खूनी रिश्तों में प्यार

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Dolly sharma
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Re: खूनी रिश्तों में प्यार

Post by Dolly sharma »

हम तीनो ने कुच्छ देर तक पढ़ाई की . उसके बाद डॉली और पूजा खाना बनाने चली गयी


में टीवी देखने लगा . तभी नाना - नानी भी आ गये . नानाजी मेरे पास ही बैठ गये . और नानी किचन मे चली गयी थोड़ी देर बाद नानी किचन मे से आई ' बेटा डॉली बोल रही थी की दीदी की तबीयत खराब है,

हा मम्मी का तबीयत खराब है लेकिन घबराने की कोई बात नही मेने दवाई खिला दी है वो सोई हुई है ' जाइए आप भी देख लीजिए "

नानी मा के पास चली गयी. तब नानाजी बोले राज तुमको एक बात बताना चाहूँगा लेकिन अभी नही खाना खाने के समय. तुम टीवी देखो अभी फ्रेश हो कर आता हू.


थोड़ी देर बाद डॉली किचन मे से आई ' राज मेने तुम्हारा मनपसंद खाना तैयार किया है ' लेकिन में तुमको अपने हाथ से खिलाउन्गी.


में तुम्हारे हाथ से नही खा उँगा तुम्हारे हाथ बहुत गंदे है .

जाओ में तुझसे नही बोलूँगी और दूसरे तरफ खड़ी हो गई .

मेने टीवी बंद किया और डॉली को अपनी तरफ घुमा लिया..


मेने देखा की डॉली एकदम बच्चों के जैसे रो रही थी . मेने उसके आँसू पोच्छा और गोदी मे उठा लिया . तुम भी ना बात - बात पे रो देती हो . अरे तुम ने सोच भी कैसे लिया, ' की तुम खिलओगी और में नही खाउन्गा , में तुमको चिढ़ा रहा था.



अगर तुम अपने हाथो से जहर भी खिलओगी तो में हँसते हँसते खा लूँगा.

इतना सुनते ही डॉली ने मेरे होंठो पे अंगुली रख दिया . आज के बाद तुम्हारे ज़ुबान पे भी ऐसी बात नही आना चाहिए नही तो में अपना जान दे दूँगी. इतना कहकर डॉली मेरे गले मे दोनो बाहें डालकर बिल्कुल मेरे सीने से लग गयी.

कबतक मेरे गोदी मे बच्चों की तरह दुबकी रहोगी जल्दी नीचे उतरो मुझे वजन लग रहा है. डॉली इतना सुनते ही मेरे सीने पे मुक्का मारने लगी.

में उसको लेकर मा के रूम मे चला आया.. डॉली बिल्कुल मेरे सीने से लिपट गयी. उसको पता ही नही चला .

नानी ' डॉली को बच्चो की तरह गोदी मे चढ़ने का शौक हो गया है, हा ,हा इतनी बड़ी हो गयी है गोदी मे घूमे गी.


मेरी और नानी की बात सुनकर डॉली ने जब देखा तो : वो बिल्कुल शर्मा गयी; क्योकि वो मा के रूम मे थी नानी और मा उसको देख के मुस्कुरा रही थी .....

थोड़ी देर बाद पूजा भी आ गई. भैया बाते बंद' '' खाना बन गया है.

तुम लोग खाओ. में अपने रूम में खाउन्गा.

सब लोग खाना खाने लगे और में अपने रूम जाकर बिस्तर पे लेट गया. और सोचने लगा डॉली भी इतनी बड़ी हो गयी है ओर बच्चों जैसी रोने लगती है. कितना भोला- भाला चेहरा है कितनी मासूमियत उसके चेहरे पर झलकती है.


कितना सुंदर चेहरा है, उसके होंठ तो एकदम गुलाब के पखुंदियो जैसी है. कितने सुनहरे बाल है ओर कितने लंबे है.


में डॉली के बारे मे ही सोच रहा था की एकदम

डॉली: ये राज महाराज क्या सोच रहे है. उठिए खाना नही खाना है क्या.

राज : तुमने खा लिया.

डॉली नही .जल्दी उठो,

में एकदम से उठ के बैठ गया. चलो खाना लाओ .

ओये मिसटर चलो मूह खोलके चुपचाप बैठे रहो खाना में खिलाउन्गी .

डॉली ने पहला कॉर खिलाया और पूछी कैसा है.

में -नमक ज़यादा है पूछ रही हो कैसा है में नही खाउन्गा.

