फिर डॉक्टर का पति आगे बढ़ कर लल्लू के पास आया.
डॉक्टर का पति - हे माइ सेल्फ़ अमित कुमार. मेजर हूँ आर्मी में.
लल्लू- अमित से हाथ मिलाता हुआ. अमित जी में ललित कुमार और ये सभी मेरी दीदी है. मेरे भैया राघव वो भी आर्मी में है. उनका शादी है नेक्स्ट वीक. आप सब ज़रूर आएगा.
अमित- ज़रूर ज़रूर. में आप के भैया से मिला लेकिन उस बारे में बात ही नही हुई. में अभी आया उन से मिल कर.
फिर अमित राघव के पास उस से अपना आर्मी की बाते करने चला गया.
लल्लू- तो डॉक्टर अब इजाज़त है.
डॉक्टर - मेरा नाम रैना है. तुम मुझे रैना कह कर ही बुलाना.
लल्लू- नही नही. आप मेरे से उमर में बड़ी है. नाम ले कर कैसे बुला सकता हूँ.
रैना- क्यू की में कह रही हूँ.
लल्लू- ओके रैना. अब हम सब को इजाज़त दे.
फिर सभी बहनो के साथ लल्लू बाहर आ गया.
बाहर सभी काकी ओर मा राघव के साथ बैठे थे. वही अमित भी राघव से बात कर रहा था.
लल्लू को देख कर सब खड़े हो गये.
ऋतु- कैसा है तू. क्यू उत्पाटांग हरकते करता रहता है. अभी शादी का टाइम है. घर में कितने काम पड़े है और तुम हाथ पैर तुड़वाने में लगे हो.
काजल- क्या ज़रूरत थी हेरोगीरि दिखाने की. और दिखाया भी तो कम से कम अपना भी तो ख़याल रखो.
लल्लू- भैया चले क्या अब. रात बहुत हो गई है और दादू अकेले है घर पर.
राघव- हा भाई चल.
सब उठ खड़ा हुए.
राघव और लल्लू, अमित से विदा ले कर गाड़ी के पास आ गये.
राघव- भाई तुम्हारी बाइक तो वही खड़ी है.
लल्लू- कोई बात नही भैया. आप लोग चलिए. मैं बाइक ले कर आता हूँ.
तभी अमित बोला की में छोड़ देता हूँ वहाँ तक ललित को.
फिर अमित और ललित वहाँ चले गये जहा बाइक खड़ी थी साथ में सोनम भी आ गई.
राघव सब को ले कर घर की ओर चला गया.
बाइक के पास आ कर लल्लू और सोनम अमित से हाथ मिला कर विदा लिया फिर अपने बाइक पर बैठ चल दिए घर.
दोनो गाड़ी साथ ही घर पहुचे.
सभी मिल कर गाड़ी से समान निकाल कर घर में रखने लगे.
सोनम- भाई तुम आँगन में जा कर आराम करो. तुम्हे कुछ करने की ज़रूरत नही है.
लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी सोना दी. आप का भाई इतना भी कमजोर नही है.जितना आप सब मुझे समझ रखे हो.
सोनम- क्या कहा अभी…..
लल्लू- मैने कहा की आप का भाई अभ..
सोनम- इस से पहले क्या कहा.
लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी दी.
सोनम- नही नही.. तुम ने कुछ और कहा है.
लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी सोना दी..
सोनम दौड़ कर लल्लू को कस कर गले लगा ली.
रागिनी- अब तुम भाई बहनो का भरत मिलाप हो गया हो तो ज़रा इन सामान को घर में पहुचाओ.
फिर सब मिल कर समान उठा कर आँगन में ले जा कर रख दिए फर्स्ट फ्लोर के एक खाली रूम में.
ऋतु- चलो अब सभी जल्दी से फ्रेश हो जाओ और खाने की तैयारी करो.
सभी लोग फ्रेश होने चले गये.
लल्लू लड़कियो के बगल वाले रूम में अब रहने का सोचा था तो वो वही जा कर अपना सारा कपड़ा खोल कर सिर्फ़ चड्डी में खड़ा था की सोनम अंदर का दरवाजा खोल दी…
लल्लू जल्दी से अपने पेंट से अपने आप को ढकने की कोशिश करने लगा. लेकिन तब तक सोनम तो लल्लू के सजीले गठीले बदन और उस पर से अब टॅटू जो पहले सिर्फ़ पीठ पर था. वो अब बढ़ कर कमर और हाथ पर भी फैल गया था.
सोनम- सो.. सॉरी भाई. वो में देखने आई थी की तुम रेस्ट कर रहे हो या नही.
