सुषमा ने एक ठंडी और लम्बी सांस ली ओर बोली‒
‘तुमने मुझे देखकर यह तो नहीं बताया कि मैं तुम्हारी कौन हूं।’
‘जी नहीं। मैं कभी किसी को यह नहीं बताती।’
‘एक्सीलैंट। अच्छा, वह तुम से प्यार करता है?’
‘कहता तो यही है।’
‘और तुम?’
‘मुझे भी अच्छा लगता है।’
‘तुम दोनों की जोड़ी भी अच्छी रहेगी। शादी करना चाहता है वह तुमसे?’
‘कहता है, शादी करूंगा तो तुझसे, वरना कुंवारा ही मर जाऊंगा।’
‘गुड ! अच्छा एक बात और।’
‘जी!’
‘हां बेटी! यह बात मैं इसलिए कह रही हूं कि इस दुनिया में मेरे लिये सिर्फ तुम और दीपू और तुम्हारे लिए मैं और दीपू और दीपू के लिए मैं और तुम। सिर्फ हम तीनों ही एक-दूसरे के लिए अच्छी बात सोच सकते हैं और एक-दूसरे को अच्छी तरह सलाह दे सकते हैं। मेरी बात समझ गई तुम?’
‘जी समझ गई।’
‘कल वह तुम्हें ऊपर क्यों ले गया था?’
डॉली का चेहरा पीला पड़ गया और होंठ कांप गए। सुषमा ने प्यार से उसके कन्धे को थपका और बोली‒
‘देखों, मैं इस समय तुम्हारी मम्मी भी हूं और दोस्त भी। दोस्त से झूठ कभी मत बोलना, क्योंकि कभी कोई छोटा-सा झूठ भी बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। मैं तुमसे वादा करती हूं कि तुम्हें दकियानूसी मम्मी बनकर नहीं दोस्ती बनकर सलाह दूंगी।’
डॉली के होंठ सिर्फ हिलकर रह गए।
‘देखिए, उसने रूम बुक कर लिया था।’
‘कितनी देर के लिए?’
‘यों तो रात-भर के लिए बुक कराया था। लेकिन हमारा सिर्फ दो घंटे रुकने का प्रोग्राम था।’
‘तुम कितनी देर रुकी थी, रूम में?’
‘सिर्फ दो मिनट।’
और सुषमा को लगा जैसे उसके सिर से एक बड़ा बोझ उतर गया और बोली, ‘सिर्फ दो मिनट क्यों?’
‘पता नहीं, उसने कुछ ऐसी हरकत शुरू कर दी थी कि मैं डर गई और मैं धोखे से निकल कर भाग आई।’
‘अब तुम उससे कब मिलोगी?’
‘जी, कालेज में तो कल मिलेंगे ही।’
‘वह तुमसे नाराज तो नहीं हो गया?’
‘शायद नाराज हो, क्योंकि उस समय उस पर पागलपन सवार था।’
‘ठीक है, कल तुम उससे माफी मांगना और कहना तुम उसे जुहू बीच पर मिलोगी और कहना होराइजन की बजाए किसी छोटे होटल का इंतजाम करो।’
‘मगर मम्म...!’
‘बेटी, यह मैं तुम्हें एक दोस्त की तरह सलाह दे रही हूं। और तुम जुहू-बीच पर उसे शाम को आठ बजे मिलने का टाइम देना। अजन्ता पैलेस में आकर किसी केबिन में बैठ जाना।’ \
‘मगर मम्मी...?’
