खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज complete

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 12 Jan 2017 13:38


मोना चौधरी, मंगलू के होठो से निकलने वाले शब्दों की ध्यानपूर्वक सुन रही थी । इतना तो वह समझ चुकी थी कि मंगलू इस वक्त किसी, से बात कर रहा है और दूसरी आवाज उसे सुनाई नहीं दे रही ।



" तुम मेरे काम में अडचन डाल रहे हो जंगला !"


" जो कह रहा हूं मेरी बात मान । छोड़ दे मोना चौधरी को ।"


मंगलू उठ खड़ा हुआ ।।



" ये मुझे अच्छा नहीं लग रहा । मुझे इस तरह काम से नही रौकना चाहिए !"



" भले के लिए रोका जा रहा हैं !"

"तो अब मैं क्या कसं?"


“मोना चौधरी को बंधनों से आजाद कर और यहाँ से बाहर निकल जा ।"



"कहीँ तू मोना चौधरी के शरीर का दीवाना तो नहीं हो गया, जो उसे बचाना चाहता. . . । "



"बकवास मत कर । अगर मैं इंसान होता तो तब तू ये बात कह सकता था !"



" तो अब तू क्या है?"


"प्रेत-समझदाऱ प्रेत.......!"


मगंलू ने बेमन से पास रखा चाकू उठाया और मोना चौधरी के बंधन काटने लगा ।



मोना चौधरी आजाद हो गई । अगले ही पल वे अपने कपडों पर झपटी और कपड़े पहनने लगी । इतना तो बो जान चुकी थी कि मंगलू उसे आजाद नहीं करना चहता, परंतु किसी के कहने पर उसे आजाद करना पड़ रहा है ।



" किसके ?



कोई जंगला नामक व्यक्ति तो नहीं । मंगलू ने बातों के दोरान जंगला नाम का जिक्र कियो था ।


"यहां से बाहर निकल जा ।" जंगला की फुसफुसाहट मंगलू के कानों में पडी ।


मगंलू दरवाजे की तरफ बढा और देखते-ही-देखते बाहर निकल गया ।


कपड़े डालती मोना चौधरी हैरान थी, मंगलू के इस तरह चले जाने से ।


मंगलू चाकू लिए विना उसे छोड़कर नहीं जा सकता था, परंतु चला गया ।



जाने क्यों सोना चौधरी को अब और भी ज्यादा खतरा महसूस होने लगा । अवश्य कोई खास बात है, जो मंगलू उसे आजाद छोडकर चला गया ।



इन्हें सोचों में डूबी मोना चौधरी ने अपने शरीर पर बने कट्स की तरफ ध्यान दिया । कट ज्यादा गहरे न थे । वो खुद ही इन पर दवा लगा सकती थी, परंतु मंगलू उसे छोडकर खामोशी से क्यों चला गया?



@@@@@@@@@@@@
मनका!



पचास बरस का सूखा- सा पतला व्यक्ति था । उसके सिर के वाल अक्सर बेतरतीबी से बिखरे रहते थे ।


किसी ने भी उसे अच्छे कपडे पहने नहीं देखा था । अक्सर उसकै शरीर पर मैले से ही हो रहे कपड़े नजर आते थे । लोग उसे पहले दर्जे का बेवकूफ समझते थे ।


एक थैला कंधे पर लटकाए उसने फ्लैट में प्रवेश किया तो सामने ही मिथलेश और सतपाल बैठे दिखे । सतपाल दुसरी कुर्सी पर टांगे रखे सिगरेट के कश ले रहा था।


"तो सिगरेट फूंकी जा रही है ।" मनका हंसकर कह उठा ।


" तुम्हारा इंतजार हो रहा है !"


" मै तो आ गया । सिगरेट पिलाओ ।"


सतपाल ने पैकेट निकलकर उसकी तरफ बढाया ।


मनका ने सिगरेट सुलगाई और ।मिथलेश को देखकर बोला. ।


"राजन के क्या हाल हैं?"



"बढिया हैं !"


"किधर है वो ?"



"क्यों?" मिथलेश मुस्कराया…"तेरे को उससे क्या काम पड गया?"



