आ बैल मुझे मार- मोना चौधरी सीरीज complete

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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by 007 » 25 Sep 2017 13:41

मोना चौधरी ने तकिए के नोचे से हाथ निकाला I खाली हाथ ! रिवॉल्वर तकिए के नीचे ही पडा था I वह बखूबी जानती थी कि एक ही वक्त में एक रिवाल्वर से पाच सात का मुकाबला नहीं किया जा सकता । वह बेड से उताकर नीचे खडी हो गई I

मोना चौधरी ने नाइटी पहन रखी थी जोकि कठिनता सें कूल्हो को ढाप रही थी I


" हम तुम्हें... । " कालिया के साथी का साथी बोला---" सिर्फ कपडे बदलने का वक्त और मौका दे सकते हैं I ओर कुछ नहीं. करने देगे तुम्हे । इस समय हमारे पास पूरे ओंर्डर है कि अगर तुमने दिन की तरह जरा मी चालाकी दिखाने की कोशिश करी तो तुम्हें फौरन शूट कर दिया जाए।"


मोना चौधरी ने गभीर निगाह सब पर डाली । इतने रिवाॅल्बरों और बंद कमरे के बीच वह अपने बचाव में कुछ नहीं कर सकती थी । कुछ करने का मतलब मौत को दाबत देना था I इसलिए उसने कुछ भी करने का इरादा छोड दिया ।


"कालिया कहा' है ?" मोना चौधरी बोली ।


‘हम तुम्हें उन्ही के पास ले जा रहे हैं । फौरन अपने कपडे चेंज करो । लेकिन चेंज के लिए तुम दूसरे कमरे मे या बाथरुम में नहीं जाओगी I यहीँ हमारे सामने चेंज' करोगी I किसी भी कीमत और किसी भी शर्त पर हम तुम्हे निगाहों से ओझल नहीं होने देगे । "


"क्यों ?" मीना चौधरी के होंठो पर मुस्कराहट उभरी I


"यह सबाल कालिया साहव से ही करना । "


बहरहाल मोना चौधरी को उन सबके सामने कपडे चेज करने में जरा भी एतराज नहीं था ।





केवल किशन कालिया साफ सुथरे, बेहद खूबसूरत आँफिस में बैठा था ।


उसने शेव वना रखी थी । कीमती कपडे वदन पर थे I इस समय वह चुस्त और सतर्क नजर आ रहा था I होंठों के बीच फसी सिगरेट सुलग रही थी I सामने खुली पडी फाईले वह पढ रहा था और पग्ने पलट रहा था । उसका अंदाज बता रहा था कि फाइल बार बार देख और पढकर वह बोर हो चुका है I


टेबल पर दो फोन और एक इटंरकाम मौजूद था I


उसी पल इटंरकाॅम का बजर बजा ।


"हैलो I " कालिया ने फौरन रिसीवर उठाया I


"सव ठीक है ? " भारी भरकम आवाज उसके कानों' में पडी ।


"ओह सर आप I आप कब आए। " कालिया के होंठो से निकला I

"आधा मिनट पहले , मेरे पास पहुचो। "


"यस सर I "


केवल किशन कालिया ने रिसीवर रखकर क्लाईं पर बधी घडी में समय देखा I रात का एक बज रहा था I सिगरेट को ऐश…ट्रे में मसलकर' वह . उठ खडा हुआ । ठीक उर्सी ,समय दस्वाजे पर आहट हुई । फिर दरवाजा खुला ।


उसे अपने आदमियों के बीच मोना चौधरी खड़ी नजर आईं I उनकी रिवाॅल्बरे' मोना चौधरी के बदन से ,सटी हुई र्थी । मोना चौधरी के हाथ पीछे की तरफ बधे' हुए थे और आखों पर कपडा बाध रखा था । इस समय वह किसी भी तरह की हरकत करने के काबिल नहीं थी I


वे दोनों उसी स्थिति में मोना 'चौधरी को लिए भीतर आए I


कालिया ने इशारे से उसे. कुर्सी पर बिठाने और उससे सतर्क रहने को कहा I


उसके बाद वह बाहर… निकलता चला गया । उन्होने' मोना चौधरी को कुर्सी पर बिठाया और पुन: रिवाॅल्बरे उसके बदन से सटा दीं ताकि हर पल उसे इस बात का एहसास रहे कि उसे किसी प्रकार की शरारत नही करनी है ।"


"मेरे ख्याल में तुम लोग जहा मुझे ले जाना चाहते थे वहा हम आ पहुचे हैँ । " मोना चौधरी बोली।


"हां I " एक ने शात स्वर में कहा I


"तो फिर मेरे हाथ खोलो आखों पर वधी पट्टी हटाओ I”


"अभी हमे इस बात का आर्डर नहीं मिला. I " दूसरे ने स्थिर लहजे में कहा I


" कौन देगा आर्डर ? "


" हमारे सर I "


"कहा है तुम्हारे सर ? कौन हैं ? तुम लोग कौन हो ?"


"चूप रहो I तुम्हें हमसे किसी बात का जवाब नहीं मिलेगा । "


" यानी कि तुम्हारे उस सर ने तुम लोगों को जुबान बद रखने को कहा हे ?"


वे दोनों कुछ नहीं बोले ।


"अब कम से कम अपने सर से आर्डर तो ले आओ ताकि मेरे हाथ और आखों की पट्टी.....!"


" वह अभी आने वाले हैँ I चुपचाप बैठो रहो I "


केवल किशन कालिया ने अपने सामने खडे साठ वर्षीय व्यक्ति को सेल्यूट दिया । वह प्रभावशाली चेहरे वाला समझदार व्यक्ति लग रहा था ।


-उसका नाम शंकरदास पहाडिया था ।


"सर !"

शकरदांस पहाडिया ने गभीरता से सिर हिलाया I आखों में सोचो के गहरे भाव थे I


"मोना चौधरी को चैक किया ? " पहाडिया साहब ने कठोर स्वर में पूछा ।


"यस सर I "


"क्या फैसला किया ?”


. . "आपका ख्याल ठीक था सर I मोना. चौधरी हमारा काम कर सकती है I"


"मतलब कि तुमने उसे अच्छी तरह चैक कर लिया ?" पहाडिया साहब का स्वर गभीर ही था I


"यस सर । "


"गुड I " पहाडिया साहब ने सिर हिलाया-"मैनें तो उसकी फाइल पढकर ही' फैसला कर लिया था कि मोना चौधरी हमारे काम की साबित हो सकती हे I बात की उससे ?"


" नो सर ! जब मैँ आपके पास आने के लिए उठा तो तभी उसे भीतर लाया गया था ।" कालिया ने सतर्क और आदार भाव से कहा-“मै यहीं ले आऊ सर ?"


