खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

kunal
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 12 Jan 2017 13:33

" हैलो।" मोना चौधरी ने वात की ।



"मैं सतपाल बोल रहा हूं-तुम कहाँ हो?"



" पहले तुम बताओ कि तुम कहां हो ?" मोना चौधरी ने कहा ।



"मैं उसी होटल से बाहर निकला हूं । अभी पता चला है मुझें कि तुम्हारी मगलू से लडाई हुई थी ।"



"किसने बताया?"



"होटल वाले ने । तुम उससे पहले होटल से भाग निकली । मंगलू कुछ देर बाद वहां से निकला ।"



"हां ऐसा ही हुआ था ।"


"क्या हुआ था तुम्हारे और मंगलू के बीच?"



"मैंने उसे रोक लिया था, वो मुझे मार देना चाहता था । हममे झगड़ा हुआ और चाकू मेने उससे छीन लिया ।"


" क्या?" सतपाल के चीखने की आवाज आई…-"चाकू तुम्हारे पास है?"



“हा ।”
"हे भगवान ।मुझे यकीन नहीं आ रहा ।"


मोना चौधरी खामोश रही ।


"तुम सच कह रही हो?"


"हां ।"


"मंगलू कहां है?” उधर से सतपाल ने पूछा ।


"मैं नहीं जानती । वो होटल मेँ ही था, जब मै बाहर निकली थी । मेरे खयाल में वो मुझे अवश्य दूंढ़ रहा होगा !"




"चाकू वापस पाने के लिए?"


"हां ।"



“मोऩदु चौघंरी! " सतपाल का गंभीर स्वर फोन द्वारा उसके कानों में पडा…"वो चाकू शैतान के बेटे की जान है और शैतान का बेटा भारी शैतानी ताकतो का मालिक है । सही बात तो ये है कि तुम अब खतरे में हो ।"



"निघिचंत्त रहो, मुझें कुछ नहीं होगा ।" एकाएक मोना चौधरी मुस्कराई ।



"ये बात तुम किस बूते पर कह रही हो?"



" तुम्हारा दिया धागा गले में है, इसी के कारण मैं मंगलू का मुकाबला कर सकी ।"



"हां, तुम पर शैतानी ताकत का असर नहीं हुआ, परंतु ये धागा भी तुम्हें एक हद तक ही सुरक्षित रखं सकता है। शैतान का बेटा वो ताकत है, जो लोहे को भी चीर सकता है । तुम खतरे में हो ।"



"शेतान के बेटे को चाकू की जरूरत है?" मोना चौधरी ने पूछा ।।।



"हां-चाकू की सहायता के विना वो अपने शरीर में प्रवेश नहीं है कर सकता ।"



"मैं चाकू को तोड़-फोड़ सकती हूँ ।"



“कोई फायदा न होगा । चाकू के लोहे का एक अंश भी शैतानी ताकतों के हाथ लग गया तो शैतान का बेटा उसी के सहारे अपने शरीर में प्रवेश करके पुन: जीवित हो उठेगा ।" सतपाल की आवाज कानों में पडी ।



"औह...! चाकू को शैतान के बेटे ने इतना महत्वपूर्ण क्यों बनाया? "
"किसी चीज़ को तो बनाना ही था । ये क्रिया होती है । दोबारा शरीर में आने के लिए, पहले के जन्म की ही किसी वस्तु के साथ तार जोड़ने पड़ते हैं । ये रहस्य से भरी बाते हैं । शैतान के बेटे को अपने चाकू से वहुत प्यार है । इस चाकू को पीछे वाले जन्म में, वो हेमेशा अपने साथ ही रखता था । पिछली बार शरीर छोड़ने से पहले उसने चाकू को बेहद सुरक्षित जगह छिपा दिया कि दोबारा जन्म लेना होगा तो चाकू की सहायता से ही लेगा ।"



“तुम्हारा क्या ख्याल है कि शैतान के बेटे को चाकू न मिले-तो वो मुझे-मार देगा ।"


"चांकू मिलने तक तो वो तुम्हें जिन्दा-रखेगा मोना चौधरी ! "


"फिर मैं जिन्दा ही रहूंगी, चिंता की कोई बात नहीं. ।"


"क्या मतलब?"



"मैंने चाकू को ऐसी सुरक्षित जगह रख दिया है कि मेरी मर्जी के विना वहां तक कोई नहीं पहुच सकता ।"


कछ चुप्पी के बाद सतपाल की आवाज कानों में पडी ।



'शैतान के बेटे का चाकू मुझे दे दो मोना चौधरी! मैं उस चाकू को खास मंत्रो से बेअसर कर दूंगा । तुम नहीं जानती कि ये सब क्या है । तुम सारे मामले को बिगाड़ सकती हो ।"


"हां, इस मामले में मैं अनजान हूं। मैं कुछ नहीं जानती ।"



"मेरे हवाले कर दो शैतान के बेटे का चाकू ।"


"तुम्हारे हवाले ही करूंगी ।" मोना चौधरी ने गंभीर स्वंर में कहा-----" शेतान का बेटा तो चाकू के लिए मेरे पीछे रहेगा ।"