" पिछली बार का दो हजार रूपया उससे लेना है । ये काम है ।" मनका ने कश लिया ।।


“तू बढिया सामान लाता नहीं।” मिथलेश बोला ।।



" इसबार बढिया सामान है।"



" दिखा !"



कश लेने के पश्चात मनका ने अपना थैला टेबल परं रखा और उसमे से छोटा-सा अजीब-सी शक्ल का हथियार निकाला । जो कि वहुत हद तक रिवॉल्वर से मेल खाता था, परंतु उसका आगे का मुंह डेढ़ इंच व्यास में खुला हुआ था । इस हथियार का रंग गहरा भूरा था ।।


" ये क्या है?" सतपाल से पूछा ।



" इससे आत्माएं दूर रहती ।" मनका मुस्कराया ।।


" कैसे ?"
" ऐसे! " कहते हुए मनका ने उस हथियार का मुंह दूसरी तरफ़ किया और ऊपर लगा बटन अंगूठे से दबा दिया ।



तेज आवाज के साथ, हथियार के मुंह से आग का मनका भाले की तरह उठा और सात फीट आगे तक गया । फुर्ती से बटन पर से हाथ हटा लिया ।


भभका गायब हो गया ।।


सतपाल मुस्कराया ।।


"ये अच्छी चीज है ।"


"मेरी इस पर वहुत मेहनत लगी । पैसा भी वहुत लगा है !" मनका ने उस हथियार को टेबल पर रखा----“हथियार का नाम मैंने अपने नाम पर मनका रखा है ।"



फिर उसने थैले में से कांटेदार बाॅल निकाली, जिस पर रबड़ की डोर बंधी थी-----" ये कांटों वाली बाॅल है । रबड़ की डोरी से बंधी है । ऐसी देखी होंगी तुमने, परंतु उन पर कांटे नहीं होते । इस पर एकाएक इंच लम्बे कांटे हैं और इसे ठीक से फेका जाए तो सात से दस कीट तक दूर जा सकती है । कांटे जिसको लगेंगे वो भाग जाएगा ।"




"और जव वार करके बाॅल वापस आएगी तो हाथ से कैसे पकड़ी जाएगी । कांटे लगेंगे ।" बोला सतपाल ।।



"नहीं, ऐसा कुछ नहीं होगा । बॉल जब बापस आएगी तो बाॅल के कांटे बाॅल में धंस जाएंगे । बाॅल की डोरी-ज्यों लम्बी होरी, कांटे बाॅल से निकलकर खुलते चले जाएंगे । ये देखो ।" मनका ने करके दिखाया ।



" बढिया है ।" सतपाल बोला । .



" पहले वाले मनका हथियार पर मेरे वहुत पैसे खर्च हुए हैं ।" मनका बोला ।



"अब तू क्या मांगता है?"



“पच्चीस हजार ।"



“ये तो ज्यादा हैं ।"



"मैं सिर्फ तुम्हारे लिए काम करता हूं रोटी-पानी नहीं चलेगी तो आगे कैसे काम कर पाऊंगा ।"



"मिथलेश दे दे इसे ।" सतपाल बोला ।
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 12 Jan 2017 13:39




मिथलेश उठा और दूसरे कमरे की तरफ़ बढ गया ।



"दो हजार पहले का भी है..!" मनका ने कहना चाहा ।
" वो राजन से लेना, वो ही देगा" ।


"वो है कहां?"


"काम पर है ।" मिथलेश दूसरे कमरे में चला गया ।


तभी सतपाल के फोन की बेल बजी ।



उसने स्क्रीन पर आया ऩम्बरं देखा और तुरंत सीधा बैठता बोला ।


"कहो राजन....!"


"..राजन !" मनका फौरन बोला…“इससे मेरे दो हजार के बोरे में पूछ लो !"



"मैं तांत्रिक बेलीराम के ठिकाने पर पहुंचने वाला हू । थोड़ा-सा रास्ता बचा है ।"



"सावधार्ना से काम करना, बेलीराम शातिर है!"


