Page 5 of 30

Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Posted: 11 Jan 2017 21:56
by kunal


सतपाल हांफता हुआ-कांपता हुआ ठिठका था ।



शैतान को देखता रहा । इतना तो समझ चुका था कि वो धिर गया है । अब बच नहीं सकेगा । जाने कैसे वो नर्क के रास्ते पर आ गया । उसने तो कहीं और जाना था ।



"नर्क में तुम्हारा स्वागत है सतपाल! " शेतान ने मधुर स्वर में कहा ।


पाच फीट का वो सुन्दर सा व्यक्ति था । कमर में लंगोट और माथे पर मुकुट था ।



जबाव में सतपाल के होंठ हिलकर रह गए थे ।

"कहो-क्या कहना चाहते हो?"


" म . .मैं यहां नहीं आना चाहता था । गलती से इधर आ गया ।"


"यहां तो -कोई भी नहीं आना चाहता ।" शैतान मुस्कराया…“लेकिन फिर भी सव आ जाते हैं ।"


“मैँ तो अपने काम के लिए स्वर्ग के पास वाले शहर जा रहा था, जाने यहां कैसे आ गया?"


"पता है मेरे को…तू मंगलू के बारे में जानने निकला है?”


"ह. . .हां ।"


"'तो ये सव क्यों तेरे पीछे हैं?" शैतान ने ठिठक चुके लोगों पर नजर डाली । "


" ये ये मैंने इन्हें वापस मेजा था दुनिया से, ये वहां शैतानी करने के लिए आना चाहते थे ।"


"जानता हूं नर्क से तो हर कोई भाग जाना चाहता है ।"


"ये मुझे मार देना चाहते हैं ।"


"तेरे अपने कर्न हैं और इनके अपने । यूँ तो मैं तेरे को नहीं छोड़ता, परंतु इस वक्त तू मेरे बेटे अवतारा का रास्ता रोकने पर लगा है, इसलिए तेरे को जाने दूगा ।"


"ये क्या बात हुई ?" सतपाल हैरानी से बोला ।


"भवतारा दुनिया में वापस जाना चाहता है । कहता है, इंसानी खून की जरूरत है उसे । मेरे से बगावत करके वो पुन: वहाँ जीवित हो जाना चाहता है , मेरे रोके भी नही रूक रहा । शायद तुम उसे रोक सको !"
"परंतु तुम उसे क्यों रोकने की चेष्टा कर रहे हो?"



"क्योंकि अभी भी भवतारा के इंसान के रूप में आने का वक्त नहीं आया । वक्त से पहले वो जबर्दस्ती पुन: दुनिया में जाकर अपने शरीर में प्रवेश करके जीवित हो उठता है तो उस: जीवन को खतेरा पैदा हो जाआएगा ।"


“ओह......!"



"ये वजह है कि मैं भवतारा को अभी जिन्दा होने के खिलाफ हूं ।"



"किससे खतरा है भवतारा को?"


"मैं नहीं जानता । ये रहस्य, भविष्य के गर्भ में है ।"


सतपाल ने सूखे होंठों पर जीभ फेरकर पूछा ।


"तुभ मुझे छोड़ रहे हो?”


" हा!"


"मैं जाऊ?"


“अवश्य! !" शेतान मुस्कराया-" तुम मुझ पर शक मत करो । चाहो तो मंगलू के बारे मैं तुम्हें जानकारी सकता हू।"


"मगलू के बारे में?"


"हां, वो मोना चौधरी के घर से निकलकर किधर-किधर गया, सब कुछ तुम्हारे दिमाग में डाल दूँ क्या?”


"क्या भरोसा तुम गलत जानकारी मेरे दिभाग में डाल दो ।"


"शैतान की बात पर तुम्हें कुछ तो भरोसा करना चाहिए।"


"शेतान का क्या भरोसा?"