" वो जान जाएगा कि चाकू मेरे पास है ।" मोनां चौधरी उलझन में फंसी खामोश रहीँ ।



"मैं तुमसे मिलनी चाहता हूं मोना चौधरी! " सतपाल का गंभीर स्वर कानों में पड़ा ।


" अभी तो मैँ व्यस्त हूं रात तक तुम्हें फोन करूंगी ।"



"मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूंगा ।"




मोना चौधरी ने फोन बंद कर दिया ।



मोना चौधरी अब ये तय करना चाहती थी कि शैतान के बेटे के चाकू का आखिर क्या करे ?
सतपाल ने फोन बंद किया । उसके चेहरे पर गंभीरता नजर आ रहीं थी ।


"क्या हुआ ?" मिथलेश ने पूछा ।



" जाने क्यों, मुझें लगता है कि मोना चौधरी शेतान के बेटे का चाकू हमे देने से कत्तरा रही है ।" सतपाल ने कहा ।



“ऐस क्यों.?"


"पता नहीं, मोना चौधरी कें मन मैं क्या है?"


" मोना चौधरी को समझने में तुम्हें कोई गलतफहमी तो नहीं हुई ?"



"कह नहीं सकता ।"


"मेरे खयाल में मोना चौधरी चाकू हमें दे देगी ।" मिथलेश बोला ।



"वो उसके काम का है भी नहीं । उसके पास चाकू रहेगा तो खतरा बढ़ जाएगा । शैतान., का बेटा उससे चाकू वापस ले लेगा, पर एक बार हमें मिल गया तो हम उसका असर खत्म कर देगें ।"


"ये बात है ।"



“मगलू से चाकू छीना है मोना चौधरी ने । ऐसे में मंगलू मोना चौधरी का पीछा नहीं छोड़ेगा ।"


“हा । चाकू पाने के लिए शैतान का बेटा कुछ भी कर सकता है ।"



"बेवकूफ़ को चाहिए कि चाकू फौरन हमारे हवाले कर दे।" सतपाल ने होंठ सिक्रोड़कऱ कहा ।



मिथलेश ने गहरी सांस ली ।



"राजन की कोई खबर ?" सतपाल ने पूछा ।



" नहीं, अब वो तांत्रिक वैलीराम के डेरे तक पहुंचने बाला होगा ।"


" अभी नहीं । कल तक ही वो वहां पहुंचेगा । कई घंटों का रास्ता पैदल का है ।"



तभी सतपाल के फोन की वेल बजी।


सतपाल ने स्क्रीन पर आया नम्बर देखा, फिर कालिंग स्विच दबाते हुए कान से लगाकर बोला ।



"बोल मनका ।"



" काम की चीजे तैयार की हैं मैंने ।" मनका की आबाज कानों में पडी ।


"मेरे काम जाएंगी वो चीजें?”



"क्यो नहीं !"
" ले आ .....!"



"पैसा नंक्रद लूगा !"


"मुझ पर से एतबार हट गया क्या जो ?"


"ये बात नहीं, इस बार का सामान महंगा है । मेरा खर्चा ज्यादा हुआ है !"



"नगद दूंगा कब तक आ रहा है।"


"एक घंटे तक । तु पच्चीस हजार तैयार रख । बाकी बाद में लूगा ।"



"पहले माल तो दिखा !"



"लेकर आ रहा हूं । खाना खिलाएगा?"



"इतना वक्त नहीं होता मेरे पास ।। मेरे पैसों से तू किसी बढिया होटल में खाना खा लेना ।"



" पैसा तू देगा !"



"एडवांस दे दूगा । सतपाल ने मुस्कराते हुए कहा और फोन बंद कर दिया ।



"क्या कहता है मनका?” मिथलेश ने पूछा ।



"लगता है, इस बार उसने खास ही सामान बनाया है । पच्चीस हजार पहले ही मांग रहा है।"



"कब आ रहा है ?"


"एक घंटे तक ।" सतपाल ने कहा और गंभीर अवाज मैं सिगरेट सुलगा ली-----" मै मोना चौधरी के बारे में सोच रहा हू, वो क्या कर रही होगी?"



"जबकि मैं मंगलू के बारे में सोच रहा हूं बो…!"



" मंगलू हर हाल में मोना चौधरी को तलाश करने की चेष्टा कर रहा होगा । उससे चाकू वापस लेने के लिए ।"



दोनों की नजरें मिलीं ।



" हालात खतरनाक हैं मोना चौधरी के लिए ।"
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 12 Jan 2017 13:34



. . मंगलू मोना चौधरी के फ्लैट में मोजूद था ।

यूं तो चेहरे पर शांती थी, पर मस्तिष्क मे खलबली मची हुई थी । रह-रह कर वो गुस्से से भर उठता था कि मोना चीधरी उससे चाकू छीनकर ले गई है ।



" मंगलू।" काफी देर बाद जंगला ने मंगलू से बात की थी ।
" हां !"


"तू तो मात खा गया !"



