खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete

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kunal
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:16

मोना चौधरी और सतपाल की नजरे मंदिर के गेट पर जमी थी । दिन के दस बज चुके थे । अभी तक न तो मंगलू दिखा था, न भवतारा ।


"क्या पता शैतान का बेटा गहरी नीद में हो ।" मोना चौधरी बोली ।।


"जो भी हो, हमें उनके बाहर निकलने का इंतजार करना चाहिए । मंगलू एक बार स्थिति बताने बाहर जा जाता तो ....!"



"मगंलू का बार-बार हमारी तरफ़ आना ठीक नहीं ।" मोना चौधरी कह उठी…"शैतान का बेटा, उसकी किसी हरकत पर शक कर गया तो ठीक न होगा । सच बात तो ये है कि सबसे ज्यादा खतरा मंगलू को ही है।"


सतपाल होंठ भिंचकर रह गया ।



" तुम. . . !" मोना चौधरी बोली-----" डर तो नहीं रहे?"



“डर ।।" सतपाल ने माथे पर बल डालकर मोना ,चौधरी को देखा-“किस बात का?"



"भवतारा पर चाकू से बार करने हैं तुम्हें ।"


“किसी शैतान पर बार करना मेरे लिए मामूली बात है । ऐसे काम मैं-करता ही रहता हूं।" सतपाल कड़वे ढंग से मुस्करा पडा ।



मोना चौधरी ने सिर हिलाया और दूसरी तरफ देखने लगी ।



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तब ग्यारह से ऊपर का वत्त हुआ था जब मंगलू और भवतारा मंदिर से बाहर निकले । दोनों ही नहाए--धोए बढिया कपड़े पहने हुए थे । भवतारा व्याह करने जो जा रहा था ।



मोना चौधरी और सतपाल सतर्क हो उठे ।


दोनों की आंखों में खतरनाक भाव मचल रहे थे । उन्होंने देखा मंगलू चलते-चलते लापरवाही से नजरे इधर-उधर दौडा रहा था, शायद उन्हें तलाश कर रहा था । वे दोनों सडक पर से आगे न गए, बल्कि मंदिर के आगे पुलिया के पास से ही कच्चे रास्ते पर नीचे उतर गए । वे दोनों विवाह स्थल पर जल्दी पहुचने के लिए छोटा रास्ता अपना रहे थे । . .



"तेयार हो?" मोना चौधरी खतरनाक स्वर में कह उठी ।


"हाँ ।" सतपाल का स्वर र्भिचा हुआ था ।



"हम थोडा-सा उधर से घूमकर चलते हैं, बीच रास्ते में जहाँ पेड हैं । उस जगह पर उसे घेरेगे ।" मोना चौधरी बोली ।



"जल्दी चलो।” '



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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:16

"आज तुम्हारी शादी है" । मंगलू मुस्कराकर कह उठा----“कैसा लग रहा है तुम्हें?”


"बहुत अच्छा!" भवतारा मुस्कराया----"मुझे इस बात की ज्यादा खुशी है कि मेरा व्याह कामिनी के साथ हो रहा है ।"


बाते करते मंगलू मोना चौधरी और सतपाल की तलाश मैं भी छिपी निगाह दौड़ा रहा था परंतु वे नजर नहीं आ रहे थे । मंगलू इस बात से परेशान हो उठा कि कही डरकर वे भाग तो नहीं गए ।



“कामिनी और तुम्हारी जोडी बहुत अच्छी लगती है ।" मंगलु बोला ।



" ये तुम कह रहे हो ?"


"हां, सच बात कही है मैँने।"



चलते-चलते भवतारा ने मंगलू के कंधे पर हाथ रखा और मुस्कराकर बोला ।



“तुम मेरे खास दोस्त हो । प्यारे दोस्त! "



" तुम भी वहुत अच्छे हो ।" मगलू मुस्कराया परंतु मन मे परेशानी थी कि मोना चौधरी और सतपाल किधऱ चले गए ।



"अब हमे अलग होना पडेगा ।"


" क्यों ?"



