Incest मर्द का बच्चा

Post Reply

Mrg
Rookie
Posts: 100
Joined: 13 Aug 2018 14:31

Re: Incest मर्द का बच्चा

Post by Mrg »

great start, update please.

josef
Gold Member
Posts: 5029
Joined: 22 Dec 2017 15:27

Re: Incest मर्द का बच्चा

Post by josef »

लल्लू- वो सुंदर लड़की तुम हो और मुझे सिर्फ़ तुम से शादी करनी है. बोलो मुझ से ब्याह करोगी. सिर्फ़ हा या ना बोलना.

काकी को कुछ समझ ही नही आ रहा था की वो अब क्या करे.

काकी- में तेरी ऐसे ही काकी हूँ. तू मुझे वैसे ही प्यार करता है और में भी बहुत प्यार करती हूँ तुझसे. शादी की क्या ज़रूरत है.

लल्लू- काकी भाषण नही. सिर्फ़ हा या ना…


काकी- अपनी काकी से ब्याह करेगा. फिर तेरे काका का क्या होगा ये बता.
लल्लू- तो क्या हो गया. काका तो वैसे भी अब बाहर ही रहते है. तो बाहर काका तेरा सैया और घर में मैं तेरा सैया.

लल्लू काकी का हाथ पकड़ कर पूजा घर में जहा मा गौरी का पीडी था वहाँ बैठ जाता है और वहाँ रखे सिंदूर उठा कर काकी के माँग में भर देता है.
काकी के कुछ भी समझ नही आया.
काकी आँखे बंद किए वहाँ बैठी रही.

लल्लू- काकी आज से तू मेरी काकी भी है और लुगाई भी.

काकी आँख खोली थी लल्लू के हाथो की उंगलियो में अब भी सिंदूर लगा था.
काकी के आँखो में आंशु आ गये. समझ ही नही आ रहा था की अब वो क्या रिक्ट करे.

थोड़ी देर वहाँ बैठी रहने के बाद उठ कर अपने कमरे में चली गई.

लल्लू- कही कोई गड़बड़ तो नही कर दिया. काकी कुछ बोल नही रही है.
लल्लू काकी के रूम में देखने चल दिया.

काकी आईने के सामने खड़ी हो कर माँग में चमकते सिंदूर को एक टक देखे जा रही थी.

लल्लू केमरे में आ कर देखा तो काकी आईने के सामने खड़ी है.

लल्लू जा कर काकी के पास सर झुका कर खड़ा हो गया.
लल्लू- काकी अगर तुम्हे लगता है की मैने कुछ ग़लत कर दिया है तो मुझे माफ़ कर देना.

काकी लल्लू को एक टक देख रही थी. उसे पता था लल्लू उसे बहुत प्यार करता है लेकिन अब जो ये रिश्ता बन गया है काकी उस रिस्ते को ले कर आसमंजश में थी की अब आगे वो क्या करे.
कौन सा रिश्ता किस से निभाए.

एक मन तो इस ब्याह से बहुत खुश था. अंदर ही अंदर छोटी छोटी फुलझड़िया फुट रही थी लेकिन एक संस्कारी मन कह रहा था की ये जो हुआ वो ग़लत हुआ है.

काफ़ी सोच बिचार के बाद आख़िर काकी ने कुछ फ़ैसला कर लिया.

काकी बाहर आ कर देखी तो लल्लू दरवाजे से बाहर सर झुकाए खड़ा था.
काकी लल्लू को गुस्से से देख रही थी.

लल्लू सर उठा कर देखा तो देखता है की काकी बहुत गुस्से में उसे देख रही है.

लल्लू की आँखो से झार झार कर के आंशु निकल कर गिरने लगा.

काकी आगे बढ़ कर लल्लू का हाथ पकड़ कर उसे कमरे में खिच ली और खुद बाहर निकल कर केमरे का डरबाजा बंद कर दी.