"नहीं I वहीं ठीक हे I " पहाडिया साहब ने सिर हिलाया…"'मैँ वहीं चलता हू I "


"जी I " शकरदास पहाडिया कुर्सी से उठे । कालिया पलटकर दरवाजे की तरफ बढा I


"तुम्हारे सिर के पीछे चोट कैसी ।" पहाडिया साहब ने उसके सिर के प्रीछे बेडेज लगी देखकर कहा I


कालिया ठिठकर पलटा I होठो पर मुस्कान उभरी ।

"सिर के पिछले हिस्से में वैडेज' ही नहीं गाल भी भीतर से फ़टा हुआ हे I एक दात हल्का सा हिल रहा हे I पूरा चेहरा दर्द ~ से भरा हुआ हे I ऐसा ही एक आध झटका शरीर में कही और भी अवश्य होगा । "
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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by 007 » 25 Sep 2017 13:42

पहाडिया साहब के होठ' सिकुड गए ।


"और यह सब मोना चौधरी को चेक करने मे हुआ? "


"यस सर I " कालिया के होठो पर अजीब सी मुस्कान रेग गई !"


"वैरी गुड I जो कैप्टन कालिया का यह हाल कर सकती है वह यकीनन हर हाल में हमारे काम की ही साबित होगी ।


. . "आपका कहना सही हे परंतु यह दावा नहीं किया जा ' सकता कि वह हमारा काम करेगी ।"


"क्यो ?"


"मोना चौधरी को मैने जिद्दी और धुन का पक्का पाया है I ऐसे लोग बहुत कम किसी के कहने पर चलते हैँ ।" '


"वह तेयार हो जाएगी।" पहाडिया साहब के स्वर में बिश्वास था--"पैसे लेकर किसी भी तरह का काम करना मोना चौधरी के पेशे का हिस्सा है । दौलत दिखाकर उससे हर काम लिया जा सकता हे I "

"लेकिन यह काम खतरनाक है I सुनते ही वह....!"



"भाव बढा देगी । " पहाडिया साहब ने बात काटकर कहा…"लेकिन इनकार नहीं करेगी । पीछे नहीं हटेगी I काम जितना खतरनाक हो उसे करने में उतना ही मजा आता हे, ऐसा मोना चौधरी की फाइल कहती है । "




शकरदास पहाडिया और केवल किशन कालिया ने भीतर प्रवेश किया I


मोना चौधरी उसी स्थिति में कुर्सी पर मोजूद थी I


उसके पास खडे कालिया के दोनों आदमी एकाएक, और भी सतर्क हो गए I कालिया ने उन्हे जाने का इशारा किया I दोनों ने रिवाॅल्बर जेब में डाली और बाहर निकल गए।

कालिया ने आगे बढकर दरवाजा वद किया I

पहाडिया साहब टेबल के पीछे कालिया की कुर्सी पर जा बैठे I

आगे बढ़कर कालिया ने मोना चौधरी के वधे हाथों को खोला । इससे पहले कि वह उसकी आखो की पट्टी खोलता मोना चौधरी. ने खुद ही आखो से पट्टी हटाकर एक तरफ उछाल दी ।


क्षण-भर में ही मोना चौधरी की निगाह वहा हर चीज पर घूम गई I आखिरकार जब निगाह ठहरी तो वह जगह कालिया का चेहरा थी I मोना चौधरी के होठो पर अजीब सी मुस्कान दौड गई I

“ तुम तो अजीब आदमी हो ।" मोना चौधरी कह उठी…"जब मै खुद तुम्हारे साथ चलने को तैयार थी सारा खर्चा भी मैं खुद करने को कह रही थी फिर भी तुमने मुझे जबरदस्ती इस तरह उठा मगवाया ।"

कालिया ने कुछ नहीँ कहा ।


"वेसे मेरे ऐसे आश्कि बहुत हैं जो मुझे इस तरह उठा ले जाना चाहते हैं I वह उठा भी ले जाते I परतु उन्हे मेरे रहने का ठिकाना नहीं मालूम इसलिए कि उनके हाथ मुझ तक नहीं पहुच पाए । " मोना चौधरी ने आख दबा दी ।


कालिया फिर भी उसे घूरता रहा I



"चलो ठीक है जो हुआ सो हुआ I अब इस बूढे को यहा से बाहर निकालो ताकि हम अपना प्रोग्राम शूरू करें I " मोना चौधरी का इशारा पहाडिया की तरफ था…"इस बूढे में मुझे कोई दिलचस्पी नहीं । "


कालिया ने सकपकाकर अपने चीफ शंकरदास पहाडिया को देखा I


पहाडिया बेहद शात निगाहों से मोना चौधरी को देखे जा रहा था l


"जानती हो तुम इस समय कहा पर हो मोना चौधरी ?” कालिया ने स्थिर लहजे में कहा ।


"हा I इस खूबसूरत कमरे में कुर्सी पर बैठी हू । लेकिन यहा पर बेड नजर नहीँ आ रहा जिसका इस्तेमाल हम दोनों ने शीघ्र ही करना है I क्या वेड दूसरे कमरे में हे ?" कहने के साथ ही-मोना चौधरी उठी और टहलने लगी ।

" तुम्हें इन बातों के अलावा कोई दूसरी बात नहीं आती ?" कालिया के होठ मिच गए I


" नहीं । " मोना चौधरी ने कालिया की आखों में झाककर कहा I


कालिया ने. पहाडिया को देखा I


~ पहाडिया ने सहमति से सिर हिला दिया ।


… "तुम इस समय मिलिटरी सीक्रेट सर्विस के हेडक्वार्टर मे हो। " कालिया ने कहा ।


मोना चौधरी ठिठकी I चौंककर वह कालिया को देखने लगी ।


"क्या कहा तुमने ? मिलिटरी सीक्रेट सर्विस ?” मोना चौधरी के होठो से निकला ।


कालिया ने सहमति में सिर हिलाया I


मोना चौधरी ने पहली बार गहरी निगाहों से पहाडिया को देखा फिर कालिया को ।


"लेकिन मेरा तुम लोगों से क्या वास्ता ?" मोना चौधरी गभीर ही उठी I


" वास्ता तो कोई नहीं है परतु अब पैदा हो सकता है । "


" क्या मतलब ?"


~ "हमें एक खास काम के लिए तुम्हारी सख्त जरूरत है I बेहद सख्त जरूरत !"


मोना चौधरी प्रश्न भरी निगाहों से कालिया को देखती रही । पहाडिया ने अभी तक उनकी बातों में दखल नहीं दिया था I


"मिलिटरी सीक्रेट सर्विस के पास तों खतरनाक बढिया आदमी हैँ जो हर काम को पूरा कर सकते हैँ I ऐसै में मैँ भला तुम लोगों के क्या काम आ सकती हूं ?" मोना चौधरी ने ही
खामोशी तोडी I


"बहुत काम आ सकती हो वल्कि सारा ही काम आ सकती हो । रही बात अन्य एजेटो की तो वह हमारे पास हैँ । मैं खुद भी एजेट हूं। कैप्टन रेक है मेरा परतु हम जिस काम के लिए तुम्हें भेजना चाहते हैं, उसे सिर्फ तुम ही कर सकती हो !----तुम जैसी जहरीली नागिन !"

कालिया ने गभीर स्वर मे कहा…"इस काम में हम अपने. दो एजेंट' खो चुके हैं । जिनमें से एक अटठाईस बरस की तेज-तर्रार खतरनाक महिला एजेट भी हे I "


"तो तुम क्यों नहीं करते यह काम? "

"कोई फायदा नहीं I " कालिया ने सिर हिलाया-" हालात् को देखते हुए स्पष्ट कहा जा सकता हैं कि यह काम कोई खूबसूरत जहरीली नागिन ही कर सकती है I मेल एजेट नहीं ।"


"क्यों ?"



