आधा तीतर आधा बटेर (Aadha teetar Aadha bater)

Jemsbond
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आधा तीतर आधा बटेर (Aadha teetar Aadha bater)

Post by Jemsbond » 01 Dec 2017 22:59

आधा तीतर आधा बटेर -Aadha teetar Adha bater



इमरान की एक बहन भी है….जिस का नाम सुरैया है….कज़िन तो 3-4 थी….जिन के दम से घर की रौनक थी….

तो हुआ यूँ कि बला आख़िर रहमान साहब को एक “चेंजेज़ी ख़ान” मिल ही गया….
यानी चंगेज़ ख़ान की नस्ल का एक कॅंडिडेट….पता नही खुद उसके सहरे के फूल खिलने की घड़ी आ गयी थी या सुरैया ही की क़िस्मत ने यावरी की थी….
वैसे सी.बी.आइ के डाइरेक्टर-जनरल की बेटी के लिए रिश्तों की कमी नही थी….
लेकिन किस्सा था खानदानी रिवायत का….खुद चंगेज़ी थे….
इसलिए इमरान की अम्मा बी भी चेंग़ेज़ी ख़ान थी….ज़ाहिर है कि इमरान और सुरैया चंगेज ख़ान ठहरे….
लिहाज़ा उन्हे ऐरे-गैरे के सर कैसे मढ़ा जा सकता था….!

उसे रहमान साहब का इक़बाल ही कहना चाहिए कि ये चंगेज़ ख़ान जो सुरैया के लिए मुनासिब हुआ था आलू-छोले नही बेचता था….
बल्कि डॉक्टर था…. और
डॉक्टर भी कैसा जिसे वज़ीर-ए-आज़म के (प्राइम मिनिस्टर) थेरपिस्ट होने का शरफ़ (सौभाग्य) हासिल था….

डॉक्टर शाहिद ने बहुत जल्द तरक्की की सारी मंज़िले तय कर ली थी….नौ-जवान ही था….
और सर्जरी में अपना जवाब नही रखता था….यही वजह थी कि उन 5 डॉक्टर्स में शामिल था जो सदर (प्रेसीडेंट) और वज़ीर-ए-आज़म (प्राइम मिनिस्टर) के थेरपिस्ट्स में थे….
बहेरहाल रहमान साहब की कोठी में शादी की तैयारी का हंगामा बरपा था….
और सब कुछ रिवायती अंदाज़ में हो रहा था….

रहमान साहब बाहर से ख़ासे मॉडर्न नज़र आ रहे है थे….
लेकिन अंदरूनी तौर पर अव्वल दर्जे के खादमत (रूढ़िवाद) पसंद थे….!

बहुत पहले से कोठी में करीबी रिश्तेदारों का जमाव हो गया था….
और दहेज की तैयारियाँ ज़ोर शोर से जारी थी….!

आज इमरान ने भी अपनी शकल दिखाई थी….
और रहमान साहब तक पहुँचने से पहले ही

कज़िन्स ने उसे लपक लिया था….
और खींचते हुए उस कमरे में लाई जहाँ लड़कियाँ चादरों और मेज़ पोषों पर काशीदा कारी कर रही थी….

हाऐं….तुम लोगों को कैसे मालूम हुआ कि मुझे काशीदा कारी भी आती है….इमरान ने हैरत से कहा

काम जल्दी निपटाना है….किसी चचेरी बहन ने कहा….आप भी बैठ ही जाइए भाई जान….!

ज़रूर….ज़रूर….हाँ….उस कोने पर अभी काम नही हुआ….डिज़ाइन खींचा हुआ है लाना इधर बांधना सुई और तार काशी….
और वो सच-मुच बड़ी संजीदगी से काशीदा कारी में मुब्तेला हो गया था….!

सुना भाई जान….डॉक्टर शाहिद सच-मुच एक चंगेज़ी है….कोई कज़िन बोली

अच्छा….इमरान चौंक कर बोला….कब की बात है….?

क्या मतलब….

पहले रिश्ता होने वाला था वहाँ वो खुद को नौशेरवान की औलाद बताया था….!

क्यूँ हवाई छोड़ रहे है….

यक़ीन करो….

अच्छा भाई जान….ये नौशेरवान क्या नाम हुआ भला….दूसरी बोली

नाम नही….रुतबा है….उसके पास नौशेर दानिया थी….
इसलिए नौशेरवान कहलाया….नही समझी….? नौ बीवियाँ थी….बीवी उस ज़माने में शेरदानी कहलाती थी….!

फिर उड़ाने लगे….

संजीदगी से सुनो….इलमी बातें है….बाज़ रिसर्चस का ख़याल है….
चूँकि नौ अदद बीवियाँ रखने के बावजूद भी काफ़ी “शेर” था इसलिए नौशेरवान कह लाता था….आज कल तो एक ही बीवी वाला भेड़ हो कर रहे जाता है….!

बस की जिए….इतने बड़े बादशाह में कीड़े डाल रहे है….वो हाथ उठा कर बोली….एक आदिल बादशाह गुज़रा है….

उसका क्रेडिट भी बीवियों को ही जाता है….नौ बीवियों के दरमियाँ इंसाफ़ करते-करते इंसाफ़ पसंद हो गया था….उसके राज्य में शेर और बकरी एक घाट पर पानी पीते थे….
और दूसरी घाट वाले घाटे में रहते थे….
इसलिए उन्होने उसके खिलाफ दास्तान अमीर-हमज़ा लिखवादी थी….!

बहुत ना चहकिये….आप भी फँसाने वाले है….

खुदा की पनाह….

डॉक्टर शाहिद चंगेज़ी की बहन डॉक्टर मलइक़ा चंगेज़ी की भी अभी शादी नही हुई….

यक़ीन नही कर सकता….कोई मलइक़ा चंगेज़ी नही हो सकती….
क्यूँ कि चंगेज़ ख़ान चपटी नाक वाला एक मंगोल चरवाहा था….!

शर्म नही आती अपने दादाओं को चरवाहा कहे रहे है….
शायद घांस खा गये है….!

हाँ….तो भाई जान नौ शेरवान….दूसरी बोली

भाई जान नौशेरवान होने से पहले ही मर जाना पसंद फरमाएँगे….इमरान ने बुरा मान कर कहा

आरे….क्या वो आया है….? दरवाज़े की तरफ से अम्मा बी की आवाज़ आई

सन्नाटा छा गया…. और
इमरान बौखला कर चादर समेटता हुआ उठा ही था कि किसी की उंगली में सुई उतर गयी….वो चीखी तो दूसरों ने भी हुल्लड़ मचा दिया

आख़िर हो क्या रहा है….अम्मा बी झल्ला कर बोली

का..का….काशीदा कारी….इमरान हकलाया

खाम्खा हर काम टाँग आड़ा देते है….एक कज़िन ने तुनक कर कहा

इमरान ने चोर नज़रों से उसकी तरफ देखा और सर झुका लिया

इतने दिनों बाद आया है….और….यहाँ बैठ गया….अम्मा बी बोली

वो चुप-चाप कमरे से निकल कर उनके पीछे चलने लगा….राहदारी में रुक कर वो मूडी….तू ना आता तो मैं खुद तेरे पास आती….उन्होने कहा

कोई ख़ास बात अम्मा बी….?

खुदा खुदा कर के ये दिन आया था….लेकिन….

लेकिन क्या….?

मैं नही जानती….भाई होगी कोई वजह….आदमी नही जानता कि कब क्या हो जाएगा….उस पर इतना चराग़ पाने की क्या ज़रूरत है

आख़िर हुआ क्या….?

चल मेरे कमरे में बताती हूँ….वो फिर आगे बढ़ गयी

कमरे में पहुँच कर वो बोली….बैठ जा चैन से….बताती हूँ

इमरान सामने वाली कुर्सी पर आराम से बैठ गया….

डॉक्टर शाहिद ने इस्तीफ़ा दे दिया है….

उसे इस्तीफ़ा नही भाग खड़ा होना कहते है अम्मा बी….

