पोतेबाबा--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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rajaarkey
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Re: पोतेबाबा--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

Post by rajaarkey »

बहुत ही शानदार अपडेट है दोस्त

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Jemsbond
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Re: पोतेबाबा--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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समुद्र के किनारे रेत ही रेत नजर आ रही थीं। वीरान तट था। दूर नारियल के पेड़ खड़े हवा के संग गोते लगा रहे थे। वहां के जंगल जैसी जगह की शुरुआत का आभास हो रहा था।

सबसे पहले मोमो जिन्न कांच की मछली की खुली पूंछ (मुंह) से बाहर निकला और कूदकर रेत भरी जमीन पर आ पहुंचा। बरबस ही उसका हाथ पेट पर पहुंच गया।

“भूख लग रही है। जब मेरे में इंसानी इच्छाएं नहीं थीं तो मैं काम में कितना व्यस्त रहता था। खाने-पीने की जरूरत ही नहीं रहती थी ।” मोमो जिन्न आसपास देखता बड़बड़ा उठा।

उसके बाद एक-एक करके सब बाहर निकल आए।

उसके बाद पनडुब्बी का मुंह बंद हुआ और वो वापस पानी में प्रवेश करके गुम हो गई।

मोमो जिन्न लक्ष्मण और सपन के पास जाकर कह उठा। “कितना अच्छा मौसम है यहां।”

“होगा।” सपन चड्ढा ने कटू स्वर में कहा।

यहां पर खाने को जलेबी मिल जाती तो कितना अच्छा रहता।” मोमो जिन्न ने धीमे स्वर में कहा।

सपन चड्ढा ने चिढ़कर कहा।

तुम्हें हर वक्त खाने की पड़ीं रहती है।”

धीरे बोल यार। जथूरा के सेवक सुन लेंगे।” मोमो जिन्न घबराकर बोला।

अब क्या करना है?” लक्ष्मण दास ने पूछा।

हम सोबरा की जमीन की तरफ चलेंगे।” मोमो जिन्न ने कहा।

“चलेंगे?

और क्या?”

लेकिन तुम तो हमें पलों में कहीं भी पहुंचा देते हो, जहां हमें जाना होता है।” लक्ष्मण दास ने कहा।

ऐसा करना अब ठीक नहीं ।”

क्यों?”

हम जथूरा की जमीन पर आ पहुंचे हैं।” मोमो जिन्न ने गम्भीर स्वर में कहा—“यहां मैं अपनी ताकतें इस्तेमाल करूंगा तो उसी पल जथूरा के सेवकों को स्क्रीन पर, मेरी हरकतें नजर आने लगेंगी। वो चैक करेंगे कि मैं किधर जा रहा हूं तो उन्हें पता चल जाएगा कि मैं सोबरा की जमीन की तरफ जा रहा हूं तो बाधा डालकर मुझे रोक देंगे। उसके बाद मेरे मस्तिष्क को अपनी इच्छा के अनुसार चलाएंगे और मुझे अपने पास बुला लेंगे। तब मशीन द्वारा मेरा निरीक्षण करेंगे कि मेरे में गड़बड़ कहां है और फौरन ही मशीन से एक पर्चा बाहर आ जाएगा, जिस पर लिखा होगा कि मेरे में इंसानी इच्छाएं आ गई हैं।”

“तुम्हारा मतलब कि पैदल चलने के अलावा हमारे पास कोई और रास्ता नहीं?” ।

“हां। हमें खामोशी से पैदल ही चलना होगा। तब वो सोचेंगे कि मैं उनके पास आ रहा हूं। इस तरह रास्ता कट जाएगा।”
“ठीक है जैसा तुम ठीक समझो।” ।

और ये बाकी लोग?” सपन चड्ढा ने मोमो जिन्न से पूछा।

“हमें अपनी चिंता करनी चाहिए। मेरा काम इन लोगों को जथूरा की जमीन पर लाना था। वो ला दिया ।” मोमो जिन्न बोला।

जाने से पहले इन्हें तो कुछ कहेंगे ही।”

वो मैं संभाल लूंगा।” मोमो जिन्न ने कहा और पलटकर सबसे बोला—“तुम लोग यहीं रुको। मैं लक्ष्मण और सपन को उन पेड़ों के पीछे ले जाऊं। ये कहते हैं कि पेट में गड़बड़ हो रही है।”

“तुम साथ में क्यों जाईला बाप। पेट में गड़बड़ तो इनके होईला ।”

“ये अकेलें जाने से डर रहे हैं।” मोमो जिन्न ने कहा और उन्हें लेकर दूर नजर आ रहे पेड़ों की तरफ चल दिया।

“वहां सोबरा कहीं हमें डंडे मारकर भगा तो नहीं देगा?” सपन चड्ढा ने कहा।

मेरे साथ वो अच्छा सलूक करेगा। क्योंकि उसे मुफ्त में जिन्न मिल रहा है। अब तुम दोनों बोलो।”

