रहस्य के बीच complete

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Rohit Kapoor
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Re: रहस्य के बीच

Post by Rohit Kapoor » 13 Jul 2017 16:51

"इसका मतलब हुआ कि पिछले जन्म की यादे सिर्फ उन्है ही रहती हैं जो ऐसी आत्माएं हो जिन्होने एक शरीर त्यागकर तुरंत ही दूसरा शरीर ग्रहण कर लिया हो?”


"निशंदेह ।”


"प्यारे लूमड़ भाई ।" विजय बोला ।


"हूं । ” अलफांसे



" सुना है साले ये अमरीका के वैज्ञानिक इस खोज में लगे हुए हैं कि पुनर्जन्म क्यों होता है? क्यों ना निर्मला की कहानी को उन तक पहुंचाया जाए?"



"पहले पूरी बात सुन तो लो ।”



"हां, तो मिस निर्मला, उसके बाद क्या हुआ?”


"होना ही क्या था, पिछले जन्म के प्रतिशोध की ज्वाला इस जन्म में भी धधक रही थी और मैंने राजीव की प्रेमिका बनने का ढोंग रचाकर अपना प्रतिशोध लेना शुरू किया । राजीव के खून के बाद मैंने अमीता का खून किया लेकिन यह समझ में नहीं आता कि सुभ्रांत का खून किसने किया?"



"यह मैं बता सकता हूं।” बोलने वाला रहमान था ।



"किसने? ”



"राजीव की लाश ने ।"



"कैसे और क्यों और राजीव की लाश यह क्यो कहती थी कि उसका खून उसकी मां ने किया है? उसने अपनी मां का गला क्यों दबाया? अपने पिता को क्यों मारा और सुभ्रांत का खून क्यों किया?" विजय ने प्रश्न किया I



"गुरू मैँ फिर आत्माओं का चक्कर छेडूंगा ।"



"आज सब कुछ माफ़ है चेले मियां, बोलो क्या कहना चाहते हो?”



"मैं यह कहना चाहता हू कि निर्मला की भांति उसकी मां की आत्मा भी प्रतिशोध की ज्वाला में धधकती हुई उस पीपल के वृक्ष में समा गई तथा लोगों को अपने अंतिम रूप यानी सिर और धढ़ अलग वाली स्थिति मेँ नजर आने लगी I लोग उससे वास्तव में आतंक्ति थे क्योंकि वह एक चुड़ेल थी ।


इस चुडैल में क्योकि प्रतिशोध की ज्वाला धधक रही थी और बिना किसी शरीर की मदद के वह किसी का कुछ न बिगाड सकती थी इसलिए वह राजीव की लाश में प्रविष्ट हो गई ओर इस स्थिति मेँ राजीव की लाश राजीव नहीं बल्कि वही चुडैल थी यानी निर्मंला की मां । राजीव की लाश, जो बार-बार अपने खून का आरोप चंद्रभान इत्यादि पर लगा रही थी वह वही चुडैल की आत्मा थी और इस स्थिति मेँ वह झूठ भी नहीं बोल रही थ्री क्योंकि उसका खून तो वास्तव मेँ चंद्रभान ने ही किया था I हम राजीव की लाश कै कहने के अनुसार यही सोचते रहे कि राजीव का खून चंद्रभान इत्यादि ने किया है लेकिन यह तो निर्मला की मां कह रही थी ।


निर्मला की मां की आत्मा खून से डरती थी क्योंकि उसका खुन चंद्रभान ने किया था । यही कारण था कि वह मेरे खून निकलते ही गायब हो जाती थी । कल रात जब तहखाने में मैंने राजीव की लाश को खून से डरते देखा तो तुरंत समझ गया कि राजीव की लाश में वही वृक्ष वाली आत्मा है । उस समय मुझे यह भी ध्यान आया फि जब से राजीव की लाश खडी हुई है तभी से वह चुड़ैल वृक्ष पर नजर नही आई है और फिर, तो मुझें विश्वास ही हो गया कि यह वही आत्मा है । इसलिए मैँ मशाल आदि लेकर आया ।"



"लेकिन प्यारे चेले मियां, तुम यह कैसे कह सकते हो कि सुभ्रांत का खून उस लाश ने किया है?”



