आ बैल मुझे मार- मोना चौधरी सीरीज complete

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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by 007 » 25 Sep 2017 13:43

"अब । साफ़ बोलो I क्या नाम बताया था तुमने ? मोना चौधरी ?"

'हा I " मोना चौधरी ने होशाग की आखो में देखा…"मुझे चियांग से हिदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म हासिल करनी है । इस मामले से तुम बखूबी वाकिफ हो होशाग । "


" मैडम मोना । "


" मिस I" मोना चौधरी ने उसे टोका I “

"मिस मोना चौधरी |" होशाग ने कड़वे स्वर में कहा---"तुम्हारे मिस्टर पहाडिया ने चियाग को मजाक समझ रखा हे जो हर बार चियाग से निबटने के लिए हसीन जवान युवती को भेज देता हे । जैसे चियांग उसकी खूबसूरती पर मर मिटेगा और सीक्रेट की फिल्म उसके हवाले कर देगा । पहले रूबी को भेजा और अब तुम्हें I इसमेँ कोई शक नहीं कि तुम्हारी छटाई में पहाडिया ने दिंमाग से काम लिया होगा क्योकि तुम बेपनाह खूबसूरत हो । "


मोना चौधरी हसी I


"मिस मोना चौधरी I" होशाग पहले की तरह एक एक शब्द चबाकर कहने लगा समझदारी इसी में है कि तुन प्लेन पकडो और फौरन हिंदुस्तान चली जाओ I "


" क्यों ?"


" चियाग जैसे इसान से जीतना आसान ही नहीं बल्कि बेहद असभब है I शायद सभव ही नहीं ।"


"फिक्र मत करो I इस मामले में मैं चियाग से बात कर लूगी !"


"मैने बोला तो-कोईं फायदा नहीं I " होशाग ने जैसे निर्णायक अवाज में सिर हिलाया-"वह चियाग है I और वैसे भी हिंदुस्तानी' सीक्रेट का सौदा चीन से पटने जा रहा है । “


मोना चौधरी के होठ' भिच गए I

‘ "अभी पटा तो नहीं ?"


." नहीं I लेकिन ख्याल है कि अगले तीन दिन में सौदा निबट जाएगा ।"


"तीन दिन बहुत होते है I वेसे यह बात तुम्हें कैसे पता चली ?"


होशाग ने मोना चौधरी को घूरा ।

"फालतू के सवाल मत करो । "


मोना चौधरी ने मुस्कराकर कश लिया I


"तुम कहो तो हिंदुस्तान के लिए प्लेन की टिकट मैं बुक करा दू !"


"नहीं I बिना काम पूरा किए मैं बापस नहीं जाऊंगी I "


"यानी कि मरने का पक्का इरादा है है ।" होशाग ने सख्त निगाहों से उसे देखा ।


"ऐसा ही समझ लो । "


"एक ही काम के लिए तुम लोग बार बार आते रहे और ~ असफ़ल होते रहे हो तो कोई बडी बात नहीं कि चियाग की निगाह मुझ पर पड़ जाए I मैँ बेकार का खतरा मोल नहीं लेना चाहता । "


'"क्या मतलब? "


. . . "मैं इस मामले में अब किसी की सहायता नहीं कर सकता ।" होशाग ने मुट्टिया भीचकरकर कहा ।



मोना चौधरी ने शात निगाहों से होशाग को देखा I


" लेकिन मिस्टर पहाडिया तो कह रहे थे कि मेरी हर बात मानोगे I ”



" नही मान रहा तो तुम्हारी भलाई के लिए I मौत से तुम्हें बचाने के लिए । “



"मुझे अपनी नहीं देश की भलाई चाहिए I " मोना चौधरी ने एक एक शब्द चबाकर कहा ।


" कह देने से देश की भलाई नहीं हो जाती I और चियाग से निबटना किसी के बस का नहीं है I "


मोना चौधरी सख्त निगाहों से होशाग को घूरने लगीं I


" तुम हिंदुस्तान चली जाओ I ”


"नहीं I काम पूरा किए विना मैं वापस पलटने वाली नहीं' । " मोना चौधरी के दात भिच गए I


" तुम चियाग को नहीं जानती I वह....... I"


" मै सिर्फ अपने मक्सद को जानती हूं जिसके लिए में यहां आई हूं मिस्टर होशाग I "


होशाग ने कठोर नजरों से मोना चौधरी को देखा I


" तुम मौत के कुए मे छलाग लगाने को कह रहीं हो I "

" मामूली बात है मेरे लिए I जिसे तुम मौत का कुआ कह रहे हो वह मेरे लिए ठडे पानी का समदर है I क्योकिं इस काम के पीछे देश-भक्ति का ज़ज्वा हे । तुम शायद मेरी बात न समझ सको । "


"देश-भक्ति का जज्बा यह नहीं कंहत्ता कि अपनी जान के दुश्मन बन जाओ I बल्कि यह कहता है देश की खातिर काम करो I " होशाग ने एक-एक शब्द पर जोर देकर समझाने वाले भाव से कहा ।


"और अगर काम में जान का खतरा हो तो पलटकर भाग . . लो यही ना ?" मोना चौधरी कडबे स्वर मे बोली I


"तुम पागल तो नहीं हो ?"


मोना चौधरी ने मुस्कराकर सिर हिलाया I


होशाग आहत भाव से मोना चौधरी को देखता रहा I


मोना चौधरी ने सिगरेट का कश लिया I



" क्या देख रहे हो होशाग ?" . . .