“क्या?” “जथूरा महान है।”

जथूरा महान है।” दोनों कह उठे।

वो सच में महान है।” मोमो जिन्न कह उठा“उसकी महानता का कोई अंत नहीं।”

सपन चड्ढा और लक्ष्मण दास की नजरें मिलीं।

“पागल है साला। जथूरा के गाने गा रहा हैं और सोबरा के पास जाकर बचना चाहता है।” सपन चड्ढा बोला। ।

“चुप कर। इसके साथ लगा रहने में ही हमारा भला है। हम इस पूरी जगह से अंजान हैं।”

बांकेलाल राठौर रुस्तम राव के पास आकर कह उठा।

छोरे, यो मोमो जिन्न म्हारे को गड़बड़ों लागे हो।”

क्यों बाप?”
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दिल से दिल बड़ी मुश्किल से मिलते हैं!

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Jemsbond
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Re: पोतेबाबा--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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हर वक्तो इन दोनों के साथ ही चिपको हो। ईब देख, पेट में दर्दो उन दोनों के हौवो, और खुदो साथ चल दयो ।”

“आपुन को क्या पता होएला बाप कि भीतरी लफड़ा क्या होईला।”

“गड़बड़ी तो हौवे ही कुछो ।” बांकेलाल राठौर का हाथ मूंछ पर जा पहुंचा।

देवराज चौहान की नजरें हर तरफ घूम रही थीं। परंतु दूर-दूर तक सुनसानी थी। कोई भी नहीं दिख रहा था। तभी मोना चौधरी पास आकर बोलीं । “तुम्हें कुछ अजीब नहीं लग रहा देवराज चौहान?”

कैसा अजीब?” देवराज चौहान ने मोना चौधरी को देखा।

यही कि हमें यहां लाकर पटक दिया और यहां कोई भी नहीं है। हमें ये भी नहीं पता कि हमें कहां जाना है।”

मोमो जिन्न हमारे साथ है।” मोना चौधरी की निगाह मोमो जिन्न की तरफ उठी जो लक्ष्मण-सपन के साथ पेड़ों की तरफ जा रहा था।

फिर भी जथूरा के लोगों को यहां अवश्य होना चाहिए था।” मोना चौधरी ने कहा।

“इतना ही बहुत है कि पूर्वजन्म तक पहुंचने का सफर आसानी से कट गया।” देवराज चौहान ने कहा।

हम अपनी इच्छा से पूर्वजन्म में नहीं आए, बल्कि हमें घेरकर पूर्वजन्म में पहुंचाया गया है।”

देवराज चौहान ने मोना चौधरी को देखा। नगीना भी पास आ पहुंची थी।

पहले हम सबको कालचक्र ने उस वीरान टापू पर पहुंचाया। फिर हमें वहां के अजीब हालातों में फंसाया गया। उसके बाद मजबूरन हमें पनडुब्बी में आना पड़ा और फिर हम यहां पहुंच गए।” मोना चौधरी ने कहा।

“ये ठीक कहती है।” नगीना कह उठी—“जथूरा हमें पूर्वजन्म में लाना चाहता था।” ।

“परंतु वो तो हमें पूर्वजन्म में आने से रोकना चाहता था।” देवराज चौहान बोला।

अवश्य ऐसा था।” नगीना बोली-“लेकिन मुझे लगता है कि बाद में उसने अपना इरादा बदल दिया था।”

देवराज चौहान के चेहरे पर सोच के भाव उभरे। तभी महाजन पास आता कह उठा।। “अब हम क्या करें—किंधर जाना है हमें?"

देवराज चौहान की निगाह कमला रानी और मखानी की तरफ उठी। वो सबसे हटकर रेत में अलग बैठे हुए थे। फिर उसने मोमो जिन्न को देखा। परंतु वो नजर नहीं आया। लक्ष्मण-सपन के साथ पेड़ों के पीछे पहुंचकर वो नजरों से गुम हो गया था। पारसनाथ भी करीब आ गया था। ।

“यहां पर किसी का न होना हमें परेशान कर रहा है।” पारसनाथ बोला।

“शायद वे लोग आ रहे हो।” देवराज चौहान ने हर तरफ नजरें घुमाईं।

“उन्हें आना होता तो वे अब तक आ चुके होते ।” मोना चौधरी ने गम्भीर स्वर में कहा।

मैं भी यहीं कहने वाली थी ।” नगीना कह उठी।

देखते हैं। मोमो जिन्न को वापस आ लेने दो।” देवराज चौहान ने सिर हिलाकर कहा।

बांकेलाल राठौर और रुस्तम राव कमला रानी और मखानी के पास पहुंचे।

का बात हौवे। जब से सफरो शुरु हौवो, तंम दोनों चुपो हौवे?” कमला रानी और मखानी ने उन्हें देखा, परंतु खामोश रहे।
कुछो तो बोल्लो हो ।” बांकेलाल राठौर ने पुनः कहा।

