आधा तीतर आधा बटेर (Aadha teetar Aadha bater)

Jemsbond
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Re: आधा तीतर आधा बटेर (Aadha teetar Aadha bater)

Post by Jemsbond » 04 Dec 2017 12:37


इज़ाफ़ा आमदनी आज-कल फरिश्तों को भी बुरी नही लगती….
या फिर….
उसे कोई आसाबी (घोश्ट) मामला समझ ली जिए….

मैं छान-बीन कर रहा हूँ….

सिर्फ़ घर की हद तक….बात आगे ना बढ़ने पाए….!

क्या इसका ताल्लुक शाहिद के इस्तीफ़े से हो सकता है….

मेरा भी यही ख़याल है….आप ही की तरह कोई और भी यही चाहता है कि शाहिद इस्तीफ़ा वापस ले ले….
लेकिन….
वो छुप गया है….!

हाँ….कहीं वो भी उन्ही के हत्थे ना चढ़ गया हो….

खुदा जाने….अब ये मालूम करना है कि उसने इस्तीफ़ा क्यूँ दिया था….

खुदा की पनाह….कोई बड़ी साज़िश मालूम होती है….रहमान साहब की भर्राई आवाज़ आई

और वो इतने दिलेर है कि उन्होने सी.आइ.बी के डाइरेक्टर-जनरल को धमकी दी है….!

सुनो….बहुत सावधान रहो….

आप गालिबान समझ गये होंगे लिबर्टी विला की अहमियत….
लिहाज़ा
येई मुनासिब है कि किंग्सटन के थाने के इंचार्ज को ही तफ़तीश करने दी जिए….!

तुम ठीक कहते हो….

शुक्रिया डॅडी….इमरान ने सिलसिला कट कर दिया….!


रात अंधेरी थी….
और वो काले लिबास में अंधेरे का एक हिस्सा मालूम हो रहा था….लिबास इतना चुस्त था कि खाल से चिपक कर रह गया था….

गॅस मास्क सर पर बँधा हुआ था….
और
उसे अभी चेहरे पर नही चढ़ाया गया था….पीठ पर एक छोटा गॅस सिलिंडर भी बँधा हुआ था….

वो बहुत आसानी से इमारत के पिछले हिस्से के अंधेरे में गुम हो गया….उसके इतमीनान से सॉफ ज़ाहिर हो रहा था जैसे वो पहले ही ब-खबर है कि उस इमारत के कॉंपाउंड में कुत्ते नही है….वो आहिस्ता-आहिस्ता इमारत की तरफ बढ़ता रहा….
और
फिर उस दरवाज़े तक जा पहुँचा जो किचन का पिछला दरवाज़ा था….

जेब से एक बारीक सा औज़ार निकाल कर खुफाल (लॉक) के सुराख में डाला….खुफाल हल्की सी आवाज़ के साथ खुल गया….
फिर उसने आहिस्ता-आहिस्ता दरवाज़ा खोला….
और
अंदर दाखिल हो गया….

पेन्सिल टॉर्च की बारीक रोशनी ले कर अंधेरे में चकराई….
और दूसरे दरवाज़े से बा-आसानी गुज़र गया….

चारों तरफ अंधेरे और सन्नाटे की हुक्मरानी थी….वो आगे बढ़ता रहा….
हालांकि
कुछ दरवाज़े के शीशों पर गहरी नीली और मद्धम रोशनी दिखाई देने लगी….एक कमरे में झाँकने के बाद उसने दूसरा दरवाज़ा परखा….हॅंडल घुमा कर दरवाज़ा खोलना चाहा….
लेकिन
वो बंद था….

बारीक औज़ार एक बार फिर खुफाल (लॉक) के सुराख में रेंग गया….दरवाज़ा आहिस्तगी से खोल कर वो अंदर दाखिल हुआ….गहरी नीली रोशनी फैली हुई थी….
और
सामने बिस्तर पर वो बेख़बर सो रही थी….!

इस दौरान में चेहरे पर गॅस मास्क खींच लिया था….आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढ़ता हुआ वो बिस्तर के करीब पहुँचा….
और
रब्बर ट्यूब के सिरे का रुख़ लड़की के चेहरे के करीब करते हुए सिलिंडर से गॅस बाहर करना शुरू कर दिया….साथ ही वो कलाई पर बाँधी हुई घड़ी भी देखे जा रहा था….
फिर….शायद….
30 सेक पर गॅस बंद कर लड़की को हिलाया-झूलाया….
लेकिन
वो बेसूध पड़ी रही….