"तुम्हें I " होशाग का स्वर गभीर था I "


"मुझे ?” मोना चौधरी मुस्कराई ।


"हा I " होशाग ने गभीरता से सिर हिलाया-"मैँ यह बात कभी भी पसद नहीं करूगा कि तुम जैसी खूबसूरती दुनिया से उठ जाए I चियाग तुम्हारे शरीर को छलनी छलनी कर दे । "


"तो ?"


"तो । " होशाग ने मोना चौधरी की आखो में झाका-"मै किसी भी सिलसिले में तुम्हारी सहायता नहीँ कर सकता I "


"सोच लिया ?" मोना चौधरी गभीर हो गई I


"पक्की तरह सोच लिया I "


मोना चौधरी ने कश लेकर सिगरेट कमरे के खाली कोने मेँ उछाल दी ।

"एक बात का जवाब तो दो होशाग । " मोना चौधरी उठकर टहलने लगी I


होशाग ने प्रश्न भरी निगाहों से मोना चौधरी को देखा ।

" तुम क्या समझते हो-तुम्हारे इनकार कर देने से मै हिदुस्तान चली जाऊगी ?”

"मैं कुछ भी नहीं समझता I तुम जो चाहो सोच सकती हो ।" होशाग ने लापरवाही से कहा I


"मैं जो काम करने आई हूं वह हर हाल मेँ पूरा करके ही जाऊगी I

"तुम...." होशाग ने कड़वे स्वर में कहा…"मरने आई हो और मेरे ख्याल में मरकर ही जाओगी। "



"यह भी मेरे काम का ही हिस्सा है I काम पूरा करो या मरो । " मोना चौधरी ने सिर हिलाकर गभीर स्वर मेँ कहा I


होशाग ने सिगरेट सुलगाई और कुर्सी पर बैठकर सुलझे स्वर में बोला---- "मिस मोना चौधरी । मै जो क्रह रहा हू उस पर जरा गोर
करना I इस काम की खातिर दो एजेट पहले भी मर चुके हैं, इस बात से तुम बखूबी वाकिफ हो I और सब कुछ जानते हुए भी तुम फिर मरने को आ गई' I आठ-दस-बारह हजार की तनख्वाह के पीछे अपनी जान गवाना बेवकूफाना हरकत है। समझदारी से काम लो । इस काम से किनारा कर लो I मैँ मिस्टर पहाडिया क्रो मैसेज भेज देता हू कि चियाग और चीन में सौदा पट गया है I और वह फिल्म चीन के पास पहुच गई है , ऐसा करने से सब कुछ ठीक हो जाएगा I "


मोना चौधरी ठिठकी I


उसने होशाग को देखा ।


"देश से गद्दारी करने का तुम मुझे अच्छा सबक पढ़ा रहे हो I ”


"भूल है तुम्हारी I मै' तुम्हारी जान बचाने की चेष्टा कर रहा हू कि तुम । "



"मेरी जान की फिक्र करना तुम छोड़ दो । " मोना चौधरी का स्वर सख्त हो गया।


. . . होशाग ने होठ भीच लिए …


"मिस्टर पहाडिया से तुम्हें हर महीने मोटी रकम मिलती है होशाग I"


"तो...?'


" और वह रकम तुम्हें सिर्फ इसलिए दी जाती है तुम वक्त आने पर पूरी तरह हमारी मदद करो I"

"मैरी की हुई मदद के कारण ही तुमसे पहले आए दोनों एजेट अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं।"



"तुम सिर्फ अपने हिस्से का काम करो I कौन मरता है और कौन. जिदा रहता है इससे तुम्हें कोई मतलब नही होना चाहिए । " मोना चौधरी ने गभीर, किंतु सख्त स्वर में कहा ।



"तुम्हारा मतलब कि तुम लोग आते रहो मरते रहो और मैं पत्थर के वुत्त की तरह सब कुछ देखता रहू I "


"हा I यही मतलब है मेरा । "


होशाग ने कश लेकर नकारात्मक मुद्रा में सिर हिलाया I
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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by 007 » 25 Sep 2017 13:44

"साॅरी । मिस मोना चौधरी l” होशाग ने सख्त, किंतु निर्णायक स्वर में कहा-"मिस्टर पहाडिया से मैँ मोटी रकम अवश्य लेता हू परंतु हर काम करने का ठेका नहीं लिया I इस सिलसिले में मैं दो एजेटो की हेल्प कर,चुका हूं I दोनों मारे गए। अब तीसरी की हैल्प करना, मेरी जान जाने का कारण बन सकता है I चियाग' सोच सकता हे कि आनन-फानन हिंदुस्तानी एजेट कैसे उस तक बिना किसी रुकावट के पहुच रहे है I चियाग की जरा सी भी छानबीन उसे आसानी से मुझ तक पहुचा सकती है और मेरी जान ली जा सकती है I तुम नहीँ जानतीं कि चियाग के हाथ कितने लंवे हैं । मौत का दूसरा नाम है वह I “



"तुम अब खामखाह की बात छेड रहे हो I "


" खामखाह की नहीं I इस समय मै सबसे अहम बात कर रहा हू।" होशाग ने सपाट स्वर में कहा…"किसी भी कीमत पर न तो तुम्हारा साथ दूगा और न ही किसी प्रकार की सहायता करूंगा । यह मेरा आखिरी फैसला है I "


" कोई दिक्कत नहीं I " मोना चौधरी मुस्कराई-"मुझे तुम्हारा फैसला मजूर है । "


होशाग मोना चौधरी को देखता रहा ।


"काम कैसे करना है और कैसे किया जाता है, मुझे मालूम है मिस्टर होंशाग' I "



होशाग बेचैन निगाहों से मोना चौधरी को देखता रहा I


" एक बात का जबाब दो, फिर में चलू' I "
"क्या ?"