क्या बकवास कर रहा है….

आप यही कहना चाहती है ना उसने मँगनी तोड़ दी है….

क्या मुझे अनपढ़ समझता है….उसने मुलाज़िमत से इस्तीफ़ा दे दिया है….!

तो फिर….उसमे परेशानी की क्या बात है….?

मुझे कोई परेशानी नही है….
लेकिन वो आपे से बाहर हो रहे है….!

हुह….इमरान सर हिला कर बोला

खुदा-खुदा कर के अपने काफु( विरादरी ) का एक शक्श मिला था….

अरे तो कहाँ भागा जा रहा है….कोई बड़ा प्लान होगा सामने इसलिए दे दिया इस्तीफ़ा….माहिर सर्जन है….अपना हॉस्पिटल कायम कर के लाखों कमाएगा

इस्तीफ़ा भी मंज़ूर नही हुआ….हेल्त मिनिस्टर के सेक्रेटरी के पास है….उसने तुम्हारे बाप को इत्तिला दी है….खुद डॉक्टर शाहिद ने उसका ज़िक्र किसी से नही किया….मलइक़ा तक नही जानती….

मलइक़ा….?

डॉक्टर शाहिद की बहन….वो भी डॉक्टर है प्राइवेट प्रॅक्टीस करती है….!

चंगेज़ी ही तो ठहरे….चीर-फाढ़ वाला पेशा इकतियार ना करेंगे तो क्या करेंगे….!

फ़िज़ूल बातें ना कर….उन्हे किसी तरह ठंडा कर….!
कहाँ है….?

लाइब्ररी में….

अच्छी बात है….
लेकिन सुरैया राज़ी है इस रिश्ते पर….

हाँ….हाँ….दोनो एफ.एस.सी में क्लास फेलो थे….

तब तो ठीक है….इमरान सर हिलाता हुआ उठ गया….!

रहमान साहब कोई किताब देख रहे थे….चहरे पर सुकून तारी था….परेशानी का दूर-दूर तक पता नही था….!

क्या मैं हाज़िर हो सकता हूँ….इमरान ने खकार कर पूछा

रहमान साहब चौंक पड़े….किताब मेज़ पर रखी और उसे गौर से देखते हुए बोले….आओ

इमरान करीब पहुँच कर खड़ा हो गया….

बैठ जाओ….उन्होने सामने वाली कुर्सी की तरफ इशारा किया….
और उसके बैठ जाने के पर सवाल किया….3 माह से कहाँ थे….?

ऑर्डर लेता हुआ फिर रहा था….यूरोपी मुल्कों से….झपक भाई एक्षपोटेर ने अपना ट्रॅवेलिंग एजेंट मुक़र्रर कर दिया है….कमीशन के एक लाख 55 हज़ार बनेंगे….

मैं तुम्हारी माली पोज़िशन नही मालूम करना चाहता….

मुझे शादी का मालूम होता तो फ्री पोर्ट से दहेज का सामान खरीद लाता….

शुक्रिया….उसकी ज़रूरत नही….वो खुश्क लहजे में बोले

वो कुछ इस्तीफ़े की बात सुनी है….

हाँ….अगर उसने इस्तीफ़ा वापिस नही लिया तो ये शादी भी ना हो सकेगी…

फ़ैसले में जल्दी ना की जिए तो बेहतर है….

इस्तीफ़ा अभी मंज़ूरी के लिए पेश नही किया गया….

बस तो मुझे थोड़ा सा वक़्त दी जिए….

तुम क्या करोगे….?

बौखला कर इस्तीफ़ा वापिस ले लेगा….

कोई गैर-ज़िम्मेदाराना हरकत भी पसंद ना करूँगा….

किस की….? इमरान के लहजे में हैरत थी

तुम्हारी….वो उसे घूरते हुए बोले

जब से ट्रॅवेलिंग एजेन्सी संभाली है….

फ़िज़ूल बातें ना करो….

जी बेहतर है….

उसके साथियों को भी इल्म नही है कि उसने इस्तीफ़ा दिया है….
उसकी बहन को भी मेरी ही तरफ से उसका इल्म हुआ है….!

अच्छा….वो क्या नाम है….लक़लाक़ा….लाहोल….मलइक़ा

रहमान साहब ने तेज़ नज़रों से देखा….
और
फिर….दूसरी तरफ देखते हुए बोले….उसने पूछा तो सिरे से इनकार ही कर दिया….कहता है कि मैं तो 1 हफ्ते की छुट्टी की दरख़्वास्त दी है….
और ये एक हफ़्ता शहर से बाहर गुज़ारना चाहता हूँ….!

झूट भी बोलता है….इमरान ने सपाट लहजे में कहा

तुम यहाँ किस लिए आए हो….? रहमान साहब गुर्रा कर बोले

ख़ैरियत दरियाफ़्त करने आया था….ले….लेकिन….

अब जा सकते हो….रहमान साहब ने किताब उठाते हुए कहा
सलाम अलैकुम….इमरान ने कहा और उठ कर लाइब्ररी से निकल आया….उसके बाद सीधा सुरैया के कमरे की तरफ गया….उसे देख कर वो जल्दी से खड़ी हो गयी

वलैकुम सलाम….कहता हुआ बैठ गया….
हालाँकि
सुरैया ने सलाम नही किया था….

कैसे याद आ गये हम लोग….? सुरैया बोली

तुम खड़ी क्यूँ हो बैठ जाओ….डॉक्टर शाहिद में कीदे निकाल ने नही आया….नेक नाम आदमी है….बेहतर किस्म का शोहर (पति) साबित होगा

शुक्रिया….सुरैया ने जले-कटे लहजे में कहा

और….तुम्हे इसका भी इल्म होगा के….

मुझे मालूम है….सुरैया इमरान का जुमला पूरा होने से पहले ही बोल पड़ी

क्या ख़याल है….

मैं क्या जानू….

इस्तीफ़ा देने के बाद भी वो फकीर नही हो जाएगा….

ज़ाहिर है….

लेकिन….नादर्शाह का ख़याल है कि इस्तेफ़ा मंज़ूर होने की सूरत में वो दमादि के शरफ़ (सौभाग्य) से महरूम रहेगा….!

डॅडी के खिलाफ एक लफ्ज़ भी नही सुन सकती….

अच्छा….तो फिर मैं डॉक्टर शाहिद को जवाब दे आता हूँ….इमरान उठता हुआ बोला

अरे….अरे….

फिर….तुम क्या चाहती हो….?

मैं क्या बताऊ….सुरैया नर्म पड़ती हुई बोली

वो खुद डॉक्टर से नही पूछेंगे कि उसने इस्तीफ़ा क्यूँ दिया है….

आप ठीक कह रहे है….

इसलिए मेरा फ़र्ज़ हो जाता है….
लेकिन
सवाल तो ये पैदा होता है कि इस्तीफ़े को छुपाया क्यूँ जा रहा है….क्या मलइक़ा से तुम्हारी गुफ्तगू हुई है….!

हुई थी….लेकिन वो कुछ नही जानती….

वो एक हफ्ते की छुट्टी की दरख़्वास्त….?

मलइक़ा से मालूम हुआ….

उन मोहतार्मा से कहाँ मुलाकात हो सकती है….फिलहाल डॉक्टर शाहिद से सीधे गुफ्तगू नही करना चाहता….

इस वक़्त वो अपनी क्लिनिक में होगी….सनडे को 1 बजे तक बैठती है….शाम को क्लिनिक बंद रहता है….

मतलब ये है कि मैं 1 बजे के बाद क्लिनिक में ही उससे मिल लूँ….

जैसा आप मुनासिब समझे….
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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Re: Aadha teetar Aadha bater

Post by Jemsbond » 01 Dec 2017 23:00



Imran ki ek bahan bhi hai….jiss ka naam suraiya hai….cousin to 3-4 thi….jin ke dam se ghar ki rounak thi….