वे फिर भी चुप रहे।
सांप सुंघेला इन्हें बाप।”

म्हारे को अजगरो सुंघो लागे हो।”

दोनों उसके पास से हट गए।
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Re: पोतेबाबा--देवराज चौहान और मोना चौधरी सीरिज़

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“शौहरी।” मखानी धीमें स्वर में बोला।

बोल।”

“जब से हमने सफर शुरू किया पनडुब्बी का, तब से तुमने हमें चुप रहने को क्यों कहा?" *

“मुझे गड़बड़ का अंदेशा हो रहा है।” शौहरी की फुसफुसाहट कानों में पड़ी।

“कैसी गड़बड़?”

“मोमो जिन्न की तरफ से मुझे परेशानी आ रही है। उसकी तरफ से संकेत ठीक नहीं मिल रहें। जो भी जथूरा के हक में काम करता है, एक ही काम पर होने की वजह से, हमें संकेत मिलते रहते हैं कि काम ठीक चल रहा है। परंतु मोमो जिन्न की तरफ से मिलने वाले संकेत बीच-बीच में टूटते जा रहे हैं।”

“क्या वो जथुरा के खिलाफ चल रहा है?”

लगता तो ऐसा ही है। तभी लक्ष्मण और सपन ने तुम दोनों पर हमला किया। जान ले ली तुम दोनों की। तुम्हें नए शरीर में आना पड़ा।” ।

ये बात तो है। तू कहे तो मैं मोमो जिन्न से बात करूं।”

“मोमो जिन्न् तेरे हाथ के नीचे नहीं आने वाला। वो ताकतवर है। परंतु लगता है जैसे कि नई गड़बड़ हो गई हैं।”

नई गड़बड़? वो कैसे?”

“अब मुझे मोमो जिन्न की तरफ से कोई संकेत नहीं मिल रहे।”

इसका क्या मतलब हुआ?”

“वो यहां से काफी दूर चला गया लगता है।”

वो तो उन दोनों के साथ पेड़ों की तरफ गया है। मखानी ने उस तरफ देखा।

“मेरे खयाल में मोमो जिन्न उन दोनों के साथ वहां से भी दूर चला गया है।” शौहरी की फुसफुसाहट कानों में पड़ी।

“ये तो बुरा हुआ। मैं लक्ष्मण और सपन को सबक सिखाना चाहता था।” मखानी बोला।

शौहरी की तरफ से कोई आवाज नहीं आई।

“तुम चुप क्यों हो गए?”

संकेतों को चैक कर रहा था। परंतु कोई फायदा नहीं। मोमो जिन्न की तरफ से कोई संकेत नहीं है।”

तो अब हम क्या करें?”

कुछ देर बाद बताऊंगा।” मखानी ने कमला रानी को देखा, वो उसे ही देख रही थी।

क्या बात हुई शौहरी से।” मखानी ने सब बता दिया।

“मुझे तो लगता है कि हम नई मुसीबत में पहुंच गए हैं।” कमला रानी गहरी सांस लेकर कह उठी।

वो कैसे?” ।

हम् पूर्वजन्म में आ पहुंचे हैं। इन सब लोगों का पूर्वजन्म। भौरी ने बताया कि हम अपनी दुनिया से दूर निकल आए हैं।”
ये जगह कहां पर है?”

मुझे क्या मालूम?” कमला रानी ने आस-पास नजरें दौड़ाईं।

भौरी से पूछा।”

“जब भी भौरी से बात करती हूँ तो व्यस्त होने को कह देती है। जबसे हम जथूरा की जमीन पर पहुंचे हैं, वो बहुत व्यस्त हो गई

। “छोड़ इन बातों को।” मखानी मुस्कराया—“वैसे ये जगह अच्छी
लगती है।”

“अभी देखी कहां है ये जगह। समुद्र और वो दूर पेड़ ही देखे

तू साथ है तो मुझे हर जगह अच्छी लगेगी।” मखानी मुस्करा पड़ा।

मुस्करा मत ।” कमला रानी ने मुंह बनाया।

क्यों?

जब भी तू मुस्कराकर मेरे से बात करता है तो उसके बाद चुम्मी मांगता है।”

“तेरे को पहले ही पता चल गया।”

क्या?"

“मैं तो चुम्मी मांगने वाला था।” कमला रानी ने मखानी को घूरा।

मखानी दाँत फाड़कर कह उठा।
सिर्फ एक ।”

नहीं।” कमला रानी ने इनकार में सिर हिलाया।

एक बार ।”

एक बार भी नहीं मैं...।” तभी मखानी ने झपट्टा मारा और कमला रानी की चुम्मी ले
ली ।।
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