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सी. एम. एस {चूत मार सर्विस }

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rajan
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Re: सी. एम. एस {चूत मार सर्विस }

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जब मेरी आँखें खुलीं तो मैंने अपने आपको एक ऐसी जगह पर पाया जो मेरे लिए निहायत ही अजनबी थी। मैं एक आलीशान कमरे में एक आलीशान बेड पर पड़ा हुआ था। मेरे जिस्म में जो कपड़े थे वो अब नहीं थे बल्कि उन कपड़ों की जगह दूसरे कपड़े थे। ये सब देख कर मैं आश्चर्यचकित रह गया। मुझे समझ में नहीं आया कि मैं एकदम से यहाँ कैसे आ गया? तभी मुझे ख़याल आया कि मुझे एक रहस्यमयी शख़्स ने बेहोश किया था। इस बात के याद आते ही मेरे अंदर घबराहट उभर आई। मैं सोचने लगा कि वो रहस्यमयी शख़्स कौन था और मैं यहाँ कैसे पहुंचा? मुझे एकदम से ख़याल आया कि कहीं मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा? मैंने अपनी आँखों को मल मल कर बार बार चारों तरफ देखा किन्तु सच्चाई यही थी कि मैं एक आलीशान जगह पर था। मेरे ज़हन में सवालों की जैसे बाढ़ सी आ गई। उस आलीशान कमरे में मेरे अलावा दूसरा कोई नहीं था। कमरे का दरवाज़ा बंद था। ये देख कर मैं एक झटके से उठा और बेड से नीचे उतर आया। नीचे उतरते ही मैं बुरी तरह चौंका, क्योंकि एकदम से मुझे याद आया कि बेहोश होने से पहले मैं अपनी मोटर साइकिल से गिर गया था और मेरा एक घुटना छिल गया था जिसकी वजह से मुझसे चला नहीं जा रहा था किन्तु इस वक़्त मुझे ज़रा भी दर्द नहीं हो रहा था। मैंने फ़ौरन ही झुक कर अपने पैंट को पकड़ कर ऊपर सरकाया तो देखा मेरे घुटने पर दवा के साथ साथ पट्टी लगी हुई थी। इसका मतलब यहाँ लाने के बाद मेरे ज़ख्म पर मरहम पट्टी की गई थी किन्तु सवाल ये था कि ऐसा किसने किया होगा, क्या उस रहस्यमयी शख़्स ने? आख़िर वो मुझसे चाहता क्या है और यहाँ क्यों ले कर आया है मुझे?

मैं ये सब सोच ही रहा था कि तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और एक ऐसा शख़्स कमरे में दाखिल हुआ जिसके समूचे जिस्म पर सफ़ेद लिबास था, यहाँ तक कि उसका चेहरा भी सफ़ेद रंग के नक़ाब में ढंका हुआ था। नक़ाब के अंदर से सिर्फ उसकी आँखें ही झलक रहीं थी। मैं उस सफ़ेदपोश को देख कर एक बार फिर से बुरी तरह हैरान रह गया था। आख़िर ये चक्कर क्या था कि एक बार काले कपड़े वाला मिलता है और अब ये सफ़ेद कपड़े में एक शख़्स आ गया है?

"अब तुम कौन हो भाई?" मैंने उस शख़्स को घूरते हुए पूछा तो उसने अपनी सामान्य आवाज़ में कहा____"एक ऐसा शख़्स जिसके बारे में जानना तुम्हारे लिए ज़रूरी नहीं है।" उस सफ़ेदपोश ने अजीब भाव से कहा____"तुम्हें इसी वक़्त मेरे साथ चलना होगा।"

"लेकिन कहां?" मैं उसकी बात सुन कर उलझ सा गया।
"उन्हीं के पास।" सफ़ेद कपड़े वाले ने कहा____"जो तुम्हें यहाँ पर ले कर आए हैं? क्या तुम जानना नहीं चाहोगे कि तुम्हें यहाँ किस लिए लाया गया है?"

सफ़ेदपोश ने एकदम सही कहा था। मैं यही तो जानना चाहता था कि मुझे यहाँ किस लिए लाया गया है? मैंने उस सफ़ेदपोश की बात पर हां में सिर हिलाया और उसकी तरफ बढ़ चला। मुझे अपनी तरफ आता देख वो शख़्स वापस पलटा और दरवाज़े के बाहर निकल गया।

उस सफ़ेदपोश के पीछे पीछे चलते हुए मैं कुछ ही देर में एक ऐसी जगह पहुंचा जहां पर बल्ब की रोशनी बहुत ही कम थी। हर तरफ मौत की तरह सन्नाटा फैला हुआ था। मैं हर तरफ देखता हुआ आया था किन्तु कहीं पर भी दूसरा आदमी नज़र नहीं आया था। पता नहीं ये कौन सी जगह थी लेकिन इतना ज़रूर था कि ये जगह थी बड़ी कमाल की और बेहद हसीन भी।

