खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete

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kunal
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:10

एकाएक भवतारा के शरीर में ऐठन ने उछाल मारी ।


भवतारा फौरन सतर्क हो गया । वो उठा और वेहद शांत स्वर में कह उठा ।


"अब जाओं कामिनी, वक्त वहुत हो गया है, तुम्हारे माता-पिता इंतजार कर रहे होंगे ।"

"ये अचानक तुम्हें क्या हो गया ?" कामिनी ने-भवतारा को देखा । बहुत जरूरी काम याद आ गया है । जाना होगा मुझे ।" भवतारा ने मुस्कराने की चेष्टा की ।


“तुमने तो मुझे चाय भी नहीं मिलाई ।" कामिनी हंसी-“भूल गए ।"


" हां ! भूल ही गया, कल पिलाऊगा, अब तुम जाओ ।" भवतारा ने गंभीर स्वर में कहा ।



" आज रात तुम हमारे यहां खाना खाओ ।"


"तुम जाओ, मुझे जल्दी जाना है ।"


"ठीक है, तुम मुझे भगाना चाहते हो तो चली जाती दूंगी। कल तो मिलोगे ना !"

" हां !"


" कब ?"




"आज के वत्त ही-तुम्हारे पास आऊंगा ।"


"पानी पूरी भी खिलाओगे?"


भवतारा के शरीर में पुन: ऐठन उठी । उसके भीतर छिपा शैतान दरिन्दा जैसे बाहर आने को तेयार था !!


"चली जाओ, मुझे देर हो रही है ।" भवतारा के लहजे में इस बार कुछ खुरदरापन उभरा और आगे बढकर उसने बाहर जाने का रास्ता खोला ।।


प्यार में डूबी कामिनी ने उसके खुरदरे स्वर पर ध्याध न दिया और बाहर निकल गई ।


भवतारा ने दरवाजा बंद किया और लम्बी सास ली ।। अब वो स्वयं भी शिकार के लिए बाहर चला जाना चाहता था ।



उसी पल वहां मद्धिम-स्री आवाज उभरी ।



"भवतारा !"



"ओह गुरुदेव!" भवतारा के होंठों से निकला ।



"आज कामिनी बच गई । वो चली गई, वरना कुछ उर देर होने पर बो तेरा भोजन वन सकती थी !"



"वक्त का ध्यान नहीं रहा मुझे ।"



"शादी के बाद भी एक दिन ऐसा अएगा कि तेरे को वक्त का ध्यान नहीं रहेगा और कामिनी तेरी खून की प्यास वुझाएगी ।"


भवतारा के चेहरे पर कटोरता आ गई।


" ऐसा कभी नहीं होगा ।"



" ऐसा होगा भवतारा, अवश्य होगा । एक दिन कामिनी के खून से ही तू अपनी प्यास बुझाएगा ।"


" ऐसी फाते करके आप मुझे कीमिनी से दुर कर देना चाहते है !! भवतारा ने तीखे स्वर में कहा ।


" मैंने तेरे को हकीकत का नजारा करवा रहा हुँ।"


"ये झूठी हकीकत है ।"



"तेरे इनकार करने से सच, झुठ तो नहीं बन जाएगा भवतारा !"


गुरूदेव की आवाज उसके कानों पड्री ।


भवतारा के दांत भिंच गए ।

"मेरे भोजन का समृय हो रहा है 'गुरुदेव, !" भवतारा के होंठो है से गुर्राहट निकली !



"में जानता हू कि अभी तू सब्र रख सकता है । कुछ वक्त यूं ही बिता सकता है ।"


"क्या आप कोई बात करना चाहते हैं?"



" हां !"



"बात कल भी हो सकती है ।"



"मैं अभी करना चाहता दूंगी। मेरे पास इतना वक्त नहीं कि बार-बार तेरे पास आ सकू । मैं तो कब से इस इंतजार में खडा था कि कामिनी तेरे पास से जाए तो तेरे से बात करू ।" गुरुदेव की आवाज बेहद शति थी ।


"बात कहिए ।"



“कामिनी को छोड दे ।”


"फिर वहीँ बात ।" भवतारा और भी गुस्से से भर उठा ।


"तू नहीँ मानेगा तो मुझें दोबारा ही बात करने की जरूरत पडेगी । तू पहले मान जाता तो दोबारा क्यों आता?"