ये सुनकर डॉली ने दूसरी तरफ मूह घुमा लिया, अरे मेरी जान में तो केवल मज़ाक कर रहा था. तुम भी ना चलो इधर मूह घुमाओ.

सच मे तुम मज़ाक कर रहे थे ओर डॉली मेरी तरफ घूम गयी.

चलो मूह खोलो में भी तुमको खिलाउन्गा,

डॉली ने जैसे ही मूह खोला मेने उसके मूह के पास से लेजाकर अपने मूह मे डाल लिया. वो फिर मूह फूला कर बैठ गयी .

जाने दो अबकी बार पका खिलाउन्गा फिर उसके मूह के पास एक कौर ले गया जल्दी से मूह खोलो, नही तो फिर खा जा उँगा . जैसे ही डॉली ने मूह खोला तो अबकी बार मेने खिला दिया.


डॉली खुस हो कर खाने लगी . डॉली तुम तो ऐसे खुस हो रही हो जैसे पहले बरसात मे मेढक और कच्चुआ खुस होते है. अबकी बार डॉली ने मूह नही फुलाया बल्कि मेरे जाँघ पे एक जोरदार मुक्का जमा दिया. मुझे उतना तो नही लगा लेकिन मेने हँसते हँसते कहा अब खाना खा लेते है .फिर हम दोनो ने खाना निपटाया और डॉली बर्तन रखने चली गयी. जब वो बर्तन रख कर आई तो मेने उसे पीछे से पकड़ लिया.अरे ये क्या कर रहे हो . लेकिन में तो बेहरा हो गया था में उसको बिस्तर पे लिटाया उसके ऊपर चढ़ गया


तुमने खाते समय मुझे मारा था इसका बदला ज़रूर लूँगा. इतना कहते ही मेने उसके गालो को मूह मे भर लिया और उसकी छाती को मसल दिया. फिर डॉली बहुत ज़ोर से दी...दी ?

इतना बोलना था की मेने उसके मूह पे हाथ रख दिया , ऐसे क्यो चिल्ला रही हो अगर कोई आ जाएगा तो. तभी अचानक कोई अंदर आ गया.


जब मेने पीछे मूड कर देखा तो मेरी गान्ड ही फॅट गयी

"सामने मा खड़ी थी में एकटक मा की ओर देखने लगा ' सबसे बड़ी बात ये थी की में इतना घबरा गया की में डॉली के ऊपर ही चढ़ा हुआ था डॉली की भी बोलती बंद हो गई थी वो भी चुपचाप मा की ओर देख रहा था . तभी बिल्ली ने कुछ गिराया तो में तुरंत उसके ऊपर से हट गया.


मा कुछ देर हम दोनो को घुरती रही और बिना कुच्छ बोले ही वहाँ से चल गयी.


हम दोनों एक दूसरे के मूह देखने लगे की अब क्या होगा.


तभी डॉली बोली ' सब तुम्हारी ग़लती से हुआ है तुम बिना दरवाजा बंद किए ही मुझपर टूट पड़े. अब दीदी हम दोनों को घर से निकाल देगी इतना कहके डॉली दूसरी तरफ मूह घुमा कर बैठ गयी.
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लो अब चिल्लाया इसने मुझे ही दोष दे रही है ' चिल्ला तो ऐसे रही थी की जैसे मेने इनका रेप कर रहा था. अब मूह घूमने से कुच्छ नही होगा

'बात बिगड़े उससे पहले चलो मा की पैर पकड़ कर माफी माँग लेते है.
मेरे बात से डॉली तुरंत राज़ी हो गयी. हम दोनों रूम से बाहर निकल गये.


हम दोनो मा के रूम मे गये तो मा अपने रूम मे नही थी केवल पूजा ही वहाँ सो रही थी. उसके चेहरे पे मासूमियत झलक रही थी. में उसके माथे को धीरे से एक चुंबन लिया


वहाँ से में और मेरी जान डॉली दोनो मा से माफी माँगने के लिए निकले और टीवी वाले रूम मे चल दिए वहाँ जाने पर ' मा दोनो पैर नीचे लटकाए ऊपर देख रही थी.


डॉली ने मेरी ओर इशारा किया. में और डॉली दोनो ने मा के पैर पकड़ लिए.

हम दोनो '' मा आ, दीदी दी दी " हमको माफ़ कर दो हम फिर ऐसा नही करेंगे.
हम दोनो बहुत धीरे धीरे बोल रहे थे की कोई दूसरा ना जाग जाए.
हम दोनों को देख कर मा भी एकदम चौंक गयी.