वो एक लम्बा चौड़ा हाल था जिसमें नीम अँधेरा था और उसी नीम अँधेरे में हाल के दूसरे छोर पर वो रहस्यमयी शख़्स एक बड़ी सी कुर्सी पर बैठा हुआ था जो मुझे पहले मिला था और जिसने मुझे बेहोश किया था। इस वक़्त भी उसका समूचा जिस्म काले कपड़ों में ढंका हुआ था और चेहरे पर काला नक़ाब था।

"हमारा ख़याल है कि तुम्हें यहाँ तक चल कर आने में ज़रा भी तक़लीफ नहीं हुई होगी।" उस रहस्यमयी शख़्स की बहुत ही अजीब सी आवाज़ हाल में गूंजी____"और हां, हमें इस बात के लिए माफ़ करना कि हम तुम्हें इस तरह से यहाँ ले कर आए।"

"मुझे ये बताओ कि तुम हो कौन?" मैं अंदर से डरा हुआ तो था किन्तु फिर भी हिम्मत कर के पूछ ही बैठा था____"और ये भी बताओ कि मुझे यहाँ क्यों ले कर आए हो? तुम शायद जानते नहीं हो कि मैं किसका बेटा हूं? अगर जानते तो मुझे इस तरह यहाँ लाने की हिमाक़त नहीं करते।"

"हमें तुम्हारे बारे में सब कुछ पता है लड़के।" उस रहस्यमयी शख़्स ने कहा____"संक्षेप में तुम ये समझ लो कि हमसे किसी के भी बारे में कुछ भी छुपा नहीं है। तुम्हारी जानकारी के लिए हम तुम्हें ये भी बता देते हैं कि हम किसी का भी कुछ भी बिगाड़ सकते हैं लेकिन हमारा कोई भी कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।"

"पर मुझे इस तरह यहाँ लाने का क्या मतलब है?" उसकी बात सुनकर मेरे जिस्म में डर की वजह से झुरझुरी सी हुई थी, किन्तु फिर मैंने ख़ुद को सम्हालते हुए कहा____"मैंने तो ऐसा कुछ भी नहीं किया है जिसके लिए कोई मुझे इस तरह से यहाँ ले आए।"

"तो हमने कब कहा कि तुमने कुछ किया है?" उस रहस्यमयी शख़्स ने कहा____"जैसा कि हमने तुम्हें उस वक़्त भी बताया था कि हम वो हैं जो तुम्हारी हर इच्छा को पूरी कर सकते हैं, इस लिए अब तुम बताओ कि क्या तुम अपनी हर इच्छा को पूरा करना चाहोगे?"

"क्या तुम कोई भगवान हो?" मैंने उसकी तरफ घूरते हुए हिम्मत करके कहा____"जो मेरी हर इच्छा को पूरा कर सकते हो?"
"ऐसा ही समझ लो।" कुर्सी पर बैठे उस रहस्यमयी शख़्स ने अपनी अजीब आवाज़ में कहा____"हम एक तरह के भगवान ही हैं जो किसी की भी इच्छा को पूरी कर सकते हैं।"

"पर तुम मेरी इच्छाओं को क्यों पूरा करना चाहते हो?" मैंने कहा____"मैंने तो तुमसे या किसी से भी नहीं कहा कि मेरी इच्छाओं को पूरा कर दो।"
"तुमने मुख से भले ही नहीं कहा।" उस शख़्स ने कहा____"किन्तु हर पल तो तुम यही सोचते रहते हो न कि काश तुम्हारी सबसे बड़ी इच्छा पूरी हो जाए?"

"तु...तुम्हें ये कैसे पता?" मैं उसकी बात सुन कर बुरी तरह चौंका था।
"हमने बताया न कि हम सबके बारे में सब कुछ जानते हैं।" उसने कहा_____"ख़ैर तुम बताओ कि क्या तुम अपनी सबसे बड़ी इच्छा को पूरा करना चाहोगे?"

मैं उस रहस्यमयी शख़्स की बातें सुन कर चकित तो था ही किन्तु मन ही मन ये भी सोचने लगा था कि क्या ये सच में मेरी सबसे बड़ी इच्छा को पूरा कर देगा? यानी क्या ये मेरी इस इच्छा को पूरा कर सकता है कि मैं किसी सुन्दर लड़की को अपनी मर्ज़ी से जैसे चाहूं भोग सकूं? ये सब सोचते हुए जहां एक तरफ मेरे मन के किसी कोने में ख़ुशी के लड्डू फूटने लगे थे वहीं एक तरफ मैं ये भी सोचने लगा कि आख़िर ये शख़्स मेरी सबसे बड़ी इच्छा को बिना किसी स्वार्थ के कैसे पूरा कर सकता है? मतलब मेरे लिए ऐसा करने के पीछे ज़रूर इसका भी कोई न कोई मकसद या फ़ायदा होगा लेकिन क्या????