"मेरे पास अब कामिनी रहेगी । तुम नहीं रहोगे ।"



"तो मैं कहां जाऊंगा?"



"तात्रिक बेलीराम के पास चले जाना । वो तुम्हें शिक्षा देगा । तुम बहुत जल्द शैतानी ताकतो को अपना गुलाम वना लोगे ।"


बातों के दौरान वे आगे बढते जा रहे थे ।



" वो तो ठीक है, परंतु तुमने अभी तक मुझे पैसा नहीं दिया । तुमने वादा किया था कि मुझें वहुत सारा पैसा दोगे ।"



"क्या करोगे तुम पैसे का?”



"फिर वो ही बात । मैं कुछ भी करूं । तुम मुझे पैसा दो । मै......!"



" तुम बेलीराम के पास शिक्षा लेने चले जाओगे आज़ । वहां तुम्हें पैसे कौ जरूरत ही नहीं ।"



" तुम ऐसी बाते कहकर मुझें बहला देते हो.....!"



एका एक भवतारा ठिठक गया ।


उसकी आँखें सिकुड गई । माथे पर बल पड गये ।।।

धीरे धीरे उसके होंठ भी मिलने लगे । शरीर मे
क्रोध से भरा तनाव आने लगा ।



दस कदम आगे पेड़ के तने के पीछे से निकलकर मोना चौधरी सामने आ खडी हुई थी ।


मंगलू ने मोना चौधरी को देखा और उसी पल वो घीरे धीरे एक तरफ सरककर भवतारा से दूर होने लगा ।


खामोशी के कई लम्बे पल इसी तरह बीत गए ।


मोना चीथरी और भवतारा एक-दुसरे को देखते रहे ।



भवतारा की गर्दन घूमी और दूर होते मंगलू को देखकर गुस्से बोला ।



" तो तुमने मोना चौधरी को मेरा ठिकाना बताया?" स्वर में धधकता गुस्सा था ।




"'मैं क्यों बताऊंगा ।" अव तक मंगलू पांच-छ: कदम पीछे हो चुका था और होता जा रहा था।


"इस रास्ते पर मोना चौधरी का आ जाना ये ही जाहिर करता है कि इसे तुम लाए । तुमने मुझे धोखा दिया । मैं तुम्हें दोस्त समझता रहा हूं हमेशा ।"


जाने क्यों मंगलू के चेहरे पर कड़वी मुस्कान फैल गई ।


"तुम किसी के नहीं हो सकते ।" मंगलू बोला ।

"क्या बकवास कर रहे हो?”


"तुम किसी के दोस्त नहीं हो सकते । तुम किसी के पति नहीं बन सकतें । तुम राक्षस हो, खून पीने वाले इंसान । दरिन्दे हो तुम । मैं घृणा करता दूंगी । मैंने तुम्हें कभी अपना दोस्त नहीं माना । मैंने हमेशा से नफरत की है । तुम मुझे कभी भी अच्छे नहीं लगे । खुद को मेरा दोस्त कहते हो और मेरी माशूका से व्याह रचाने के लिए मुझे साथ ले जा रहे हो । तुम. .. . . शैतान हो । सच में शैतान हो । तुम्हें क्या मालूम कि दोसा क्या होता है और पत्नी क्या होती है ।" मंगलू कड़वे स्वर में कहता जा रहा था…“तुमने मुझे कहा कि मेरा काम करो, मैं तुम्हें दौलत दूगा । मैंने तुम्हारा काम कर दिया । तुमने दौलत ही नहीं दी । उपर से कामिनी को भी मुझसे दूर कर दिया, खुद ब्याह करने जा रहे हो उससे, तुम्हारी दोस्ती का तो जवाब नहीं ।"


" धोखेबाज ।" दांत किटकिता उठा भवतारा-"गलती मेरी ही थी, जो मैंने अपनी ताकती को तुम पर नजर रंरव्रने को नहीं कहा । कहा होता तो तेरी एक एक हरकत की जानकारी मुझे मिलती रहती । मै तुझे अपना दोस्त मानता रहा और .....!"



