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Thriller Hindi novel अलफांसे की शादी

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Masoom
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Re: Hindi novel अलफांसे की शादी

Post by Masoom »

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कैसे कैसे परिवार Running......बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत Running...... मेरी भाभी माँ Running......घरेलू चुते और मोटे लंड Running......बदनसीब रण्डी ......बारूद का ढेर ......Najayaz complete......Shikari Ki Bimari complete......दो कतरे आंसू complete......अभिशाप (लांछन )......क्रेजी ज़िंदगी(थ्रिलर)......गंदी गंदी कहानियाँ......हादसे की एक रात(थ्रिलर)......कौन जीता कौन हारा(थ्रिलर)......सीक्रेट एजेंट (थ्रिलर).....वारिस (थ्रिलर).....कत्ल की पहेली (थ्रिलर).....अलफांसे की शादी (थ्रिलर)........विश्‍वासघात (थ्रिलर)...... मेरे हाथ मेरे हथियार (थ्रिलर)......नाइट क्लब (थ्रिलर)......एक खून और (थ्रिलर)......नज़मा का कामुक सफर......यादगार यात्रा बहन के साथ......नक़ली नाक (थ्रिलर) ......जहन्नुम की अप्सरा (थ्रिलर) ......फरीदी और लियोनार्ड (थ्रिलर) ......औरत फ़रोश का हत्यारा (थ्रिलर) ......दिलेर मुजरिम (थ्रिलर) ......विक्षिप्त हत्यारा (थ्रिलर) ......माँ का मायका ......नसीब मेरा दुश्मन (थ्रिलर)......विधवा का पति (थ्रिलर) ..........नीला स्कार्फ़ (रोमांस)
adeswal
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Re: Hindi novel अलफांसे की शादी

Post by adeswal »

Fantastic update bro keep posting
Waiting for the next update
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josef
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Re: Hindi novel अलफांसे की शादी

Post by josef »

बढ़िया अपडेट तुस्सी छा गए बॉस


अगले अपडेट का इंतज़ार रहेगा


(^^^-1$i7) 😘
Masoom
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Re: Hindi novel अलफांसे की शादी

Post by Masoom »