लल्लू- हा दी. अभी कपड़े बदल कर रेस्ट ही तो करूँगा.
सोनम- हा ठीक है. ये दरवाजा खुला है. किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो आवाज़ दे देना. में आ जाउन्गी.
फिर सोनम वहाँ का परदा गिरा कर चली जाती है अंदर.
लल्लू अब दर्पण के आगे खड़ा हो कर अपने बदन और उस पर बने टेटु को देख रहा था. उसे समझ नही आ रहा था की आख़िर ये टॅटू है क्या बला. अभी तक जहा सिर्फ़ पीठ पर था वो फैल कर इतना कैसे हुआ.
और उसके सारे जखम कहाँ गये.
लल्लू सब के सामने तो नॉर्मल था लेकिन ये उसे परेशान कर रहा था.
फिर वो धोती और ऊपर एक टीशर्ट पहन कर बेड पर लेट गया.
लेट कर कुछ देर टॅटू ही लल्लू के दिमाग़ में घूम रहा था फिर कब उसकी आँख लग गई उसे पता ही नही चला.
लल्लू गहरी नींद में था तभी ऐसा लगा जैसे कोई उस से कह रहा है. " सब मंगल है. सब मंगल है. ध्यान लगा. योगा कर. सब मंगल है."
लल्लू का नींद खुल गया.
थोड़ी देर ऐसे ही लेटा रहा फिर उठ कर नदी किनारे चला गया.
रह रह कर उसे वही याद आ रहा था. सब मंगल है. ध्यान लगा. योगा कर.
लल्लू समझ नही पा रहा था की आख़िर क्या है ये. ये कैसे सुना. आवाज़ तो पहचानता भी नही था वो. कोई अंजान आवाज़ था.
लल्लू नदी किनारे बैठा यही सब सोच रहा था तभी उसे ख़याल आया की आवाज़ आया था ध्यान लगा योगा कर.
तो लल्लू वही ध्यान लगाने को बैठ गया योग मुद्रा में.
काफ़ी देर बैठा रहा लेकिन कुछ समझ नही आया.
मन में कई तरह की बाते आ कर उसे ध्यान से भटका रहा था.
फिर लल्लू वहाँ से घर को चल दिया.
…………..
दालान पर आ कर नलका पर हाथ पैर धो कर दालान पर आ कर बैठ गया.
दालान पर दादू और छोटे काका बैठे थे.
लल्लू वही इन लोगो के साथ बैठ शादी के विषय पर बात करता हुआ चाय पी रहा था.
गुड़िया बीच में इनको चाय दे गई थी.
थोड़ी देर वहाँ बैठ कर लल्लू आँगन में आ गया.
वहाँ राघव बैठा हुआ था. लल्लू भी जा कर राघव के साथ बैठ गया.
राघव- कैसा है भाई. सब ठीक है ना.
लल्लू - बिल्कुल भैया. सब चकाचक है.
राघव- फिर आज का क्या प्रोग्राम है.
लल्लू- फिलहाल तो कोई नही है. आगे का पता नही. वैसे एक बार बाज़ार जाना है.
राघव- कुछ लेना है.
लल्लू- हा भाई. एक सिम लेना है. मोबाइल तो आप ले आए. सिम नही था तो कल सोचा था वो लेने का लेकिन कल मौका ही नही मिला.
तभी वहाँ सोनम दो जगह प्लेट में नाश्ता ले कर आ गई.
सोनम- पहले नाश्ता कर लो. रात भी ऐसे ही सो गये थे. कुछ खाए भी नही.
लल्लू- ऐसे ही कैसे सो गया. आप सब के प्यार से ही मेरा पेट भर गया.
लल्लू वही पास में बैठी ऋतु और काजल को देख कर बोला.
सोनम- बाते बनाना भी सिख गया है अब तो भाई.
राघव और लल्लू फिर नाश्ता करने लगे.
नाश्ता करने के बाद लल्लू फिर दालान पर आ गया.
लल्लू- छोटे काका खेत में मेरे लिए कोई काम हो तो बता देना.
काका- नही बेटा. ज़्यादा कुछ नही है वहाँ करने को. बाकी मजदूर तो कर ही रहे है.
फिर लल्लू वहाँ से आँगन में आ कर अपने कमरे में जा कर बेड पर लेट गया.
भाई खाना खाने आ जाओ. दरवाजे से आवाज़ आई.
लल्लू मूह घुमा कर देखा तो मीनू दी खड़ी थी.
लल्लू- अभी आया दी.
फिर लल्लू उठ कर फ्रेश हुआ और आँगन में आ गया.
वहाँ दोनो काका भी आज आ गये थे.
लल्लू भी सब के साथ खाना खाने बैठ गया.