"क्या हुआ?" मुझे ख़ामोशी से कुछ सोचता देख उस रहस्यमयी शख़्स ने कहा____"क्या सोचने लगे?"
"म..मैं सोच रहा हूं कि तुम मेरे लिए ऐसा क्यों करना चाहते हो?" मैंने हड़बड़ा कर कहा____"इतना तो मैं भी जानता हूं कि इस दुनियां में कोई भी इंसान बिना किसी स्वार्थ के किसी के लिए कुछ भी नहीं करता। फिर तुम मेरे लिए ऐसा क्यों करोगे भला? मतलब साफ़ है कि मेरे लिए ऐसा करने के पीछे तुम्हारा भी अपना कोई स्वार्थ है या फिर कोई मकसद है।"
rajan
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Re: सी. एम. एस {चूत मार सर्विस }

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"बिल्कुल ठीक कहा तुमने।" उस शख़्स ने कहा_____"इस दुनियां में कोई भी इंसान बिना किसी मतलब के किसी के लिए कुछ भी नहीं करता। अगर हम तुम्हारे लिए ऐसा करेंगे तो ज़ाहिर है कि इसके पीछे कहीं न कहीं हमारा भी कोई न कोई स्वार्थ ही होगा।"

"क्या मैं जान सकता हूं कि ऐसा करने के पीछे तुम्हारा क्या स्वार्थ है?" मैंने हिम्मत कर के पूछा_____"कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम मुझे किसी ऐसे संकट में फंसा देना चाहते हो जिससे मेरी लाइफ़ ही बर्बाद हो जाए?"

"तुम्हारा ऐसा सोचना बिलकुल जायज़ है लड़के।" उस शख़्स ने कहा_____"लेकिन यकीन मानो हमारा ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है। तुम किसी भी तरह के संकट में नहीं फंसोगे और ना ही इससे तुम्हारी लाइफ़ बर्बाद होगी। बल्कि ऐसा करने से तुम्हें मज़ा ही आएगा और तुम्हारी लाइफ़ भी ऐशो आराम वाली हो जाएगी।"

"बड़ी अजीब बात है।" मैंने कहा____"क्या दुनियां में ऐसा भी कहीं होता है?"
"दुनियां की बात मत करो लड़के।" उस रहस्यमयी शख़्स ने कहा_____"अभी तुमने दुनियां देखी ही कहां है? तुम्हें तो अंदाज़ा भी नहीं है कि इस दुनियां में क्या क्या होता है। तुम जिन चीज़ों की कल्पना भी नहीं कर सकते वो सब चीज़ें इस दुनियां में कहीं न कहीं होती हैं। ख़ैर छोड़ो इस बात को और अच्छी तरह सोच कर बताओ कि क्या तुम अपनी सबसे बड़ी इच्छा को पूरा करते हुए अपनी लाइफ़ को ऐशो आराम वाली बनाना चाहोगे?"

"भला इस दुनियां में ऐसा कौन होगा जो अपनी लाइफ़ को ऐशो आराम वाली न बनाना चाहे?" मैंने कहा____"लेकिन मैं तुम पर भरोसा क्यों करूं? कल को अगर कोई लफड़ा हो गया तो मैं तो कहीं का नहीं रहूंगा? मेरे माता पिता का क्या होगा? मैं उनकी इकलौती औलाद हूं? ऐसे काम की वजह से अगर उनका सिर नीचा हो गया तो मैं कैसे उन्हें अपना चेहरा दिखा पाऊंगा?"

"तुम इस बात से बेफिक्र रहो विक्रम।" रहस्यमयी शख़्स ने मेरा नाम लेते हुए कहा_____"तुम्हारे ऐसे काम की वजह से तुम्हारी फैमिली पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अभी तुम ये जानते ही नहीं हो कि हम कौन हैं और हम किस तरह की संस्था चलाते हैं।"

"क्या मतलब???" मेरे माथे पर बल पड़ा____"संस्था चलाने से क्या मतलब है तुम्हारा?"
"हम एक ऐसी संस्था चलाते हैं।" उस शख़्स ने कहा_____"जो औरतों और मर्दों की सेक्स नीड को पूरा करती है। दुनियां के किसी भी कोने में चले जाओ, हर जगह औरत और मर्द की ढेर सारी समस्याओं में से एक समस्या सेक्स भी है। कोई मर्द अपनी पत्नी से खुश नहीं है तो कोई पत्नी अपने पति से खुश नहीं है। इससे होता ये है कि हर औरत और मर्द अपनी सेक्स नीड को पूरा करने के लिए घर से बाहर अपने लिए पार्टनर ढूंढ़ते हैं। हालांकि औरतों और मर्दों के ऐसा करने से अक्सर उनकी मैरिड लाइफ़ ख़तरे में पड़ जाती है लेकिन इंसान करे भी तो क्या करे? ख़ैर, हमारी संस्था गुप्त रूप से औरतों और मर्दों की सेक्स नीड को पूरा करने के लिए पार्टनर प्रोवाइड करती है। हमारी संस्था के एजेंट्स गुप्त रूप से ऐसे लोगों के पास उनकी सेक्स नीड को पूरा करने के लिए जाते हैं जिन्हें इसकी ज़रूरत पड़ती है।"

"ये तो बड़ी ही अजीब बात है।" मैंने चकित भाव से कहा_____"लेकिन एक सवाल है मेरे मन में और वो कि जिनको अपनी सेक्स नीड को पूरा करने के लिए पार्टनर की ज़रूरत होती है वो लोग इस संस्था से सम्बन्ध कैसे बनाते हैं? क्योंकि तुम्हारे अनुसार तो ये संस्था गुप्त ही है न, जिसके बारे में बाहरी दुनियां को पता ही नहीं है कि ऐसी कोई संस्था भी है।"