"आप चले जाइए।"



"बात करके चला जाऊंगा और दोबारा तेरे पास आऊंगा भी नहीं । तब तू जैसा करेगा, वेसा ही भरेगा ।"



"कामिनी मेरी जिन्दगी है ।"



" ये तेरे को लगता है, लेकिन कभी भी कामिनी तेरी मौत बन सकती है, क्योंकि तीन सौ साल की उम्र तक तेरे लिए स्त्री का संसर्ग है ही नहीं । शैतानी धर्म की परंपरा के खिलाफ मत चल भवतारा! "



"अभी मेरी उम्र कितनी है?"



"दो सौ नब्बे बरस ! स्त्री के लिए तेरे को दस बरस का इंतजार करना होगा ।"



"इसका मतलब कि दस बरस के लिए मैं कामिनी को अपने से दूर कर दू ।"



"ये ही मैं कहना चाहता हूं जो वस्तु ग्रहों में न हो, उसे पाने की चेष्टा करना भूर्खता है ।"



" आपने तो मुझे धर्मसंकट में डाल दिया है ।"
" इसी वक्त से अपने मन से कामिनी को दूर कर दे । बुरे वक्त का पता नहीं कब आ जाए । स्त्री तेरे पास आएगी तो तेरे ग्रह विपरीत दिशा में भड़केंगे । आज तू दिन-भर कामिनी के साथ रहा ये बात तेरे ग्रहों पर असर डालेगी। कुछ भी हो सकता है।"


भवतारा खामोश रहा ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:10

"मैं दोबारा तेरे को समझाने कभी न आता, परंतु तैरे पिता ने मज़बूर किया कि तुम्हें पुन: समझाऊ ।"



" वो क्यों नहीं आए !"



"अभी धरंती पर उनका आना सम्भव नहीं । र्वो सबसे वड़े शैतान है और शैतानी धर्म का पूरी तरहे सम्मान करते हैं ।"



"गुरुदेव-कोई रास्ता निकालिए कि कामिनी को मैं अपना सकू ।"



"अपने भले की, बात सुनना चाहता है !"



"हाँ ।"



“कामिनी को मंगलू के हवाले कर दो । वो मंगलू है लायक हैं, तू अपने को स्त्री से दुर कर ले ।"




“मेरा दिल तोड़ने वाली बात कह रहैं है आप !" भवतारा तड़पं उठा ।



"अगर तूने मेरी बात नहीं मांनी तो जो नुकसान होगा उसकी जिम्मेदारी तेरे पर ही आएगी !"


"क्या नुकसान होगा ?"



" मैं भी नहीं जानता भवतारा, लेकिन इतना सच है कि स्त्री का करीब पाते ही तू नुकसान में धिर जाएगा । अभी भी सब ठीक हो सकता है, अगर तू कामिनी की इच्छा को अपने मन से निकाल दे ?" गुरूदेव की आवाज कानों में पडी ।



"इससे वहुत कष्ट होगा मुझे !"



"बड़ा कष्ट न हो, इसलिए छोटा कष्ट खुशी-खुशी सह ले । तेरे को समझाकर मैंने अपना फर्ज पूरा किया ।"


भवतारा खामोश रहा ।



"मंगलू मंदिर में आ रहा है, उसे कह दे कि कामिनी उसकी है तो वो खुश हो जाएगा तू भी नुकसान से बच जाएगा । मैं जा रहा हूं , अब नहीं आऊंगा तेरे को समझाने ।" इसके साथ ही गुरुदेव की आवाज आनी बंद हो गई ।

भवतारा होंठ भीचे खड़ा रहा ।


चेहरे पर परेशनी नाच रही थी ।


सच बात तो ये थी कि वो समझ नहीं पा रहा था, कि गुरुदेव की बात माने या दिल की बात माने?


कामिनी कै अपने से दूर करने की बात सोचकर ही उसका दिल डूबने लगता था ।




कहाँ वो अभी सोच रहा था कि परसों कामिनी से शादी करेगा । कहाँ अब मंन में ये चल रहा था कि कामिनी को हमेशा के लिए अपने से दूर करें या नहीं?



तभी सामने की दीवार एक तरफ़ सरकी और मंगलूं ने प्रवेश किया । भवतारा को सामने देखते ही ठिठका और सामान्य स्वर में कह उठा ।


यहाँ देखकर मुझे अजीब-सा लग रहा है । बाहर तो कब का अंधेरा हो चुका है ।। मैने सोचा तुम यहां नही होगे !"