"है-शेतान का भी भरोसा है । मैं तुम्हारा वक्त बचान चाहता हूं किं शायद तुम, भवतारा को उसके शरीर तक पहुचने से पहले ही रोक लो । मंगलू के बारे में जानकारी दे रहा हूं तुम्हें ।" कहते हुए शैतान हाथ उसकी तरफ़ किया । शैतान के चेहरे पर बराबर मुस्कान नाच रही थी ।


उसी पल शेतान के हाथ से, कहीं से चिंगारी निकली और सतपाल के सिर से जा टकराई ।


सतपाल के होंठो से कराह निकली । शरीर पीडा से झनझना उठा ।
स्टूल पर आलथी-पालगी मारे बैठे सतपाल का शरीर कांपे रहा था ।


कपड़ा हाथ मे दबा हुआ था । नंगे वदन बैठा बो पूरे का पूरा पसीने में डूबा हुआ था । कम्पन इतना तेज था कि लगता था, जैसे वो अभी स्टूलं से नीचे गिर जाएगा । वो रह-रहकर होंठ खोलने की चेष्टा कर रहा था ।



"मिथलेशं ।" एकाएक उसके होंठ खुले और जोरों से आवाज निकली । इसके साथ ही वो नीचे गिरता चला गया । स्टूल भी नीचे लुढक गया ।



तभी भागते कदमों की आवाज गूंजी।


अगले ही पल मोना चोथरी और मिथलेश ने भीतर प्रवेश किया ।


बिल्कुल नंगा सतपाल नीचे गिरा पसीने में दूबा कांप रहा था ।


" सतपालं !" मिथलेश झपटा उस पर……"क्या हुआ तुम ठीक तो हो?”


परंतु सतपाल के भीतर कुछ कह पाने की हिम्मत कहाँ बची थी ।



"उठाओ इसे ।" मिथलेश ने कहा ।



"क्या हुआ इसे?"


“चुपरहो।अभी कुछ मत पूछो।”



दोनों ने सतपाल को उठाया और दूसरे कमरे में ले जाकर वेड पर डाल दिया ।


उसके शरीर पर चादर डाले दी और पास बैठकर मिथलेश उसके पाव के तले रगड़ने लगा ।



“तुम इसके हाथों की मालिश करो ।" मिथलेश बोला ।


मोना चौधरी उसके हाथ रगड़ने लगी ।


॥॥॥॥॥
॥॥॥॥॥



आधे घंटें बाद सतपाल सामन्य गया था ।


उसने आंखें खोली ।दोनों को देखा।


"क्या हुआ था तुम्हें?" मिथलेश ने पूछा ।


"बहुत् बुरा हुआ ।" सतपाल गहरी सांस लेकर उठ वैठा-मैं नर्क में पहुच गया था ।"


"ये कैसे हुआ?" मिथलेश चौका ।
मोना चौधरी दिलचस्पी से उनकी बाते सुन रही थी ।


"पता नहीं, शायद मेरे से कुछ गलत हो गया होगा । नर्क में पहुचा मैं ।" सतपाल बेचैनी से बोला…"वहां मेरा बचना कठिन हो रहा था । शायद मैं कभी बापस ही न लौट पाता, अगर शैतान न टकरा जाता तो ।"



" शैतान----वो मिला तुम्हें?”



" हाँ ।"



"उसने तुम्हें कैसे छोड़ दिया?"



“क्योंकि उसके बेटे को यहाँ आने से रोकने की चेष्टा कर रहा हूं। शैतान नहीं चाहता कि उसका बेटा भवतारा मनुष्य के रूप में अभी जिन्दा हो । उसकी कहना है कि अभी भवतारा को खतरा है । इसंलिए उसने मुझे छोड़ दिया कि मै अपनी कोशिशों में लगा रहू।" सतपाल का स्वर गंभीर था ।



"हेरत की बात है, तुम तो अपने काम के लिए स्वर्ग के करीब के शहर में जा रहे थे और नर्क में जा पहुचे ।।” मिथलेश ने व्याकुलता से कह्य--"तुम्हें देखना चाहिए कि तुमसे क्या गलती हुई, जो गलत रास्ते पर चल पड़े और भविष्य कै लिए तुम्हें इस गलती से सतर्क रहना होगा ।"


सतपाल ने कुछ न कहा ।


"जिस काम के लिए गए थे, उसका क्या हुआ?”



“शेतान ने मंगलू के बारे में मेरे दिमाग से डाल दिया हैं !"



"शेतान ने?”



"हां, शैतान चाहता है कि मैं भवतारा को रोक पाने में सफल रहू इसलिए उसने मेरा वक्त बचाया और सब जानकारी मंगलु के बारे में मुझे दे दी ।" सतपाल ने व्याकुलता -से कहा ।



"कहां है मंगलू?"