To hua yun ke bala aakhar rahaman sahab ko ek “changez khani” mil hi gaya….
Yani
changez khan ki nasl ka ek candidate….pata nahi khud uske sahre ke phool khilne ki ghadi aa gayi thi ya suraiya hi ki qismat ne yaavri ki thi….
Waise
c.b.i ke director-general ki beti ke liye rishton ki kami nahi thi….
Lekin
kissa tha khandani riwaayat ka….khud changezi the….
Isliye
imran ki amma bee bhi chengezi khani thi….zaahir hai ke imran aur suraiya changez khani thahre….
Lihaazaa
unhe aire-gaire ke sar kaise mara jaa sakta tha….!

Use rahman sahab ka iqbal hi kahna chahiye ke ye changez khani jo suraiya ke liye munasib hua tha aalu-chole nahi bechta tha….
Balki
doctor tha….
Aur
doctor bhi kaisa jise wazeer-e-azam (prime minister) therapist hone ka sharf (saubhagya) haasil tha….

Doctor shahid ne bahut jald tarakki ki saari manzile tai kar li thi….nau-jawaan hi tha….
Aur
surgery mein apna jawaab nahi rakhta tha….yahi wajah thi ke un 5 doctoron mein shaamil tha jo sadar (president) aur wazeer-e-azam (prime minister) ka therapists mein the….
Baherhaal
rahman sahab ki kothi mein shaadi ki taiyaari ka hangama barpaa tha….
Aur
sab kuch riwaayati andaaz mein ho raha tha….

Rahman sahab bahar se khaase modern nazar aa rahe hai the….
Lekin
andarooni taur par awwal darje ke khaadamat (rudhivaad) pasand the….!

Bahut pahle se kothi mein kareebi rishtedaron ka jamaaw ho gaya tha….
Aur
jahez ki taiyaariyan zor shor se jaari thi….!

Aaj imran ne bhi apni shakal dikhayi thi….
Aur
rahman sahab tak pahunchne se pahle hi

cousins ne use lapak liya tha….
Aur
khinchte hue us kamre mein laayi jahan ladkiyan chadaron aur mez poshon par kaashida kaari kar rahi thi….

Haaain….tum log ko kaise maalum hua ke mujhe kaashida kaari bhi aati hai….imran ne hairat se kaha

kaam jaldi niptana hai….kisi chacheri bahan ne kaha….aap bhi baith hi jaiye bhai jaan….!

Zaroor….zaroor….haa….us kone par abhi kaam nahi hua….design khincha hua hai laana idhar bandhana sui aur taar kashi….
Aur
wo sach-much badi sanjeedagi se kaashida kaari mein mubtela ho gaya tha….!

Suna bhai jaan….doctor shahid sach-much ek changezi hai….koi cousin boli

achha….imran chaunk kar bola….kab ki baat hai….?

Kya matlab….

Pahle rishta hone wala tha wahan wo khud ko nausherwan ki aulaad bata tha….!

Kyun hawaai chhod rahe hai….

Yaqeen karo….

Achha bhai jaan….ye nausherwan kya naam hua bhala….dusri boli

naam nahi….rutaba hai….uske paas nausher daaniya thi….
Isliye nausherwan kahlaya….nahi samjhi….? Nau biwiyan thi….biwi us zamaane mein sherdani kahlaati thi….!

Fir udane lage….

Sanjeedgi se suno….ilmi baatein hai….baaz reaserchers ka khayal hai….
Chunke
nau adad biwiyan rakhne ke bawajood bhi kaafi “sher” tha isliye nausherwan kahe lata tha….aaj kal to ek hi biwi wala bedh ho kar rahe jata hai….!

Bas ki jiye….itne bade baadshah mein keede daal rahe hai….wo haath utha kar boli….ek aadil baadshah guzra hai….

Uska credit bhi biwiyon ko hi jata hai….nau biwiyon ke darmiyaan insaaf karte-karte insaaf pasand ho gaya tha….uske rajya mein sher aur bakri ek ghaat par paani pite the….
Aur
dusri ghaat wale ghaate mein rahte the….
Isliye
unhone uske khilaaf daastan ameer-hamza likhwadi thi….!

Bahut na chahkiye….aap bhi fasne wale hai….

Khuda ki panaah….

Doctor shahid changezi ki bahan doctor malaiqa changezi ki bhi abhi shaadi nahi hui….

Yaqeen nahi kar sakta….koi malaiqa changezi nahi ho sakti….
Kyun ke
changez khan chapti naak wala ek mangol charwaha tha….!

Sharm nahi aati apne dadao ko charwaha kahe rahe hai….
Shayad
ghaans khaa gaye hai….!

Haa….to bhai jaan nau sherwan….dusri boli

bhai jaan nausherwan hone se pahle hi mar jana pasand farmayenge….imran ne bura maan kar kaha

aarey….kya wo aaya hai….? Darwaaze ki taraf se amma bee ki awaaz ayi

sannata chaa gaya….
Aur
imran boukhla kar chadar samethta hua utha hi tha ke kisi ki ungli mein sui utar gayi….wo cheekhi to dusron ne bhi hulladh machha diya

aakhir ho kya raha hai….amma bee jhalla kar boli

ka..ka….kaashida kaari….imran haklaya

khwamkhan har kaam taang aadha dete hai….ek cousin ne tunak kar kaha

imran ne chor nazron se uski taraf dekha aur sar jhuka liya

itne dinon baad aya hai….aur….yahan baith gaya….amma bee boli

wo chup-chaap kamre se nikal kar unke piche chalne laga….raahdari mein ruk kar wo mudhi….tu na aata to main khud tere paas aati….unhone kaha

koi khaas baat amma bee….?

Khuda khuda kar ke ye din aya tha….lekin….

Lekin kya….?

Main nahi jaanti….bhai hogi koi wajah….aadmi nahi jaanta ke kab kya ho jayega….us par itna charaagh paane ki kya zaroorat hai

aakhir hua kya….?

Chal mere kamre mein batati hu….wo fir aage badh gayi

kamre mein pahunch kar wo boli….baith jaa chain se….batati hu

imran saamne wali kursi par aaram se baith gaya….

Doctor shahid ne istifa de diya hai….

Use istifa nahi bhaag khada hona kahte hai amma bee….

Kya bakwas kar raha hai….

Aap yahi kahna chahti hai na usne mangni todh di hai….

Kya mujhe anpadh samajhta hai….usne mulazimat se istifa de diya hai….!

To fir….usme pareshani ki kya baat hai….?

Mujhe koi pareshani nahi hai….
Lekin
wo aape se bahar ho rahe hai….!

Huh….imran sar hila kar bola

khuda-khuda kar ke apne kaafu ka ek shaksh mila tha….

Arey to kahan bhaaga jaa raha hai….koi bada plan hoga saamne isliye de diya istifa….maahir surgeon hai….apna hospital kaayam kar ke lakhon kamayega

istifa bhi manzoor nahi hua….health minister ke secretary ke paas hai….usne tumhare baap ko ittilaa di hai….khud doctor shahid ne uska zikr kisi se nahi kiya….malaiqa tak nahi jaanti….

Malaiqa….?

Doctor shahid ki bahan….wo bhi doctor hai private practice karti hai….!

Changezi hi to thahre….cheer-faadh wala pesha ikhtiyaar na karenge to kya karenge….!

Fizool baatein na kar….unhe kisi tarah thanda kar….!
Kahan hai….?

Library mein….

Achhi baat hai….
Lekin
suraiya raazi hai is rishte par….

Haa….haa….dono f.s.c mein class fellow the….

Tab to thik hai….imran sar hilata hua uth gaya….!

Rahman sahab koi kitaab dekh rahe the….chehre par sukoon taari tha….pareshani ka door-door tak pata nahi tha….!

Kya main haazir ho sakta hu….imran ne khakaar kar pucha

rahman sahab chaunk padhe….kitaab mez par rakhi aur use gour se dekhte hue bole….aao

imran kareeb pahunch kar khada ho gaya….