अरे मेरा पैर तो छोड़ो & बताओ तुम दोनों क्या कर रहे थे.

अरे कुछ नही डॉली मुझे गुदगुदा रही थी तो मे अपना बदला लेने के लिए उसको गुदगुदा रहा था .


अच्छा कोई बात नही है डॉली तुम जाओ तबतक ये आ रहा है.
डॉली सोने के लिए चली गयी.

मेरी तो फिर से गान्ड फॅट गयी .

में मा की ओर देखने लगा '

मा - हा तो महराज तुम सच मुच डॉली को गुदगुदी कर रहे थे. तुम्हे मेरी कसम

इतना कहते ही मा ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने सर पे रख दिया. अब तो मेरी सीटीपिटी गुम हो गयी, में एकदम चुप हो गया.

मा - बोलता क्यो नही .

राज - मा तुम क्रोधित हो जाओगी.

मा-अगर नही बताया तो में ज़रूर क्रोधित हो जाऊंगी.

राज-ठीक है बता देता हू में डॉली मौसी से
बहुत प्यार करता हू अगर वो भी मुझे बहुत प्यार करती है ' और हम दोनो का प्यार एकदम सच्चा है '.अगर मेरी डॉली को कोई भी छीनने की कोसिस किया तो में उसे जान मार दूँगा लेकिन डॉली की अगर कही शादी होई तो उसकी शादी मेरी मौत एक ही दिन होगी.

अचानक ना जाने मा को क्या सूझा उसने मुझे खिच अपने गले लगा लिया.

नही बेटा मरे तुम्हारे दुश्मन तुम तो मेरे जिगर का टुकड़ा हो, अरे तुमने सोच भी कैसे लिया की में डॉली को तुमसे छीन लूँगी. लेकिन बेटा ये दुनिया कभी नही मिलने देगी.

वो बात है ये मुझ पे छोड़ दो में सब संभाल लूँगा . इतना कहते ही मेने अपना चेहरा मा के सीने मे छुपा लिया .


मा ने भी मुझको अपने से चिपका लिया 'शायद मा को मेरे ऊपर ममता का सागर उमड़ रहा था.
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Re: खूनी रिश्तों में प्यार

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कुछ देर हम ऐसे ही खड़े रहे.

मा के शरीर की गर्मी से मेरा लंड खड़ा हो गया.

शायद मा को इस बात का पता चल गया उसने मुझको धीरे छुड़ाया.
मेरे बालो को सहलाते हुए जाओ बेटा सो जाओ.

मा अपने रूम चली गयी और में अपने रूम मे ख़ुसी से झूमता हुआ चल गया. पहले दरवाजा बंद किया.

फिर शॉर्ट पैंट निकालकर केवल अंडरवेर मे ही डॉली के बगल मे लेट गया.

वो नाइटी पहनी सो रही थी. मेरा तो लंड एकदम खड़ा हो गया था. मेने डॉली को जगाया लेकिन वो नही जागी. उसका नाइटी धीरे से निकाल दिया तो मेरी आँखे चौधिया गयी डॉली ने केवल पैंटी पहनी हुई थी. उसके चुचक इतने बड़े हो गये थे की हाथ मे पकड़ने पर आराम से पूरा आ जाते लेकिन मेने डॉली की छाती को मेने नही छुआ. लेकिन साला मेरा लंड अंडरवेर फाड़ कर बाहर आना चाहता था. इधर डॉली बेसूध सो रही थी.


उसके होंठ एकदम गुलाब के पखुंडियो के तरह चमक रहे थे.


अब मेरी साँसे बहुत तेज़ चल रही थी. मुझे रहा नही गया मेने डॉली को खींच कर अपने सीने से लगा लिया.

उसको नगी छातिया जैसी मेरे सीने पे पड़ी मेरे सारे शरीर मे करेंट की लहर दौड़ गयी.


मेरे होंठ एकदम उसके होंठ से मिल गये....


में डॉली के होंठो को पागलो को तरह चूमने लगा. मुझे तो ऐसा लगा की जैसे में , स्वर्ग में ही हू. मेरे बेतहाशा होंठ चूसने से डॉली एकदम हड़बड़ा कर आँख खोली, मुझे देखकर वो भी मुझे चूमने लगी. डॉली को चूमते देख मेने उसको अपने नीचे किया और बुरी तरह चूमने लगा.