भवतारा के शरीर में ऐठन उठी । अपने पर काबू पाया उसने ।



" जाऩे ही वाला था ।” भवतारा ने मुस्कराकर कहा…"तुम चलोगे साथ मे ?"



" आज तो मैं वहुत थक गया हूँ।" मंगलू गहरी सांस लेकर बोला---" कल अवश्य तुम्हारे साथ चलूंगा ।"



“तुम कल भी मेरे साथ नहीं गए?"



" कल से पक्का जाया करूंगा, आज सारा दिनं घूमता रहा ।" मंगलू मुस्कराया --- " पहले तुम्हारे साथ घूमा करता था, परंतु अब
तुमने दिन का वक्त कामिनी के साथ बिताना शुरू कर दिया तो मैँ अकेला क्या करूं, इसलिए दिन-भर घूमता रहा ।"


भवतारा मुस्कराया ।



“तुमने आने में देर करदी ।"



" देर ----- मै समझा नही ?"


"कुछ देर पहले आ जाते तो कामिनी से तुम्हारी मुलाकात हो जाती !" भवतारा ने हंसकर कहा ।



"कामिनी यहाँ आई थी?" मंगलू के होंठों से निकला ।।



"वै यहीं थी दिन भर ।"


भवतारा को देखता रहा ।



" परसो हम व्याह कर रहे हैं ।"



" बधाई हो ।" मगलू चेहरे पर जबरन मुस्कान लाया ।


" सुनकर तुम्हें अच्छा तो नहीं लगा होगा?"


"मुझें बुरा क्यों लगेगा?" मंगलू ने लापरवाही से कहा---तुम राजी, कामिनी राजी, किर तो शादी हो ही जानी चाहिए ।"


" तुम आओगे शादी में?"


" हां, क्यों नहीं आऊंगा।।” मंगलू मुस्कराया----"शादी की सारी तैयारियां मैं ही तो करूंगा ।"



भवतारा के शरीर में ऐठन-भी उठी ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:11

"मैं बाहर जा रहा हूँ !" अवतारा ने कहा और दीवार की तरफ वढ़ गया । मंगलू उसे देखता रहा ।


खूंटी का इस्तेमाल करके, भवतारा बाहर निकला और दीवार अपनी जगह पर आ गई । मगलू दीवार को देखता रहा।



" कामिनी से परसों व्याह करेगा भवतारा?" बहुत बुरा लगा था मंगलू को ये सुनकर, परंतु वो कंर भी क्या सकता था । उन्हें रोक, तो नहीं सकता था, लेकिन एक कोशिश कर सकता था । मोना चौधरी औरे सतपाल का साथ देकर भवतारा को खत्म करने की चेष्टा तो कर सकता था । इसके लिए उन दोनों को भवतारा के उस चाकू की ज़रूरत थी । मंगलू तय कर चुका था कि ये काम करने के बाद वो यहाँ से भाग जाएगा, बेशक भवतारा मेरे या न मरे योंकि वो वच गया तो समझ जाएगा कि उसने ही गड़बड़ की है, इसलिए उसकी जान ले लेगा । मंगलू को शैतान के बेटे का चाकू तलाश करना होगा ।




वो जानता था कि अब भवतारा आधी रात से पहले नहीं लौटेगा । चाकू तलाश करने का ये सबसे बेहतरीन वक्त है और मगतू चाकू की तलाश में लग गया । दिल धडक रहा था, रह-रहकर आशका, मस्तिष्क में उठती कि कहीं भवतारा न आ जाए । उसने देख लिया तो उसे क्या कहेगा कि क्या तलाश कर रहा ।


रह-रहकर उसके कान खामखाह की आहट सुनते तो उसे बहम होता कि भवतारा लौट आया है ।


इसी घबराहट में वो पसीने से भरता जा रहा था ।

परंतु चाकू की तलाश में लगा रहा ।



@@@@@@@@@@@@@@@@@@


चाकू नहीं मिला'।



मंगलू परेशान हो उठा । इस सारे काम में उसे दो घंटे लग गए थे । नीचे की सब जगह देख ली थि और ऊपर के दोनों कमरे भी । कहाँ रख दिया चाकू भवतारा ने?