"सच मे, मोना चौधरी वहुत तेज है । मैंने उसे यूं ही समझा !" मंगलू ने कठोर स्वंर में कहा ।


“दुश्मन को कभी भी कमजोर नहीं समझना चाहिए !"



" मैंने उसे औरत समझा ।"



“औरत में तो बहुत ताकत होती है, अगर वो करने पर आ जाए तो…!"



"ये बात मैं पहले नहीं जानता था ।"


"अब जान गया !"


"हां ।"


"अब क्या करेगा?"


"मोना चौधरी से चाकू वापस लूंगा । तभी तो उसके फ्लैट पर उसका इंतजार कर रहा हूं।”



"अब तक तो उसे आ जाना चाहिए ।"


"हां ।"



"कहीं ऐसा तो नहीं कि वो अपने फ्लैट पर आएँ ही नहीं ।"



"ये सम्भव नहीं" । मंगलू के होंठ भिंच गए ।



"क्यों संभव नहीं, वो सोच रही है मंगलू उसके फ्लैट पर पहुंचकर उससे चाकू वापस ले लेगा ।"


“आखिर कब तक वो वापिस नहीं आएगी ?"


"तेरे को पता है कि अगर वो चाकू सतपाल के हाथों में पड़ जाएगा तो क्या होगा?"



"क्या होगा?"



"सतपाल चाकू को बे-असर कर देगा, फिर शैतान का बेटा जीवित नहीं हो पाएगा । उसे फिर से प्रयत्न करने होंगे और इन कामों में सौ बरस से ज्यादा का वक्त लग जाएगा ।"


"ओह, फिर तो सतपाल के पास जाना चाहिए ।"



"अभी चिंता की बात नहीं, मोना चौधरी ने चाकू सतपाल के हवाले नहीं किया ।"



"तुम्हें कैसे पता?"


"सतपाल पर हमारी नजर है ।"
"सतपाल इतना खतरनाक है तो उसे मार क्यों नहीं देते?" मंगलू बोला !



"सतपाल को मारना आसान नहीं, उसने खुद को सुरक्षित कर रखा है ।"



"क्या शैतान का बेटा भी उसे नहीं मार सकता ।"



"वो मार सकता है, लेकिन ये तभी होगा, जव वो अपने शरीर में प्रवेश करके जीवित हो उठे !"



"समझा ।"


कुछं पल उनके बीच चुप्पी रही ।



"मुझे मोना चौधरी के आने का इंतजार है जंगला !"



"ठहरो । मैं पता करता हूं कि मोना चौधरी के यहाँ पहुंचने की कब तक संभावना है ।"



उनकी बातचीत टूट गई । करीब तीन मिनट बाद जंगला की वापसी हुई ।।



"मोना चौधरी इसी तरफ़ आ रही है । वो यहा पहुचने वाली है ।"


मंगलू का चेहरा एकाएक तनाव से कठोर होगया ।


"अब मैं उसे नहीं छोडूंगा ।" मंगलू गुर्रा उठा ।


"उसके गले में नीला धागा है, शैतानी शक्तियों से वो धागा उसकी रक्षा कर रहा है ।"


"मैं वो धागा उससे छीन लूगा ।"


"तू भी तो शैतान का हिस्सा है ! तू उस धागे को छुएगां तो तेरे को नुकसान होगा ।'"



" मै उस धागे पर हाथ न डालूं?"



" नहीं, बैसे ही तुझे मोना चौधरी का मुकाबला करके उससे चाकू छीनना होगा।"



" ऐसा ही करूगां में।"


"तू फिक्र मत कर । मैं तेरे साथ हू । मोना चौघरी के सामने तू कमजोर पडा तो मैं तेरे शरीर के भीतर आ जाऊंगां ।"



"तेरे मे ताकत है?"



“बहुत! "



"तो मेरे पास ताकत क्यों नहीं है?"


"तूने शैतान के बेटे की मंडली में अभी-अभी प्रवेश किया है ।

नए लोगों के पास ताकते पहुंचने में देर लगती है । जव तु पुराना हो जाएगा तो तू भी मेरी तरह ताकतवर बन जाएगा ।"


तभी बाहरी दरवाजे पऱ कुछ आहटें उभरी । ।

"आ गई मोना चौधरी।" जंगला की फुसफुसाहट मंगलू के कानों में पड्री।


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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 12 Jan 2017 13:35


मोना चौधरी ने दरवाजा ,खोला और भीतर प्रवेश करते हुए, दरवाजा बंद कर दिया । उसके चेहरे पर गंभीरता ठहरी हुई थी । उसकी सोचे चाकू , मंगलू और सतपाल के गिर्द घूम रही थी । उसने तो सोचा था कि मंगलू उसे फ्लैट के बाहर ही कहीं मिलेगा, परंतु वो कहीं भी नहीं नजर आया था ।



मोना चौधरी जानती थी कि मंगलू इस तरह खामोश नहीं बैठने बाला था ।



वो जल्दी ही कहीं पर, उससे मुलाकात करेगा ।


ये तो उसने सपने में भी नहीं था कि मंगलू उसके फ्लेट में छिपा, उसका इंतजार कर रहा है ।



