Adultery शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

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shaziya
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Re: शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

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उस दिन भी रविवार था। राज ने शाजिया को फ़ोन किया और कहा " सुनो तुमने एक बार कहा था की दावत दो तो हमारे घर आओगी.. बोला था न..."

"हाँ तो..." शाजिया पूछी!

"आज तुम्हे दावत दे रहा हूँ तुम आज के दिन मेरे यहाँ बिताओगी" मुझे यहाँ मिलो और उसने उसे एक अच्छा होटल का नाम बताया। सुबह के गयारह बजे शाजिया ने तैयार होकर, राज का दिया हुआ सलवार सूट बहन से पूछ कर पहनी और सहेली के साथ पिक्चर देखने जाने को कह शाम तक आने को कह चली गयी। जब वह ऑटो में वहां पहुंची तो राज वहां था और उसने ही ऑटो का भाड़ा चुकाया और उसे लेकर अंदर चला गया।

वहां दोनो ने अच्छ खाना खाया। ऐसा खाना तो शाजिया ने ख्वाब में भी नहीं सोचो थी। इतना स्वादिष्ट था। फिर वह उसे लेकर अपने घर आया। उसके घर देख कर शाजिया आश्चर्य में रह गयी। लोग ऐसे घरों में भी रहते क्या? वह सोची। कहाँ उसका दो छोटे छोटे कमरों का एस्बेस्टस की छत का घर कहाँ यह घर। उसके दीवार ही 11 फ़ीट ऊँचे थे। इतने बड़े बड़े कमरे देख कर वह चकित रह गयी।

जब वह सोफे पर बैठी तो उसे लगा की वह उसने धँस रही है।

राज उसे कोल्ड ड्रिंक पिलाया.. और इधर उधर की बातें करने लगा। राज कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था। शाजिया को तो यह सब सपना लग रहा था। कुछ देर बाद राज ने शाजिया को एक कमरा दिखा कर कहा "तुम इसमें आराम करो.. मैं मेरे कमरे में हूँ' कह कर उसे वहां छोड़ के गया।

शाजिया धड़कते दिल से कमरे में पहुंची। इतना बड़ा कमरा.. और इतना बड़ा खटिया, उसके उपर मखमली बिस्तर। जब वह उस पर लेटी तो उसे लगा की वह एक फीट अंदर घस गयी। इतना बड़े कमरे में वह अकेली कुछ अजीब लगा और कुछ डर भी।

वह उठकर राज की कमरे की ओर निकल पड़ी। कमरे में राज लुंगी बनियन पहन कर पलंग पर लेटा था।

"अंकल" उसने बुलाया।

राज ने सर घुमकर शाजिया को देखा और उठकर बैठा और पूछा "क्या बात है शाजिया आराम नहीं करि?"

"नहीं अंकल, इतने बड़े कमरे में कुछ अजीब सा लगा, कुछ डर भी लगा था..."

"अरे डर किस बात का..आओ इधर लेटो" अपने बिस्तर पर थप थपाया। शाजिया धीरे से आकर वहां लेट गयी और सीधा लेट कर कुछ सोच रहीथी। दोनों खमोशी से अगल बगल लेटे थे।

"क्या सोच रही हो?" राज उसके ओर पलट कर पुछा।

"कुछ नहीं..."

"ऐसे तुम कितना सुन्दर लग रही हो" राज उसके मुहं पर झुकता पुछा।

उसने देखा की शाजिया की होंठों मे हलका सा कम्पन है। उसने अपने गर्म होंठ शाजिया के मुलायम होंठों पर लगा दिया। शाजिया ने कोई प्रतिरोध नहीं किया।

शाजिया ने कुछ देर खामोश रही और फिर वह राज की सहयोग करने लगी। राज की चुम्बन का जवाब वह भी उसके होठों को चुभलाते दी। शाजिया का ऐसा सहयोग पाते ही राज मदहोश होगया। वह जमकर उसकी होंठों को चूमते एक हाथ उसके छोटे चूचि पर रखा और जोर से दबाया। "

अहहहहहहह "शाजिया दर्द से कराह उठी। उसके चुम्बन से उसके सास भी फूलने लगा।

शाजिया जोरसे राज से छुडाली और बोली "उफ्फ्फ..अंकल इतना जोरसे..ओह.. मेरी तो जान ही निकल गयी" वह गहरी साँस लेकर बोली।

"ओह! सॉरी.. तुम्हारा सहयोग पाते ही मैं जोश में..."