" क्योकि जिससे हमेँ अपना कुछ सामान लेना हे वह औरतों का रसिया हे I ऐसों को तो मोना चौधरी आसानी से सभाल सकती है I और तुम्हारे पास शरीर भी है और दिमाग भी I "


मोना चौधरी ने गभीर निगाहों से कालिया को देखा I


"दिनभर मेरे पीछे क्यों लगे रहे ? तब क्यों ना सीधे तौर पर बात कर ली ? "


"तब मैं तुमसे बात करने नहीं तुम्हें चैक करने गया था । " कहकर कालिया ने मोना चौधरी पर निगाह मारी---"'मेरे चीफ का कहना था कि तुम यह काम कर सकती हो I मैँ देखने गया था कि मेरे चीफ ने ठीक कहा है या गलत ?"


"मेरा पता तुम लोगों को कहा से मिला ?"


" मैँ नहीं जानता I मुझे चीफ ने बताया था I " कहकर कालिया ने पहाडिया को देखा ।।


मोना चौधरी की निगाह भी उस पर जा टिकी I


"यह बात नहीं बता सकता मै । " पहाडिया ने कहा मेरे अपने गुप्त सोर्स है I "


मोना चौधरी ने फिर कुछ नहीं कहा I सिगरेट का कश लेने लगी ।


"तुम हमारे लिए काम करने को तैयार हो ?" कालिया ने पूछा I


"देश के लिए तो मेरी जान भी हाजिर है I परतु दो बातें आडे आ रही है' I "


"वह क्या ?"
"एक तो यह कि ,जब तक पूरा मामला मुझे मालूम नहीं होगा मैं हा या ना मे जचाब नहीं दे सकती । "'


"और दूसरी बात ?"


"अगर मेरी हा हुई तो दूसरी बात की बात तब होगी । "
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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by 007 » 25 Sep 2017 13:42

कालिया ने सिर हिलाकर पहाडिया को देखा ।


"चीफ I आगे की बात मोना चौधरी से आप खुद करें तो बेहतर होगा I"


शकरदास पहाडिया ने सिर हिलाकर मोना चौधरी को देखा I

"मेरा नाम शकरदास पहाडिया है I आओ बैठो । "


मोना चौधरी आगे बढी और कुर्सी पर जा बैठी ।


"कुछ लेना पसंद करोगी ?”


" थैक्स I” पहाडिया ने सिगरेट सुलगाई और चद पल खामोश रहकर कह उठा ।



"दस दिन पहले की बात हे I एक चीनी एजेंट ने हमारे विभाग के दो गद्दारों के साथ मिलकर हमारे वेहद सीक्रेट 'मामले' की फाइलों में से फिल्म उतारकर बना ली I यह बात शायद छिपी ही रहती I हमें मालूम नहीं होती, पंरतु हमारे विभाग के दो में से एक गद्दार ने 'नशे मेँ यह बात अपनी बीबी से कह दी और उसकी बीवी ने 'फौरन हमे' फोन पर सूचना दी I हमारा-महकमा फौरन हरकत-में आया I दोनों गद्दारों को हमने पकडा I मालूम हुआ कि चीनी एजेट ने दोनों को गद्दारी की कीमत पाच पाच लाख रुपए दिए हैँ I जो कुछ उन्हें मालूम था, उन्होने सब बताया I परंतु उस चीनी एजेटै का आगे का क्या प्रोग्राम था, यहा से कैसे उसनें बाहर निकलना था, उन्हे नही मालूम था I हमने अपने हिसाब से हर उस. जगह पर अपने एजेट तैनात कर दिए, जहा से हिंदुस्तान से बाहर. निकला जा सकता था I साथ ही सिंगापुर में फैले अपने उन एजेटो को खबर कर दी जिनका थोड़ा बहुत भी वास्ता चीनी एजेटो से था या जो चीन से ताल्लुक रखने बालें मामले में हमारा काम करते थे I "


मोना चौधरी पहाडिया की बात ध्यान से सुन रही थी ।

कालिया कमर 'पर हाथ. बाधे' करीब ही खडा था I


"वह चीनी एजेट हिंदुस्तान से निकल गया I यहां पकड़ा नहीं जा सकता I यह खबर हमें सिंगापुर स्थित होशाग नामक चीनी व्यक्ति ने दी, जो हमारे लिए काम करता. है और सिंगापुर स्थित खतरनाक चीनी गैंग का मेम्बर भी है I हमारी फाइलों में उसका कोड नाम टोनी है I होशाग ने हमें बताया… कि वह चीनी एजेट हिदुस्तानी मिलिटरी की बेहद महत्वपूर्ण बातों की फिल्म उतारकर सिंगापुर पहुचा है । जहा वह 'ली' होटल में ठहरा हे और उसके. ख्याल से जल्दी ही बह फिल्म अपने साथियों को डिलीवर कर देगा । इस खबर के मिलते ही हमने अपना खतरनाक बेहतरीन. एजेट सिंगापुर तुरंत भेजा । "



पहाडिया ने क्षण भर ठिठककर सिगरेट का कश लिया ।


"और हमारे उस एजेट के सिंगापुर पहुचते ही पहुचते कुछ चीनी लोगों ने होटल 'ली' में उस चीनी एजेंट पर हमला बोला और उससे फिल्म छीनकर उसकी' हत्या करके फरार हो गए I जब हमारे एजेट को होशाग उर्फ टोनी से सारे मामले का पता चला तो उसने होशाग के साथ मिलकर मामले की छानबीन की कि हिदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म कौन ले उडा है I चियाग का नाम सामने आया I उसके के बारे मे तुम्हें बता दूं कि वह बेहद खतरनाक इंसान' हे I बेहद क्रूर-है I इंसान की जिदगी का उसकी निगाहों मेँ कोई महत्त्व…नही' I वह चीन में पैदा हुआ है, परंतु अपने देश का भी सगा नहीं I सिवाय इसके किं अगर उसके पास चीन के काम का कुछ हो तो सबसे पहला सौदा वह चीन से करता है I अगर सौदा चीन से ना पटे तो फिर वह' दूसरे देशों से सौदा करता है I चीन की सरकार भी चियाग के सामने ठीक तरह पेश आती है I क्योकि वह चीन को कई तरह से भारी फायदा पहुचा चुका है और भविष्य में भी ऐसा करता रहेगा । हमारे उस एजेट ने चियाग के कब्जे से वह फिल्म छीन ले जाने की चेष्टा की, परंतु कामयाब नहीं हो सका और उसे अपनी जान. से हाथ धोना पड़ा I" कहने के पश्चात पहाडिया ने दो कश एक साथ लेकर सिगरेट ऐश ट्रे में मसल दी I