"लाश क्योंकि खून से डरती थी इसलिए उसने वे जो दो हत्याएं की वे इस ढंग से की जिनमें खून नजर न आए l पहली गला घोंटकर सुभ्रांत की मां की तथा दूसरी सुभ्रांत की फांसी के फ़दे मेँ लटकाकर ।”




"लेकिन मिस निर्मला, आप खून करके इमारत के बाहर किस रास्ते से गई?"




"मैं बाहर नहीं गई थी बल्कि इमारत के तहखाने में छिप गई थी । मैं राजीव की प्रेमिका होने के नाते इमारत के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थी । मैं खून करके सीधी तहखाने में गुम हो जाती थी और अपना सुनहरा लिबास भी वहीँ रखती थी । जब सब कुछ शांत हो जाता था तो मैं चुपचाप बाहर निकल जाती थी I"



"और वह सफेद लिबास वाली लडकी कौन थी?”



"वह भी निर्मला ही होनी चाहिए, गुरु ।" रहमान बोला l



"जब हम यहां आए थे और तुम्हें देखा था तो मैं तुम्हारे पीछे लगा था और गुरु आहटें सुनकर दूसरी ओर चले गए थे । जब तुम उस पेड़ के नीचे से गुजरी और तुम्हारे पीछे-पीछे में भी गया लेकिन मेरा रास्ता "वृक्ष चुड़ेल" ने रोक लिया।

'यू' तो इसमें कोई खास बात नहीं थी लेकिन जब मैं और गुरु दोनों पेड़ कै नीचे से गुजरे तो कुछ भी नहीं हुआ । उस समय मुझे ऐसा महसूस हुआ कि हो-न-हो इस चुड़ैल का और उस सफेदपोश लड़की का आपस में कुछ सम्बंध अवश्य है । तुम्हारी कहानी सुनकर पता लगा कि पिछले जन्म में वह तुम्हारी मां थी । इसी आधार पर मैंने कहा कि वह सफेदपोश लडकी तुम हो?”



"लेकिन मेरी मां की आत्मा ने तुम्हें उसी समय क्यों रोका जब तुम मेरे पीछे आ रहे थे?"



“क्योंकि आत्मा होने कै नाते वह जानती थी कि तुम उसके बेटे का ही दुसरा जन्म हो और अपना प्रतिशोध पूरा कर रही हो, तुम्हारी सुरक्षा हेतु उसने मुझें रोका I"



"लेकिन तुम सफेदपोश बनती क्यों थीं?”



“मैं अपने घर से रात को सफेद लिबास मेँ इसलिए चलती थी कि यहां के लोग आत्मा समझकर निकट नहीं आते थे । इसी सफेद लिबास मेँ मैं इमारत के उस गुप्त दरवाजे से प्रवेश करती थी जिससे मैं सबकी नजरों से छिपकर राजीव से मिलने आया करती थी । तहखाने मेँ जाकर गोल्डन नकाबपोश बन जाती थी I”



"मियां तूमड़, साला बडा अजीबोगरीब चक्कर है ।”



"वास्तव में 'रहस्य की परतें' काफी जटिल थीं l”



"लेकिन प्यारे लूमड़ बाई-दी वे मैं तुमसे पूछ सकता हूं कि तुम यहां क्या मटर भूना रहे हो ?"



" अब मेरी कहानी भी सुनो ।” अलफांसे ने कहना शुरू किया-----" मै काफी लम्बे अरसे से यहा हूं ।

एक अपराधी जिसका नाम "ब्लेम" था अपने कुछ आदमियों के साथ आया हुआ था l उसका लक्ष्य था इस स्टेट का गुप्त राजसी खजाना...!"