"मैं सतर्क रहुंगा ।"



" खबर देने रहना ।"



"ये कठिन होगा । फोन की चार्जिग खत्म हो जाएगी तो वहां कहां फोन चार्ज हो पाएगा
"



"तुमने बेलीराम की भीतरी जानकारियां हासिल करनी हैं, खास तौर से ये वात जाननी है कि उसने शैतान के बेटे का शरीर कहा पर सुरक्षित छिपाकर रखा हुआ है ।" सतपाल ने कहा ।



"ठीक है बंद करता हू ।" उधर से राजन ने कहा ।



सतपाल ने फोन बंद करके जेब में रखा ।



“मेरे दो हजार के बारे में उससे पूछ लेते, वो ये तो बता देता कि मैँ सच कहा रहा हूं ।"


सतपाल ने कुछ नही कहा ।।



" यै शैतान के बेटे का क्या चक्कर है?" मनका ने पूछा ।।



"मुझे बताओगे तो मैं उसी के हिसाब से हथियार वनाऊंगा ।" मनका ने कहा ।



" शैतान का बेटा पुन: अपने मृत शरीर में आकर जीवित होना चाहता है ।"


"शेतान का बेटा ताकतवर है?"



"बहुत । 210 बरस पहले उसे अपना शरीर छोडकर भागना पडा था ।। पुन: जीवित इसलिए होना चाहता है कि इसका प्रिय भोजन इंसानी खून है । खुन पीने में इसे बहुत मजा आता है ।"
“डेंजरस है ।"



" हद से ज्यदा ।।"



" शैतान के बेटे से मुकाबला करने के लिए मैं कोई हथियार बनांऊगा , वेसे ये जो मनका हथियार है, ये भी शैतान के बेटे पर इस्तेमाल किया जा सकता है । क्योंकि इसमे से पवित्र आग निकलती है, बुरी आत्माएं पवित्र आग से डरती, हैं ।।"



तभी मिथलेश नोटों की गड्रिडयां थामे वहां पहुंचा ।



"ये लो ।" टेबल पर रखते वो बोला… "पच्चीस हजार !"


मनका ने गड्डियां उठाकर अपने थैले में डालते हुए कहा ।।


" राजन बाला दो हजार भी दे देते तो हिसाब नक्की हो जाता ।"



"इस बारे में हमें राजन ने कुछ नहीं बताया ।"




"वो भूल गया होगा ।" मनकर ने सतपाल से पूछा…"तुम्हारा क्या ख्याल है, शैतान का बेटा अपने शरीर में आकर जीवित हो जाएगा ।"



"'यकीन के साथ कुछ नहीं कंह सकता ।"



"लेकिन वो अपनी कोशिश में सफल होने कर दम रखता, है ।" मिथलेश ने कहा ।



" समझा ।" मनका थैला संभालते बोला-“चलता हू बुरी आत्माओं से लड़ने के लिए कोई नया हथियार सोचता हूं ।"



मनका चला गया।।



सतपाल ने मिथलेश को राजन के फोन के बारे मैं बताया ।


" अगर बेतीररम जान गया राजन की असलियत तो राजन खतरे में पड़ सकता है !" मिथलेश ने कहा ।


सतपाल खामोश रहा ।



"मोना चौधरी को फोन करो ।" मिथलेश बोला ।



"मोना चौधरी को ?"


" उससे चाकू के बारे में फिर पूछो !"



सतपाल ने क्षणिक सोच के पश्चात फोन निकाला और मोना चौधरी का नम्बर मिलाने लगा । दूसरी तरफ वेल बजी, फिर मोना चौधऱी की आबाज कानों मे पडी ।


"हैलौ !!"
"मैं बोल रहा हूं , तुम्हें चाकू हमे है देना चाहिए मोना चौधरी।"


"फोन पर तुम्हें ऐसी बात नहीं करनी चाहिए।"

" तो ?"


"पारसनाथ ने तुम लोगों के' पास बैठकर फोन पर मेरे से जो बात कही, उसे मगंलू जान गया था !"



"तव मंगलू पास था, तुम्हारे फ्लैट पर ।"



" अब भी आस-पास ही है । पाच मिनट पहले वो यहां से गया ।"


"क्या मतलब ?"
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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 12 Jan 2017 13:40




मोना चौघऱी ने सतपाल को कम शब्दों मे बताया कि उसके साथ क्या हुआ।


सुनकर सतपाल कह उठा ।


" तो वो अचानक तुम्हें छोड़कर क्यों चला गया ?"