भवतारा जब से जीवित हुआ, तब से चाकू उसने देखा भी नहीं था । एकाएक ठिठका । उसकी परेशानी को राहत मिली , ये सोचकर कि सबसे नीचे उन गुप्त कमरों तो देखा नहीं,

जहां लकडी के बक्से में भवतारा का शरीर पड़ा हुआ था । अतिम बार बाकू उसने वहीं देखा था, भवतारा के पेट में धंसे हुए।


वहीं होगा चाकू ! मंगलू जल्दी से उस कमरे में पहुचा, जहां से नीचे जाने के लिए सीढियां थी । रास्ता खुला हुआ था । मंगलू जानता था कि वत्त नहीं है, भवतारा कभी भी वापस आ सकता था । एक बारंगी तो उसका मन किया कि आज की अपेक्षा कल ही चाकू की तलाश करे, परंतु जैसे वो सारे काम को निबटा लेना चाहता था । उसके भीतर जल्दबाजी भर चुकी थी । मगलू जल्दी से सीढिया उतरा और नीचे वाले कमरे में जा पहुचा ।


यहां पहुंचते ही जैसे उसका दम-सा घुटा ।


कमरे में कम रोशनी का बल्ब जल रहा था । उस रोशनी में हर चीज नजर आ रही थी, परंतु अस्पष्ट-सी । वहीं ठिठका मंगलू हर तरफ नजरे घूमाने लगा । धीरे धीरे उसकी आंखें कम रोशनी में देखने की अभ्यस्त होती जा रहीथीं।


मंगलू लकडी के बक्से के पास पहुंचा ।

वो खुला पड़ा था । बल्ब की रोशनी ठीक उसके भीतर तक पड रही थी । चाकू कहीं भी न दिखा, फिर भी उसने हाथ मारकर भीतर की जगह अच्छी तरह चेक की । कोई फायदा न हुआ ।

आखिर कहां गया चाकू? मगलू पलटा । उसी पल उसके पैर से कोई चीज टकराई तो उसने फौरन नीचे देखा ।

पैर से टकराने बाली चीज 'चाकू' ही था ।

वो नीचे पड़ा था ।


चाकू को पहचानते ही मगलू का दिल धडक उठा । वो फौरन नीचे झुका और चाकू उठा लिया । खुला हुआ था बो चाकू । चाकू क्रो देखते, हुए मगलू का दिल धाड़-धाड़ बज रहा था । मोना चौधरी और सतपाल इसी चाकू को तो माग रहे थे । उसने जल्दी से चाकू क्रो बंद करके जेब में डाला और आगे वढ़कर सीढियां तय करके ऊपर पहुचा ।


चाकू मिल गया था । काम हो गया था ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:11

मगलू गोल कमरे में पहुचा और चैन की लम्बी सांस ली ।


मन-ही-मन सोचा कि अव भवतारा आ भी जाए तो परवाह नहीं । जव थ्रोड़ा सामान्य हुआ तो बाथरूम में जाकर हाथ-पुंह धोया । मस्तिष्क पुन: दौडने लगा । क्या अभी चाकू दे आए मोना चौधरी औंर सतपाल को? . नहीं, इतनी जल्दी भी ठीक नहीं । पीछे से भवतारा आएगा और उसे न पाकर क्या सोचेगा? इस वक्त उसे सब्र से काम लेना चाहिए ।



और अपनी हरकते सामान्य रखनी चाहिए । लो ही काम करने चाहिए जो हर बात करता है ।

मंगलू अपने कमरे में पहुचा ।

पहने कपेड़े उतारे और खूंटी पर लटका दिए । चाकू पैंट की जेब में ही था । खुद अंडरवियर में ही वेड पर आ लेता था । लेटने के पश्चात वो छत को देखने लगा । सोचे तेजी से दोड़ रही थी । कल वो चाकू मोना चौधरी और सतपाल को दे देगा, फिर क्या वे दोनों भवतारा को समाप्त कर सकेंगे? इस सोच ने मंगलू की नीद उड़ा दी थी कि क्या सच मे भबंतारा मर जाएगा । उससे उसकी जान छूट जाएगी?



