Adultery शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

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shaziya
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Adultery शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

Post by shaziya »

शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

राज एक 50 साल का हट्टा कट्टा आदमी है। उसका कद कोई 5'7" लम्बाई होगी। दिखने में आकर्षक दिखता है और अच्छे सलीके से रहता है। उसके दांत में दो दिन से दर्द हो रहा था और आज वह डेंटिस्ट से मिलने आया है। उसने अंदर कदम रखा और एक 20 - 21 साल की उम्र की एक लड़की को एक छोटीसी टेबल पीछे बैठा पाया। लड़की उसे देख कर उठी और उससे काम पूछी, राज अपनी दर्द के बारे में बताया।

"डॉक्टर साब तो अभी आए नहीं 15 मिनिट में आजाएंगे आप बैठिये" उसने वहां पड़े कुछ कुर्सियों की ओर दिखाती बोली। राज उसके सामने की एक कुर्सी पर बैठ गया।

लड़की ने उसे परखा की वह वह एक सिल्क की जुब्बा पहने था और जीन्स में था। उसके दायां हाथ में एक सोने की ब्रेसलेट और बाया कलाई के दो उँगलियों में सोने की वजनी अंगूठियां है। उसके खुले गले से गले में का सोने की चैन भी दिख रहीथी। बहुत अमीर होगा लड़की सोची और उसके नाम और उम्र पूछ रजिस्टर में लिखी। और उसके लिये एक मेडिकल कार्ड बनायीं।

राज भी उस लड़की को परखा, उसकी उम्र कोई 20 -22 की होगा राज सोचा। लड़की दुबली पतली और, सावंली है। नयन नक्श अच्छे है। वह सलवार और कमीज पहनी थी और उसके उपर सलेटी रंग की कोट पहनी। शायद डाक्टर ने दिया हो। लड़की अपना काम करती इधर उधर घूम फिर रही थी तो राज ने देखा की उसके नितम्ब छोटे छोटे है लेकिन मांसल है। उसके नितम्ब लुभावनी अंदाज़ मे आगे पीछे हो रहे थे। उसके चूचियां भी छोटे छोटे है। बस एक हाथ में पूरे आ जाएंगे।

बैठे बैठे बोर होता राज ने पुछा "नाम क्या है बेटी तुम्हारा?"

रजिस्टर में कुछ लिखते लड़की ने सर उठाया और उसे देख कर बोली "जी... शाजिया"।

कुछ देर खामोशी रही और फिर पुछा "क्षमा करना बेटी बोर हो रहा हूँ इसीलिए पूछ रहा हूँ.. यहाँ कब से काम कर रही हो?"

"परवाह नहीं अंकल; तीन साल से कर रही हूँ" लड़की हँसते बोली।

उसकी हसी बहुत मोहक है' सोचा राज। और राज के पैंट के अंदर सुर सूरी होने लगी।
"क्या सालरी मिलती है?" राज ने फिर पुछा।

वह एक क्षण हीच किचाई और बोली "जी, बारह हज़ार रूपये"।

"कितने बजे तक काम करती हो?" राज अपना बोरियत दूर करने की नियत से पूछा।

"सुबह ग्यारह बजे से दोपहर दो तक और शाम छह से दस तक..." लड़की ने उत्तर दिया।

"कहाँ तक पढ़ी हो..?"

"इंटर पास हूँ..." लड़की को भी टाइम पास होता रहा था तो जवाब देने लगी।

यहाँ थोडा सा राज के बारे में जानते है। जैसे की ऊपर दिया गया है वह 55 का आदमी है। और एक रियल एस्टेट बिज़नेस करता है। वह पहले एक सरकारी कारखाने में काम करता था। और साइड में एक रियल एस्टेट बिज़नेस के सामान्य सा एजेंट बन गया। वह एजेंसी ऐसी थी की उस समय वह plots सेल करती थी वह भी किश्तियों (instalments) में। Plot का सेल फाइनल होते ही वह एजेंट को कमीशन देतीथी, साथ ही साथ हर बीस प्लाट बेचने पर एक प्लाट फ्री में देती थी।
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shaziya
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Re: शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

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राज क्यों की फैक्ट्री में काम करता था और plot किश्तियों में मिल रहा है ज्यादा तर वहां काम करने वाले खरीद लेते थे। राज को अच्छा कमाई होती थी और plots मुफ्त में मिल जाते थे। उसका कमाई इतनी थी की वह नौकरी छोड़ कर इसे ही अपना धंधा बना लिया। इस धंधे में उसने अच्छी कमाई की और अपने दोनों बेटों को अच्छा पढ़ाया और अब वह दोनो; एक अमरीका में है तो दूसरा ऑस्ट्रेलियामें है। दोनों की शादी हो गयी और घर भी बस गए। राज स्वयं विदुर है। उसकी पत्नी पांच साल पहले गुजर चुकी है।