दूसरे ही लम्हे में उसने झुक कर लड़की को हाथों पर उठाया और बाहर निकलता चला आया….

हर तरफ सन्नाटा ही छाया हुआ था….

किचन के दरवाज़े से निकल कर पीछे कॉंपाउंड में पहुँचा जिस की दीवार ज़्यादा उँची नही थी….

बेहोश लड़की को इस तरह दीवार पर डाल दिया कि उसका आधा धड़ दीवार के दूसरी तरफ लटक गया….दीवार को फलाँगने के बाद उसने लड़की को खींच कर कंधे पर डाला….
और इस तरह एक तरफ चल पड़ा जैसे कोई राहगीर अपने कंधे पर समान उठाए मगन-मगन चला जा रहा हो….!

करीब एक घंटे बाद लड़की को एक कमरे में होश आया….

उसे झींझोड़ कर जगाने वाला चेहरे से खौफनाक लग रहा था….

वो ख़ौफज़दा आवाज़ में चीखी….

कमरा साउंड-प्रूफ है….खौफनाक चेहरे वाले ने कहा

त….त….तुम कौन हो….? मैं कहाँ हूँ….?

तुम एक कमरे में हो….
लेकिन
ये तुम्हारी कोठी का कमरा नही है….
और
मैं हरगिज़ नही बताउन्गा कि मैं कौन हूँ….!

आख़िर इसका मतलब क्या है….? वो खुद पर खाबू पाने की कोशिश करती हुई गुर्राई

इसका मतलब है तफ़्रीक़….!
मैं यहाँ कैसे पहुँची….?

मैं उठा लाया हूँ….लापरवाही से जवाब दिया

क्यूँ….?

तुम्हारी शक्ल देखने के लिए….

मैं समझ गयी….
लेकिन उसके अलावा कोई और चारा नही था मैं क़बूल कर लेती….!

Izaafa aamdani aaj-kal farsihton ko bhi buri nahi lagti….
Ya fir….
Use koi aasaabi (goshtly) maamla samajh li jiye….

Main chaan-been kar raha hu….

Sirf ghar ke had tak….baat aage na badhne paaye….!

Kya iska taalluk shahid ke istife se ho sakta hai….

Mere bhi yahi khayal hai….aap hi ki tarah koi aur bhi yahi chahta hai ke shahid istifa wapas le le….
Lekin….
Wo choop gaya hai….!

Haa….kahin wo bhi unhi ke hatte na chad gaya ho….

Khuda jane….ab ye maalum karna hai ke usne istifa kyun diya tha….

Khuda ki panaah….koi badi saazish maalum hoti hai….rahman sahab ki bharrayi awaaz ayi

aur wo itne diler hai ke unhone c.i.b ke director-general ko dhamki di hai….!

Suno….bahut savdhaan raho….

Aap ghaliban samajh gaye honge liberty vila ki ahmiyath….
Lihaazaa
yei munasib hai ke kingston ke thane ke incharge ko hi tafteesh karne di jiye….!

Tum thik kahte ho….

Shukriya daddy….Imran ne silsila cut kar diya….!
Raat andheri thi….
Aur
wo kaale libaas mein andhere ka ek hissa maalum ho raha tha….libaas itna chust tha ke khaal se chipak kar rahe gaya tha….

Gas mask sar par mandha hua tha….
Aur
use abhi chehre par nahi chadaya gaya tha….peet par ek chota gas cylinder bhi banda hua tha….

Wo bahut asaani se imaarat ke pichle hisse ke andhere mein ghoom ho gaya….uske itminaan se saaf zaahir ho raha tha jaise wo pahle hi ba-khabar hai ke us imaarat ke compound mein kutte nahi hai….wo ahista-ahista imaarat ki taraf badhta raha….
Aur
fir us darwaaze tak jaa pahuncha jo kitchen ka pichla darwaaza tha….

Jeb se ek bareek sa auzaar nikaal kar khufal (lock) ke suraakh mein dala….khufal halki si awaaz ke saath khul gaya….
Fir
usne ahista-ahista darwaaza khola….
Aur
andar daakhil ho gaya….

Pencil torch ki bareek roshni le kar andhere mein chakrayi….
Aur
dusre darwaaze se ba-asaani guzar gaya….

