चीते का दुश्मन complete

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Re: चीते का दुश्मन

Post by 007 » 11 Jun 2017 14:05

"वहीँ रुक जाओं बिजय, वरना मैं गोली मार दूंगां ।" अलफांसे ने चेतावनी दी ।



“शायद भूल गए हो लूमड़ मियां क्रि ये तमंचा विजय दी ग्रेट पर असर नहीं करता l” कहते हुए बिजय ने अलफांसे पर जम्प लगा दी । अलफांसे का रिवॉल्वर एक बार गर्जा भी किंतु संग आर्ट का माहिर विजय न केवल खुद क्रो बचा गया बल्कि वह सीधा अलफांसे पर गिरा । दोनों एक-दूसरे से उलझ गए ।



फायर की आवाज चालक-कक्ष में विमान चलाते हुए धनुषटंकार ने भी सुनी और वह बुरी तरह चोंक पड़ा । उसकी समझ में नहीं आया कि इतनी देर बाद ये नई मुसीबत कहां से पैदा हो गई ???

उसने विमान को यूं ही हवा में छोड़ा ।



बिमान हवा मे लहरा उठा ।


किंतु इसकी परवाह न करके वह एक ही जम्प मे यात्री-हाॅल मे आया, उसने देखा बिजय और अलफांसे एक-दूसरे से बुरी तरह गुंथे हुए थे । बिना चलाक के बिमान बुरी तरह लड़खड़ा रहा था ।



अभी धनुषटंकार कुछ करना ही चाहता था कि अलफांसे से गुंथा हुआ विजय चीखा-“अवे बंदर मियां, तुम बिमान सम्भालो I" बंदर शब्द सुनकर घनुषटंकार क्रो ताव तो ऐसा आया कि वह मी बिजय से ही लिपट जाए पर मौके की नजाकत को समझते हुए घनुषटंकार चालक-कक्ष मेँ पहुंचकर अपनी सीट पर ही जम गया । इधर विजय और अलफांसे खूनी सांडों की भांति एक-दूसरे से लिपटे हुए थे I चंद्रवटी अभी तक अलफांसे के हाथ में थी । विजय उसी को कब्जाने कै चक्कर में था । लगभग पंद्रह मिनट तक उनकी ये लड़ाई यात्री सीटों के बीच में होती रही ।



पंद्रह , मिनट बाद अचानक चंद्रवटी बिजय के हाथ में आ गई । एक झटके कै साथ वह अलफांसे से अलग हुआ । इससे पहले कि अलफांसै उस पर पुन: झपटे विजय ने जोर से चंद्रवटी खींचकर एक शीशे में मारी । शीशा टूटा और चंद्रवटी विमान से बाहर हवा में गुम हो गई ।



बिजय पर जम्प लगाने का प्रयास करता हुआ अलफांसे एकदम ठिठक गया, बोला…“ये तुमने क्या किया?"



"तुम जैसे शेतान कै हाथ में पहुंचाने से तो अच्छा ही किया लुमड भाई I” विजय बोला ।

"लेकिन अब तो वो तुम पर भी नहीं रही ।"



"अच्छा ही हुआ प्यारे, ऐसी खतरनाक वस्तु दुनिया के किसी भी व्यक्ति के हाथ में रहनी ठीक नहीं है।" विजय बोला--“भगवान पर विजय पाना अच्छी बात नहीं है । ऐसी खतरनाक चीजें दुनिया मे न ही रहे तो अच्छा है I"



"अजीब सनकी हो यार तुम?" अलफांसे बोला…“इतनी महत्वपूर्ण चीज तुमने इतनी सरलता से समाप्त कर दी?”



“महत्त्वपूर्ण नहीं प्यारे लूमड़खान, खतरनाक कहो ।” विजय बोला…“ये वस्तु जिसके पास भी रहती वह खुद को खुदा का बाप समझता । ऐसी चीजों का खत्म हो जाना ही दुनिया के हित में होता है । लेकिन प्यारे अब मैं तुम्हें नही छोडूंगा ।"



"मेरा क्या करोगे?"