पृथ्वी से कई हजार फीट ऊपर, वायु में परवाज करता हुआ जो विमान तीव्र गति के साथ लंदन की तरफ चला जा रहा था, उसके गर्भ में बैठे यात्रियों में से एक भारतीय सीक्रेट सर्विस का भूतपूर्व चीफ विजय भी था, मगर इस वक्त वह जिस भेष में था, उसमें उसे स्वयं उसकी मां भी नहीं पहचान सकती थी।
वह एक गोरा-चिट्टा और हृष्ट-पुष्ट अंग्रेज नजर आ रहा था—चेहरे पर बायीं तरफ एक बड़ा-सा मस्सा, सुनहरे बालों की झुकी हुई मूंछें, सुनहरे रंग की फ्रेंचकट दाढ़ी और गहरी नीले रंग की आंखों वाले इस अंग्रेज की जेब में पड़े पासपोर्ट और वीसा के मुताबिक उसका नाम जेम्स ऐसन था।
मेकअप के प्रति विजय आश्वस्त था यानी उसे विश्वास था कि यदि अलफांसे की दृष्टि उस पर पड़ भी गई तो वह एकाएक ही उसे पहचान नहीं सकेगा—कार्ड पर लिखे पते के मुताबिक वह जानता था कि अलफांसे लंदन में ‘एलिजाबेथ’ होटल के रूम नम्बर सेवन्टी-वन में ठहरा है।
गुप्त भवन में बैठकर ही उसने विकास को भी सारी स्कीम समझा दी थी और इसी बीच आशा और अशरफ ने अपनी-अपनी रिपोर्ट्स गुप्त भवन भेज दी थीं। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, मांगे खां बिल्कुल सच्चा था और उसे पार्सल लंदन से ही मिला था—आश्वस्त होने के बाद उसने अशरफ को मांगे खां को छोड़ देने का हुक्म दिया था।
विजय को पूरा विश्वास था कि वह पार्सल अलफांसे ने ही भिजवाया है, सारे रास्ते वह अनुमान लगाने की भरपूर चेष्टा करता रहा, किन्तु समझ न सका कि आखिर अलफांसे ने किस उद्देश्य से शादी का यह ड्रामा रचा है और केवल उसी को कार्ड न भेजने के पीछे क्या रहस्य है?
तब, जबकि विमान ने लंदन की धरती को स्पर्श किया।
लंदन की घड़ियों में शाम के साढ़े पांच बज रहे थे।
वातावरण मैंनें अभी काफी प्रकाश फैला हुआ था—कस्टम से निपटने के बाद विजय ने टैक्सी पकड़ी और सीधा ‘एलिजाबेथ’ होटल पहुंचा—एलिजाबेथ की इमारत ‘टेम्स नदी’ के किनारे सीना ताने खड़ी बहुत-सी भव्य इमारतों में से एक थी—टैक्सी जिस वक्त ‘वेस्ट्मिनिस्टर’ पुल से गुजर रही थी, तब विजय ने झांककर ‘टेम्स’ के निर्मल जल की तरफ देखा—किश्तियों और स्टीमरों का काफिला वहां से देखने में बहुत ही सुन्दर लग रहा था।
टैक्सी से उतरते ही विजय सीधा काउण्टर पर पहुंचा, रूम के बारे में जानकारी प्राप्त की—काउण्टर क्लर्क ने उसे बताया कि उसे सेकण्ड फ्लोर पर कमरा मिल सकता है, उसने इंग्लिश में पूछा— “क्या फोर्थ फ्लोर पर कोई रूम खाली नहीं है?”
क्लर्क ने रजिस्टर देखने के बाद बताया—“सिक्स्टी सेवन आपको मिल सकता है।”
“चलेगा।” विजय ने कहा।
