चीते का दुश्मन complete

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चीते का दुश्मन complete

Post by 007 » 10 Apr 2017 20:30

चीते का दुश्मन

"बेटा लूमड़ मियां. . .!" बिजय अलफांसे को एक क्षण घूरने के बाद बाईं आंख दबाकर बोला-“इसका मतलब ये हुआ कि उस फिल्म के ज़रिए तुम हर जासूस से एक-एक करोड़ रुपया ऐठोगे I”



“बिल्कुल ठीक समझे जासूस प्यारे I” अलफांसे अधिक आराम से कुर्सी पर पसरता हुआ बोला…"मेरा ख्याल है कि आजकल मूग की दाल में भीमसेनी काजल कुछ अधिक मिलाकर खाने लगे हो I"



"मगर असली फिल्म किसे दोगे लूमड़ भाई?"



"इसका निर्णय भला मैं कैसे कर सकता हू?" बड़े बिचित्र ढंग से मुस्कराया अलफांसे ।



“तो प्यारे लूमड़ खान, तुम्हारे इस सम्पूर्ण व्याख्यान का रस ये है कि हम यानी बिजय दी ग्रेट तुम्हारे हलक मेँ एक करोड़ रुपया ठूंसें और इस पर भी यह गारंटी नहीं कि फिल्म असली ही मिलेगी ।"



"जब तक तुम मुझे एक करोड रुपया नही दे देते तब तक भला मैँ तुम्हें कैसे बता सकता हूं कि मेरा इरादा तुम्हें असली फिल्म देने का है अथवा नकली I"



"बेटे तूमड़मल पक्रोड्री वाले?" एकाएक विजय का लहजा सख्त हो गया…“लोग हमेँ विजय दी ग्रेट कहते हैं ।" कहते हुए विजय ने बड़े अंदाज के साथ अपनी बांहें ऊपर चढाई और उसकी ओर बढ़ता हुआ गुर्राते हुए लहजे में बोला--"कसम छज्जन ताई की, तुम्हें फूटी कौडी भी नहीं देंगे और फिल्म हमारे पास होगी. . .ऐसा भी हो सकता है कि तुम्हारे मुंह में फंसा ये जबड़ा भी हमारे पास हो I”



"तुमसे पहले भी कह चुका हू जासूस प्यारे कि मुझे मालूम है तुम इतने मूर्ख नहीं हो I” बिना विचलित हुए अलफांसे मुस्कराते हुए बोला…“तुम खुद यहां चंगेज खां के मेकअप में आए हो I"



"ये रहस्य केवल तुम जानते हो लूमड़ भाई I” बिजय मूर्खों की भांति बोला…“और तुम्हें इतना मौका नहीं देगे कि तुम किसी और को यह बता सको I”



“अलफांसे रास्ते में आए रोडों को ठोकर मारकर हटा देता है I”



" लेकिन हम रोड़े नही, भारी पत्थर हैं लूमड़ भाई I" कहते हुए बिजय ने बडी तेजी के साथ अलफांसे पर जम्प लगा दी ।


लेकिन अलफांसे विजय के तेवर देखकर ही समझ गया था कि वह किस मूड में है? बिजय से अधिक शक्ति का प्रदर्शन करके उसने कुर्सी सहित खुद को गिरा लिया था ।



उसके बाद अलफांसे ने बडी तेजी से उठने की कोशिश की । किंतु उसका पैर कुर्सी मेँ उलझ गया…इस कारण उसे उठने में कुछ विलम्ब हुआ और इसका लाभ उठाते हुए बिजय ने ठोकर उसके चेहरे पर रसीद कर दी ।



अलफांसे उछलकर दूर जा गिरा ।

लेकिन बिजली की-सी गति से वह पलटा और इस बार उसके हाथ में रिवॉल्वर था ।



अलफांसे के हाथ में रिवॉल्वर देखते ही विजय सकपका गया । एक पल तक मूखों की भांति पलकें झपकाता हुआ बिजय उसे घूस्ता रहा…फिर भटियारिन की भांति हाथ नचाकर बोला…" हाय लूमड़ मियां, क्या दम ही निकालोगे?"



अलफांसे मुस्कराकर बोला…"ये मत समझना बेटे कि तुम संग आर्ट के जरिए इस रिवॉल्वर की गोली से बच जाओगे. . .ये साधारण रिवॉल्वर नहीं है । संग आर्ट द्धारा केवल रिवॉल्वर की नाल देखकर ये अनुमान लगाया जाता है कि गोली जिस्म के कौन-से भाग से टकराएगी. . लेकिन परेशानी ये है कि इस रिवॉल्वर की नाल दिखावटी है । गोली नाल मेँ से नहीं, कही और से निकलेगी । तुम अनुमान नहीं लगा सकते कि गोली तुम्हारे कौन से अंग में लगेगी । अत: संग आर्ट फेल ।"



". . .!" विजय ने बडी अदा के साथ आंख मारते हुए कहा…"यानी क्रि लूमड़ खान, ये साला स्पेशल रिवॉल्वर तुम्हारे घर में बनने लगा है I”



"विजय बेटे!" अलफांसे उसी प्रकार मुस्कराता हुआ बोला-“तुमने मुझसे टकराकर अपना ही नुकसान किया है । अगर यू.एन.ओ. को मालूम हो गया कि चंगेज खां तुम्हारी कैद में है और शुरू से तुम ही चंगेज खां बने हुए हो तो विश्व मे भारत की कितनी बदनामी होगी और दुम्बकटू वाली फिल्म तो अब तुम्हें मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता । अब देखते जाओ, मैं क्या…क्या गुल खिलाता हूं ।"



"अमां यार लूमड़ प्यारे! "

बिजय अभी कुछ कहने ही जा रहा था कि-


अचानक हवा में सनसनाता एक तीर अलफांसे की कलाई में धंस गया । रिवॉल्वर अलफांसे के हाथ से छूटकर फर्श पर गिर गया । वक्त की नजाकत को पहचानकर अलफांसे ने अपने हाथ के दर्द को भुलाकर फर्श पर पड़े रिवॉल्वर पर जम्प लगाई परंतु एक जबर्दस्त ठोकर उसके चेहरे से टकराई ।



