तन्हा जिंदगी
तन्हा जीया हूँ.. कई सालों से…
आँशु बहे है…. इन आँखो से…
गम से दोस्ती हो गई है ,इस कदर ....
हस -हस कर गले लगाता हूँ , अपने सीने से। .....
तन्हा जीया हूँ ..कई सालों से .. …
भूल गया हूँ हसना कई सालों से ...
अब मोहब्बत में भी नजर आता है ,धोखा ....
किस पर भरोसा करे कौन सच्चा है ….कौन झूठा .....
तन्हा जीया हूँ… कई सालों से ..
नफरत हो गई है.. इस ज़माने से.. ..
आँखे बंद करने पर वो सकून कहाँ मिलता…..
जो कफन ओढ़ कर इस बेदर्द दुनियाँ को छोड़ कर जाने से …..
लेखक - गुड्डू सिंह कुंदन |