"सवाल अच्छा है।" रहस्यमयी शख़्स ने कहा____"किन्तु इसका जवाब ये है कि इसके लिए हमारी संस्था के एजेंट्स गुप्त रूप से ऐसे लोगों का पता लगाते रहते हैं जिन्हें अपने लिए पार्टनर की ज़रूरत होती है। दुनियां में बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो अपना टेस्ट बदलने के लिए दूसरी औरतों या दूसरे मर्दों से सेक्स करने की चाह रखते हैं। हमारी संस्था में ऐसे लोगों के बारे में पता लगाने का काम दूसरे एजेंट्स करते हैं, जबकि सेक्स की सर्विस देने वाले एजेंट्स दूसरे होते हैं।"

"ओह! तो इसका मतलब ये हुआ कि तुम्हें तुम्हारे एजेंट्स के द्वारा ही मेरे बारे में पता चला है।" मैंने गहरी सांस लेते हुए कहा तो उस शख़्स ने कहा____"ज़ाहिर सी बात है। जैसा कि हमने अभी तुम्हें बताया कि ऐसे लोगों का पता लगाने के लिए हमारी संस्था के दूसरे एजेंट्स होते हैं। उन्हीं एजेंट्स के पता करने का नतीजा ये हुआ है कि इस वक़्त तुम यहाँ पर हो।"

"अगर मैं इसके लिए मना कर दूं तो?" मैंने कुछ सोचते हुए ये कहा तो उस शख़्स ने कहा____"वो तुम्हारी मर्ज़ी की बात है। इसके लिए तुम्हें मजबूर नहीं किया जाएगा लेकिन हां अगर तुम अपनी मर्ज़ी से एक बार हमारी इस संस्था से जुड़ कर इसके एजेंट बन गए तो फिर तुम इस संस्था को छोड़ कर कहीं नहीं जा सकते।"

"ऐसा क्यों?" मैंने न समझने वाले भाव से कहा।
"दुनियां में हर चीज़ के अपने नियम कानून होते हैं।" उस शख़्स ने कहा____"उसी तरह हमारी इस संस्था के भी कुछ नियम कानून हैं जिनका पालन करना संस्था के हर एजेंट का फ़र्ज़ है। संस्था के नियम कानून तोड़ने पर शख़्त से शख़्त सज़ा भी दी जाती है। हालांकि आज तक कभी ऐसा हुआ नहीं है कि हमारी संस्था के किसी एजेंट ने कोई नियम कानून तोड़ा हो या अपनी मर्ज़ी से ऐसा कुछ किया हो जो संस्था के नियम कानून के खिलाफ़ रहा हो।"

"इसका मतलब ये हुआ कि इस संस्था से जुड़ने के बाद इंसान अपनी मर्ज़ी से कुछ भी नहीं कर सकता?" मैंने ये कहा तो रहस्यमयी शख़्स ने कहा_____"नियम कानून इस लिए बनाए जाते हैं ताकि इंसान किसी चीज़ का नाजायज़ फायदा न उठाए और अनुशासित ढंग से अपना हर काम करे। ये नियम कानून हर जगह और हर क्षेत्र में बने होते हैं। बिना नियम कानून के कोई भी क्षेत्र हो वो बहुत जल्द ही गर्त में डूब जाता है।"

रहसयमयी शख़्स की बातें सुन कर इस बार मैं कुछ न बोला। ये अलग बात है कि बार बार मेरे ज़हन में यही ख़याल उभर रहा था कि मुझे इस शख़्स के कहने पर इस संस्था से जुड़ जाना चाहिए। ऐसा इस लिए क्योंकि इस संस्था से जुड़ने के बाद मेरी सबसे बड़ी चाहत पूरी हो जाएगी। यानी एजेंट के रूप में मैं किसी न किसी लड़की या औरत की सेक्स नीड को पूरा करने के लिए जाऊंगा और फिर जैसे चाहूंगा वैसे उन्हें भोगूंगा। इस ख़याल के साथ ही मेरा मन बल्लियों उछलने लगा था। साला कहां आज तक मेरी किसी लड़की से बात करने में भी गांड फट के हाथ में आ जाती थी और कहां अब इस संस्था से जुड़ने के बाद मैं बिना किसी बाधा के किसी लड़की या औरत को सहज ही भोग सकता था। मुझे कहीं से भी इस काम में अपने लिए कोई लफड़ा नज़र नहीं आ रहा था बल्कि मेरे लिए तो हर बार एक नई और अलग चूत मारने को मिलने वाली थी। हालांकि मेरे लिए अभी भी एक समस्या ये थी कि मैं स्वभाव से शर्मीला था जिसकी वजह से मैं लड़की ज़ात से खुल कर बात नहीं कर पाता था किन्तु मैं जानता था कि इस संस्था से जुड़ने के बाद मेरी ये समस्या भी दूर हो जाएगी।