"अपने चांद से प्यारे देश की किसी जेल में रखूंगा l” कहते हुए बिजय ने उस पर जम्प लगा दी ।




फिनिश




इस बार बिकास उस कक्ष के चक्कर में नहीं आया जिसका गुरुत्वाकर्षण छत में था ।


टुम्बकटू ने यान से निकलने का उसे दूसरा रास्ता बता दिया था ।


उसी रास्ते से वह यान से बाहर सागर में आ गया । उसके जिस्म पर अपनी वही गोताखोरी की पोशाक थी ।



सागर में तैरता हुआ वह पनडुब्बी क्रो तलाश करने की चेष्टा कर रहा था ।



बीस मिनट के प्रयास के पश्चात उसे सागर में मंडराती हुई पनडुब्बी चमकी । वह तेजी से पनडुब्बी की ओर बढा ।



कदाचित पनडुब्बी पर मौजूद जासूसों ने भी उसे देख तिया था । इसी कारण पनडुब्बी का रुख भी उसी ओर था ।

दस मिनट पश्चात ही ।



विकास पनडुब्बी में पहुंच गया । सबसे पहले उसका हाथ पकडकर बागारोफ़ ने खींचा ।


इसके बाद उसने बागारोफ़ के पास ही खड़े जेम्सबांड, माईक क्रो देखा । दोनों की आंखें उसे इस प्रकार घूर रही थीं जैसे उसे खा जाने का इरादा रखते हो ।



"तू कहां था बे हरामी के पिल्ले ।” बागारोफ़ ने उससे चीखकर कहा था I



"मैं टुम्बकटू कै सारे रहस्य जान चुका हूं ग्रांड अंकल I" गेस मास्क उतारते हुए विकास ने कहा-“उसके चीते को भी मै परास्त कर चुका हू I"



"इसका मतलब ये हुआ प्यारे छदूंदर कि तुम सबसे बडे जासूस बन गए I" बागारोफ़ बोला ।



" वो तो ठीक है ग्रांड अंकल लेकिन पहले टुम्बकटू के उस यान क्रो नष्ट करना है l”



"क्या वक रहे हो?” जेम्सबांड बोला…“क्या यान में वो दौलत नहीं जिसके बारे में टुम्बकटू कहा करता था I”



"सब है, बांड मियां, वास्तव मेँ यान में संसार से दस गुना ज्यादा धन हे l"



"अबे तो तेरा दिमाग खराब हो गया है ऊंटनी के ।" बागारोफ़ एकदम चढ दोड़ा-“उसे नष्ट करने से क्या मतलब?"



"आप पनडुब्बी उधर की तरफ़ ले चलो I” बिकास ने कहा I



वे चारों पनडुब्बी में ऊपर पहुंच गए । पनडुब्बी बरगेन शा चला रहा था । बिकास के बताए हुए रास्ते पर पनडुब्बी चलने लगी । सभी धड़कते दिल से यान के दर्शन करने के लिए बेचैन थे ।

और तब जबकि यान चमका ।



"वो रहा यान ।" बिकास चीखा और तेजी से पनडुब्बी के एक तरफ को भाग लिया ।



उसकी इस हरफ्त पर किसी ने ध्यान नहीं दिया । सबका ध्यान यान की ओर था ।


बांड, माईक, बागारोफ़ और बरगेन शॉ ही ये पनडुब्बी लेकर सागर के गर्भ मे आए थे ।



बाकी जासूस सागर की छाती पर मस्त हाथी की भांति झूमते जलपोत में थे ।



उन चारों का ध्यान पूरी तरह यान पर केंद्रित था । वे सब यान की बनावट को बड़े ध्यान से देख रहे थे ।



"अबे, मूतनी! के जल्दी यान की तरफ़ चल ।" बागारोफ़ ने चीखकर बरगेन शॉ से कहा ।



वरगेन शॉ ने पनडुब्बी का रुख उसी ओर कर दिया । इधर पनडुब्बी क्षण-प्रतिक्षण यान की ओर बढ़ रही थी, उधर दोड़ता हुआ विकास पनडुब्बी के युद्ध-कक्ष में पहुंच चुका था ।
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Re: चीते का दुश्मन

Post by 007 » 11 Jun 2017 14:05

उसने एक तारपीडों छोडने का यंत्र सम्भाल लिया और यान का निशाना लेने लगा ।


पनडुब्बी निरंतर यान के करीब पहुंचती जा रही थी । बिकास के ज़बड़े एक-दूसरे पर जमते जा रहे थे ।