Baith jao….unhone saamne wali kursi ki taraf ishara kiya….
Aur uske baith jane ke par sawaal kiya….3 maah se kahan the….?

Order leta hua fir raha tha….europi mulkon se….jhapak bhai expoter ne apna travelling agent mukharar kar diya hai….comission ki ek lakh 55 hazaar banenge….

Main tumhari maali position nahi maalum karna chahta….

Mujhe shaadi ka maalum hota to free port se jahez ka saamaan khareed laata….

Shukriya….uski zaroorat nahi….wo khushk lahje mein bole

wo kuch istife ki baat suni hai….

Haa….agar usne istifa wapis nahi liya to ye shaadi bhi na ho sakegi…

faisle mein jaldi na ki jiye to behtar hai….

Istifa abhi manzoori ke liye pesh nahi kiya gaya….

Bas to mujhe thoda sa waqt di jiye….

Tum kya karoge….?

Boukhla kar istifa wapis le lega….

Koi ghair-zimmedarana harkat bhi pasand na karunga….

Kiss ki….? Imran ke lahje mein hairat thi

tumhari….wo use ghoorte hue bole

jab se travelling agency sambhali hai….

Fizool baatein na karo….

Jee behtar hai….

Uske saathiyon ko bhi ilm nahi hai ke usne istifa diya hai….
Hata ke uski bahan ko bhi mere hi taraf se uska ilm hua hai….!

Achha….wo kya naam hai….laqlaqa….lahol….malaiqa

rahman sahab ne tez nazron se dekha….
Aur
fir….dusri taraf dekhte hue bole….usne pucha to sire se inkaar hi kar diya….kehta hai ke main to 1 hafte ki chutti ki darkhwaast di hai….
Aur ye ek hafta shaher se bahar guzaarna chahta hu….!

Jhoot bhi bolta hai….imran ne sapaat lahje mein kaha

tum yahan kiss liye aye ho….? Rahman sahab ghurra kar bole

khairiyat dariyaaft karne aya tha….le….lekin….

Ab jaa sakte ho….rahman sahab ne kitaab uthate hue kaha
Salaam alaikum….imran ne kaha aur uth kar library se nikal aya….uske baad seedha suraiya ke kamre ki taraf gaya….use dekh kar wo jaldi se khadi ho gayi

walaikum salaam….kehta hua baith gaya….
Halaanke
suraiya ne salaam nahi kiya tha….

Kaise yaad aa gaye hum log….? Suraiya boli

tum khadi kyun ho baith jao….doctor shahid mein keede nikaal ne nahi aya….nek naam aadmi hai….behtar khism ka shohar (pati) sabeet hoga

shukriya….suraiya ne jale-kate lahje mein kaha

aur….tumhe iska bhi ilm hoga ke….

Mujhe maalum hai….suraiya imran ka jumla pura hone se pahle hi bol padee

kya khayal hai….

Main kya janu….

Istifa dene ke baad bhi wo fakheer nahi ho jayega….

Zaahir hai….

Lekin….nadarshah ka khayal hai ke istefa dene manzoor hone ki surat mein wo damaadi ke sharf (saubhagya) se mehroom rahega….!

Daddy ke khilaaf ek lafz bhi nahi sun sakti….

Achha….to fir main doctor shahid ko jawaab de aata hu….imran uthta hua bola

arey….arey….

Fir….tum kya chahti ho….?

Main kya batau….suraiya narm padhti hui boli

wo khud doctor se nahi puchenge ke usne istifa kyun diya hai….

Aap thik kahe rahe hai….

Isliye mera farz ho jata hai….
Lekin
sawaal to ye paida hota hai ke istife ko chupaya kyun jaa raha hai….kya malaiqa se tumhari guftgu hui hai….!

Hui thi….lekin wo kuch nahi jaanti….

Wo ek hafte ki chutthi ki darkhwaast….?

Malaiqa se maalum hua….

Un mohtarma se kahan mulakhat ho sakti hai….filhaal doctor shahid se seedhe guftgu nahi karna chahta….

Is waqt wo apni clinic mein hogi….sunday ko 1 baje tak baithti hai….shaam ko clinic bandh rehta hai….

Matlab ye hai ke main 1 baje ke baad clinic mein hi usse mil lu….

Jaisa aap munasib samjhe….
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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आधा तीतर आधा बटेर-2

Post by Jemsbond » 01 Dec 2017 23:03

आधा तीतर आधा बटेर-2

अरे तो चेहरे पर ये मातमी फ़िज़ा क्यूँ तारी कर रखी है….तेरा भाई तो नही मर गया….

खुदा ना करे….सुरैया की आँखों में आँसू आ गये और उसने अपना निचला होंठ दाँतों में दबा लिया

पगली कहीं की….सब ठीक हो जाएगा….अब नादर्शाही नही चलेगी….

डॅडी से ना उलझीएगा….

सवाल ही नही पैदा होता….इमरान बोला….अच्छा बस हर वक़्त मुस्कुराते रहने का वादा करो पहले

वो ज़बरदस्ती मुस्कुरादी….

ठीक है….मैं चला….फ़िक्र की कोई बात नही….अम्मा बी से कहे देना डॅडी से इस सिलसिले में कोई बात ना करे….

सुरैया ने सर हिला कर हाँ में जवाब दिया......!

थोड़ी देर बाद इमरान की टू-सीटर डॉक्टर मलइक़ा के क्लिनिक की तरफ जा रही थी….उसने घड़ी देखी 12:30 बजे थे
और इमरान के चेहरे पर 12 बज रहे थे….

क्यूँ कि उसने इससे पहले कभी डॉक्टर मलइक़ा को नही देखा था….

और ये नाम तो बचपन से ही उसके लिए तकलीफ़ देह रहा है….जिस स्कूल में शुरुआती तालीम हासिल की थी….उसकी हेडमिस्ट्रेस का नाम भी मलइक़ा था….बड़ी खूखार ख़ासी भारी भरकम औरत थी….उसके साथी टीचर्स उन्हे मलइक़ा की बजाए “फ़ीलपा कहा करती थी….खूखार औरत थी….
और इमरान कम-आज़-कम हफ्ते में दो-बार उनके हाथ से ज़रूर पिटता था….मलइक़ा रिचर्डसन थी….
मगर इमरान उन्हे मलइक़ा चीढ़-फाढ़ कहता था….साथी बच्चे शिकायत कर देते थे….
और होती पिटाई….
बहेरहाल उस नाम पर इमरान के जेहन में उन्ही का चेहरा उभरा था….!

गाड़ी उसने क्लिनिक के सामने रोकी….कयि गाड़ियाँ और भी खड़ी हुई थी….वो सीधे अंदर चला गया….
और एक नर्स से डॉक्टर मलइक़ा के बारे में पूछा….

वो….बाहर जा रही है….नर्स ने इशारा किया….

इमरान ने मूड कर देखा….एक देसी औरत एक गैर मुल्की (विदेशी) सफेद फाम औरत के साथ चली जा रही थी….दोनो की पीठ उसकी तरफ थी….इमरान तेज़ी के साथ आगे बढ़ा और ठीक उस वक़्त उनके करीब जा पहुँचा जब वो एक गाड़ी में बैठ रही थी….

मुआफ़ की जिएगा….इमरान ने बौखलाए अंदाज़ में कहा….मैं आप से मिलने आया था….!

तशरीफ़ रखिए मैं अभी आती हूँ….एक मरीज़ को देख कर….!

जी बहुत अच्छा….

सफेद फाम लड़की ने एंजिन स्टार्ट किया….
और गाड़ी आगे बढ़ गयी….

इमरान खड़ा देखता रहे गया….नये मॉडेल की शानदार मर्सिडीस कार थी….वो ढीले-ढाले अंदाज़ में चलता हुआ वेटिंग रूम में आया….
और एक कुर्सी पर बैठ कर उनघने लगा….आधा घंटा गुज़र गया….
लेकिन मलइक़ा की वापसी ना हुई….ज़रा सी देर में ही इमरान ने उसका तफ़सीलि से जायेज़ा ले लिया था….

