चमत्कारी

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चमत्कारी

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चमत्कारी



Lekhak-- Anand singh

Hello friends 😆

friends i want to share some fantastic stories with you . these stories is not mine it's only collecting internet .

Are you ready?

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Re: चमत्कारी

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नागपुर के पास उम्रेड तालुका मे बाइ पास के नज़दीक मकान नंबर 4 मे रहने वाले मिस्टर. और मिसेज़. राजवंश गर्व से कहते थे ' हम तो सामान्य लोग हैं..

कोई सोच भी नही सकता था कि यह लोग किसी रहस्यमयी या अजीब चीज़ मे उलझ सकते थे.....क्यों कि वे इन बेतुकी बातों से दूर रहते थे.....


मिस्टर. आनंद राजवंश आदित्या इंडस्ट्रीस नाम की कंपनी के डाइरेक्टर थे.....जो ड्रिल बनाती थी..

आनंद राजवंश मोटे तगड़े आदमी थे और उनकी गर्दन तो जैसे थी ही नही, हालाँकि उनकी मुच्छे बहुत बड़ी थी....

उर्मिला राजवंश बेहद खूबसूरत, पढ़ी लिखी हाउस वाइफ थी...उनकी गर्दन सामान्य से दुगुनी लंबी थी...ये गर्दन उनके बहुत काम आती थी....

क्यों कि वो बगीचे की मुंडेर के पार ताक झाँक करने मे और पड़ोसियो की जासूसी करने मे अपना बहुत सा समय बिताती थी....

उनका एक छोटा सा बेटा भी था .... जिसका नाम आदित्या राजवंश था...

आनंद और उर्मिला का मानना था कि दुनिया मे आदित्या से सुंदर बच्चा हो ही नही सकता.....


उनके पास सब कुछ था, जो भी वो चाहते थे......

पर उनकी जिंदगी मे एक रहस्य भी था और उन्हे सबसे ज़्यादा डर इसी बात से लगता था कि कही वो रहस्य किसी को पता ना चल जाए....

वो ये सोच भी नही सकते थे कि अगर किसी को राजवंश परिवार के बारे मे पता चल गया, तो उनका क्या होगा...?

मेघा, उर्मिला की बहन थी लेकिन कयि सालो से दोनो एक दूसरे से नही मिली थी

सच तो ये था कि उर्मिला सबको यही बताती थी कि उनकी कोई बहन ही नही थी...

क्यों कि उसकी बहन और उसका निकम्मा पति उन लोगो से उतने ही अलग थे..जितना होना संभव था...

ये सोच कर ही आनंद और उर्मिला के होश उड़ जाते थे कि अगर मेघा और उसका पति उनकी गली मे आ गये तो उनके पड़ोसी क्या कहेंगे....

वो जानते थे कि उनका एक छोटा सा बेटा भी था पर उन्होने उसे कभी नही देखा था

यह बच्चा भी एक बड़ा कारण था, जिस वजह से वो मेघा के परिवार से दूर रहते थे....वो नही चाहते थे कि आदित्य इस तरह के बच्चे से मिले जुले....

जब आनंद और उर्मिला उस बोझिल मंगलवार को सुबह सो कर उठे, जहाँ से हमारी कहानी शुरू होती है...

उस दिन बादलो से भरे आसमान को देख कर कोई भी ये नही सोच सकता था कि पूरे देश मे अजीबो ग़रीब और रहस्यमयी घटनाए जल्दी ही होने वाली हैं........
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Nagpur ke pass Umred Taluka me bye pass ke najdeek makan number 4 me rahne vale Mr. aur Mrs. Rajvansh garv se kahte the ' hum to samanya log hain..

Koi soch bhi nahi sakta tha ki yah log kisi rahasyamayi ya ajeeb cheez me ulajh sakte the.....kyon ki ve in betuki bato se dur rahte the.....


Mr. Anand Rajvansh Aditya Industries naam ki company ke director the.....jo drill banati thi..

Anand Rajvansh mote tagde admi the aur unki gardan to jaise thi hi nahi, halanki unki muchhe bahut badi thi....

Urmila Rajvansh behad khubsurat, padhi likhi house wife thi...unki gardan samanya se duguni lambi thi...ye gardan unke bahut kaam aati thi....

kyon ki vo bagiche ki munder ke paar taak jhaank karne me aur padosiyo ki jasusi karne me apna bahut sa samay bitati thi....

