हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - complete

Jemsbond
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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

Post by Jemsbond » 17 Sep 2017 20:00

उधर मार्शल खूनी निगाहों से मुझे घूर रहा था । उसके घूरने का अंदाज बता रहा था, अगर उसक बश चलता तो चीर फाड़ कर सुखा देता । किन्तु इस वक्त वह कुछ भी करने की स्थिति में न था ।

वैसे इसमें रत्ती भर भी संदेह नहीं था कि एक लंबे अरसे बाद एक दिलचस्प मिशन मेरे हाथ लगा था । . .

"तुमने मुझसे पूछा था मार्शल कि मेरा डगलस से क्या सम्बंध, है? मैंने तुम्हें कहा था कि जब डगलस मेरे सामने आ जायेगा तो मैं तुम्हें भी जरूर बताऊंगी ।" मैंने खामोशी को शहीद किया----" मैं तुम्हें बताती हूं कि डगलस मेरा हमपेशा है और विंगस्टनं में आई आस सी का स्थानीय एजेन्ट है ।"

मार्शंल यूं उछल पडा मानो मैंने उसके सिर पर कोई शक्तिशाली बम फोड़ दिया हो ।

उसकी आंखें आश्चर्य की अधिकता से फटती चली गई । वह हेरतभरे अंदाज में मुझे देखता रह गया ।

उधर डगलस भी उछल पड़ने पर मज़बूर हो गया था । आज तक उसने मुझे देखा नहीं था । मेरा नाम ही सुना था । यह मुझे हैरत भरी निगाहों से देख रहा था ।

"क्या बकती हो तुम?" मार्शल ने अपना मुंह खोला ह

‘ "में बक नहीं रही, हकीकत बयान कर रही हूं मार्शंल । मैं पागल , नहीं हूं और न ही मेरे दिमाग में फोडा निकला हुआ है, जो इतना रिस्क लेकर यहां तक पहुंचती । आखिर अई एस सी के एक एजेंट की जिंदगी का सवाल है? तुम लोगों ने डगलस को बहुत यातनाएं दी हैं और रीमा भारती उन यातनाओं का पूरा हिसाब लेगी ।"

डगलस को मानो जोरों का झटका लगा ।

मार्शल के कुछ कहने से पहले उसके होठों से आश्चर्य भरा स्वर निकला-" मैडम आप ?"

"इसका-मतलब है कि तुम मुझे जानते हो डगलस !"

"क्यों नहीं जानता ।" बह तपाक से बोला---" ये बात अलग है कि आज मैं पहली बार आपकी देख रहा हूं।"

"मुझे यहाँ देखकर हैरानी हो रही होगी?"

"मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई मेडम ।" उसने जवाब दिया ----"मैंने खुराना साहब को फैक्स भिजवा दिया था । मैं जानता था कि मेरा मैसेज मिलते ही वे आप ही को मुझे जेल से निकलवाने के लिये भेजेंगे । हां, मैं इस बात को लेकर हैरान अवश्य हूँ कि जेल के इतने कड़े सुरक्षा-प्रबंधों. के बावजूद आप इतनी जल्दी यहां कैसे पहूंच गई?"

"जेल में पहुंचने के लिये तो मुझे कोई खास मेहनत नहीं करनी पडी। बस थोडा-सा दिमाग लगाया और परिणामस्वरुप सहीँ-सलामत तुम्हारे सामने खडी हू।" '

डगलस का चेहरा चमक उठा ।

"अब तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है डगलस । अपने आपको आजाद समझो । अब तुम्हे जेल की दीवारें नहीं रोक सकेंगी । तुम्हें जितनी यातनाएं दी जानी थी, दी जा चुकी । अब कोई टेढ़ी आख नहीं देख सकता । अब तुम्हारी सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरी है !"

उसके चेहरे की चमक दोगुनी हो उठी ।

"तुमने मुझसे सवाल क्रिया था मार्शल कि मुझे ये सब करने की क्या जरूरत आ पडी थी?"

"किया था ।"

"अब मैं तुम्हें बताती हूँ । मैं एक मिशन के तहत मडलैण्ड पहुंचीं हू। मुझे न सिर्फ डगलस को सही-सलामत जेल से बाहर निकालना हे, बल्कि सर एडलॉफ की सुरक्षा भी करनी है ताकि तुम लोग उन्हें गिरफ्तार करके उनका बाल भी बांका करने की न सोच सको ।"

"त; . .तो तुम इस मिशन के तहत यहां आई हो?"

"हां ।"

"अगर तुम समझ रही हो कि तुम डगलस और क्लाइव को यहां से सहीँ सलामत निकाल ले जाने में सफल हो जाओगी तो ये तुम्हारी भूल है रीमा ।"

" कौन रोकेगा मुझे?"

"मैं तुम्हें रोकूगा ।"
" वो, जो खुद मौत के सामने खड़ा है?" मैंने कहा-"मेरी एक बात अच्छी तरह से अपने भेजे में बिठा लो कि आज तक मैंने जितने अत्याचारियों, दरिब्दों, माफिया किंग और अपने दुश्मनों को उनके घर में घुसकर मारा है और वो मेरा बाल तक बांका नहीं कर सके । उन्होंने तुम्हारे जैसे ही डायलॉग बोले थे । मगर मैं आज भी सही-सलामत मौत बनी तुम्हारे सामने खडी हूँ और उन लोगों का नामो-निशान तक मिट चुका है । तुम्हारे पापों का घड़ा भर चुका है मार्शल । अब और तुम्हारी सेना इस देश की जनता पर और जुल्म नहीं ढा सकेगी ।"

"इंसान अपने ओवर कांफीडेंस में कभी-कभी कुत्ते की मौत भी मारा जाता है ओर तुम भी मारी जाओगी डॉटर आँफ बिच तुमने मार्शल से पंगा लिया है ।" बह गुर्राया ।

चटाक् !

मेरा हाथ घूमा और एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके चेहरे पर पड़ा ।

थप्पड इतना ताकतवर था कि शर्तिया उसकी खोपडी झनझनाकर रह गई होगी ।

कमाण्डोज ने मेरे उपर झपटना चाहा ।

तभी ।

क्लाइव के होठों से गुर्राहट निकली…"खबरदारा अगर कोई, अपनी जगह से हिला तो उसे गोलियों से भून का रख दूंगा ।

वे फ्रिज होकर रह गये ।

दूसरी तरफ, मेरा ध्यान तनिक बंटा हुआ पाकर मार्शंल हरकत कर गया था । उसका इरादा मेरी गन छीनने का था ।

परन्तु उसकी किसी भी हरकत की तरफ से पूरी तरह सतर्क थी । अत: मैंने उससे कहीं ज्यादा फुर्ती से अपनी खडी हथेली का वार उसके अपनी तरफ झपटते हाथ पर कर दिया ।

मार्शल का हाथ नीचे लटक गया । होठों से घुटी घुटी चीख निकल गई । उसके चेहरे पर पीडा की असंख्य रेखाएं उभर आई थीं ।

तुमने मेरे ऊपर हाथ उठाकर अच्छा नही क्रिया ।" उसने बेबसी अंदाज में दांत पीसे ।

" तुम हाथ उठाने की बात कर रहे हो, अगर मैं अपनी पर आ गई पैर भी उठा सकती हूँ । बेहतर यहीं है कि अपना सड़ा मुंहुं बंद रखो और हम लोगों को यहां से बाहर निकलने का रास्ता दिखाओ ।"

"तुम यहां से किसी भी कीमत पर बाहर नहीं ज़ा सकती रीमा?" वह कठोर लहजे में बोला-"इस जेल से भाग निकलना नामुमकिन है । यहां चप्पे-चप्पे पर सशस्त्र गार्ड फैले हुए हैं, अगर ज्यादा दिलेरी दिखाई तो तुम्हारे साथ-साथ क्लाइव और डगलस की लाशे भी यही गिरेगी !"