Chaaron taraf andhere aur sannate ki hukmrani thi….wo aage badhta raha….
Halaanke
kuch darwaaze ke sheeshon par gehri nili aur maddham roshni dikhayi dene lagi….ek kamre mein jhaankne ke baad wo dusre darwaaza parkha….handle ghuma kar darwaaza kholna chaha….
Lekin
wo band tha….

Bareek auzaar ek baar fir khufal (lock) ke suraakh mein reng gaya….darwaaza ahistagi se khol kar wo andar daakhil hua….gehri nili roshni faili hui thi….
Aur
saamne bistar par wo bekhabar so rahi thi….!
Is dauraan mein chehre par gas mask khinch liya tha….ahista-ahista aage badhta hua wo bistar ke kareeb pahuncha….
Aur
rubber tube ke sire ka rukh ladki ke chehre ke kareeb karte hue cylinder se gas bahar karna shuru kar diya….saath hi wo kalaayi par baandhi hui ghadi bhi dekhe jaa raha tha….
Fir….shayad….
30 sec par gas band kar ladki ko hilaya-jhulaya….
Lekin
wo besoodh padee rahi….

Dusre hi lamhe mein usne jhuk kar ladki ko haathon par uthaya aur bahar nikal chala aya….

Har taraf sannata hi chaya hua tha….

Kitchen ke darwaaze se nikal kar piche compound mein pahuncha jiss ki deewar zyada unchi nahi thi….

Behosh ladki ko is tarah deewar par daal diya ke uska aadha dhad deewar ke dusri taraf latak gaya….deewar ko falaangne ke baad usne ladki ko khinch kar khaande par daala….
Aur
is tarah ek taraf chal pada jaise koi raahgir apne khaande par samaan uthaye magan-magan chala jaa raha ho….!

Kareeb ek ghante baad ladki ko ek kamre mein hosh aya….

Use jhinjhod kar jagaane wala chehre se khaufnaak lag raha tha….

Wo khaufzada awaaz mein cheekhi….

Kamra sound-proof hai….khaufnaak chehre wale ne kaha

t….t….tum kaun ho….? Main kahan hu….?

Tum ek kamre mein ho….
Lekin
ye tumhari kothi ka kamra nahi hai….
Aur
main hargiz nahi bataunga ke main kaun hu….!

Aakhir iska matlab kya hai….? Wo khud par khaabu paane ki koshish karti hui ghurrayi

iska matlab hai tafreeq….!
Main yahan kaise pahunchi….?

Main utha laya hu….laparwaahi se jawaab diya

kyun….?

Tumhari shakl dekhne ke liye….

Main samajh gayi….
Lekin
uske alawa koi aur chaara nahi tha main qabool kar leti….!





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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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Re: आधा तीतर आधा बटेर (Aadha teetar Aadha bater)

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Re: आधा तीतर आधा बटेर (Aadha teetar Aadha bater)

Post by Jemsbond » 04 Dec 2017 12:37



बकवास मत करो….सच्ची बात बताओ….

क्लिनिक में मैने इस बात का ख़ास ख़याल रखा था कि कोई मेरे चेहरे का तफ़सीलि जायेज़ा ना ले सके….
लेकिन
उस वक़्त जब मैं डॉक्टर के साथ गाड़ी में बैठ रही थी तो एक आदमी वहाँ आ गया था….
और
उसने मुझे बगौर देखा था….
और
जब मुझे पोलीस स्टेशन ले जाया गया तो वो आदमी वही आया था….
बस फिर….
मुझे क़बूल करना पड़ा….लेकिन….

हाँ मुझे मालूम है कि तुमने उसे पैदल रुखसत किया था….

और उसकी गवाही भी दिलवा दी….वो खुश हो कर बोली

तुम पोलीस स्टेशन की तरफ गयी ही क्यूँ थी….?

मेरे फरिश्तों को भी इल्म नही था कि उधर पोलीस स्टेशन है जहाँ उन लोगों ने रिपोर्ट दर्ज कराई है….!

तुम्हे कल घर से बाहर ही नही निकलना चाहिए था….

ब….बस ग़लती हो गयी….अब तुम मेरे बाप का पीछा छोड़ दो….

क्या मतलब….