@@@@@@@@@@@@@@@@@@



अगली सुवह हुई ।


मंगलू रात क्रो अवतारा के आने से पहले ही सो गया था । वो कब आया, उसे नहीं पता था । अब नीद से उठने के बाद से पहले वो ऊपर भवतारा के कमरे में पहुंचा और भीतर झांका ।

भवतारा बैड पर सोया हुआ था, हाथ-पांव फैलाए।


उसकी कमीज पर लगा काफी सारा खुन नजर आ रहा था ।


मगंलू बहां से नीचे आ गया । कमरे में पहुंचा और खूंटी पर टगी पैंट को चैक किया । चाकू पैट की जेब में मौजूद था । इससे उसे राहत
मिली ।।।

उसके बाद वो नहा-धोकर तैयार हुआ । पैट की जेब से चाकू निकलकर नई पेंट की जैव में रखा, फिर बाहर निकल आया । मोना चौधरी और सतपाल के पास पहुच जाना चाहता था वो ।


" मंदिर के बाहर पुलिया के पास से निकला तो कामिनी की याद ताजा हुई ।



परंतु कामिनी की याद फौरन ही मस्तिष्क से गुल होगई क्योंकि उसके पास काम था । चाकू था और वो चाकू इस वक्त मुसीबत से ज्यादा लग रहा था । उससे वो पीछा छुडा लेना चाहता था । उसकी जेब में पैसे न थे कि बस या टैक्सी लेकर मोना चौधरी, सतपाल के
पास होटल पहुच पाता ।



इसलिए सारा रास्ता मगलू ने पैदल ही तय किया ।


तेज-तेज चलने पर भी उसे होटल तक पहुंचने में डेढ़ घंटा लगा । जब मगंलू ने कमरे में प्रवेश. किया था तो तेज-तेज सांसे लेता हाफ़ रहा था । मोना चौधरी और सतपाल की निगाह उस पर टिक गई ।



“तुम......!"


मंगलू ने जेब से चाकू निकाला और टेबल पर रख दिया ।


"ये रहा चाकू शैतान बेटे का चाकू तुम इसी चाकू को मांग रहे थे ।" सतपाल की आंखों में चमक आ गई ।


मोना चौधरी मुस्करा पडी ।


“तुमने तो वहुत बड़ा काम कर दिया मंगलूं !! मोना चौधरी कह उठी । सतपाल ने आगे बढ़कर चाकू को उठाया । देखा ।


"हां ।" सतपाल ने चाकू अपनी में डालते हुए कहा…"यही है शैतान के बेटे का चाकू।"



"मैंने अपना काम कर दिया है !" मगंलू बोला।


"मुझे शेतान के बेटे की दिनचर्या बता ।" सतपाल बोला ।


मंगलू ने बताया कि भवतारा दिन में क्या-क्या करता है!



"कल वो कामिनी के साथ शादी कर रहा है ।" एकाएक मंगलू कह उठा ।



"कल-शादी?"



“हां-----बो. ..।"


"ये तो वहुत अच्छा मौका होगा उस पर वार करने का।" सतपाल कह उठा ।


"कहां करेगा वो शादी?" मोना चौधरी ने पूछा ।


" ये अभी उसने बताया नहीं । रोज सुबह उठने के बाद के कामिनी की झोंपडी में जाता है ।"


"सुबह ।"


" उसकी सुबह दिन के बारह-एक बजे होती है ।" मंगलू बोला ।



"तब बों अकेला होता है ?"


"हां ।"


“इसका मतलब आज की सुबह तो निकल गई ।" मोना चौधरी बोली…"कल हमारा काम हो सकता है ।"



"कर वो शादी कर रहा है ।" मोना चौधरी के चेहरे पर कड़वे भाव उभरे।


"लेकिन शादी कर नहीं पाएगा । वो मंदिर से निकलेगा और मारा जाएगा ।"


" सच मे वो मरा जाएगा?" पूछा मंगलू ने ।



"हां ।" सतपाल के दांत भिच गये----" कल वो सच में मरेगा । उसे मारने के लिए उसके चाकू की जरूरत थी, वो तुमने हमे ला दिया और 'खबरी' बनकर उसके वारे में हमें हर खबर दे रहे हो । ऐसे में उसका बचना मुमकिन नहीं ।"


"अब मैंने क्या खबर देनी है? मैंने तो सब कुछ बता दिया।"



"अभी तुम्हारा काम वाकी है ।"



"बाकी -नही, मैं अब और कोई काम नहीं करूगां । चाकू लाकर देना ही आखरी काम....!"



" मगंलू , जहाँ तुमने इतना काम किया है वहां-थोड़ा-स्रा और ....!"



"बो मुझे मार देगा । मैं बार-बार उसे धोखा नहीं दे सकता । वै चालाक है । भांप जाएगा कि .....!"



"आखिरी मौके पर तुम हमारा साथ छोड देना चाहते हो?"



