठ लोगों का मुकाबला करना उनके लिए असम्भव था ।
मिथलेश आहिस्ता से सरककर सतपाल के सास पहुचा ।



" सतपाल, शैतान के बेटे का चाकू हमारे हाथ से निकला जारहा है !"



"हां, बुरा हो रहा है !"



"ये बेवकूफ लोग नहीं जानते कि कितनी बडी गड़बड़ हो जाएगी अगर चाकू का इस्तेमाल शैतान के बेटे ने कर लिया ।"



"लेकिन हम कुछ नहीँ कर सकते।"



रंजन तिवारी और मंगलू उठ खड़े हुए थे ।


रंजन तिवारी के इशारे पर उन लोगों ने राधा को छोडा तो राधा मोना चौधरी की तरफ़ आ गई ।।



“चाकू दो ।" कहते हुए रंजन तिवारी ने रिवॉल्वर निकालकर हाथ मे ली ।


मोना चौधरी जानती थी कि इस वक्त कोई गड़बड़ करना खतरनाक होगा । ये छोटा-सा कमरा लाशों से भर जाएगा और वो भी बचने वाले नहीं । सबकी लाशें गिरेगी ।



मोनमना चौधरी !" सतपाल व्याकुल स्वर में कह उठा--“एक बार फिर सोच लो तुम !"


"मैं फैसला कर चुकी हूं ।" मोना चौधरी ने कहा और चाकू रंजन तिवारी की तरफ़ उछाल दिया ।



सतपाल के करीब से होकर वो चाकू निकला, लेकिन सतपाल चाकू पकडने में चूक गया ।


' रंज़न तिवारी ने चाकू थामा फिर पास खडे मंगलू को थमा दिया ।



मंगलू की आखें चमक उठी थी । उसने जल्दी से केस से चाकू बाहर निकाला और उसे उलट-पलटकर देखा ।



"यही है वो चाकू ।" मगंलू चाकू को केस में डालता, पीछे वाले कमेरे की तरफ वढा।



"कहां जा रहा है मंगलू?" एकाएक रंजन तिवारी ने पूछा।


"आता हूं।" मंगलू उस कमरे में प्रवेश कर गया ।



सव चुप-चाप से खड़े एक-दूसरे को देख रहे थे ।



फौरन ही मंगलू-वापस: लौटा । उसके हाथ में चौडी टेप का रोल था । सबके देखते-ही-देखते उसने पैट को खोलकर नीचे किया और घुटने से ऊपर टेप से चाकू लपेटकर रोल को एक तरफ उछाला और वापस पैंट बांधी ।
उसी पल मंगलू कै कानों में जंगला की फुसफुसाहट गुंजी ।


"तेरा काम हो गया मंगलू! निकल जा यहां से ।"


मंगलू ने रंजन तिवारी को देखकर कहा ।


"मैं जा रहा हूं।"


रंजन तिवारी सिर हिला दिया ।



मंगलू बाहर निकला तो तिवारी अपने साथियों से बोला ।


"चलो ।"



फिर देखते-ही-देखते वो भी बाहर निकल गए ।


वहां मोना चौधरी सतपाल, मिथलेश, पारसनाथ और राधा रह गए ।


"तुम वहुत गलत.....!" सतपाल ने कहना चाहा ।


परंतु मोना चौधरी ने उसकी बात सुनी ही नहीं और बाहर निकलती चली गई ।



सतपाल के होंठ र्भिच गए, मोना चौधरी को वहा से गया पाकर ।


" ये कहाँ गई ?" मिथलेश ने पारसनाथ को देखा ।


"मुझे क्या पता?" पारसनाथ ने कहा और राधा से बोला----" चलो भाभी तुम्हें घर छोड़ दूं।"



"छोडना क्या है ।" राधा ने कहा-“टैक्सी में बिठा दो, चली जाऊंगी, ब्यूटी पॉलंर भी जाना है, थ्रेडिंग करवानी है ।"


"तुम दोनों बाहर चलो ।" पारसनाथ ने कहा-"फलैट बंद करना ।"



सतपाल तौर मिथलेश का गुस्से से खून उबल रहा था ।


सिर्फ ये ही सोच रहे थे कि उनके अलावा हालात की गंभीरता को कोई नहीं समझ रहा कि चाकू मंगलू को वापस देकर कैसा गजब कर डाला है ।



"ये सब हो क्या रहा है?" राधा ने पारसनाथ को देखा--“क्यों भैया?"