वो उसकी तस्सउूराती मलइक़ा से अलग थी….ना भारी भरकम और ना बदसूरत….आवाज़ में भी नर्मी थी….
और आधा घंटा गुज़र गया….वो क्लिनिक में बेचैनी महसूस कर रहा था….
क्यूँ कि मामला था आधे दिन की छुट्टी का….
और अब 2 बजने वाले थे….क़ायदे से एक ही बजे क्लिनिक को बंद होना चाहिए था….

इमरान उठ कर डिसपेनसरी की तरफ चला गया….

कम्पाउन्डर एक नर्स से कह रहा था….कैसे क्लोज़ कर दूं….गाड़ी छोड़ कर गयी है….मुझे रुकना पड़ेगा….तुम लोग जाओ….!
क्या हमेशा इसी तरह चली जाती है….? इमरान ने आगे बढ़ कर पूछा

आप कौन है जनाब….? कम्पाउन्डर ने उसे घूरते हुए सवाल किया

मुझे बैठा कर गयी है….उनसे मिलने आया था….

कुछ कहा नही जा सकता कि कब आएँगी….

मैं क़यामत तक इंतेज़ार करूँगा….

आप है कौन….?

एक मरीज़….

वो मर्दों को नही देखती….

ना देखना होता तो मुझे बैठा कर क्यूँ जाती….

मैं नही जानता….बैठिए….

क्या कोई गैर मुल्की (विदेशी) मरीज़ है….

हरगिज़ नही….नर्स बोली….मेरे इल्म में कोई अँग्रेज़ मरीज़ कभी नही रहा….

मरीज़ा होगी….मर्दों को कहाँ देखती है….इमरान ने कम्पाउन्डर को आँख मार कर कहा….
और कॉमपाउंडर उसे गुस्सैली नज़रों से देख कर रह गया

जी नही….कोई गैर मुल्की मरीज़ा भी नही है….
और उस लड़की को मैने यहाँ पहली बार देखा है….

आख़िर गयी कहाँ है….?

किसी को बता कर नही गयी कि कहाँ जा रही है….

बड़ी मुसीबत है….मैं बकरो के रेट लाया हूँ….

बकरो के रेट....


जी हाँ….अपना बकरा खुद ज़बाह (स्लॉटरिंग) करेंगी….ख़ास्सबों (बुच्स) ने धांदली मचा रखी है….

मुझसे तो नही कहा….नर्स बोली

क्लिनिक में नही ज़बाह करेंगी….

आप पता नही कैसी बात कर रहे है जनाब….सियाह फाम कॉमपाउंडर ने लाल-लाल आँखें निकाली

आप ने डॉक्टर ज़ैदी के कम्पाउन्ड को देखा….इमरान ने नर्स से पूछा

जी नही….

एक से एक गुलफाम और घुंघराले बालों वाला है….
और एक ये है….इमरान ने कम्पाउन्डर की तरफ देख कर कहा

आप का दिमाग़ तो नही खराब हो गया….कम्पाउन्डर भन्ना कर बोला

इमरान ने उसकी तरफ तवज्जो दिए बगैर नर्स से कहा….गोश्त की प्राब्लम का वाहेद हाल ये है कि कुछ लोग मिल कर एक तन्द्रुस्त बकरा खरीदें और ज़बाह कर के आपस में तक़सीम कर ले….रेफ्रिजरेटर तो करीब-करीब सब रखते है….नही भी रखते तो पड़ोसी पर पड़ोसी का हक़ बहेरहाल होता है….जब गोश्त ख़त्म हो जाए तो फिर बकरा खरीद ले….खरीद कहाँ से ले मुझसे मामला तय करे….बाज़ार से सस्ता गोश्त ना मिले तो ये धंधा ही छोड़ दूँगा….

आप तशरीफ़ ले जाइए….हमें नही चाहिए बकरा-वकरा….कॉमपाउंडर चिड-चिड़ाया

वकरा तो मैं खुद भी आप को नही दूँगा….डॉक्टर और कॉमपाउंडर के बस का रोग नही….!
ये वकरा क्या होता है जनाब….नर्स ने मुस्कुरा कर पूछा

कॉमपाउंडर साहब जानते है….

मैं साहब नही चमार हूँ….आप तशरीफ़ ले जाइए

अपनी ज़ुबान से तो ना कहिए….

आप चले जाए यहाँ से….

कैसे चला जाउ डॉक्टर मलइक़ा बैठा कर गयी है….

तो जा कर बैठिए उन्ही की कुर्सी पर….

आइए….आइए….मेरे साथ आइए….नर्स दरवाज़े की तरफ बढ़ती हुई बोली

इमरान उसके पीछे वेटिंग रूम में आया….!

यहाँ बैठिए….वो बद-दिमाग़ है….ज़रा सी देर हो गयी तो पागल हुआ जा रहा है….नर्स ने कहा

ऐसे हालत का आदि नही मालूम होता….

जी नही….डॉक्टर बहुत ब-असूल है….मुझे तो नही याद पड़ता कि ऐसा पहले हुआ हो….यक़ीनन वो करीब ही होंगी और 10,5 मिनिट की बात रही होगी….वरना सॉफ इनकार कर देती….

ऐसा ना कहिए….मामला एक अँग्रेज़ लड़की का था….

आप शायद डॉक्टर को अच्छी तरह नही जानते….उन्होने खुद भी एन्ग्लिश्तान ही में तालीम हासिल की है….
और
सफेद फामो से कतई प्रभावित नही है….

तब तो बड़ी अच्छी बात है….!

इसलिए तो मुझे फ़िक्र हो रही है….उसी की गाड़ी पर गयी है कहीं आक्सिडेंट तो नही हो गया….

अरे नही….ऐसा ना सोचिए….

सोचना पड़ता है….
अगर कोई वजह होती तो यक़ीनन फोन कर के इत्तेला देती के उनका इंतेज़ार ना किया जाए और क्लिनिक बंद कर दिया जाए….

अगर….ये बात है तब सोचना पड़ेगा….इमरान ने कहा
और जहन पर ज़ोर डालने लगा….नये मॉडेल की मर्सिडीस थी….
और नंबर….नंबर उसने गौर से देखे थे….
और अगर….यादाश्त धोका नही दे रही थी तो जेहन में नंबर महफूज़ भी थे….एक्सवाईजेड-311

आप घर पर फोन तो की जिए….इमरान ने कहा

जी हाँ….मैं भी यही सोंच रही हूँ….वो उठती हुई बोली
वो चली गयी थी….
और इमरान सोंच में गूम रहा….थोड़ी देर बाद वो वापस आई

नही जनाब….मुलाज़िम था….डॉक्टर शाहिद तो 11 बजे ही कहीं चले गये थे….

बाहर चले गये थे….?

जी हाँ….वो डॉक्टर मलइक़ा को अपनी रवानगी की इत्तेला देने यहाँ आए थे….
लेकिन शायद….डॉक्टर मलइक़ा नही चाहती थी कि वो बाहर जाए….!

ये आप कैसे कहे सकती है….?

दोनो में ख़ासी देर तक बहस-ओ-तकरार होती रही….
फिर वो चले गये थे….
और देर तक डॉक्टर मलइक़ा का मूड खराब रहा था….!

बड़ी अजीब बात है….

अब समझमे नही आता कि क्या करे….

4 बजे तक इंतेज़ार कर के पोलीस को फोन की जिएगा….
और किसी ज़िम्मेदार आदमी की मौजूदगी में क्लिनिक बंद कर के घर चले जाइए….!

और गाड़ी….?

मेरा मतलब था किसी पोलीस ऑफीसर की मौजूदगी में ये कारवाई होनी चाहिए और गाड़ी भी उसके सुपुर्द की जिए….!

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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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Jemsbond
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Re: Aadha teetar Aadha bater

Post by Jemsbond » 01 Dec 2017 23:04

Arey to chehre par ye maatami fiza kyun taari kar rakhi hai….tera bhai to nahi mar gaya….