सतपाल ने कुछ पलों के लिए आंखे बंद की और फिर खौलते हुए कह उठा ।



" मंगलू मोना चौधरी के फ्लैट से निकलकर कुछ आगे गया । उसने एक औरत की हत्या की, ताकि उसके जेवरात और उसके पैसे ले सके फिर वो होटल में जा ठहरा।"


“कौन-से होटल मे?"
"होटल का नाम नहीं जानता, परंतु हम वहां पहुच सकते हैं । रास्ता पता है मुझे ।"



"फिर तो तुरंत वहीं पहुंचना चाहिए ।" एकाएक मिथलेश बोला ।



"चलते हैं ।" सतपाल ने कहा और चादर लपेटे उठ खड़ा हुआ और कमरे से निकल गया । मिथलेश के चेहरे पर गंभीरता दिखाई दे रही थी ।


मोना चौधरी कह उठी ।


" तुम लोगों की बाते सुनकर मुझे हैरानी हो रही है । ये स्वर्ग-नर्क और शैतान ......!"



"हमारे लिए ये मामूली बातें है । रोज की बातें हैं ।". मिथलेश कह है उठा ।


मोना चौधरी ने सिर हिलाया । कछ देर बाद सतपाल कपड़े पहने बहां आ पहुंच ।



" मै भी तैयारी कर लू।" मिथलेश ने कहा ।


" मैने तैयारी कर ली हैं ।" सतपाल बोला---- "तुम्हें मगंलू से टक्कर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी ।"


" मुझे ये जानकर बहुत हैरानी हुई कि शैतान अपने बेटे के खिलाफ हुआ पड़ा है !" सतपाल ने मोना चौधरी से कहा ।


""तुम्हें वहां मंगलू से खतरा हो सकता है ।"


"परवाह नहीं, मैं सब संभाल...... !"


" तुम कुछ नहीं संभाल सकती । मंगलू का एक घूंसा तुम्हे पड़ा था और तुम होश खो बैठी, क्योंके मगलू के शरीर में शैतानी ताकंतों का वास है ।" सतपाल ने अपने गले में पड़ा, तांत्रिक मोहम्मद का दिया नीला धागा उतारा और आगे बढकर मोना चौधरी के गले में डाल दिया…"शैतानी ताकतों से तुम्हें ये धागा बचाएगा ।"


"तुम्हें भी तो खतरा हो सकता है ।" मोना चौधरी ने कहा। "


"हमारी परवाह न करो । हमने अपना इंतजाम कर रखा है । शैतानी ताकते हम पर असर नहीं डालेगी !"



"देर क्यों कर रहे हो, चलो अब, कहीं वहाँ से मंगलू निकत न जाए ।" मिथलेश बोला ।
एक घंटे बाद मिथलेश, सतपाल और मोना चौधरी उस होटल के में आ पहुचे, जहाँ मंगलू ठहरा हुआ था । शैतान ने मंगलू के प्रति जो जानकारी, सतपाल मस्तिष्क मेँ डाली थी, वो सही थी ।।


रिसेप्शन पर वो ही… व्यक्ति बैठा हुआ था ।

Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Posted: 11 Jan 2017 21:57
by kunal


"..आइए ..आइए ."। उन्हें देखते ही वो कह उठा----“हमारे होटल के कमरे आपको ज़रूर पसंद जाएंगे ।"


" हम यहां कमरा लेने नहीं जाए ।" सतपाल ने कहा ।


मोना चौधरी की निगाह आस-पास घूम रही थी ।


" तो जनाब?"



"मंगलू कहां है?”



"कौन मंगलूं ?"



"जो इस होटल में ठहरा हुआ है ।"


"इस होटल में मंगलू नाम का कोई भी शख्स नहीं ठहरा !"



"झूठ मत बोलो.. तुम !"



"जनाब रजिस्टर देख लीजिए ।" उसने रजिस्टर उसकी तरफ़ सरकाना चाहा ।



सतपाल ने पल भर के लिए आखें बंद की ।।


शैतान की दी जानकारी अभी भी काम कर रहीं थी । सतपाल को मंगलू एक कमरे में बैठा दिखा ।



उसने आंखें खोलीं और मोना चौधरी व मिथलेश से बोला ।



"आओ मेरे साथ ।"



वो तीनो होटल के भीतर की तरफ वड़ गए।


" ऐ जनाब कहाँ जा रहे हो ?" रिशेप्शन वाला हड़बड़ाकर बोला ।



मोना चौधरी ने अपने कपडों में फंसी रिवॉल्वर उसे दिखाकर कहा----" जुबान बंद रख और यहीं बैठा रह…वरना......!"