"हम लोग जेल से सुरक्षित बाहर निकलेंगे 'मार्शल ओर तुम एक अच्छे मेजबान की तरह हमें बाइंज्जत बाहर तक छोडकर आओगे !"

"मै तुम्हें बाहर तक छोडकर जाऊंगा?"

" ऑफकोर्स ।"

"नामुमकिन ।"

"नामुमकिन को मुमकिन बनाना मुझे आता है ।"

"मार्शल साहब ठीक कह रहे हैं रीमा ।" एक जेल अधिकारी ने बीच में टांग फसाई-"तुम किसी भी कीमत पर यहां से बाहर नहीं निकल सकती ।"

"वको मत ।" मेरे चेहरे पर कहर नाच उठा-"अगर मार्शल की ज्यादा तरफदारी की तो तुम्हारे जिस्म में इतना ज्यादा बारूद भर दूंगी कि तुम्हारी आत्मा घायल होकर यमलोक पहुँचेगी ।"

बह बगले झांकने लगा ।

"मेरे पास वक्त नहीं है मार्शल ।" मैंने कहा-"मेरे साथ चलो ।"

"म.. .मगर. . . ।"

"अगर-मगर कुछ नहीं । मैंने जैसा कहा है, वो करो ।" मेरा लहजा आदेशपूर्ण था…"वरना फिर मुझे वो करना पडेगा, जो शायद तुम्हें अच्छा न लगे । पहले मैं तुम्हारे इन तीनों वफादार कुत्तों को गोली से उड़ाऊंगी और उसके बाद. . ।"

" म. . .मैँ चलता हूं।" वह सर्द सांस छोड़ता हुआ बोला ।

"गुड । अब तुमने अक्ल की बात की है ।" मैंने कहा---"घूमो ।"

मार्शल एडियों पर घूम गया ।

"आगे बढो ।" बह दरवाजे की तरफ बढ गया । "

मैं उसके पीछे थी । मैंने गन की नाल उसकी पीठ से सटा रखी थी । क्लाइव और डगलस मेरे दायेँ-बायेँ चल रहे थे । उन्होंने भी अपने-अपने हाथों में गनें संभाल रखी थी ।

बह बैरक से निकलकर मैदान में पहुचे ।
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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

Post by Jemsbond » 17 Sep 2017 20:00

मैने गर्दन मोड़कर पीछे देखा तो पाया कि तीनों कमाण्डो तथा जेल अधिकारी बडी सावधानी से हमारे पीछे-पीछे चले आ रहे थे । शायद उसे मेरी तरफ से होने बाली किसी एक गलती का इंतजार था, ताकि वे बाज बनकर हमें दबोच सकें ।

" तुम लोग वहीं ठहरो ।" मैं गुर्रा उठी---" किसी ने हमारे पीछे आने की कोशिश की तो अच्छा नहीं होगा ।"

उनके पांव जहाँ के तहां चिपक कर रह गये ।

फिर मैंनें चारों तरफ़ नजरें घूमाई, मैदान में मौजूद गार्ड तथा सैनिक उस मंजर को देखकर सन्नाटे में खडे थे । वे सभी हथियारों से लैस थे ।

मगर उनके हथियार मानो कुंद होकर रह गये ।

बेचारा मार्शल ।

उसने तो सपने मे भी कल्पना नही की होगी कि मै उसके साथ इस तरह का भयानक खेल खेलूगी ।

====

"स्टाप !" जोंगे के करीब पहुंचते ही मैंने हुक्म दनदनाया । मार्शल के पैरों में ब्रेक लग गये जोगे की ड्रायविंग सीट खाली पडी थी ।

"डगलस ।" मैंने कहा ।

"यस मेडम ।" वह सतर्क नजर आया ।

"ड्रायविंग सीट संभालो ।"

डगलस ने तीर की तरह आगे बढकर ड्रायविंग सीट संभाल ली ।

"जोंगे में बैठो मार्शल ।" मैंने आदेश दिया ।

मरता क्या न करता? मार्शल के पास मेरा आदेश मानने के अलावा दूसरा कोई रास्ता भी तो नहीं था । एक क्षण गंवाये बगैर वह जोंगे के पिछले हिस्से में चढ गया ।

मै उसे कोई भी हरकत करने का जरा भी मौका देना नहीं चाहती थी । अत: बला की फुर्ती का प्रदर्शन करती हुई उसके सामने वाली सीट पर जा बैठी । साथ ही मैंने अपने हाथों में दबी गन उसके ऊपर तान दी ।

"बैठो क्लाइव ।" मैंने कहा ।

क्लाइव भी जोंगे में बैठ गया ।

"मैं मार्शल को कवर किये हुए हूँ क्लाइव ।" मैंने क्लाइव को हिदायत दी--"अगर कोई जोंगे का पीछा करे तो उस हरामजादे की लाश बिछा देना । इस वक्त मैं जरा भी रिस्क लेने के मूड में नहीं हूँ !"

"ओ०के० मैडम ।" वह पहले से कहीं ज्यादा सतर्क हो उठा ।

"जोगां जेल के फाटक की तरफ़ बढाओ डगलस ।"

डगलस ने जोगा स्टार्ट करके आगे बढा दिया ।

मार्शल अंगारे बरसाती निगाहों से मुझे घूर रहा था । उसका बश नहीं चल पा रहा था, वरना वह हम तीनों को यहीं सात फूट नीचे जमीन में दफना देता ।

जोंगे का वो हिस्सा दावे-बाये से बंद था ।

आगे-पीछे से खुला था । मैं बीच-बीच में सतर्क निगाहों से आगे-पीछे देख लेती थी । किसी भी क्षण खतरा आ सकता था ।।

सामने मैदान में खडे सेनिक स्टेचू बने जोंगे को जाता देखते रहे !

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किसी में भी इतना हौंसला नहीं था कि वे मुझ पर गोलियों चलाते । वेसे भी मार्शल गोली न चलाने का आदेश दे चुका था ।

उसे भी अपनी जिदगी का खतरा था । गोली उसे भी लग सकती । . . .