Unka ek chhota sa beta bhi tha .... jiska naam Aditya Rajvansh tha...

Anand aur Urmila ka maanna tha ki duniya me aditya se sundar bachcha ho hi nahi sakta.....


Unke pass sab kuch tha, jo bhi vo chahte the......

Par unki jindagi me ek rahasya bhi tha aur unhe sabse jyada darr issi baat se lagta tha ki kahi vo rahasya kisi ko pata na chal jaye....

vo ye soch bhi nahi sakte the ki agar kisi ko Rajvansh pariwar ke bare me pata chal gaya, to unka kya hoga...?

Megha, Urmila ki bahan thi lekin kayi saalo se dono ek dusre se nahi mili thi

Sach to ye tha ki urmila sabko yahi batati thi ki unki koi bahan hi nahi thi...

Kyon ki uski bahan aur uska nikamma pati un logo se utne hi alag the..jitna hona sambhav tha...

Ye soch kar hi anand aur urmila ke hosh ud jate the ki agar megha aur uska pati unki gali me aa gaye to unke padosi kya kahenge....

Vo jante the ki unka ek chhota sa beta bhi tha par unhone use kabhi nahi dekha tha

Yeh Bachcha bhi ek bada kaaran tha, jis vajah se vo megha ke pariwar se door rahte the....vo nahi chahte the ki aditya is tarah ke bachche se mile jule....

Jab anand aur urmila us bojhil mangalwar ko subah so kar uthe, jahan se hamari kahani shuru hoti hai...

Us din baadlo se bhare aasmaan ko dekh kar koi bhi ye nahi soch sakta tha ki poore desh me ajibo garib aur rahasyamayi ghatnaye jaldi hi hone wali hain........

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चमत्कारी-अपडेट*2

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अपडेट*2

आनंद सुबह अपने ऑफीस जाने के लिए रेडी होने लगे ...उर्मिला अपना घरेलू काम करते हुए इधर उधर शरारत कर रहे आदित्य को भी बीच बीच मे खिलाती जा रही थी.......

उनमे से किसी को यह नही दिखा कि एक बड़ा सा भूरा उल्लू उनकी खिड़की के पास से पंख फडफडाते हुए गुजर गया....

कुछ देर बाद ही आनंद ने अपना ब्रीफकेस उठाया, उर्मिला के गाल सहलाए और आदित्या को चूमने की कोशिश की लेकिन वो ऐसा नही कर पाए क्यों कि वो उस समय गुस्से मे अपना नाश्ता छोटे छोटे हाथो से दीवार पर फेक रहा था तो आनंद अपने ऑफीस के लिए निकल गये.....

ऑफीस का दिन ठीक ठाक ही गुजर रहा था. लंच के लिए आनंद ने बेकरी मे जाके कुछ ब्रेड्स खाए....

वाहा से वापिस लौटने टाइम उन्हे कुछ लोगो की काना फूसी करने की आवाज़े सुनाई देने लगी...

उन्होने कुछ देर रुक कर वही अपने कान उनकी बात सुनने मे लगा दिए....

वो लोग किसी ऋषि की बात कर रहे थे.....ऋषि का नाम सुनकर आनंद कुछ बेचैन से हो गये....और अपने ऑफीस के कॅबिन मे आके बैठ गये....

उन्हे आज से दो साल पहले की घटना याद आने लगी थी...

आनंद की चिंता का कारण वो बात करने वाले नही बल्कि जिसका नाम लेकर वो बात कर रहे थे वो नाम था..

ऋषि, मेघा और अजीत का बेटा था...जो दरअसल आज से दो साल पहले खो गया था मेघा और अजीत ने बहुत कोशिश की उसको ढुड़ने की लेकिन उसका कोई पता नही चला

वैसे मेघा और अजीत के ऋषि के अलावा भी एक लड़का संजय और लड़की का नाम श्री है ...ये दोनो ही ऋषि से बड़े हैं....

इन्ही यादो मे आनंद खोए हुए थे की अचानक उनको अपने बेटे आदित्य का ख्याल आया और उन्होने तुरंत घर कॉल लगा दिया

उर्मिला--हेलो...हाँ..जी..आज इतना जल्दी कैसे याद आ गयी...

आनंद--क्यो मैं दिन मे कॉल नही कर सकता क्या...