"तुम्हारी जोश ठीक है, मेरी तो जान निकल गयी ..." वह धीरेसे बोली।

राज ने उसे उल्टा पलटा कर उसके कुर्ते का हुक खोलने लगा। शाजिया ने ख़ामोशी से अपने कुर्ते की हुक्स खुलवायी।

सारे हुक खुलते ही उसने स्वयं अपनी कुर्ता सर के ऊपर से निकाली साथ ही अंदर का स्लिप भी। अब वह ऊपर सिर्फ एक ब्रा में थि तो नीचे सलवार।

राज उसे सफाई से पीछे सुलाया और उसके ब्रा को उसके चूचियों से ऊपर किया। हमेशा ढक के रहने के कारण उसके चूची सफ़ेद दिख रहीथी। छोटे छोटे, मोसम्बि के जैसा और उसके निपल भी छोटा जैसे मूंग फली की दाने की तरह।

"वाह। क्या मस्त चूची है..." उस पर हाथ फेरता बोला ।

"झूट अंकल, सबतो कहते है की मेरे छोटे है... उतना सुन्दर नहीं दीखते..."

"वह तो अपनी अपनी नजरिया है...मेरे लिए तो यह मस्त है..आओ तुम्हे दिखाता हूँ" उसने कहा और शाजिया को पलंग पर से उतार कर आदम कद शीशे के सामने लाया.. उसे उसके छबि उसमे दिखाता बोला.. " देखो कितना सुन्दर लग रही हो"

शाजिया अपने आप को शीशे में देख कर सोची "मैं साँवली हूँ तो क्या कितना सुन्दर हूँ, काश मेरी चूची कुछ और बड़े होते..'

राज उसके पीछे ठहर कर अपना तना मस्तान उसके चूतड़ों पर रगड़ रहा था। शाजिया ने सलवार के बावजूद उसके लंड की गर्माहट महसूस किया। राज ने उसके दोनो नन्गी चूचियो पर हाथ फेरा और फिर उसकी नन्ही घुंडियों को उँगलियों से मसला।

"सससस...ममम.." शाजिया मुहं से एक मीठी कराह निकली।
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shaziya
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Re: शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

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राज ने अपने हाथ ऊपर से नीचे तक उसके बदन पर फेरते उसके नाभि के पास आया और छोटि सि नाभि के छेद में अपने ऊँगली डाल कर घुमाया..

"मममम..." एक सीत्कार और निकली शाजिया मुहं से।

हाथों को और नीचे लेकर उसने शाजिया के सलवार के नाडा खींचा.. 'ससररर' उसका सलवार उसके पैरों के पास।

शाजिया ख़ामोशी से यह सब करवाते मजा ले रही थी। उसके बदन में आग लगी है। "आह अंकल कुछ करो..." वह कुन मुनाई।

"क्या करूँ...?" वह उसकी आँखों में देखता पुछा।

शाजिया शर्म से लाल होती बोली "जैसे के आपको मालूम नहीं...?"

राज ने कमर की ओरसे उसके पैंटी में हाथ डाला और उसके उभरे चूत को सहलाया। साफ़ सफाचट चूत पाकर वह खुश हुआ और पुछा.. "वह कितना सॉफ्ट है तेरी यह मुनिया.. लगता है...आज ही साफ करि हो.."

"हाँ.. आप के लिए ही मैं आज साफ करि हूँ..." वह इठलाती बोली।

उसका उत्तर सुनकर राज अचम्भे में रह गया और पुछा "मेरे लिए...तुम्हे मालूम था की मैं .." वह रुक गया।

शाजिया ने चित्ताकर्षक ढंग से मुस्कुरायी और पलंग की ओर बढ़ते बोली... "हाँ... मुझे पहले से मालूम था की तुम क्यों मेरी दोस्ती कर रहे हो.."

उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं था.. उसने आश्चर्य से पुछा.."कैसे..."