सहसा ।

जोणा एक झटके से रुक गया ।

सामने जेल का बंद विशाल फाटक था ।

"फाटक खुलबाओ मार्शल ।" मैंने कहा ।

मार्शल ने जरा भी हील-हुज्जत किये बगैर चीखकर फाटक खोलने का आदेश दनदना दिया ।

उसके आदेश का तुरंत पालन हुआ ।

डगलस ने जोंगा आगे बढा दिया । दूसरे क्षण जोंगा फाटक पार करता हुआ बाहर निकला और सडक पर आ गया ।

"किधर चलना है मेडम?" डगलस ने पूछा ।

"शहर से बाहर चलो ।"

जोंगा सड़क पर दौड पड़ा ।

"ज. . .जोंगा रुकवाओ ।" मार्शल बोल उठा ।

"क्यों?" मैंने उसे घूरा ।

"मैंने तुम लोगों को जेल से बाहर निकाल दिया है । मैंने वहीँ किया है, जो तुमने कहा था ।" मार्शल ने कहा----"अब तो मुझे मुक्त्ति दो ।"

"तुम्हें इतनी आसानी से मुक्ति नहीं मिलेगी मार्शल । अभी तो मुझे तुमसे बहुत सारी बाते करनी हैं ।”

" 'ज्यादा चालाक बनने की कोशिश मत करो ।" वह गुर्राहटपूर्ण लहजे में बोला…"इस खुशफहमी में मत रहना कि तुम मेरा कुछ बिगाड़ पाओगी । इस घटना की खबर सेना के आला आफिसरों को मिल गई होगी । सेना तुम्हारी तलाश में टिड्डीदल की तरह चारों तरफ जायेगी । तुममें से कोई भी जिंदा नहीं बचेगा ।"

"हमारी फिक्र छोडो मार्शल । फिलहाल तुम अपनी जिदगी के बारे में सोचो । इस वक्त तुम्हारी जिदगी मेरी मुट्ठी में है ।। मेरे ट्रेगर दबाते ही तुम्हारा राम नाम सत्य हो जायेगा ।"

"बको मत ।जोंगा स्कवाओ ।" मार्शल गला फाड़कर चिल्लाया ।

"जोंगा नहीं रुकैगा मार्शल ।"

"आखिर चाहती वया हो?" वह दडाड़ा।

"धीरज । मैं जो चाहती हूं वो जल्दी ही तुम्हारे सामने आ जाएगा ।" मैंने उत्तर दिया ।

------------------------

मार्शल सख्ती से होंठ भीच कर रह गया ।

उसके सामने खामोश रहने के अलावा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं था ।

इस वक्त मार्शल हम लोगों के लिये सुरक्षा कवच का कार्य कर रहा था । जब तक वो हमारे कब्जे में था, हम सुरक्षित थे ।

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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

Post by Jemsbond » 17 Sep 2017 20:01

जोंगा तेज रफ्तार से एक सुनसान सड़क पर भागा जा रहा था । इस समय जोंगे के भीतर गहरी खामोशी पांव पसारे थी । मैं अपने इस खतरनाक मिशन के आखरी चरण के बारे में सोच रही थी ।

आखरी चरण था सर एडलॉफ ।

इसके बावजूद में सतर्क थी । मैं जानती थी कि मार्शल अपने बचाव में कुछ भी कर सकता था । क्योंकि उसे अपनी मौत का अहसास हो चुका था ।

इस वक्त मेरे दिमाग में एक ही बात थी कि टहनियों को काटने से बेहतर है कि सीधे जड़ पर वार करके इस किस्से को ही खत्म कर दिया जाये ।

और जड़ था मार्शल ।

मार्शल की मौत के बाद सैना और उनके विदेशी समर्थकों के हौंसले पस्त हो जाने थे ।

सहसा ।

मार्शल हरकत कर गया ।

मानो बिजली-सी चमकी ।

,उसके दोनों हाथों का भरपूर प्रहार मेरी गर्दन पर पड़ा । अगले क्षण गन मेरे हाथों से छूट गई और मार्शल की बगल में गिरी । सब कुछ इतनी तीव्रता से हुआ था कि मुझे संभलने अथवा कुछ करने का जरा भी मोका नहीं मिला था ।

गजब 'कर गया था मार्शल ।

मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि गन सीने पर तनी होने के बावजूद मार्शल ऐसी हरकत भी कर सकता है ।

मेरी सारी सतर्कता धरी-की-धरी रह गई थी ।

फिर पलक झपकते ही मार्शल के हाथ में रिवाॅल्वर प्रकट हूआ जैसे जादूके जोर से उसके हाथ में आ गया हो । उसने न सिर्फ रिवात्वर मेरे ऊपर तान दिया था, बल्कि वह भेड्रिये जैसे स्वर में गुर्रा भी उठा था-"गन फेंक दो क्लाइव, वरना में रीमा भारती की खोपडी उड़ाकरं रख दूंगा ।"

हालात की नाजुकता को देखते हुए क्लाइव ने गन अपने हाथों से फिसल जाने दी ।

अब बाजी मार्शल के हाथ में थी ।

"कोई गलत हरकत मत करना रीमा?" मार्शल पुन पूर्ववत लहजे में बोल उठा…"वरना तुम अपनी मौत की खुद जिम्मेदार होगी !"

मैं बेबसी से दांत पीसकर रह गई ।

"तुम मुझे मार नहीं सकी । तुमने अपने हाथ में आया सुनहरी मौका गंवा दिया, लेकिन मैं तुम्हारी तरह बेवकूफ नहीं, हूं ! हाथ में आया मौका गंवाऊंगा । मैं जानता हूँ अगर तुम जिंदा बच गई तो मेरा बेड़ागर्क करके ही दम लोगी । इसलिए मै छोड़ने वाला नहीं हूँ । अगर तुम आंधी हो तो में तूफान हू और मार्शल नामक ये तूफान तुम्हें उस जगह पहुचा देगा, जहाँ से इंसान कभी वापस लौटकर नहीं आता ।"

मार्शल बोले जा रहा था और मैं अपनी आदत के विपरीत खामोश बैठी थी । मगर मेरा मस्तिष्क तेजी से काम ’कर रहा था । जोगा बदस्तूर तेज रफ्तार से भागा जा रहा था ।

इस वक्त तो मार्शल का दूसरा ही रूप नजर आ रहा था । चेहरे पर कहर नाच रहा था उसके । आंखें भट्टी में पडे अंगारो से शर्त लगाती प्रतीत हो रही थीं और जबड़े सख्ती से कसे हुए थे । साक्षात् खून का प्यासा दरिन्दा नजर आ रहा था वह ।

"अब बोलो रीमा?" वह खतरनाक अंदाज में रिवाॅल्बर हिलाता हुआ बोला---" तुम्हे केसी मौत चाहिये?"

मैं व्यंग से मुस्कुराई ।

"तुम्हारी ये मुस्कान बता रही है कि तुम्हें अभी भी उम्मीद है कि तुम मेरे हाथों से बच जाओगी।"

"इन्सान की उम्मीद तो मरते वक्त तक खत्म नहीं होती मार्शल । सच तो ये है कि इंसान उम्मीद के सहारे ही जिंदा रहता है ।"

"तो तुम भी उम्मीद के सहारे जिंदा हो ।'"

"ऑफकोर्स !"

मैंने ये इकलौता शब्द इस अंदाज में कहा था कि वह स्वयं पर नियन्त्रण नहीं रख सका और ट्रैगर दवा बैठा ।

धांय ।

उसके रिवॉल्वर ने शोला उगल दिया ।

--------------
परन्तु उस बेचारे को क्या मालूम था कि मुझे बचने का आर्ट भी आता है ।

गोलियों से बचने का एक विशेष आर्ट । जिसकी मदद से मैं दुनिया के बडे से बड़े निशानेबाज को भी चकमा दे चुकी हू । बिजली को भी मात देने वाली गतिसे अपनी जगह से बस मामूली-सी हिली ।

गोली खाली गई ।

अपना निशाना यू खाली जाते देख हक्का बक्का रह क्या मार्शल ।

फिर भी उसने दूसरा फायर का दिया ।

परन्तु उसका भी वही निकला था ।

"मैंने कहा था न कि उम्मीद पर, दुनिया कायम है मार्शल ।" मैंने कहा---" मेरी सांसें बाकी हैं तो तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड सकते । एक बार फिर कोशिश करके देख लो । शायद मुझे मारने में कामयाब हो जाओ?"