"तुम्हारा चियांग से कोई वास्ता तो. नहीं ?"


"क्या मतलब ?" होशाग चौका' I .


~ "हिदुस्तान में जब मुझे तुम्हारे बारे में जानकारी दी गई तो मुझे लगा चियांग से तुम्हारा वास्ता हो सकता है I तुम उसके लिए भी काम करते हो सकते हो I " मोना चौधरी ने उसकी आखों में झाका।।।



,होशाग क्रूर निगाहों से मोना चौधरी को घूरने लगा II


"तुम्हारी इस सोच की खास वजह ?" होशाग ने एक एक शब्द चबाकर कहा ।


"मालूम नही ।"


"शायद इसलिए कि मैं चीनी हू ? "


'हो सकता है I"



"मिस मोना चौधरी I" होशाग का स्वर क्रूर हो उठा---" तुम्हारे हिंदुस्तान में ऐसे कितने लोग और कितने एजेट होगे' जो पाकिस्तान चीन अमेरिका तथा और भी कईं देशों के लिए काम करते होगे' ? यानी कि डबल एजेट बने हुए हैँ और सिर्फ दौलत के लिए काम करते हैँ I


"तो ?"


"क्या मैं दौलत के लिए अपने देश के खिलाफ चलकर पहाडिया का साथ नहीं दे सकता ?"


" अवश्य दे सकते हो I " मोना चौधरी ने सख्त स्वर में कहा-"'ओर दौलत के लिए चियाग का साथ भी तो दे सकते हो !! हो सकता है पहले दोनों एजेटो के बारे में तुमने ही चियाग को सतर्क किया हो I और अब मेरे बारे में भी कर दो । मैने
गल्त तौ नहीँ कहा मिस्टर हौशाग? "


" सरासर गल्त कहा है I " डोशाग ने सर्द लहजे में कहा ।।



"अच्छी बात हे, गलत ही सही I " मोना चौधरी की आखो में खतरनाक भाव चमके--"और अगर यह गलत किसी तरह से सही हुआ I ” मोना चौधरी ने होशाग' के सिर पर हाथ फेरा मौत-भरे अदाज' में…"तो बहुत बुरी मौत दूगी तुम्हें मैं ! नाम याद रखना, मोना चौधरी कहते हैं मुझे । "
होशाग उठ खडा हुआ I


"यह बात अगर किसी और ने मुझे कही होती । " होंशाग के चेहरे पर दरिंदगी नाच उठी थी…"तो अब तक 'उसकी लाश पडी होती I तुम्हें सिर्फ पहाडिया के कारण छोड रहा हूं I "

"जो मैने' कहा हे तुम सिर्फ उसे याद रखो I " मोना चौधरी ने उसी अदाज में कहा I


"अपनी कहीँ और दूसरों को सुनी बात मैं कभी नहीं भूलता I "


"मुझे एक रिवॉल्वर दे दो ।"


"क्यो ?"


"मेरे पास रिवाॅल्बर नहीं है । "


. "सारी I " होशाग ने सिर हिलाया-"मेरे पास एक ही रिवाल्वर है और वह मैं नहीं दे सकता I मेरा काम धधा ही ऐसा है कि रिवाॅल्बर के दम पर मुझे कभी भी मौत से लडना पढ़ सकता हैं I "


"मुझें रिवाल्वर चाहिए ।"


" जब तुम I " होशाग ने कड़वे स्वर में कहा…"सब काम करने का हौसला रखती हो तो रिवाॅल्बर का भी आसानी से इतजाम कर सकती हो' I यह तो बहुत मामूली बात होगी
तुम्हारे लिए I"


"तुम्हारी जेब में मौजूद रिवॉल्बर को मैं आसानी से हासिल कर सकती हूं ।" मोना चौधरी ने दात भीचकर कहा… लेकिन तुम पर हाथ डालना अभी मैं ठीक नहीं समझती मिस्टर होशांग I"

"तो कब हाथ डालना ठीक समझोगी ?"


"जब मुझे तुम्हारी गद्दारी का विश्वास हो जाएगा I "


जवाब में होशाग सिर्फ हसा I बोला कुछ नहीं I


"गुड बाय मिस्टर होशाग I' कहकर मोना चौधरी पलटी ।


"ठहरो I " होशाग उठ खडा हुआ-…'"मैं तुम्हें इस वस्ती के बाहर तक...,!"


" शुक्रिया I जव आ सकती हूं तो जा भी सकती हूं !"