"चियाग के तीन ठिकाने हैं रहने के I सिंगापुर में , चीन में और तीसरा ठिकाना चीन से तीस किलोमीटर दूर समंदर में । दस साल पहले समदर में तीस किलोमीटर दूर लबा चौडा टापू उभरा था जिसे उसने चीन से खरीद लिया था I वहां चियाग' ने अपनी' ही दुनिया बसा रखी है I अपने और अपने आदमियों के लिए खूबसूरत इमारतें बना रखी' हैं। ऐसे ऐसे ट्रांसमीटर' और वायरलेस सेट हैँ जिनसे वह दुनिया के हर कोने में बात कर सकता है । टापू के किनारे एक जहाज कई स्टीमर, बोट वगैरह हर समय मौजूद रहते हैं । हमारे एजेट की हत्या के बाद वह उस टापू पर चला गया और उस फिल्म का सौदा चीन सरकार से करने लगा I"


" यह बात आपको किसने बताई ? "

" हमारे सिंगापुर स्थित एजेट होशाग उर्फ टोनी ने I "


मोना चौधरी ने सिर हिलाया I


पहाडिया पुन गभीर स्वर मेँ बोला I

" चियांग की हमारे पास पूरी फाइल है । वह पहले भी दसियों बार हमारे मामलों में टाग अड़ा चुका हे I हम जानते हैँ कि चियांग शराब और औरत का तगडा रसिया है I उसे हर रात शराब और नई औरत चाहिए I जो औरत उसे पसद आ जाए, उसके लिए वह अपना सब कुछ लुटा सकता है । इस बात को मद्देनज़र रखत्ते हुए हमने अपने विभाग की बेहद खूबसूरत ओर खतरनाक एजेट रूबी को सिगापुर भेजा I वह टोनी से मिली गुप्त रूप से I टोनी ने उसे ऐसे आदमियों से मिला दिया जो चियांग से वास्ता रखत्ते ये जैसें तैसे रूबी टापू पर चियाग के बेडरूम मे दो दिन में हीं पहुच गई और तीसरे दिन उसकी लाश ही देखने को मिली I टोनी के मुताबिक रूबी की मौत का कारण चियांग का रूबी पर शक हो जाना ही रहा होगा I"


"होशाग उर्फ टोनी कैसा आदमी है ?” मोना चौधरी ने पूछा ।


" क्या मतलब ?"


'होशाग डबल एजेट का काम भी कर रहा हो सकता है I "


"तुम कहना क्या चाहती हो कि वह चियांग के लिए भी करता हो ?"
" हा । और यहा की खबरें चियांग तक पहुचाता हो l“



शकरदास पहाडिया ने इनकार में सिर हिलाया ।।



"नहीं ऐसा सभव नही ! होंशाग आठ दस सालो से हमारे . लिए काम कर रहा है और कईं बार वह मौत के मुह मे भी गया है । मैं नहीं समझता कि वह गद्दार हो सकता है । " पहाडिया ने कहा ।।



मोना चौधरी ने फिर होशाग के बारे में कोई सवाल नहीं किया ।।



" चियांग अब उस फिल्म का सौदा चीन. से का रहा है । " पहाडिया ने गभीर स्वर में कहा…" हमारे सीक्रेट चीन के हाथ पहुच जाना बहुत खतरे वाली बात है । इससे हमारै देश को इतना बडा नुक्सान होगा कि उसे पूरा नहीं किया जा सकता ,हम नहीं चाहते कि वह फिल्म किसी भी कीमत पर चीन के हाथ लगे । "


"चीन सरकार चियाग को यह भी तो कह सकती है कि उसने उनके एजेट की हत्या करके वह फिल्म छीनी है । "


"मोना चौधरी I तुम चियाग को ठीक तरह से नही' जानती । चीन सरकार की हिम्मत नहीं कि वह चियाग से ऐसी बात कर सके और फिर उस एजेट की हत्या चिंयाग ने तो की नहीं, उसके आदमियो ने की है और जब ऐसा 'हो रहा था तो उसके माथे पर तो नहीं लिखा था, कि वह चीनी एजेट' है । मतलब कि वक्त आने पर चियाग के पास हर बात का ज़वाब है । उसे चीन सरकार का खौफ नहीं, बल्कि चीन सरकार यह ध्यान रखत्ती है कि चियाग नाराज ना हो जाए । क्योकि चियांग भारी कीमत लेकर चीन के कई गोपनीय खतरनाक कामों को अजाम देता है I "


मोना चौधरी ने होठ सिक्रोढ़ कर सिर हिलाया I


"अब समझी कि हम तुमसे क्या काम लेना चाहते हैं ? "


"आप चाहते कि में चियाग से वह फिल्म हासिल करने की चेष्टा करू' I "


"फौरन I इसमें अब ज्यादा वक्त नहीं रहा । चियाग औऱ चीन सरकार के बीच कभी भी सौदा पट सकता है I ”


मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाइं और शात लहजे में कह उठी I


"लेकिन मै' यह काम नहीं करना चाहती । '"


कालिया चौका' I


"क्या ?” पहाडिया के होठो से निकला I


"मैँ अपनी जान खतरे मे नहीं डालना चौहती I ”


"लेकिन तुम तो कह रही थी कि देश के लिए जान भी हाजिर है I " कालिया ने कहा I


"कहने से कोई जान तो नहीं दे देता I "


पहाडिया और कालिया की निगाहे मिली ।


"तो तुम हमारा यह काम नहीं करोगी I”


"सवाल ही पैदा नहीं होता I "


"देश के नाम पर भी नहीं करोगी ?"


"नहीं I" मोना चौधरी ने स्पष्ट कहा ।


एकाएक बहा गहरा सन्नाटा छा गया I


मोना चौधरी उठ खडी हुई!


"मैं यहा से जाना चाहती हूं I "


"कैप्टन I " पहाडिया का स्वर स्थिर था ।


"यस सर l"


"मोना चौधरी को बाहर छोड़....!"


"लेकिन सर यह काम बहुत ही अहम है !'


"कितना भी अहम काम क्यों ना हो हम किसी से जबरदस्ती तो नहीं करवा सकते I " पहाडिया ने शात लहजे में कहा-" अगर मोना चौधरी यह काम नहीं करना चाहती तो हम इससे जबरदस्ती कैसे करवा सकते हैं I"


कालिया नहीं बोला I


"इसे बाहर छोड आओ । हम कुछ और सोचेगे I "


ना चाहते हुए भी कालिया दरवाजे की तरफ बढा I चेहरे पर मोना चौधरी के प्रति क्रोध के भाव थे I परतु बात ही ऐसी थ्री ।


मोना चौधरी को मुह से कुछ कहना ठीक नहीं था I दरवाजे के समीप पहुचकर कालिया ठिठका I

मोना चौधरी अपनी ज़गह पर स्थिर खडी थी ।


"'आओ । " कालिया बोला ।

"नहीं । " मोना चौधरी एकाएक मुस्कराईं-"भैं यहीं ठीक हूं I ”


"क्या मतलब ? " कालिया की आखें सिकुड गई' I


"मैँ यह काम करूगी I "


" चियाग वाला काम ? " कालिया चौका ।

" हा !"


