Incest चक्रव्यूह

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Incest चक्रव्यूह

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चक्रव्यूह


स्टोरी स्टार्ट करने से पहले छ्होटा सा इंट्रोडक्षन मैं कॅरेक्टर्स का,

विक्रम – माइ फादर

मंजू – माइ मदर

अभिमन्यु 'अभी' – मे

नेहा – माइ सिस

सुनील – माइ फ्रेंड

प्रेम – सुनील’स फादर

ममता – सुनील’स मॉम

शीतल – सुनील’स 1स्ट सिस्टर

ईशा – सुनील’स 2न्ड सिस
(पर्सनल डीटेल्स/ फिगर एट्सेटरा बाद में, अगर ज़रूरत पड़ी तो)

बाकी के लोगो का परिचय स्टोरी के बीच मे ही मिल जाएगा.
चक्रव्यूह ....शहनाज की बेलगाम ख्वाहिशें....उसकी गली में जाना छोड़ दिया

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Re: चक्रव्यूह

Post by 007 »

ये स्टोरी है अभिमन्यु उर्फ अभी नाम के एक लड़के की जो एक मध्यम दर्जे के एक शहर मे रहता है फिलहाल 18 साल का है और 12त के एग्ज़ॅम्स दिए है. आगे की स्टोरी कभी अभी की तो कभी 3र्ड पर्सन की ज़ुबानी चलेगी

सुनील से मेरी दोस्ती दो साल पहले हुई थी जब उसने 10त के बाद मेरे स्कूल मे अड्मिशन लिया था. इस दौरान हमारी दोस्ती बहुत गहरी हो गयी. हम आपस मे हर तरह की बाते शेर करते थे, लड़कियो की, सेक्स की और अपनी फॅंटसीस भी. मैं एक मिड्ल क्लास फॅमिली से हूँ जबकि वो एक अप्पर क्लास फॅमिली से. उसके पापा क हमारी सिटी मे एक बड़ा 3स्तर होटेल है और एक प्लाइवुड फॅक्टरी भी जबकि मेरे पापा गूव्ट एंप्लायी हैं. पढ़ाई मे हम दोनो ही टॉपर तो नही पर अच्छे स्टूडेंट्स थे.

12त का लास्ट एग्ज़ॅम देकर हम स्कूल से साथ ही निकले. सुनील ने मुझसे कहा, “यार कल मेरी बेहन के बर्तडे पर घर मे पार्टी है, तूने ज़रूर आना है”

मैं थोड़ा झिझका क्योकि बहुत अच्छी दोस्ती के बावजूद मे उसके बंगलो मे आज तक गया नही था, एक दो बार कहीं जाना था तो उसे घर के बाहर से ही पिक कर लिया था, मैने कोई बहाना बनाना चाहा पर वो ना माना.

अगले दिन शाम को बढ़िया से तैयार होके और एक सुंदर सा गिफ्ट लेकर मैं सुनील के बंगलो पर पहुचा, आज पहली बार उसके घर के भीतर गया था. घर बहुत बड़ा और सुंदर था, घर के इंटीरियर्स से पूरी रहीसी झलक रही थी. सुनील ने मुझे अपने पेरेंट्स से मिलवाया बस उसी पल से मेरी पूरी जिंदगी बदल गयी.
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Re: चक्रव्यूह

Post by 007 »

जैसा की एक्सपेक्टेड था उसके पापा टिपिकल बिज़्नेसमॅन लुक मे थे, 3 पीसी सूट पहना हुआ, थोड़े बल्की, सिन्सियर आवाज़ ओवरॉल रोआबदार पर्सनॅलिटी

पर ख़ास उसकी मा थी, बेइंतहा ब्यूटिफुल. शायद ही उनसे खूबसूरत हसीना कभी मेने देखी हो. शी वाज़ लुकिंग डॅम क्यूट आंड अडॉरेबल, मैं तो बस खो ही गया था उसमे. सुनील ने अपनी खूबसूरत बहनो से भी मिलवाया लेकिन मैं तो वहीं अटक सा गया था सो उस वक़्त वहाँ मौजूद उसकी बहनो या उनकी फ्रेंड्स वगेरह को इग्नोर करते हुए मैं बस बार बार उसकी मॉम ममता को ही ताड़ रहा था.