" यही तो समझ मे नहीं आ रहा !"


"ये उनकी कोई चाल है वरना तुम्हें छोड़ देने का कोईं मतलब भी नहीं था !"



“मेरा भी यही ख्याल था।"



"तुम्हें वो चाकू हमें देना चाहिए । तुम्हारे पास से निकल गया तो बहुत गडबड हो जाएगी !"




मीमोना चौधरी चुप रही।


" बोलो !"



" इस बारे मे पारसनाथ से बात कर लो !" मोना चौधरी ने शांत स्वर मेँ कहा…।



" ओह समझा ।" कहकर सतपाल ने फोन रखा----" वो चाकू पारसनाथ के पास है !"


" क्या कह रहे हो?" मिथलेशबोला।


" चाकू लेकर मोना चौधरी सीधे उसके पास ही चाकू रखने गइ होगी?"



"मोना चौधरी हमें चाकू देने को तैयार है?"



"हाँ वो कहती है कि पारसनाथ से ले लो । तुम्हारे पास पारसनाथ का फोन नम्बर होगा !"
" हां ।" मिथलेश फोन टेबल के पास पहुचा और ड्रायर खोलकर उसके भीतर पड़े कार्डों को चैक करने लगा । चंद पलों के बाद ही उसके हाथ से पारसनाथ का कार्ड था ।


उन्होंने पारसनाथ को फोन किया ।


उधर से डिसूजा ने फोन उठाया ।


"पारसनाथ से बात कराओ ।" मिथलेश ने कहा ।


"वो इस वक्त है नहीं ।"


"उसका मोबाइल फोन नम्बर दो ।"



"नहीं दिया जा सकता । आप आधे घंटे तक फोन कर ले । शायद वो आ जाएं ।"


मिथलेश ने रिसीवर रखते हुए कहा ।


" पारसंनाथ इस वक्त वहां नहीं है।"


"हम वहीं चलते हैं पारसनाथ के रेस्टोरेंट में !"


@@@@@@@@@@@@





मोना चौधरी ने अपने सारे जख्मों को साफ़ करके, उन पर दवा लगाई और ऊपर कपड़े पहन लिए । अव जख्म शरीर के नीचे वाले हिस्सों में थे, इसलिए वे कपडों के नीचे छिप गए थे ।।



मोना चौधरी अभी तक नहीं समझ पा रही थी कि मंगलू उसे यातना देते-देते एकाएक छोड़कर क्यों चला गया? क्या वजह रहीँ उसे एकाएक छोड़ देने की? मोना चीधरी ने काॅफी और ब्रेड पीस तैयार किए । खाने के पश्चात आराम किया । घंटा-भर उसकी आंख भी लग गई । फिर कॉलबेल के तीव्र आवाज पर ही उसकी आंख खुली थी । मोना चौधरी उठी ।


आई मैजिक से बाहर देखा तो कोई अजनबी चेहरा ही दिखा । कुछ सोचने के बाद उसने दरवाजा खोला और सामने खड़े व्यक्ति को देखा । उसके साथ दो लोग थे ।


"नमस्कार जी! मेरा नाम रंजन तिवारी है ।" उस व्यक्ति ने हाथ जोडकर कहा-----" आप मोना चौधरी हैं?"


" हाँ ।" मोना चौधरी के माथे पर बल पड़े ।


"अपना परिचय मैं दे दूं । इलेक्शन दो बार हार चुका हूं । खून खराबा मामूली बात है, पुलिस से मेरा याराना है । अव तो आप समझ ही गई होंगी कि मैं कैसा बंदा हूं । भीतर नहीं आना मुझें, मैं यहीं पर खड़ा होकर बात करूंगा और चला जाऊंगा ।" फिर वो अपने आदमी से बोला-----" फोन लगा ।"

उसका साथी फोन लगाने लगा ।
"क्या चाहते हो तुम लोग?" मोना चौधरी के माथे पर बल नजर आने लगे ।



"अभी बता देते हैं ।"


फोन लगा तो उस आदमी ने फोन रंजन तिवारी की तरफ़ बढाया।



रंजन तिवारी ने फोन मोना चौधरी की तरफ बढाया ।


"ले बात कर. .!"


