लगभग 5:00 बजे शहनाज की नींद खुली तो उसे खुद पे शर्म भी आई और आश्चर्य भी हुआ की ये क्या हो गया है आज उसे? वो बाथरूम जाकर नहा ली और फिर फ्रेश होकर वसीम के आने का इंतजार करने लगी।
आज रात को खाना खाते वक़्त शहनाज वसीम से राज चाचा के बारे में पूछी की- "राज चाचा अकेले क्यों रहते हैं, इनका परिवार कहाँ गई?"
वसीम को भी ज्यादा कुछ पता था नहीं तो जो मोटा मोटी पता था उसने बताया की "काफी साल पहले एक आक्सिडेंट में इनकी बीवी की मौत हो गई थी और इसने दूसरी शादी नहीं की और बच्चे बाहर रहते हैं..”
शहनाज को अपने स्वाभाव के अनुसार राज पे उसे दया आने लगी की एक इंसान इतने साल अकेले कैसे गुजार रहा है और ऐसे में अगर कोई मेरी जैसी लड़की उसके सामने रहेगी तो वो भला खुद को कैसे रोक पाएगा? पुरुष के जिश्म की जरूरतें होती हैं और राज चाचा ने इतने सालों पे अगर खुद पे काबू किया तो ये तो बहुत बड़ी बात है। ये तो सरासर मेरी गलती है की मैं ही इनकी परेशानी का सबब हूँ"
शहनाज फिर वसीम से पूछी- "इन्होंने दूसरी शादी क्यों नहीं की। इन्होंने पहली पत्नी के मर जाने के बाद भी दूसरी शादी नहीं की...*
वसीम हँसते हुए बोला- "मुझे क्या पता जान की इन्होंने दूसरी शादी क्यों नहीं की? लेकिन नहीं की और अकेले ही अपनी जिंदगी गुज़ार रहे हैं..."
शहनाज की नजरों में अब राज का कद और ऊंचा हो गया। अगले दिन शहनाज एक बजे के पहले काफी उधेड़बुन में थी। अपने दिमाग में चल रही जंग की वजह से वो अपनी पैंटी ब्रा छत पे सूखने तो दे दी थी लेकिन अब क्या करे वो डिसाइड नहीं कर पा रही थी। कभी वो सोच रही थी की पैंटी ब्रा वापस नीचे ले आती | फिर कभी सोचती की मेरी पैंटी ब्रा को हाथ में लेने और उसपे अपना वीर्य गिराने से अगर राज चाचा को संतुष्टि मिलती है तो मैं इसमें खलल क्यों डालूं? कहीं ऐसा ना हो की ये चीज भी छिन जाने से वो अपसेट हो जाएं। अकेले इंसान के मन में बहुत सारी बातें चलती रहती हैं। इसीलिए जो वो कर रहे हैं करने देती हूँ। मैं सोच लूँगी की मुझे पता ही नहीं है, और मैं उनके सामने जाऊँगी ही नहीं ।
शहनाज यही सब काफी देर से सोच रही थी वो जो कर रहे हैं उन्हें करने देने में ही उनकी भलाई है। और उन्हें थोड़े ही पता है की मुझे पता है। आह्ह... कितनी अच्छी खुश्बू आती है लेकिन उससे पता नहीं कल क्या हो गया था मुझे। मैं अब ऊपर जाऊँगी ही नहीं और देर से अपने कपड़े उठाकर लाऊँगी तब तक वीर्य सूख गया होगा। फिर वो सोचने लगी की उन्हें तो पता ही नहीं है की मुझे उनकी हरकत के बारे में पता है। तो उन्हें अपना मजा लेने देती हूँ और मैं अपना मजा लेती हूँ। उन्हें वीर्य गिराकर सुकून मिलता है और मुझे सूँघकर चाटकर सोचते-सोचते एक बजने वाले थे।
शहनाज अचानक उठी और जाकर चाट में स्टोररूम में छिप गई। उसकी सांसें तेज चल रही थी और दिल जोरों से धड़क रहा था।
तय वक़्त पे राज घर आया और रूम का दरवाजा खोलकर अंदर चला गया। शहनाज की धड़कन और तेज हो गई। उसकी सांस लेने की आवाज भी लग रहा था जैसे बाहर जा रही हो। राज लुंगी और गंजी पहनकर रूम से बाहर आ गया। फिर से उसने पैंटी ब्रा को उठा लिया और चूमता हुआ स्टोररूम के दरवाजा के सामने खड़ा हो गया। उसने लुंगी को साइड करके लण्ड को बाहर निकाला और आगे-पीछे करने लगा। आज शहनाज को और अच्छे से लण्ड के दर्शन हो रहे थे। राज के लण्ड और शहनाज के बीच में बस एक डेढ़ मीटर का अंतर होगा।