----“जब मुझे यह पता लगा कि यहां एक गुप्त खजाना है तो मैं भी यहां आ गया । अब मेरा और ब्लेम का उद्देश्य एक ही था I ब्लेम अपने आदमियों के साथ था, जबकि मैं अकेला ही था । ब्लेम ने अपना अड्डा कब्रिस्तान के नीचे बनाया था, जहां वह भयानक आवाजों और खौफनाक कहकहों के टेप चलाया करता था । उसके जितने भी आदमी थे सब सफेद चोगे में रहते थे ताकि यहां के निवासी उन्हें आत्मा ही समझें ।"


-----"उस रात जब तुम यहां आए उस सफेद चोगे वाले ने हवेली से खजाने का नक्शा चुरा लिया था लेकिन मैंने उसे बेहोश करके वह नक्शा उससे छीन लिया और फिर तुमसे युद्ध हुआ था । उसके बाद मैँ गुफा मेँ विलुप्त हो गया था ।"




"तो इसका मतलब यह हुआ कि वह खजाना तुम्हें मिल गया? "



"नहीं, अभी आगे सुनो I” अलफांसे ने कहा…"जब मैंने उसे खोला जिसे मैं नक्शा समझ रहा था तो पता लगा कि वह नक्शा नहीं बल्कि सिर्फ नक्शे तक पहुचने की कूंजी थी । उसमें संकेत दिया गया था कि खजाने का नक्शा राजीव ने अपने दाएं कंधे में आपरेशन कराकर फिल्म के रूप में छिपा रखा है ।



----राजीव से नक्शा हासिल करने मैं तुरंत इमारत की तरफ़ गया लेकिन तभी उसका खून हो गया । वहां मुझे रहमान से बचकर भागना पड़ा ।


----उसके बाद राजीव की लाश का खड़ा होना मेरे लिए भी आश्चर्य की बात थी । अत: मैं राजीव की लाश के पीछे लग गया

इधर पता नही ब्लेम कैसे जान गया कि नक्शा राजीव की लाश में है और हम दोनों ही जानते थे कि राजीव की लाश चंद्रभान का खून करने अवश्य आएगी क्योंकि राजीव की लाश के कहे अनुसार चंद्रभान भी उसका खूनी था । मैं कल रात तहखाने मेँ ताबूत के पीछे छुपा राजीव की लाश का इंतजार कर रहा था कि सारी घटना वही घट गई और नक्शे के चक्कर में ही मैं लाश से टकरा गया I”



“तो फिर नक्शे का क्या हुआ?"


“राजीव की लाश के साथ जल गया I"


“तुमने मुझें पत्र लिखा था?”


“बिल्कुल मैंने ही लिखा था, मुझे पता लग गया था कि राजीव ने तुम्हें बुलाया है l तभी मुझे शरारत सूझी तथा मैंने राजनगर में रहने वाले एक दोस्त को यहीँ से लिख दिया कि वह तुम तक ऐसा पत्र पहुचा दे I"



"तुम भी साले हमेशा लूमड़ ही रहोगे ।"


अलफांसे मुस्कराकर रह गया ।



“तो वे सफेद चोगे वाले ब्लेम के आदमी थे?” "निःसंदेह ।"



" ब्लेम का क्या हुआ?”



"उन्हीं के साथ मारा गया I"



”उस रात को जो वह सफेद चोगे वाला आदमी था जिससे तुमने फिल्म छीनी थी उसे शायद ब्लेम ने गायब कर दिया था ।"


" ठीक समझे ।"



विजय और रहमान ने ठंडी सांस ली I


रहस्य की परतें समाप्त हो चुकी थीं ।



निर्मला को राजनगर की कैद में रखा गया तथा मुकदमा चलाया गया । अलफ़ासे, विजय तथा रहमान को 'डाॅज' देकर श्मशानगढ़ मेँ ही कहीं विलीन हो गया था ।



इस केस ने रहमान को विजय की निगाहों में और ऊचा उठा दिया था ।



बिजय जब भी रहस्य की परतों पर दृष्टिपात करता तो आश्चर्यचक्ति रह जाता ।





रहस्य के बीच

समाप्त



THE END

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