मेरे शब्दों ने तो मानो आग में घी जैसा काम किया था । उसका चेहरा गुस्से और अपमान से सुर्ख पड़ता चला गया था ।

और

धांय ।

उसके रिवाल्वर ने तीसरा शोला उगल दिया था । मगर इस बार भी मैं अपने विशेष आर्ट का प्रदर्शनी करती हुई उसकी गोली को अंगुठा दिखा गई थी ।

"मार्शल ।" मैंने इत्मीनान से कहा-"तुम्हारी तीनों गोलियों का क्या परिणाम हुआ , ये तुम देख चुके हो । अगर चाहो तो अपने रिबाॅल्बर की बाकी गोलियाँ भी खर्च कर सकते हो । मगर नतीजा इससे अलग कुछ नही निकलने वाला । इसोलिये वेहतर होगा कि रिवाल्बर फेंक दो ।"

प्रत्युत्तर में उसने पुन: ट्रेगर दबाना चाहा ।

परन्तु ।

इस बार मैंने उसे वेसा नहीं करने दिया ।

पलक झपकते ही मैंने बला की फुर्ती का परिचय देते हुए उसका हाथ हवा में थाम लिया । वह अपना हाथ छूडाने का प्रयास करने लगा, लेकिन मेरे चाहने वाले जानते हैं कि मेरे हाथ लोहे के शिकंजे हैं । उनकी गिरफ्त से निकलना इतना आसान नहीं होता ।

दूसरे हाथ से मार्शल का रिवाल्वर छीनने का प्रयास करने लगी किन्तु मार्शल मुझे इस कार्य में सफल नहीं होने दे रहा था । वह एक मर्दं था ,एक फौजी था और जाहिर है जिस्मानी ताकत में मुझसे ज्यादा रहा होगा ।
फिर भी में अपनी समूची ताकत बटोरकर उसका हाथ मरोड़ती चली गई ।

सहसा!

धांय

रिवाल्वर ने शोला उगल दिया ।

गोली डगलस की पीठ में धंसी । उसके होठों से घूटी-घूटी-सी चींख निकल गई । उसके हाथों से स्टयेरिग लगभग छूट ही गया ।

जोंगा बुरी तरह लहराया ।

मेरे जिस्म को जोरों का झटका लगा ।

"हरामजादे !" क्लाइव हलक फाढ़कर चिल्लाया-"तूने डगलस को गोली मार दी। मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा ।"

.. कहने के साथ ही उसने अपने पैरों में पडी गन उठा ली । . मार्शल का इरादा डगलस को गोली मारने का कतई नहीं था । रिवाल्वर की सीना झपटी में न जाने कैसे ट्रेगर दब गया था? उस घड़ी संयोग से रिवाल्वर का रुख डगलस की तरफ था ।

अतः गोली उसकी पीठ में जा धंसी थी ।

"मार्शल से तो मैं निबट लूंगी क्लाइव । तुम डगलस को संभालो ।" मैं चीखी-"ओर पूछो कि वो जगह कहां है? जहाँ सर एडलॉंफ छिपा हुआ है, अगर डगलस को कुछ हो गया तो हमारी सारी मेहनत पर पानी फिर जायेगा !"

" क्लाइव ने गन छोड़ दी और वह डगलस की तरफ झपटा । डगलस जोंगा संभाल नहीं पा रहा था । जोगा सड़क पर लिमिट से ज्यादा पीये शराबी की तरह लहरा रहा था ।

मैंने पुन: अपना पूरा ध्यान मार्शल पर केन्दित का दिया । हमं अभी एक-दूसरे से जूझ रहे थे ।

वे क्षण बड़े ही खतरनाक थे ।

कई बार रिवाल्वर की नाल मेरे सीने और माथे को चूम चुकी थी ।

मेरा भाग्य ही अच्छा था जो उस घडी गोली नही चली थी । मार्शल अपनी समूची ताकत लगाकर मुझसे अपना रिवाल्वर वाला हाथ. छुडाने का प्रयास का रहा था ।

मगर मैं क्या कम थी

मैं उसे उसके इरादों को कामयाब नहीं होने दे रही थी । मैं जानती थी कि अगर मार्शल अपना हाथ छूडाने में कामयाब हो गया तो मेरी मौत निश्चित है ।

"सर एडलॉफ किस जगह छिपे हैं डगलस?" सहसा मेरे कानों में क्लाइव का स्वर टकराया ।

""व...वो...।" डगलस के होठों से कांपता-सा स्वर निकला ।

-------------
डगलस की आवाज़ डूबती जा रही थी । मुझे लगा जैसे किसी भी क्षण डगलस की सांसों की डोर टूट जायेगी ।

उधर क्लाइव कह रहा था-"ज़वाब दो डगलस ।" बताओ सर एडलॉफ कहां हैं?"

मेरे कान वायरलेस बने हुए थे । मैं सब कुछ सुन रही थी ।

"बोलो डगलस ।" क्लाइव बैचेनी भरे स्वर में बोला ।

और फिर ।

डगलस ने अपनी पूरी हिम्मत बटोरकर क्लाइव को उस जगह के बारे में बता दिया, जहाँ सर एडलाॅफ छिपा हुआ था । फिर उसका अस्फुट स्वर मुझे सुनाई दिया"----.. . अब मेरा आखरी वक्त करीब आ गया है . . म. . . मैं नहीं बचूंगा. . .सर एडलॉफ क्रो. . .मेरा. . .स. . . सलाम. . . ।"

"ड. . . डगलस !" क्लाइव ने पुकारा ।

मगर जवाब में खामोशी छाई रही ।

"आंखे खोलो डगलस । तुम्हें कुछ नहीं होगा ।"

इस बार भी डगलस की खामोशी नहीं टूटी थी । मैं समझ गई कि उसकी सांसे टूट चुकी थीं । मुझे इस बात का बेहद दुख था कि मैं डगलस के लिये कुछ नहीं कर सकी थी । आई०एस०सी० ने अपना एक काबिल और जांबाज ऐजट खो दिया था ।

"डगलस अब इस दुनिया में नहीं है मैडम ।" सहसा मेरे कानों से क्लाइव का स्वर टकराया ।

उसकी आवाज ऐसी थी मानो किसी अंधकूप से निकली हो ।

मै मन-हो-मन भगवान से डगलस की आत्मा की शांति के लिये प्रार्थना के अलावा कर भी क्या सकती थी?