मोना चौधरी का, विचार-नहाने का था । उसके बाद काफी लेने का ।



ज्यों ही मोना चौधरी पीछे वाले कमरे में पहुंची कि ठिठकुकर रह गई ।



सामने की कुर्सी पर मंगलू बैठा था ।



“तुम......." मोना चौधरी चौंकी ।


मंगलू कठोर निगाहों से उसे देखता रहा।


मोना चौधरी ने गहरी सांस ली-खुद को संभाला ।



"यहां क्या कर रहे हो तुम?" मोना चौधरी के स्वर में अब सतर्कता आगई थी। "


"तुम्हारा इंतजार मोना चौधरी ।"


"यहां से बाहर निकल जा !" दोबारा कभी इधर नहीं आना ।" मोना चौधरी के दांत भिंच गए । "


“ठीक कहा तुमने । मैं फिर से तुम्हारा चेहरा भी नहीं देखना चाहता ।" मंगलू उठता हुआ बोला-----" वो चाकू मेरे हवाले कर दो, मैं यहां से चला जाता हूं । तुम्हें वो चाकू नहीं लेना चाहिए था ।"



" चाकू नहीं मिलेगा तुम्हे ?"

"वहम है तुम्हारा ।"



कुछ चुप रहकर मंगलू पूर्ववत् स्वर मे बोला ।


"वो चाकू शैतान के बेटे का है । तुम्हें हर हाल में चाकू वापस देना होगा । अगर तुमने ज्यादा एतराज उठाया तो तुम्हारी जान भी जा सकती है । बेहतर यहीं होगा कि चाकू मेरे हवाले कर दो ।"



"तुम फिर मेरे हाथों पिटना चाहते हो ?"


" पहले की बात और थी । तुमसे झगडा करने के लिए मैं तैयार नहीं था।" मंगलू ने कहा।


"मतलब कि अब तैयार होकर आए हो ।" मोना चौधरी का लहजा कडवा हो गया है . ,,



"तुम्हारी भला इसी में है की चाकू........ !"



"नहीं मिलेगा तुम्हें ।"



इसी पल मंगलू ने गुर्रा कर उसके ऊपंर छलांग लगा दी ।।


मोना चौधरी सतर्क थी ।


उसने फुर्ती से अपनी जगह छोडी और आगे जाते मंगलू की पीठ पर घूंसा जड़ दिया।


मगंलू फर्श पर लुढक गया ।



मोना चीथरी पलटी और मंगलू को देखने लगी ।


मंगलू संभला और मोना चौधरी को कहर-भरी नजरों से देखता कह उठा ।



"मैं अभी भी तुम्हें कम समझ रहा हूं लेकिन अब तुम मेरे हाथों से नहीं वचोगी ।"


मोना चौधरी वैसे ही खडी उसे देखती रही ।



मंगलू धीरे-धीरे सावधानी से मोना चौधरी की तरफ बढने लगा ।



एकाएक मोना चौधरी ने रिवॉल्वर निकाल ली ।


मंगलू ठिठका ।



"मेरी एक उंगली हिलेगी और तुम मर जाओगे रिवॉल्वर को जानते हो ना?"


" चाकू मुझे वापस दे दो !"


"यहां से बाहर निकल जा । दोबारा मेरे सामने पड़ा तो तेरी जान लिए बिना मानूंगी नही !"



" तू मेरे .......!"
"बाहर निकल जा, चल ड्राइंगरूम मे, दरवाजा खोल और निकल जा, वरना गोली मार दूंगी ।"



मंगलू दांत भिंचे पलटा और कमरे से निकलकर ड्राइंगरूम मे पहुचा ।


"मंगलू !" जंगला की फुसफुसाहट उसके कानों में पडी----"तू फिर बेबस होगया ।"



"क्या करूं ? उसने रिवॉल्वर पकड रखी है ।"



"जानता हूं रिवॉल्वर की गोली तेरे शरीर को नुकसान पहुचा देगी । दर्द देगी तेरे को ।"



" कया करूं मैं?"


तभी मोना चौधरी की आवाज मंगलू के कानों में पडी ।



"स्क क्यों गया मंगलू? बाहर निकल जा यहां से ।" मंगलूं धीमे ढंग से दरवाजे की तरफ़ बढा । "


"मैं आऊँ?" जंगला ने पूछा।


"आ जा !"