"मोना चौधरी बताएगी ।" पारसनाथ ने कहा ।


"तुम क्यों नहीं बताते?" राधा बोली ।


"मुझे पूरी बात नहीं पता ।" पारसनाथ ने टालने वाले लहजे में कहा ।


"कोई बात नहीं, आधी बता दो । उन लोगों ने सिर्फ चाकू लेने के लिए, मेरे को बंधक बना लिया था?"
" हां !"



“तो उन्हें कैसे पता चला कि मैं मोना चौधरी की पहचान की हूं !"


"पता लगा लिया होगा ।"


" ऐसे कैसे पता लगा लिया…मैंने तो किसी को बताया नहीं ।"



सतपाल और मिथलेश बाहर निकल गए ।


" ये दोनों कौन थे?”


"मोना चौधरी की पहचान वाले थे । चलो यहां से ।"


दोनों बाहर आए । पारसनाथ फ्लैट का दरवाजा बंद कर रहा था कि राधा कह उठी।


"यह हमें घूरता है ।"


"कौन?" पारसनाथ पलटा।


तभी पारसनाथ की निगाह नंदराम पर पडी । जरा-सा दरवाजा खोले मुर्गे की तरह गर्दन बाहर निकले नंदराम राधा को देख रहा था ।

जब्र पारसनाथ को अपनी तरफ देखते पाया तो उसने फौरन गर्दन पीछे की और दरवाजा बंद कर लिया ।


"'कितने अजीब लोग रहते है यहाँ ।"’ राधा मुंह बनाकर कह उठी ।


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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 12 Jan 2017 13:43



"मंगलू ।" जंगला की फुसफूसाहट मगलू के कानों मे गूंजी …" अब तो तेरे को खुश होना चाहिए कि चाकू मिल गया ।"



"मैं खुश हूं ।" मंगलू के होंठ हिले ।


मगलू इस वक्त भीढ़-भरे फुटपाथ पर तेजी से आगे बढा जा रहा था ।।



"क्या तूने सोचा था कि चाकू मिल जाएगा !"



"मैंने ये सोचा था कि मैं चाकू लेकर रहूंगा ।"


"तात्रिक बेलीराम के इशारे पर कितनी आसार्नी से मिल गया । बेलीराम बहुत करामाती इंसान है ।"


"बताया था तुमने ।" मंगलू की नजरें हर तरफ जा रही थीं--“ अब मैंने कहां जाना है?"



"शैतान के बेटे से पूछकर आता हूं ।"


"तू तो कह रहा था कि शैतान का बेटा व्यस्त है ।"


" व्यस्त है, लेकिन अब हमारी बात भी जरूरी है । कहीं चाकू फिर से हाथ से निकल गया तो ?"


"ठीक है पूछ शैतान के बेटे से !"

मंगलू फुटपाथ पर आगे बढा जा रहा था ।


मोना चौधरी के फ्लैट से वो काफी दूर आ गया था । मोना चौधरी का उसे जरा भी डर नहीं था ।


ना ही खयाल था मोना चौधरी का । वो तो मगलू के दिमागं से निकल चुकी थी ।



ऐसे मंगलू कैसे सोच सकता था कि मोना चौधरी उसका पीछा कर रही है ।




आगे बढती मोना चौधरी की निगाह एकटक मंगलू पर थी । भीड़-भरे फुटपाथ पर वो मगलू से दस कदम पीछे थी । ऐसे में मंगलू पलटकर देखता तो भी मोना चौधरी नजर न आ पाती ।


वैसे भी चलती भीड़ मंगलू को इतना मोका ही कहां देने वाली थी कि वो पीछे देख सके ।



मौना चौधरी के चेहरे पर गंभीरता, भी थी और कठोरता भी ।।



तभी उसका मोबाइल बजा ।


मोना चौधरी फोन निकलकर बात की ।दुसरी तरफ पारसनाथ था ।



‘तुम कहां हो मोना चौधरी?" पारसनाथ की आवाज कानों में पड्री ।



"व्यस्त हूं ।"


" शायद तुम मंगलू के पीछे हो?"