‘नाऊ गो एंड स्लीप साउंडली। सुषमा ने उसका कन्धा थपकते हुए कहा, ‘एंड डोंट वरी।’
फिर सुषमा ने उसके गाल पर किस किया और डॉली उलझी-उलझी-सी चली गई। सुषमा बाथरूम की तरफ बढ़ गई।
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सुषमा ने कलाई घड़ी देखी। ठीक आठ बजे थे। उसने गाड़ी पार्क की और इधर-उधर नजर दौड़ाई। उसके अनुमान और प्लान के अनुसार एक काली ऑस्टन के बोनट से पीठ टिकाए सुदर्शन खड़ा था। वह बड़ी बेचैनी से पहले बदल-बदलकर हर आने जानेवाली लड़की को देख रहा था। सुषमा ने सुदर्शन को उसी जगह इन्तजार करने के लिए रुकवाया था।
सुषमा ने कार में बैठे-बैठे ही शैम्पेन की बोतल से एक लम्बा घूंट भरा और फिर नीचे उतर आई। इस समय वह गहरी नीली साड़ी में थी। नीले ही सेन्डल पहले थी। ब्लाउच इतना ऊंचा था कि उसका पेट काफी ऊंचाई तक खुला था। और उसमें शरीर से इन्टीमेट और बरोट की मिजीजुली खुशबू उठ रही थी।
वह कुछ लड़खड़ाती हुई-सी सुदर्शन की कार के पास से गुजरने गली। कार के नजदीक पहुंचकर वह इस तरह लड़खड़ायी जैसे गिरनेवाली हो और उसके रुकने के लिए जल्दी से कार के बोनट का सहारा लिया और गले से बड़ी हल्की-सी सुरीली चीख निकाली।
सुदर्शन ने झपटकर उसे बाजू से पकड़कर सम्भालते हुए कहा, ‘सम्भल कर मिस, सम्भल कर।’
सुषमा के चिकने संगमरमरी बाजू खुले हुए थे। सुदर्शन ने जैसे ही उन्हें हाथ लगाया उसके बदन में बिजली-सा करेन्ट दौड़ गया था। सुषमा ने बड़ी मुश्किल से सम्भालने की कोशिश की और लड़खड़ाती जबान में बोली‒‘थैैंक्स, मिस्टर मिस्टर...सुदर्शन।
‘वेलकम मिस।’ सुदर्शन उसे गौर से देखकर’ बोला और फिर चौंक कर उछल पड़ा।
‘ओह, आप तो मिस वर्मा हैं, सुषमा वर्मा।’
‘बहुत खूब! तुमने इतने नशे में भी पहचान लिया।’
‘नशे में मैं नहीं आप हैं।’ सुदर्शन जल्दी से बोला।
‘यानी तुम नशा करते ही नहीं?’
‘नशा!’ सुदर्शन जल्दी से बोला, ‘जी करता हूं, मगर मगर‒।’
‘मगर मेरे साथ एतराज है कुछ?’
‘एतराज!’ सुदर्शन हाथ मलता हुआ बोला, ‘मैं बौखलाहट में कुछ सोच ही नहीं पा रहा, मैं कोई सपना देख रहा हूं या यह सच है।’
‘कैसा सपना, कैसा सच!’
‘अरे इतनी मशहूर, हजारों दिलों की महबूब कलाकर और कहां, ‘लगता है, तुम्हें किसी का इन्तजार है?’
‘इन्तजार।’ सुदर्शन झपटकर उसके पास आता हुआ बोला।
‘ओह नो, मुझे किसी का इन्तजार नहीं, लेकिन लगता है आपको किसी की तलाश कर जरूर है।’
‘हां मुझे किसी की तलाश है।’
‘भला आपका इन्तजार करने वालों को भी कमी है इस दुनिया में।’
‘कमी है, एक ऐसे आदमी की जो चेक देकर मुझे डिनर पर इन्वायट न करे।’
‘क्या मतलब?’
‘डार्लिंग।’ सुषमा ने सुदर्शन के गले में बांहें डालकर झूमते हुए कहा।
‘चेक तो नहीं दोगे?
‘अरे कैश भी नहीं।’
‘कमरे और डिनर का बिल भी मैं ही दूंगी।’
‘आपकी खुशी में ही मेरी खुशी है।’
‘तो चलो मुझे यहां से ले चलो।’