हल्की-सी एक चीख के साथ अलफांसे दूसरी ओर उलट गया ।



"प्रणाम गुरू !" कमरे मेँ विकास क्री आवाज गूंजी ।



पलटकर अलफांसे ने देखा. . .सामने विकास खडा था। उसका पैर फर्श पर पड़े रिवॉल्वर पर था । दोनों हाथ कूल्हो पर और गुलाबी होंठों पर मधुर मुस्कान ।



"वो मारा पापड वाले को I" अपने स्थान से विजय चीखा…"प्यारे दिलजले, आज तुमने सिद्ध कर दिया कि तुम अलादीन खे वंशज हो I”



"बोलो मत गुरु! " विकास ने अलफांसे पर नजर जमाते हुए कहा…“इस समय जरा क्राइमर गुरु से बातें हो रही हैं. ..क्यों अलफांसे गुरु, क्या ख्याल है?”



"खयाल तो बडे नेक हैं I” अलफांसे अपने स्थान से उठता हुआ बोला…“जमाना ये है कि जिसने गुरु…चेले के हाथ…पैर कुतें-पजामे से बाहर निकाले वे हाथ गुरु पर ही उठते हैं I"

“सवाल हाथ उठाने का नहीं है गुरु.. .सवाल है सिद्धांत का l” अपने पैर के नीचे दबा हुआ रिबॉंत्वर उठाता हुआ विकास बोला-“ये मुकाबला चल रहा है जासूसों का । इसमें
आप क्यों दाल-भात में मूसलचंद की भांति टपक रहे हैं । टुम्बकटू को गिरफ्तार करके खिचडी हमने पकाई है और सारी…की-सारी सूत आप जाना चाहते हैं I”



"तो उन जासूसों में बिजय का भी नाम है?” अलफांसे व्यंगात्मक स्वर में बोला…“अगर अंतर्राष्टीय सीफेट सर्विस के जासूसों को पता लग जाए कि चंगेज खा विजय है तो भारत की शान मे चार चांद लग जाएं ।"



"आप विजय गुरु को ब्लैकमेल कर सकते हैं गुरु, लेकिन याद रखिए मेरा नाम विकास है ।" रिवॉल्वर का रुख वह अलफांसे की ओर करके बोला…“आप जानते है कि मेरा सिद्धांत विजय गुरु से एकदम अलग है । व्यर्थ की बातें मैं नहीं सोचा करता । अपनी किस हरकत से भारत की शान पर क्या फ़र्क पडेगा, यह सोचने का काम बिजय गुरु का है । आपका चेला हूं गुरु, आपको मालूम है कि विकास सोचता नहीं है । जो काम करना होता है, करता है । ये भी आप जानते हो गुरु कि जो भी आंख भारत की ओर तिरछी नजर से देखती है उस आंख को विकास फोड देता है । अगर आपने कोई भी ऐसा काम किया गुरु जो हिंदुस्तान के लिए हानिकारक हुआ तो कान खोलकर सुन लें . . .आपने मुझें सिखाया है दुश्मन दुश्मन होता है, उसे हमेशा के लिए खत्म कर देना ही अच्छा होता है ।”



"मतलब ये हुआ प्यारे विकास कि तुम मुझे धमकी दे रहे हो?"



"धमकी नही गुरु, चेतावनी दे रहा हू I" बिकास रिवॉल्वर उंगलियों मे घुमाता हुआ बोला…“अगर आपने कोई भी गलत कदम उठाया तो समझ लीजिएगा विकास का सबसे बडा दुश्मन अलफांसे होगा ।"

"और तुम ये समझते हो कि अलफांसे तुम्हारी दुश्मनी से डरता है I”



"इसका तो सवाल ही नहीं उठता गुरु, लेकिन ये जरूर कहूंगा कि ये दुश्मनी आपको महंगी पड़ सकती है । अच्छा है व्यर्थ ही आप हमारे रास्ते में आकर दुश्मनी न करें ।"



"मैं कब रास्ते में आ रहा हू I”



"अगर वास्तव में रास्ते मेँ नहीं आ रहे हो गुरु तो वह फिल्म हमेँ सोंप दो l” बिकास ने कहा ।


“मैंने उस फिल्म की कीमत केवल एक करोड घोषित की है, बेटे!" अलफांसे चिरपरिचित मुस्कान के साथ बोला…“एक करोड कैश मेरे हाथ पर रखो और फिल्म ले लो । रास्ता साफ़ है, सबसे बड़े जासूस तुम्ही कहलाओगे I”



"वैसे तो सोचने की बात ये भी है गुरु कि यहां मास्को मे मैं तुम्हें रुपए दे कहां से सकता हूं , लेकिन अगर किसी तरह दे भी दूं तो इसकी क्या गारंटी है कि तुम मुझे असली फिल्म ही दोगे? " विकास अलफांसे की आंखों में झांकता हुआ बोला ।



"ये तो तभी पता चलेगा जब माल मेरे हाथ पर रखोगे I” अलफांसे ने बिना विचलित हुए कहा ।



"प्यारे धनुषटंकार !" बिकास ने कमरे के रोशनदान की और देखते हुए कहा ।
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Re: चीते का दुश्मन

Post by 007 » 10 Apr 2017 20:32

रोशनदान पर बैठे धनुषटंकार ने विकास का संकेतु पाते ही सीधी जम्प अलफांसे के कदमों में लगाई, उसके बाद विजय के चरण स्पर्श किए और उसी के कंधे पर बैठकर जेब से सिगार निकालकर सुलगाने लगा । उसकी हरकतें देखकर तीनों अलग-अलग ढंग से मुस्कराए पर बोला कोई कुछ नहीं ।

सिगार सुलगाकर धनुषटंकार ने लापरवाही का प्रदर्शन करके एक कश लिया और धुएं का एक छल्ला हवा में उछाल दिया । उसके बाद उसने जेब से एक छोटी…सी डिबिया निकालकर बिकास की ओर उछाल दी ।