वो व्यक्ति फोरन गर्दन हिलाकर रह यया ।



मोना चौधरी तेजी से आगे बढी और सतपाल, मिथलेश के पास ने पहुंची ।



"कहां है, मंगलू. ..!"
" पहली मंजिल के कोने वाले कमरे मे ।।" सतपाल ने आगे बढते हुए कहा ।



"मेरे पलेट पर तो मंगलू को पहले पता चल गया था कि तुम लोग आ रहे हो । क्या अव मंगलू को हमारे आने का पता नहीं चलेगा?"



"पता चल सकता है ।"


"फिर तो वो सतर्क हो सकता है ।"


“कुछ भी हो सकता, है । हूमे सतर्क रहना होगा ।" सतपाल है गभीर स्वर में कहा ।



वो तीनों गैलरी मे आगे बढ रहे थै।

वो कमरा पास आता जा रहा था जहां मंगलू मौजूद था ।





मगलू होटल के उस कोने वाले कैमरे में बैठा था । उसने कमरे की खिड़कियां----दरवाजा बंद कर रखा था । कुर्सी पर बैठकर उसने आंखें बंद कर रखी थी कि तभी उसके कानों में जंगला की फुसफुसाहट पडी ।



"क्या कर रहा है मंगलू ?"



"..आराम !!" मंगलू के होंठ हिले !!



"तेरी किस्मत मे अब आराम नहीँ है।”



"क्यों?"


"हमारे दुश्मन आ रहे हैं !"



“दुश्मन ?" मंगलू की आंखें सिकुडी-"किसकी वात कर रहा है !"


"सतपात, मिथलेश और मोना चौधरी !"


"मोना चौधरी भी उनके साथ है?” मंगलू ने पूछा । ।"



" हां !"


" वो लोग मेरे से चाकू छीनना चाहते हैं?"



"मैं यहां से भाग जाता हू।”


" अब तू भाग नहीं सकेगा । वों होटल में आ गए हैं, टकराव तो होगा ही !"


" ओह, मै उन्हें मार दूगां !"


" तेरे लिए खतरा है !"
"कैसा खतरा?"


" उनके पास पवित्र शक्तियों के कवच हैं । उन पर शैतानी शक्ति का असर नहीं होगा ।"



… "ओह, फिर मैं क्या करूं ?"


" ये संकट का वक्त है । तेरे को शैतान के बेटे का चाकू बचाना है, जिसे ये छीन लेना चाहते हैं ।"


"तो क्या मुझे तीनों से टकराना पडेगा?"



" ऐसा भी सकता है ।"



"मेरे शरीर में इतनी ताकत नहीं है कि मैं तीनों से टकरा सकू ।" . . . मंगलू बोला ।



"जानता हूं । अब तेरे को ताकत कै साथ-साथ चालाकी से भी काम लेना होगा।"


"हूं !"



"तेरे को हर हाल में चाकू को बचाना है और मौका देखकर भाग जाना----समझा !"


"समझ गया ।"


"ध्यान रखना, वरना तीनों तुम्हें घेरकर पकड़ लेना चाहेंगे और चाकू तेरे से... !"



तभी दरवाजे पर थपथपाहट पडी ।



"लो आ गए वो !" जंगला की फुसफुसाहट कानों में पड्री । मंगलू की आंखें बंद दरवाजे पर जा टिकी ।।


"तीनों बाहर हैं, मैं देख, आया हूं ।" जंगला की सरसराहट पुनः … कानों में पडी ।



दरवाजे पर पुनः थपथपाहट पडी ।



मंगलू उठा शांत भाव से दरवाजे की तरफ़ बढ़ गया । उसकी आखों में चमक विद्यमान थी ।



" चाकू बचाना है तुमने ।" जंगला की फुसफुसाहट पुन: कानों में पडी।


मंगलू ने सिटकनी हटाई और दरवाजा खोला ।


सामने सतपाल, मिथलेश और मोना चौधरी खडी थी ।



" यही है मंगलू !" सतपाल ने मोना चौधरी से पूछा ।


"हा ।"


सतपाल की गंभीर निगाह मंगलू पर जां टिकी ।
"हम तुम्हें ही तलाश कर रहे थे मंगलू..!"