मैंने कनखियों से अगली सीट की तरफ़ देखा, ड्रायविंग सीट -क्लाइव संभाले था । साफ था कि उसने डगलस की लाश को फर्श पर लुढ़का दिया था ।

इधर मार्शल ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी ।

मुझे लगा कि बो किसी भी क्षण अपना रिवाल्वर वाला हाथ आजाद करने में कामयाब हो जायेगा ।।

अतः मैंने दूसरे हाथ की खडी हथेली का बार मार्शल के रिवाल्वर बाले हाथ पर कर दिया । वार सटीक साबित हुआ । रिवाल्वर उसके हाथ से छूटकर हमारे बीच जोंगे के फर्श पर गिरा ।
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तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

Post by Jemsbond » 17 Sep 2017 20:01

अब मार्शल खाली हाथ हो चुका था । जवाब में उसने भी अपना हाथ घुमा दिया । मार्शल का इरादा मेरे चेहरे पर घुसा मारने का था । परन्तु मै उसकी किसी भी हरकत की तरफ से पूरी तरह तैयार थी । अत: मैंने उसका हाथ हवा मे ही थाम लिया । साथ ही मेरे दूसरे हाथ का फौलादी मुक्का उसके पेट में जा धंसा था ।

वह कराहता हुआ झुका ।

मैंने उसका हाथ छोडकर दोनों हाथ बांधते हुए दुहत्तड़ की शक्ल में उसकी गुदूदी पर रसीद कर दिये ।

बह मुंह कै बल नीचे गिरां।

अभी वह उठ भी नहीं पाया था कि मेरी ठोकर उसकी कनपटी पर पडी । इस बार उसके हलक से हलाल होते बकरे जैसी चीख उबलती चली गई थी ।

"चल उठ हरामजादे ।" मैं बोली ।

वह कमबख्त बड़ा तेज निकला । उठकर खड़ा होने के बजाय उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया था । साथ ही उसने मेरी दोनों टागे पकडकर खींच दी थीं । मैं नीचे गिरी ।

और फिर वह मेरे सीने पर सवार हो गया और मेरे चेहरे पर ताबड़तोड़ घूंसे बरसाने लगा । मुझे संभलने में एक क्षण जरूर लगा, फिर मैंने भी अपना हाथ घुमा दिया । मेरा हाथ घूसे की शक्ल में उसके चेहरे से टकराया । बह होठों से चीख उगलता हुआ पीछे की तरफ उलट गया । मार्शल ने उठकर मुझ पर हमला करना चाहा । तब तक मैं उठकर चुकी थी । मैंने अपना दायाँ पांव चला दिया ।

अगले क्षण मेरे बूट की जबरदस्त ठोकर उसके चेहरे पर पडी । बह फिर पीछे की तरफ उलट गया ।

जोंगा अपनी पूरी रफ्तार से भागा जा रहा था ।

गिरते ही सहसा न जाने कहाँ से मार्शल में इतनी ताकत आ गई थी कि वह स्प्रिग लगे खिलौने की तरह उछलकर खड़ा हुआ और मेरी तरफ झपटां । मेरे करीब ही उसका रिवाल्वर पडा हुआ था । उसका लक्ष्य रिवाल्वर ही था ।. भला मैं उसे रिवाल्वर उठाने का मौका कैसे दे सकती थी? इससे पहले कि बह रिवाल्वर को छू भी पाता, मैं उछलकर तीर की तरह उससे जा टकराई ।

पलक झपकते ही मेरा घूटना उसके पेट पर पड़ा और सिर की भयानक टक्कर उसके चेहरे पर ।

वह होठों से हलाल होते बकरे जैसी चीख उगलता हुआ पीछे की तरफ उलट गया ।

----------
जोंगे के पिछले हिस्से में जगह कम थी । इसलिये मार्शल पर वार करने का मौका कम मिल पा रहा था और सबसे बडी बात तो ---------ये थी कि जोंगा पूरी स्पीड से भागा जा रहा था । अत: खड़ा हो पाना भी मुश्किल हो रहा था ।. मैं बडी कठिनाई से अपने आपको सम्भाले थी । जोंगे की रफ्तार अधिक होने के कारण कई बार में गिरते-गिरते बचीं थी ।

मेरी निगाहें मार्शल पर थीं ।

अब उसे इस बात का अहसास हो गया था कि मैं उसे छोड़ने बाली नहीं हूँ । वह अपने बचाव के चक्कर में था । अत: वह जोंगे के पिछले दरवाजे के करीब पड़ी गन की तरफ़ सरका ।

उसी क्षण ।

मैरे बूट की भरपूर ठोकर उसके नितम्बी पर पड़ी ।

वह बिलबिला उठा ।

और फिर ।

मैंने बिजली जैसी गति से अपने करीब पड़ी गन उठा ली ।

साथ ही उस पर गन तानते हुए मेरे होठों से भयानक गुर्राहट खारिज हुई-"गन उठा रहा था हरामजादे? चल, अगर मां का दूध पिया तो उठा गन ।"

मार्शल ने गर्दन मोड़कर मेरी तरफ देखा । साथ ही अपने ऊपर गन तनी देखकर उसके चेहरे का रंग भक्क से उड़ गया । आंखों में मौत की परछाइयां नाच उठी ।

"अब बोल मार्शल ।" मेरा लहजा पूर्ववत् था…"तू किस तरह की मौत मरना चाहता है, क्योंकि तेरे पापी का इस धरती से उठ जाना ही बेहतर हैं, अगर तू जिन्दा रहा तो न जाने कितने निर्दोष लोगों की जाने लेगा । अपने स्वार्थ की खातिर कितने मासूमो के खूंनं से हाथ रंगेगा । अब मरने के लिये तैयार हो जा । तेरी मौत के बांद इस मुल्क की जनता राहत की सांस तो ले सकेगी ।"

किन्तु तभी बह पट्ठा गजब ही कर गया ।

वैसे तो मौत को सामने देखकर एक चींटी भी आश्चर्यजनक साहस का परिचय दे बैठती है । उस पर मौत, दो मौत ही थी, जिसने मार्शल में भी इतना साहसभर दिया था कि पलक झपकते ही बह स्प्रिग की तरह उछला । अगले क्षण उसका हाथ मेरी गन पर पड़ा । साथ ही उसके बूट की ठोकर मेरे घुटने से टकराई।

हमला… अप्रकाशित था ।

गन मेरे _हाथ से छूट गई और मैं मीठ के बल सीट पर गिरी ।

मार्शल ने आव देखा न ताव जोगे से नीचे जंप-लगा गया । साथ ही वह लड़खड़ाक्रर सड्क पर गिरां और लुढ़क्ता चला गया ।

मगर ।
मैं इतनी आसानी से उसे कहां छोड़ने वाली थी?

मैं न सिर्फ विद्युतीय गति से उठकर खडी हो चुकी थी, बल्कि गन उठाकर नीचे छलांग भी लगा चुकी । मैं दूर तक लुढकती चली गई । मेरा भाग्य अच्छा था कि मुझे के चोट नही लगी थी । मेरा लुढकना रुका तो में तीव्रता से उठकर खडी हुई तो मैंने मार्शल को एक तरफ भागते देखा ।

मेरे और उसके बीच काकी फासला था । मैं उसके पीछे भाग छूटी । वह पट्ठा यूं भाग रहा था जैसे अचानक उसके पैरों में पंख उग जाये हों । ऐसे-भागते जब उसने गर्दन मोढ़कर पीछे देखा तो मुझे अपने पीछे साक्षात् मौत बनी भागती देखकर उसके चेहरे पर खौफ ही खौफ उभर आया ।

हमारे बीच का फासला लगातार घटता जा रहा था ।

" जितना मर्जी भाग ले मार्शल ।" मैं ठिठ्कती हुई चीखीं-" लेकिन तुझे दुनिया की कोई भी ताकत मेरे हाथों से नहीं बचा सकती । आज तेरी मौत मेरे हाथों होनी तय है ।"

और मेरा चेहरा पत्थर की तरह सख्त ऐवं खुरदरा पड़ता चला गया । आँखों से मानो शोले फूट पड़े ।

दात पर-बांत जमाकर गन का लीवर खींच दिया ।

"तड...तड...रेट....रेट.. .रेट. . . ।"

गोलियों की बाढ मार्शल की तरफ झपटी । दूसरे ही पल मैंने मार्शल के जिस्म में सुराख-ही-सुराख बनते देखे । साथ ही उन सुराखों से सुर्ख लहू उबल पडा था ।