"तुम चाहो तो इसके बारे में सोचने के लिए समय ले सकते हो।" मुझे चुप देख उस शख़्स ने कहा_____"तुम्हें इस काम के लिए किसी भी तरह से मजबूर नहीं किया जाएगा। इस संस्था से जुड़ने का फ़ैसला सिर्फ तुम्हारा ही होगा, लेकिन संस्था से जुड़ने के बाद फिर तुम इस संस्था को छोड़ने के बारे में सोचोगे भी नहीं और ना ही संस्था के नियम कानून के खिलाफ़ जा कर अपनी मर्ज़ी से कुछ करोगे।"

"ठीक है।" मैंने गहरी सांस लेते हुए कहा____"मुझे इस बारे में सोचने के लिए दो दिन का समय चाहिए। वैसे, इस संस्था से जुड़ने के बाद ऐसा भी तो हो सकता है कि अपने परिवार के बीच रहते हुए मुझे संस्था के लिए काम करने में समस्या होने लगे। उस सूरत में मैं क्या करुंगा?"

"इस तरह की समस्या हमारे बाकी एजेंट्स को भी थी।" रहस्यमयी शख़्स ने कहा_____"लेकिन ये भी सच है कि आज तक उन्हें ऐसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है। क्योंकि हमारी संस्था का काम गुप्त रूप से करने का है और संस्था के नियम कानून के अनुसार संस्था का कोई भी एजेंट्स न तो अपने बारे में किसी को पता चलने देता है और ना ही उसे ऐसी किसी सिचुएशन में फंसने दिया जाता है जिसके चलते एजेंट के साथ साथ हमारी संस्था को भी कोई नुकसान पहुंच सके। इस संस्था की गोपनीयता का सबसे बड़ा उदाहरण यही है कि संस्था का कोई भी एजेंट संस्था के दूसरे एजेंट्स के बारे में कुछ नहीं जानता। एक तरह से तुम ये समझो कि ये एक सीक्रेट सर्विस है, यानि कि एक गुप्त नौकरी। जिसके बारे में किसी को भी पता नहीं होता और ना ही किसी को पता चलने दिया जाता है। संस्था के साथ साथ संस्था के हर एजेंट्स की गोपनीयता का सबसे पहले ख़याल रखा जाता है।"
rajan
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Re: सी. एम. एस {चूत मार सर्विस }

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"वैसे इस संस्था का नाम क्या है?" मैंने जिज्ञासावश पूछा तो कुछ पल रुकने के बाद रहस्यमयी शख़्स ने कहा_____"संस्था के नाम के बारे में तुम्हें तभी बताया जाएगा जब तुम इस संस्था का एजेंट बनने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाओगे। ख़ैर तुमने सोचने के लिए दो दिन का वक़्त मांगा है इस लिए जाओ और आराम से सोचो इस बारे में।"

"तो क्या अब मैं अपने घर जा सकता हूं?" मैंने पूछा तो उस शख़्स की आवाज़ आई____"बेशक, तुम अपने घर ही जाओगे किन्तु उसी हालत में जिस हालत में तुम्हें यहाँ पर लाया गया था।"

"यहां से जाने के बाद।" मैंने कुछ सोचते हुए कहा_____"अगर मैंने लोगों को इस संस्था के बारे में बता दिया तो?"
"शौक से बता देना।" उस रहस्यमयी शख़्स ने कहा_____"लेकिन किसी को भी बताने से पहले एक बार ज़रा खुद भी सोचना कि तुम्हारी बात का यकीन कौन करेगा?"

उस रहस्यमयी शख़्स की ये बात सुन कर मुझे भी एहसास हुआ कि यकीनन मेरी इस बात पर भला कौन यकीन करेगा कि इस दुनियां में ऐसी कोई संस्था भी हो सकती है। एक तरह से इस बारे में लोगों को बता कर मैं अपना ही मज़ाक उड़ाऊंगा। ख़ैर अभी मैं ये सोच ही रहा था कि तभी मुझे मेरे पीछे से किसी के आने की आहट हुई तो मैंने पलट कर पीछे देखना चाहा लेकिन उसी पल जैसे क़यामत टूट पड़ी मुझ पर। एक बार फिर से मुझे बड़ी ही सफाई से बेहोश कर दिया गया था।

जब मुझे होश आया तो मैं उसी सड़क के किनारे पड़ा हुआ था जहां पर मैं पहली बार बेहोश हुआ था। मेरे बदन पर इस बार मेरे ही कपड़े थे। ये देख कर मैं एक बार फिर से चकित रह गया। मेरी नज़र कुछ ही दूरी पर खड़ी मेरी मोटर साइकिल पर पड़ी। मोटर साइकिल को किसी ने सड़क से हटा कर ऐसी जगह पर खड़ा कर दिया था जहां पर आसानी से किसी की नज़र नहीं पड़ सकती थी। कुछ पलों के लिए तो मुझे ऐसा लगा जैसे अभी तक मैं कोई ख़्वाब देख रहा था और जब आँख खुली तो मैं हक़ीक़त की दुनिया में आ गया हूं। आस पास पहले की ही भाँति कोहरे की हल्की धुंध थी और अब मुझे ठण्ड भी प्रतीत हो रही थी। कुछ देर मैं बेहोश होने से पूर्व की घटना के बारे में याद कर के सोचता रहा, उसके बाद उठा और अपनी मोटर साइकिल में बैठ कर घर की तरफ बढ़ गया।