बिकास ने डिबिया को लपक लिया और उंगलियों में घुमाता हुआ बोला-"इसे देख रहे हो गुरु. . .ये वो चीज है जिसकी कीमत आप एक करोड मांग रहे हैं I"



मन…ही-मन अलफांसे चौंक पड़ा । र्कितु प्रत्यक्ष मेँ उसने चेहरे के भावों से कुछ प्रकट नहीं किया, बोला…"हम तुम्हारे गुरु हैं, बेटे. . .गच्चा मत देना ।"



"गच्चा नहीं दे रहा हू गुरु बल्कि तुम्हें समझा रहा हूं मैं आपका पक्का चेला हू I” बिकास ने कहा…“आप इस फिल्म को अपनी पानी वाली टंकी में डालकर सुरक्षित समझ रहे थे किंतु इसका क्या किया जाए कि आपका शिष्य यह जानता है कि होटल के कमरे मेँ किसी महत्त्वपूर्ण वस्तु को छुपाने का कौन-सा स्थान अधिक उचित होता है?" विकास बोलता ही चला गया-"आपका ये नाचीज चेला इसे ले आया है I”




"इसका मतलब ये हुआ बेटे कि तुम ये फिल्म मुफ्त में ही मार लाए?” अलफांसे ने मुस्कराते हुए कहा ।



“और अब मैं आपसे एक सौदा करना चाहता हूं गुरु?”



"गुरु से सौदा?"


“दुनिया ने ऐसी कोई पाबंदी नहीं बनाई है कि गुरु से सौदा नं हो सके I" विकास ने कहा…“वेसे आपसे सौदा करने में बिकास इतना खयाल जरूर रखेगा क्रि गुरु को भी लाभ हो । इजाजत हो तो फरमाऊं?"


" बको! "

"आप ये जानते हैं कि चांगली के रूप मे बिजय गुरू है ?" विकास ने बोलना शुरू किया…"ये तो निश्चित रूप से मानना होगा कि अगर ये रहस्य अन्य जासूसों के सामने खोल दिया जाए तो अंतर्राष्टीय जगत में अर्थात् विश्व राजनीति मे मारत के सम्मान को धक्का लगेगा, मगर इससे लाभ तुम्हें भी कुछ नहीं होगा, अलबत्ता इस रहस्य को गुप्त रखने मेँ आपको फाफी लाभ हो सकता है ।"



“बो लाभ भी बता दो I”



“अगर आपने यह रहस्य खोला तो मैं भी यह रहस्य स्पष्ट कर दूगा कि टुम्कटू की जांघ से निकली वास्तविक फिल्म मेरे पास है । इस प्रकार तुम्हारे हाथ कुछ नहीं लगेगा, बल्कि इसका उल्टा हुआ तो आप अन्य देशों के जासूसों से दौलत ऐठ सकते हैं । तुम्हारा उद्देश्य भी दौलत कमाना है...आप भरपूर दौलत कमा सकते हैं । इधर मैं अपने काम में लग सकता हूं । न तो मैं आपके बीच में टांग अड़ाऊंगा और न ही आप हमारे बीच में आएं?"



सुनते ही बडी गहरी मुस्कान अलफांसे के होंठों पर उभरी । वह बोला…“बेटे, विकासा मान गए कि तुम असली चेले हो . . . ये तो ठीक है कि इस सौदे मेँ तुमने मेरा भी लाभ सोचा है, मगर अपने दो मतलब एकदम हल कर गए. . .पहला ये कि बिजय का रहस्य गुप्त रखकर हिंदुस्तान को विश्व राजनीति में बदनाम होने से बचा लिया l दूसरा ये कि अपना रास्ता साफ़ कर लिया I”



"क्या मतलब? "

"माना विकास कि आज तुम दुनिया में काफी नाम कमाँ चुके हो परंतु ये मत भूलो कि हम तुम्हारे गुरु हैं l तुमने ये सोचा है कि इधर सौदे में मैं अपना लाभ देखकर जासूसों को फिल्म के चक्कर में उलझाए रखूंगा । उधर तुम आराम से इस फिल्म के रहस्यों तक पहुंच जाओगे । ये जासूस तुम्हारे मार्ग में बाधा उत्पन्न कर सकते थे, लेकिन तुम उन्हें मेरे चक्कर में उलझाकर अपना रास्ता एकदम साफ कर लेना चाहते हो, लेकिन कोई बात नहीं । गुरु तो हमेशा चेले का भला चाहता है । विजय की तरह मेरी भी दिली ख्वाहिश यही है कि दुनियाभर के जासूसों में सबसे बड़ा जासूस तुम कहलाओ । अंतर्राष्ट्रिय सीक्रेट सर्विस के चीफ तुम बनो । जब मैं तुम्हें तुम्हारी दसवीं वर्षगांठ पर उठाकर ले गया था और तुम्हें ट्रेड किया था उसी दिन से मैंने यह चाहा था कि तुम दुनिया में सबसे बड़े जासूस बनो । विश्व का कोई भी इंसान जब सबसे बड़े जासूस का नाम लेगा तो यह जरूर कहेगा कि इस जासूस क्रो अंतर्रादृट्रीय अपराधी अलफांसे ने बनाया था । धीरे-धीरे मेरे वह सारे सपने साकार होते जा रहे हैं विकास. . .जो तुम्हारे बचपन में तुम्हें लेकर मैंने बुने थे । तुम्हें मैं सबसे बड़ा जासूस देखना चाहता हू । मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है । मैं तुम्हारा ये सौदा तुम्हारी तरक्की के लिए मंजूर करता हू I"



“वो मारा पापड़ वाले को ।” सुनते ही विजय उछल पड़ा-“ लूमड़ मियां, अब कही है तुमने पते की बात. . . कसम दोनों के चेले विकास की । इस मौके पर एक खौफ़नाक झकझकी याद आ रही है । हम दोनों का बनाया हुआ ये सात फुट लम्बा पुतला विश्व में चर्चा का विषय बने यही तो हमारे सपने हैं । इसलिए तो भारत की तरफ़ से हमने इसे अंतर्राष्टीय सीक्रेट सर्विस में भेजा न I”