मार्शल-कटे पेड़ की तरह लहराकर सड़क के किनारे उलटा और दूसरी तरफ अनन्त खाई में गिरता चला गया । जाहिर-सी बात थी कि इतनी सारी गोलियों जिस्म में धंसने के खाद उसके जिन्दा बचने का सवाल ही नहीं रह गया था ।

मैंने इत्मीनान की लम्बी सांस ली ।

एक दरिन्दा दुनिया से कूच कर चुका था ।

मार्शल ने सपने में भी अपनी ऐसी दर्दनाक मौत की कल्पना नहीं की होगी । वैसे ऐसे पापियों का ऐसा ही अंजाम होता है ।

मैंने सडक पर नजर डाली । मैं देख लेना चाहती थी कि उस पर कोई अन्य वाहन तो नहीं आ रहा है ? किन्तु फिलहाल मुझे कोई वाहन आता नजर नहीँ आया था । जोगां अब रूक चुका था ।

और क्लाइव जोंगे के पीछे खड़ा मेरी तरफ देख'रहा था ।

अब मेरा ज्यादा देर , रुकना खतऱनाक हो सकता था ।


जाहिर है, जेल वाली घटना की ख़बर सेना के उच्व अधिकारियों को मिल चुकी होगी और सेना हरकत में आ चुकी होगी । अंब तक सैनिक बडी तादाद में शिकारी कुत्तों की तरह हमारी तलाश में लग गये होगे ।

एक क्षण गंवाये बगैर मैं पलटकर जोगे के करीब पहुंची ।

"कुत्ते की मोत मारा गया हरामजादा ।" क्लाइव बोल उठा । उसकी आवाज में खुशी साफ़ झलक रही थी ।

"ऐसे लोगों ऐसी ही दर्दनाक मौत मिलती है क्लाइव ।" मैंने कहा" -बहरहाल, ये हम लोगों के लिये सबसे बडी कामयाबी है, लेकिन हमें ये नहीं समझना चाहिये कि, हमने मुकम्मल जंग फतह कर ली है । असली जंग तो अब शुरू होगी । अब मुझे ये बताओ कि वो जगह कितनी दूर हैं जहाँ सर एडलॉफ छिपा हुआ है ।"

"वो जगह तो यहीं से काफी दूर है ।"

" तुमने वो जगह देखी हे?"

"यस मैडम?"

"आगे का सफर, हम लोगों को पैदल' तय करना होगा क्लाइव ।"

"लेकिन सफर तो काफी लम्बा है ।"

" कितना भी लम्बा क्यों न हो ? अगर हम जोंगे में सवार होकर आगे का सफ़र तय करेंगे तो आते-जाते वाहनों में सवार लोगों की नजरों में जोंगा आ जायेगा, सैनिकों को पता चल सकता है कि जोंगा किस दिशा में गया है ? उस स्थिति में हम लोग मुसीबत में फंस सकते हैं ।"

"ओह !" क्लाइव का सिर स्वयं ही सहमति में हिलने लगा ।

"एक बात और सुनो क्लाइव ।"

क्लाइव ने सवालिया निगाहों से मेरी तरफ देखा ।

"हमे सर एडलॉफ तक पहुंचने के लिये एक ऐसा रास्ता चुनना होगा कि आसानी से किसी की निगाह हम लोगों पर न पड़ सके । इस घटना के बाद हमारे लिये खतरा और ज्यादा बढ गया है । सेनिक टिट्डी दल की तरह हमें तलाश कर रहे होंगे । वहाँ तक पहुचने के लिये तुम्हारी नजरों में ऐसा कोई रास्ता है ?"

'क्लाइव के चेहरे पर सोच के भाव उभरे।

एक पल ठहरकर वह बोला---" सर एडलॉफ तक पहुंचने के लिये ऐसा एक रास्ता मेरी नजरों में है । हम उस रास्ते से रास्तों की अपेक्षा जल्दी पहुंच जायेगे, लेकिन वो रास्त ऊबढ़-खाबड़, दलदली और कंटीली झाडियों से भरा है । रास्ते मैं घना जंगल भी पडेगा ।

" हमें उस जंगल को पार करना पडेगा ।"
"मैँ छोटी मोटी कठिनाइयों की परवाह नहीं करती क्लाइव । मेरे ख्याल से वही रास्ता ठीक रहेगा ।"

"तो फिर चलिये मैडम ।“

"चलने से पहले हमें जोंगे को टिकाने लगा होगा । इस तरह खुले में बीच सडक में जोंगे का खड़े रहना हम लोगों के लिये सिरदर्द बन सकता है । जोंगे को देखकर सैनिक अनुमान लगा लेंगे कि हम यहां से क्रिसी रास्ते से निकले हैं ।"

"आप कह तो ठीक रही हैं, लेकिन जोगे का क्या क्रिया जाये? इतना बड़ा जोंगा सैनिकों की निगाहों से कैसे बच सकता है?"

"हम जोंगे को खाई में धकेल देगे । गहरी खाई में जोंगा किसी को नजर नहीँ आयेगा ।" मैंने कहा ।

"ल.. .…लेकिन !"

"लेकिन क्या ?"

"जोगे में तो डगलस की लाश मौजूद है ।"

. "अगर डगलस की लाश खुले में रहेगी तो उसकी लाश को चीलन्कोए नोंच-नोचकर खायेंगे । बेहतर है कि लाश को जोंगे में ही रहने देना चाहिये ।"

"हमेँ डगलस की लाश का अन्तिम संस्कार कर देना पहिये ।"

"हमारे पास डगलस की लाश का अन्तिम संसार करने का वक्त नहीं है । हम क्रिसी भी क्षण खतरों से धिर सकते हैं । फिलहाल हम भगवान से उसकी आत्मा की शांती के लिये प्रार्थना के अलावा उसके लिये और कुछ नहीं कर सकते क्लाइव ।। मैं तुम्हारी भावनाओं की कद्र करती हूँ लेकिन ये वत्त भावनाओं में बहने का नहीं है । अगर डगलस तुम्हारा जान-पहचान वाला था तो मेरा हमपेशा था । आई०एस०सी० का एक जाबांज और काबिल जासूस था । तुमसे कहीं ज्यादा मुझे उसकी मौत का दु ख है , लेकिन दुखी होने से क्या होगा? डगलस तो जिन्दा नहीं हो सकता । अब देर मत करी क्लाइव । जोगे को खाई में धकेलने में मेरी मदद करो ।"

क्लाइव तुरन्त हरकत में आ गया ।

हमने जोगे को पीछे से सडक के किनारे गहरी खाई की तरफ धकेलना शुरु कर दिया ।

हमें जोगे को धकेलने में अपनी पूरी ताकत लगानी पडी थी । हमारी सांसे फूल गई थीं । जिस्म पसीने भीग चुकं थे, लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी थी । हम वहीं कठिनाई से जोंगे को सडक के किनारे तक लाने में कामयाब हो सकै थे ।

अगले क्षण ।

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जोंगा लुढ़कनिया खाता हुआ खाई में गिरता चला गया, फिर जोंगा आग की लपटों के बीच धिर गया ।

जाहिर था कि जोगे की पैट्रोल की टंकी में आग लग गई थी ।।

" अब यहीं से हिलो क्लाइव ।" मैं बोल उठी ।

क्लग्रइव आगे बढ गया । मैं उसके पीछे थी ।

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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

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Re: हिन्दी नॉवल-काली दुनिया का भगबान - रीमा भारती सीरीज