"हां ।"



"खतरा हो जाएगा, अगर उसंने तुम्हें देख लिया । तुमने उससे . चाकू ले लिया तो वो पुन: राधा को पकड़ लेगे ।"



"राधा को तुम अपनी पत्नी सितारा के पास छोड़ दो ।"



"ठीक है ऐसा ही करता हूं । मुझें बताओ, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हू।"



“जरूरत पडने पर तुम्हें फोन करूगी पारसनाथ !" कहकर मोना चौधरी ने फोन बंद करके जेब मे डाला । आगे बढते उसकी निगाह बराबर मगलू पर थी । वो मगंलू का पीछा किसी हालत में नहीं. छोड़ना चाहती थी और उचित मौका मिलने पर उससे वो चाकू ले लेना चाहती थी ।


@@@@@@@@@@@@
जंगला की फुसफुसाहट मंगलू कें कानों में गूंजी ।


"मैं आ गया मंगलू ।"


"शेतान के बेटे से बात हुई?"


" हां,बो सच में बहुत व्यस्त है !"


"मेरे बारे में क्या कहा उसने ?"



"तुम्हें चाकू के साथ तांत्रिक बेलीराम के पास पहुचना होगा !"



"मुझे क्या पता कि बेलीराम किधर हैं जो !"



" मै हूं ना । मै बताऊंगा रास्ता…तू चिंता क्यों करता है?"


"ठीक है बता ।"


"बेलीराम इस शहर से दूर रहता है । तेरे को स्टेशन पहुचना है। वहा से ट्रेन पकड़नी है !"


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धड़.......धड़.....धड.... .ट्रेऩ पटरियों पर दौड रही थी । ट्रेन जब पटरी बदलती तो शोर एकाएक बढ़ जाता । ट्रेन क्रो चले आधा घंटा हो चुका था । मोना चौधरी ट्रेन में जहाँ बैठी थी, उससे दस फीट पर मंगलू बेठा था, पर मगलू की इस तरफ पीठ होने की वजह से वो मोना चौधरी की न देख पाया था । मगलू ने जब टिकट लो तो उसने टिकट देने वाले से पूछ लिया था कि नीली कमीज वाले व्यंक्ति ने कहां की टिकट ली और वहीं की टिकट उसने खुद ले ली थी ।



इस वक्त मोना चौधरी के चेहरे पर गंभीरता थी ।



उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि बो कुछ व्याकुल-सी है ।



मोना चौधरी ने फोन निकाला और सतपाल का फोन नम्बर मिलाने लगी ।


कुछ पलों तक दूसरी तरफ़ बेल होती रही, फिर सतपाल की आवाज कानों में पडी ।



"हैलो !"


" मै मोना चौधरी !"


सतपाल की तरफ से कोई आवाज न आई ।


"सतपाल ।।"



" तुमने गलत किया मोना चौधरी!"


" राधा की जिन्दगी बचानी ज़रूरी थ्री ।उन्होंने राधा को पकड लिया था । वो चाकू मांग रहे थे।"
"तुम नहीं जानती कि तुमने कितनों की जिन्दगी खतरे में डाल दी ! अगर भवतारा को : जीवन मिल गया तो वो इंसानों का खून पीने लगेगा । बहुत लोग बेमौत मरेंगे ।" सतपाल का गंभीर स्वर कानों में पड़ा ।



"मुझे भी इस बारे में चिंता है !"



"तुम चिंता' करके क्या कर सकती हो अब-कुछ भी नहीं ।"



"मैं इस वक्त ट्रेन में बैठी , मंगलू के पीछे हू ।"



"मंगलू के पीछे?" सतपाल चौंकता स्वर कानों में पड़ा ।



"हां ।"



"मंगलू किस जगह पर जा रहा है ट्रेन में बैठकर?” मोना चौधरी ने बताया ।



"ओह्न तो बो चाकू लेकर तांत्रिक बेलीराम के पास जा रहा है ।"


" उस ,जगह पर बेलीराम रहता है?"