पहाडिया के होंठो पर मुस्कान फैलती चली गई ।


मोना चौधरी पुन बैठ गई I

कालिया अजीब सा चेहरा लिए बापस पहुचा I


"तो तुमने पहले क्यों इनकार किया ?" कालिया ने पूछा I


" दोनों की नीयत देखने के लिए । " मोना चौधरी… बोली-"मैँ इस्तिहारी मुजरिम हूं।पुलिस को हर पल मेरी तलाश हे I और आप लोग मुझसे काम निकलवाना चाहते है । मैं भी देखना चाहती थी कि मेरे इनकार करने पर आप लोग मुझे पुलिस के हबाले करते हैं या खुला छोड देते हैँ ?"



"'हमारा पुलिस के कामों से कोई वास्ता नहीं I " पहाडिया -ने गभीर स्वर में कहा…"हमारे पास खुद इतनी उलझने' और परेशानिया हैं I तुम मुजरिम हो I तुम्हे पकडना पुलिस का काभ है, हमारा, नहीं । और फिर हमने तुम्हें अपने काम के लिए पकडा है, अगर तुम हमारा काम नहीं करती हो तो तुम्हें पुलिस में दे दें I यह बात तो वास्तव में गलत होगी I मतलबपरस्ती. बाली बात होगी I हा अगर तुम किसी अन्य हालात के दौरान _ हमारे हाथ लगती तो शायद तुम्हें पुलिस के हवाले करने की सोचते। कर भी देते।"
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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by 007 » 25 Sep 2017 13:43

मोना चौधरी के होठो पर मुस्कान बिखरी रही ।


"तो अब हम बात आगे करें ?" पहाडिया बोला I


" अभी मेरी बात बाकी हे जोकि मैने कहा था हा करने पर बताऊगी । "


" कहो I "

"बैसे तो में यह काम नहीं करती परतु अपराधी होते हुए भी मेरे लिए. यह फख की बात है कि मैं देश के लिए काम आ सकू । लेकिन कोई भी काम मैँ फ्री में नहीं करती । "


"मतलब कि तुम्हे' काम की कीमत चाहिए ?" पहाडिया ने कहा I ~


"हा। "


"ठीक है मिलेगी I काम पूरा होते ही मिल जाएगी I बोलो, कितना चाहती हो ?"


"कीमत मैँ काम शुरू करने से पहले लूगी I "


" पहले लेने का कोई फायदा भी नहीं होगा I " कालिया बोल पड़ा । .


"क्यों ?"


"क्या मालूम तुम जिदा' ही ना रही' I"


"अगर ऐसा हुआ तो पैसे मेरे फ्लैट से ले लेना I में उन्हें फ्लैट में रख जाऊगी I "


कालिया कुछ कहने को हुआ कि पहाडिया ने टोका I

"तुम खामोश रहो केप्टन I " ~


कालिया नै होठ' बद कर लिए I


"बोलो I कोई भी मुनासिब कीमत बोलो हम तुम्हें देगे. । '" पहाडिया ने कहा I


"मैं चाहती हू, इस काम की कीमत आप लगाइए । " मोना चौधरी गभीर थी ।


पहाडिया ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया और गभीर स्वर. में बोला I


"यह काम बेशकीमती है I इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती I हमारे देश के वह सीक्रेट जो इस वक्त चियाग के . . कब्जे मे' है, हम किसी भी तरह उनकी कीमत नहीं आक. सकते l देश को बचाने की खातिर तो करोडों अरबो भी कम हैं । फिर भी हम तुम्हें पचास लाख दे सकते हैं I "'


मोना चौधरी ने इनकार में सिर हिलाया ।

"मैं जानता हू चियाग चीन सरकार से उन सीक्रेटस के बदले करोडों हासिल करेगा I लेकिन मेरी भी मजबूरी है I इससे ज्यादा देने के लिए तो मुझे ऊपर बात करनी होगी । इसमें कम एक दिन तो खराब हो जाएगा। "

" अगर आप मेरी माँगी कीमत मुझे दे दें तो आपका एक मिनट भी खराब नहीं होगा ।"


"तुम क्या चाहती हो ?"


" सौ का नोट ।"


"क्या ? " पहाडिया हडबढ़ाकर खडा हो गया ।


~ कालिया का मुह खुला-का-खुला रह गया I


"सौ का नोट I " मोना चौधरी के होठो पर मुस्कान थिरक रही थी



"केप्टन! "


"य-यस....सर !!"


"मोना चौधरी क्या कह रही है ?" I


"सर, यह इस काम की कीमत सौ रुपए माग रही है I "


पहाडिया ने फौरन खुद को सयत किया I


"चियाग से हमारे सीक्रेट वापस लाने का मेहनताना सौ रुपए माग रही हो तुम? "


"हा I "


"तुम गभीर हो ?"


"सरासर I" मोना चौधरी ने सिर हिलाया ---" वैसे मैं यह भी ना लेती परंतु अपने उसूल को मैँ नहीं तोड़ती-औंर हमेशा मेरा उसूल रहा है कि फ्री मे ' किसी का कान नहीं करना I"



शकरदास पहाडिया ने पर्सं निकाला और उसमे से सौ का नोट निकालकर मोना चौधरी की तरफ बढाया ।


मोना चौधरी ने मुस्कराकर नोट लिया और उसको पैट की’ जेब में ठूंस लिया I कालिया के चेहरे पर अजीब से भाव थे I


पहाडिया भी भारी उलझन मेँ था परंतु खुद को समाले हुए था I


"आगे बात शुरू करें ? " पहाडिया ने सभले स्वर मे कहा ।


"हा I "

“मैं तुम्हें चियाग की फाइल देता हुं, उसे पढ लो I उसकी तस्वीर देख लो I चियाग सै वास्ता पडने पर उससे कैसे निबटना है I उसकी फाइल पहचान लो जान लो I और… जो बातें है' वह मैं तुम्हें समझा दूंगा । "


मोना चौधरी ने सहमति से सिर हिलाया और कश लिया ।


"मैं होशाग उर्फ टोनी को. तुम्हारें सिंगापुर' आने' की खबर....!"



"नहीं I " एकाएक मोना चौधरी ने सख्ती से कहा…"'होशाग को मेरे वहा पहुचने की खबर नहीं दीं जाएगी। आप मुझे उसका पता वगैरह समझा दीजिए I मै' उससे खुद मिलूगी I हम तीनों के अलावा यह खबरं बाहर जानी ही नहीं चाहिए कि मैं क्या करने जा रही हूं। काम आपका हैं लेकिन करने का ढग मेरा रहेगा। "


"तो तुम होशाग पर शक कर रही हो ?"


"ये कार्यं ही ऐसे हैँ और आप इस बात को मेरे से ज्यादा ही बेहतर तौर पर जानत्ते हैँ कि कोई भी एजेंट कब गद्दारी पर उत्तर आए या डबल एजेट' बन जाए, नहीं मालूम होता और फिर होशाग तो चीनी है I चियाग भी चीनी है I मसला चीन देश का हे होशाग का मन कभी भी बदल सकता है I "


शंकरदास पहाडिया के होठो से गहरी सास निकल गई ।


"ठीक हे I तुम जिस ढग से काम. करना चाहो कर सकती हो !"