हाथ में ढेर सारा पैसा जिस से वह मनमौजी बन गया। बढ़िया खाना बढ़िया पीने के साथ साथ उसे बढ़िया औरतों का भी शौक लग गयी। सुन्दर और जवान औरतों को देख कर उसके लार टपकते थे।

अब डेंटिस्ट के पास इस लड़की शाजिया को देख कर भी उसके यही हाल हुआ। वह कुछ और बात बढ़ाने की सोचा इतने में डॉक्टर आगया तो लड़की सजग हो गयी। फिर राज को अंदर भेजी। डॉक्टर ने उसका मुआइना किया और उसे कहा की उसके दांत में सुराख़ पड़गई और अंदर कीड़े भी हो सकते है। डॉक्टर ने उसे कुछ दवई लिखी और चार दिन तक हर रोज आने को कहा। और उस सुराख़ को भरने की बात कही।

दुसरे दिन राज 10 बजे चला गया। शाजिया उसे देखकर विश करि और बैठने को बोली। "आप जल्दी आगये अंकल डॉक्टर तो 11 या 11.15 बजे आते है।" शाजिया बोली।

"हाँ मालूम है, आखिर घर में भी बैठना ही है, सोचा यही बैठ लेते है" फिर दोनों के बीच चुप्पी रही।

"आप क्या काम करते है अंकल?" शाजिया ने उसके उँगलियों में अंगूठियां देखती पूछी।

"कुछ नहीं, बस मौज मस्ती करता हूँ..."

"मतलब।...?"

"रियल एस्टेट में बहुत कमाया, सारा पैसा FD में लगाया है, हर तीन महीने में उसका ब्याज आती है और एक अपर्टमेंट है जिस से किराया आ जाता है, बस इसी से काम चलता है" वह बोला।

लड़की में उत्सुकता जागी पूछी "वैसे महीने में कितना income है अंकल?"

"हर महीना एक लाख किराया आता है, और हर तीन महीने में एक बार उतना ही पैसा ब्याज आता है।"

शाजिया आश्चर्य चकित रह जाती है, फिर अपने आप को संभालती है और पूछती है "आपके पत्नी, बच्चे..."

"दो लड़के है, एक अमेरिका में है तो दूसरा ऑस्ट्रेलिया में है। दोनों की शादी हो गयी है और पत्नी पांच साल पहले कैंसर से भगवान को प्यारी होगयी है" उदास स्वर में बोला। सब मुझे ही पूछोगी, अपना भी तो कुछ बताओ" वह लड़की देखते पुछा।

"हमारा क्या है अंकल, एक निम्न मध्य वर्गीय (lower middle class) फॅमिली है। घर में मैं सबसे बड़ी हूँ और मेरे बाद एक बहेन है 18 साल इंटर में है और एक भाई 14 साल आठवीं में पढ़ रहा है। अम्मी और अब्बू।"
"तुम्हारे अब्बू क्या करते है?" पुछा।

लड़की ने जवाब नहीं दिया, खामोश रह गयी। राज ने जवाब के लिए जोर नहीं दिया।

इतने में डॉक्टर साहिबा आगयी और बात वही रुक गयी। डॉक्टर ने उसके इलाज किया और दवा लिख कर चार दिन और आने को कही। इन चार दिनों में राज और शाजिया की घनिस्टता बढगई।

लड़की शाजिया ने भी उसमे रूचि लेने लगी। इस बीच राज ने मालूम किया की लड़की का बाप बेवड़ा है, नौकरि चले गयी, अब कुछ करता नहीं है। घर का खर्च तो लडकी की कमाई और घर में अम्मी कुछ सिलाई करके कमाती है, उसी से चलता है।

एक दिन वह उस से बोला "आज मेरा आना आखरी दिन है, वैसे तुम्हारे से बात करना बहुत अच्छा लगा। मैं तुम्हे मिस करूंगा" बोला

"मैं भी अंकल, आपसे अच्छा टाइम पास हो जाता था।

राज ऐसे ही किसी मौके का इंतज़ार था बोला "तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं तो मैं रोज आकर बैठा करूँगा"

"मुझे क्या प्रॉब्लम हो सकती है, मुझे तो ख़ुशी होगी लेकिन आपका समय बेकार जायेगा।

"घर में भी बेकार ही बैठा रहूँगा, वहां के बदले यहाँ बैठूंगा, तो समय गुजर जायेगा" राज लड़की की ओर देखता बोला।

आपकी मर्जी अंकल मुझे कोई प्रॉब्लेम नहीं है... पर डॉक्टर आने से पहले। ." वह रुक गयी।

"वैसे ही होगा" राज कहा और चला गया। उसके बाद राज हर रोज 9.30 बजे आजाता था और 11.00 निकल जाता था। हर रोज लड़की के लिए कभी फल तो कभी चॉकलेट तो कभी नाश्ता ले आता था। और शाजिया न न कहने पर भी उसे जबरदस्ती देता था। लड़की भी ना ना करती शर्माती ले लेती थी।