क्लर्क झुककर रजिस्टर के कॉलम भरने लगा, विजय ने बिना उसके पूछे ही स्पष्टीकरण दिया—“मैं टेम्स के किनारे बने किसी भी होटल का फोर्थ फ्लोर ही पसन्द करता हूं, क्योंकि इस फ्लोर पर स्थित प्रत्येक कमरे की खिड़की से टेम्स बहुत ही खूबसूरत नजर आती है।”
“साइन प्लीज।” क्लर्क ने मानो उसका कोई शब्द सुना नहीं था। विजय ने रजिस्टर में जेम्स ऐलन के नाम से हस्ताक्षर कर दिए।
वेटर के साथ अपने कमरे में पहुंचने के लिए उसे कमरा नम्बर सेवन्टी-वन के सामने से गुजरना पड़ा—विजय ने बहुत ध्यान से देखा, दरवाजे का लॉक बन्द था।
मतलब ये कि अलफांसे इस वक्त कहीं बाहर गया हुआ था।
कमरे में पहुंचने पर उसने वेटर से पन्द्रह मिनट बाद कॉफी लाने के लिए कहा और बाथरूम में घुस गया, नहाकर उसने सफर की थकान से मुक्ति पाई और दस मिनट बाद तैयार होकर उस खिड़की की तरफ बढ़ा जिधर से टेम्स नदी का नजारा देखा जा सकता था।
खिड़की खोलते ही नजारा आंखों के सामने था।
मन्द गति से बहता टेम्स का स्वच्छ जल—नदी किनारे, पिकनिक मनाने आए—रंग-बिरंगे वस्त्र पहने लोग—किनारे के आकर्षक स्टाल्स—खासी भीड़ थी—चौथी मंजिल से देखने पर वह सब बड़ा सुन्दर लगता था।
पिकनिक मना रहे लोगों पर फिसलती हुई विजय की दृष्टि अचानक ही एक जोड़े पर ठिठक गई, क्षणमात्र के लिए उसका दिल धक्क से रह गया और फिर आंखों में एक अजीब-सी चमक उभरती चली गई, वह स्वयं ही बुदबुदा उठा—“तो तुम यहां हो लूमड़ मियां।”
सचमुच वह अलफांसे ही था।
टेम्स की छाती पर एक छोटा-सा स्टीमर चला रहा था वह—बगल में एक लड़की बैठी थी, स्टीमर को बहुत ही मन्द गति से चला रहा था अलफांसे—स्टीमर के साथ-ही-साथ चलती हुई विजय की दृष्टि विशेष रूप से लड़की पर स्थिर हो गई—वह सचमुच लाखों में नहीं, करोड़ों में एक थी।
विजय ने अनुमान लगाया कि वह इर्विन ही होगी। अलफांसे ने अचानक ही अपना बायां हाथ स्टेयरिंग से हटाकर लड़की के गले में डाला, लड़की थोड़ी झुकी—अलफांसे भी झुका और फिर उनके होंठ जुड़ गए।
“उफ्फ लूमड़!” विजय ने झट् अपना हाथ आंखों पर रख लिया—
“अबे ये क्या हो गया है तुझे?”
मगर उसके ऐसा करने से भला अलफांसे या इर्विन पर क्या फर्क पड़ना था, वे काफी देर तक उसी प्रकार प्रेम-क्रीड़ा में मग्न रहे और खिड़की पर खड़ा विजय काठ के उल्लू की तरह उन्हें देखता रहा, चौंका तब जब कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज आई।
विजय घूमा!
कॉफी लिए कमरे में वेटर आया था।
“क्या देख रहे हैं साब?” वेटर ने शीशे की खूबसूरत ट्रे मेज पर रखते हुए पूछा।
“टेम्स नदी पर मौज लेने वालों के नजारे देख रहा हूं!”
“मौज तो आप भी ले सकते हैं सर, जो चाहें—सेवक आपकी सेवा में हाजिर कर सकता है।”
विजय उसका आशय समझ गया और तुरन्त ही उसके दिमाग में अलफांसे के बारे में जानकारी हासिल करने की तरकीब आ गई, उसने स्पष्ट शब्दों में पूछा—“लड़की मिलेगी?”