"सिंगापुर की सडकें मेरे लिए नईं नहीं हैं I मैं आसानी से होशाग तक पहुच जाऊंगी I " मोना. चौधरी ने गभीर स्वर में कहा-" चियाग के मामले में आप जो बात जरूरी समझते हैं वह मुझें बता दीजिए। "



पहाडिया साहब ने सिर हिलाया I

"अच्छी मांत है परंतु इतना जान लो कि सुबह छ बजे की फ़्लाइट से तुम सिंगापुर' रवाना हो जाओगी I "


"मुझे कोई एतराज नहीं I ”


पहाडिया ने कालिया को देखा ।


"मोना चौधरी के सिंगापुर जाने का इतजान करो I ”


"परतु मेरा पासपोर्ट ?" मोना चौधरी ने कहना चाहा ।
"यह सब बातें हमारे लिए छोड दो I देश को बचाने की खातिर कभी कभी हमें गैरकानूनी काम भी करने पडते हैं I अभी तुम्हारी तस्वीर ले ली जाएगी ज़रा' सा मेकअप करके । ताकि तुम्हारा चेहरा बदला बदला लगे । एक घटे में ही तुम्हारा नकली पासपोर्ट तैयार हो जाएगा' ।" पहाडिया ने गभीर स्वर में कहा ।

मोना चौधरी इस सिलसिले में फिर कुछ नहीं बोली I


.. कालिया बाहर निकल गया I


मोना चौधरी ओर शंकरदास पहाडिया बातें करने लगे ।


घटे' भर बाद बातें समाप्त हुई तो पहाडिया ने चियाग की फाइल मोना चौधरी के हबाले कर दी ।


मोना चौधरी फाइल के पन्ने पलटनेटने लगी I





जिस समय प्लेन ने सिंगापुर एयरपोर्ट पर लेड किया', सूर्य पश्चिम की तरफ झुक रहा था । स्माप्त हो रही सूर्य की किरणे बेहद चमक रहीँ र्थी I दिल्ली एयरपोर्ट से प्लेन ही लेट रवाना हुआ था I कुछ तकनीकी गडबडी के कारण I इस दोरान. मोना… चौधरी प्लेन के भीतर ही बैठी रही थी I प्लेन से निकलकर, , एयरपोर्ट मर बेकार मेँ टह्रलकर यूं ही किसी के शक का केद्र-नहीं बनना चाहती थी I


एयरपोर्ट से निकलतें ही होटल एजेंट ने उसे घेर लिया । बढ़-चढकर अपने होटल की तारीफ करने लगा । मोना 'चौधरी इस समय बेहद सावधानी से काम ले रही थी I वह जानती थी . कि उसने जो काम हाथ में लिया हे, वह बेहद खतरनाक और जानलेवा. है I किसी भी समय मौत उसे निगल सकती, थी I दुश्मन सावधान और चालाक ही नहीं, खतरनाक भी था I

उसकी टक्कर किसी मम्मूली इंसान से नहीं, चियाग से थी ।


चियाग की फाइल उसने बहुत अच्छी तरह पढी थी । चियाग' की तस्वीर उसने अच्छी तरह अपने दिमाग में बिठा ली थी ।

कुल मिलाकर उसने जो नतीजा निकाला था उससे यह~ तो स्पष्ट जाहिर होता था कि चियाग' इंसान कम और हैवान ज्यादा था । इंसानी' दरिंदा था वह ।

बेरहम, निर्मम इंसान अगर उसे जरा भी इस बात का एहसास हों.गया कि वह उस फिल्म को कैसे लेने हिदुस्तानी एजेट बनकर आ रही है तो कोई बडी बात नहीं किं सिंगापुर एयरपोर्ट पर ही उसकी मौत का इंतजाम कर रखा हो I सावधानी के तौर पर मोना चौधरी ने अपनी तसल्ली की और फिर उस एजेट ने उसे होटल की वैन में बिठा दिया । मोना चौधरी चाहती तो टैक्सी का भी इस्तेमाल कर सकती थी I परंतु सुरक्षा और सावधानी के नाते हॉटल वैन ही ठोक थी क्योकि उसमें चद और भी होटल जाने वाले लोग थे । सामान के नाम पर मोना चौधरी के पास मीडियम साइज़ का सूटकेस था I वह तो उस सूटकेस की भी जरूरत नही समझती थी परतु सफर में सामान होना लाजिमी था नहीँ तो वह किसी के भी शक का केन्द्र बन सकती थी I कही भी मामला गडबडा सकता था I फिवहाल तो मोना चौधरी को कोई खतरा नजर नहीँ आया I मन ही मन दिक्कत तो उसे इस बात. की हो रही थी कि पास मेँ रिवाॅल्बर तक नहीँ था I


प्लेन के सफर में भला वह रिवाॅल्बर कैंतें अपने पास रखती I


बहरहाल बिना किसी परेशानी के बिना किसी खतरे के वह होटल पहुच गई होटल के कमरे में पहुच गई ।


चियाग की फाइल पढ़ने और मिस्टर पहाडिया के मुह से चियाग के बारे में जानने के पश्चात मोना चौधरी गभीर थी । वह समझ चुकी थी कि चियाग से निबटना आसान काम नही था जबकि उसे तो चियाग के मुह मे हाथ डालकर अपने देश के' सीक्रेट की फिल्म निकालनी थी I कमरे में पहुचते ही मोना चौधरी ने सबसे पहला काम कमरे की तलाशी लेने का किया I चियाग किसी देश का मात्र एजेट ही नहीं था वल्कि वह एक बेहद पावरफुल इंसान था I उसके पास दुश्मनों से निबटने के लिए हर तरह का सामान था I चियाग की बाहें बहुत लबी थी I


हागकाग और चीन में तो पूरी की पूरी ही उसकी चलती थी और वह टापू तो जैसे उसका देश था I
ऐसे में अगर...... चियाग को अपने दुश्मन के आने का पता हो तो वह उसके लिए कैसा भी इतजाम कर सकता था I उसकी गरदन उडा देना . . या उसके शरीर क्रो गोलियों से छलनी करा देना मामूली सी बात थी उसके लिए I मोना चौधरी ने कमरे का जर्रा जर्रा चैक कर डाला I परतु वहा कोई माइक्रोफोन नहीं था I न ही फिट किया कोई गुप्त कैमरा I या फिर ऐसी ही कोई एतराज के काबिल कोई चीज I सब ठीक ही था अब तक तो I नहा धोकर मोना चौधरी ने कपडे बदले I चाय के साथ स्नेक्स लिए I जरूरी सामान ,जेब के हवाले करने के पश्चात जब मोना चौधरी होटल से निकली तो शाम के आठ बज रहे थे I हर तरफ अधेरा' फैल चुका था I सिगापुर की रोशनियों की जगमगाहट बहुत अच्छी लग रही थी I


मोना चौधरी की सतर्क खतरनाक निगाह चारों तरफ घूम रही थी I लोग आ जा रहे थे परंतु किसी की निगाह भी मोना चौधरी को अपने पर टिकी न लगी I सावधानी के नाते मोना चौधरी पैदल ही आगे बढ गई I

होटल के स्टैड से उसने टैक्सी नहीं ली I
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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by 007 » 25 Sep 2017 13:43

