लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

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chusu
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by chusu » 23 Nov 2017 13:03

jhakajhak........................

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kunal
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by kunal » 23 Nov 2017 14:10

superb kahani
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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 23 Nov 2017 22:15

Dolly sharma wrote:
23 Nov 2017 11:35
nice update
chusu wrote:
23 Nov 2017 13:03
jhakajhak........................
kunal wrote:
23 Nov 2017 14:10
superb kahani
thanks all

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Ankit
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Re: लाड़ला देवर ( देवर भाभी का रोमांस)

Post by Ankit » 23 Nov 2017 22:16

इधर मेरा लॉडा उनकी गान्ड की दरार में फिट हो चुका था, जो बीच-बीच में ठुमके लगा देता…

इस चक्कर में एक बार मेरा कंट्रोल स्टेआरिंग से हट गया.. गाड़ी 30-35 की स्पीड में लहरा उठी… मेने फिरसे अपने ऊपर कंट्रोल किया और गाड़ी को संभाला…!

बीच बीच में भाभी अपने एक हाथ को अपनी जांघों के बीच लाकर अपनी मुनिया को सहला देती, और इधर-उधर होकर मेरे लौडे को अपनी गान्ड की दरार से रगड़ देती..

उनके इधर-उधर होने के मोमेंट से उनकी चुचियों की साइड मेरे बाजुओं से दब जाती, जिसके मखमली अहसास से मेरा हाल बहाल हो रहा था…

ढेढ़ घंटे की प्रेक्टिस में हम दोनो के शरीर दहकने लगे…

इससे पहले कि बात कंट्रोल से बाहर हो… मेने गाड़ी रोक दी… क्योंकि मेरा लंड फूल कर फटने की कगार तक पहुँच गया था…

मुझे लगने लगा कि मेरा पानी छूटने ही वाला है.. अगर ऐसा हो गया तो भाभी ना जाने क्या सोचेंगी मेरे बारे में…

मेने गाड़ी रोक दी… झटके की वजह से उनकी आँखें खुल गयी… और मेरे से पूछा – क्या हुआ…? गाड़ी क्यों रोक दी..?

मेने कहा – आज के लिए इतना ही काफ़ी है..

उन्होने मुस्करा कर कहा - ठीक है.. कल चौथे गियर की प्रॅक्टीस करेंगे… और वो मेरे आगे से उठ गयी…

मे फ़ौरन सीट से उठा.. और अपनी लिट्ल फिंगर दिखा कर झाड़ियों की तरफ भागा… मे जल्द से जल्द अपने लौडे को रिलीस करना चाहता था..

मेरी तेज़ी देख कर भाभी समझ गयी.. और मंद मंद मुस्कुराती रही…!

झाड़ियों के पीछे जाकर आज मुझे अपने लंड को मुठियाना ही पड़ा…, कुछ ही पलों में उसने इतनी तेज धार मारी कि वो कम से कम 5-7 फीट दूर तक चली गयी…!

जब लंड का टेन्षन रिलीस हुआ तब जाकर मुझे शांति मिली…!

यही सब एक हफ्ते तक चलता रहा… मेरा गाड़ी पर अच्छा कंट्रोल आने लगा था.. आज जब हम लौटने लगे तो भाभी ने कहा…

कल आपका लास्ट ट्रैनिंग सेशन होगा… कल आपको बॅक गियर की प्रॅक्टीस करनी है.. उसके बाद आपकी ट्रैनिंग पूरी……

अब मे घर से मैदान तक गाड़ी खुद ही चलाकर ले जाने लगा था…..!

आज गाड़ी सीखने का लास्ट दिन था, इस लास्ट सेशन में गाड़ी को रिवर्स गियर डालकर चलाने का तरीक़ा सीखना था…

मे घर से ग्राउंड तक गाड़ी को अच्छी स्पीड से चलाकर ले गया..

भाभी ने मेरी ड्राइविंग को अप्रीश्षेट करते हुए कहा…वाह देवेर्जी, आप तो एकदम मज़े हुए ड्राइवर की तरह चलाने लगे… वेल डन..

अब वो मेरे आगे नही बैठती थी लेकिन अलग अलग तरीकों से मुझे सिड्यूस करना उन्होने बंद नही किया था,

कभी समझाने के बहाने मेरी जांघों को सहला देना, तो कभी जान बूझकर मेरे लंड पर हाथ रख देना, बाद में सॉरी बोलकर जताना कि ये अंजाने में उनसे हुआ हो जैसे…

ना जाने उनके मन में क्या चल रहा था… लेकिन मेने अपने मन में ठान लिया था… कि किसी भी परिस्थिति में पहल मेरी तरफ से नही होगी… चाहे जैसे भी हो, मुझे अपने आप पर कंट्रोल बनाए रखना ही होगा..

उधर भाभी भी दीनो दिन मेरे धैर्य की परीक्षा ले रही थी…, नित नये तरीक़े अपनाकर मुझे उनके साथ पहल करने पर मजबूर करने की कोशिश में लगी थी.

आज उन्होने फिर से कपड़े चेंज किए… जो पिच्छले दो दिन से बंद कर दिए थे..

मेने पूछा.. अब क्यों चेंज कर रही हो भाभी… तो वो बोली – आज आपको नया सबक सीखना हैं, आंड आइ आम शुवर, वो आप मेरे बिना नही कर पाओगे…

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