उर्मिला--मैने इसलिए पुछा क्यों कि आप दिन मे बिज़ी रहते हो...कभी कॉल नही करते बस

आनंद--कुछ नही आज सुबह उस शैतान आदित्य की किस नही ले पाया ना तो उसकी याद आ रही थी...अच्च्छा क्या कर रहा है मेरा बेटा...

उर्मिला--और क्या करेगा...पूरा डिंडहम करता फिरता है....और मुझे परेशान करता है...

आनंद--हाहहाहा...मेरे बेटे जैसा दूसरा कोई नही है....

उर्मिला--हाँ वो तो है...मेरा मन तो उसमे ही लगा रहता है दिन भर...

आनंद--चलो ठीक है..मैं जल्दी आता हू.. और फिर शाम को घूमने चलते हैं..

उर्मिला--सच....

आनंद--मूच...ओके बाइ

उर्मिला--जल्दी आना...बाइ

आनंद के मन को अब शांति मिली की आदित्य घर मे सही सलामत है...

शाम को वो जल्दी घर लौट आया..उर्मिला तो सज धजकर पहले ही तैयार बैठी थी..

आनंद को देखते ही उसका चेहरा खिल उठा

उर्मिला--आप आ गये...लाइए बॅग मैं रख देती हू...आप कार बाहर ही रहने दो...

आनंद--बाहर ही क्यो रहने दूं..

उर्मिला--घूमने जाना है ना...तो जल्दी चलिए...मैं आदि को लेकर आती हूँ...

आनंद--अरे भाग्यवान...थोड़ी देर आराम तो कर लेने दो....कपड़े चेंज कर लूँ..फ्रेश हो जाने दो...एक कप चाय पिला दो..फिर चलते हैं...

उर्मिला--नही नही कपड़े तो ठीक ही पहने हैं...चाय हम बाहर ही पी लेंगे...और फ्रेश वापिस लौटने के बाद होना...हाँ

आनंद--अजीब पागल बीवी है..यार

उर्मिला--क्या कहा...

आनंद--नही..नही..तुम्हे कुछ नही कहा. चलो फिर ...

दोनो आदित्या को लेकर कार से घूमने निकल गये....

उर्मिला ने ढेर सारी शॉपिंग कर डाली.....

आनंद (मन मे)--इसके साथ अगर महीने मे एक दो बार और शॉपिंग करने आ गया तो मुझे कटोरा लेके भीख माँगना पड़ेगा...

किसी तरह उर्मिला की शॉपिंग होने के बाद वो एक पार्क मे कुछ देर जाके बैठ गये..

वो बैठे ही थे की आदित्या शरारत करते हुए पार्क मे बैठे एक शक्स की गोद मे जाके चढ़ गया...

उसका शक्स का चेहरा देख कर आनंद के माथे पर चिंता की लकीरे उभर आई...

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Update*2

Anand subah apne office jane ke liye ready hone lage ...Urmila apna gharelu kaam karte huye idhar udhar shararat kar rahe Aditya ko bhi beech beech me khilati ja rahi thi.......

Unme se kisi ko yeh nahi dikha ki ek bada sa bhura ullu unki khidki ke pass se pankh phadphadate huye gujar gaya....

Kuch der baad hi anand ne apna briefcase uthaya, urmila ke gaal sahlaye aur aditya ko chumne ki koshish ki lekin vo aisa nahi kar paye kyon ki vo us samay gusse me apna nasta chhote chhote hatho se deewar par phek raha tha to anand apne office ke liye nikal gaye.....

office ka din theek thak hi gujar raha tha. lunch ke liye anand ne bakery me jake kuch breads khaye....

vaha se vapis loutne time unhe kuch logo ki kana fusi karne ki awaze sunayi dene lagi...

unhone kuch der ruk kar vahi apne kaan unki baat sunne me laga diye....

vo log kisi Rishi ki baat kar rahe the.....Rishi ka naam sunkar anand kuch bechain se ho gaye....aur apne office ke cabin me aake baith gaye....

Unhe aaj se do saal pahle ki ghatna yaad aane lagi thi...

anand ki chinta ka kaaran vo baat karne wale nahi balki jiska naam lekar vo baat kar rahe the vo naam tha..

