जब मेरी आँखें खुलीं तो मैंने अपने आपको एक ऐसी जगह पर पाया जो मेरे लिए निहायत ही अजनबी थी। मैं एक आलीशान कमरे में एक आलीशान बेड पर पड़ा हुआ था। मेरे जिस्म में जो कपड़े थे वो अब नहीं थे बल्कि उन कपड़ों की जगह दूसरे कपड़े थे। ये सब देख कर मैं आश्चर्यचकित रह गया। मुझे समझ में नहीं आया कि मैं एकदम से यहाँ कैसे आ गया? तभी मुझे ख़याल आया कि मुझे एक रहस्यमयी शख़्स ने बेहोश किया था। इस बात के याद आते ही मेरे अंदर घबराहट उभर आई। मैं सोचने लगा कि वो रहस्यमयी शख़्स कौन था और मैं यहाँ कैसे पहुंचा? मुझे एकदम से ख़याल आया कि कहीं मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा? मैंने अपनी आँखों को मल मल कर बार बार चारों तरफ देखा किन्तु सच्चाई यही थी कि मैं एक आलीशान जगह पर था। मेरे ज़हन में सवालों की जैसे बाढ़ सी आ गई। उस आलीशान कमरे में मेरे अलावा दूसरा कोई नहीं था। कमरे का दरवाज़ा बंद था। ये देख कर मैं एक झटके से उठा और बेड से नीचे उतर आया। नीचे उतरते ही मैं बुरी तरह चौंका, क्योंकि एकदम से मुझे याद आया कि बेहोश होने से पहले मैं अपनी मोटर साइकिल से गिर गया था और मेरा एक घुटना छिल गया था जिसकी वजह से मुझसे चला नहीं जा रहा था किन्तु इस वक़्त मुझे ज़रा भी दर्द नहीं हो रहा था। मैंने फ़ौरन ही झुक कर अपने पैंट को पकड़ कर ऊपर सरकाया तो देखा मेरे घुटने पर दवा के साथ साथ पट्टी लगी हुई थी। इसका मतलब यहाँ लाने के बाद मेरे ज़ख्म पर मरहम पट्टी की गई थी किन्तु सवाल ये था कि ऐसा किसने किया होगा, क्या उस रहस्यमयी शख़्स ने? आख़िर वो मुझसे चाहता क्या है और यहाँ क्यों ले कर आया है मुझे?
मैं ये सब सोच ही रहा था कि तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और एक ऐसा शख़्स कमरे में दाखिल हुआ जिसके समूचे जिस्म पर सफ़ेद लिबास था, यहाँ तक कि उसका चेहरा भी सफ़ेद रंग के नक़ाब में ढंका हुआ था। नक़ाब के अंदर से सिर्फ उसकी आँखें ही झलक रहीं थी। मैं उस सफ़ेदपोश को देख कर एक बार फिर से बुरी तरह हैरान रह गया था। आख़िर ये चक्कर क्या था कि एक बार काले कपड़े वाला मिलता है और अब ये सफ़ेद कपड़े में एक शख़्स आ गया है?
"अब तुम कौन हो भाई?" मैंने उस शख़्स को घूरते हुए पूछा तो उसने अपनी सामान्य आवाज़ में कहा____"एक ऐसा शख़्स जिसके बारे में जानना तुम्हारे लिए ज़रूरी नहीं है।" उस सफ़ेदपोश ने अजीब भाव से कहा____"तुम्हें इसी वक़्त मेरे साथ चलना होगा।"
"लेकिन कहां?" मैं उसकी बात सुन कर उलझ सा गया।
"उन्हीं के पास।" सफ़ेद कपड़े वाले ने कहा____"जो तुम्हें यहाँ पर ले कर आए हैं? क्या तुम जानना नहीं चाहोगे कि तुम्हें यहाँ किस लिए लाया गया है?"