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Re: सी. एम. एस {चूत मार सर्विस }

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(^%$^-1rs((7)
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Re: सी. एम. एस {चूत मार सर्विस }

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अब तक,,,,,

जब मुझे होश आया तो मैं उसी सड़क के किनारे पड़ा हुआ था जहां पर मैं पहली बार बेहोश हुआ था। मेरे बदन पर इस बार मेरे ही कपड़े थे। ये देख कर मैं एक बार फिर से चकित रह गया। मेरी नज़र कुछ ही दूरी पर खड़ी मेरी मोटर साइकिल पर पड़ी। मोटर साइकिल को किसी ने सड़क से हटा कर ऐसी जगह पर खड़ा कर दिया था जहां पर आसानी से किसी की नज़र नहीं पड़ सकती थी। कुछ पलों के लिए तो मुझे ऐसा लगा जैसे अभी तक मैं कोई ख़्वाब देख रहा था और जब आँख खुली तो मैं हक़ीक़त की दुनिया में आ गया हूं। आस पास पहले की ही भाँति कोहरे की हल्की धुंध थी और अब मुझे ठण्ड भी प्रतीत हो रही थी। कुछ देर मैं बेहोश होने से पूर्व की घटना के बारे में याद कर के सोचता रहा, उसके बाद उठा और अपनी मोटर साइकिल में बैठ कर घर की तरफ बढ़ गया।

अब आगे,,,,,


"साहब लंच का टाईम हो गया है।" डायरी पढ़ रहे जेलर शिवकांत वागले के कानों में जब ये वाक्य पड़ा तो उसका ध्यान टूटा और उसने चेहरा उठा कर सामने की तरफ देखा। जेल का ही एक सिपाही उसके सामने टेबल के उस पार खड़ा था। उसे देख कर वागले की आँखों में सवालिया भाव उभरे।

"वो साहब जी।" सिपाही ने झिझकते हुए कहा_____"लंच का टाईम हो गया है। मैं घर से आपके लिए खाने का टिफिन ले आया हूं।"
"ओह! हां हां।" सिपाही की बात सुन कर वागले को जैसे समय का आभास हुआ और उसने गहरी सांस लेते हुए कहा____"अच्छा किया तुमने जो मुझे बता दिया। वैसे खाने में आज क्या भिजवाया है तुम्हारी मैडम ने?"

"मैंने टिफिन खोल कर तो नहीं देखा साहब जी।" सिपाही ने चापलूसी वाले अंदाज़ से अपनी खीसें निपोरते हुए कहा____"लेकिन टिफिन के अंदर से बहुत ही बढ़िया खुशबू आ रही है। इसका यही मतलब हुआ कि मैडम ने आज बहुत ही लजीज़ खाना आपके लिए मेरे हाथों भिजवाया है।"

"अच्छा ऐसी बात है क्या।" शिवकांत वागले ने मुस्कुरा कर कहा____"चलो अच्छी बात है। तुम भी जा कर अपना लंच कर लो।"
"अच्छा साहब जी।" सिपाही ने कहा और सिर को नवा कर केबिन से बाहर चला गया।

सिपाही के जाने के बाद वागले ने ये सोच कर एक गहरी सांस ली कि विक्रम सिंह की डायरी पढ़ने में वो इतना खो गया था कि उसे वक़्त के गुज़र जाने का ज़रा भी पता नहीं चला था। ख़ैर उसने डायरी को बंद किया और उसे अपने ब्रीफ़केस में रख दिया।

लंच करने के बाद जेलर शिवकांत वागले ने कुछ देर कुर्सी में ही बैठ कर आराम किया और फिर जेल का चक्कर लगाने निकल पड़ा। उसके ज़हन में डायरी में लिखी हुई बातें ही चल रही थी। वो खुद भी गहराई से सोचता जा रहा था कि क्या सच में ऐसी कोई संस्था हो सकती है जिसके बारे में विक्रम सिंह ने अपनी डायरी में ज़िक्र किया है? वागले सोच रहा था कि इस दुनियां में कैसे कैसे लोग हैं और कैसी कैसी चीज़ें हैं जिनके बारे में सोच कर ही बड़ा अजीब सा लगता है। विक्रम सिंह की डायरी के अनुसार सी. एम. एस. यानी की चूत मार सर्विस एक ऐसे आर्गेनाइजेशन का नाम है जो गुप्त रूप से औरतों और मर्दों की सेक्स नीड को पूरा करती है। शिवकांत वागले को यकीन नहीं हो रहा था कि दुनियां में इस नाम की ऐसी कोई संस्था भी हो सकती है किन्तु वो ये भी सोच रहा था कि विक्रम सिंह जैसा शख़्स भला अपनी डायरी में ये सब झूठ मूठ का क्यों लिखेगा? अगर विक्रम सिंह का लिखा हुआ एक एक शब्द सच है तो ज़ाहिर है कि दुनियां में इस नाम की ऐसी कोई संस्था ज़रूर होगी जो औरतों और मर्दों की सेक्स नीड को पूरा करती होगी।