वो कभी तब्खिर मेढ़े (वाषपीकरण) का मरीज़ नही रहा….इस काम की वजह से इतना नर्वस हुआ था कि बेहोश हो गया था….सच-मूच बेहोश हो गया था….!

ये तो बड़ी अच्छी बात हुई….तुम्हे बहाना मिल गया….

लेकिन वो कब देख सखी मेरे बाप को….वो मेरी गैर मौजूदगी में खुद ब खुद होश में आ गया था….
और सुनो….

उन्हे इल्म हो गया है कि मैं दूसरी गाड़ी में थी….अब वो पोलीस ऑफीसर उस सिलसिले में मुझ पर ज़िराह कर रहा था….!

सब कुछ तुम्हारी हिमाकत की बिना पर हुआ….ना तुम पोलीस स्टेशन की तरफ जाती….और ना ये सब कुछ होता….

अब मैं कोई पेशवर मुजरिम तो नही हूँ….पहली बार मुझे ऐसे हालात से दो-चार होना पड़ा है….खुदा के लिए मेरे बाप को मुत्मयीन (संतुष्ट) कर दो वो बहुत ख़ौफ़ में है….!

कोई जवाब दिए बगैर वो टीवी सेट की तरफ बढ़ गया….उसका स्विच ऑन कर के कॉर्निला की तरफ वापिस आया….

वो हैरत से उसे देखने लगी….

उधर देखो….उसने टीवी की तरफ इशारा किया….!

स्क्रीन रोशन हो गयी….किसी कमरे का मंज़र था….जिस में लगातार बहुत बड़े-बड़े चूहे उछलते-कूदते फिर रहे थे….

य….ये….ये….क्या है….? कॉर्निला हक्लाई

ये क्लोज़ दा सीक्रेट टीवी है….इस इमारत के एक कमरे का मंज़र पेश कर रहा है….

त….त….तो फिर….

तुम्हे 15 मिनिट के लिए इस कमरे में बाँध कर दिया जाएगा….

क….की….क्यूँ….नही….नही….

तुम्हारी नाक के नीचे जो ये सुर्ख उभरा हुआ तिल है ना….

हाँ….है तो….वो बौखला कर बोली

तुम इस तिल की वजह से पहचानी गयी थी….

तो इसमे मेरा क्या कसूर है….!

उन चूहों में एक ऐसा भी है….उसने टीवी की तरफ इशारा कर के कहा….जो सुर्ख तिलों पर जान देता है….उछल कर तुम्हारे मूह पर आएगा….
और
उस तिल को नोच ले जाएगा….!

नही….नही….वो ख़ौफज़दा अंदाज़ में चीखी

सज़ा तो तुम्हे मिलेगी….

आख़िर किस बात की सज़ा….मैने क्या किया है….?

तुमने लेडी डॉक्टर को वहाँ नही पहुचाया….जहाँ पहुँचाने के लिए कहा गया था….!

वहीं पहुँचाया गया था….हर्लें हाउस ही तो कहा गया था….!

किस हर्लें हाउस में….?

वही जो ग्रीटिंग रोड पर है….लड़की कपकपि आवाज़ में बोली….
और उसे मरीज़ के कमरे में पहुँचा कर फ़ौरन पलट आई थी….!
वहाँ कौन रहता है….?

मैं क्या जानू….मुझे ये नही बताया गया था….!

कोई ग़लती ज़रूर हुई है….खौफनाक चेहरे वाले ने पूर ताश्वीश (चिंता जनक) लहजे में कहा

क्या ग़लती हुई है….किससे हुई है….

तुम्हे किससे हिदायत मिली थी कि लेडी डॉक्टर को हर्लें हाउस में पहुँचा दो….!

अपने बाप से….वो बहुत ख़ौफ़ में था….उसने मुझे ये नही बताया था कि किस की हिदायत पर वो मुझसे ये काम ले रहा है….उसने कहा था कि बस है कुछ ऐसे लोग जिन का हुक्म ना मानने पर मैं कत्ल भी किया जा सकता हूँ….!

अच्छी बात है….लड़की….मैं तुम्हे माफ़ करता हूँ….जिस तरह लाई गयी हो उसी तरह पहुँचा दी जाओगी….
और
सुबह बिस्तर पर जागोगी….!

बहुत बहुत शुक्रिया….जनाब….
लेकिन
मेरे बाप को भी माफ़ कर दी जिए….रहेम की जिए उस पर….उन्हे धमकियाँ ना दी जिए….!