"झकझकी सुनाकर तुम अपने चेले को ही बोर करो ।" अलफांसे बोला-“मैं चला. ."। कहता हुआ अलफांसे दरवाजे की ओर बढ गया । उसे रोकने की कोशिश किसी ने भी नहीं की । अलबत्ता विजय विकास की बुद्धि की मन…ही-मन दाद जरूर दे रहा था ।



बिकास अपने हाथ मेँ उस फिल्म को घुमा रहा था ।



@@@@@@@@@@@@@@@




"बस, मुझे यही उतार दो ।" मास्को की चुंगी आते ही उस व्यक्ति ने ट्रक ड्राइवर से कहा ।


ट्रक ड्राइवर ने चुंगी पर ही ट्रक रोक दिया।

उस इंसान ने ट्रक ड्राइवर को धन्यवाद दिया ।


घन्यवाद को संभालकर ड्राइवर ने अपनी जेब में रख लिया और ट्रक आगे बढा दिया ।



कुछ देर तक वह इंसान सडक पर जाते हुए उस ट्रक को देखता रहा और फिर उसने उधर से इस प्रकार दृष्टि हटाई जैसे उसे अब ट्रक में कोई दिलचस्पी न हो ।



उसके चेहरे पर अभी तक चिंता की रेखाएं अपना प्रभुत्व जमाए हुए थीं । कदाचित वह यह सोच रहा था…कि अब उसे क्या करना है...उसने इधर-उधर दुष्टि धुमाईं...और पाया कि चुंगी के इर्द-गिर्द सन्नाटा ही था.. . ।



रात के दस बज चुके थे । कुछ देर वह अपने स्थान पर खडा यूं ही सोचता रहा ।



और तभी शहर की ओर से आती हुई एक खाली टैक्सी चमकी. . . । टैक्सी चुंगी पर रुकी और उससे भी एक सवारी उतरी ।


वस इंसान आगे बढकर टैक्सी वाले से वोला-“ शहर चलोगे?”



"जी हां!" टैक्सी वाले ने उत्तर दिया ।


पता बताकर कैद से भागा हुआ वह इंसान टैक्सी में बैठा और टैक्सी फर्राटे भरती हुई मास्को शहर की तरफ बढ गई । टैक्सी तेजी से दोड़ रही थी...र्कितु उससे भी अधिक तेज' उसका मस्तिष्क सोच रहा था ।



उसे कैद मेँ पड़े हुए दस दिन गुजर गए । वह किसकी कैद मेँ था? उसे कैद करके किसी ने क्या लाभ उठाया होगा?



अंतर्राष्टीय सीक्रेट सर्विस की मीटिंग भी हो ली होगी । उसे मीटिंग मेँ न पाकर सबने क्या सोचा होगा?



मीटिंग मेँ उसकी अनुपस्थिति का उसके देश पर क्या प्रभाव पडा होगा? उसे तो यह भी पता नहीं लगा कि वह किसकी कैद में था ।



इन्ही सब प्रश्नों के उत्तर मेँ उलझता हुआ वह अपने विचारों की दुनिया मेँ बहुत आगे निकल गया था कि उसके मस्तिष्क को एक झटका-सा लगा ।


टूटी हुईं माला के मोतियों की तरह उसके विचारों की लडियां एकदम बिखर गईं ।


उसने देखा…टैक्सी उसकी मंजिल पर खडी है । वह तेजी के साथ टैक्सी से उतरा और बिल अदा करके उसे विदा किया ।



वहां द्वार पर खड़े दरबान ने रोकने का कोई प्रयास नहीं किया । वह तेजी से चलता हुआ अंदर प्रविष्ट हो गया । पांच मिनट पश्चात वह चौथी मंजिल की गैलरी में बढ रहा था ।



एक कमरे के सामने वह रुक गया । हाथ बढाकर कमरे के दरवाजे पर दस्तक दी ।


"कम इन ।" अंदर से आवाज आई ।

उसने दरवाजा अंदर को धकेल दिया I सामने एक सोफे पर जेम्सबांड बैठा हुआ था । उसके सामने मेज़ पर एक दारू का बोतल, गिलास और भुना हुआ मुर्गा रखा था। बांड ने दरवाजा खुलने के साथ ही उस तरफ देखा-सामने दरवाजे पर खडे इंसान को देखते ही बांड उछल पड़ा ।



पलक झपकते ही वह खडा हो गया और उसके हाथ मे रिवॉल्वर चमकने लगा ।



'हैंड्स अप मि. त्वांगली ।”




दरवाजे पर खड़ा इंसान बुरी तरह चौंका"…बौखलाहट के भाव उसके चेहरे पर आए । एकदम बोला-"क्या मतलब?”



"पहले आप हाथ ऊपर उठा लो, मि. त्वांगली ।" अपने रिवॉल्वर को हिलाता हुआ पूरी तरह सतर्क होकर बांड बोला……'" इस बार अगर कोई भी हरकत की तो मेरी गोली तुम्हारा भेजा उड़ा देगी I"



“मेरी समझ मेँ नहीं आ रहा है कि तुम कह क्या रहे हो?" असमंजस में फंसा त्वांगली हाथ ऊपर उठाता हुआ बोला ।



"मतलब भी सब समझ जाओगे बेटे…जरा मेरी बाईं क्लाई में बंधी हुईं पट्टी देखौ-ये चाक्रू माईक ने मारा है । एक पट्टी कपडों के नीचे पेट पर बंधी हुई है जो चंगेज खां ने मारी थी । लेकिन तुम सबसे सुर्मे निकले । हम तो आपस में लडते-मरते ही रह गए और तुम फिल्म लेकर पार हो ले I”



"मैं…!" त्यांगली की खोपडी घूम गईं-"ये तुम क्या बक रहे हो?”