Post by Jemsbond » 17 Sep 2017 20:02

वो ऊबढ़-खाबड़ झाडियों से भरा रास्ता वास्तव में बड़ा कठिन था।

जिस्म में पीड़ा की … लहरें उछाले मार रही थीं । मगर । अपनी पीडा को भूलकर मैं क्लाइव के पीछे चली जा रहीं थी ।

चारों तरफ सन्नाटा था ।

सूरज आसमान में सिर पर चमक रहा था । . झाडियों का सिलसिला खत्म हुआ ऊबड़-खाबड़ रास्ता शुरु हो गया । उस रास्ते पर हम कठानाई से आगे बढ पा रहै थे । रास्ता ऊबड़-खाबड़ होने के कारण हमारी रफ्तार धीमी थी ।

"हमें कुछ देर आराम कर लेना चाहिये ।" एक जगह क्लाइव ठिठकता हुआ बोला--"उसके बाद आगे का सफर शुरू करेंगे ।"

"अभी सफ़र कितना बाकी है?" मैंने भी ठिठककर पूछा ।

"अभी तो सफर बहुत लम्बा है । यू समझिये अभी तो-सफर शुरु ही हुआ है ।" कहने के साथ ही क्लाइव बैठ गया ।

मैंने पेन्ट की जेब से सिगरेट का पैकेट बाहर निकालकर एक' सिगरेट सुलगाई और एक गहरा कश लिया ।

"एक सिगरेट मुझे भी मिलेगी मैडम?" क्लाइव ने कहा ।

मैंने खामोशी से पैकेट और लाईटर क्लाइव की तरफ़ बढा दिया ।

… उसने दोनो चीजे थाम ली । मैंने चहु ओर निगाहें भगाई । सामने दूर तक ऊबढ़-खाबड़ रास्ता नजर आ रहा था । तरफ धनी कंटीली झाडियाँ थी ओर उनके पीछे पांच-सात पेड़ आपस में सिर जोड़े खडे थे । उन पेडों के पीछे छोरी-छोटी पहाडियों का सिलसिला नजर आ रहा था । मुझे आसपास कही कोई खतरा नजर नहीं आया था ।

मैंने संतोष की सांस ली और फिर सिगरेट के हल्के हल्के कश लेने लगी ।
"बैठिये मेडम?" क्लाइव बोला-" आप खडी क्यों हैं?"

मैं उसकी बगल में बैठ गई । परन्तु ऐसा लगता था कि आराम मेरे नसीब में ही नहीं था ।

उसी क्षण । . .

वातावरण में गड़गड़ाहट का तेज स्वर गूंजता चला. गया ।

मेरे जिस्म को जोरों का अटका लगा ।

मैं सिगरेट पीना तक भूल गई ।

ये किसी हैतीकाप्टर की आबाज थी।

ख़तरा ।।

ये शब्द किसी धन की तरह मेरे जेहन से टकराया था ।

" य. . . ये तो हैलीकॉप्टर की आवाज है मैडम ।" एकाएक कलाइव के होठों से निकला ।

"हा ।" . . .

' कहने के साथ ही मैंने आवाज की दिशा में देखा । '

. तभी जैसे उस दिशा से एक हैलीकाॅप्टर मानो जादू के जोर से प्रकट हुआ था और वह तेजी से हमारी तरफ बढने लगा था ।

वह सेना का हेलीकॉप्टर था ।

हैलीकाॅप्टर को देखकर मुझे रत्ती भर भी आश्चर्य नहीं हुआ था । क्योंकि पैं पहले से ही जानती थी कि हम लोगों की तलाश शुरू हो चुकी होगी । खतरा तो आना ही था, लेकिन खतरा इतनी जल्दी जा जायेगा । इसकी मुझे उम्मीद नहीं थी ।

"अब कया करें ?" क्लाइव फुसफुसाया ।

"हमें खुद को बचाना है, इस वक्त हम खुले में हैं । हैलीकॉप्टर में सवार सैनिकों की निगाहें हम लोगों पर पड़ सकती हैं । उस स्थिति मेँ हम _मुसीबत में फंस जायेंगे । सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि हमारी जान को भी खतरा हो सकता है । सेनिक हथियारों से लेस होंगे ।"

" वो तो होगे, लेकिन हमें करना क्या है?"

"उठै ।" मैं स्प्रिंग लगे खिलौने की तरफ़ उछलकर खडी हुई और सिगरेट फेंककर लगभग चीखती हुई बोली…"इससे पहले के हम लोग सैनिकों की निगाहों में आयें, जल्दी से दायी तरफ उन झाडियों में पहुचो ।"

कहने साथ ही मैं उनं झाडियों की तरफ़ भागी ।

क्लग़इब ने भी बला की फुर्ती दिखाई ।

हम यूं भाग रहे थे मानो एकाएक हमारे प्रैरों में पंख उग आये हो. ।

और अभी हम झाड्रियों से बीस कदम दूर थे कि-एक और हेलीकॉप्टर आसमान मे दिखाई दिया । वह दूसरी दिशा से गड़गड़ाता हुआ चला आ रहा था ।

---------
"एक और हेलीकॉप्टर आ रहा है मैडम ।" क्लाइव ने कहा ।

"मैं उसे देख चुकी हूं । तुम जल्दी से झाडियों में जाकर छिप जाओ ।" मैंने आदेश भरे स्वर में कहा ।

"और आप ।"

"मैं भी आ रही हूं।" मैं भागती हुई बोली-"फालो मी ।"

क्लाइव ने मेरा अनुसरण क्रिया ।

हेलीकॉप्टर करीब पहुंचते जा रहे थे ।

इससे पहले कि हैलीकॉप्टर हमारे ऊपर पहुंचते, हम उन धनी कंटीली झाडियों में दाखिल हो चुके थे । झाडियां इतनी लम्बी और ऊंची थीं कि उनकी शाखाओं ने हमें पूरी तरह छिपा लिया था ।

अन्तत: हैलीकॉप्टर में मौजूद सैनिकों की निगाहें हम पर नहीं पड़ सकतीं थीं ।

परन्तु झाडियों के नुखीले कांटों ने हमारे जिस्मो को जगह-जगह से घायल कर दिया थे । कपड़े जगह-जगह से फट चुके थे । पीड़ा से बुरा हाल था, मगर फिर भी हम दम साधे बैठे थे ।

" कहीं सैनिकों ने हमें झाडियों में घुसते हुए देख तो नहीं लिया है ।" क्लाइव ने पुछा ।

"अगर उन्होंने हमेँ देख लिया होता तो अब तक हैलीकॉप्टर से झाडियों पर गोलियों की बारिश हो रही होती ।" मैंने कहा--" 'लेकिन हम लोगों का ज्यादा देर तक झाडियों में छिपे रहना ठीक नहीं होगा । हो सकता है कि कुछ देर बाद यहाँ पैदल सैनिक भी पहुँच जायें । उस स्थिति में ये यहां का चप्पा चप्पा छान मारेंगे ।"

"फिर तो हमें जल्दी ही अपने बचाव का कोई-न कोईं-रांस्ता सोचना चाहिये ।" बह बोला ।

"क्या सोचें? जब तक ये हेलीकॉप्टर हमारे सिरों पर उढ़ रहे हैं, तब तक हम कुछ भी नहीं कर सकते ।" मैंने कहा-"पहले हमें हैलीकाॅप्टरो से पीछा छुड़ाना है ।"