" 'मालूम है मुझे यह बात भी । लेकिन साथ ही मैं भी हू कि तुम सही सलामत यहा कैसे पहुच गई । यह ऐसे बदमाशों से भरी बस्ती है जहा बाहरी खूबसूरत लडकियों को तो सलामत छोडा ही नहीं जाता I बहुत पुराना दस्तूर है यह और देखने वालों के लिए मामूली हे I मैं तुम्हारे साथ तो नहीं रहूगा फासले पर तुम्हारे पीछे रहूंगा । । मैं नहीं चाहता कि कोई तुम्हें मेरे साथ देखे । "


मोना चौधरी ने कुछ कहने के लिए मुह खोला, फिर होठ~ बद कर लिए और पलटकर बाहर निकल गई I कुछ पलो के उपरात होशाग भी घर से बाहर आ गया I








मोना चौधरी के कानों में सीटियों की आबाजें और रिमार्क कसने की आबाजें पडी I वह उस बस्ती के बीच की सडक पर जा रही थी । गहरा अंधेरा था चारों तरफ । इक्का दुक्का लोग ही आ जा रहे थे, जोकि आखे फाड़-फाढ़कर उसे देख रहे थे ।


रात के ग्यारह बज रहे थे । किसी गली या मोड़ के करीब से गुजरती तो मद्दी पुकारें कानों में अवश्य पड़तीं I मोना चौधरी ने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा था कि होशांग आ रहा है या नहीं I वह सिर्फ चियांग के विचारों में उलझी हुई थी कि कैसे उस तक पहुचकर उससे हिंदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म हासिल करनी है I


एकाएक मोना चौधरी ठिठकी । ~

आगे जाने का रास्ता ही नहीं था I होता' भी केसे I सामने लंबा-चौड़ा तीस वर्षीय क्रोरियन युवक आ खडा हुआ था I मोना चौधरी ने पहली बार इतना सेहतमद कोरियन देखा था I


जिस जगह पर उसे रुकना पडा था वहां अधेरा था I स्ट्रीट लाइट टूटी पडी थी । मोना चौधरी को इस बात का भी ध्यान आ गया था कि जब उसने बस्ती में प्रवेश किया था तो यह कोरियन युवकं उसे कुछ खास ही धूर रहा था I अब वह मोना चौधरी के ठीक सामने खडा भद्दे अंदाज में उसे घूर रहा था ।

" रास्ता छोडो I" मोना चौधरी ने अग्रेजी लहजे मे कहा I वह अघेरे मे मोना चौधरी की छातियो मे झाकने की चेष्टा कर रहा था ।


मोना चौधरी ने उसकी बगल में से गुजरकर निकल जाना चाहा।


उसने हाथ बढाकर रास्ता रोक लिया ।



"इत्तनी जल्दी भी क्या है जाने की ?"


"क्या मतलब ?"


"मेरे घर चलो I दो दो पैग मारेगे' और करेगे' I " वह हसा ।



" क्या ?" मोना चौधरी ने आखें सिकोडी।


" चलो तो सही I तुम इतनी खूबसूरत हो I कुछ तो करेगे ही ..!"



"शटअप I रास्ता छोडो। मुझे कुछ भी नहीं करना । " मोना चौधरी सख्त स्वर में बोली।


"में बात करने को कह रहा हू। मेरे पास बोदका रखी है I रूस का अमृत I "
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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by 007 » 25 Sep 2017 13:44

"तुम्हारी मा नहीं है ? ” मोना चौधरी के दात भिच गए थे ।


" नही ?"



"बहन तो होगी?"


'"वह्र भी नही है ।"


"पडोसन ?


" वह तो है !"


"तो उसे रूस का अमृत पिलाओ I मैँ..... I "


"पडोसन को तो मैँ हर तरह का अमृत पिला चुका हूं। "


वह हसा और उसने मोना चौधरी की बाह पकढ़ ली ।


मोना चौधरी ने बाह छुड़ानी चाही I


परंतु कामकाब नहीँ हो सकी ।


."मेरे साथ चल ।"


"छोढ़ता है कि नहीं ?"


" पकडकर छोडना मर्दो का काम नहीं हे I ” कोरियन युवक कहर भरे स्वर में बोला I


अगले ही पल मोना चौधरी की टाग चली ।


घुटना उसकी टागो के बीच लगा I वह दोनों हाथ टागों के बीच रखते चीख पडा I मोना चौघरी ने उसके बाल पकडकर सिर ऊपर किया और......गुर्राई ।

"तुम जैसों को सीधा करना मुझे आता है । कहने के साथ ही मोना चौधरी¸ ने जोरदार. घुसा उसके गाल पर मारा । वह तुरत नीचे लुढक गया I उसकी टागो के बीच. बेपनाह दर्द हो रहा था । नीचे गिर पडे कोरियन को मोना चौधरी ने तबीयत से ठोकर मारी । वह फौरन दो करवटें ले गया l होठो से जो चीख निकली सो अलग l इसके बाद मोना चौधरी ने आगे बढ़ने के लिए एक ही कदम उठाया था कि ठीक उसी समय. अघेरे से निकलकर पाच आदमियों ने उसे घेर लिया ।


सब के सब खतरनाक थे l तीन चीनी और दो कोरियन l खा जाने वाली निगाहों से बे मोना चौधरी को देख रहे थे l उनके हावभाव देखकर. मोना चौधरी फौरन सतर्क हो गई l


उसके देखते ही देखते दोनों कोरियनों ने जेब से चाकू निकाले और खोल लिए । अघेरे में भी चाकू के फ़ल चमक रहे थे ।


" तुमने… l " तभी एक चीनी ने कहा---"हमारे साथी के साथ दुरव्यवहार किया हे !"

मोना चौधरी ने नीचे पडे कोरियन को देखा l धीरे धीरे उसकी हालत सुधर रही थी l


" यह....!" मोना चौधरी ने चीनी को देखा…"मेरे साथ भी बुरा व्यवहार करने की चेष्टा में था l "


" उसे बुरा व्यवहार नहीं कहते। " चीनी कटुता से बोला-" खूबसूरत मेहमानों का हम इसी प्रकार स्वागत करते है !"


