तन्नू – “ भाई अभी जाओ सो जाओ.. बहुत रात हो गयी है. “
ये आवाज़ दरवाजे के बिल्कुल पास से आ रही है.. इसके साथ ही
तन्नू की सिसकारियो की आवाज़ भी तरुण सॉफ – सॉफ सुन पा
रहा है..
तरुण- “ नही दी मुझे आपसे अभी बात करनी है. प्लीज़ दरवाजा खोलो “
तन्नू- “ भाई अभी जाओ सो जाओ हम कल बात करेंगे “
तरुण – “ नही दी .. ऐसे मुझे नींद नही आएगी.. और
मुझे आपसे अभी बात करनी है . “
तन्नू – “ लेकिन मुझे अभी कोई बात नही करनी .. मुझे
नींद आ रही है. “
तरुण – “ दी मुझे पता है आपको भी नींद नही आ रही
है..ऑर शायद पूरी रात नींद नही आएगी.. इसकी वजह मैं
हू.. लेकिन मैं आपसे बात किए बिना यहा से नही जाउन्गा..
मैं यही आपके गेट के बाहर वेट कर रहा हू. सुबह तक
मैं यही हू. “
इतना सुन कर तन्नू को थोड़ा ज़्यादा रोना आता है.. क्योंकि..
इतने दर्द कर बाद अब उसे ये प्यार बर्दास्त नही हो रहा
है.. उसे अपनी किस्मत पर भी रोना आ रहा है. की उसका प्यार
उसके पास आया ऑर फिर दूर चला गया.. लेकिन अब उसे
दोबारा कैसे अपनाए.. तन्नू अपने दरवाजे के पास खड़ी –
खड़ी रो रही है..
तभी डोर बेल बजती है. शायद मयंक
आया है.. तन्नू को जब ये सुनाई देती है तो वो थोड़ा डर जाती
है.. की कही तरुण पकड़ा ना जाए.. लेकिने उसे ऐसा भी
लगता है की शायद तरुण डोर बेल की आवाज़ से अपने रूम
मे भाग जाएगा.. तन्नू दरवाजे के पास से धीरे से आवाज़
लगती है
तन्नू – “ भाई “
तरुण – “ हा दी, अप अभी तक सोई नही “
तन्नू- “ भाई तुम जाओ. वरना डॅड तुम को यहा देख लेंगे “
तरुण – “ देख लेने दो दी.. मैं उनसे तुम्हारी ऑर मेरी बात कर
लूँगा.. मैं अब सिर्फ़.. “
इतना कहते हुए तरुण रुक जाता है.. कुछ देर तक सन्नाटा
रहता है.. लेकिन उसके बाद तन्नू डोर ओपन करती है.. तरुण
वही पर नीचे बैठा हुआ है.. तन्नू तरुण को अंदर आने के
लिए रास्ता देती है. तरुण चुप चाप अंदर आ कर खड़ा हो
जाता है तन्नू गेट को वापस बंद करती है ऑर अपने बेड पर जा
कर बैठ जाती है तन्नू का मुँह दूसरी ऑर है. तन्नू अभी तरूंके जवाबो का इंतज़ार कर रही है.. लेकिन तरुण कुछ नही बोल रहा है.. इससे तन्नू पीछे मूड कर डेक्त्ी है.. तरुण उसके
पैरो मे बैठा है उसका मुँह नीचे की ऑर है.. तन्नू तरुण
को खड़ा करती है ऑर बेड पर बैठाती है .. तरुण की आखो से
बेशुमार आसू बह रहे है,
तरुण – “ दी प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो, मुझसे ग़लती हो
गयी., मैं बहक गया था. आप जो सज़ा मुझे देना चाहो..
वो दे सकती हो.लेकींन मुझसे नाराज़ मत रहो. “
इतना कहते हुए.. तरुण ने तन्नु के पैर पकड़ लिए.