Khuda na kare….suraiya ki aankhon mein aansu aa gaye aur usne apna nichla honth daanton mein daba liya

pagli kahin ki….sab thik ho jayega….ab naadarshaahi nahi chalegi….

Daddy se na uljhiyega….

Sawaal hi nahi paida hota….imran bola….achha bas har waqt muskurate rahne ka waada karo pahle

wo zabardasti muskuraadi….

Thik hai….main chala….fikr ki koi baat nahi….amma bee se kahe dena daddy se is silsile mein koi baat na kare….

Suraiya ne sar hila kar haa mein jawaab diya......!
Thodi der baad imran ki two-seater doctor malaiqa ke clinic ki taraf jaa rahi thi….usne ghadi dekhi 12:30 baje the
aur
imran ke chehre par 12 baj rahe the….
Kyun ke
usne isse pahle kabhi doctor malaiqa ko nahi dekha tha….
Aur
ye naam to bachpan se hi uske liye takleef deh raha hai….jiss school mein shuruati taleem haasil ki thi….uski headmistress ka naam bhi malaiqa tha….badi khookhaar khaasi bhari bharkam aurat thi….uske saathi teachers unhe malaiqa ke bajaye “feelpa kaha karti thi….khookhaar aurat thi….
Aur
imran kam-az-kam hafte mein do-baar unke haath se zaroor pithta tha….malaiqa richardson thi….
Magar
imran unhe malaiqa cheedh-faadh kahta tha….saathi bachche shikayath kar dete the….
Aur
hoti pitaayi….
Baherhaal
us naam par imran ke zahen mein unhi ka chehra ubhra tha….!

Gaadi usne clinic ke saamne roki….kayi gaadiyan aur bhi khadi hui thi….wo seedhe andar chala gaya….
Aur
ek nurse se doctor malaiqa ke baare mein pucha….

Wo….bahar jaa rahi hai….nurse ne ishaara kiya….

Imran ne mudh kar dekha….ek desi aurat ek ghair mulki (videshi) safed faam aurat ke saath chali jaa rahi thi….dono ki peet uski taraf thi….imran tezi ke saath aage badha aur thik us waqt unke kareeb jaa pahuncha jab wo ek gaadi mein baith rahi thi….

Maaf ki jiyega….imran ne boukhlaye andaaz mein kaha….main aap se milne aya tha….!

Tashreef rakhiye main abhi aati hu….ek mareez ko dekh kar….!

Jee bahut achha….

Safed faam ladki ne engine start kiya….
Aur
gaadi aage badh gayi….

Imran khada dekhta rahe gaya….naye model ki shaandar mercedes car thi….wo dheele-dhaale andaaz mein chalta hua waiting room mein aya….
Aur
ek kursi par baith kar ungne laga….aadha ghanta guzar gaya….
Lekin
malaiqa ki wapsi na hui….zara si der mein hi imran ne uska tafseeli se jayeza le liya tha….

Wo uski tassavoor aati malaiqa se alag thi….na bhaari bharkam aur na badhsurat….awaaz mein bhi narmi thi….
Aur
aadha ghanta guzar gaya….wo clinic mein bechaini mehsoos kar raha tha….
Kyun ke
maamla tha aadhe din ki chutthi ka….
Aur
ab 2 bajne wale the….khaide se ek hi baje clinic ko bandh hona chahiye tha….

Imran uth kar dispensary ki taraf chala gaya….

Compounder ek nurse se kahe raha tha….kaise close kar du….gaadi chhod kar gayi hai….mujhe rukhna padhega….tum log jao….!
Kya humesha isi tarah chali jaati hai….? Imran ne aage badh kar pucha

aap kaun hai janab….? Compounder ne use ghoorte hue sawaal kiya

mujhe baitha kar gayi hai….unse milne aya tha….

Kuch kaha nahi jaa sakta ke kab ayengi….

Main qayamat tak intezar karunga….

Aap hai kaun….?

Ek mareez….

Wo mardon ko nahi dekhti….

Na dekhna hota to mujhe baitha kar kyun jaati….

Main nahi jaanta….baithiye….

Kya koi ghair mulki (videshi) mareez hai….

Hargiz nahi….nurse boli….mere ilm mein koi angrez mareez kabhi nahi raha….

Mareeza hogi….mardon ko kahan dekhti hai….imran ne compounder ko aankh maar kar kaha….
Aur
compounder use ghusseli nazron se dekh kar rahe gaya

jee nahi….koi ghair mulki mareeza bhi nahi hai….
Aur
us ladki ko maine yahan pahli baar dekha hai….

Aakhir gayi kahan hai….?

Kisi ko bata kar nahi gayi ke kahan jaa rahi hai….

Badi musibath hai….main bakron ke rate laya hu….

Bakron ke rate....


Jee haa….apna bakra khud zabaah (slaughtering) karengi….khassabon (butchers) ne dhaandli machha rakhi hai….

Mujhse to nahi kaha….nurse boli

clinic mein nahi zabaah karengi….

Aap pata nahi kaisi baat kar rahe hai janab….siyaah faam compounder ne laal-laal aankhein nikaali

aap ne doctor zaidi ke compounderon ko dekha….imran ne nurse se pucha

jee nahi….

Ek se ek gulfaam aur ghunghrale baalon wala hai….
Aur
ek ye hai….imran ne compounder ki taraf dekh kar kaha

aap ka dimaagh to nahi kharaab ho gaya….compounder bhanna kar bola

imran ne uski taraf tawaju diye bagair nurse kaha….gosht ki problem ka waahed hal ye hai ke kuch log mil kar ek tandrust bakra khareedein aur zabaah kar ke aapas mein taqseem kar le….refrigerator to kareeb-kareeb sab rakhte hai….nahi bhi rakhte to padosi par padosi ka haq baherhaal hota hai….jab gosht khatm ho jaye to fir bakra khareed le….khareed kahan se le mujhse maamla tai kare….bazaar se sasta gosht na mile to ye dhanda hi chhod dunga….

Aap tashreef le jaiye….hume nahi chahiye bakra-wakra….compounder cheedh-cheedhaya

wakra to main khud bhi aap ko nahi dunga….doctoron aur compounderon ke bas ka rog nahi….!
Ye wakra kya hota hai janab….nurse ne muskura kar pucha

compounder sahab jaante hai….

Main sahab nahi chamaar hu….aap tashreef le jaiye

apni zubaan se to na kahiye….

Aap chale jaye yahan se….

Kaise chala jaun doctor malaiqa baitha kar gayi hai….

To jaa kar baithiye unhi ki kursi par….

Aaiye….aaiye….mere saath aaiye….nurse darwaaze ki taraf badhti hui boli

imran uske piche waiting room mein aya….!

Yahan baithiye….wo badh-dimaagh hai….zara si der ho gayi to paagal hua jaa raha hai….nurse ne kaha

aise halath ka aadhi nahi maalum hota….

Jee nahi….doctor bahut ba-asool hai….mujhe to nahi yaad padhta ke aisa pahle hua ho….yaqeenan wo kareeb hi hongi aur 10,5 minute ki baat rahi hogi….varna saaf inkaar kar deti….

Aisa na kahiye….maamla ek angrez ladki ka tha….

Aap shayad doctor ko achhi tarah nahi jante….unhone khud bhi englishtan hi mein taleem haasil ki hai….
Aur
safed faamon se khattai prabhavit nahi hai….

Tab to badi achhi baat hai….!

Isliye to mujhe fikr ho rahi hai….usi ki gaadi par gayi hai kahin accident to nahi ho gaya….

Arey nahi….aisa na sonchiye….

Sonchna padhta hai….
Agar
koi wajah hoti to yaqeenan phone kar ke ittilaa deti ke unka intezar na kiya jaye aur clinic bandh kar diya jaye….