"किससे?"



"कर लो, पता चल जाएगा !"


मोना चौधरी ने फोन थामा बात की।


" हैलो !"


" मोना चौधरी ।" राधा की आवाज कानों है पडी-“ये क्या तेरे लोग है, जिन्होंने मुझें पकड रखा है । दो घंटे पहले ये मेरे धर मे घुस आए और मुझे उठाकर यहां ले आए । ये सब क्या हो रहा है?"

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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 12 Jan 2017 13:40



"क्या कहते हैं ये?" मोना चौधरी ने रंजन तिवारी पर, नजर डाली ।



"कहते है, मोना चौधरी कहेगी तो तेरे को छोड़ देगे ।"



मोना चौधरी ने फोन बंद करके रंजन तिवारी की तरफ़ बढाया ।


"क्या चाहते हो?" मोना चौधरी के चेहरे पर कठोरता आ गई थी।


“राधा की जिंदगी चाहती हो या मौत?"


'जिदगी! उसे कुछ नहीं होना चाहिए ।"


" वो चाकू मेरे हवाले कर दो !"


मोना चौधरी चौंकी ।


""चाकू?"


रंजन, तिवारी के चेहरे पर खतरनाक भाव उभरे ।



" अगर राधा को जिन्दा देखना चाहती हो तो ।" उसने दात भिंचकर कहा ।


"तुम्हारा चाकू से क्या मतलब?!



" तात्रिक बेलीराम को चाहिए वो चाकू।"


मोना चौधरी उसे देखती रही।


"देती हो या राधा को खत्म कर दें ।" रंजन तिवारी ने पूर्ववत स्वर में कहा--"ज्यादा इंतजार करने की मेरी आदत नहीं है । तेरा
इंकार होगा तो राधा को मारकर हम फेक देंगे । उसके बाद तेरे को भी नहीं छोड़ेगे । तु भी मरेगी ।"
"मेरे को जानते हो?”


“क्या जानना है तेरे को, तू खूबसूरत है, जबान है, लेकिन इस वक्त मैं काम पर हूं । तेरी जवानी की तरफ ध्यान नहीं है मेरा ।"



मोना चौधरी कुछ कहने लगी कि खामोश हो गई ।



" रधा कहां है?”


" अभी तक तो ठीक है ।"



"उसे ले आओ और चाकू ले जाओं ।"



" अगर तुम कोई खेल-खेल रही हो तो?”


"राधा ममेरे हवाले करों और चाकू ले जाओं ।"

"ठीक है, मेरे आदमी राधा को लेकर आते हैं, तब तक मैं भीतर तुम्हारे पास रहूंगा । मेरे भीतर रहने पर तुम्हें कोई ऐतराज तो नहीं अगर तुम्हारा मन साफ है तो ऐतंराज़ नहीं होना चाहिए।”



"आ जाओ भीतर ।" रंजन तिवारी ने अपने दोनों आदमियों को कहा ।


" राधा को यहीं ले आओ ।"


वे दोनों चले गए । रंजन तिवारी भीतर आया, बैठा और फोन निकालकर नम्बर मिलाने लगा ।



मोना चौधरी को राधा की सलामती की ज्यादा फिक्र थी । महाजन भी हिन्दुस्तान में नहीं था । ऐसे में राधा को किसी तरह की तकलीफ होना गंवारा न था ।



"नमस्कार बेलीराम जी ।" फोन मिलते ही रंजन तिवारी बोला--"काम हो रहा है आपका, परंतु समस्या है ।"



"क्या?"



"मैं चाकू को पहचानूंगा कैसे कि मोना चौधरी मुझे वो ही चाकू दे रहीं है, जिसकी अपको जरूरत है?"