"मालूम है मुझे ।" मगलू मुस्करा पड़ा--"पता था कि तुम आ रहे हौ ।"


"तो ये भी पता होगा कि हम क्यों आए है?” सतपाल का स्वर शात था ।


"हा ।"



“शैतान के बेटेका चाकू हमें दे दो।"



"नहीं दूंगा ।"


"तुम हमसे झगडा करने की हिम्मत नहीं रखते!"



" चाकू नहीं दूंगा, मैं !"


उसी पल सतपाल उस पर झपट पड़ा ।


मिथलेश सतपाल का साथ देने लगा ।


वे तीनों इसी तरह हाथापाई में भीतर चले गए ।

Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Posted: 11 Jan 2017 21:58
by kunal


मोना चौधरी वहीं खडी रही । सतपाल ने कहा कि वे आसानी से मंगलू को संभाल लेंगे ।



यही वजह थी कि मोना चीथरी ने बीच मे दखल न दिया । कमरे के भीतर उठा-पटक की आबाजे आ रही थी ।


तभी कुछ दूर रिसेप्शन वाला आदमी दिखा । मोना चौधरी को वहीं खडी पाकर खिसक गया ।


करीब दो मिनट हुए थे मोना चौधरी को वहां खडी हुए कि तभी कमरे के भीतर से मगंलू निकला और फूर्ती से उसने बाहर से दरवाजा बंद कर दिया और पलटकर भागा ।


मोना चौधरी ने उसकी टांगों में टांग फंसा दी ।



मंगलू लडखडाकर छाती के बल गिरा और तुरंत ही संभलकर खडा हो गया ।


भीतर से दरवाजा मिड़भिड़ाया जाने लगा । ,



मोना चौधरी का पूरा ध्यान मगतू पर था ।



"मेरा घूंसा तुम भूल गई क्या?” मंगलू उठा ।



"याद है ।" मोना चौधरी सतर्क स्वर में बोली ।।


" मेरे रास्ते मे मत आओ । जाने दो मुझें।"



"मैं चाहती हूं कि तुम एक बार फिर ही घूंसा मारो" । मोना चौधरी उसकी तरफ़ बढी ।


“अबकी बार जान से मार दूंगा तुझे ।" पुन गुर्राया मंगलू।
" मार मुझे !"



मंगलू दात र्मीचकर मोना चौधरी पर झपटपड़ा ।


मोना चौधरी ने उसे रोका और उसके पेट में घूंसा मारा ।


मंगलू कराहकर दोहरा हो गया तो मोना चौधरी ने जोरों से उसे पीछे से धक्का दिया तो वो लुढककर दो-तीन कदम दूर जा गिरा ।


मोना चौधरी के चेहरे पर कठोरता थी ।


मंगलू संभला और अगले ही पल उसकी निगाह मोना चौधरी के गले मे मौजूद धागे पर जा टिकी ।।



"समझा, मेरी शक्ति का तेरे पर असर नहीं होगा ।" मगंलू कठोर स्वर में बोला…“ये धागा उतार, !."


"नहीं उतारूंगी।"


अगले ही पल मगंलू पल्टा और दौड़ पड़ा ।




पल-भर के लिए मोना चौधरी उसकी इस हरकत पर हक्की-बक्की रह गई ।



दूसरे ही पल वो मंगलू के पीछे दौडी ।।


तब मगंलू गैलरी के कोने में मुड़ने ही जा रहा था कि मोना चौधरी ने उस पर छलांग लगा दी और उससे जा टकराई । दोनो ही नीचे गिरते चले गए । मगलू का माथा पास की रेलिंग से टकराया और खून की रेखा बह निकली।


दोनों अव एक-दूसरे के सामने खडे थे ।



“मै तुझे जाने नहीं दूगीं ।" मोना चौधरी सख्त स्वर में बोली----" चाकू मेरे हवाले कर दे ।"

मोना चौधरी को मौत की सी नजरों से घूरते, मंगलू ने जेब में हाथ डाला और चाकू निक्राल लिया ।



चाकू लेदर केस में लिपटा हुआ था । मंगलू ने लेदर केस से बाहर चाकू निकाला और केस एक तरफ फेंक दिया । मंगलू की आंखों में वहशी भाव मंडराते स्पष्ट नजर आ रहे थे ।




“मैं तेरे को मार दूंगा ।"


मोना चौधरी के दात भिंच गए ।


"अपने गले में पड़ा नीले रंग का धागा उतार दे !"