एक दिन उसने पुछा तुम संडे को क्या करती हो? उस दिन तो छुट्टी होती है न..?"
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shaziya
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Re: शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

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"कुछ नहीं अंकल घर में ही रहती हूँ, कभी कभी किसी सहेली के पास चली जाती हूँ।"

राज ऐसी बातों में अनुभवी खिलाड़ी है तो उसने आठ दस दिन वहां जाना रोक दिया। राज को न आते देख कर लड़की तड़पने लगी और बेचैन होने लगी। आखिर उस से रहा नहीं गया रजिस्टर निकाल कर उसका फ़ोन नोट करि और उसे फ़ोन करि।

"हेलो कौन...?" अपने फ़ोन बजने पर राज ने पुछा।

"अंकल मैं हूँ, शाजिया; डेंटिस्ट के यहाँ से..."

"ओह शाजिया क्या बात है? डॉक्टर ने बुलाया है क्या...?"

"नहीं अंकल मैंने ही फ़ोन किया, वह क्या है की आप इतने दिन नहीं अये तो सोचा आपकी तबियत कैसी है" बस।

"ताबियत तो ठीक है, बस एक डील आगया..बहुत बड़ा है... इसी लिए... "वैसे तबियत ठीक न होती तो क्या करती?" राज ने हँसते पुछा।

"क्या करती कमसे कम तबियत पूछने तो आ जाती" शाजिया ने भी हँसते जवाब दिया।

"तुम मेरे यहाँ तो कभी भी आ सकती हो"

"वाह ऐसे थोड़े ही आजाते, दावत दो तो आती हूँ..."

दावत का क्या चाहे तो आज ही देता हूँ ...?"

"ओह.. कब आ रहे है...?" शाजिया फिर से पूछी।

"दो दिन बाद.." उसने बोला और फ़ोन रख दिया। वह समझ गया की लड़की फँसी है... बस थोड़ा सा और कसना है।

दो दिन बाद वह शाजिया के लिए एक महंगा सलवार सूट ख़रीदा और उसे भेंट की" यह तुम्हारे लिए...मेरा डील सक्सेस हुआ है..."

"यह क्या है..?"

"देखो तो..."

उसने पॉकेट खोली तो सलवार सूट पाया और बोली "वाह कितना अच्छा है, बहुत महंगा होगा..." बोली, कुछ रुक कर फिर बोली "नहीं, नहीं इसे मैं नहीं ले सकती.. अगर अम्मी पूछे तो क्या जवाब दूँगी..." वह उसे वापस करती बोली।

"अरे कुछ तो बोलो पर मेरा दिल मत थोड़ो... तुम्हरे लिए बहुत चाहत से लाया हूँ,"

"लेकिन अंकल..."

"कह्देना की तुम्हारे यहाँ के फ्लैट में किस्तों में कपडे बेचने वाला आता है, उन्हीसे तुम यह खरीदी है"
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Re: शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

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"अम्मी यह कैसी है?" शाजिया ने राज की दिए हुई सलवार सूट अम्मी को दिखाकर पूछी।

अम्मी उसे देखकर बोली "बहुत अच्छी है बेटी.. महँगी लगती है.. कहां से लाई?"

जो बात कहने को राज ने उसे कहा वह वही कही और बोली ज्यादा महँगी नहीं है अम्मी... मैंने राबिया के लिए खरीदी है..." राबिया उसकी छोटी बहन है ..

क्या दीदी ओह तुम मेरी लिए खरीदी है.. कितना अच्छा है.. थैंक यू दीदी.." और उसने दीदी के गालों को चूमि।

"लेकिन तुम अपने लिए ले लेती..." अम्मी बोली।

नहीं अम्मी, राबिया कॉलेज जाती है.. इसे अच्छे कपड़े होने चाहिए.. उसके पूरे कपडे पुराने होगये है..." वह बोली।

फिर शाजिया और राज नजदीकी और और बढ़ते गयी यहाँ तक की राज अब उसके बदन पर हाथ फेरने लगा, गाल को चिकोटी काटने लगा। पहले तो शाजिया को कुछ अजीब लगता था लेकिन अब उसे यह सब अच्छा लगने लगा। आखिर वह भी तो जवान लड़की है। उसेक दिल में भी जवानी के उमंग उभरने लगे। अब राज शाजिया को कहीं न कहीं घूमने लेजाने लगा। कभी पार्क तो कभी मॉल तो कभी सिनेमा... शाजिया भी हर संडे को अपने सहेली के यहाँ जाने की कह कर राज के साथ घूमने चली जाती थी।

मौका देख कर राज कभी उसके बदन पर हाथ फेरता तो शाजिया की शरीर में करंट दौड़ती थी। उसे ऐसा लगता की इसमें मदहोशी छा गयी गयी हो, और उसके जांघो के बीच वहां से कुछ रिस रही हो।
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