करीब दो किलोमीटर आगे जाकर उसने `टैक्सी ली I इस दोरान मोना चौधरी ने पूरी तरह अपनी तसल्ली की कि कोई उसके पीछे _नहीं है I


टैक्सी ड्राइवर को पता बता दिया । टैक्सी तेजी से आगे बढ गई । सिंगापुर', हागकाग मोना चौधरी का अच्छी तरह देखा हुआ था I ' जाने कितनी बार वह यहां आ चुकी थी I यहा तो यहा , वह आसपास के बाहरी इलाकों को भी उसी प्रकार जानती थी जिस तरह हिंदुस्तान की हर जगह से वाकिफ थी I

अभी तो एक ही चीज का खतरा था I सबसे बडा वही खतरा था I

उसका पासपोर्ट कोरिया का था I और कोरियन पासपोर्ट पर वह शुद्ध हिंदुस्तानी-लग रही थी । उसे इतना वक्त ही नहीं मिला था कि वह थोडा बहुत भी मेकअप कर पाती I

पासपोर्ट पर_ लगी तस्वीर उसकी होकर भी पूरी तरह मेल नहीं खा रही थी.....

यानी कि मेकअप करके चेहरे में थीडा सा बदलाव लाना जरूरी था I पासपोर्ट पर लगी तस्वीर को ध्यानपूर्वक देखना पड़ता था I तब कहीं जाकर उसके चेहरे से मेल खाती लगती थी ।


यानो कि इतफाक से बुरे वक्त में अगर किसी जगह चैकिग हो गई तो पासपोर्ट पर लगी तस्वीर उसके लिए दिक्कत्त पैदा कर सकती थी I कालिया ने न जाने कैसे उसकी तस्वीर के. नैन-नक्श बदल डाले थे I

पासपोर्ट पर तो उसका नाम मोना चौधरी ही था I हिंदुस्तानी नाम, जोकि उसके लिए अडचन पैदा कर सकता था पहली फुर्सत. मिलते ही मोना चौधरी ने अपना चेहरा पासपोर्ट की तस्वीर जैसा बनाने की सोची I


मोना चौधरी मुनासिब जगह पर उतरी किराया चुकता करके वह आगें बढ गई ।


यह एक आम सी नजर आने वाली वेहद पुरानी बस्ती लग रही थी । इस बस्ती में कोरियन और चीनी लोग ज्यादा बसे हुए थे I बस्ती में प्रवेश करते ही वहा अजीब सी बदबू का अहसास होने लगा था I छोटे छोटे मकान जैसे एक दूसरे पर चढे नजर आ रहे थे I पतली फ्तली गदी गलियां I


मोना चौधरी ने जींस की पैट और ढीली-ढाली कमीज पहन रखी थी I वेहद खूबसूरत लग रही थी' वह I कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट सलामत थी नही' तो ज्यादा जगह पर तो अघेरा ही था I


कई भद्दी और बुरी निगाहें मोना चौधरी के जिस्म को भेदने की चेष्टा कर रही थीं I और एहसास था मोना चौधरी को इन निगाहों का । परंतु वह निश्चित थी ।

ऐसी निगाहों से वह कभी परेशान या चितिंत नहीं होती थी I

एक दो ने उसे उल्टी सीधी आवाजें . भी कसी' परतु मोना चौधरी आगे वढती रही I वह यहा बेकार मे किसी से लडने नहीं आई थी I खास मकसद के लिए आई थी जिसे उसने हर कीमत पर पूरा करना था I .

गदे से नज़र आने वाले, गदे कपडे पहने बच्चों का झुंड उसे देख रहा था I


जैसे बिचित्र, अजीब-सा कोई जानवर वहां आ पहुचा हो I बच्चों को हैरान देखकर मोना चौधरी मन-ही-मन मुस्कराई और आगे बढती हुई भीड़ को पार करके वह उस जगह पहुँची----

जहां घटाघर जैसी शक्ल का कुछ बना हुआ था । पहाडिया ने उसे वहां तक खामोशी से पहुचने को कहा था और वही से होशाग का पता पूछना शुरू करने के लिए कहा था ।


मोना चौधरी ने होशाग के घर का पता पूछा ।


लोग अजीब सी निगाहों से उसे देख रहे थे I मोना चौधरी को अपनी: गलती का अहसास होने लगा कि उसे यहां भी इन लोगों जैसा बुरा-गदा' बनकर आना चाहिए था । वह सोच ही रही थी कि यह इलाका कास्मोपोलिटन जैसा होगा कि कोई किसी को नहीं देखेगा I भीड से अलग ही नजर आना है उसफी जान को खतरा भी पैदा का सकता था ।



मोना चौधरी को. कोरियन और ,चीनी भाषा आती थी I चीनी भाषा में उसे कुछ दिक्कत अवश्य होती थी, लेकिन इतनी नहीँ कि मन ही मन उसे खीझ पैदा हो । बहरहाल मोना चौधरी ने चीनी भाषा में ही होशाग का पता पूछा था I


पूछते पूछते मोना चौधरी दस मिनट के बाद एक ऐसे कच्चे टूटे मकान के सामने पहुची जो गली के कोने मेँ भीड भाढ़ से परे सबसे अलग थलग था I वही घर उसे होशाग का बताया गया था । वहां गहरा अघेरा था I कही भी रोशनी नहीँ थी I


मोना चौधरी सावधान थी I उसे सिर्फ रिवाल्वर की कमी का अहसास हो रहा था I I दो पल्लो वाला दरवाजा भीतर से बद था I वेल मोजूद होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था I मोना चौधरी ने हाथ से दरवाजे को थपथपाया I

अघेरे में आवाज कुछ दूर तक भी गूंजी । दूसरी बार दरवाजा थपथपाने पर भीतर से चीनी भाषा में पूछा गया I


" कौन ?"


"दरवाजा खोलो I" मोना चौधरी ने धीमे स्वर में कहा ।


"कौन हो तुम ?"


" बाहर खडी होकर मैँ अपने बारे में इस तरह नहीं बता सकती ।"

"क्यो' ?"


"इसकी कोई तो वजह होगी I "


"तुम किससे मिलना चाहती हों ? "


"होशांग से I ”


"पहले कब मिली थी होशाग से ?"

"कभी नहीँ I यह पहला नौका है होशाग से मिलने का ।" मोना.चौधरी ने सतर्क स्वर में कहा I

पल-भर के लिए वहां शाति छा गई । भीतर से कोई आवाज़ नहीं आई।

मोना चौधरी दाएं बाएं निगाहे घुमाती खडी रही I फिर भीतर से दरवाजा खोले जाने `की आवाज आई I


दरबाजे का एक पल्ला. खुला I मोना चौधरी को अधेरे में किसी के चेहरे का आभास हुआ I शरीर का बाकी हिस्सा उसने दरवाजे के दूसरे पल्ले की ओट में कर रखा था । अधेरे में दोनों ही ठीक से एक-दूसरे का चेहरा देख पा रहे थे I


"आओ !" चीनी का स्वर फुसफुसाहट से भरा हुआ था I


मोना चौधरी आगे बढी I उसने ने अपना सिर पीछे कर लिया I


मोना चौधरी ,भीतर प्रवेश कर गई I उसने ने दरवाजा. बद कर लिया I

इससे पहले कि `मोना चौधरी पलटती, उसकी कमर से रिबाल्बर लग गई।


" यह क्यों ?"