इसके बाद दो पल ही बीते होंगे कि मंगलू एकाएक फर्श पर गिरकर तड़पने लगा ।



मोना चौधरी के माथे पर बल पड़े । रिवॉल्वर उसके हाथ में दबी थी ।



" मिनट-भर बीता कि मंगलू का शरीर शांत पड गया ।


मोना चौधरी सावधान थी कि मंगलू कोई ड्रामा न कर रहा हो ।


परंतु जब उसका शरीर शांत पड़ा और होंठों से झांग निकलते देखा तो मन-ही-मन चौकी ।



मिनट-भर और बीत गया । मंगलू के शरीर में जरा भी हरकत न हुई तो मोना चौधरी सावधानी से उसके पास पहुंचने लगी ।


“मंगलू ...!" मोना चौधरी ने पुकारा ।


मंगलू का शरीर वैसे ही पड़ा रहा।


मोना चौधरी कुछ और पास पहुंची ।


"मंगलू उठो…अपना चाकु ले लो ।"


परंतु मंगलू के शरीर में हरकत नहीं हुई ।


मोना उसके करीब जा पहुंची ।


यहीं चूक हो गई मोना चौधरी से ।


उसी क्षण मंगलू की आंखें खुली ओंर उसके शरीर ने तेजी से हरकत की ।
मंगलू के जूते की ठोकर मोना चौधरी कै रिवाल्वर वाले हाथ की कलाई पर पडी।


सच बात तो ये थी कि ये सब इतनी तेजी से हुआ कि मोना चौधऱी कुछ भी न समझ पाई।


रिवॉल्वर उसके हाथ से निकलकर छत से जा टकराईं और कोने में जा गिरी।


उसी पल मंगलू का शरीर रबड़ के पुतले की तरह उछला और उसके जूते की ठोकर उसके सिर पर पडी । मोना चौधरी के होठो से चीख निकली और सोफे टकराती वो नीचे जा गिरी ।


एक तो कलाई का दर्द ऊपर से ठोकर की बजह से घूमता सिर । मोना चौधरी ने अपने पर काबू पाने की चेष्टा की, परंतु सफ़ल नहीं हो सकी । बेदम-सी वहीं पड़ी रही ।


मगलू पास पहुंचा और मुट्ठी में मोना चौधरी के सिर के बालों को पकडकर भिंचता बोला ।


"चाकू दे मुझे ।"


नीचे पडी मोना चौधरी ने मंगलू की टांगे खींचनी वही, परंतु सफ़ल न हो सकी ।


मंगलू ने सिर के बाल छोड़े और उसकै सिर पर घूंसा मारा ।


मोना चौधरी पूरी तरह फर्श पर लुढ़कती चली गई बेहोश होगई।


उसी पल मंगलू लगा जैसे उसके भीतर से कोई चीज निकली ।


अगले ही पलं मंगेलू के कानो मे जंगला की फुसफुसाहट पड्री ।


"कैसा रहा मंगलू?"


"वहुत अच्छा ।"


" देखा, मैंने तीन वारों में ही मोना चौधरी को लुढका दिया ।"


"हां । तुममें सच से वहुत ताकत है ।"
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 12 Jan 2017 13:36



" ऐसी ही ताकत वक्त बीतने के साथ तेरे में भी आ जाएगी । मैंने तो चालाकी से काम लिया । पहले बेहोश होने का नाटक किया, जब मोना चौधरी लापरवाह हो गई तो मैंने उस पर हमला कर दिया ।"


" तुम्हारी चालाकी देखकर मुझे अच्छा लगा ।"

"दुश्मन काबू में न आए चालाकी से काम लेते हैं । याद रखना ।"
" हां !"



"चल इसके पास से चाकू निकाल ।”


मंगलू आगे बढकर मोना की तलाशी लेने लगा ।


फिर पीछे हटता परेशान-सा बोला ।


"चाकू इसके पास नहीं है ।"


"ये कैसे हो सकता है, तूने ठीक से तलाशी ली?"


" हां !"



"कपडे उतार इसके।"


मंगलू एक-एक करके बेहोश पड्री मोना चौधरी के कपडे उतारने ने लगा ।


तीन चार मिनट में उसने बेहोश रोना चौधरी पूरे कपडे उतार दिए ।


चाकू कहीँ भी न मिला ।


"ओंह । तो मोना चौधरी ने चालाकी की हमसे ।" जंगला की फुसफुसाहट कानों में पडी ।


“चालाकी?"


“हां ।। मोना चौधरी यहां आने से पहले चाकू कही रख आई है । इसे शक होगा कि तू इससे चाकू लेने आएगा ।"


“ओह! तो अब क्या किया जाए? मैं मोना चौधरी को होश में लाता हूं ।



"ऐसे नहीं । होश में आकर, ये के बेकाबू हो जाएगी ।" जंगला की फुसफुसाहट कानों में पड़ रही थी----" पहले इसे उठाकर कुर्सी पर लिटा और सख्ती से इसके हाथ-पांव बांध दे ।"



" ठीक है !" मंगलू डायनिंग टेबल की कुर्सी ले आया । पर्दे की डोरी निकाल ली । मोना चौधरी को कुर्सी पर बैठाया और पुश्त से पीठ लगाकर सख्ती से डोरी लपेटकर बांधी, फिर टांगे बांधी ।



बेहोश मोना चौधरी से बंध गई ।


परेशान कर देने वाली बात ये कि उसके शरीर पर कोई कपडा न था ।।


परंतु मंगलू पर जैसे इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था ।


वो बाथरूम में गया और पानी का भरा मग ले लया और मोना चौधरी पर छींटे मारकर उसे होश में लाने का प्रयत्न करने लगा ।
"मंगलू ।" जंगला की फुसफुसाहट कानो में पड्री-'ये मोना चौधरी है शानदार ।"


"मेरे से बेकार की बातें न कर ।"



" ये बेकार की वाते है ?"