तब तक शाजिया बेड पर चित लेट गयी लेटने से पहले उसने अपना पैंटी उतार फेंकी और अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर एक हाथ अपनी बुर पर रख बोली "जब तुम्हारा इलाज होने के बाद भी तुम मेरे से बात करने की बहाने आने लगे तब ही मुझे मालूम था की तुम्हारा मकसद क्या है..." अपने बुर पर हाथ चलाते बोली!

राज उसे आश्चर्य चकित होकर देख रहा था।

"हाँ.. फिर भी... आखिर मैं क्या करती। मैं इक्कीस की होगयी हूँ, मेरा बेवड़ा बाप तो मेरी शादी नहीं करेगा। बॉय फ्रेंड की तलाश नहीं कर सकती। वैसे मुझ जैसे सामान्य लड़की को कौन अपना गर्ल फ्रेंड बनाएगा? मेरी नौकरी ही ऐसी है। सुबह दस बजे से रात दस बजे तक। दोपहर दो तीन घंटे रेस्ट मिलती है.. लेकिन मैं घर ना जाकर वही क्लिनिक में रेस्ट करती हूँ.. अब समय कहा है बाहर घूमने फिरने की"।

"आखिर मैं भी जवान लड़की हूँ, मेरी उसमें भी आग लगती है... मेरी उस आग बुझाने के लिए मैं कहाँ जा सकती हूँ..." शाजिया रुकी और फिर से बोली, "ठीक उसी समय तुम मेरे से फ्रेंडशिप करने की इच्छा व्यक्त किया तो सोचा तुम जैसे उम्र दराज से मैं सेफ रहूँगी" तो मैंने भी तुम्हे बढ़ावा दिया।"
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shaziya
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Re: शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

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"तो तुम तय्यार होके आयी हो...?" राज उसकी गाल को चिकोटी काटते पूछ. शाजिया ने शर्म से लाल होकार अपने सर झुकाली।

"शाजिया.. जब तुम शरमा रही हो तो बहुत सुन्दर लग रहि हो..." यह बात वह वास्तव में हि कहि। वह सब मॉडर्न लड़िकियों जैसा नहीं थी लेकिन उसका शर्माना राज को बहुत भाई। वह लड़की की कमर के पास बैठ कर लड़की को अपनी बुर पर हाथ चलाते देख रहा है।

उसके ऐसे देखने से शाजिया और लाल हो गयी और शरमाते ही पूछी "ऐसे क्या देख रहे हो अंकल...?"

जवाब देने की स्थान पर राज शाजिया के जांघो के बीच अपने, मुहं लगाया और शाजिया की उभरी चूत को अपने मुहं में लिया।

"ओह अंकल यह क्या कर रहे हो...?" राज के बालों को पकड़ कर पूछी।

"क्या कर रह हूँ.. इतनी अच्छी बुर का स्वाद ले रहा हूँ.." और उसके उभरे फांकों पर अपने जीभ फेरने लगा।

"आआह्ह्ह.. अंकल.. इस्सस... अच्छा लग रहा है.. उफ़ यह क्या हो रहा है मुझे..." शाजिया राज की सर को अपनी चूत पर दबाती बोली। राज अपना काम में बिजी रहा। उसने अपनी अंगूठियों से स्नेह के फैंको को चौड़ा कर अंदर की लालिमा को देखता नीचे से ऊपर तक अपना जीभ चलाने लगा। शाजिया को मानो ऐसा लग रहा है जैसे वह स्वर्ग में हो। अनजाने में ही वह अपने कमर ऊपर उठाकर राज की चाटने का मज़ा ले रही है।

कुछ ही पल गांगराम उसके बुर को चाटा होगा की अब उसके बुर में से मदन रस टपकने लगे।

यह देख राज और गर्म होगया और जोश मे आकर उसके रिसते चूत के अंदर तक अपना जीभ पेलने लगा। शाजिया को ऐसा लग रहा था की उसके सारे शरीर में हज़ारों चींटे रेंग रहे हो।

"ओह अम्मी....आ... यह क्या हो रहा है मुझे.. मै कहीं उडी जा रही हूँ... अंकल.. उफ्फ्फ..." शाजिया अपना चूतड़ ऊपर उठाते बोली।