Rishi, Megha aur Ajit ka Beta tha...jo darasal aaj se do saal pahle kho gaya tha megha aur ajit ne bahut koshish ki usko dhudne ki lekin uska koi pata nahi chala

Vaise megha aur ajit ke rishi ke alawa bhi ek ladka sanjay aur ladki ka naam shree hai ...ye dono hi rishi se bade hain....

inhi yado me anand khoye huye the ki achanak unko aone bete aditya ka khyal aaya aur unhone turant ghar call laga diya

urmila--hello...ha..ji..aaj itna jaldi kaise yaad aa gayi...

anand--kyo mai din me call nahi kar sakta kya...

urmila--maine isliye puchha kyon ki aap din me busy rahte ho...kabhi call nahi karte bas

anand--kuch nahi aaj subah us shaitan aditya ki kiss nahi le paya na to uski yaad aa rahi thi...achchha kya kar raha hai mera beta...

urmila--aur kya karega...poora dinudham karta firta hai....aur mujhe pareshan karta hai...

anand--hahahaha...mere bete jaisa dusra koi nahi hai....

urmila--ha vo to hai...mera mann to usme hi laga rahta hai din bhar...

anand--chalo theek hai..mai jaldi aata hu.. aur phir sham ko ghumne chalte hain..

urmila--sach....

anand--much...ok bye

urmila--jaldi aana...bye

anand ke mann ko ab shanti mili ki aditya ghar me sahi salamat hai...

shaam ko vo jaldi ghar lout aaya..urmila to saj dhajkar pahle hi taiyar baithi thi..

anand ko dekhte hi uska chehra khil utha

urmila--aap aa gaye...laiye bag mai rakh deti hu...aap car bahar hi rahne do...

anand--bahar hi kyo rahne du..

urmila--ghumne jana hai na...to jaldi chaliye...mai adi ko lekar aati hu...

anand--arey bhagyawan...thodi der aram to kar lene do....kapde change kar lu..fresh ho jane do...ek cup chaay pila do..phir chalte hain...

urmila--nahi nahi kapde to theek hi pahne hain...chaay ham bahar hi pi lenge...aur fresh vapis loutne ke baad hona...ha

anand--ajeeb pagal biwi hai..yaar

urmila--kya kaha...

anand--nahi..nahi..tumhe kuch nahi kaha. chalo phir ...

dono aditya ko lekar car se ghumne nikal gaye....

urmila ne dher sari shoping kar dali.....

anand (mann me)--iske sath agar mahine me ek do baar aur shoping karne aa gaya to mujhe katora leke bhikh maangna padega...

kisi tarah urmila ki shoping hone ke baad vo ek park me kuch der jake baith gaye..

vo baithe hi the ki aditya shararat karte huye park me baithe ek shaks kigod me jake chad gaya...

uska shaks ka chehra dekh kar anand ke mathe par chinta ki lakire ubhar aayi...

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चमत्कारी-अपडेट*3

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अपडेट*3

आदित्य को उस आदमी की गोद मे देख कर आनंद चौंक गया…क्यों कि वो शख्स और कोई नही अजीत ही था, मेघा का पति….


अजीत भी आनंद को देख कर थोड़ा हैरान रह गया…काफ़ी समय के बाद जो उसने देखा था आज आनंद को..

अजीत—भाई साहब आप……यहाँ…शूकर है भगवान का कि आज आप हमे मिल ही गये….कितना नही खोजा मैने और मेघा ने आप दोनो को…वो आज भी अपनी बहन को बहुत याद करती है…

अजीत जहाँ दोनो को देख कर खुश हो रहा था वही आनंद मंन ही मंन अपनी किस्मत को कोस रहा था कि वो यहाँ आया ही क्यो….उसे उर्मिला की बात माननी ही नही चाहिए थी……

आनंद (बुझे मंन से)—हमने भी तुम लोगो को बहुत पता किया लेकिन कुछ खबर मालूम नही हुई

आनंद ने आदि को जल्दी से अजीत की गोद से उठा लिया....जैसे अजीत की गोद मे काँटे लगे हो और जिनके चुभने का डर हो कि ये काँटे कही आदि को ना लग जाए…..

उर्मिला भी तब तक उन दोनो के पास आ गयी…वो भी अजीत को देख हैरान हुई….

उर्मिला—अजीत जी आप….कहाँ थे अब तक..और मेघा कैसी है…..बच्चे कैसे हैं….?

अजीत—सब ठीक हैं भाभी जी….मेघा भी ठीक हैं…..दोनो बच्चे भी ठीक हैं…और ये आदि ही है ना…..आप लोग तो आदि के होते ही जैसे हम लोगो से नाता ही तोड़ लिया….