" कहां हो?” मोना चौधरी के फ्लेट पर, उसके सामने ।"



"वहीँ रहो, कुछ देर वाद तुम्हारे पास मंगलु नाम का युवक पहुंचेगा, वो चाकू को पहचानता है ।"


"ठीक है ।" रंजन तिवारी ने कहकर फोन बंद कर दिया ।


उधर मोना चौधरी पारसनाथ को फोन करने के लिए फोन के पास पहुंची कि फोन बजने लगा ।
"हैलो!" मोना चौधरी ने रिसीवर उठाया ।



"मोना चौधरी!" पारसनाथ की आवाज कानों मैं पंड्री----“मेरे पास सतपाल और मिथलेश आए हुए हैं, वो कह रहे हैं कि तुमने इन्हें चाकू लेने मेरे पास भेजा है।"



"तुमने चाकू दिया तो नहीं?"



"नहीं, पूछने के लिए फोन किया है क्या दे दूं ?"


" नही, चाकू लेकर मेरे पास आओ । राधा को कुछ लोगों ने उठा लिया है और वे चाकू माग रहे हैं।"


"ओह _ये कब हुआ ?"



"मुझे अंभी पता चला है । वो लोग राधा को लेकर आ रहे हैं तुम चाकू ले आओ।"


"मैं अभी पहुचता हूं ।"



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Re: खबरी-हिन्दी नॉवल - मोना चौधरी सीरीज

Post by kunal » 12 Jan 2017 13:41


तात्रिक बेलीराम रंजन तिवारी से बात करने के बाद समाधि पर बैठा और मंत्रों का उच्चारण करके उसने जंगला को अपने पास बुलाया ।



"मुझे कैसे याद किया बेलीराम?"



"मंगलू को मोना चौधरी के फ्लैट पर जाना होगा ।"


" क्यों?"



"वहां रंजन तिवारी मौजूद है । वो मंगलू को शेतान कै बेटे का चाकू दिखाएगा। मंगलू को पहचानना है कि ये वो ही चाकू है । कहीं मोना चौधरी दुसरा चाकू तो नहीं दे रही ।" बेलीराम ने कहा ।



"समझा । तो मोना चौधरी चाकू देने के लिए तैयार हो गई ।"



" तेरे को जो कहा है, बो ही कर । मंगलू को मोना चौधरी के फ्लेट पर भेज !"


@@@@@@@@@@@@


मोना चौधरी और रंजन तिवारी खामोश ही वहां बैठे थे ।


" तुम बेलीराम को कैसे जानते हो?" एकाएक मोना चौधरी ने पूछा ।।



" जानता हूं !" रंजन तिवारी ने छोटा-सा ज़वाब दिया !


"उसके लिए ऐसे ही काम करते हो?"




" पहली बार कर रहा हूं !"
"मैं तुम्हें दस-बीस लाख रुपया दे सकतीं हूं राधा के बदले ।" मोना चौधरी ने कहा ।



"बात पैसे की नहीं, श्रद्घा की है ।" रंजन तिवारी ने गभीर स्वर में कहा…“मैं बेलीराम की इज्जत करता हूं।”


"उस चाकू का महत्व जानते हो?”


"नहीं और जानना भी नहीं चाहता, मुझे बताना भी मत !"



" क्यों ?"



"कहीँ सुनकर मन में कोई लालच आ गया तो कोई गड़बड़ न कर दूं , इसलिए चाकू के बारे में नहीं जानना चाहता ।"


मोना चौधरी समझ गई कि सामने बैठा शख्स अपनी वात का -पक्का है ।


"चाकू कहां है?”


"मेरा दोस्त लेकर आ रहा है ।" मोना चौधरी ने कहा ।


तभी कॉलबेल बजी ।


मोना चौधरी ने आगे बढकर दरवाजा खोला तो चौकी ।


बाहर मंगलू खड़ा था ।


" तुम?"