डायरी के अनुसार किसी रहस्यमयी नक़ाबपोश ने विक्रम सिंह को ऐसे नाम की संस्था से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया था। अब सवाल ये है कि क्या विक्रम सिंह सच में ऐसी किसी संस्था से जुड़ा हुआ था और वो औरतों और मर्दों की सेक्स नीड को पूरा करता था? हालांकि शिवकांत वागले ने डायरी में इसके आगे का कुछ नहीं पढ़ा था किन्तु ज़हन में ऐसे ख़्यालों का उभरना स्वाभाविक ही था। वागले के मन में इसके आगे जानने की तीव्र उत्सुकता जाग उठी थी।

शाम तक शिवकांत वागले ब्यस्त ही रहा, उसके बाद वो अपने सरकारी आवास पर चला गया था। घर आया तो उसकी नज़र अपनी पचास वर्षीया पत्नी सावित्री पर पड़ी। सावित्री को देखते ही वागले के ज़हन में जाने क्यों ये ख़याल उभर आया कि क्या उसकी पत्नी के मन में अभी भी सेक्स करने की हसरत होगी या फिर दो बड़े बड़े बच्चे हो जाने के बाद उसके अंदर से सेक्स की चाहत ख़त्म हो गई होगी? सावित्री दिखने में अभी भी सुन्दर थी और उसका गोरा बदन अभी भी ऐसा था जो किसी भी नौजवान को उसकी तरफ आकर्षित होने पर मजबूर कर सकता था।

शिवकांत वागले खुद भी सेक्स का बहुत बड़ा भक्त नहीं था। बच्चों के बड़ा हो जाने पर अब वो सेक्स के बारे में ज़्यादा नहीं सोचता था और लगभग यही हाल सावित्री का भी था। हालांकि कभी कभी रात में दोनों ही एक दूसरे के अंगों से छेड़ छाड़ कर लेते थे और अगर बहुत ही मन हुआ तो सेक्स कर लेते थे। शिवकांत को कभी भी ऐसा महसूस नहीं हुआ जैसे कि उसकी पत्नी सेक्स के लिए ज़रा भी पागल हो। सावित्री को अपलक देखते हुए शिवकांत वागले को बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं हुआ कि इस मामले में उसकी पत्नी को सेक्स की ज़रूरत है कि नहीं।

वागले जानता था कि भारत देश की नारी चाहे भले ही कितना खुली हुई हो लेकिन सेक्स के मामले में सबसे पहले पहल मर्द को ही करनी पड़ती है। आज से पहले शिवकांत वागले ने ये कभी नहीं सोचा था कि दो बच्चों का पिता हो जाने के बाद उसका अपनी पत्नी सावित्री के साथ सेक्स करना ज़रूरी है कि नहीं या फिर उसकी पत्नी को इसकी ज़रूरत पड़ती होगी या नहीं, किन्तु आज विक्रम सिंह की डायरी में ये सब पढ़ने के बाद वो थोड़ा सोच में पड़ गया था कि हर औरत मर्द अपनी सेक्स की नीड को पूरा करने के लिए या अपना टेस्ट बदलने के लिए कोई दूसरा साथी खोजती या खोजते हैं। हालांकि वो ये समझता था कि अपने देश की नारी अभी इस हद तक नहीं गई है जिससे कि वो अपने पति के अलावा किसी दूसरे मर्द के बारे में सोचे किन्तु वो ये भी समझ रहा था कि अक्सर मर्दों के सम्बन्ध किसी न किसी औरत से होते हैं तो ज़ाहिर है कि यही हाल औरतों का भी है। सीधी सी बात है कि जो मर्द किसी दूसरी औरत से सम्बन्ध रखता है तो वो उस औरत के लिए दूसरा मर्द ही तो कहलाया। शिवकांत को अचानक से ख़याल आया कि वो बेकार में ही इन सब बातों के बारे में इतना सोच रहा है, जबकि हमारे देश में अभी इस तरह का परिवेश नहीं बना है। हां ये ज़रूर है कि कुछ औरतों और मर्दों के सम्बन्ध अलग अलग औरतों और मर्दों से होते हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि वो लोग ऐसी किसी संस्था के द्वारा ये सब करते हैं। ज़ाहिर है कि विक्रम सिंह ने अपनी डायरी में जो कुछ भी इस बारे में लिखा है वो सब झूठ है, कोरी बकवास है।

शिवकांत वागले ने अपने ज़हन से इन सारी बातों को झटक दिया और रात में खाना पीना करने के बाद वो अपने कमरे में सोने के लिए आ गया था। बेड पर लेटने के बाद फिर से वो विक्रम सिंह और उसकी डायरी के बारे में सोचने लगा था। इससे पहले उसने आँख बंद कर के सोने की कोशिश की थी किन्तु उसकी आँखों से नींद कोशों दूर थी। ज़ाहिर है कि जब तक मन अशांत रहेगा तब तक किसी भी इंसान को चैन की नींद नहीं आ सकती। वागले ने बेचैनी से करवट बदली और अपना चेहरा अपनी बीवी सावित्री की तरफ कर लिया। उसकी बीवी सावित्री पहले से ही उसकी तरफ करवट लिए सो चुकी थी। सावित्री को चैन से सोते देख शिवकांत के ज़हन में कई तरह के ख़याल उभरने लगे।