उर्मिला और मेघा वैसे तो हैं सग़ी बहने ही…मगर की कभी नही बनती थी बचपन से ही….एक तीर थी तो दूसरी तलवार…..

आनंद (खीझते हुए)—अच्च्छा अजीत अब हम चलते हैं…फिर मिलेंगे….

अजीत—थोड़ी देर रुकिये ना भाई साहब….अभी तो मैने आदि को खिलाया ही नही…….

आनंद—फिर खिला लेना आदि को अभी हम जल्दी मे हैं…..

दोनो ने अपना पता और नंबर. एक्सचेंज किया और फिर मिलने का बोल वहाँ से निकल गये....आनंद अपना अड्रेस और नंबर. देना तो नही चाहता था अजीत को लेकिन मजबूरी मे देना पड़ा……

उसके मंन मे अपने बेटे को खोने का डर सताने लगा था…..
घर पहुच कर फ्रेश होने के बाद दोनो आदि को सुला कर खुद भी सोने लगे…लेकिन आनंद की आँखो से नीद कोसो दूर थी….वो अपने अतीत मे खोता चला गया……



UPDATE*3

Aditya ko us admi ki god me dekh kar anand chounk gaya…kyon ki vo shakhs aur koi nahi ajeet hi tha, megha ka pati….


Ajeet bhi anand ko dekh kar thoda hairan rah gaya…kafi samay ke baad jo usne dekha tha aaj anand ko..

Ajeet—bhai sahab aap……yahan…shukar hai bhagwan ka ki aaj aap hame mil hi gaye….kitna nahi khoja maine aur megha ne aap dono ko…vo aaj bhi apni bahan ko bahut yaad karti hai…

Ajeet jahan dono ko dekh kar khush ho raha tha vahi anand mann hi mann apni kismat ko kos raha tha ki vo yaha aaya hi kyo….use urmila ki baat maanni hi nahi chahiye thi……

Anand (bujhe mann se)—hamne bhi tum logo ko bahut pata kiya lekin kuch khabar malum nahi huyi

Anand ne adi ko jaldi se ajeet ki god se utha liya....jaise ajeet ki god me kaante lage ho aur jinke chubhne ka darr ho ki ye kaante kahi adi ko na lag jaye…..

Urmila bhi tab tak un dono ke pass aa gayi…vo bhi ajeet ko dekh hairan huyi….

Urmila—ajeet ji aap….kaha the ab tak..aur megha kaisi hai…..bachche kaise hain….?

Ajeet—sab theek hain bhabhi ji….megha bhi theek hain…..dono bachche bhi theek hain…aur ye adi hi hai na…..aap log to adi ke hote hi jaise ham logo se naata hi tod liya….

Urmila aur megha vaise to hain sagi bahne hi…magar ki kabhi nahi banti thi bachpan se hi….ek teer thi to dusri talwar…..

Anand (khijhte huye)—achchha ajeet ab hum chalte hain…phir milenge….

Ajeet—thodi der rukiye na bhai sahab….abhi to maine adi ko khilaya hi nahi…….

Anand—phir khila lena adi ko abhi hum jaldi me hain…..

Dono ne apna pata aur no. Exchange kiya aur phir milne ka bol vaha se nikal gaye....anand apna address aur no. Dena to nahi chahta tha ajeet ko lekin majburi me dena pada……

Uske mann me apne bete ko khone ka darr satane laga tha…..

Ghar pahuch kar fresh hone ke baad dono adi ko sula kar khud bhi sone lage…lekin anand ki ankho se need koso dur thi….vo apni ateet me khota chala gaya……


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चमत्कारी-अपडेट*4

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अपडेट*4


घर पहुच कर फ्रेश होने के बाद दोनो आदि को सुला कर खुद भी सोने लगे…लेकिन आनंद की आँखो से नीद कोसो दूर थी….वो अपने अतीत मे खोता चला गया……


अब आगे……………


आनंद और उर्मिला की शादी को 8 साल से उपर हो चुका था……आनंद की ड्रिल बनाने की छोटी सी फॅक्टरी थी.. कुल मिला के अगर कहा जाए तो धन दौलत की कोई कमी नही थी……


मगर फिर भी दोनो के जीवन मे एक दुख हमेशा रहता था…..और वो दुख था औलाद ना होने का… शादी के इतने साल के बाद भी उनकी कोई औलाद नही थी……


ऐसा नही था कि उर्मिला माँ नही बन सकती थी या आनंद मे कोई खास कमी थी……उर्मिला तीन बार प्रेग्नेंट भी हुई लेकिन हर बार उसका गर्भपात हो जाता था……


बड़े से बड़े डॉक्टर्स को दिखाने के बाद भी कंडीशन वही की वही थी…..उर्मिला की दवाइयाँ चालू थी…

डॉक्टर्स के मुताबिक उर्मिला की बच्चेदानी कुछ कमजोर थी जिसकी वजह से वो बच्चे का वजन संभाल ना सकने के कारण उसका गर्भपात हो रहा है….