सफ़ेदपोश ने एकदम सही कहा था। मैं यही तो जानना चाहता था कि मुझे यहाँ किस लिए लाया गया है? मैंने उस सफ़ेदपोश की बात पर हां में सिर हिलाया और उसकी तरफ बढ़ चला। मुझे अपनी तरफ आता देख वो शख़्स वापस पलटा और दरवाज़े के बाहर निकल गया।
उस सफ़ेदपोश के पीछे पीछे चलते हुए मैं कुछ ही देर में एक ऐसी जगह पहुंचा जहां पर बल्ब की रोशनी बहुत ही कम थी। हर तरफ मौत की तरह सन्नाटा फैला हुआ था। मैं हर तरफ देखता हुआ आया था किन्तु कहीं पर भी दूसरा आदमी नज़र नहीं आया था। पता नहीं ये कौन सी जगह थी लेकिन इतना ज़रूर था कि ये जगह थी बड़ी कमाल की और बेहद हसीन भी।
वो एक लम्बा चौड़ा हाल था जिसमें नीम अँधेरा था और उसी नीम अँधेरे में हाल के दूसरे छोर पर वो रहस्यमयी शख़्स एक बड़ी सी कुर्सी पर बैठा हुआ था जो मुझे पहले मिला था और जिसने मुझे बेहोश किया था। इस वक़्त भी उसका समूचा जिस्म काले कपड़ों में ढंका हुआ था और चेहरे पर काला नक़ाब था।
"हमारा ख़याल है कि तुम्हें यहाँ तक चल कर आने में ज़रा भी तक़लीफ नहीं हुई होगी।" उस रहस्यमयी शख़्स की बहुत ही अजीब सी आवाज़ हाल में गूंजी____"और हां, हमें इस बात के लिए माफ़ करना कि हम तुम्हें इस तरह से यहाँ ले कर आए।"
"मुझे ये बताओ कि तुम हो कौन?" मैं अंदर से डरा हुआ तो था किन्तु फिर भी हिम्मत कर के पूछ ही बैठा था____"और ये भी बताओ कि मुझे यहाँ क्यों ले कर आए हो? तुम शायद जानते नहीं हो कि मैं किसका बेटा हूं? अगर जानते तो मुझे इस तरह यहाँ लाने की हिमाक़त नहीं करते।"
"हमें तुम्हारे बारे में सब कुछ पता है लड़के।" उस रहस्यमयी शख़्स ने कहा____"संक्षेप में तुम ये समझ लो कि हमसे किसी के भी बारे में कुछ भी छुपा नहीं है। तुम्हारी जानकारी के लिए हम तुम्हें ये भी बता देते हैं कि हम किसी का भी कुछ भी बिगाड़ सकते हैं लेकिन हमारा कोई भी कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।"
"पर मुझे इस तरह यहाँ लाने का क्या मतलब है?" उसकी बात सुनकर मेरे जिस्म में डर की वजह से झुरझुरी सी हुई थी, किन्तु फिर मैंने ख़ुद को सम्हालते हुए कहा____"मैंने तो ऐसा कुछ भी नहीं किया है जिसके लिए कोई मुझे इस तरह से यहाँ ले आए।"
"तो हमने कब कहा कि तुमने कुछ किया है?" उस रहस्यमयी शख़्स ने कहा____"जैसा कि हमने तुम्हें उस वक़्त भी बताया था कि हम वो हैं जो तुम्हारी हर इच्छा को पूरी कर सकते हैं, इस लिए अब तुम बताओ कि क्या तुम अपनी हर इच्छा को पूरा करना चाहोगे?"
"क्या तुम कोई भगवान हो?" मैंने उसकी तरफ घूरते हुए हिम्मत करके कहा____"जो मेरी हर इच्छा को पूरा कर सकते हो?"
"ऐसा ही समझ लो।" कुर्सी पर बैठे उस रहस्यमयी शख़्स ने अपनी अजीब आवाज़ में कहा____"हम एक तरह के भगवान ही हैं जो किसी की भी इच्छा को पूरी कर सकते हैं।"
"पर तुम मेरी इच्छाओं को क्यों पूरा करना चाहते हो?" मैंने कहा____"मैंने तो तुमसे या किसी से भी नहीं कहा कि मेरी इच्छाओं को पूरा कर दो।"
"तुमने मुख से भले ही नहीं कहा।" उस शख़्स ने कहा____"किन्तु हर पल तो तुम यही सोचते रहते हो न कि काश तुम्हारी सबसे बड़ी इच्छा पूरी हो जाए?"
"तु...तुम्हें ये कैसे पता?" मैं उसकी बात सुन कर बुरी तरह चौंका था।
"हमने बताया न कि हम सबके बारे में सब कुछ जानते हैं।" उसने कहा_____"ख़ैर तुम बताओ कि क्या तुम अपनी सबसे बड़ी इच्छा को पूरा करना चाहोगे?"
मैं उस रहस्यमयी शख़्स की बातें सुन कर चकित तो था ही किन्तु मन ही मन ये भी सोचने लगा था कि क्या ये सच में मेरी सबसे बड़ी इच्छा को पूरा कर देगा? यानी क्या ये मेरी इस इच्छा को पूरा कर सकता है कि मैं किसी सुन्दर लड़की को अपनी मर्ज़ी से जैसे चाहूं भोग सकूं? ये सब सोचते हुए जहां एक तरफ मेरे मन के किसी कोने में ख़ुशी के लड्डू फूटने लगे थे वहीं एक तरफ मैं ये भी सोचने लगा कि आख़िर ये शख़्स मेरी सबसे बड़ी इच्छा को बिना किसी स्वार्थ के कैसे पूरा कर सकता है? मतलब मेरे लिए ऐसा करने के पीछे ज़रूर इसका भी कोई न कोई मकसद या फ़ायदा होगा लेकिन क्या????
"क्या हुआ?" मुझे ख़ामोशी से कुछ सोचता देख उस रहस्यमयी शख़्स ने कहा____"क्या सोचने लगे?"
"म..मैं सोच रहा हूं कि तुम मेरे लिए ऐसा क्यों करना चाहते हो?" मैंने हड़बड़ा कर कहा____"इतना तो मैं भी जानता हूं कि इस दुनियां में कोई भी इंसान बिना किसी स्वार्थ के किसी के लिए कुछ भी नहीं करता। फिर तुम मेरे लिए ऐसा क्यों करोगे भला? मतलब साफ़ है कि मेरे लिए ऐसा करने के पीछे तुम्हारा भी अपना कोई स्वार्थ है या फिर कोई मकसद है।"