और तब जब उसने मोका उपयुक्त पाया ।



एक साथ दस…बारह तारपीडों उसके यंत्र से निकले ।



एक अत्यंत भयानक विस्फोट ।



टुम्बकटू का यान खील-खील होकर बिखर गया । सागर मे जलते हुए शोले चमके । सब कुछ क्षण भर मे समाप्त हो गया ।



यह दृश्य बागारोफ़, माईक, बांड और बरगेन शॉ ने भी देखा ।

देखते ही वे इस प्रकार उछल पड़े मानो उन्होंने संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य देखा हो ।


बागारोफ, माईक और बांड के दिमाग में जेसे एकदम सब कुछ आ गया हो । सबसे पहले चालक-कक्ष में बांड भागा । दौडता हुआ वह युद्ध-कक्ष मे पहुंचा । विकास कै हाथ में तारपीडो छोड़ने वाला यंत्र था ।



"ये क्या बेवकूफी है?" बांड एकदम चीख पड़ा ।



“इसे बेवकूफी नहीं, बांड बेटे! बुद्धिमानी कहते हैं l” बिकास आराम से बोला ।



"तुमने दुनिया का सबसे बड़ा खजाना नष्ट कर दिया I" बांड चीखा-'"मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगा I" कहते हुए बांड ने बिकास पर जम्प लगा दी ।




विकास भी इसके लिए तैयार था, उसकी लम्बी टांग बडी तेजी से उछली और सीधी बांड के जबड़े पर पडी । बांड कराहकर दूर जा गिरा । अभी वह उछलकर खड़ा हुआ ही था कि…“अबे ये क्या कर रहे हो भूतनी वालों?" माईक कै साथ बागारोफ प्रविष्ट होता हुआ चीखा ।



"यान को इसने नष्ट किया है, चचा ।" क्रोध में बांड चीखा ।



"क्यों बे ऊंटनी के?" बागारोफ दहाड़ा-"ये क्या हरकत हुई ?"



"मैँने जो किया है, ठीक किया है बांड अंकल l” विकास बोला ।



"अबे क्या घंतू की जड़ ठीक किया है हरामी के पिल्ले ।" बागारोफ दहाड़ा…""दुनिया का सबसे बड़ा खजाना तुमने यूं ही मिट्टी में मिला दिया । साले लोगबाग तो खजाने के लिए अपनी जान तक लड़ा देते हैं ।"




"ये बातों से नहीं समझेगा, चचा ।" पूरी स्थिति समझकर माईक भी गुर्राया-"इसने विश्व के साथ गद्दारी की है

हीरे पन्नो से भरा दुनिया का सबसे बडा खजाना नष्ट किया हे । ये काम इसने विश्व के अहित मे किया है । इसे मैं जिंदा नहीं छोडूगा l”



कहता हुआ माईक विकास की और बढा किंतु बागारोफ पीछे से उसका कालर पक्रड़कर वापस खींचता हुआ बोला……'"अबे रुक चटनी के । अगर उसे जिंदा नही छोड़ेगा तो विश्व…अदालत तुझे नहीं छोड़ेगी । इसका इलाज ये नहीं है, इलाज ये है कि हम इसके विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय अदालत में केस करेगे । इसने दुनिया का एक महान खजाना नष्ट करके विश्व का नुकसान किया है I”



बांड और माईक को विकास पर ताव आ रहा था । उनका दिल चाह रहा था कि विकास को यहीं मार डाले लेकिन बागारोफ़ उन्हें ऐसा नही करने दे रहा था ।


चाहकर भी माईक और बांड अपने इरादे मेँ सफल नहीं हो सके I हालांकि बागारोफ़ भी विकास की इस ऊटपटांग हरकत पर उसके विरूद्ध था किंतु उसने ये सोचा था कि विश्व-अदालत मेँ वह सब जासूसों की और से विकास के खिलाफ मुकदमा दायर करेगा!



फिनिश




विश्व अदालत हेग में!