"मैं जानता हूं चीनी औलाद कि तुम पैदाइशी दोगले होते हो ।” जेम्सबांड उसकी ओर बढता हुआ बोला लेकिन बांड के सामने अब ज्यादा होशियारी नही चलेगी । अगर तुमने नहीं बताया कि फिल्म कहां है तो इसी समय मैं तुम्हें गोली मार दूंगा ।”



"फिल्म ?" गहन आश्चर्य के साथ बोला त्वांगली-“कोन--सी फिल्म?"



'फिल्म कहां है?" बेहद कठोर स्वर मे बांड गुर्राया…'"जवाब दो वर्ना. . . ?"



"जवाब वो नहीं, मैं दूगा, बांड बेटे!" उसी समय कमरे में एक तीसरी आवाज गूंजी ।



अभी बांड और त्वांगली चौंककर पूरी तरह खुद को सम्भाल भी नहीं पाए थे कि त्वांगली के पीछे से गर्दन पर एक कैरेट पडी । वह लहराया और उसी पल उसके पीछे से किसी ने जोरदार ठोकर मारी ।



ठोकर इतनी शक्तिशाली थी कि त्वांगली बाकायदा हवा में लहराया और मुंह के बल फर्श पर बांड के कदमों मेँ जा गिरा ।



त्वांगली बेहोश हो चुका था ।



"गोली चलाई तो घाटे में रहोगे बांड I” दरवाजे से आवाज़ आई…“तुम्हारा फायदा करने तुम्हारे पास आया हू…अगर गोली चली तो इस कोठी में जितने भी जासूस हैं सब यहां आ जाएंगे और तुम घाटे में रहोगे ।”
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Re: चीते का दुश्मन

Post by 007 » 10 Apr 2017 20:32

बांड ने देखा…दरवाजे पर त्वांगली खड़ा था । एक पल को तो बांड चकराया परंतु अगले ही पल मुस्कराता हुआ बोला-"ओह तो मतलब ये है कि फिल्म ले जाने वाले त्वांगली तुम हो I"



"जी!" अदब से झुककर त्वांगली बोला--""खाकसार ही वह हस्ती है I"


"बको मत !" कठोर स्वर मेँ गुर्राया बांड…"तुम कौन हो?"



"पहले दरवाजा बंद कर दू?” बांड ने एक पल सोचा और बोला-“ठीक है, करदो।" त्वांगली ने दरवाजा बंद कर दिया ।



"अब बोलो, कौन हो तुम?” जेम्स बांङ ने सख्त स्वर मे पूछा ।



“नाम में क्या रखा है प्यारे, काम की बात करो I” त्वांगली जो वास्तव मेँ अलफांसे था, बोला…“और जब दो दोस्तो के बीच काम की बात होती है तो बीच में ये खिलौना नहीं होना चाहिए ।”



"ज्यादा स्मार्ट बनने की कोशिश मत करो I" बांड उसे घूरता हुआ बोला…"इतनी आसानी से तुमसे दरवाजा इसलिए बंद करवाया है क्योंकि अब इस कमरे की आवाज़ बाहर नहीं जाएगी । इस रिवॉल्वर मेँ हमेशा के लिए सुला देने वाली नींद की गोलियां हैं…किसी को पता मी नहीं लगेगा और तुम. . . I”




"मैँ जानता हू बांड कि हर जासूस का कमरा साउंड प्रूफ़ है और ये कमरा बंद भी इसीलिए किया है ताकि यहां जो हम इश्क फरमाएंगे उसकी जानकारी बाहर बालों को न हो सके I" अलफांसे ने उसकी बात बीच मेँ ही काटकर कहा ।


और बांड ने ।


"धायं! "


एकदम फायर कर दिया ।


मगर दूसरी तरफ अलफांसे था । संग आर्ट का माहिर । हल्की-सी झुकाई देकर उसने गोली को धोखा दिया और

और उससे पूर्व की बांड अगला फायर कर सके, हवा में लहराता हुआ अलफांसे का जिस्म बांड पर जा गिरा ।



बांड एकदम बौखला गया । इस्री बौखलाहट में उस समय चार चांद लग गए जब अलफांसे के बाएं हाथ की कैरेट ने उसकी रिवॉल्वर को फ़र्श पर फेंक दिया और दाएं हाथ के मजबूत घूसे ने उसे हवा मेँ उछालकर फर्श पर ला पटका ।




एक साथ इन लगातार हमलो ने बांड की हालत बैरंग कर दी परंतु फिर भी वह गजब की फुर्ती का प्रदर्शन करके एकदम खड़ा हो गया ।



उसके सामने खड़ा हुआ त्वांगली मुस्करा रहा था ।




बांड जानता था कि रिवॉल्वर की गोली से बचने की कला जासूसों में केवल विजय ही जानता है । इन दो-चार हाथीं में ही बांड ये भी समझ गया कि सामने खड़ा इंसान जबर्दस्त लड़ाका है । उसे लगा, हो न हो सामने खड़ा इंसान विजय है ।



दोनों एक-दूसरे के आमने-सामने थे । जेम्स बांड के चेहरे पर जहां हल्की…सी बौखलाहट के भाव थे वहां अलफांसे के होंठों पर गहरी मुस्कान थी ।



वह अपने दोनों कूल्डो पर हाथ रखे उससे दो कदम दूर खडा था । बांड ने खुद को सम्भाला और बोला…“मैं तुम्हें पहचान चुका हू, विजय I"



“तुमने कुछ नहीँ पहचाना है, बेटे ।" कहते हुए उसने अपने चेहरे से फेश मास्क नोच लिया ।




"तुम?" अलफांसे को सामने देखते ही बांड चौंककर दो कदम पीछे हट गया ।



"हां बेटे, ये हम हैं I" अलफांसे ने मुस्कराते हुए आगे कहा-“मैंने कहा था कि हमारे बीच में ये रिवॉल्वर नहीं होना चाहिए I”

कहता हुआ अलफांसे फर्श पर पडे रिवॉल्वर की ओर बढ़ा ।



इधर सामने अलफांसे को देखकर बांड का पूरा जिस्म तन गया था । अलफांसे की खूबियों से वह अच्छी तरह परिचित था । जैसे ही अलफांसे फ़र्श पर पड़ा रिवाॅल्बर उठाने के लिए झुका । चीते की तरह झपटा बांड ।