अब धीरे धीरे मेरे हाथ उसके उभारों पर सरकने लगे. जैसे ही मेरे हाथ डॉली के नंगी उभारों पर पहुचे तो

उत्तेजना के कारण मेने थोड़े ज़ोर से उसके उभारों को मसल दिया. मेरा मसलना था की डॉली बहुत ज़ोर से चीखी. वो तो मेरे होंठ उसके होंठ से मिले हुए थे जो उसके सारे चीख मेरे मूह में ही दब कर रह गयी.


में थोड़ी देर वैसे ही उसके होंठो को चूस्ता रहा, फिर उसके ऊपर से हट कर सीधा लेट गया.


मेरे सीधा लेट ते ही डॉली ने मेरे सीने पर मुक्को की बरसात कर दी मेने उसके हाथ नही पकड़ा. ना जाने उसको क्या हुआ वो मारते मारते मेरे सीने में सर कर रोने लगी.



मेने तुरंत ही उसको बहते हुए आँसुओ को जीभ चाटा.

राज-मारी मुझको रो रही हो तुम जैसे तुमको ही चोट लगा हो.

डॉली-तुमने मेरा छाती इतने ज़ोर से क्यो मसला इसलिए मेने तुमको मारा.

राज-वो तो उतेजना के मारे रहा ना गया.


फिर तुम हो इतनी सुंदर की कोई बूढ़ा भी कपड़ो की ऊपर से देख ले तो उसका भी खड़ा हो जाए लेकिन इस समय तो तुम बिल्कुल नगी हो.


मेने फिर डॉली को अपने ऊपर खींच कर उसके रसीले होंठो को चूसने लगा.
डॉली मेरे नंगे सीने पर अपने कोमल-कोमल हाथ घुमाने लगी.


में अब उसके होंठो को चूस्ते हुए अपने दोनो हाथों को उसके पैंटी के अंदर घुसा कर उसके नंगे चुतड़ों को मसलने लगा. उसके चुतड़ों को मसलने से डॉली और ही उत्तेजित हो गयी और मुझे बेतहाशा चूमने लगी.


अब डॉली की साँसे एकदम भारी हो गयी उसने मेरे मूह में अपना जीभ डाल दिया.में उसके जीभ को चूस्ते हुए उसके नंगी उभारों को मसलते हुए डॉली को अपने से एकदम चिपकाने लगा क्योकि मेरा लंड एकदम फटने के कगार पर था.


अचानक डॉली का शरीर अकड़ गया और उसने मेरे होंठ को काट लिया.


मेरा भी संयम टूट गया जैसे में भी झड गया, मुझे तो ऐसे लगा की जैसे शरीर से सारा खून निकल गया हो. शायद डॉली का भी यही हाल था. वो मेरे ऊपर एकदम सुस्त पड़ी हुई थी और हाँफ रही थी .
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Re: खूनी रिश्तों में प्यार

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डॉली ने एकदम से मेरे माथे पर एक किश किया फिर मेरे सीने पर अपना सर रख कर " लव यू राज" '

लव यू टू मेरी जान' कहकर में ने डॉली को अपनी बाहों मे समेट लिया. फिर ना जाने कब हम दोनो की आँखे लग गयी. फिर हम दोनो नंगे ही एक दूसरे के बाहों में बाहें डाले सो गये.


सुबह हम दोनों की बहुत ही देर से नींद खुली लगभग 10:00 बज रहे थे . हमने जल्दी से कपड़े पहने और रूम से बाहर निकल गये.


मा आँगन मे कुर्सी पे बैठी हुई थी.

मा की नज़र जैसे ही हम दोनो पर पड़ी
बहुत जल्दी उठ गये लगता है सुबह हो गयी है'.

डॉली- दीदी पता ही नही चला कब सुबह हो गयी .

माँ-अब तुम दोनो छोटे बच्चे नही हो 'बड़े हो गये हो'. अच्छा कोई बात नही जाओ जल्दी फ्रेश होकर
नाश्ता कर लो.


हम दोनो ने फ्रेश होकर नाश्ता किया .


राज-मा ,में और डॉली मौसी घूमने जा रहे है.

माँ-तुम दोनों आज घूमने नही बल्कि खेतो में जाओ फसल की रख वाली करने.

राज- नाना नानी कहाँ गये है .


माँ -तुम्हारे नाना नानी सहर गये है.
हा एकबात और दोपहर का खाना लेते जाओ वही खा लेना.


में और डॉली खेतो मे चल दिए. फिर दोपहर में खाना खाए .फिर हमने जंगलो में घूमने का प्लान बनाया

(चुकी हमारे खेतो से थोड़े ही दूरी पर जंगल था)


घूमते घूमते काफ़ी देर हो गयी थोड़ा अंधेरा भी हो गया. तभी डॉली बोली राज थोड़ा उधर से आती हू तुम यही रहो. में वही नीचे बैठ गया शायद डॉली पेसाव करने गयी होगी.