"मेरे लिए !"



" तेरे लिए काम की बातें क्या है ?"


"पैसा-मुझे पैसा चाहिए और कुछ नहीं ।"



“पैसा आ गया तो तू औरतों के चक्कर में पडेगा ।"



“मैं नहीं जानता !"


"हुम्म ! मैं जब इंसान होता था से कितने मजे लेता था, लेकिन मोना चौधरी जैसी मुझे नहीं मिली थी ।"


मंगलू छींटे मारते हुए मोना चौधरी को होश में लाने का प्रयत्न .. कर रहा था है ।



" तेरे को मालूम है कि जब मैं इंसान होता था तो मेने तेरह औरतों के साथ बलात्कार किया ।"


" तेरह के साथ !"



" हां, पुलिस परेशान हो गई, परंतु मुझे ढूंढ़ न सकी, किसी और को ही पकडकर उसे बलात्कारी बना दिया । वेचार खामखाह ही फस गया और मैं मौज करता रहा परंतु…!"


"परंतु क्या.......!"


"मोना चौधरी जैसी कोई नहीं मिली मुझे ।"


"ये बाते छोड़, मुझे चाकू की फिक्र हो रही है । शैतान के बेटे को मैं क्या कहूंगा कि मैं उसके चाकू की रक्षा नहीं कर सका । ये चाकू को जाने कहां रख आई है ।" मंगलू व्याकुल-सा कह उठा ।


तभी मोना चौधरी के होंठों से हल्की-सी कराह निकली ।


“होश में आ रही है !" जंगला की फुसफुसाहट उसके कानों में पड़ी ।।



अगले मिनट-भर में मोना चौधरी ठीक से होश में आ गई ।।



अपने शरीर पर कपडे न पाकर और खुद को बंधा पाकर वो तड़प उठी । अपने को आजाद कराने की चेष्टा की, परंतु कोई फायदा न हुआ । दांत पीसकर वो मंगलू को देखने लगी ।


मगंलू कहर भरे अंदाज में मुस्कराया।


"तुम मेरा मुकाबला नहीँ कर सकती ।"
"मेरे कपड़े उतारने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई ?" मोना चौधरी है गुर्राई ।


" तुम्हारे कपडों मेँ से चाकू तलाश कर रहा था !"



" वो तुम्हें कमी नहीं मिलेगा ।"



"तुम्हें हमसे झगडा नहीं मोल लेना चाहिए । हमारी तकतों का तुम मुकाबल नहीं कर सकती । हम जब भी चाहें, तेरी जान ले सकते और तू हमारा कुछ नहीं बिगाड सकती ।" मगलू ने शांत स्वर में कहा ।


मोना चौधरी उसे खा जाने वाली नजरों से देखती रही ।



"शैतान के बेटे का चाकू मुझे दे दे ।"



"मेरे पास नहीं है ।"


"तो किसे दिया है तूने?"


"कभी भी मालूम नहीं कर सकोगे ।" मोना चौधरी दृढता भरे स्वर में कह उठी ।



"भूल है तुम्हारी हमें सब पता चल जाएगा ।"
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 12 Jan 2017 13:37



तभी मंगलू के कानों मे'जंगला की फुसफुसाहट पडी ।


"ये बता देगी । तू इसके शरीर पर चाकू से कट लगा ओर उस पर नमक-मिर्च लगा, बहुत दर्द होगा इसे । बताएगी ये । तू पता कर चाकू इसने किसे दिया !"



"ओह तो फिर इसे यातना देनी होगी ।"


" दे.......जल्दी कर.....।"


मंगलू मोना चौधरी से बोला । "


" मोना चौधरी सीधी तरह चाकू दे दे, वरना तेरे को बहुत तकलीफ़ दूंगा ।"


मोना चौधरी होंठ भिंचे उसे देखती रही।


" मै तेरे जिस्म पर कट लगाऊंगा और उस पर नमक-मिर्च लगाऊंगा । तेरे को बताना ही पडेगा कि तूने चाकू कहां रखा है !"


"कोशिश कर ।"


मंगलू किचन में गया और चाकू के साथ नमक और लाल मिर्च भी ले आया ।


" तू ये काम किसके लिए कर रहा है?" मोना चौधरी ने पूछा ।



" शैतान के बेटे के लिए कर रहा हूं ।" उसने नमक-मिर्च एक तरफ रखा ।
"क्यों ?"