Agar….ye baat hai tab sonchna padhega….imran ne kaha
aur
zahen par zor daalne laga….naye model ki mercedes thi….
Aur
number….number usne gour se dekhe the….
Aur
agar….yaadasht dhoka nahi de rahi thi to zahen mein number mehfooz bhi the….xyz-311

aap ghar par phone to ki jiye….imran ne kaha

jee haa….main bhi yahi sonch rahi hu….wo uthti hui boli
Wo chali gayi thi….
Aur
imran sonch mein goom raha….thodi der baad wo wapas ayi

nahi janab….mulazim tha….doctor shahid to 11 baje hi kahin chale gaye the….

Bahar chale gaye the….?

Jee haa….wo doctor malaiqa ko apni rawaangi ki ittilaa dene yahan aye the….
Lekin
shayad….doctor malaiqa nahi chahti thi ke wo bahar jaye….!

Ye aap kaise kahe sakti hai….?

Dono mein khaasi der tak bahez-o-takraar hoti rahi….
Fir
wo chale gaye the….
Aur
der tak doctor malaiqa ka mood kharaab raha tha….!

Badi ajeeb baat hai….

Ab samajhme nahi aata ke kya kare….

4 baje tak intezar kar ke police ko phone ki jiyega….
Aur
kisi zimmedar aadmi ki maujoodgi mein clinic bandh kar ke ghar chale jaiye….!

Aur gaadi….?

Mera matlab tha kisi police officer ki maujoodgi mein ye kaarwaayi honi chahiye aur gaadi bhi uske supurd ki jiye….!

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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

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Aadha teetar Aadha bater-3

Post by Jemsbond » 01 Dec 2017 23:08

बात बढ़ गयी थी….डॉक्टर मलइक़ा की वापसी 8 बजे तक नही हुई थी….उस दौरान में इमरान ने मर्सिडीस गाड़ी के रेजिस्ट्रेशन नंबर के हवाले से ख़ास मालूमत हासिल कर ली थी….
और
अपने मातहतों को उसके मतलूख हिदायत देने के लिए एक्स-2 वाले फोन का रिसेवर उठाया ही था कि सिट्टिंग-रूम वाले फोन की घंटी बजी….वो रिसेवर रख कर सिट्टिंग-रूम में आया….कॉल रिसीव की….दूसरी तरफ से रहमान साहब की आवाज़ आई ….!
क्या तुम आज मलइक़ा की क्लिनिक गये थे….?

जी हाँ….और 2:30 बजे तक उनकी वापसी का इंतेज़ार करता रहा था….

कॉमपाउंडर ने अपनी रिपोर्ट में तुम्हारा ज़िक्र एक मुश्तबह (संदिग्ध) आदमी की हैसियत से किया है….

कॉमपाउंडर की मर्ज़ी….

अपनी और तुम्हारी गुफ्तगू का पूरा हवाला भी दिया है….

दिया होगा जनाब….अब ये तो हो नही सकता कि मैं अपना तारूफ़ डॉक्टर शाहिद के होने वाले साले की हैसियत से करा देता….

बकवास मत करो….

जी बहुत बेहतर….

फ़ौरन घर पहुँचो….

बहुत बेहतर….

रिसेवर रख कर वो फिर दूसरे कमरे में पहुँचा….
और
एक्स-2 वाले फोन पर सफदार के नंबर डायल किए….

हेलो….दूसरी तरफ से सफदार की आवाज़ आई….

एक्स-2….

यस सर….

जूलीया की रिपोर्ट के मुताबिक वो गाड़ी किसी गैर मुल्की डेविड हॅमिल्टन के नाम पर रिजिस्टर हुई थी….जो 11-वी शहेरा की इमारत शाम बिल्डिंग के 7वे फ्लॅट में रहता है….उसके बारे में और मालूमत हासिल करो….

बहुत बेहतर जनाब….

दूसरी बात….आज 12 बज कर 45 मिनिट पर उस गाड़ी को एक सफेद फाम लड़की ड्राइव कर रही थी….जिस के बाल अखरोट की रंगत के है उम्र 20,25 साल के दरमियाँ….उपरी होंठ पर बायें जानिब उभरा हुआ सुर्ख तिल है….12:45 मिनिट पर वो एक लेडी डॉक्टर मलइक़ा को अपने साथ ले गयी थी किसी मरीज़ को देखने के लिए….डॉक्टर मलइक़ा की वापसी अभी तक नही हुई….मेरा मतलब है 8 बजे तक….अगवा का केस भी हो सकता है….तुम्हे देखना है कि वो लड़की भी उसी फ्लॅट में रहती है या नही….

बहुत बेहतर जनाब….

दट’ऑल….ये कह कर इमरान ने रिसेवर रख दिया

कमरे से निकल ही रहा था कि सुलेमान से मुठभेड़ हो गयी….

कभी फ़ुर्सत भी मिलेगी आप को….? उसने कहा

फ़ुर्सत ही फ़ुर्सत है….क्या तकलीफ़ है तुम्हे….

मेरी मूँछों के दो बाल सफेद हो गये है….

अल्हाम्दुलिल्लाह….बाकी कब तक सफेद हो जाएँगे….?

आप संजीदगी से मेरी बात सुन ली जिए….

इसी वक़्त….?

इसलिए पहले ही पूछ लिया था कि फ़ुर्सत है या नही….

मूँछ के दो अदद बालों के लिए कतई फ़ुर्सत नही….

वो कालिया कह रहा था कि तीसरा बाल भी सफेद हो जाए तो फिर शादी नही होती….

जोसेफ कह रहा था तो फिर ठीक ही होगा….ना मुझे सफेद बालों का तजूर्बा है और ना शादी का….!

आप मुझे 15 दिन छुट्टी देंगे….

जब तीसरा बाल सफेद हो जाएगा….अब चल हट सामने से घर से बुलावा आया है….

घर से बुलावा….? सुलेमान ने हैरत से कहा

अबे हाँ….वो अम्मा की लौंडिया (नौकरानी) गुलरूख है ना उसकी शादी का चक्कर चल रहा है….

किस से….?

क़ादिर से….
लेकिन
क़ादिर उसे पसंद नही है….!

अरे….मेरी शक्ल उसे याद है या नही….?

कोई ताज़ा तस्वीर ला दे….सूरत भी याद आ जाएगी….

तो गोया अभी गुंजाइश है….?

बिल्कुल….बिल्कुल गुलरूख की पसंद का मामला है….

सुलेमान करीब-करीब दौड़ता हुआ वहाँ से रुखसत हुआ था….
और वापसी में भी देर नही लगाई थी….पोस्ट कार्ड साइज़ की तस्वीर इमरान की तरफ बढ़ाता हुआ बोला….ताज़ा तरीन तस्वीर है….!

इमरान ही का कोई सूट पहने….टू-सीटर से टेक लगाए खड़ा था….

अच्छा….तो ये आय्याशियाँ हुई है मेरी घैर मौजूदगी में….इमरान ने तस्वीर को गौर से देखते हुए कहा

आप ही के नाम पर मारता हूँ….लोग देखते है एक-दूसरे से पूछते है कौन साहब है….अरे जानते नही….इमरान साहब के खानसामा (कुक) चौधरी सुलेमान साहब है….!

चौधरी भी है….

टू-सीटर ड्राइव करने वाला लोहार तो कह लाएगा नही….

ठीक कहता है….एक कोठी भी तेरे नाम करा दूँगा….

कौन सी कोठी….?

शहर की जिस कोठी की तरफ भी इशारा कर देगा….
आख़िर खानसमा चौधरी सुलेमान साहब ही का तो इमरान साहब हूँ….!

देखिए बात पक्की ही कर के आईएगा….

और तेरा ये हक़ भी महफूज़ रखूँगा कि मुझे कच्ची रोटियाँ खिलाता रहे….

रात का खाना भी वहीं खा ली जिएगा….सुलेमान ने खुश हो कर कहा

ज़ाहिर है कि मुर्ग तो सिर्फ़ अपने लिए ही लाया होगा….

बड़ा वाला मिला ही नही….