“क्यों नहीं साब, श्योर!” वेटर उत्साहित होकर बोला—“होटल की अलबम लाऊं?”
“नहीं, एलबम नहीं—इधर आओ!” उसने वेटर को खिड़की के नजदीक बुला लिया और फिर काफी मेहनत के बाद वह वेटर का ध्यान अलफांसे के स्टीमर पर केन्द्रित करने के बाद बोला—
“मुझे वह लड़की चाहिए!”
“राम-राम, ये आप क्या कह रहे हैं साब?” वेटर एकदम घबरा-सा गया—“व...वह तो इर्विन मेम साब हैं, फिर कभी ऐसा न कह दीजिएगा वरना अलफांसे साहब आपकी हालत बोगान से भी बदतर कर देंगे!”
“कौन अलफांसे?”
“आ...आप अलफांसे साहब को नहीं जानते?”
“नहीं तो, कौन है वो जिसे सबको जानना चाहिए?”
“क्या आपने सचमुच कभी अन्तर्राष्ट्रीय अपराधी अलफांसे का नाम नहीं सुना?”
“हां-हां—वह नाम तो सुना है, देश-विदेश के अखबारों में यह पढ़ता रहा हूं, किन्तु तुम उसी अन्तर्राष्ट्रीय अपराधी अलफांसे की बात कर रहे हो?”
“हां—वे ही तो वे हैं जो इस वक्त स्टीमर में इर्विन मेमसाब के साथ हैं।”
“ओह!”
विजय स्टीमर की तरफ देखता हुआ बोला—“अलफांसे का नाम तो बहुत सुना था, लेकिन देखने का मौका आज पहली बार ही मिला है लेकिन तुम इसके बारे में इतना सब कुछ कैसे जानते हो?”
“आजकल अपने होटल में ही तो रह रहे हैं ये।”
“ओह!” विजय सिर्फ इतना ही कहकर रुक गया। कमरा नम्बर नहीं पूछा उसने। उसे, मालूम भी था और वैसे भी वह वेटर से केवल ऐसे ही सवाल कर सकता था जैसे एक साधारण आदमी बात चलने पर जिज्ञासावश पूछ सकता है—वह महसूस कर रहा था कि वेटर अलफांसे से बहुत प्रभावित है और यहां हो रही बातों का जिक्र उससे कर सकता है, इसीलिए उसे वेटर से ऐसा कोई भी प्रश्न नहीं करना था जो अलफांसे को अस्वाभाविक लगे। एक क्षण चुप रहकर उसने अगला सवाल किया—“कमाल है, अखबारों मैं तो अलफांसे के बारे में कुछ और ही पढ़ा था।”
“क्या पढ़ा था आपने?”
“यही कि अलफांसे एक आजाद शेर का नाम है, वह किसी की दासता में नहीं रह सकता—इसलिए उसने भी किसी देश की नागरिकता स्वीकार नहीं की—सारी दुनिया को वह दुनिया नहीं बल्कि इंसानों का जंगल कहता है और खुद को इस जंगल का शेर कहता है, इसके अलावा यह भी सुना था कि लड़कियों में वह बिल्कुल दिलचस्पी नहीं लेता।”
वेटर ने अजीब-सी रहस्यमय मुस्कान के साथ कहा—“आपने ठीक ही पढ़ा और सुना था।”
“मगर मैं स्टीमर में देख तो कुछ और ही रहा हूं और तुम भी कह रहे हो कि...”
“इसका मतलब आपको कुछ भी पता नहीं है।” अति उत्साहित वेटर उसका वाक्य पूरा होने से पहले ही शुरू हो गया—“सारा लंदन जानता है कि ये सब तब्दीलियां इर्विन ने ही उनमें ला दी हैं।”
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Re: Hindi novel अलफांसे की शादी