" वो मुझे ढेर सारा पैसा देगा । वहुत पैसा देगा ।"



"तू मेरा साथ दे, मैं तेरे को पैसा दूंगी ।"


"ये कभी नहीं हो सकता, मैं सिर्फ शेतान कै बेटे की सेवा करूगा ओर उसी से पैसा लूंगा ।"


चाकू थामे मंगलू मोना चौधरी के पास आ पहुचा…"बोल, चाकू देती है या यातना का दौर शुरू करूं ।"



"तू जीत नहीं सकेगा, बेशक मेरे शरीर के टुकड़े हीं क्यों न कर दे ।"


मंगलू ने चाकू की नोक उसकी बाह में घूसेडी और लम्बा चीरा लगा दिया ।



@@@@@@@@@@@@




तात्रिक बेलीराम इस वक्त अपने आरामकक्ष में लेटा हुआ था, कि एकाएक चौंककर उठ गया है उसे अहसास हुआ कि पास में कोई है, परंतु देखने पर भी कोई न दिखा ।।



"बेलीराम !" तभी वहां शेतान के बेटे का मद्धिम-सा स्वर गूंजा ।



"ओह, महागुंरु !" बेलीराम जल्दी नीचे उतरा और फर्श पर दंडवत हो गया ।


"खडा हो ।" शेतान के बेटे का स्वर पुन: गूंजा ।


बेलीराम खड़ा हुआ । "


"हुक्म महागुरु!"


"समस्या है ।"


"मेरे होते हुए समस्या कैसे आ सकती है महागुरु?"


"आ गई ।"


"समस्या बताइए ?"


"मैं मृत्यु से वापस जीवन में आना चाहता हूं। ये बात तुम अच्छी तरह जानते हो । तैयारी पूर्ण हो चुकी है, परंतु कोई मुझे रोक रहा है और जो रोक रहा है, वो कोई युवती है और मेरी शक्तियां मुझे इस बात का अहसास दिला रहीं कि उस युवती का नाम मोना चौधरी है ।" शैतान के बेटे की आवाज गूजी ।


"असम्भब तुम जैसी महाशक्ति का रास्ता रोक पाने की हिम्मत किसमें हे?”


"इस वक्त मैं मजबूर हूं क्योंक्रि मैं मृत्यु से वापस जीवन में प्रवेश करने की चेष्टा में व्यस्त हूं । ऐसे मे अपनी शक्तियों का इस्तेमाल नही कर सकता !"


" ओह !"
"ओह...!"



"तुम्हे मेरी सहयता करनी होगी ।"


"हुक्म कीजिए ।"


"मंगलु मेरा चाकू लेकर तुम तक आ रहा था कि रास्ते में मोना चौधरी नाम की युवती के साथ उलझ गया और वो चाकू मोना चौधरी ने हथिया लिया ।"


" समझा, वो युवती क्या साधारण है?”


" हां, साधारण है, परंतु दूढ़ इच्छाशक्ति की मालिक है !! मंगलू ने उसे दोबारा दूंढ़ निकाला, परंतु चाकू वो कहीं पर छुपा चुकी है । ऐसे में मंगलू उसे बांधकर शारीरिक कष्ट दे रहा है कि वो चाकू के बारे में बता दे ,परंतु मेरी शक्ति मुझे इस बात का अहसास करा चुकी है कि मोना चौधरी चाकू के बारे में मंगलू को कुछ नहीं बताएगी ।"



तात्रिक बेत्तीराम के चेहरे पर गंभीरता दिखाई देने लगी थी ।


"अब मेरी आशाएं तुम पर है वेलीराम! "


“मैं हमेशा आपकी आशाओं पर खरा उतरा हूं।"


" कुछ ऐसा इतजाम करो कि मोना चौधरी खामोशी से चाकू मंगलू के हवाले कर दे ।"


"अबश्य । इन साधारण लोगों की सबसे बडी कमजोरी, इनके रिश्ते होते हैं । जिसकी वज़ह से ये सब बाते मानने पर मजबूर हो जाते हैं । मुझे मोना चौधरी का पता बताइए । "



“मै जंगला को तुम्हारे पास भेज़ता हुं, उससे तुम जो चाहो, पूछ लेना" ।


"अवश्य महागुरु, जंगला इस वक्त मंगलू का साथ दे रहा है ?"

" हां !"


इसके वाद वहां चुप्पी छा गई ।


बेलीराम व्याकुलता-भरी मुद्रा में उस कमरे में टहलने लगा । दो मिनट बीतें होंगे कि जंगला का स्वर वहां गूंजा ।


" कहो बेलीराम, तुमने मुझे याद किया?"


बेलीराम ठिठका । बोला ।


" क्या मोना चौधरी चाकू के बारे में जानकारी दे देगी?"
"कुछ समझ मे नही आता वो यातना मे तडप रही है , परंतु चाकू , के बारे मे नही बता रही।"


"उसे यातना देनी बंद कर दो ।"


"जो हुक्म ।"



"उसे आजाद छोड़ दो । मंगलू को उससे दुर कर दो !"



" ऐसा ही होगा ।"



"मोना चौधरी कां पता बताओ मुझे ।"


जंगला ने मोना चौधरी का पता बताया ।



"ठीक है, अब तुम जाओं और जैसा कहा है वैसा ही करो ।"
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Postby kunal » 12 Jan 2017 13:37



तांत्रिक बेलीराम कुछ देर तक वैसे ही खड़ा सोचता रहा फिर आगे बढा और अपने तकिए के नीचे रखा मोबाइल फोन उठाकर किसी के नम्बर मिलाने लगा ।


" तीन-चार बार कोशिश करने पर नम्बर मिला । बेल बजने लगी ।


" हैलो ।" उधर से आवाज आई


"रंजन तिवारी बोल रहे हो ?" बेलीराम बोला ।


" हां, तुम कौन हो ?”