इस पर गौर किया जाएगा….
लेकिन एक बात गौर से सुन लो….

कहिए जनाब….मैं हर हुक्म की तामील करूँगी….!

तुम इस मुलाकात का ज़िक्र अपने बाप से भी नही करोगी….किसी से भी नही….!

लेकिन….उनको मेरी गैर मौजूदगी का पता चल गया तो….

सवाल ही पैदा नही होता….तुम मामूल के मुताबिक सुबह अपने बिस्तर पर से उठोगी….

अगर….ये बात है तो यक़ीन कीजिए के मैं किसी से भी इसका ज़िक्र नही करूँगी….!

और अब बेहोश होने के लिए तैयार हो जाओ….

म….मा….मैं समझी नही जनाब….?

तुम्हे एक इंजेक्षन दिया जाएगा….
क्यूँ कि
तुम अपने होश में तो यहाँ आई नही थी….!

जी हा….जी हाँ….जैसी आप की मर्ज़ी….!
बहुत जल्द तुम्हारे बाप की परेशानी भी दूर हो जाएगी….
लेकिन
उसका निर्भर तुम्हारे रव्वैये पर होगा….
अगर
तुम ने इस मुलाकात का ज़िक्र किसी से कर दिया तो….

हरगिज़….नही….हरगिज़ नही जनाब….!

मेरा नाम ढांप है….मैं फोन पर तुम से राबता (कॉंटॅक्ट) रखूँगा….!

ज़रूर….ज़रूर….मैं इसका भी ज़िक्र किसी से नही करूँगी….!

ख़ासी समझदार हो….!

वो कुछ ना बोली….उसे एक अलमारी से हाइपतर्मिक सरिंज निकालते देख रही थी….!

*************************************************************
Bakwaas mat karo….sachchi baat batao….

Clinic mein maine is baat ka khaas khayal rakha tha ke koi mere chehre ka tafseeli jayeza na le sake….
Lekin
us waqt jab main doctor ke saath gaadi mein baith rahi thi to ek aadmi wahan aa gaya tha….
Aur
usne mujhe bagour dekha tha….
Aur
jab mujhe police station le jaya gaya to wo aadmi wahi aya tha….
Bas fir….
Mujhe qabool karna pada….lekin….

Haa mujhe maalum hai ke tumne use paidal rukhsat kiya tha….

Aur uski gawaahi bhi dilwadi….wo khush ho kar boli

tum police station ki taraf gayi hi kyun thi….?

Mere farishton ko bhi ilm nahi tha ke udhar police station hai jahan un logon ne report darj karayi hai….!

Tumhe kal ghar se bahar hi nahi nikal chahiye tha….

B….bas ghalti ho gayi….ab tum mere baap ka picha chhod do….

Kya matlab….

Wo kabhi tabkhir medhe (vaashpikaran) ka mareez nahi raha….is kaam ki wajah se itna nervous hua tha ke behosh ho gaya tha….sach-mooch behosh ho gaya tha….!

Ye to badi achhi baat hui….tumhe bahana mil gaya….

Lekin wo kab dekh sakhi mere baap ko….wo meri gair maujoodgi mein khud ba khud hosh mein aa gaya tha….
Aur suno….
Unhe ilm ho gaya hai ke main dusri gaadi mein thi….ab wo police officer us silsile mein mujh par jiraah kar raha tha….!

Sab kuch tumhari himakhat ki bina par hua….na tum police station ki taraf jati….aur na ye sab kuch hota….

Ab main koi peshawar mujrim to nahi hu….pahli baar mujhe aise halaath se do-chaar hona pada hai….khuda ke liye mere baap ko mutmayeen (santusht) kar do wo bahut khauf mein hai….!
Koi jawaab diye bagair wo tv set ki taraf badh gaya….uska switch on kar ke kornila ki taraf wapis aya….

Wo hairat se use dekhne lagi….

Udhar dekho….usne tv ki taraf ishaara kiya….!

Screen roshan ho gayi….kisi kamre ka manzar tha….jiss mein latadaath bahut bade-bade chuhe uchalte-kudhte fir rahe the….

Y….ye….ye….kya hai….? Kornila haklayi

ye close the secrete tv hai….is imaarat ke ek kamre ka manzar pesh kar raha hai….

T….t….to fir….

Tumhe 15 minute ke liye is kamre mein band kar diya jayega….