" लेकिन मैंने तो तेरे को कभी अपना दोस्त नही माना ? खून पीने बाले इंसान !"



" मै तेरे को नही छोडूगां , मार दूगा तुझे....मै...!"


" तू मूझे नही पकड़ पाएगा मै भाग जाऊँगा यहां से , तू मूझे नही मार सकता !" मगंलू गुर्रा उठा ।।



भवतारा के होठो से गुर्राहट निकली और मोना चौधरी को देखने लगा ।।


मोना चौधरी होट भिंचे एकटक मगंलू को देख रही थी ।।



" तू क्या चाहती है मुझसे ?" भवतारा दांत किटकिटा उठा ।



" तेरी मौत !"



"तू मारेगी मुझे..... मुझे शैतान के बेटे को ।" भवतारा हंसा मौत भरे ढंग से-----" देख, तू मरेगी ..... अब .....!"



"तू इंसानी भेडिया है, जो इंसानों का खून पीता है ! नर पिशाच है तू ।" मोना चौधरी तेज स्वर में कह उठी…“तेरे को मारकर मुझे बहुत खुशी होगी कि मैंने इंसानी भेड्रिए से मासूम लोगों को मुक्ति दिलाई !"


यहीं वो पल थे जबकि भवतारा के पीछे की तरफ से, पेड के मोटे तने के पीछे से चाकू थामे सतपाल निकला और चीते की तरंहे दबे पाव भवतारा की पीठ की तरफ़ बढ़ने लगा ।।



मंगलू ने सतपाल को देखा तो चौका ।।


जबकि मोना चौधरी की निगाह भवतारा पर ही रही ।।



वो जानती थी कि इस वक्त अगर उसकी निगाह पीछे सतपाल पर गई तो शैतान का बेटा भांप जाएगा कि उसके पीछे कुछ गड़बड है !!



मोना चौधरी पुनः कह उठी ।।



“तेरी शैतानी ताकते रात को तेरा साथ देती है, दिन मैं सूर्य की रोशनी में तू कमजोर हो जाता है ।"


"तेरी यहीं गलती तुझे मौत के दरवाजे पर ले आई !" भवतारां क्रूरता-भरे ढंग से मुस्करा पड़ा…“मैं अभी भी.....!"




यही वो पल थे कि पीछे पहुच चुके सतपाल ने चाकू वाला हाथा उठाया और पूरी ताकत से उसके कधूं पर दे मारा ।



भवतारा ने तो, सपने में भी नही सोचा था कि ऐसा कुछ होगा।।।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:17

चाकू उसके कंधे में घंसता चला गया' । भवतारा के मस्तिष्क में तीव्र झटका लगा । उसका शरीर बेहद मद्धिम ढंग से ऐसे हिला जैसे किसी पहाड मे कम्पन आने पर हिलता है । अगले ही पल भवतारा के चेहरे के पर भाव वहशी होने लगे ।



तभी, उसके कंधे में धंसे चाकू को सतपाल ने निकालने की चेष्टा की ।


भवतारा फुर्ती से पीछे पलटा । अब सतपाल सामने था ।



दोनों की नजरे मिली । सतपाल सकपका सा उठा । चाकू नहीं निकाल पाया था वो ।


अगर निकाल लेता तो अब पेट में घुसेड़ सकता था ।


"पीछे से बार करता है कमीने!" कहते हुए भवतारा ने दोनों हाथों से गर्दन पकड ली सतपाल की । सतपाल छटपटा उठा । गर्दन छुडाने की चेष्टा की, परंतु दोनों हाथ लोहे के शिकंजे जैसे थे । दबाव बढने लगा शिकंजे का, सतपाल का दम घुटने लगा । भवतारा का चेहरा क्रोध से वहशी-दर-वहशी होता जा रहा था । दुर खडा मंगलू घबराया-सा ये सब देख रहा था ।