Post by Masoom »

“क्या मतलब?”
“आपको तो पूरी कहानी ही सुनानी पड़ेगी। आइए, कॉफी ठंडी हो रही है।” कहने के साथ ही वेटर मेज की तरफ बढ़ा, विजय भी उसके पीछे था—वह गद्देदार सोफे में धंस गया—कुछ देर बाद कॉफी का कप विजय को देता हुआ वेटर बोला—“बोगान नामक गुंडे से सारा लंदन आतंकित था—बोगान के गुर्गे उसके आदेश पर इर्विन को किडनैप करके बोगान के लिए उसके अड्डे पर ले जा रहे थे कि मुकद्दर के मारों का रास्ते में ही अलफांसे साब से टकराव हो गया—इर्विन को बचाने के लिए वे बोगान के आदमियों से भिड़ गए। बेचारे गुर्गों को क्या मालूम था कि वे किससे भिड़ रहे हैं—उनकी हड्डी-पसलियां तोड़कर अलफांसे साब इर्विन मेमसाब को उनके चंगुल से निकाल तो लाए, परन्तु साथ में लड़की की तरफ ध्यान न देने वाले इर्विन के हाथों अपना दिल हार बैठे और आप तो जानते ही हैं साहब, इंसान जब दिल हार जाता है तो सब कुछ हार जाता है। जो कभी किसी कैद में नहीं रहा—उसे इर्विन की मुहब्बत की जंजीरें से ने जकड़ लिया।”
बहुत ध्यान से सुनते हुए विजय ने चुस्की ली और बोला—“फिर क्या हुआ?”
“होना ही क्या था, उस वक्त तो हम भी नहीं जानते थे कि ये वही अन्तर्राष्ट्रीय अपराधी अलफांसे हैं, जिनके बारे में हम तरह-तरह की कहानियां सुनते रहे हैं। इधर अगले दिन इसी होटल में इनकी और इर्विन की मुलाकात हुई और अभी हॉल में बैठे ये बातें ही कर रहे थे कि होटल में गड़गड़ाता हुआ बोगान पहुंच गया। वह बहुत ही गुस्से में था—दस-पन्द्रह गुण्डे भी थे उसके साथ—होटल के अन्दर ऐसे रौद्र रूप में बोगान को देखते ही मैनेजर समेत होटल का सार स्टाफ बौखला उठा, हॉल में मौजूद लोग आतंकित हो गए और उस वक्त तो सारा स्टाफ ही कांप उठा, जब उसने उफनते हुए कहा कि वह हमारे होटल के सेवन्टी-वन नम्बर रूम में ठहरे यात्री को जिन्दा नहीं छोड़ेगा—तभी अलफांसे साहब ने स्वयं बोलकर उसका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया-उन्होंने बोगान को बताय कि मेरा नाम ही अलफांसे है—बस, फिर क्या था, दोनों में ठन गई-इर्विन सहित हॉल में मौजूद सभी के चेहरे पीले पड़ गए, परन्तु अलफांसे साहब बड़ी ही जानदार मुस्कराहट के साथ मुस्करा रहे थे—हम सबको उन पर तरस आया, क्योंकि हम समझ रहे थे कि अगले ही कुछ पलों बाद इस हॉल में उनकी लाश पड़ी होगी—मैनेजर साहब को अपने हॉल और फर्नीचर की टूट-फूट की फिक्र थी, इसलिए उन्होंने बोगान के कदमों में गिरकर अलफांसे को होटल से बाहर ले जाने की विनती की—मगर बोगाने ने एक न सुनी और मैनेजर साहब के जबड़े पर एक ठोकर मारी, उधर डर के मारे इर्विन का बुरा हाल था, वो बार-बार अलफांसे साहब से कह रही थीं कि वे बोगान से माफी मांग लें—किन्तु अलफांसे साहब ने इर्विन की तरफ संकेत करके बोगान से कह कि यही वह लड़की है जिसे उसके गुर्गे उसके पास ले जा रहे थे—अगर उसमें ताकत है तो खुद इर्विन को हाथ लगाकर दिखाए, अन्त ये कि बोगान और उसके सारे गुण्डे एक साथ अलफांसे साहब पर झपट पड़े, मगर वह दृश्य ऐसा था कि जिसने भी देखा उसी ने दांतों तले उंगली दबा ली-पन्द्रह मिनट बाद हॉल में चारों तरफ बोगान के आदमी बूरी तरह घायल और खून से लथपथ पड़े कराह रहे थे—उन्हीं में से एक बोगान भी था—इस बीच मैनेजर साब पुलिस को फोन कर चुके थे, परन्तु बोगान का नाम सुनकर पुलिस ने वहां आने से साफ इनकार कर दिया—अंत में बोगान बदला लेने की धमकी देकर वहां से चला गया, मगर अब हममे से कोई भी उसकी धमकी से नहीं डरा, हम सभी को वह धमकी बहुत खोखली लगी—यह बात हमारी समझ में आ गई कि वह अलफांसे साहब से कभी बदला नहीं ले सकेगा और वही बात हुई—आज तीन महीने गुजर गए हैं, बोगान को कभी किसी ने होटल के आसपास भी नहीं देखा है।”