तभी मेरी नज़र एक सुंदर सी डाली पड़ी जो नीचे टूटी हुई थी वो लगभग 3फीट लंबा और 1फीट मोटा था.

मेने उसको जैसे ही उठाया "तभी मेरे कानो में डॉली की जोरदार चीख सुनाई दी 'राज र आ ज.

में एकदम हड़बड़ा कर खड़ा हो गया डॉली जिस तरफ़ गयी थी उसी तरफ दौड़ा लेकिन वो डंडा मेरे हाथों मे ही था , में जैसे ही डॉली के पास पहुँचा तो देखा की दो लड़के उसके दोनो हाथ पकड़े हुए थे एक लड़का सलवार को फाड़ दिया डॉली के माथे से खून बह रह था. वो बेहोश हो गयी थी. जो लड़के हाथ पकड़े हुए थे उनके सिर पे मेने एक जोरदार बार किया दोनो धडाम से नीचे गिर गये.


दोनो के गिरते ही जो लड़का डॉली को पकड़ा हुआ था वो डॉली को छोड़ मेरे ऊपर झपटा . मेने डॉली को एक हाथ से संभाला.


वो लड़का एक चाकू से मुझपे बार किया में डॉली को संभालते हुए एक जोरदार लात उसके पेट मे मारा .


वो लड़का उच्छलता हुआ एक पेड़ से टकराया और बेहोश हो गया.


मेने डॉली की ओर देखा वो बुरी तरह से खून से लथपथ हो चुकी थी ऊपर से एकदम नगी थी. में तुरंत अपने रुमाल से उसके सर पर बाँधा और अपना शर्ट निकाल कर उसे पहना दिया.


अब एकदम अंधेरा हो गया था मेने डॉली को अपनी गोदी मे उठाया घर की ओर चल दिया..


घर पहुचते-पहुचते काफ़ी अंधेरा हो गया. डॉली का खून रुक गया था. वो अभी तक होश में नही आ ई थी. मेरा दिल बहुत घबरा रहा था. जब में घर पहुँचा तो मा मेरा इंतज़ार कर रही थी. में जब घर में एंटर हुआ तो

माँ- (डॉली को देखते हुए) इसको क्या हुआ में कुच्छ नही बोला डॉली को मा वाले रूम में बेड पे लाकर सुला दिया.

मा ने जब डॉली को खून से लथपथ देखा तो एकदम से चिल्लाई पू... पूजा...आ....
मा की आवाज़ सुनकर नाना-नानी ओर पूजा दोनो आ गये. पूजा तो मेरे गले लग कर रोने लगी.


राज-अरे चुप करो कुच्छ नही हुआ हल्का सा चोट लग गया है. तुम दोनो चुप रहो तब तक मेने नानीजी पानी लाई मेने डॉली के मूह पे छींटे मारे. मूह पे पानी मारते ही कमाल हो गया. डॉली ने एकदम से आँखे खोल दी.


डॉली आँखे खोलते ही ज़ोर से चिल्लाई ओर एकदम से मेरे सीने से लिपट गयी.मुझे लगा की शायद डर गयी हो.


राज-नाना जी आप जाके वैद्य जी को बुला लाइए में तबतक डॉली का सॉफ कर देता हू.

नानाजी वैद्य जी को बुलाने चले गये.

राज-मा तुम पानी थोड़ा गरम करके लाओ.


माँ-हा बेटा अभी लाती हू


अभी तक डॉली मेरे से चिपकी हुई थी.मेने डॉली मौसी को धीरे से अलग किया ओर गोदी में बैठा लिया.पूजा मुझ को ओर डॉली को एकटक देख रही थी.


पूजा की मासूम आँखो में से लग रहा था की अभी रो देगी.


तभी मा गरम पानी लेकर आ गयी, मेने रुमाल को खोलकर नीचे फेंक दिया. मा धीरे धीरे खून जो सुख गया था. उसको सॉफ करने लगी.


थोड़ी देर में नाना जी वैद्य जी को लेकर चले आ ये. वैद्य जी ने डॉली को देखा तो कहा "घबराने की कोई बात नही है हल्का सा सिर पे कट हो गया है 2 / 4 दिन में ठीक हो जाएगा" में पट्टी बाँध देता हू. बस आराम कीजिए. दवाई टाइम पे खिला दीजिएगा.
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