तभी मोना चौधरी चौधरी दौडी और उछाल भरी ।

उसका शरीर हवा में उछला और दोनों पैर भवतारा के कंधे, पर जा टिके, मात्र पल-भर के लिए । इसके साथ ही वो फुर्ती से झुकी और कधें में धंसे चाकू को खींचकर नीचे कूद गई ।


सतपाल का चेहरा दम घुटने के वजह से टमाटर की तरह लाल हो रहा था । शायद कुछ ही क्षणों में उसका दम भी निकल जाता, परंतु तभी मोना चौधरी चाकू के ताबड्र तोड़ वार भवतारा के शरीर पर करने लगी ।


एक. , दो . .तीन.. .चार. . पांच. .छः....सात. ....आठ. ..नौ ,दस. ...ग्यारह ।


मोना चौधरी ठिठकी और हांफने लगी । इन बारों की वजह से भवतारा के हाथों की पकड सतपाल की गर्दन पर से ढीली हो गई, परंतु हाथ तब भी गर्दन से न हटे । मोना चौधरी ने जोरदार कैरेट चाप उसकी बांह पर मारी । तब जाकर भवतारा के हाथ उसके गले से हटे । सतपाल बेजान होकर नीचे गिरा और लगभग टूट चुकी सांसो को ठीक करने की चेष्टा करने लगा । उसका चेहरा अभी तक लाल सा हुआ पडा था । इतने में ही मोना चौधरी भांप चुकी थी कि शैतान के के शरीर में अथाह शक्ति है । मोना चौधरी पुन; चाकू का वार उसकी कमर में मैं किया और चाकू बाहर खींच लिया ।

भवतारा मोना चौधरी की तरफ पलटा ।



"तेरे इन वारो से मेरा कुछ न विगडेगा मोना चौधरी! शाम ढलते ही, मेरी शक्तियां मेरे शंरीर को फिर स्वस्थ कर देंगी, परंतु तू अब नहीं
बचेगी, तुम सब मरोगे ।" भवतारा गुर्रा उठा ।


"ये चाकू देख रहा है !" मोना चौधरी ने खून से सना चाकू उसके सामने लंहराया----" ये तेरा ही है !"


भवतारा ने चाकू को देखा, फिर गर्दन घुमाकर मंगलू को देखा ।


मगंलू ने उसे अपनी तरफ देखते पाकर घबराहट में गले में फंसी थूक सटकी । उसी पल मोना चौधरी ने उसके पेट से चाकू घूसेड़ा औऱ उसे घुमाते हुए बाहर निकाला, फिर पीछे हटी ।


भवतारा के होंठों से गुर्राहट निकली, वो गला फाढ़कर चीखते हुए हैं मोना चौधरी की तरफ दोड़ा । मोना चौधरी को आशा न थी कि शैतान का बेटा ऐसा कुछ करेगा । मोना चौधरी ने बचने की चेष्टा की । वो कुछ बची और कुछ नहीं । भवतारा दोनों हाथों में उसका गला थाम लेना चाहता था । बचने की चेष्टा में मोना चौधरी की बांह ही हाथ आ सकी भवतारा के ।


मोना चौधरी ने चाकू वाला हाथ घुमाया ।


चाकू का फल गाल में जा धंसा । हाथ वापस खीचा तो चाकू बाहर निकल आया । भवतारा की आंखे गुस्से से लाल हो रही थी ।



भवतारा ने जोरों का घूसा मोना चौधरी के चेहरे पर मारा ।


मोना चौधरी के होंठों से तेज चीख निकली । वो गिरने लगी, पंरतु भवतारा ने उसकी बांह न छोडी । मोना चौधरी के होठो से जोरों की चीख निकल गई ।