मंगलं ने धक्का मारकर दरवाजा खोला और भीतर प्रवेश कर गया।



रंजन तिवारी की नजर भी दरवाजे की तरफ थी ।


" मैं मंगलू ।" मंगलू ने रंजन तिवारी से कहा ।


" बैठ जा ।" रंजन तिवारी बोला------"अभी चाकू आएगा तो तुम्हें पहचानना है कि बो, वो ही चाकू है, जिसकी हमें जरूरत है या फिर कोई दूसरा चाकू है ।"


@@@@@@@@@@@@



राधा और पारसनाथ पाच मिनट के हेर-फेर ने मोना चौधरी के फ्लैट पर पहुचे थे ।।



पारसनाथ साथ सतपाल और मिथलेश भी थे ।



"मोना चौधरी?" सतपाल भीतर आते ही बोला-----" क्या हो रहा हे?,.तुमने कहा था कि पारसनाथ से मैं वो चाकू ले लूं परंतु ये हमे यहां ले आया, जबकि पहले ये चाकू देने को तैयार था ।"



रंजन: तिवारी ने तीनों को देखा ।


तीनों ने मंगलू और रंजन तिवारी को देखा ।
तीनों ने मंगलू और रंजन तिवारी की देखा ।

" ये दोनों कौन हैं?" पारसनाथ ने चुभते स्वर में कहा ।


"रंजन तिवारी और वो मंगलू।"

पारसनाथ ने गहरी निगाहों से मंगलू को देखा ।


"मुझे चाकू दो मोना चौधरी!" सतपाल की निगाह भी मंगलू पर पड चुकी थी । मिथलेश की नजर भी । दोनों अब पहले से सतर्क दिखाई देने लगे थे, अलबत्ता मंगलू क्रो इस प्रकार वहा बैठे देखकर उन्हे हैरानी भी थी ।


मोना के चेहरे पर गंभीरता नजर आने लगी थी


मोना चौधरी ने पारसनाथ की तरफ़ हाथ बढाया तो पारसनाथ ने अपने कपडों में छिपा रखा, लैदरकैस युक्त चाकू निकाला और, मोना चौधरी के हाथ पर रख दिया । उस चाकू को देखते ही मंगलू की आखों में चमक आ ठहरी थी ।



"यही है चाकू?" रंजन तिवारी ने मंगलू से पूछा।


"लगता तो यहीं है । एक बार हाथ में लेकर देख लूं तो..।"



"हाथ में भी आ जाएगा । थोड़ी देर रुकना पडेगा।"



" चाकू मुझे दो मोना चौधरी!" सतपाल ने तेज स्वर में कहा ।



मोना चौधरी ने गभीर निगाहों से सतपाल को देखा, फिर कहा ।



" ये चाकू मैंने तुम्हें ही देनां था सतपाल! "



"देना था…क्या मतलब?"


" इस चाकू को पाने के लिए मंगलू और उसके साथी ने मेरे दोस्त की पत्नी का अपहरण कर लिया है । उसे वापस पाने के लिए ये चाकू इन लोगों को लौटाना होगा ।" मोना चौधरी का स्वर गंभीर थे। ।


सतपाल ने मगलू को देखा ।



मंगलू के चेहरे पर जहरीली मुस्कान नृत्य कर रही थी ।



“तुम पागल तो नहीं हो गई ।" एकाएक मिथलेश भडककर कह उठा है।।


"इसमे मागत होने की क्या बात है?" मोना चौधरी का स्वर कठोर हो गया ।



"एक की जान बचाने के लिए, तुम कितनों की जिन्दगी खतरे मैं डाल रही हो । चाकू इन्हें दे देने का मतलब है शैतान के बेटे का जीबत हो जाना ! शैतान के बेटे के जीवित होने, पर वो जाने, कितनी ही जाने......!"
"मुझें राधा को सलामत वापस पाना है ।" मोना चौधरी ने कठोर … स्वर में कहा ।



"एक को बचाने के लिए तुम बहुत जाने खतरे में डाल रही हो ।"


"राधा को बचाना मेरे लिए बहुत जरूरी है ।"


"तुम समझ नहीं पा रही कि शैतान का बेटा जिन्दा हो गया तो कैसा कहर बरपा देगा ।" सतपाल गुस्से से बोला----"इसी चाकू से जिन्दा होगा ।"



"मैं माफी चाहती हूं।” मोना चौधरी गंभीर दुढ़ता भरे स्वर में कह उठी…"इस वक्त मैं तुम लोगों की बात नहीँ मान सकती ।"


सतपाल ने मोना चौधरी से चाकू छीनना चाहा ।


मोना चौधरी फुर्ती से पीछे हट गई ।

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