"पहचाना नहीं, हम तांत्रिक बेलीराम हैं ।"


" ओह। बेलीराम जी । पांव लागूं…पांव लागू...!


"कैसे हो?"


"आपका आशीर्वाद है ।"



"तुम पर मर्डर के तीन केस चल रहे थे उनका क्या हुआ?"



“आपके आशीर्वाद से सब ठीक हो गया । जब से आपने मुझें ताबीज दिया है, मेरी सारी मुसीबते भाग गई हैं । तीनों केसों के गवाह पीछे हट गए । मैं साफ़ बच गया । आपने मुझे बचा लिया ।"


"कोई और समस्या हो तो बताना" ।

"अब तो आपका ही भरोसा है ।"


" हमारा एक काम है, अर्जेंट ।"

"हुक्म कीजिए।"


" एक युबती है मोना चौधरी । तुम्हारे शहर की ही है । उसने हमारा कीमती चाकू छीन लिया।"



"मुझ पर भरोसा रखिए, मैं उससे चाकू लेकर, आपको सौंप दूंगा !"
"वो इस तरह चाकू नहीं देगी, हम अपनी शक्ति से देख चुके है ।"


"उसके किसी खास सम्बंधी को पकड़कर उस पर दबाव बनाओ, तभी ये काम होगा ।"



"मै समझ गया, आप उसका पता बताइए बेलीराम जी !" तांत्रिक बेलीराम ने पता बताया ।


"काम हो जाएगा !"


"कब तक होगा काम?” बेलीराम बोला-" उसके पास देर तक वो चाकू रहना ठीक नहीं...!"


"आज के दिन में ही काम हो जाएगा ।"


"मुझे काम होने की खबर कर देना ।"


"अवश्य..!"


बेलीराम ने फोन बंद किया ।


चेहरे पर गंभीरता नाच रही थी ।

@@@@@@@@@@@@



मोना चौधरी का बदन जगह-जगह से कटा हुआ था । हर कट पर मंगलू नमक और लाल मिर्च लगा चुका था । असहनीय पीड़ा हो रही थी मोना चीथरी को, परंतु होंठ भिंचे वो सह रही थी।


रह…रहकर दर्द से उसका पूरा शरीर कांप उठता था । मंगलू बार-बार उससे चाकू मांग रहा था, परंतु मोना चौधरी मुंह खोलने को तैयार नहीं थी ।


मोना चौधरी के लिए ये तकलीफ-भरा दौर था ।


एकाएक मंगलू व्यंग-भरे अंदाज़ में हंसकर बोला ।



“तुम ज्यादा देर अपना मुह बंद नहीं रख सकती । जल्दी टूट जाओगी । तव बताओगी मुझे कि चाकू कहां छिपाया है तुमने?”


“अपनी कोशिश करते रहो।" मोना ने भिंचे स्वर मे कहा।



"तुम मुझसे हार जाओगी ।" मंगलू पुन: हंसा ।



मोना चौधरी की बांह-पेट-छातियां हर जगह चाकू के कट लगे दिखाई दे रहे थे । उनसे बहता खून रुक चूका था । बार- बार उसके जिस्म में दर्द की लहरें उठ रही थी ।


मंगलू ने पुन: चाकू उठाया और उसकी टांगों को देखा ।


"अब तुम्हारी टांगों की बारी है ।" इसी पल मंगलू के कानों में जंगला की फुसफुसाहट गूंजी ।
" मगंलू.....!"



"क्या है ?"



मोना चौधरी की निगाह भी मंगलू पर जा टिकी ।


" छोड़ दे मोना चौधरी को ।"


"क्यों छोड़ दूं ?"


" तांत्रिक बेलीराम कहता है ।"


" ये कौन है?”



"शैतान के बेटे का खास सेवक है । मेरा बड़ा है, उसने मना किया है, ये सब करने को ।"



"क्यों मना किया?"


" उसका कहना है कि इस तरह मोना चौधरी नहीं बताएगी, वो कोई और रास्ता इस्तेमाल करेगा ।"



"मैं बेलीराम की बात क्यों मानूं?"



" माननी पड़ेगी, वो शैतान के बेटे का सबसे खास सेवक है । जों हमारे साथ है, वो बेलीराम की बात मानेगा ।"



"मैँ न मानूं तो !"


"तो तेरे को सजा मिलेगी । मेरी मान तो इस काम को रहने दे ।"


"तू तांत्रिक बेलीराम से मिलकर आया है अभी ?"



"हां, उसने बुलाया था, जाना पड़ा ।"


"उसे कह कि मैं इसी तरह मोना चौधरी का मुह खुलवाकर चाकू के बारे मे पता लगा लूंगा।"



"वो अपनी ताकत से देख चुका है कि मोना चौधरी इस तरह चाकू के बारे मे नहीँ बताएगी।"


मंगलू का चेहरा कठोर होगया ।।

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