इसी दौरान उर्मिला की एक साल छोटी बहन मेघा की उसी शहर मे उसकी भी शादी हुई थी उनके दो बच्चे एक लड़का और एक लड़की हो चुके थे……

आनंद और अजीत दोनो चचेरे भाई थे…लेकिन दोनो के स्वाभाव मे बहुत अंतर था….अजीत एक नंबर. का शराबी था वही आनंद इसके विपरीत पान गुटखा तक नही ख़ाता था….


अजीत की भी कपड़े की दुकान थी…जिससे उनका खर्चा चलता था……खैर जब मेघा को दो बच्चे हो गये और जब भी वो उर्मिला से मिलने आती तो उन बच्चो को देख कर उर्मिला का मन भी माँ बनने के लिए मचल उठता…….


और फिर अपनी किस्मत पर वो रोने लगती….ऐसे ही दिन गुजरने लगे उनके….इस बीच दोनो मंदिर मस्जिद जाकर भी औलाद के लिए अपना दामन फैलाते रहे….उर्मिला का इलाज़ भी चलता रहा……


आख़िर एक दिन उन दोनो की फरियाद एक बार फिर उपर वाले ने सुन ली…..उर्मिला फिर माँ बनने वाली थी….कहीं इस बार फिर गर्भ ना गिर जाए इस डर से उर्मिला अपना अधिकांश समय बिस्तर पर ही लेटी रहती…..


घर के काम काज के लिए आनंद ने नौकरानी रख ली थी जो घर और उर्मिला दोनो का ध्यान रखती…वही मेघा भी तीसरी बार माँ बनने वाली थी……


इतने परहेज के बाद आख़िर उर्मिला का गर्भ इस बार बच गया और वो घड़ी भी करीब आ गयी थी….मेघा ने उर्मिला से एक महीने पहले ही बेटे को जनम दिया……


लड़के का नाम ऋषि रखा गया…..मेघा की डेलिवरी के एक महीने बाद उर्मिला की डेलिवरी हुई…लेकिन इस बार रिज़ल्ट मे बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ……


डॉक्टर ने आनंद को बुला कर सारी बात बताई…..आनंद बेहद दुखी हो गया….उसे अपने से ज़्यादा उर्मिला के दुख की चिंता थी जो फिलहाल इस समय बेहोश थी…….


आनंद डॉक्टर से कुछ बात करके निकल गया हॉस्पिटल से……उसने खिड़की से मेघा के घर मे घुस कर एक महीने के नन्हे से ऋषि को जो बेचारा सो रहा था को उठाकर चुपचाप वहाँ से निकल गया…..


और ऋषि को अपने मरे हुए बेटे की जगह लिटा कर उस बच्चे का अंतिम संस्कार करने चला गया….

उर्मिला को जब होश आया तब तो वो अपने बच्चे (ऋषि) को देख कर बहुत खुश हुई…….कुछ देर मे आनंद भी हॉस्पिटल लौट आया……


उर्मिला प्रेग्नेंट की वजह से घर मे ही रहती थी और मेघा भी डेलिवरी के बाद मिलने नही आई थी जिससे उर्मिला उस बच्चे को नही पहचान पाई…..


आनंद ने पूरे हॉस्पिटल मे मिठाई बाटी खुशी जाहिर करने के लिए….दूसरे दिन डिसचार्ज करवा के आनंद ने वो जगह छोड़ कर उम्रेड आ गया…..जहाँ एक घर खरीद लिया था आनन फानन मे उसने…


इधर मेघा को जब अपना बच्चा नही मिला तो उसने रो रो कर पूरा घर सर पे उठा लिया…..

आसपास पता करने पर भी जब कुछ नही मालूम हुआ था तो उन्होने पोलीस फिर की गुमशुदगी की……मगर कुछ मालूम नही हुआ…..