"क्यों?"


"मैं कहता है उतार ये धागा ।"


" नहीं ।"
अगले ही पल मंगलू चाकू के साथ मोना चौधरी पर झपट पड़ा ।


उसने चाकू मोना चौधरी के पेट में घुसेड़ देना चाहा ।



परंतु मोना ने फुर्ती से खुद को बचाया ओंर जोरदार ठोकर चाकू थामे हाथ वाली कलाई पर मारी । मंगलू के होंठो से कराह निकली और चाकू वाला हाथ खुलता चला गया ।


चाकू टन टन की आवाज के साथ फर्श पर जा गिरा ।


मंगलू पागलों की तरह चाकू की तरफ़ झपटा।


मोना चौधरी ने पूरी ताकत से जूते की ठोकर उसके पेट में मारी ।


मंगलू के होंठों से पीडा भरी चीख निकली और डकराता हुआ वो फर्श पर जा गिरा । ऐसे ही पड़ा रहा । बेदम-सा हो गया था वो, रह-रहकर सांसे ले रहा था ।



मोना चौधरी ने नीचे निरा चाकू उठा लिया । पास ही गिरे पड़े लेदर केस को उठाकर चाकू उसके भीतर डाला और उसे अपने कपडों में छिपा लिया ।



मोना चौधरी अब निकल जाना चाहती थी यहां से ।


सतपाल और मिथलेश को उस कमरे से निकालने में वक्त बर्बाद नहीं करना चाहती थी । मंगलू मुसीबत के रूप में पुन: उसके सामने खड़ा हो सकता था । . …


तभी उसे मंगलू उठता हुआ दिखा । वो आगे वढी और जोरदार ठोकर मंगलू की कनपटी पर मारकर वहां से निकलती चली गई ।





मंगलू बेहोश न हुआ था । होश में था और मोना चौधरी के भागते कदमों की आवाजें वो सुन रहा था । कुछ पलों बाद कदमों की आवाजें कानों में पड़नी बंद हो गई ।


कनपटी पर ठोकर पड़ने की वजह से सिर और चेहरा बुरी तरह दर्द कर रहा था । माथे से खून की पतली-सी धार निकलकर, आंखों तक पहुंचते हुए ठहर गई थी ।



चंद पलों बाद थोडा-सा संयत हुआ तो उठा वो ।


"गंवा दिया चाकू तूने ।" जंगला का नाराज स्वर उसके कानों में फुसफुसाहट भरे ढंग में पड़ा ।


"उसके गले में पवित्र ताकतों वाला धागा था, मेरी ताकत ने उस पर असर नहीं किया ।"


"जो भी हुआ, बुरा हुआ । मोना चौधरी वो चाकू ले गई ।"


"मुझे दुख है ।"
"शेतान के बेटे को उस चाकू की जरूरत है । उसके विना वो जिंदा कैसे होगा ?"


"जानता हूं ।"


"अब तूने वो चाकू पाना है ।"


"हां , मैं उस चाकू को मोना चौधरी से वापस पा लूंगा ।" मंगलू ने क्रोध भरे स्वर में कहा ।



"बाथरूम में जाकर अपना चेहरा धो, उसके बाद बाहर आना ।"


"हां !"



"शैतान के बेटे को तूने खुश करना है, मोना चौधरी से चाकू वापस लेकर ।”


"मैं ऐसा ही कसंगा ।"

Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Posted: 11 Jan 2017 21:59
by kunal


मगंलू पास के एक कमरे में घूसा । खाली था वो कमरा । वहां उसने अपने मुँह पर छीटें डालकर धोया और माथे के जख्म को देखा, जो कि कट के रूप में था । फिर उस कमरे से बाहर आ गया ।


"उस होटल से बाहर निकल । सतपाल और मिथलेश कमरे में बंद वो कभी भी वाहर आ सकते हैं।"


मंगलू ने सिर हिलाकर तेजी से कदम आगे बढा दिए । जब वो रिसेप्शन के आगे से निकला तो वहां वो ही आदमी मोजूद था ।


"वो लड़की तो गई ।" वो मंगलू से बोला…"बाकी दोनों कहाँ है। कहीं उन्हें तुमने मार तो नहीं दिया?"