भवतारा ने उसके चाकू बाले हाथ पर झपट्टा मारा ।


मोना चौधरी ने चाकू वाला हाथ पीछे कर लिया । घूसे की वजह से उसके होंठों से खून निकल रहा था । भवतारा ने घुटना मोना-चौधरी के पेटं मेँ मारा ।।


मोना चौधरी को ऐसा लगा जेसे कोई खम्बा पेट में आ धंसा हो । गला फाड़कर वो चीखी और दोहरी…होकर नीचे बैठती ही चली गई ।



भवतारा ने उसकी बांह छोडी और उसके हाथ में दवे अपने चाकू पर झपटा । मोना चौधरी ने चाकू बाला हाथ पीछे कर लिया ।


किसी भी हाल में चाकू को भवतारा के पास न जाने देना चाहती थी ।।


चेहरे पर लगे घूसे और पेट में लगे घुटने ने, मोना चौधरी की जान निकाल दी थी । उसे पूरी तरह महसूस हो चुका था कि दिन मे भी शैतान का बेटा अथाह शारीरिक शक्ति का मालिक है , आम लोगों की तरह साधारण-सी ताकत नहीं है उसमे ।


इससे पहले कि भवतारा पुन: चाकू छीनने की चेष्टा करता, मोना चौधरी ने चाकू को दूर फेक दिया । सतपाल को देखा वो अभी तक उसी जगह पर बैठा अपने क्रो ठीक करने की चेष्टा में हांफ़ रहा था । अभी वो किसी काबिल नही था ।


भवतारा मोना चौधरी पर भारी पड़ रहा था , मोना चौधरी को अवतारा का मुकाबला करना कठिन लगने लगा था ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:17

मोना चौधरी के चाकू फेंकते हीं भवतारा चाकू की तरफ जाने लगा कि मोना चौधरी ने उसकी टागं पकड़ी और पूरी ताकत से झटका दिया । भवतारा के पैर उखड गए औऱ वो सीधा नीचें जा गिरा ।।


मोना चौधरी जानती थी कि ये खेल ज्यादा लम्बा चलने वाला नहीं है , शैतान के बेटे का कोई भी वार, उस पर कामयाब हो सकता है ।

सतपाल सलामत होता तो कुछ वचाब हो जाता, परंतु इस वत्त भवतारा के मुकाबले पर वो अकेली थी ।


मोना चौधरी ने मंगलू की तरफ देखा कि शायद वो कोई सहायता कर सके, परंतु उधर निगाह पड़ते ही मोना चौधरी चौकी ।


मंगलू सहमा सा खड़ा इधर ही देख रहा था और उसके पीछे तांत्रिक मोहम्मद खडा था । एकाएक मोना चौधरी ने तांत्रिक मोहम्मद के शरीर को धुएं में परिवर्तित होते देखा ।


उसके देखते-ही-देखते पलो में वो धूंएं की लकीर वन गया और वो लकीर मंगलू के सिर में प्रवेश करती चली गई । मोना चौधरी ने अगले ही पल मंगलू को उस तरफ भागते देखा, जिधर उसने चाकू फेका था ।


वो समझ गई कि तांत्रिक मोहम्मद उसकी सहायता को आ पहुंचा है ।

मगंलू के माध्यम से वो सहायता करने जा रहा है । ये बात महसूस करते ही मोधा चौधरी की हिम्मत कई गुणा बढ गई ।


अब इस दरिन्दे का मुकाबला करने के लिए बो अकेली न थी ।


भवतारा गिरते ही गुर्राकर पलटा । दोनों की नजरे मिली, परंतु इस वार मोना चौधरी हिम्मत से मुस्कराई ।


उसकी मुस्कान ने भवतारा को बूरी तरह तड़पा दिया और उठते ही मोना पर झपटा ।


उसे अपने से दूर करने के लिए मोना चौधरी ने जूते की ठोकर उसकी छाती पर मारी ।

ठोकर का कोई खास फर्क न पडा शैतान के बेटे पर । इतना ही हुआ कि उस पर गिरते-गिरते उसकी बगल में आ गिरा वो, परं फौरन ही करवट ली और अगले ही पल उसके हाथ मोना चौधरी की गर्दन पर जा टिके ।