"तो इस प्रकार स्वागत करने वालों का यहीं हाल होता है !" मोना चौधरी कड़वे स्वर में कह उठी।


चीनी के होठो सै गुर्राहट निकली।



"तो फिर हम भी उसे नहीं जाने देते स्वागत समाप्त होने पर ही हम उसे विदा करते है' I " चीनी ने दात किटकिटाए l



दोनो कोरियन चाकू सहित इस तरह फैल गए कि वह भागने की चेष्टा करे तो भाग ना सके ।
मोना चौधरी ने उन दोनों की पोजीशन को अच्छी तरह दिमाग में बिठाया I


तीनों चीनी खतरनाक निगाहों से मोना चौधरी को देख रहे थे ।


मोना चौधरी ने खतरे को पहचाना । "तुम I " चीनी नेता नीचे पडे कोरियन को देखा-"ठीक हो ?" '


"हा I " नीचे पडे व्यक्ति ने गहरी सास लेकर सिर हिलाया-"ठीक हो रहा l"


चीनी नेता ने खतरनाक निगाहों से मोना चौधरी को देखा I


"चुपचाप हमारे साथ चलो । " चीनी ने वहशी स्वर में कहा।


" क्यों ?"


"मालूम है तुम्हें क्यों ? पास में जगह है और तुम खूबसूरत हो।"


"मैं नहीं जाना चाहती !" मोना चौधरी ने सपाट स्वर में कहा I


"नहीं चलोगी ?"


"कोशिश करके देख लो I "


चीनी ने अपने चारों सथियों को देखा I फिर मोना चौधरी को ।


"हम झगडा नहीं चाहते I " चीनी ने कहा…"बोल तेरा भाव क्या हे?"


मोना चौधरी ने मौत भरी निगाहों से उस चीनी को देखा I


"मेरा कोई भाव नहीं I मैं धधा नहीं करती जैसाकि तुम सोच रहे हो I "


"धधा नही करती तो जबरदस्ती ही सहीं I तुम्हें छोडने वाले तो हम नहीं I लगे हाथ दो पैसे कमाने हैं तो कमा लो I नहीँ तो जो काम होना है वह तो होना ही है I "



"नहीं होगा ऐसा कुछ जैसा कि तुम सोच रहे हो I " मोना चौधरी गुर्राई ।

चीनी की आखों में खतरनाक चमक उभरी I


. "पकढ़ लो इसे।" चीनी के कहने की देर थी कि एक तरफ से दोनो चीनी और दूसरी तरफ़ से चाकू थामे वे दोनों कोरियन आगे बढे । चीनी
नेता तीन कदम पीछे हट गया । नीचे पडे कोरियन की हालत भी सभल गई थी I वह अब खडे होने की तैयारी में था ।


मोना चौधरी सतर्क हो उठी I रिवाल्वर की कमी उसे बुरी तरह खलने लगी I वे दोनों कोरियन चाकू लिए तेजी से मोना चौधरी की तरफ
बढे I उनका इरादा मोना चौधरी को फौरन घेरे में ले लेने का था । मोना चौधरी के होठो से हल्की सी गुर्राहट निकली । वह उछली और उसकी टागे एक कोरियन की छाती पर पडी ।

वह उछलकर छ: सात आठ फुट दूर गिरता चला गया ।

दुसरे कोरियन के चेहरे पर मोना चौधरी ने दोनों हाथ बाधकर लगाए I उसके होठो से चीख निकली । वह नीचे गिरा I मोना चौधरी भी नीचे गिरी I उठने को हुई कि तभी दोनों चीनी उसके सिर पर आकर सवार हो गए I


दोनों ने मोना चौधरी की एक एक बाह पकडी और तीव्र झटके के साथ उसे उठाया I मोना चौधरी फौरन खडी ही गई । एक पल भी बिना गवाए मोना चौधरी उछली-उसकी दोनों टागे फैल गई और चीनी के पेट की तरफ बढी I दौनों चीनियों
ने उसकी बाहों को थाम रखा था I


एक ठोकर तो चीनी के पेट में लगी I परंतु दूसरा सतर्क था I मोनी चौधरी की पिंडली उसके हाथ में पड गई I दूसरा चीनी तो बाह छोढ़कर नीचे जा गिरा था । जब दूसरे ने मोना चौधरी की टाग पकडी तो खाली हुए हाथ को घूसे की शक्ल में उसने चीनी के मुह पर मारा I चीनी के होठो से चीख निकली I गाल फ़टा I होठो के कोने से खून की धारा निकली । परतु उसने मोना चौधरी कीं पिंडली नहीं छोडी I मोना चौधरी दात किटक्रिटा उठी I

चीनी नेता आगे आया I उसके चेहरे पर वेहद सख्ती के भाव थे ।


ज्यों ही वह पास पहुचा मोना चौधरी ने दोनों बाहें उसके गले में डालीं और... जिसने उसकी टाग पकडी हुई थी चीनी नेता के गले में झूलकर दूसरी टाग उसकी छाती पर मारी I मोना चौधरी की पिंडली छोडकर वह नीचे लुढ़कता चला गया I


मोना चौधरी फौरन टागों पर खडी हुईं और चीनी नेता को कुछ भी समझने का मौका दिए बिना सिर की टक्कर उसकी छाती पर मारी I


चीनी नेता के पाव उखड गए I वह पीठ के बल नीचे गिरा I


मोना चौधरी पलटी और भागी I


लेकिन नीचे पड़ा पहले वाला कोरियन तब ठीक हो चुका था I इससे पहले कि मोना चौधरी भाग पाती नीचे पडे कोरियन ने उसकी टागों में अपैनी टाग अडा दी I