दुनिया के सब जासूसों ने मिलकर विकास के विरुद्ध मुकदमा दायर कर दिया l सारे जासूस हेग में उपस्थित थे l



भारत में भी घटना की खबर दे दी गई थी I इस मुकदमे मे विश्व-अदालत की ओर से हिंदुस्तान को ये सहूलियत दी गई थी कि हिंदुस्तान का कोई भी व्यक्ति विकास की ओर से मुकदमा लड़ सकता है ।

भारत की ओर से यह मुकदमा लडने के लिए बिजय को हेग भेजा गया था । पांच जजों की बेच बैठ चुकी थी । लगभग हर देश का जासूस अदालत-कक्ष मे उपस्थित था । बिकास मुजरिम वाले कटघरे में खड़ा था I



बिजय का विरोधी वकील चीख रहा था-""ज्यूरी आँफ वर्ल्ड! कदाचित ये केस विश्व-अदालत के लिए सबसे अजीब केस है । ये व्यक्ति जो मुजरिम के कटघरे में खड़ा है । ये भारतीय है और भारत का ये सबसे बड़ा जासूस है । विश्व के सारे जासूस एक खजाने की तलाश मेँ निकले थे । बो खजाना चंद्रमा से आए अपराधी टुम्बकटू का खजाना था । भारत का ये जासूस विकास उस खजाने तक सबसे पहले पहुच गया I वह खजाना विश्व का सबसे बड़ा खजाना था । इसमें इतना धन था कि पूरे विश्व का घन भी उस खजाने के धन के सामने केवल एक बटा दस है । सारे जासूस उस खजाने तक पहुच चुके थे । जासूस लोग बडी सरलता से उस खजाने को ला सकते थे, किंतु मुजरिम बिकास ने उसे तारपीडों से नष्ट कर दिया I मि. विकास का ये कार्य साफ ढंग से चिश्वद्रोही है । मैं ज्यूरी को समझाना चाहता हूं कि मि. विकास पर ये इल्जाम है कि उन्होंने विश्व की सम्पत्ति को खाक में मिला दिया है । माईक, बागारोफ और बांड जैसे जासूस मि. बिकास को रोकते ही रह गए किंतु मि. बिकास ने देखते-ही-देखते विश्व की इतनी बडी सम्पत्ति को नष्ट कर दिया I”



वकील के इन शब्दों के बाद अदालत में एकदम सग्नाटा छा गया I



“मि. बिकास I” पांच मे से एक जज बोला…-“क्या आपने वास्तव मे यह खजाना नष्ट किया है?”

"जी हां ।" बिकास ने संक्षिप्त-सा उत्तर दिया ।


"मिस्टर विजय ।" दूसरे जज ने बिजय से कहा-“क्या आप मिस्टर बिकास पर लगाए गए अभियोग के विषय में कुछ बोलना चाहते हैं?”



“जूरी आँफ़ वर्ल्ड!" अपने स्थान पर खडा होकर विजय बोला-“मैं जरा माईक, बांड और बागारोफ के बयान लेना चाहता हूं l"



ज्यूरी ने इजाजत दी और सबसे पहले जेन्सबांड को बुलाया गया l



"मिस्टर जेम्सबांड I" विजय बोला……'"टुम्बकटू के खजाने में दौलत किस रूप मेँ थी?"



“हीरों और पन्नो के रूप में I” बांड ने जवाब दिया…"टुम्बकटू का यान भी गोल्ड का था ।"


बस, यही सवाल उसने अलग अलग माईक और बागारोफ से किया । ज़वाब वही था जो बांड ने दिया ।



अंत मे विजय बोला…"ये साफ हो गया ज्यूरी आँफ़ वर्ल्ड कि टुम्बकटू के खजाने मेँ बेशुमार दौलत हीरों और पन्नो के रूप मेँ थी । अब मैं अपने काबिल दोस्त से यह प्रश्न करना चाहता हू कि विश्व में आखिर हीरों और पन्नों की इतनी वेल्यू क्यों है?"



"मेरे काबिल दोस्त ने बडा अजीब-सा प्रश्न किया है l" वकील बोला…“हीरों और पन्नों को घरती पर दौलत माना जाता है ।"



"मेरा सवाल ये है ज्यूरी आँफ़ वर्ल्ड कि आखिर हीरों और पन्नों में ही ऐसी क्या खास बात है जो दुनिया उसे खुदा मानती है?" विजय बोला “किसी अन्य वस्तु की भी तो इतनी वैल्यू हो सकती है । हीरों में ही आखिर वो क्या खासियत हे जो इन्हें इतना कीमती माना जाता है?”