"आअह्ह्ह्ह .. अंकल.. मममम.. मुझे मालूम नहीं था कि इस खेल में इतना मज़ा है... ससससससस.... मममम करो अंकल.. चाटो मेरी चूत को और चाटो.. ममम.. मुझे कुछ हो रहा है ... अंकल मुझे पिशाब लगी है..." छोड़ो मुझे बातरूम जाना है..." वह राज को अपने ऊपर से ढकेल ने की कोशिश की।

राज और जोर से उसके बुर को अपने मुहं में लेते उसके छोटे छोटे कूल्हों को दबाने लगा और कहा.. "चलो.. मूतो.. मेरे मुहं में मूतो.." कहते शाजिया की क्लीट (clit) को अपने मुहं में लिए और धीरे से उसे दबाया..."

"आअह्ह्ह्ह... अंकल... हो गयी.. में मूत रही हूँ.. अब रोके नहीं जाता.. निकली ....ससस... निकली.." कहते खलास हो गयी। उसके अनचुदी चूत ने पहली बार बगैर चुदे ही अपने चरम सीमा पर पहुंची और शाजिया निढाल होगयी।
**********


पूरा आधे घंटे के बाद....

"कैसा लगा मेरी जान...?" राज शाजिया को अपने आगोश में लकर उसके गलों को और आँखों को चूमता पुछा।

"कुछ पूछो मत अंकल.. सच मैं तो स्वर्ग में थी... काश यही स्वर्ग है.. वैसे अंकल मुझे पिशाब जैसा लगा वह क्या है.. वह तो पिशाब नहीं था न..."

"नहीं.. शाजिया.. तुम सच में ही बहुत भोली भाली हो.. आज कल के ????, ???? वर्ष की लड़कियां चूद जाते है... और उस रस के बारे में जानते है.. उसे मदन रस कहते है.. या climax पर पहुंचना.. जब लड़की को सेक्स में परम सुख मिलती है तब वह क्लाइमेक्स पर पहुँचती है.. जिसे ओर्गास्म (orgasm) भी कहते है...

कुछ देर दोनों के बीच ख़ामोशी रही। फिर राज ने पुछा "शाजिया अब असली काम शुरू करें?"

शाजिया ने लज्जा से लाल होती अपना सर झकाली और धीरे से अपने सर 'हाँ' में हिलायी। गांगराम अपना लुंगी खींच डाला। अंदर उसके मुस्सल तन कर आक्रमण करने के लिए तैयार है। उसे देखते ही शाजिया की प्राण ऊपर के ऊपर और नीचे के नीचे रह गए।

"बापरे... इतना लम्बा और मोटा..." वह चकित हो गयी और बोली.. "अंकल यह तो बहुत बडा है.. मेरी छोटी सी इसमे कैसे जाएगी..?"

"तुमने इस से पहले किसी का देखि हो...?" राज उसकी छोटी सी चूची को टीपते पुछा।

"नहीं अंकल.. किसीके नहीं देखि ... हाँ मेरा छोटा भाई का देखि हूँ.. वह 14 साल का है लेकिन उसका तो मेरे ऊँगली की उतना भी नहीं है।"

"फिर तुम्हे कैसा मालूम है की मेरा बडा है..." अबकी बार उसने शाजिया की छोटी सी निप्पल तो अपने उँगलियों से मसलते पुछा...

"मेरी एक सहेली है सरोज, मेरी ही उम्र की है। वह भी मेरे जैसे ही एक डॉक्टर के पास काम करती है। उस डॉक्टर का क्लिनिक मेरे डॉक्टर के क्लिनिक के सामने है। सरोज की शादी दो साल पहले हो चुकी है, वह मेरी पककी सहेली है.. उसीने बताया है कि उसका पति का कितना है। वह कह रहि थी की उसका पति का कोई छः इंच का है और पतला भी, वह कहती है की कभी कभी उसे उतना मज़ा नहीं अति है.. उस कुछ और चाहिए होती है।"

"अच्छा...और क्या कहती है तुम्हारि सहेली...." अब राज का एक हाथ उसके मस्तियों को टीप रहा है तो दूसरा उसके जांघों के बीच बुर से खिलवाड़ कर रही है।

बहुत कुछ नही अंकल बस यही की काश उसका पति का और थोड़ा लम्बा और मोटा होता तो शायद उसे मज़ा आ जाता..."
तब तक शाजिया ने राज के खेल का मजा लेते उसके लंड को अपने मुट्ठी में जकड़ी और बोली.." आह अंकल यह कितना अच्छा है.. जी चाह रहा है की चूमूँ.."