मोना चौधरी धड़ाम से नीचे गिरी I


इससे पहने कि वह सभल पाती नीचे पडे कोरियन ने उस पर छलाग लगा दी और मोना चौधरी के ऊपर जा गिरा I मोना चौधरी के होठों से कराह निकली I


उसने खुद को आजाद करना चाहा परंतु उस कोरियन ने उसे पूरी तरह पकड रखा था और फिर उसने मोना चौधरी के बाल मुटठी मे जकड लिए ।


मोना चौधरी ने दात भीचे ।


"अब बोल हरामजादी I तूने तो मेरी टागों में घुटना I मारकर मेरी जान ही निकाल दी थ नोई I " वस गुर्राकर खतरनाक लहजे में बोला---" तू क्या समझती थी मैं अकेला हू बेबी,,
हम इकट्ठे हैं और मिल बाटकर खाते है । मैने तो सोचा था कि मैं अकेला ही तुम पर काबू पा लूगा इसलिए बाकी के हिस्सेदार साइड में खडे थे लेकिन तू तो तूफान निकली तोप निकली । "


मोना चौधरी ने खुद को आजाद करना चाहा । परंतु कोरियन ने उसे हर तरफ से जकढ़ रखा था ।

" क्या इरादा है ? कोरियन गुर्राया I

अन्य दोनों चीनी और दोनों कोरियन खडे हो चुके थे I अब वे सब खतरनाक मूड में थे और किसी औरत से पिट जाने के हक मे तो किसी भी हाल मेँ नहीं थे।


मोना चौधरी ने हालात का जायजा लिया I वह वास्तव में घिरी हुई थी। बचने के वहुत कम चासेज थे ।


" तुम जो चाहते हो वहीँ होगा I छोडो I " मोना चौधरी कसमसाई I


"साली सीधी खडी होकर सुर मत… बदल देना । " कोरियन गुर्राया I


"मैँ तुम लोगों के सामने कुछ करने के काबिल नहीं हू I "


मोना चौधरी ने हताश स्वर में कहा ।

"सुना तुमने ? " कोरियन ने चीनी नेता से कहा ।


"सुना I छोड दे बिल्ली को I " चीनी नेता ने सख्त स्वर में कहा ।


"यह उछली तो ?"


"भरेगी I" चीनी ने खतरनाक स्वर में कहा…" 'छोड दे इसे I "


कोरियन ने तीव्र झटका देकर मोना चौधरी के सिर के बाल छोडे I


"सुना तूने ?"


"सुना I " मोना चौधरी ने थके थके से स्वर में ही कहा I


"मैं तुझे बधनो से आजाद कर रहा हू बेबी उछल कूद मत करना I वर्ना मरेगी I "


मोना चौधरी ने कुछ नहीं कहा ।


… कोरियन उसे आजाद, करके उठ गया I


मोना चौधरी ने गहरी सास ली और खडी हुई इस समय वह तीन चीनी और तीन कोरियन व्यक्तियों में घिरी हुई थी । बच पाना उसे आसान नहीं लग रहा था और वे क्या चाहते थे उसे मालूम था और उन बदमाशों का साथ देने को वह किसी भी कीमत पर तैयार नहीं थी । मोना चौधरी ने एक एक करके छः के छः को देखा ।

सब के सब दरिदे लग रहे थे।
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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by 007 » 25 Sep 2017 13:45

" हेलो बेबी I" चीनी नेता आगे बढा…"अगर तुम्हारा . दिमाग ठीक हो गया हो तो चलें हैं ?"


"कहा ?" मोना चौधरी शात थी I


"पास ही में हमारा कमरा है I पसद आएगा तुम्हें । वेड के पिल्लो लाजवाब हैं । "


" पिल्लो बढिया हों तो मुझे और भी मजा आता हे I " मोना चौधरी एकाएक मुस्कराई I


" चिता मत करो I हम साथ हों तो पिल्लो से बहुत मजा आता हे चलो।"


मोना चौधरी ने सहमति में सिर हिलाया ।


"चलो I”

अगले ही पल मोना चौधरी ने कोरियन की छाती पर दोनों हाथ रखकर उसे पूरी शक्ति से घक्का दिया और उसका अजाम देख पलटकर भाग खडी हुई I


पल भर के लिए वहा मौत का सन्नाटा छा गया । मात्र कोरियन के गिरने लुढकने की आवाज ही रात के सन्नाटे में गूजी ।


या फिर मोना चौधरी के दौडने की आबाज I


"साली भागती हे I ” चीनी ने खतरनाक आवाज में कहा…"पकडो I ”


अगले ही पल दोनों चीनी और दोनों कोरियन उसके पीछे दौडे । . . नीचे गिरने वाला कोरियन भी उठ खडा हुआ था ।


"बहुत तेज है यह हराभजादी तो I " कोरियन गुर्राया ।

"आओ I ' चीनी ने दात भीचकर कहा I


वे दोनों भी उसी दिशा में भागे जिस तरफ मोना चौधरी भागी थी ।



अगले पाच मिनटों में मोना चौधरी फिर उनके घिराव में थी । … और पुन घेरे में आने का ऐकमात्र यहीँ कारण था कि मोना चौधरी उस इलाके के भीतरी रास्तो से वाकिफ नहीं थी और

उन लोगों ने जाने किन किन रास्तों से निकलकर उसे घेर लिया था ।


अब वह खत्तरनाक निगाहो' से मोना चौधरी को घूर रहे थे और मोना चौधरी भी इस बात को महसूस कर चुकी थी कि....