मंगलू बाहर निकलता चला गया ।


"अब कहां जाएगा ?" जंगला की फुसफुसाहट कानों में पडी ।


" मोना चौधरी के पास, उससे चाकू वापस लेकर रहूगा ।"


"वो इस तरह वापस नहीं देगी, । दूसरा रास्ता इस्तेमाल करना होगा।"



“कैसा दूसरा रास्ता?" मंगलू के होंठ हिले ।


"सोचना पडेगा ।"


“मैं मोना चौधरी से ले लूंगा वापस चाकू....!"



"कोशिश करके देख ले ।"



मंगलू घंटे बाद मोना चीथरी के फ्लैट पर था । फ्लैट का दरवाजा बंद था तो उसने चुपके से पीछे की खिड़की का इस्तेमाल किया और फ्लैट के भीतर जा पहुचा ।



परंतु मोना चौधरी फ्लैट में नहीं थी ।

मोना चौधरी सीधी पहुंची थी पारसनाथ के पास ।


उस वक्त शामं के चार बज रहे थे । आज के दिन में दूसरी बार उनकी मुलाकात हो रही थी । मोना चौधरी को वहां आया पाकर पारसनाथ फौरन उसके पास पहुचा ।



"तुम यहाँ-------कोई खास बात है क्या?"



"हां ।"



"तुमने तो सतपाल के साथ रहना था !"



"उसके साथ ही थी। यहां आओ।" मोना चौधरी और पारसनाथ रेस्टोरेंट के एक कोने में पहुचे ।



"बात क्या है?"



मोना चौधरी ने कपडों में छिपा वह चाकू निकाला, जो के लेदर केस मेँ था !"




"ये क्या ?" पारसनाथ की आंखें सिकूहीं ।



“ये चाकू है ! "


“चाकू-ओह क्या तुमने शैतान के बेटे का चाकू पा लिया?" पारसनाथ चौंका ।


"सहीसमझे।”



" मुझे यकीन नहीं आ रहा ।" पारसनाथ ठगा-सा खड़ा रह गया ।


" बो ही चाकू है, मैंने मंगलू से छीना है । हमने मंगलू को दूंढ़ निकाला था ।" मोना चौधरी ने गंमीर स्वर में कहा ।



पारसनाथ ने चाकू थाम लिया ।


"ये तुम रख लो ।"



" मै ?"



"हां, ये चाकू खास है शैतान के बेटे के लिए, वो इसे पाने की पुन: कोशिश करेगा, जब तक उसे चाकू वापस नहीं मिलेगा, तब तक वो मुझे नुकसान-नहीं पहुंचाने वाला । इसे तुम रखो ।"




पारसनाथ ने चाकू थाम लिया ।।



… दोनों के चेहरों पर गंभीरता थी ।


"किसी को पता न चले कि शैतान के बेटे का चाकू तुम्हारे पास है ।।" मोना चौधरी ने कहा ।


"मैं किसी को क्यों बताऊं, लेकिन चाकू की तलाश में वे लोग मुझ तक भी पहुच सकते हैं ।"
"कैसे ? "


" वे आसानी से जान सकते है कि हम-तुम दोस्त हैं ।"


"ऐसा हो सकता है, तुम चाकू को अपने पास रखो और अपने काम में व्यस्त रहो ।"



"सतपाल कहां है?"



मोना चौधरी ने सतपाल और मिथलेश के बारे में बताया ।।



" इसका मतलब कि सतपाल नहीं जानता कि चाकू तुम्हारे पास है?"



"अभी तक तो नहीँ।"



“तुम्हें सतपाल को बताना चाहिए" । "



“वक्त नहीं मिला बताने का । मैं मंगलु से चाकू झपटकर भाग आई और सीधा यहाँ पहुंची ।। मगंलू मुझे ढूंढ रहा होगा कि चाकू पा सके । चाकू कौ पाने की इच्छा से वो मेरे फ्लैट तक भी अवश्य गया होगा !"


पारसनाथ ने अपने हाथ में दबे चाकू को देखा ।



"मैं चलती हूं । तुम चाकू को सुरक्षित रख दो ।"


इसके बाद मोना चौधरी वहां से बाहर आ गई । तभी उसका मोबाइल फोन बज उठा ।

Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Posted: 11 Jan 2017 22:04
by rajsharma
kya bat hai dost bahut badhiya maza aa gaya