वो उनकी लगभग 5.5’ हाइट की केसर मिले दूध सी गोरी स्लिम बॉडी, गान्ड तक लहराते खुले स्ट्रेट सिल्की बाल, करीने से आइ लाइनर लगी हुई गहरी आँखें, ब्राइट कलर की लिपस्टिक मे डूबे रसीले होंठ, उफ़फ्फ़ स्पार्कल ब्लॅक कलर के बॅकसाइड से डीपकट गाउन मे कहर ढा रही थी वो. मैं बस धड़कते दिल से ममता मटकती गान्ड बालो की आड़ से झाँकति उसकी पीठ और उसकी ठोस चुचियो के नॉर्मल से कहीं ज़्यादा उठाव को ही देख रहा था. किसी भी आंगल से वो 27 – 28 साल से अधिक की नही लग रही थी (आक्चुयल एज मे बी 38-40).

एक दो बार उसने भी भी मुझे ताड़ते हुए देख लिया, कहते हैं ना हर औरत मे एक सिक्स्त सेंस होती है उपर से मैं तो बस दीदे फाड़ कर उसी को घूर रहा था. जब एक दो बार हमारी नज़रे मिली तो उसने एक स्माइल पास करी, कुछ देर बाद मेरे करीब से गुज़रते हुए मुझसे पूछा, “अरे तुमने कुछ लिया या नही” क्यूकी सुनील अरेंज्मेंट्स एट्सेटरा मे बिज़ी था मेने मुस्करा के जवाब दिया कि “यॅ ई हॅव टेकन एनफ”. लगभग 3 घंटे वो पार्टी डॅन्स वगेरह चला फिर डिन्नर के बाद सब विदा हुए.

मैं भी एक ऑटो लेकर अपने घर आ गया, रातभर बस ममता के सपने आते रहे बल्कि यू कहु कि रात भर उसके ख्यालो मे सो ही ना सका.

अब एग्ज़ॅम्स ख़तम हो चुके थे कुछ ख़ास करने को था नही सो लेट उठा फिर तैयार होकर अभी नाश्ता ही कर रहा था कि मेरा मोबाइल बजा. देखा तो सुनील की कॉल थी.

मेने कॉल पिक की ‘हाँ बोल भाई, सुबह सुबह कैसे याद किया’

सुनील -यार आज तू क्या कर रहा है

मे- कुछ ख़ास नही, बोल.

सुनील – तू एक काम कर मेरे घर आजा, आज लंच साथ मही करेंगे.

मैं जो पहले उसके घर ना जाने को बहाने मारता था, तुरंत तैयार हो गया. बोला, ठीक है यार घंटे भर मे पहुचता हूँ. और थोड़ी देर मे उसके घर के लिए निकल पड़ा.
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Re: चक्रव्यूह

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जैसे ही मैं सुनील के बंगलो के गेट पर पहुचा, शीतल और ईशा बाहर निकल रही थी, उन्होने भी मुझे पहचान लिया. हाई हेलो के बाद पता चला वो अपनी फ्रेंड्स के साथ मूवी जा रही हैं, तभी एक कार मे उनकी फ्रेंड्स आ गयी और वो उनके साथ निकल गयी. मै आगे जाके जैसे ही उनके घर मे एंटर हुआ सामने मेरी ड्रीम क्वीन खड़ी थी. मुझे देख बोली, ‘हाई अभी , आओ अंदर आओ. सुनील अपने रूम मे है , मैं बुलाती हूँ.’

‘सुनील बेटा, अभी आया है’ शी स्पोक लाउड्ली टुवर्ड्स सुनील रूम. उस समय वो शर्ट और प्लाज़ो पहने हुए थी. उसकी तनी हुई चुचियों से मेरी नज़र ही नही हट रही थी. ‘प्रेम अंकल कहाँ है’?’ मेने उससे बात करने की कोशिश की.

‘वो तो फॅक्टरी गये हैं, रात तक ही लौटेंगे’ जवाब मिला. “क्या लोगे कोल्ड ड्रिंक ओर कॉफी”

इससे पहले मैं कुछ जवाब देता. “दो कॉफी मेरे रूम मे ही दे देना मॉम और मॉम ये आज लंच भी यहीं करेगा” पीछे से आते हुए सुनील बोला.