....मामला अब पहले जैसा सरल नहीं रहा । उन सबकी आखों में खूनी भेडिए जैसे भाव थे I एव पहले वाला कोरियन तो उसे फाड़कर खा जाने वाली निगाहों से धूर रहा था I ~


जबकि चीनी नेता के होठ कठोरता भरे अदाज में भिचे हुए थे ।


मोना चौधरी को पुन रिवाॅल्बर की कमी का एहसास हुआ I अगर रिबाल्बर पास में होती तो इस मामले को कब का खत्म कर चुकी होती । उसके पास ज्यादा वक्त नहीं था I चियांग कभी भी हिंदुस्तान की सीक्रेट फिल्म का सौदा चीन से कर सकता था I होशाग ने स्पष्ट तौर पर उसका साथ देने से इनकार कर दिया था । यानी कि अब जो भी करना था,, उसे करना था । और फौरन ही करना था और यह चीनी कोरियनन बदमाश । खामखाह ही उसके काम में रुकावट पेदा कर रहे थे । मात्र उसका शरीर हासिल काने के लिए I


. . "क्यों साली I" कोरियन गुर्राया-"हमारे हाथों से निक्लकर भागती हे ?"


मोना चौधरी ने सख्त निगाहों से उसे देखा । ~ कोरियन आगे बढा I घुसा मोना चौधरी के चेहरे पर मारना चाहा I परंतु मोना चौधरी ने उसकी कलाई पकड़ी और घुसा उसके गाल पर दे मारा I वह हल्की सी कराह के साथ दो तीन कदम पीछे गया I अगले ही पल चीनी नेता ने रिवाॅल्बर निकालकर मोना चौधरी की तरफ कर दी I


"अगर अब तुमने कोई गलत हरकत की तो मैं तुम्हें शूट कर दूगा I ” चीनी ने खतरनाक स्वर में कहा I


मोना चौधरी ने उसे कहर भरी निगाहो से देखा ।


"तुम लोग मुझ पर हाथ उठाओगे तो ऐसा ही होगा । "

"तुमने ही हमेँ मज़बूर किया है ऐसा करने को । " उसने गुर्राकर कहा-"अगर तुम आराम से तैयार हो जाती तो यह सब न होता I हम तुझे खा जाने के लिए तो नहीं ले जा… रहे थे। फिर तू भागी क्यों ?"


मोना चौधरी ने जल्दी से कहा I



" भागती नहीं तो और क्या करती I तुम लोग छ हो और मै एक । हर बात की हद होती है I "


चीनी नेता ने सिर हिंलाकर कोरियन को देखा I

"कह तो यह ठीक रही है ।"


जवाब में कोरियन सिर्फ गुर्राका रह गया । .. .


. "ठीक हे चलो ।"


"क्या ठीक है ?”


"तुम तीन को निबटाओगी I "


" तीन ज्यादा हैँ।"


" ज्यादा है I आजकल तो चार…चार को निबटा..... I "


" उनका यह सब करना धंधा होगा I मैं वैसी नहीँ हू I " . . मोना चौधरी बोली I …


" तो ? "


"दो से ज्यादा बिल्कुल नहीं I हा है तो ठीक नहीं तो मैं तैयार नहीं हूं I "

क्षण भर की चुप्पी के बाद चीनी ने सिंर हिलाया ।

" ठीक है आओ I"



" यह तुम क्या कह रहे हो I" कोरियन गुर्राया ।


" मैं भी ठीक कह रहा हू और यह लडकी भी ठीक कह रही है! चीनी ने शात लहजे में कहा-- " काम वही अच्छा जो खामोशी और शाति से निबट जाए I "


कोरियन के चेहरे पर असहमति के भाव छाए रहे I


"अब तुम चल रही हो या नहीँ ? " चीनी ने कठोर निगाहो से मोना चौधरी को देखा ।


" चलो ।" मोना चौधरी मुस्कराई I


चीनी ने हाथ में थाम रखी रिवाॅल्बर जेब में डाल ली I उन सबने मोना चौधरी को घेरे मे लिया और आगे बढने लगे ।

मोना चौधरी खुद को कुछ हद तक बेबस महसूस कर रही थी । वक्त कम था I वह चियाग की तरफ ध्यान देना चाहती थी, परंतु वे लोग उसे सूखा सूखा छोडने को तेयार नहीं थे ।


एवबारगी इनका मुकाबला करके भागने कां भी प्रयत्न कर लेती परंतु चीनी के पास रिबाल्बर थी I वह उसे शूट कर सकता था ।


मोना चौधरी उनके इशारे पर उनके घेरे में आगे बढती रही I


वे लोग उसे लेकर. एक गदी सी गली में पहुचे और फिर ऊपरी कमरे में पहुचने के लिए वे सीढिया चढने लगे I गली से ही ऊपर बने कमरे की तरफ सीढिया जा रही थीं I


सीढियां समाप्त होते ही मोना चौधरी ठिठकी I


चीनी उसके बराबर में था । पहला कोरियन उसके पीछे।


बाकी के चार अभी भी सीढियों पर ही थे I


चीनी ने दरवाजा खोला भीतर लाइट आन की I

“ चलो I"


"चलो क्या होता है l पीछे बारात्त नज़र नहीं आ रही ?"