इधर आनंद के घर उस बच्चे के कदम पड़ते ही उसको खुश खबरी मिली की एक बड़ी कंपनी ने ड्रिल बनाने का करोड़ो का ऑर्डर दिया है……


आनंद के मंन मे भी उसी पल से उस बच्चे के लिए अपनापन आ गया…..दो दिन बाद बच्चे का नामकरण करने के लिए मंदिर के पुजारी को बुलाया गया…..


बच्चे की जनम कुंडली बनाते समय वो बहुत हैरान हुए….उनके चेहरे पर आते जाते भाव को देख कर उर्मिला चिंता करते हुए बोली…..


उर्मिला—पंडित जी सब ठीक तो है ना…..कोई चिंता की बात तो नही है….


पुजारी—नही बेटी….ये बालक बड़ा ही भाग्यशाली और चमत्कारी है…..इसके अंदर अलौकिक तेज़ है जो इसके चेहरे से झलक रहा है….इसमे बहुत सी अद्भुत शक्तियाँ हैं जो अपने समय पर उसे प्राप्त होगी और हर संकट मे उसकी रक्षा भी करेगी…..


पुजारी की बात सुनकर उर्मिला और आनंद दोनो खुश हो गये…..

आनंद—पंडित जी हमारे बेटे का नाम क्या होगा….?


पुजारी (कुछ देर सोच कर)—वैसे तो इसका नाम कुछ और ही है मगर इसमे जो सूरज के समान तेज़ है तो इसका नाम आदित्य रखना ठीक होगा……


आनंद ने पुजारी को ढेर सारी दक्षिणा देकर खुश कर दिया और वो भी खुशी खुशी आशीर्वाद देते हुए चला गया…..


उस दिन से आदित्य उर्मिला और आनंद दोनो की जान बन गया…..इन दो सालो मे आनंद की कंपनी को जमकर मुनाफ़ा हुआ…..एक छोटी सी कंपनी अब बड़ी होकर आदित्य इंडस्ट्रीस बन गयी थी….


लेकिन आनंद को हमेशा ये डर सताते रहता कि कही आदि की सच्चाई किसी को मालूम ना हो जाए….इस डर से वो हमेशा आदित्य के प्रति चौकन्ना रहता था….मेघा और उसके पति से अपना रिश्ता तोड़ लिया कि कही वो आदित्य को पहचान ना ले……


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UPDATE*4


Ajeet—thodi der rukiye na bhai sahab….abhi to maine adi ko khilaya hi nahi…….


Anand—phir khila lena adi ko abhi hum jaldi me hain…..


Dono ne apna pata aur no. Exchange kiya aur phir milne ka bol vaha se nikal gaye....anand apna address aur no. Dena to nahi chahta tha ajeet ko lekin majburi me dena pada……


Uske mann me apne bete ko khone ka darr satane laga tha…..


Ghar pahuch kar fresh hone ke baad dono adi ko sula kar khud bhi sone lage…lekin anand ki ankho se need koso dur thi….vo apni ateet me khota chala gaya……


Ab Aage……………


Anand aur urmila ki shadi ko 8 saal se upar ho chuka tha……anand ki drill banane ki chhoti si factory thi.. kul mila ke agar kaha jaye to dhan daulat ki koi kami nahi thi……


Magar phir bhi dono ke jeevan me ek dukh hamesha rahta tha…..aur vo dukh tha aulad na hone ka… shadi ke itne saal ke baad bhi unki koi aulad nahi thi……


Aisa nahi tha ki urmila maa nahi ban sakti thi ya anand me koi khas kami thi……urmila teen beer pregnant bhi huyi lekin har baar uska garbhpat ho jata tha……


Bade se bade doctors ko dikhane ke baad bhi condition vahi ki vahi thi…..urmila ki dawaiya chalu thi…

Doctors ke mutabik urmila ki bachchedani kuch kamjor thi jiski vajah se vo bachche ka vajan sambhal na sakne ke karan uska garbhpat ho raha hai….


Isi dauran urmila ki ek saal chhoti bahan megha ki usi shahar me uski bhi shadi huyi thi unke do bachche ek ladka aur ek ladki ho chuke the……

Anand aur ajeet dono chachere bhai the…lekin dono ke swabhav me bahut antar tha….ajeet ek no. ka sharabi tha vahi anand iske viprit pan gutkha tak nahi khata tha….