मेने फॉर्मली मना किया पर ममता बोली ‘ नही अभी तुम यहीं लंच कर के जाओगे आज वैसे भी बस मैं और सुनील हैं घर पर. हमे भी कंपनी मिल जाएगी’ फिर मुझे लेके सुनील अपने रूम मे ले गया.

सुनील – आबे आ यार तुझे एक मस्त चीज़ दिखाऊ

मे- क्या है

सुनील- ‘देख कल रात एक सेक्स स्टोरीस की साइट राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम मिली मुझे.’ उसके रूम मे उसका अपना पीसी था वित इंटरनेट कनेक्षन.

सुनील – देख क्या मस्त स्टोरीस हैं राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर

मे वो सब देख के – वाउ यार ये तो मस्त हैं भाई.

इतने मे ममता ने कॉफी के लिए आवाज़ लगाई तो सुनील कॉफी लेने चला गया और लाकर टेबल पर रख दी.

मैं कॉफी पीते हुए, ‘सुनील एक बात कहूँ यार तेरी मॉम बहुत अच्छी हैं, मैने इनके जैसी खूबसूरत और केरिंग औरत आज तक नही देखी’(दिल तो कर रहा था सेक्सी बोलू पर…)

ये सुनकर सुनील खुश होता हुआ बोला, हाँ वो तो है पर मेरी मॉम इतनी जल्दी सबसे नही बोलती और मेरे दोस्तो मे तो शायद तुम पहले हो जिसे खुद मॉम ने आग्रह कर के खाने के लिए कहा है.


इस बीच सुनील पीसी पर राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर ओपन सेक्स स्टोरी देखने लगा इट वाज़ ऑन मॉम सन इन्सेस्ट रिलेशन्स. मेरे कमीने दिमाग़ मे अचानक एक प्लान आया.

मे- क्या ये स्टोरीस सच होती हैं.

सुनील- मे बी

मे- तुझे क्या लगता है

सुनील- लगता तो है कि सही ही होंगी

मे- {मन मे आगे बढ़ने की सोचते हुए}- एक बात बोलू, अगर तेरी मॉम जैसी मेरी मॉम होती तो पक्का मे ट्राइ ज़रूर करता.

कुछ पल सन्नाटा.. फिर मैं बोला – डोन्ट माइंड यार, क्या तुझे वो सेक्सीयेस्ट लेडी नही लगती

सुनील ने मुझे घूरा फिर बोला – धीरे बोल यार, मॉम ना सुन ले, सच बताऊ, मैं भी कई बार उनके बारे मे सोच के मूठ मार चुका हूँ. लेकिन बस सोचा ही है, आज तक उनके नंगे बूब्स तक नही देखे.

सुनकर मैं मुस्करा उठा तभी डोर पे नॉक हुआ, ममता कुछ स्नेक्स लेकर आई थी, सुनील दरवाजे से ही लेके आ गया और वो वापिस किचन मे चली गयी. मैने मन मे सोचा कि आज मौका अच्छा है मुझे आज ही आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए.

मे- सुनील एक बात सच बता ये क्या तू वाकई, अपनी मॉम के साथ रीलेशन बनाना चाहता है ?

सुनील- क्या ये हो सकता है

मे- एक काम कर तू कुछ देर हमे अकेला छोड़ दे, मैं उन्हे लाइन पे लाने की कोशिश करता हूँ.

सुनील- लेकिन जब तू उसे चोदेगा तो मैं सब देखूँगा ताकि मैं भी उसे चोद सकु.

मे- लेकिन तेरे सामने तो वो मुझे शायद हाथ भी ना रखने दे. देख आज तेरे पापा और बहने भी नही हैं घर पे तो वक़्त बर्बाद ना कर, कोई भहना बनाकर थोड़ा खिसक ले.

उसने कुछ सोचा फिर निकल लिया, मेने मैंन डोर की आवाज़ सुनी, अब मैं और ममता अकेले थे.
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Re: चक्रव्यूह

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