" हां । तुम्हारा क्या इरादा है कि तुम ?"



"मैँ मंगलू से चाकू पाने की चेष्टा करूंगी । जहाँ मोका मिला वहां. . . !"



" यै खतरनाक होगा । शैतानी 'शक्तियां मंगलू की सहायता कर रही हैं !" सतपाल की व्याकुल. आवाज कानों में पडी ।



"तुम्हारा दिया धागा अभी भी मेरे गले में है ।" मोना चौधरी ने कहा ।



"वो धागा एक हद तक ही तुम्हें शैतानी शक्तियों से बचा सकता हैं। तुम अपने को खतरे में डाल लोगी ।"


"मंगलू से चाकू छीनना भी तो जरूरी है ।"


कुछ पलो के लिए फोन पर खामोशी रही ।


"इस बार चाकू हाथ लग गया तो फौरन. तुम्हें दे दूंगी ।" मोना चौधरी ने कहा ।



" चाकू हासिल करना अव आसान नहीं लगता ।"



"जो होगा सामने आ जाएगा ।"



"मैं भी यहाँ के लिए चल रहा हू । प्लेन से आता हूं । तुम्हें स्टेशन पर ही मिलूंगा । दो होंगे तो अच्छी तरह मंगलू का मुकाबला करके उससे चाकू लिया जा सकता है ।"



"मंगलू के लिए मैं अकेली ही..!"
" तुम ये क्यों भूल जाती हो कि मंगलू के आस-पास शैतानी शक्तियां भी हैं ।"


मोना चोधरी ने कुछ नहीं कहा ।



"स्टेशन पर मिलूंगा तुमसे ।" कहकर उधर से सतपाल ने फोन बदकर दिया था ।


मोना चौधरी ने मंगलू की तरफ देखा !"


अभी भी मंगलू की पीठ उसकी तरफ़ थी ।


ट्रेन तेजी से दौड्री जारही थी।



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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 12 Jan 2017 13:44



सतपाल ने मिथलेश को सारी बात बताईं ।


"शायद मोना चौधरी मंगलं से चाकू लेने में कामयाब न हो सके ।"


उसके होंठों से निकला ।



"तभी तो मैं वहीं जा रहा हूं !"


"मोना चौधरी ने चाकू उसके हवाले करके बहुत गलत काम किया ।" मिथलेश ने गहरी सांस ली ।



"जो हो गया, हमें उस पर ज्यादा नहीं सोचना चाहिए ।" सतपाल ने गंभीर स्वर में कहा…

-" हमें सिर्फ ये कोशिश करनी है कि अपने चाकू के सहारे भवतारा पुन जीवित न हो । इसके लिए वो चाकू हमें हासिल करना होगा । मोना चौधरी की ये समझदारी ही है कि के मगलू के पीछे है और हमे फोन किया, वरना हमे मगलू का पता ही न चलता कि बो कहां गया ।"



मिथलेश चुप-सा उसे देखता रहा 1


"में एयरपोर्ट जा रहा हूं । वहां के लिए घंटे-भर बाद एक प्लेन जाएगा ।" मिथलेश ने मोबाइल फोन निकाला और नम्बर मिलाने लगा ।


" किसे फोन कर रहे हो?"


"राजन को !"


" हो सकता है, उसके फोन की चाजिंग खत्म...!"


"वेल हो रही है ।" कान से लगाए मिथलेश कह उठा !!




फिर मिथलेश के कानों मे राजन का मद्धिम-सा स्वर पडा ।


"हेलो !"



" तुम कहाँ हो?" मिथलेश ने कहा।



" तात्रिक वेलीराम के डेरे पर हूं। साधु के वेष में ! मुझे रहने को झोंपड़ा मिल गया है और यहां पर बिजली भी है । फोन चार्ज कर सकता हूं ।" राजन की आवाज कानों में पडी ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by Kamini » 12 Jan 2017 13:53

Superb update KUNAL

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