"बिन बुलाए अजनबी मेहमानों के साथ ऐसा ही होता हैं I " लहजा सर्द था…"भीतर चलो I "


मोना चौधरी आगे बढी । सामने कमरा था I वह कमरे मे प्रवेश कर गई I चीनी की रिवॉल्बर बराबर उसकी कमर से सटी हुई थी I कमरे में गदगी ज्यादा थी ।

कमरे में गदगी ज्यादा थी I एक… तरफ चारपाई, टेवल और दो कुर्सिंया थी



" तुम्हारे पास कोई हथियार है ?"


" नहीं I" मोना चौधरी बेहद शात थी---" मेरी कमर से रिवाॅल्बर हटा लो !"


"जल्दी क्या है I " चीनी का स्वर सख्त हो गया, फिर उसका हाथ मोना चौधरी के जिस्म को टटोलकर किसी हथियार की~बरामदगी की आशा करने लगा I


मोना चौधरी -अपनी जगह शात खडी रही I चीनी को कोई हथियार नहीं मिला I


मोना चौधरी ने इस बात को स्पष्ट महसूस. किया था कि उसका हाथ शरीर के हर अग पर गया था I परंतु नाजायज़ किसी अग से हाथ ने छेड़खानी नहीं की थी । उसकी कमर से रिवाॅल्बर हट गई ।


" घूमो !"


मोना चौधरी घूमी I


कमरे के प्रकाश में दोनों ने एक दूसरे का निरीक्षण किया I


वह चीनी पौने पाच फीट के करीव लबा था I सिर के छोटे छोटे बाल… ! गठा हुआ जिस्म ! शरीर पर टाइट पैट-कमीज. पहन रखी थी । वह कहीं से आया था या फिर जाने की तैयारी में था I भीतर धसी आखें ! चपटी नाक ! भिचे होठ ! बडे बडे कान ! वह असली चीनी नस्ल का था I इसके साथ ही मोना चौधरी ने महसूस किया कि क्रूरता और मक्कारी की कमी नहीं है उसमें । .


"इसमे-कोई शक नहीं कि वेइतंहा खूबसूरत हो तुम । " चीनी ने बेहद शात स्वर में कहा ।


मोना चौधरी ने सिगरेट सुलगाकर कश लिया ।


"हैरानी है कि तुम यहा तक सही सलामत आ गई I किसी ने रोका नहीं ?"


" नही I " मोना चौधरी. की निगाह उंस पर थी…"तुम कौन हो ?"


"होशाग I तुम शायद मुझसे ही मिलने को कह रही थीं ?"


" तुमसे नहीं होशाग से I "


"वह मैं ही हूं I "


"साबित करो कि तुम होशाग हो । " मोना चौधरी ने उसकी आखो में झाका ।


" क्यों साबित करू ? " चीनी के होठ सिकुड गए I
"क्योकि मुझे जो बात करनी है, वह होशाग से करनी है और मैने पहले कभी होशाग को देखा नहीं और गलती मेरी ही रहीँ कि मैने होशाग की तस्वीर भी नहीँ देखी । "


चीनी का चेहरा कुछ अजीब से अदाज मेँ सिकुड गया ।


वह दो पल मोना चौधरी क्रो घूरता रहा फिर एकाएक ही . . . पलटकर दूसरे कमरे में चला गया । मोना चौधरी हर खतरे से सतर्क वहीँ खडी रही । I


मिनट भर बाद होशाग बाहर आया ।


"यह मेरा पासपोर्ट है I " उसने मोना चौधरी की तरफ पासपोर्ट बढाया I

मोना चौधरी ने पासपोर्ट लेकर उसे चैक किया उसकी तस्वीर नाम और जरूरत की हर चीज़ देखी I उसे तसल्ली हो गई कि उसके सामने खडा व्यस्ति होशाग ही हे I


" लो I" मोना चौधरी ने पासपोर्ट उसकी और बढाया I


होशाग ने पासपोर्ट लेकर टेबल पर रखा औंर जेब सें ड्राइविग लाइसेस निकालकर उसकी तरफ बढाया… "इसे भी देख लो I "


मोना चौधरी ने ड्राइविंग लाइसेस देखा और लौटा दिया I
" मेरी मा ने मेरे जिस्म पर मेरा नाम नहीं गुदवाया नहीं तो वह हिस्सा भी तुम्हें दिखा देता।"


"रिबाल्बर क्यों पकड रखी हे जेब में डाल लो । " मोना चौधरी कश लेकर बोली ।


" हाथ में ही ठीक है । कभी भी तुम्हें शूट करने की जरुरत पड सकती है I क्योकि होशाग का मेहमान कभी भी बिना हथियार के नहीं होता और तुम बिना हथियार के हो बात गले से नीचे नहीं उतर रहीँ I "


"तलाशी तो तुम ले चुके हो I "


होशाग कुछ कहने ही लगा था कि फौरन मुह बद कर लिया ।


" तुम अपने बारे में कहों यहा क्या लेने आई हो ?"


"मेरा नाम मोना चौधरी है । "


"होगा !"


"मैँ हिंदुस्तानी हूं और हिंदुस्तान से आई हूं। "

होशाग चौका और उसी पल उसने खुद को ठीक भी कर लिया ।


" यह दुनिया के कौन से नक्शे मे है ? " होशाग का लहजा मिला जुला था I


"जिस नक्शे में चीन है, उसी में हिंदुस्तान है I " मोना चौधरी ने उसकी आखो मेँ झाका।


"गुड I गुड I हिंदुस्तान' के बारे में कुछ और बताओ। " होशाग ने जैसे उत्सुकता जाहिर की I


मोना चौधरी ने कश लेते हुए उसे घूरा I


" हिंदुस्तान' में लोगों को टोनी नाम से भी पुकारा जाता है । "


होशाग की निगाह मोना चौधरी के चेहरे पर जाकर स्थिर हो गई l


"और ? " होशाग के होठो से निकाला ।


‘ "क्या और ? " मोना चौधरी ने प्रश्न-भरी निगाहो से होशाग को देखा I


"और किस किस नाम से हिंदुस्तान मे लोगों को पुकारा जाता है I "



"कई नाम हैँ-किसकिंस नाम के बारे मे तुम्हें बताती फिरू ?”


"तुम्हारे हिदुस्तान में पहाड होते है?"

" हा I ” मोना चौधरी ने एकाएक सतर्क लहजे में कहा…"और पहाडों ने ही सिंगापुर की हरियाली से मिलने के लिए कहा है I मैं गलत तो नहीं कह रहीँ मिस्टर होशाग ?"


होशाग ने बेहद शात और गभीरता भरे अदाज मे गर्दन हिलाई I

"इससे पहले पहाड ने हरियाली के पास किसको भेजा था?"


" रूबी को । " मोना चौधरी के इन शब्दों के साथ ही वहा गहरा सन्नाटा खिच गया I


होशाग के चेहरे के भाव बदले । वहा कठोरता नाच उठी I
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