काकी लल्लू को कमरे में बंद कर खुद रसोई घर में चली गई.
वहाँ कुछ देर खतर पटर करने के बाद एक हाथ में ग्लास लेकर आती हुई दिखी.

कमरे में आ कर देखा तो लल्लू अभी भी सर झुकाए खड़ा वैसे ही रो रहा था.

काकी लल्लू को एक धक्का दिया. लल्लू बेड पर जा कर गिर गया.
काकी चलती हुई ग्लास ले कर बेड पर आ गई.

काकी- क्यू ब्याह करते समय तो बड़ा मर्द बनता था. अब मर्द का बच्चा है तो सामना कर अपनी लुगाई का.

लल्लू- काकी पता नही मर्द का बच्चा हूँ ला गधे का क्यू की पापा तो हुमेशा गधा गधा ही करते रहते है. लेकिन में आप का बच्चा तो ज़रूर हूँ.

काकी- मुआअ अब तू मेरा बच्चा नही मेरा ख़सम.. है.
आ और अपनी लुगाई का सामना कर.

लल्लू- काकी क्यू डरा रही हो बच्चे को.

काकी- मुआ तू अब बच्चा नही है. आ बड़ा कह रहा था ना की तेरे पास डंडा है तो आ अब मार आ कर मुझे.
लल्लू- काकी वो तो में मज़ाक कर रहा था.

काकी- अब में तेरी काकी नही लुगाई हूँ. तो अब अकेले में मुझे ऋतु ही कहा करना. जब सब साथ हो तब काकी केहना.

काकी- ये ले दूध पी. ब्याह तो कर लिया मेरे से अब आगे क्या करेगा. अब तो वहाँ ब्याह में भी नही जा सकती. अपने नये नये पति देव को छोड़ कर केहा जाऊ.

काकी दूध का ग्लास लल्लू को पकड़ती बोली.

लल्लू दूध का ग्लास ले कर मूह से लगा लिया.
काकी- सारा मत पी जाना अपने लुगाई के लिए भी थोड़ा छोड़ देना.

josef
Gold Member
Posts: 5029
Joined: 22 Dec 2017 15:27

Re: Incest मर्द का बच्चा

Post by josef »

लल्लू आधा पी कर बाकी काकी को पकड़ा दिया.

काकी- मुआ ब्याह करना तो बड़ा आया. झट से सिंदूर ले कर मेरे माँग में भर दिया. अब दूध भी अपने हाथ से पिला दे.

लल्लू- रात में कौन सा मैने पिलाया था अंधेरे में. खुद ही पाइप निकाल कर पी ली थी ना तो अभी भी पी ले.

काकी सुन कर शरमा गई. ( मुआ अंधेरे में भी पहचान गया.

लल्लू ग्लास ले कर ऋतु के मूह से लगा दिया.
ऋतु काकी दूध पी कर ग्लास खाली कर दी.

लल्लू काकी का हाथ पकड़ कर बेड पर खिच लिया.
काकी खिचती हुई बेड पर जा कर लल्लू पर लुढ़क गई.

काकी की साँसे लल्लू के चेहरे पर पड़ रहा था.
दोनो की धडकने दोगुनी रफ़्तार से चल रहा था की इस से आगे क्या होगा.

लल्लू काकी के चेहरे को देखते हुए उस में खोता जा रहा था. लल्लू दोनो हाथ से काकी के चेहरे को थम रखा था और हल्के हल्के सहला रहा था.

ऋतु लल्लू के सीने पर हाथ रखे उसके छाती के घुंघराले छोटे छोटे बालो को सहला रही थी.

काकी बड़े प्यार से लल्लू को देख रही थी.
लल्लू काकी का चेहरा पकड़े उसे अपने चेहरे पर झुकने लगा और अपना मूह भी हल्के से उठा लिया.
दोनो अपनी अपनी जीभ निकाल कर उन्माद में सूखे होंठो को हल्के से भीगा कर एक दूसरे के होंठो पर टूट पड़े.


Post Reply