अच्छा….अच्छा..अब हट जा सामने से

तस्वीर तो लेते जाइए….सुलेमान सामने से हट-ता हुआ बोला

ज़ुबानी बता दूँगा कि अपना सूट पहने अपनी टू-सीटर से टेक लगाए खड़ा है चौधरी….तस्वीर में वो दोनो सफेद बाल नज़र आ रहे है….

सुलेमान खड़ा बीसूरता रह गया….
और इमरान फ्लॅट से बाहर निकल आया….!

घर पहुँचा तो रहमान साहब लॉन ही पर टहलते मिल गये….

पहले किंग्सटन स्ट्रीट के थाने जाओ….
फिर यहाँ आना….उन्होने कहा….!
था….था….थाने….इमरान हकलाया

एक मर्सिडीस मिली है….जिसे एक गैर मुल्की लड़की ड्राइव कर रही थी….उसे रोक लिया गया है….तुम शिनाख्त कर सकोगे….!

जी हा….क्या कॉमपाउंडर और नर्स भी….?

मैं नही जानता….तुमसे कह रहा हूँ कि तुम जाओ….

बहुत बेहतर….इमरान ने कहा
और वापसी के लिए मुड़ा….किंग्सटन स्ट्रीट का थाना वहाँ से करीब 3 मील के फ़ासले पर था….टू-सीटर रफ़्तार से रास्ता तय करती गयी….
और फिर….वो थाने के सामने ही रुकी….

करीब एक मर्सिडीस खड़ी नज़र आई….
लेकिन वो गाड़ी नही थी….जिस पर मलइक़ा ले जाई गयी थी….उसका रेजिस्ट्रेशन नंबर और सीरियल भी वो नही था….!

वो थाने में दाखिल हुआ लड़की इंचार्ज के कमरे में मौजूद थी….
और सौ फीसदी वही लड़की थी….जो मलइक़ा को ले गयी थी….!

डॉक्टर मलइक़ा का कॉमपाउंडर भी मौजूद था….इमरान को देखते ही बोल पड़ा….यही साहब थे जो बकरे बेचने आए थे….!

इमरान ने अपना कार्ड इनस्पेक्टर की तरफ बढ़ा दिया….उसने हैरत से उसकी तरफ देखा और खड़ा हो गया….मुझे अफ़सोस है जनाब….उसने हाथ आगे बढ़ते हुए कहा….मुझे इल्म नही था कि आप का मामला है….

ठीक है….ठीक है….मैं ही था अपने दोस्त की बीवी के लिए वक़्त लेने गया था….इमरान ने कहा और सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया….

लड़की माहॉल से ला-तालूक (उदासीन) नज़र आ रही थी….

क्या आपने इसे बता दिया है कि इसे क्यूँ रोका गया है….? इमरान ने इनस्पेक्टर से पूछा

नही जनाब….वो कहीं फोन करना चाहती थी….
लेकिन मैने इजाज़त नही दी….
दरअसल
सी.आइ.बी के कॅप्टन फायज़ की कॉल आई थी….उन्होने कहा था कि वो लड़की की शिनाख्त के लिए किसी को भेज रहे है….

ठीक है….यही लड़की थी….इमरान बोला

कॉमपाउंडर ने भी शनाख्त कर लिया है….

लड़की ने फ़ौरन कबूल कर लिया कि वो डॉक्टर मलइक़ा को ले गयी थी….क्लिनिक से सिर्फ़ 2 फर्लांग के फ़ासले पर रहती हूँ….उसने कहा….करीबी क्लिनिक वही था मैं सीधा वहीं गयी थी….

और
डॉक्टर मलइक़ा को अपनी ही गाड़ी पर क्लिनिक भी वापिस पहुँचा दिया था….? इनस्पेक्टर ने पूछा

नही….मैने कहा था कि पहुँचा दूँगी….
लेकिन उसने कहा कि फासला ज़्यादा नही है….
और उसे रास्ते में किसी जगाह रुक कर कुछ खरीदना भी है….पैदल ही वापिस हुई थी….!
इनस्पेक्टर ने इमरान की तरफ देखा….
और इमरान सर हिला कर बोला….हो सकता है ऐसा ही हुआ हो….इसे बता दी जिए कि डॉक्टर मलइक़ा अभी तक घर नही पहुँची….

इनस्पेक्टर ने लड़की को बता दिया….

खुदा की पनाह….तो इसलिए मुझे रोका गया है….अब तो मुझे घर फोन करने दी जिए….लड़की ने कहा

इनस्पेक्टर ने इमरान की तरफ देखा….अब लड़की भी उसकी तरफ मुतवज्जह (अट्रॅक्ट) हो गयी….

इमरान के चेहरे पर हिमाकतों के डोंगरे बरस रहे थे….

उसने इमरान से कहा….शायद तुम ही तो थे जिस ने चलते वक़्त डॉक्टर से कुछ कहा था

उसी कसूर पर मैं पकड़ा और बुलवाया गया हूँ….इमरान कराहा….

सवाल ये है कि अगर वो गायब हो गयी है तो मेरा क्या कसूर….?

यही तो मैं भी कह रहा हूँ…..मिस्टर.इनस्पेक्टर बराहे माहेरबानी हम दोनो को जाने की इजाज़त दी जिए….हम बिल्कुल बेकसूर है….

ज़ाहिर है….ज़ाहिर है….इनस्पेक्टर सर हिला कर बोला….आप दोनो अपने लिखित बयान दे कर जा सकते है

शुक्रिया….लाएँ काग़ज़….इमरान जेब से पेन निकालता हुआ बोला….
और लड़की से कहा….तुम भी वही लिख दो जो अभी कहा था….!

बिल्कुल लिख दूँगी….

दोनो ने अपना-अपना लिखित बयान इनस्पेक्टर के हवाले कर दिया

तो फिर जाएँ हम दोनो….इमरान ने अहमाक़ाना अंदाज़ में इनस्पेक्टर से पूछा

ज़रूर….ज़रूर….इनस्पेक्टर उठता हुआ बोला….मुझे अफ़सोस है कि आप दोनो को ज़हमत हुई….

इमरान और लड़की साथ ही निकले….!
कैसी दुश्वारी में पड़ गयी हूँ….लड़की ने कहा….पापा को इल्म हो गया तो उनके मर्ज़ में इज़ाफ़ा हो जाएगा….!

तब्खिर माढ़ा (वाष्पीकरण) का शाफ़ी इलाज सिर्फ़ अनेनी में हो सकता है….जादीद मेडिकल साइन्स तो इसमे नाकाम हो चुकी है….

तुम ठीक कहते हो….5 साल से मुसलसिल इलाज हो रहा है….वक़्तिया तौर पर बहाल होते है….
और फिर वही मुसीबत….!

मुझे अनेनी में ख़ासा दखल है….
अगर कहो तो मैं देखलू तुम्हारे पापा को….?

लड़की ने उसे गौर से देखा….कुछ सोचती रही फिर बोली….चलो अच्छा है, तुम अगर उन्हे उस लेडी डॉक्टर के सिलसिले में मुत्मीन (संतुष्ट) कर सको तो मेरे लिए बेहतर होगा….ज़ाहिर है कि जब मैं अपना लिखित बयान दे चुकी हू तो आइन्दा करवाहियों में मुझसे फिर पूछ-गाच हो सकती है….!

हाँ ये बात तो है….

मैं तुम से गुज़ारिश करती हूँ कि ज़रूर चलो मेरे साथ….मैं सख़्त नर्वस हो गयी थी….ये सुनकर के वो अभी तक घर नही पहुचि….तुमने बड़ा सहारा दिया….
अगर तुम दखल अंदाज़ी ना करते तो ये ऑफीसर आसानी से पीछा छोड़ने वाला नही था….!

हाँ….कम-आज़-कम रात भर ज़रूर बंद रखता….

चलो मेरे साथ….उसके बाद जहाँ कहोगे खुद पहुँचा दूँगी….

ज़रूर….ज़रूर….

इमरान उसकी गाड़ी में बैठ गया….लड़की ड्राइव कर रही थी….
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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