हालकि बांड की किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए अलफांसे तैयार था किंतु इसके बावजूद भी वह धोखा खा गया ।



बांड ने इतनी अधिक फुर्ती का प्रदर्शन किया था कि अलफांसे जैसा व्यक्ति भी पूरी तरह सतर्क रहने के बाद मी धोखा खा गया ।


जेम्सबांड के जूते की भरपूर ठोकर उसके चेहरे पर पडी । लाख चेष्टाओं के बाद भी अलफांसे एक तरफ फर्श पर जा गिरा l



और जेम्सबांड-वह जानता था कि अगर अलफांसे को क्षण-भर का भी अवसर मिल गया तो उसके लिए खतरा बन जाएगा l



डबल ओ सैविन अपने देश और विभाग का सबसे बड़ा जासूस था । उसने कोई भी रिस्क लिए बिना अलफांसे पर जम्प लगा दी । उस समय अलफांसे ने फुर्ती से करवट बदलकर अपना स्थान छोड देने की कोशिश की थी मगर बांड ने उसकी इस कोशिश को विफल कर दिया । उसके दोनों हाथ अलफांसे की गर्दन में कस गए थे l दोनों कूल्हे वह अलफांसे के पेट पर रखे हुए था । अलफांसे को लगा जैसे फौलाद के बने दो हाथों मेँ उसकी गर्दन फंस गई है । जेम्सबांड की पकड इस प्रकार सख्त होती चली गई कि अलफांसे को अपनी सांस…क्रियां रूकती हुई-सी महसूस हुईं I



बांड उसका गला दबाने को पूरी चेष्टा कर रहा था और अलफासे खुर्द को उसके पंजे से छुडाने की चेष्टा उससे कहीं बढ़कर कर रहा था ।


हालांकि शक्ति लगाने के कारण बांड के घावों में भयानक पीड़ा हो रही थी मगर वह जानता था कि अगर वह जरा भी शिथिल हुआ तो अलफांसे उसके लिए काल बन जाएगा ।




इधर अलफांसे की स्थिति क्षण-प्रतिक्षण खराब होती जा रही थी । उसे और कुछ नहीं सूझा तो उसने अपने दाएं हाथ की उंगली पूरी शक्ति से बांड के पेट वाले घाव मे दे मारी l



बांड बिलबिला उठा ।



एक क्षण के लिए उसके हाधों में शिथिलता आई और उसी क्षण अलफांसे के दोनों पैर बांड की गर्दन से लिपट गए । अलफांसे के एक ही झटके में बांड उलट गया । बांड के हाथ से अलफांसे की गर्दन निकल गई परंतु अलफांसे भी पूरी तरह अपने प्रयास में सफ़ल नही हो सका । उसका प्रयास था कि बांड की गर्दन उसके पैरों की कैची में कैद होकर रह जाए मगर. . .बांड फर्श पर कलाबाजियां खाता हुआ लुढ़कता चला गया ।



एक ही पल में दोनों उछलकर फर्श पर खड़े हुए I



अगले पल एक ही साथ दोनों के जिस्म हवा मेँ उछले । दोनों एक-दूसरे को फ्लाइंग किक मारना चाहते थे कि हवा में दोनों के पैर उछलकर रह गए ।


दोनों एक साथ फर्श पर गिरे, मगर कम कौन था ।


एक का नाम अलफांसे था तो दूसरे का जेम्सबांड ।


एक साथ दोनों एक-दूसरे पर झपटे । दोनों के सिर आपस में टकराए । कमरे में एक ऐसी आवाज गूँजी मानो दो पत्थर एक-दूसरे से टकराए हो ।



सिर भिन्ना गए लेकिन चिंता किसी ने नहीँ की ।


पुन: झपटे ।



ऐसा लगता था जैसे दो शक्तिशाली सांड भिड गए हो ।
इस बार दोनों के हाथों की उंगलियां आपस में फंस गई, दोनों एक-दूसरे का हाथ मोड़ने के लिए शक्ति लगा रहे थे । …बांड ने अपनी सम्पूर्ण शक्ति समेटकर एक तेज झटका दिया।



इस झटके का प्रभाव यह होना था कि अलफ़ांसे के हाथ मुड जाते परंतु अलफांसे एक अनोखे और चमत्कृत कर देने वाले दांव का प्रयोग कर गया था ।
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Re: चीते का दुश्मन

Post by 007 » 10 Apr 2017 20:33

जैसे ही बांड ने झटका दिया, अलफांसे किसी पुतले की भांति फर्श पर से फिसलकर बांड की टांग के बीच आधा पार हो गया ।



इससे पूर्व कि बांड उसके इस अनोखे दांव के बारे मेँ कुछ समझ पाए अलफांसे ने एक जोरदार ठोकर उसकी पीठ पर जड़ दी ।



बांड के कंठ से एक चीख निकल गई और वह लहराकर फ़र्श पर गिरा ।



उसने फर्श पर से उठने के लिए बेहद फुर्ती का प्रदर्शन किया, लेकिन अलफांसे ने उसकी पसलियों में एक ठोकर रसीद कर दी । बांड पीड़ा से तड़प उठा ।



तभी दूसरी ठोकर. . . तीसरी.. चौथी. ..पांचवीं. . .इसकै बाद अलफांसे ने उसे सम्भलने का अवसर नहीं दिया ।




एक अवस्था ऐसी थी कि बांड कराहकर शिथिल-सा पडा रह गया ।



तब कहीं जाकर अलफांसे ने अपनी ठोकरों का क्रम रोका । सत्तर्कतावश अलफांसे चुपचाप खड़ा उसे देखता रहा ।



जेम्सबांड बेहोश नहीं हुआ था बल्कि कराह रहा था । अलफांसे ने फर्श पर पड़े बांड का रिवॉल्वर जेब के अंदर कर लिया और बोला--'"कहो बांड बेटे. . .मेरे बातें समझने की शक्ति आई या और तबीयत दुरुस्त करूं ।"



अपनी पूरी शक्ति लगाकर ब्रांड झूमता हुआ-सा उठकर फ़र्श पर ही बैठ गया ।

अलफांसे उसके सामने रखे हुए सोफे पर आराम से बैठता हुआ बोला-“बैसे हमारी इस मुलाकात में लडाई-झगडे की कोई बात थी नही, मगर तुम तो डबल आ सेवन हो ना. . .खुद को दुनिया का सबसे बहादुर इंसान समझते हो । मेरी बात सुने बिना ही तुमने अपने करतब दिखाने शुरू कर दिए । खैर. . .क्रोई बात नहीं, अब यह नहीं पूछोगे कि मैं आपकी सेवा में हाजिर क्यों हुआ हूं?"