"ये अजीब-सा प्रश्न मैं समझ नहीं पा रहा हूं । ज्यूरी आँफ वर्ल्ड" वकील बोला…“मुद्रा तो मुद्रा ही होती है I”



"दूसरे शब्दों में मेरा प्रश्न हैं ज्यूरी आँफ वर्ल्ड कि मुद्रा की कीमत कम होती है l मान लिया जाए कि किसी देश की मुद्रा डॉलर है !" बिजय अब एक-एक शब्द पर जोर देता हुआ बोला…"उस देश में डॉलर की कीमत उसी समय तक रहती है जब तक उस देश की सरकार डॉलर उतनी ही संख्या मेँ छापे जिससे देश ठीक चल सके । अगर वह डॉलर बेहिसाब छापता ही चला जाए तो क्या होगा?"



"शायद मेरे काबिल दोस्त यहां 'इकोनॉमिक्स' का सवाल उठा रहे हैं I" वकील बोला…“जरूस्त से ज्यादा कोई भी देश मुद्रा नहीं छाप सकता क्योकि इससे देश में मुद्रा की कीमत घट जाएगी और देश की सारी अर्थव्यवस्था गड़वड़ा जाएगी । देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ाने का मतलब होगा देश का विनाश । शायद मेरे काबिल दोस्त जानते हैं कि किसी देश में जब मुद्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है तो उसे मुद्रा स्फीति कहते हैं I”
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Re: चीते का दुश्मन

Post by 007 » 11 Jun 2017 14:05

"मैं उस मुद्रा स्फीति को ही ज्यूरी आँफ़ वर्ल्ड क्रो समझाना चाहता हूं।” विजय बोला…"मेरे काबिल दोस्त ये मानते हैं कि जब किसी देश में मुद्रा स्फीति हो जाती है तो उस देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाती है और देश विनाश की और बढ़ने लगता है । इस स्थिति मे उस देश की सरकार क्या करती है? में ये प्रश्न अपने काबिल दोस्त से करना चाहता हू I”

"इस मुसीबत से बचने के लिए कोई भी देश, देश की मुद्रा बदल देता है यानी उस मुद्रा को जो मुद्रा स्थिति है, वेल्यू खत्म करके दूसरी मुद्रा चला देता है । जो आवश्यकता के अनुसार तैयार की जाती है ।"




"बस, यही बात मैं इस अदालत को समझाना चाहता हू।" बिजय ठीक किसी वकील क्री भांति जोश में चीखकर बोला…“ये तो हुई किसी एक देश की बात । अब मैं ज्यूरी आँफ वर्ल्ड का ध्यान उस खजाने की ओर ले जाना चाहता हू। ये अदालत मेँ सिद्ध हो चुका है कि खजाने की सारी दौलत हीरों, पन्नों और गोल्ड के रूप में थी । ये तीनों ही चीजें पूरे विश्व मेँ मुद्रा का स्थान रखती हैं । ये भी सिद्ध हो चुका है कि उस खजाने मे पूरे विश्व की दौलत से दस गुना अधिक दौलत थी । जरा ज्यूरी आँफ वर्ल्ड इस बात पर ध्यान दें कि जितनी दौलत पूरे संसार में है अगर उससे दस गुनी दौलत विश्व में आ जाती तो विश्व की स्थिति क्या होती? क्या पूरे विश्व में मुद्रा स्फीति नहीं हो जाती? इतनी दौलत आने पर दुनिया में हीरों-पन्नों और गोल्ड की कीमत क्या रहती? क्या ये सब मिट्टी की भांति व्यर्थ नही हो जाते? क्या पूरा संसार एक साथ मुद्रा स्फीति के संकट मे नहीँ पड़ जाता? इस स्थिति मे क्या होता? क्या पूरे विश्व को अपनी मुद्रा नहीं बदलनी पडती?”



विजय के शब्द सुनकर सारी अदालत सन्नाटे की-सी अवस्था मेँ रह गई । एक जज ने प्रश्न किया-“आप कहना क्या चाहते हैं?"