"पीछा छुडाने में हमेँ कौन-सा ज्यादा वक्त लगना है?, हमारे पास गर्ने हैं । हम हैलीकाॅप्टरो को नीचे गिरां सकते हैं ।" वह कठोर लहजे में बोला---"' आप कहें तो में ये शुभ काम कर डालूं "

" ऐसी गलती लकर भी मत करना क्लाइव ।" मैंने उसे सख्ती से कहा----"' तुमेन गोलियाँ चलाईं तो सैनिकों को हमारी यहां मौजूदगी के बोरे में मालूम हो जायेगा और हमारे ऊपर मौत बरसने लगेगी । हम बच नहीं पायेंगे । झाडियों में हमारी गोलियों से छलनी लाशें पडी होंगी ।"
हेलीकॉप्टर बराबर उस जगह के ऊपर मंडरा रहे थे । वक्त की रफ्तार मानो बेहद सुस्त हो गई थी । एक-एक पल सदियों से भी लम्बा प्रतीत हो रहा था । फिर बीस मिनट गुजरते-गुगरते हैलीकाॅप्टरो की आवाज दूर होने लगी । संतोष की गहरी सांस ली ।

कुछ पलों बाद आबाज एकदम गायब हो गई थी ।

हम दम साधे यथास्थान बैठे रहे ।

"हेलीकॉप्टर चले गये ।" बोला क्लाइव-" "अब हमें झाडियों से बाहर निकल जाना चाहिये ।"

"अभी नहीं क्लाइव ।"

" क्या आपको उम्मीद है कि हेलीकॉप्टर फिर वापस आ सकते है ।"

इससे पहले कि में कुछ कह पाती, मेरे कानों से एक तेज स्वर टकराया-"हेलीकॉप्टर से मेसेज मिला है कि रीमा भारती, क्लाइव के साथ यहीँ आसपास कहीं छिपी हुई है । उसे तलाश करो । वो हरामजादी बचकर नहीं निकलनी चाहिये । उस उल्लू की पट्ठी ने हमारा सारा काम बिगेढ़कर रख दिया है ।"

"फिर तो मार्शल साहब भी उस हररमजादी की गिरफ्त में होंगे ।" इस बार दूसरा स्वर उभरा !

"नहीं ।" जवाब में पहले व्यक्ति का स्वर उभरा-"मार्शल साहब अब इस दुनिया में नहीं हैं । हैलीकाॅप्टर से मेसेज मिला है कि उनकी गोलैयो से छलनी लाश एक खाई में पडी हुई पाई गई है ।"

जाहिर था कि हेलीकॉप्टर में सवार सैनिकों ने मार्शल की लाश को खाई से बरामद कर लिया था ।

मैंने सोचा क्या था और हो क्या गया? "

सोचा था सैनिकों को पता नहीं चल पायेगा कि हम लोगों की स्थिति क्या है । लेकिन सैनिकों की निगाहें लाश पर पड़ चुकी थीं । मैंने इस बारे में ज्यादा दिमाग खराब करना उचित नहीं समझा था । अब हमें वहाँ से सुरक्षित निकलना था ।

" 'तुम लोग इस तरफ़ जाओ और तुम उस तरफ ।" वातावरण में आदेश भरा स्वर उभरा--"और बचे हुए उन झाडियों में जाकर देखो । वे झाडियों में भी छिपे हो सकते हैं । गो हरिअप ।"

मैं सतर्क हो उठी । वे सैनिक गिनती में कितने होगे । इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल था । वे दस भी हो सकते थे और पचास भी ।

फिलहाल मेरा इरादा उन सैनिकों से टकराने का नहीं था । मुझे क्लाइव के साथ यहां से सुरक्षित निकलना था ।

"अब जल्दी से कुछ करो मेडम ।" क्लाइव ने कहा--"" सैनिक झाडियों के करीब आ गये तो हम लोग नहीं बचेंगे-!"

"घबराओ मत । मेरे होते हुए वे लोग तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते क्लाइव ।"

"मुझे अपनी नहीं, आपकी चिन्ता है मेडम !" अगर मैं मारा भी गया तो कोई गम नहीं है । मुझे इस बात की खुशी होगी कि मैं अपने मुल्क के काम आया ।"

"मुझे तुम जैसे शख्स पर गर्व है क्लाइव ।" मैंने प्रशंसा भरी निगाहों उसकी तरफ देखा‘ 'जिस मुल्क में तुम जैसे. देशभक्त और जांबाज लोग मौजूद हैं, वो कभी गुलाम नहीं रह सकता । अपनी आंखों से इस मुल्क में अमन-चैन देखोगे । आजादी देखोगे क्लाइव । सत्य की हमेशा जीत होती है ।"

क्लाइव खामोश हो गया । .

"मेरे साथ आओ क्लाइव ।" मैं उठकर झाडियों में एक तरफ़ बढी ।

क्लाइव मेरे साथ हो लिया ।

कंटीली झाडियों में आगे बढना हमारे लिये कठिन हो रहा था । कांटे हमारे आगे बढने में बाधक सिद्ध हो रहे थे । लेकिन हमारा बढ़ना नहीं रुका । हम' लगातार आगे बढते रहे ।

कुछ देर बाद हम झाडियों से बाहर निकले । सामने खुली जगह थी । मेरा इरादा सामने पहाडियों तक पहुंचने का था । उन पहाडियों

से सुरक्षित जगह. मुझे दूसरी दिखाई नहीं दी थी ।

मैं जान छोडकर पहाडियों की तरफ भागी । क्लाइव मेरे साथ भागा । हम यूं भाग रहे थे जैसे हमारे पीछे सैकडों भूत लगे हों । हमारी रफ्तार देखते ही बनती थी ।

और हम सुरक्षित उन पहाडियों में पहुंच ही गये । जहाँ हम . ठिठके वहां एक गुफा-सी थी । इस वक्त भाग्य हमारा साथ दे रहा था । उस गुफा के आसपास घने पेड़ थे । इतने ज्यादा घने कि आसमान भी दिखाई नहीं है रहा था । …

. , उन पहाडियों तक पहुंचने के लिये बामुश्किल एक मिनट का वक्त लगा होगा । हम यहाँ किस स्पीड से पहुचे होंगे, इसका अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता था कि हमारी सांसें बुरी तरह से उखढ़ चुकी थीं । . . एके क्षण गंवाये बगैर हम उस-गुफा में घुस गये ।
मुझे कदमों की आहट सुनाई दी, जो उसी गुफा की तरफ आ रही थी ।

मैं सतर्क हो उठी ।

मुझे अंदाजा लगाने में एक क्षण से ज्यादा का वक्त नहीं लगा था कि बो कदमों की आबाज सैनिकों के अलावा और किसी की नहीं हो सकती थी ।

आहटें करीब और कंरीब आती जा रही थीं ।

" अब हमें हेलीकॉप्टर से देखे जाने का डर नहीं था । हां, हम सैनिकों की नज़र में अवश्य आ सकते थे, । मैं सैनिकों के पहुंचने का इन्तजार करने लगों ।

"इन. पहाडियों में देखो ।" सहसा वातावरण में एक आदेश भरा स्वर गूंजा… "वे पहाडियों में भी छिपे हो सकते हैं ।"

" कठिनाई से एक पल भी नहीं गुजरा था कि कदमों की आहटें गुफा के करीब आकर रुक गई थीं । . .

मैंने उस तरफ देखा ।

… . वे आठ सैनिक ये । सभी हथियारों से लेस थे । मेरी आँखे शिकारी बिल्ली की तरह चमक उठी थी ।
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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