“क्या कहना चाहते हो?" खुद पर संयम पाने को चेष्टा करता हुआ बांड बोला ।



"लातों के भूत लातों से ही लाइन पर आते हैं I" अलफांसे बोला…"मुझे त्यांगली के मेकअप मेँ देखकर तुम ये समझ गए होंगे कि मीटिंग मेँ आज तक चंगेज खां, माईक और तुम्हारे साथ मैं ही था । तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं कि मैंने त्यांगली को मीटिंग से एक दिन पहले ही एक हसीना के जाल मे उलझाया और आज तक वह मेरी कैद में था । आज यह मेरी उस कैद से फरार होने में कामयाब हो गया । लेकिन मुझे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है । मेरा उद्देश्य पूरा हो चुका है l”



"तुम्हारा उदूदेश्य?"



"जी हां, बांड भाई ।" अलफांसे बोला-"मेरा उद्देश्य भी यही था कि मैं किसी तरह टुम्बकटू से फिल्म हासिल कर सकूं सो फिल्म इस समय मेरे कब्जे मेँ है । आप लोग यानी विश्व के चुने हुए सबसे बड़े जासूस इस फिल्म के चक्कर में हैं । आप लोग इसे इसलिए प्राप्त करना चाहते हैं ताकि आप इसके रहस्यों तक पहुच सकें और दुनिया के सबसे बड़े जासूस बन सकें. . .मगर न तो मुझे इस फिल्म के रहस्यों में कोई दिलचस्पी है और न ही कोई मुझे सबसे बड़ा जासूस बनाएगा ।”



"फिर तुम इस फिल्म के चक्कर में क्यों पड़े हुए हो?"

" बांड भाई कि इस फिल्म की तुम्हें बहुत जरूरत हैं !" अलंफासे बोला…"अर्गर इंगलैंड का डबल ओ सेविन अंतराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस का चीफ़ नहीं बना तो जिस जेम्सबांड क्रो दुनिया का बच्चा-बच्चा जानता है उसके जीवन की ये सबसे बडी हार होगी I”



"तुम कहना क्या चाहते हो?"



"लानत है मिस्टर बांड कि तुम अभी तक मेरा मतलब नहीं समझ सके ।" अलफांसे ने कहा…“मैं तुमसे सौदा करना चाहता हूं वेसे मैं तुम पर इस सौदे के बारे में दबाव नहीं डालूगा, क्योंकि और भी ऐसे जासूस हैं जो अंतर्राष्टीय सीक्रेट सर्विस के जासूस बनना चाहते हैं । तुम अगर चाहो तो वह फिल्म मैं एक करोड़ में तुम्हें दे सकता हू । अगर सौदा मंजूर है तो हां कहो, नहीं तो ना I”



एक पल के लिए बांड सोच में पड़ गया । बोला-“लेकिन यहां विदेश मेँ मैं एक करोड लाऊंगा कहां से?”



"मेरे ख्याल से तुम्हारी इस समस्या क्रो मास्को में स्थित इंग्लैंड का दूतावास हल कर सकता है ।"



एक बार पुन: जेम्सबांड सोच मेँ पड़ गया । फिर अलफांसे की आंखों मेँ झांकता हुआ बोला…“लेकिन तुम यह सौदा मुझसे क्यों करना चाहते हो?”



" ये तो अपने-अपने प्यार की बात है I"



" मुझे तुम्हारा ये सौदा मंजूर है I” जेम्सबांड की गर्ज थी इसलिए बोला--""बोलो, सौदा किस प्रकार होगा?"



" कल रात को ग्यारह बजे 'प्रेत खंडहर' मेँ पहुंच जाना I” अलफासे ने कहा-""डालर देना । फिल्म लेना I"

बिकास के हाथ में दबे हुए चाकू का फ़ल एक पल के लिए हवा में चमका और "खचाक" से उस इंसान की गर्दन में धंस गया । एक क्षण पूर्व भी उस इंसान को पता नहीं लग सका था कि उस पर हमला होने वाला है. . . । यह हमला उसके पीछे से हुआ था. . और इससे पूर्व कि उसके कंठ से कोई चीख निकलती, बिकास का शिकंजे जैसा हाथ ढक्कन बनकर उस इंसान के मुंह पर चिपक गया. . .चीख उसके मुंह और कंठ में इस प्रकार घुटकर रह गई. . .मानो उसका मुंह साउंड प्रूफ़ हो. . बिकास ने गर्दन मेँ र्फसा चाकू बाहर खींचा और पुन: कमर में ठूंस दिया . . . । इस प्रकार विकास ने लगातार तीन वार किए ।




बिकास के फौलादी बंधनों में छटपटाकर वह इंसान ढीला पड़ गया ।



कदाचित वह ईंश्वरपुरी के लिए रवाना हो चुका था ।



एक क्षण भी बिकास ने व्यर्थ नहीं गंवाया । उसे रेत पर खदेड़ता हुआ वह एक तरफ़ को बढ़ गया ।



इस समय उसके दूर दूर तक ब्लेड की धार जैसा पैना सन्नाटा और काजल की भांति अंधेरा था । इस समय वह समुद्र-तट पर था… ।



समुद्र की लहरे भी मानो चंद्रमा के अभाव में मातम मना रही थीं । दूर…दूर तक रेत का घुला मेदान था ।



इस अंधेरे में इंसान अपने से तीन कदम की दूरी पर खड़े इंसान को साये के रूप मेँ देखने से बडा काम नही कर सकता था ।