“उसके बाद क्या पुलिस ने अलफांसे को नहीं पकड़ा?”
“पुलिस यहां आई थी, उस पर बोगान का काफी दबदबा था और शायद बोगान ने ही अलफांसे साहब को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को भेजा था, परन्तु तभी अलफांसे साहब के हक में मिस्टर गार्डनर स्टेनले का फोन आ गया और पुलिस इन्हें बिना गिरफ्तार किए ही लौट गई।”
“ये गार्डनर स्टेनले कौन हैं?”
“इर्विन मेमसाहब के पिता।”
“ओह, मगर—उनके कहने से भला पुलिस क्यों लौट गई?”
“वे स्वयं सिक्योरिटी विभाग में बहुत बड़े अधिकारी हैं, इस बीच इर्विन मेम साब ने सारा किस्सा, कोठी पर जाकर उन्हें बता दिया था और इसीलिए उन्होंने इनके हक में फोन किया।”
“फिर तो पुलिस ने बोगान को पकड़ लिया होगा?”
“कहते हैं कि गार्डनर साहब तो यही चाहते थे, परन्तु अलफांसे साब ने उनसे मना कर दिया, कहा कि अब वह कभी कम-से-कम इर्विन की तरफ नजर तक नहीं उठाएगा।”
“इस घटना के बाद तो इर्विन अलफांसे को और ज्यादा प्यार करने लगी होगी?”
“जी हां—बहादुर आदमी को भला कौन लड़की न चाहेगी, अलफांसे साहब तो उनसे पहले ही सब-कुछ हार चुके थे—वे हर रोज मिलने लगे, कभी होटल में, कभी होटल के बाहर—उसके बाद से अकसर उन्हें साथ ही देखा जाने लगा—और अब तो उनकी शादी होने वाली है।”
“शादी होने वाली है?”
“जी हां, अब तो केवल चार दिन रह गए हैं।”
“मगर एक अन्तर्राष्ट्रीय मुजरिम की शादी भला इतने बड़े ब्रिटिश अफसर की बेटी से कैसे हो सकती है?
“यह सवाल उठा था और स्वयं गार्डनर साहब ने ही उठाया था, अपनी बेटी से उन्होंने कहा था कि उसकी शादी एक मुजरिम से नहीं हो सकती, उन्होंने साफ इनकार कर दिया था, परन्तु इर्विन मेमसाब बहुत जिद्दी हैं—साथ ही गार्डनर साहब की आंख का तार भी—वे जिद पकड़ गईं, घोषणा कर दी कि अगर वे शादी करेंगी तो सिर्फ अलफांसे ही से—अगर बड़ों के आशीर्वाद से शादी न की गई तो वह बालिग हैं और खुद ही चर्च में जाकर अपनी पसन्द की शादी करने का अधिकार रखती हैं।”
“फिर?”
“बेटी की जिद के आगे उन्हें झुकना ही पड़ा, परन्तु उन्होंने शर्त रखी कि अलफांसे को शादी से पहले ब्रिटिश नागरिकता स्वीकार करनी होगी और सरकार को यह लिखकर देना होगा कि वह अपराधों से भरी पिछली जिन्दगी को त्याग देगा और भविष्य में कोई ऐसा कृत्य नहीं करेगा जो सम्बन्धित देश के कानून के मुताबिक अपराध हो।”
“तो क्या अलफांसे ने यह शर्त स्वीकार कर ली?”
“इर्विन के कहने से, लेकिन थोड़ी रद्दोबदल करके।”
“कैसी रद्दोबदल?”
“उसने सरकार को केवल यह लिखकर दिया कि वह अपनी पिछली उस जिन्दगी से कोई सम्बन्ध नहीं रखेगा जिसे लोग अपराधों से भरी मानते हैं और कोशिश करेगा कि भविष्य में कोई आपराधिक कृत्य न करे, यदि हो जाए तो आम नागरिकों की तरह वह भी सजा का हकदार है।”
अलफांसे की चालाकी पर विजय का दिल खुलकर ठहाका लगाने को हुआ, किन्तु अपनी इस भावना को दबाकर तेजी से अगला सवाल करने के लिए अपना दिमाग घुमाने लगा, अभी वह कुछ सोच भी नहीं पाया था कि वेटर स्वयं ही बोला— “अब तो ईसा मसीह से यही दुआ है कि जल्दी से शादी का दिन आए, एक तरह से सारा लंदन इस शादी का इन्तजार कर रहा है।”