"नहीं, मैं अब कोई काम नहीं करूंगा ।" मंगलू ने मोना चौधरी को देखकर क्या…"मै अब वापस नहीं जाऊंगा ।" '


"ये तो तुम जानते ही हो कि हम जो भी कर रहे हैं, उससे तुम्हारा फायदा भी है ।" मोना चौधरी गंभीर स्वर मे बोली ।



"मेरा फायदा? "



"उसके मरते ही कामिनी तुम्हें मिल जाएगी । तुम्हारा प्यार तुम्हें वापस मिल जाएगा ।”



मंगलू ने सूखे होंठों पर जीभ फेरी ।



"सोचो, तब तुम्हें कितना अच्छा लगेगा, कामिनी को जब अपने पास पाओगे ।"



मंगलू ने व्याकुलता से पहलू बदला ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 13 Jun 2017 17:12

"मुझें तो लगता है कि ये कामिनी की मज़बूरी ही है, जो बो उसके साथ कल शादी कर रही है है"



"सच बात तो ये है कि मुझें यकीन नहीं कि तुम लोग उसे खत्म कर दोगे ।" मंगलू ने गहरी सांस ली ।



"तुम इसी तरह हमारा साथ देते रहे तो हम उसे हर हाल में खत्म कर देंगे ।"



"तुम समझती क्यो नहीं, वो मुझे मार देगा । उसे पता चल जाएगा कि मैं तुम लोगों से मिल चुका हूं।”


"नहीं पता चलेगा । आखिरी बार हमारा साथ दे दो ।"


मगलू इस ब्त से सहमत न होते हुए भी सहमत हुआ ।


"क्या चाहते हो अब मुझसे?"



"तुम्हें वापस वहीं पर जाना होगा, सिर्फ आज रात के लिए !"



“क्या करूँगा, वहां जाकर ।"


" उस पर नजर रखोगे और जो नई ख़बर होगी, वो हमे दोगे ।"



"नई खबर ?"


" हां , जैसे कि लै शादी कहां कर रहा है? उसकी शादी कितने बजे की है? वो कब बाहर निकलेगा ?"


"औऱ ये खबर देने मैं यहां इतनी दूर आऊगा, होटल में ।"


"नहीं ।” सतपाल कह उठा--" हम मंदिर के आस-पास ही किसी सुरक्षित जगह अपना ठिकाना वना लेंगे, ताकि खबर देने मे तुम्हें परेशानी न हो । हमें खबर देकर तुम वापस मंदिर में जा सको !"



“ठीक है ।" मगलू ने गहरी सांस ली--“इसकै बाद मैं तुम लोगों की कोई बात नहीं मानूगा ।"


"शायद फिर जरूरत ही न पड़े, तुमसे कोई काम कहने की ! " सतपाल मुस्कराया ।


"तुम लोग अपने काम में सफल होओ या नहीं;ये रात मेरी आखिरी रात होगी भवतारा के पास ।"



"मंजूर…।"


"क्या खाओगे...!" मोना चौधरी ने मुस्कराकर पूछा ।


" कुछ नहीं, जब से भवतारा का साथ मिला है, मतलब कि इस, चाकू का साथ, तब से मुझें न तो भूख लगती है और न प्यास । तब भी पूरी तरह स्वस्थ रहता हूं।" मंगलू ने बताया ।



मोना चौधरी ने सतपाल को देखा ।


सतपाल गंभीर स्वर में कह उठा ।



"शैतानी शक्तियों का असर तुम पर डाला जा चुका है, लेकिन कल ठीक हो जाएगा सब ।"



"कल कैसे ठीक हो जाएगा !" मंगलू ने पूछा ।


"क्योंकि कल हैम शैतान के बेटे को मार देगे ।"



"भगवान ही जाने कर क्या होगा?" मंगलू नै बेचैनी से कहा ।।



“तुम मुझे खबर देते रहो, सब ठीक हो जाएगा ।"


मंगलू उठ खडा हुआ ।



"मैं जाता हूं ।"



"आज रात हमने मंदिर के पास डेरा लगाना है । तुम हमें कहां, मिलोगे?" मोना चीथरी ने पूछा।



"रात अंधेरा हो जाने के बाद आठ और नौ बछू कें बीच मैं मंदिर के गेट के बाहर मिलूंगा । वहां पहुंच जाना ।"


दोनों ने सहमति से सिर हिला दिया ।



मंगलू चला गया ।
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