"मैं कहना ये चाहता हूं ज्यूरी आँफ़ वर्ल्ड कि मि. बिकास के खजाने को नष्ट कर देना बिश्वद्रोही कार्य नहीं बल्कि विश्वहित में है । मि. विकास उस खजाने को नष्ट न करते और खजाना दुनिया में आ जाता तो संसार मुद्रा स्फीति के संकट में पड जाता । हीरों, पन्नो और गोल्ड का मूल्य समाप्त हो जाता । सारे विश्व को इन वस्तुओं का महत्व समाप्त कर देना पड़ता । इस भयानक संकट से मि. बिकास ने उस खजाने क्रो नष्ट करके विश्व को मुद्रा स्फीति के भयंकर संकट से बचा लिया है । विजय के शब्द सुनकर सारी अदालत विश्व-भर के जासूस-विरोधी वकील और ज्यूरी तक सोचने पर विवश हो गए ।



"टुम्बकटू नामक व्यक्ति I” विजय अपने एक…एक शब्द पर जोर देता हुआ आगे बोला…“यह अदालत जानती है कि वह चंद्रमा का निवासी था । चंद्रमा पर से ही वह इतना बड़ा खजाना लाया था I इस घटना के बाद वह मुझसे मिल चुका हे । उसने मुझें ये पत्र दिया I” एक पत्र अपनी जेब से निकालता हुआ बिजय चीखा…"इस पत्र मे उसने लिखा है कि पहले चंद्रमा पर भी हीरों और पन्नो को ही मुद्रा का महत्व दिया जाता था लेकिन एक बार वहां खुदाई में हीरों और पन्नों के पर्वत निकल आए । अत: वहां हीरों, पन्नों की भरमार हो गई I वहां मुद्रा स्फीति हुई और परिणामस्वरूप चंद्रमा पर हीरों और पन्नों के महत्त्व क्रो कम कर दिया गया । अब वहां हीरे और पन्ने धरती की मिट्टी से अधिक महत्व नहीं रखते । उन्हीं पर्वतों से वह हीरे…पन्ने भरकर यहां लाया था I अगर ये खजाना विश्व तक पहुच जाता तो घरती पर भी इनकी वेल्यू समाप्त हो जाती और विश्व खतरे में घिर जाता । मैँ अदालत को ये समझाना चाहता हूं कि ये खजाना विश्व के लिए वरदान नहीं, अभिशाप था । उसका नष्ट होना ही विश्व के हित में था ।"

इस प्रकार विजय के इस ठोस तर्क को विरोधी वकील नहीं काट सका । विरोधी वकील ही क्या, खुद पांचों जज उसके तर्कों से प्रभावित हुए और बिकास को बाइज्जत बरी किया गया । अदालत को यह मानना ही पड़ा कि विकास का ये काम विश्व के हित मेँ था । जब बिजय और विकास अकेले मेँ मिले तो विकास ने कहा…“क्यों गुरु, टुम्बकटु के लेटर का खूब गच्चा दिया?"



"गच्चा-बच्चा कुछ नहीं दिया प्यारे दिलजले…गच्चा हमें टुम्बकटू दे गया I"



"क्या मतलब? "



"मतलब ये प्यारे कार्टून कि वो कार्टून अभी जिंदा है और वास्तव में मुझे ये लेटर उसी ने दिया है I”



"लेकिन गुरु, वो जिंदा बच कैसे गया?"



"ये तो वही जाने I” विजय ने कहा…"और प्यारे, वो चंद्रवटी भी अपने हाथ से निकल गई I"



“कैसे?" एक बार बिकास और भी बुरी तरह चौंका ।



जवाब में विजय ने उसे सब कुछ बता दिया और नम्र स्वर में बोला-"इसके बाद हमने साले लूमड़ मियां का कचूमर निकाल दिया यानी बेहोश कर दिया । अब वह भारत की एक जेल में है ।"


"इसका मतलब ये हुआ गुरु कि कुछ हाथ नहीं लगा I"



"हाथ क्यों नहीं लगा प्यारे दिलजले ।" विजय बोला-“ये क्या कम है कि तुम अंतर्राष्टीय सीकेट सर्विस के चीफ बन गए हो I”



चीते का दुश्मन


समाप्त


THE END
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