Ajeet ki bhi kapde ki dukan thi…jisse unka kharcha chalta tha……khair jab megha ko do bachche ho gaye aur jab bhi vo urmila se milne aati to un bachcho ko dekh kar urmila ka mann bhi maa banne ke liye machal uthata…….


Aur phir apni kismat par vo rone lagti….aise hi din gujarne lage unke….is beech dono mandir masjid jakar bhi aulad ke liye apna daaman phailate rahe….urmila ka ilaz bhi chalta raha……


Akhir ek din un dono ki fariyad ek bar phir upar wale ne sun li…..urmila phir maa banne wali thi….kahi is bar phir garbh na gir jaye is darr se urmila apna adhikansh samay bistar par hi leti rahti…..


Ghar ke kaam kaaj ke liye anand ne naukrani rakh li thi jo ghar aur urmila dono ka dhyan rakhti…vahi megha bhi tisri bar maa banne wali thi……


Itne parhej ke baad akhir urmila ka garbh is bar bach gaya aur vo ghadi bhi karib aa gayi thi….megha ne urmila se ek mahine pahle hi bete ko janam diya……


Ladke ka naam Rishi rakha gaya…..megha ki delivery ke ek mahine baad urmila ki delivery huyi…lekin is bar result me bachcha mara hua paida hua……


Doctor ne anand ko bula kar sari baat batayi…..anand behad dukhi ho gaya….use apne se jyada urmila ke dukh ki chinta thi jo philhal is samay behosh thi…….


Anand ne doctor se kuch baat karke nikal gaya hospital se……usne khidki se megha ke ghar me ghus kar ek mahine ke nanhe se Rishi ko jo bechara so raha tha ko uthakar chupchap vaha se nikal gaya…..


Aur Rishi ko apne mare huye bete ki jagah lita kar us bachche ka antim sanskar karne chala gaya….

Urmila ko jab hosh aaya tab to vo apne bachche (Rishi) ko dekh kar bahut khush huyi…….kuch der me anand bhi hospital lout aaya……


Urmila pregnant ki vajah se ghar me hi rahti thi aur megha bhi delivery ke bad milne nahi aayi thi jisse urmila us bachche ko nahi pahchan payi…..


Anand ne poore hospital me mithayi baati khushi jahir karne ke liye….dusre din discharge karwa ke anand ne vo jagah chhod kar umred aa gaya…..jaha ek ghar kharid liya tha aanan faanan me usne…


Idhar megha ko jab apna bachcha nahi mila to usne ro ro kar poora ghar sar pe utha liya…..

aaspass pata karne par bhi jab kuch nahi malum hua tha to unhone police fir ki gumshudgi ki……magar kuch malum nahi hua…..


Idhar anand ke ghar us bachche ke kadam padte hi usko khush khabri mili ki ek badi company ne drill banane ka karodo ka order diya hai……


Anand ke mann me bhi usi pal se us bachche ke liye apnapan aa gaya…..do din baad bachche ka namkaran karne ke liye mandir ke pujari ko bulaya gaya…..


Bachche ki janam kundli banate samay wo bahut hairan huye….unke chehre par aate jate bhav ko dekh kar urmila chinta karte huye boli…..


Urmila—Pandit ji sab theek to hai na…..koi chinta ki baat to nahi hai….


Pujari—Nahi Beti….Ye balak bada hi bhagyashali aur chamatkari hai…..iske andar aloukik tez hai jo iske chehre se jhalak raha hai….isme bahut si adbhut shaktiyan hain jo apne samay par use prapt hogi aur har sankat me uski raksha bhi karegi…..


Pujari ki baat sunkar urmila aur anand dono khush ho gaye…..

Anand—Pandit ji hamare bete ka naam kya hoga….?


Pujari (kuch der soch kar)—vaise to iska naam kuch aur hi hai magar isme jo suraj ke saman tez hai to iska naam Aditya rakhna theek hoga……


Anand ne pujari ko dher sari dakshina dekar khush kar diya aur vo bhi khushi khushi ashirwad dete huye chala gaya…..


Us din se aditya urmila aur anand dono ki jaan ban gaya…..in do saalo me anand ki company ko jamkar munafa hua…..ek chhoti si company ab badi hokar Aditya Industries Ban gayi thi….


Lekin anand ko hamesha ye darr satate rahta ki kahi adi ki sachchayi kisi ko malum na ho jaye….is darr se vo hamesha aditya ke prati choukanna rahta tha….megha aur uske pati se apna rishta tod liya ki kahi vo aditya ko pahchan na le……







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