“ऐसी क्या विशेष बात है?”
“सारे लंदन में, बल्कि कहना चाहिए कि ब्रिटेन में चर्चा है—अलफांसे की शादी में शामिल होने के लिए अपराध जगत के बड़े-बड़े सूरमा यहां आएंगे—सिंगही, जैक्सन और टुम्बकटू की बहुत चर्चा है—सुना है कि सारी दुनिया के हर मुल्क के सर्वोच्च जासूसों से भी अलफांसे के बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं, वे सब यहां इक्ट्ठे होंगे—अमेरिका से जैकी, हैरी और माइक, रूस से बागारोफ, पाकिस्तान से—नुसरत और तुगलक, चीन से हुवांग, बंगला देश से रहमान और भारत से विजय तथा विकास की यहां के नागरिकों को बहुत प्रतीक्षा है।”
“क्या अलफांसे ने इन सबको बुलाया है?”
“सुना तो यही है।”
“तब तो मैं भी इस शादी को देखूंगा।” विजय ने कहा।
“सचमुच ये लाजवाब शादी होगी—वैसी ही लाजवाब जैसी भारतीय ग्रन्थों के मुताविक शंकर की शादी हुई थी।”
“शंकर की शादी?” ये ब्रिटिश वेटर बेचारा शंकर के बारे में क्या जान सकता था?
“छोड़ो!” विजय ने कॉफी समाप्त की, जेब से एक ‘पाउण्ड’ निकाला और वेटर को देता हुआ बोला—“मिस्टर अलफांसे से जिक्र मत करना कि मैंने तुमसे इर्विन के बारे में कुछ चाहत की थी।”
“बिल्कुल नहीं करूंगा सर!” वेटर ने जोरदार सैल्यूट मारा। मुस्कराते हुए विजय ने यह भी कह दिया—“मुझे बोगान की तरह अपनी हड्डियां नहीं तुड़वानी हैं।”
वेटर मुस्करा उठा, फिर जाने के लिए ट्रे उठाई और दरवाजे की तरफ बढ़ता हुआ एकाएक ही ठिठका, मुड़ा और बोला—“सॉरी सर, असली बात तो मैं भूल ही गया! एलबम लाऊं क्या?”
“नहीं, फिलहाल उसकी जरूरत नहीं है।”
वेटर चला गया। विजय ने फुर्ती से उठकर दरवाजा बन्द किया और लपकता-सा खिड़की के नजदीक पहुंचा—काफी देर तक वह टेम्स और उसके किनारे की भीड़ में पैनी नजरों से अलफांसे और इर्विन को तलाश करने की कोशिश करता रहा। लेकिन नाकाम रहा और जब उसे विश्वास हो गया कि अब वे उस भीड़ में नहीं हैं तो बुदबुदाया—‘अब’ कितनी देर तक हमारी तीरे नजर से बचकर रहोगे लूमड़ प्यारे—इस वेटर के आते ही हमने तुम्हारे बारे में सारी जानकारियां एकत्रित कर ली हैं और अब हम दावे के साथ कह सकते हैं कि तुम किसी बहुत ही लम्बे दांव की तैयारी में हो।’
¶¶
कैसे कैसे परिवार Running......बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत Running...... मेरी भाभी माँ Running......घरेलू चुते और मोटे लंड Running......बदनसीब रण्डी ......बारूद का ढेर ......Najayaz complete......Shikari Ki Bimari complete......दो कतरे आंसू complete......अभिशाप (लांछन )......क्रेजी ज़िंदगी(थ्रिलर)......गंदी गंदी कहानियाँ......हादसे की एक रात(थ्रिलर)......कौन जीता कौन हारा(थ्रिलर)......सीक्रेट एजेंट (थ्रिलर).....वारिस (थ्रिलर).....कत्ल की पहेली (थ्रिलर).....अलफांसे की शादी (थ्रिलर)........विश्‍वासघात (थ्रिलर)...... मेरे हाथ मेरे हथियार (थ्रिलर)......नाइट क्लब (थ्रिलर)......एक खून और (थ्रिलर)......नज़मा का कामुक सफर......यादगार यात्रा बहन के साथ......नक़ली नाक (थ्रिलर) ......जहन्नुम की अप्सरा (थ्रिलर) ......फरीदी और लियोनार्ड (थ्रिलर) ......औरत फ़रोश का हत्यारा (थ्रिलर) ......दिलेर मुजरिम (थ्रिलर) ......विक्षिप्त हत्यारा (थ्रिलर) ......माँ का मायका ......नसीब मेरा दुश्मन (थ्रिलर)......विधवा का पति (थ्रिलर) ..........नीला स्कार्फ़ (रोमांस)
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