चारों ओर गहरा सन्नाटा और अंधेरा था । बिकास उस इंसान की लाश को घसीटता हुआ एक तरफ उगी हल्की सी

झाडियों में ले जा रहा था । जैसे ही वह झाडियों के करीब पहुचा उसी समय-----




“कमाल कर दिया मियां दिलजले I” झाडियों में से विजय की धीमी…स्री आवाज उसके कानों में पहुंची । "



आगे आगे देखो गुरु कि चेला क्या करता है?” विकास तेजी के साथ उस मृत इंसान कै जिस्म से कपडे उताऱता हुआ बोला ।



उसी पल सागर क्री ओर-एक टॉर्च चमकी। बिजय का ध्यान उस ओर केंदित हो गया । टॉर्च लगातार तीन बार चमककर बुझी । ये क्रिया बिजय के पास ही बैठे धनुषटंकार ने भी देखीं ।



यह देखते ही वह तेजी कै साथ रेत पर भागता हुआ सागर की ओर बढा और जेब से टॉर्च निकालकर सांकेतिक रूप में उसे तीन बार जलाया-बुझाया ।



उधर विकास तेजी से अपने जिस्म पर मृत व्यक्ति कै कपडे फिट करने का प्रयास कर रहा था ।




"ये साला बंदर भी अपना काम बखूबी करता है ।"



"उसके सामने बंदर मत कह देना गुरु वर्ना आपका बंदर बना देगा ।" बिकास पूरी तरह तैयार होकर बोला ।




"मोटर बोट करीब आती जा रही है प्यारे दिलजले. . .हम चलते हैं ।" विजय ने कहा और फिर उसने विकास के किसी जवाब की चिंता नहीं की बल्कि तेजी के साथ वह सागर की ओर बढा । अब वहां कै शांत वातावरण में बोट की हल्की-सी गड़गड़ाहट हस्तक्षेप कर रही थी । विजय रूका नहीं बल्कि तेजी के साथ सागर के पानी में उतरता चला गया l अगले ही पल वह पानी में तैरता हुआ अनुमान के आधार पर उस तरफ बढ रहा था जिधर से मोटर बोट की आवाज आ रही थी ।।

इधर धनुषटंकार दोनों पैरों पर दौडता हुआ पुन: झाडियों में आ गया ।



"धनुषटंकार ।” बिकास ने धीरे-से कहा I


धनुषटंकार ने दांत किटक्रिटाकर अपनी उपस्थिति की सूचना दी ।



"टॉर्च लाओ ।" विकास ने कहा और धनुषटंकार ने उसे टॉर्च थमा दी ।


बिकास तेजी से उस तरफ़ बढ़ गया जिधर वो इंसान खड़ा था जिसे विकास ने चाकू से परलोक का टिकट थमाया था I इधर धनुषटंकार आराम से उस नग्न लाश की छाती पर बैठ गया और अपनी जेब से पव्वा निकालकर होंठों से सटा लिया ।
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Re: चीते का दुश्मन

Post by 007 » 10 Apr 2017 20:33

टुम्बकटू की असली फिल्म बिकास ने प्राप्त कर ही ली थी । इधर उसने फिलहाल अन्य जासूसों को भी कुछ देर के लिए अपने मार्ग से हटा दिया था । अब तो उसे फिल्म के आधार पर बढ़ना था । फिल्म की पांच रीलों में से एक रील टुम्बकटू के रहस्यों तक पहुचने के लिए नक्शे की रील थी ।



उस नक्शे का बिजय, बिकास और धनुषटंकार ने भली-मांति अध्ययन किया था । अभी तक विजय, विकास के मध्य कोई बिशेष बात नही हो पाई थी ।



अलफांसे से सौदा होने के बाद से ही वे फिल्म के आधार पर आगे बढने के बारे में सोचने लगे थे । फिल्म के अनुसार उन्हें समुद्री मार्ग से बढना था । इसके लिए उनके पास कोई साधन नहीं था । तब विजय ने आइडिया दिया कि आज की रात वे समुद्र के किनारे चले, सम्भव है किसी समुद्गी वाहन पर वे कब्जा करने में सफल हो जाएं ।

इसी बिचार को लेकर रात के आठ बजे से ही उन्होंने डेरा जमा दिया था । उस समय रात के ग्यारह बजे थे ज़ब एक इंसान खुद को छुपाने का-सा प्रयास करता हुआ सागर के किनारे पर आया l




विजय, विकास और धनुष्टकांर उसकी एक-एक हरकत क्रो बडे ध्यान से नोट कर रहे थे । कुछ देऱ पश्चात उस इंसान ने ट्रांसमिटर पर किसी से बात की...इन बातों को सुनकर तीनों समझ गए कि निश्चित रूप से ये इंसान स्मगलर है और किसी बडे गैंग से ताल्लुक रखता है । मोटर बोट से उनका माल आ रहा हे और इसी माल को लेने वह यहां आया है ।



बस फिर क्या था?



एक छोटी-सी स्कीम तैयार हुई और बिकास ने उसी स्कीम के आधार पर उस स्मगलर को मौत का पासपोर्ट थमा दिया । उसके कपड़े पहनकर वह खुद उसकी जगह तैनात था । योजना के अनुसार विजय सागर में पहुंच चुका था और धनुषटंकार अपने मोर्चे पर उपस्थित था ।



मोटर बोट के इंजन की आवाज प्रति पल तीव्र होती जा रही थी जो इस बात का परिचायक थी कि मोटर बोट करीब आती जा रही है । कुछ ही पल पश्चात विकास की छाती पर एक काला-सा धब्बा नजर आया I बिकास हर खतरे का मुकाबला करने को तैयार हो गया ।



मोटर बोट सागर के किनारे पर आकर रूकती । इंजन की आवाज़ बंद हो गई । मोटर बोट से लेकर सागर किनारे तक एक लम्बर-चौडा पटरा लगाया गया । चार आदमी मोटर बोट से बाहर निकले...उन चारों के हाथ में एक भारी सी पेटी थी ।
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