सावित्री इस उम्र में भी बेहद सुन्दर थी और उसका बदन घर के सभी काम करने की वजह से सुगठित था। उसके बदन पर मोटापा जैसी कोई बात नहीं थी। शिवकांत ने देखा कि सावित्री की नाईटी का गला उसके करवट लेने की वजह से काफी खुला हुआ था जिससे उसकी बड़ी बड़ी छातियों की गोलाइयाँ साफ़ दिख रहीं थी। उसकी बाएं तरफ वाली छाती के हल्का नीचे की तरफ होने से उसकी दाएं तरफ वाली छाती बिल्कुल नीचे दब गई थी। ये मंज़र देख कर शिवकांत के जिस्म में एक अजीब सी झुरझुरी हुई और उसने एक गहरी सांस ली। उसे अचानक से ऐसा प्रतीत हुआ जैसे सावित्री के सुर्ख होंठ उसे चूम लेने का आमंत्रण दे रहे हों। शिवकांत अपने इस ख़याल से ये सोच कर थोड़ा हैरान हुआ कि ये कैसा एहसास है? आज से पहले तो किसी दिन उसे ऐसा प्रतीत नहीं होता था, जबकि वो अपनी पत्नी के साथ हर रोज़ ही बेड पर सोता है।

शिवकांत वागले ने एक बार फिर से अपने ज़हन में उभर आए इन बेकार के ख़यालों को झटका और एक गहरी सांस ले कर अपनी आँखें बंद कर ली। उसे महसूस हुआ कि इस वक़्त उसके दिल की धड़कनें सामान्य से थोड़ा बढ़ी हुई हैं और बंद पलकों में बार बार सावित्री की वो बड़ी बड़ी छातियां और उसके सुर्ख होंठ दिख रहे हैं। वागले एकदम से परेशान सा हो गया। उसने एक झटके से अपनी आँखें खोली और सावित्री की तरफ एक बार गौर से देखने के बाद बेड से नीचे उतरा। उसके बाद वो कमरे से बाहर निकल गया।

किचेन में जा कर वागले ने फ्रिज से पानी की एक बोतल निकाल कर पानी पिया और फिर बोतल का ढक्कन बंद कर के उसे फ्रिज में वापस रख दिया। सारा घर सन्नाटे में डूबा हुआ था। उसके दोनों बच्चे अपने अपने कमरे में सो रहे थे। वागले पानी पीने के बाद वापस अपने कमरे में आया और बेड पर सावित्री के बगल से लेट गया।

काफी देर चुपचाप लेटे रहने के बाद वागले के मन में जाने क्या आया कि उसने फिर से सावित्री की तरफ करवट ली और थोड़ा खिसक कर सावित्री के क़रीब पहुंच गया। उसने अपने बाएं हाथ की कुहनी को तकिए पर टिका कर अपनी कनपटी को बाएं हाथ की हथेली पर रखा जिससे उसका सिर तकिए से ऊपर उठ गया। इस पोजीशन में वो सावित्री को और भी बेहतर तरीके से देख सकता था। उसकी नज़र सावित्री के गोरे चेहरे पर पड़ी। सावित्री दुनियां जहान से बेख़बर सो रही थी। उसे ज़रा भी भान नहीं था कि उसका पति इस वक़्त किस तरह के ख़यालों का शिकार है जिसकी वजह से वो थोड़ा परेशान भी है और थोड़ा बेचैन भी।

सावित्री के चेहरे से नज़र हटा कर वागले ने फिर से सावित्री की बड़ी बड़ी चूचियों की तरफ देखा। इतने क़रीब से सावित्री की चूचियां देखने पर शिवकांत को ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उसकी बीवी की चूचियां आज से पहले इतनी खूबसूरत नहीं थी। वो बड़ी बड़ी और गोरी गोरी चूचियों को अपलक देखने लगा था जैसे सावित्री की चूचियों ने उसे सम्मोहन में डाल दिया हो। वागले अभी अपलक सावित्री की चूचियों को देख ही रहा था कि तभी सावित्री के जिस्म में हलचल हुई जिससे शिवकांत वागले सम्मोहन से निकल कर धरातल में आ गया। उधर सावित्री थोड़ा सा कुनमुनाई और फिर से वो शान्ति से सोने लगी।

शिवकांत के ज़हन में ख़याल उभरा कि क्यों न सावित्री के साथ थोड़ा छेड़ छाड़ की जाए। हालांकि वो जानता था कि उसके ऐसा करने पर सावित्री नाराज़ होगी और उसे चुपचाप सो जाने को कहेगी लेकिन वागले ने इसके बावजूद सावित्री को छेड़ने का सोचा। वागले की धड़कनें थोड़ा और तेज़ हो गईं थी। आज पहली बार उसे अपनी ही पत्नी को छेड़ने के ख़याल से घबराहट होने लगी थी, जबकि इसके पहले भी वो अपनी पत्नी को इस तरह छेड़ता था किन्तु तब उसके अंदर इस तरह की घबराहट नहीं होती थी।
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