K….ky….kyun….nahi….nahi….

Tumhari naak ke niche jo ye surkh ubhra hua til hai na….

Haa….hai to….wo boukhla kar boli

tum is til ki wajah se pehchani gayi thi….

To isme mera kya kasoor hai….!

Un chuhon mein ek aisa bhi hai….usne tv ki taraf ishaara kar ke kaha….jo surkh tilon par jaan deta hai….uchal kar tumhare muh par ayega….
Aur
us til ko noch le jayega….!

Nahi….nahi….wo khaufzada andaaz mein cheekhi

sazaa to tumhe milegi….

Akhar kiss baat ki sazaa….maine kya kiya hai….?

Tumne lady doctor ko wahan nahi pahuchaya….jahan pahunchane ke liye kaha gaya tha….!

Wahin pahunchaya gaya tha….harlem house hi to kaha gaya tha….!

Kiss harlem house mein….?

Wahi jo greeting road par hai….ladki kapkapi awaaz mein boli….
Aur
use mareez ke kamre mein pahuncha kar fauran palat ayi thi….!
Wahan kaun rehta hai….?

Main kya janu….mujhe ye nahi bataya gaya tha….!

Koi ghalthi zaroor hui hai….khaufnaak chehre wale ne pur tashveesh (chinta janak) lahje mein kaha

kya ghalthi hui hai….kisse hui hai….

Tumhe kisse hidayath mili thi ke lady doctor ko harlem house mein pahuncha do….!

Apne baap se….wo bahut khauf mein tha….usne mujhe ye nahi bataya tha ke kiss ki hidayath par wo mujhse ye kaam le raha hai….usne kaha tha ke bas hai kuch aise log jin ka hukm na maanne par main khatl bhi kiya jaa sakta hu….!

Achhi baat hai….ladki….main tumhe maaf karta hu….jiss tarah layi gayi ho usi tarah pahuncha di jaogi….
Aur
subah bistar par jaagogi….!

Bahut bahut shukriya….janab….
Lekin
mere baap ko bhi maaf kar di jiye….rahem ki jiye us par….unhe dhamkiyan na di jiye….!

Is par gour kiya jayega….
Lekin
ek baat gour se sun lo….

Kahiye janab….main har hukm ki tameel karungi….!

Tum is mulakhat ka zikr apne baap se bhi nahi karogi….kisi se bhi nahi….!

Lekin….unko meri gair maujoodgi ka pata chal gaya to….

Sawaal hi paida nahi hota….tum maamul ke mutabikh subah apne bistar par se uthogi….

Agar….ye baat hai to yaqeen ki jiye ke main kisi se bhi iska zikr nahi karungi….!

Aur ab behosh hone ke liye taiyaar ho jao….

M….ma….main samjhi nahi janab….?

Tumhe ek injection diya jayega….
Kyun ke
tum apne hosh mein to yahan ayi nahi thi….!

Jee haa….jee haa….jaisi aap ki marzi….!
Bahut jald tumhare baap ki pareshani bhi dur ho jayegi….
Lekin
uska nirbhar tumhare ravvaiye par hoga….
Agar
tum ne is mulakhaat ka zikr kisi se kar diya to….

Hargiz….nahi….hargiz nahi janab….!

Mera naam dhamp hai….main phone par tum se raabta (contact) rakhunga….!

Zaroor….zaroor….main iska bhi zikr kisi se nahi karungi….!

Khaasi samajhdar ho….!

Wo kuch na boli….use ek almaari se hypothermic syringe nikaalte dekh rahi thi….!

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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

तुफानो में साहिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

यूँ तो मिल जाता है हर कोई!

मगर आप जैसे दोस्त नसीब वालों को मिलते हैं!
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Re: आधा तीतर आधा बटेर (Aadha teetar Aadha bater)

Post by rajsharma » 04 Dec 2017 14:38

Dost lazabaaw kahani hai
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj sharma

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Re: आधा तीतर आधा बटेर (Aadha teetar Aadha bater)

Post by Ankit » 04 Dec 2017 18:50

Superb update bhai..................

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Re: आधा तीतर आधा बटेर (Aadha teetar Aadha bater)

Post by Smoothdad » 04 Dec 2017 22:39

mitr aj hi maine is novel ko padhna shuru kiya hai yakin maniye Imran bahut hi lajawab shakhs hai.......... ab mujhe apke sare novel padhne padenge

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