मोना चौधरी ने अपनी गर्दन आजाद करानी चाही, परंतु असफल रही । उसके उपर शैतान का बेटा, उसका गता दबाता जा रहा था । उसका दम घुटने लगा ।


चेहरा लाल-सा होने लगा था । चंद पलों बाद ही आंखों के सामने अंधेरा-सा छाने लगा ।


अपने ऊपर झुके भवतारा का वहशी चेहरा उसे चार-चार चेहरों में नजर आने लगा । उसी पल मोना चौधरी को चार-चार चाकू दिखे और तो चारों चाकू अपने ऊपर शैतान के बेटे के चारों सिरों में प्रवेश करते दिखे ।


सब कुछ धुंधला अस्पष्ट-सा दिखाई दे रहा था उसे । चाकू सिर में प्रवेश करते ही भवतारा तड़प उठा ।


मंगलू ने चाकू तीव्र से उसके सिर से निकाला और पागलों की तरह उसके जिस्म के जरें-जरें पर वार करने लगा ।


इस बीच उसने जोरदार ठोकर मारी भवतारा को तो भवतारा नीचे लुढक गया । मोना चौधरी की गर्दन बची और वो पस्त-सी नीचे पडी लम्बी-लम्बी सांसे लेने लगी ।


मंगलू का हाथ था कि रुक न रहा था । शैतान के बेटे भवतारा का शरीर क्षत…बिक्षिप्त सा होता जा रहा था ।


इतने वारों के पश्चात भी इस शैतान के जिस्म से खून की एक बूंद न निकली थी । खून निकलता भी कैसे ।


उसके अपने शरीर मे खून था ही नही ।।

उसका शरीर खून से नहीं, शैतानी ताकतों से चलता था ।


तभी मोना चौधरी के कानों सतपाल की आवाज पड़ने लगी , मोना चौधरी ने कठिनता से आंखें खोलकर सतपाल को देखा, जो आत्नथी-षालथी मारे बैठा, मंत्र का उच्चारण कर रहा था ।


फिर मंगलू पर निगाह गई, जो कि भवतारा को संभलने का मोका दिए बिना वार-पर-वार करता जा रहा था ।


उसके वारों से शैतान का बेटा खुद को संभाल न पा रह्य था।



" मगंलू.......!" भवतारा के होंठों से थका-सा स्वर निकला ।


मंगलू ठिठका और गुर्राकर बोला ।


" मैं मंगलू नही हूं शैतान के बेटे?" मंगलू के होंठों से तांत्रिक मोहम्मद, की आवाज निकली ।


"ओह.....तू.... .मोहम्मद ।।" भवतारा गहरी-गहरी सांस लेता बोला ।


" हां …मैं।।"



" तू क्यों बीच में आया है तेरी-मेरी क्या दुश्मनी थी, जौ. ..?"



" मेरा धागा तोड़कर मेरी शक्तियों से भरे धागे को तोडने का अंजाम भी अब तेरे को भुगतना पडेगा ।"


"जंगला ने तोड़ा था वो ?"


"एक ही बात है । वो तेरा ही सेवक है । क्या तूने उसको मेरा धागा तोड़ने की सजा दी ? नहीं दी । अपंनी करनी तो तेरे को भुगतनी पडेगी ! बेशक ज्यादा ताकतवर सही, पर तू बेवकूफ़ है, धरती पर आने केलिए ये वक्त उचित था ही नही , इंसानों का खून पीने की लालसा की वजह से तू धरती पर मौजूद शरीर में आ बसा तेरे को वापस जाना ही होगा । मंगलू को माध्यम बनाकर तेरी जिंदगी खत्म कर रहा हूं । तुझे वापस जाना ही होगा । मैं तेरे को वापस भेजे बिना मानूंगा नही शैतान के बेटे!"