मोना चौधरी उखड़े स्वर में बोली I


"क्या मतलब? "


"इन्हें चलता करो I मेरे साथ सिर्फ दो ही भीतर जाऐगे बाकी नहीं I "


चीनी नेता ने क्षणभर के लिए सोचा फिर सिर हिलाकर पहले कोरियन से कहा I


"तुम मेरे साथ अदर चलो I वाकी चारों थोडी देर टहल लेगे I "


कोरियन ने सिर हिलाया I


"हमें सूखा ही छोड. दोगे ? " सीढियों पर खडे चारों मेँ से एक ने कहा ।


"चुप रहो I इससे निबटकर किसी और को दूढ लेगे।" कोरियन कह उठा।


"लेकिन हमें यह कुछ खास लग रही है । इसके साथ ही ठीक रहेगा !"

"नहीं इसके साथ हम दो ही रहेगे I जो बात तय हैं वह तय है । कोई गडबड़ नहीं। "


चीनी नेता और पहले बाला कोरियन मोना चौधरी को लेकर भीतर पहुचे और दरवाजा भीतर से बद कर लिया । कमरे, मे बेड था I एक तरफ चार कुर्सिया और टेबल पडी थी I

"कपंडे उतारो I " कोरियन बोला I

मोना चौधरी कमीज के बटन खोलने लगी ।


चीनी नेता और कोरियन की निगाहे मिलीं ।मोना चौधरी ने कमीज उतारकर वेड पर उछाल दी I

आकर्षक ब्रा में उसकी जानलेवा छातियां नजर आने लगीं I और कोरियन की आखो में तीव्र चमक लहरा उठी ।


"लगती तो जानदार है I " कोरियन के होठो से निकला I


चीनी ने आगे बढकर मोना चौधरी को बाहों के घेरे में ले लिया । चीनी के लिए दिक्कत तो यह रही कि उसका कद छोटा था और मोना चौधरी का लबा I


और अगले ही पल मौत से भरी बिजली चमकी ।


रिवाॅल्बर चीनी की जेब से निकलकर सोना चौधरी के हाथ में आ गई I मोना चौधरी ने नीचे झुके चीनी की गर्दन से रिवाॅल्बर की नाल टिकाईं और ट्रेगर दबा दिया I


फायर का कानों को फाड़ देने वाला तेज स्वर गूजा I चीनी छिटककर दूर जा गिरा I उसकी गरदन के चीथड़े चीथड़े उड़ गए थे I


खून के छोटे दूर दूर तक जा बिखरे थे । कोरियन जोकि ऊपरी हिस्से से चिपका हुआ था वह हक्का वक्का रह गया I


मोना चौधरी ने दात किटकिटाकर रिवाल्वर का रुख उसकी तरफ़ किया और ट्रेगर दबा दिया I दूसरे धमाके के साथ गोली उसके पेट मे चली गई I मोना चौधरी के चेहरे पर क्रुरता के भाव फैले हुए थे । उसने रिवाॅल्बर को दातो मे दबाया , और कमीज पहनकर . रिवॉल्वर हाथ मे ली और दरवाजा खोला I … बाहर उनके चारों साथियों मे से कोई भी नहीं था ।

या तो वे फायर की आवाज के साथ ही खिसक गए थे या फिर अपने लिए किसी मुर्गी की तलाश में पहले ही जा चुके थे I, बहरहाल बाहर कोई नहीं था I अलबत्ता रात के इस अंधेरे में आस पडोस वाले खिड़कियां खोलकर बाहर झाकना शुरू हो गए थे कि कौन मरा ? किसने मारा ? अब रुक्ले का तो सवाल ही नहीं था I हाथ में रिवाॅल्बर पकडे मोना चौधरी सीढिया उतरी और तेजी से आगे बढती चली गई । कोई नहीं था I कोई था भी तो उसने रास्ता रोकने की चेष्टा नैहीँ की । उस बस्ती से बाहर आने पर ही मोना चौधरी ने रिवाॅल्बर जेब में डाला I कुछ आगे जाकर स्टैड से उसने टैक्सी ली होटल जाने के लिए I . . .





~ होटल रूम में पहुचते ही सबसे पहले मोना चौधरी कपडे उतारकर बाथरूम मे प्रवेश कर गई I नहा धोकर उसने खुद को हल्का महसूस किया .I उसके मस्तिष्क में सिर्फ चियाग धूम रहा था कि चियाग से हिंदुस्तानी सीक्रेट की फिल्म हथियानी है I होशाग उसका साथ देने में पीछे हट चुका था I अब मोना चौधरी का मस्तिष्क मिस्टर पहाडिया की कही उन बातों पर जा रहा था जो उसके लिए मार्गदर्शक बन सकती थीं I


बाथरत्म से बाहर आकर उसने कपडे पहने I चीनी से छीनी रिवाॅल्बर जेब में डाली I उसके बाद कमरे में निगाह मारी I सब कुछ वैसा ही था जैसा वह छोडकर गई थी I उसका इरादा आराम करने का तो जरा भी नहीं था I वह चियाग तक पहुचने के लिए रास्ता साफ करना चाहती थी । तभी डोरबेल बजी । मोना चौधरी की आखें सिकुड गई I इस समय कौन हो सकता है ?


"कौन? " दरवाजे के करीब पहुचकर मोना चौधरी ने पूछा I


"पुलिस । " अग्रेजी में कहा गया…"फौरन इसी समय दरवाजा खोलो देर नहीँ होनी चाहिए । "
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Re: खतरनाक हसीना -मोना चौधरी सीरीज

Post by shabi » 30 Sep 2017 14:22

Bhai agla update jaldi kariye

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