शहनाज के हिसाब से राज का लण्ड बहुत ही ज्यादा लंबा, काला, बहुत ही मोटा था और सामने से पूरा सुपाड़ा चमकता हुआ उसे दिख रहा था।
राज फुल स्पीड में मूठ मार रहा था और शहनाज वीर्य के बाहर आने का इंतजार कर रही थी। उसे डर भी लग रहा था और मजा भी आ रहा था। राज के लण्ड ने पिचकारी की तरह तेज धार के साथ सफेद गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया, जिसे राज ने ब्रा के दोनों कप में भर दिया और फिर तुरंत ही पैंटी को लण्ड पे दबाकर उसे भिगोने लगा। जब उसका लण्ड शांत हो गया तो उसने हमेशा की तरह शहनाज की पैंटी ब्रा को उसकी जगह में टांग दिया और रूम बंद करता हुआ अंदर चला गया।
शहनाज के लिए अब एक लम्हा भी गुजारना मुश्किल हो रहा था। वो सोची की राज चाचा तो अंदर चले गये और अब 3:00 बजे बाहर आएंगे और दुकान जाएंगे। मैं कपड़े अभी ले जाऊँ या आधे घंटे बाद क्या फर्क पड़ता है ? पसीने से तरबतर हो चुकी थी शहनाज । किसी तरह उसने 5 मिनट गुजारे और फिर स्टोररूम से बाहर आकर ऐसे छत पे आई जैसे नार्मली नीचे से अपने कपड़े ले जाने के लिए आई हो। शहनाज चुपचाप धीरे-धीरे करके अपने कपड़े उठाई और नीचे भागी ।
राज रूम के अंदर से उसे कपड़े उठाते और नीचे ले जाते हुए देख रहा था और उसके चेहरे पे मुश्कान फैल गई। ऐसी शातिर मुश्कान जो शिकारी को तब होती है जब उसका शिकार चारा खाने लगता है।
शहनाज दौड़ती हुई नीचे आई और बाकी सारे कपड़े को टेबल पे फेंकी और पैंटी ब्रा को देखने लगी। पैंटी अलग- अलग जगह से भीगी हुई थी, लेकिन ब्रा के दोनों कप वीर्य से चिप चिप कर रहे थे। शहनाज वीर्य को सूँघने लगी और तुरंत ही नंगी हो गई।
उसने वीर्य से भरे ब्रा को अपने चूची से चिपका लिया। शहनाज सोफे पे सीधा लेट गई और पैंटी को सूँघने चाटने लगी और फिर उसी पैंटी को पहन ली। फिर उसने ब्रा को चूचियों से अलग किया। शहनाज की गोरी-गोरी गोल मुलायम चूचियां वीर्य लगने की वजह से चमक रही थीं। शहनाज ब्रा को अपने चेहरे पे रख ली और पैंटी को नीचे करके चूत में उंगली करने लगी।
शहनाज पागलों की तरह कर रही थी। वो उठकर बैठ गई और पैंटी को उतार दी और ब्रा को पहन ली। फिर वो ब्रा के ऊपर से चूची मसलती हुई चूत में उंगली करने लगी। चूत ने पानी छोड़ दिया और शहनाज शांत हुई।
दौड़कर नीचे आने और पैंटी ब्रा पे लगे वीर्य को सूँघने चाटने की हड़बड़ी के चक्कर में शहनाज अपने घर का दरवाजा बंद करना भूल गई थी।
शहनाज के नीचे आने के दो मिनट बाद राज अपने कपड़े पहनकर चुपचाप नीचे आ गया और छुप कर शहनाज को देखने लगा। वैसे तो उसे शहनाज को देखने के लिए मेहनत करना पड़ता लेकिन दरवाजा खुला होने की वजह से वो पर्दे की आड़ में सब कुछ लाइव देख रहा था। शहनाज के ढेर होने के बाद राज मुश्कुराता हुआ अपने रूम में चला गया। शिकार दाना चुग चुका था और अब बस शिकार करने की देरी थी।
अपने रूम में आकर राज नंगा हो गया और बेड पे लेटकर शहनाज के हसीन जिश्म के सपने देखने लगा की कितना मजा आएगा इस कमसिन काली को चोदने में? कितना मजा आएगा जब ये अपनी टाँगे फैलाकर मेरा मूसल लण्ड अपनी टाइट चूत में लेगी? आहह.. कितना मजा आएगा जब मैं कुतिया बनाकर इसकी गाण्ड मारूँगा? बहुत दिनों तक सस्ती रंडियों को चोदकर लण्ड को शांत किया है, अब वक़्त आ गया है की मेरे इस लण्ड को मस्त माल मिले। मुझे शहनाज को अपनी रंडी बनाना है और इसे दिन रात चोदते रहना है।