"तो चूमों न मेरी बुल बुल रोक कौन रहा है.. आवो मेरे जाँघों में..." और अपने जंघे पैलादि!

शाजिया उसके जाँघों के बीच आयी और झुक कर अपना मुहं अंकल के लंड के पास ले आयी तो उसके नथुनं को एक अजीब सा गंध आया। वह बोलने को तो बोली लेकिन वास्तव में चूमना था तो कुछ हीच किचाई। फिर भी हलके से उस हलबी सुपाडे को नाजूक होंठों से चूमि और फिर जीभ की नोक से टच करी।
"मममम.. शाजिया.. इस्सस.. " राज सीत्कार करा और उसके सर की अपने जांघों में दबाया।
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Re: शाजिया की कमसिन ख्वाहिशें

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राज का सिसकारी सुनते ही शाजिया में जोश आयी और पूरा सुपाड़ा अपने मुहं में ली। उसे चुभलाते उस पर अपने tongue चला रही थी। यहि कहते है न जब सेक्स की बात हो तो प्रकृति (natre) सब सिखा देती है। शाजिया का भी यही हाल था। उसे कोई अनुभव नहीं थी फिर भी एक अनुभवी लड़की की तरह वह राज के लवडे को चाट रहीथी, चूम रही थी और चूस रही थी।
"मममम.. वैसे ही मेरी बुल बुल.. हहआ.. म... क्या मज़ा दे रही हो.. वैसे ही करो... मेरी जान... और वैसे ही .. पूरा लेलो अपने मुहं में..." कहते राज जोर लगा कर अपना पूरा लवड़ा उस अनचुदी लड़की के मुहं में घुसेड़ेने लगा। एक दो बार तो लंड शाजिया की गले में अटक गयी थी।


"आआअह्ह्ह्हह.... अंकल... धीरे से.. मुझे दुःख रहा है.. इतना जोर से मत धकेलो..." वह कही और लंड को मुहं से बाहर निकाली।

लेकिन राज इतना उतावला था की वह शाजिया की बात को अनसुना कर उसके मुहं में अपना लंड घुसेड़ने लगा। शाजिया "हआ.. ममम.. उन. अं...कल.क्ल..." कर रही थी।

पूरे चार पांच मिनिट तक वह उसके मुहं में अपना मुस्सल अंदर बहार करके फिर.. "आआह्ह्ह शाजिया.. मेरी जान.. मेरि निकल गई..." कहते उसके मुहं में अपने लंड के रस से भरने लगा। एक बार तो शाजिया गभरा गयी। राज का गर्म वीर्य उसके मुहं मे भरने लगा तो, क्या हो रहा है उसे समझ में नहीं आया। फिर समझ गयी की अंकल ने उसके मुहं में झड़े है। उसका मुहं एक अजीब सी कासीलापन के साथ साथ नमकीन स्वाद फील कर रही थी।

"ओह अंकल.. ये क्या किया अपने। मेरे मुहं में ही झड़ गए.. बहार तो निकालना था"उस वीर्य को गले के निचे उतारने के बाद वह शिकायत भरे स्वर में बोली।

"ओह नो स्वीट हार्ट.. यह अमृत है.. तुम्हे शायद मालूम नहीं... यह रस पीनेसे और इसे अपने चेहरे पर लेपने से लड़की की सुन्दता बढ़ती है" राज शाजिया की चूची लो टीपते बोला।

शाजिया इतना भोली थी की "क्या सच अंकल..." कह कर पूछी और फिर अपने शरीर पर गिरी उस लंड रस को निकाल निकाल कर चाटने लगी और अपने गालों पर लेपने लगी। जैसे जैसे वह चाटने लगी अब उसे चाट ने से स्वाद मिलने लगा। वह चटकारे लेकर चाटने लगी। फिर दोनों कुछ देर आराम करे।
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