इसके साथ ही मंगलू ने नृशंस तरीके से भवतारा के शरीर पर वार करने शुरू कर दिए ।


शैतान के बेटे का शरीर इस हद तक कट चुका था चाकू के वारों से कि उसके शरीर के भीतरी अंग भी नजर आने लगे थे ।।


मंगलू का हाथ रुक नहीं रहा था ।


भवतारा नीचे पड़ा अब कराहने लगा था ।


उधर सतप्रालं के होंठों से निकलने वाले मंत्र बराबर वातावरण में गूंज रहे थे । उसकी गूजती आबाज … जैसे वातावरण का हिस्सा बन गई हो । मोना चौधरी संभल चुकी थी ।


उसकी सांसें अब संयत थी । उठकर वो पीछे को हो गई थी मंगलू को मशीनी गति से शैतान के बेटे पर वार करते देख रही थी । भवतारा का शरीर अब कट-फटकर टुकडों के रूप में इधर-उधर लटकने लगा था । भवतारा की हिम्मत अब खत्म होती जा रही थी । ,,

एकाएक सतपाल की मंत्रों से भरी आबाज ठहर गई ।।

उसने अपना काम पूरा कर दिया था । इसी पल कोई काली-सी परछाईं, भवतारा के शरीर मर'आ ठहरी ।


चाकू का वार करते करते मंगलू का हाथ रुका और वो पीछे हटता चला गया । साथ ही बोला ।


" देख ले शैतान । अपने बेटे का हाल देख़ ले । तूने इसको ठीक से शैतानी धर्म का पाठ पढाया नहीं ।"



ज़वाब में खामोशी छाई रही ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:19

भवतारा उखडी उखड्री सांसों से हिला ।



उसने आंखें खोली और आसमान की तरफ देखा ।



"प,.पि. .पि...ता .पितामह....!" भवतारा के होंठों से निक्रला'।



"मैं तेरे को ही _लेने आया हूं । चल मेरे साथ, वापस चल ।“



"म.. मंगलू ने मुझे धोखा । वो..बो..।"



"कोई किसी को धोखा नहीं देता । सब कर्मो का फेर है । मैंने तेरे को कितना मना किया था कि तेरा ये वक्त धरती पर जाने के लिए ठीक नही है, परंतु तू मेरे से विद्रोह करके धरती पर आ गया. । तेरे को गुरुदेव ने कितना समझाया कि औरत का सामीप्य तेरे हक में बुरा है, कामिनी को तू मगंलू के हवाले कऱ दे, .परं ये बात भी तूने नही मानी । अगर कामिनी मंगलू को मिल जाती तो ये बुरां-वत्त न देखना पड़ता । तूने घोर गल्ती की !"


"ओह ।। मैं भटक गया था ।" भवतारा के होंठों से क्षीण-सा स्वर निकला---"मेरा......मेरा क्या नुकसान हुआ पितामह?"


"तेरा शरीर पूरी तरह नष्ट हो चुका है । इस शरीर का इस्तेमाल तू कभी न कर सकेगा । तू धरती पर तो आ सकेगा, परंतु किसी दूसरे के शरीर मे । तेरे शरीऱ का नुकसान हुआ है भवतारा ।।"



"ओह । बहुत बुरा हुआ !"


" चल, मेरा हाथ पकड़, वापस चल अपनी दुनिया में ।"



फिर देखते-देखते भवतारा के शरीर में होती हरकत थम गई । वो काली परछाई भी एकाएक गायब हो गई ।



कई कदम दूर बैठे सतपाल के चेहरे पऱ प्रसन्नता की लहर दौड़ गई ।


बो खड़े होते हुए बोलां।


" हम जीत गए । शैतान के बेटे पर हमने विजय पा ली । उसे वापस शैतानलोक भेज दिया ।"


मंगलू ने मुस्कराकर सतपाल को देखा ।
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