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Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

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rajsharma
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Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

Post by rajsharma »

Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए


आज फिर लेट हो गया, हर बार क्लास में लेट पहुँचती हूं इस ललिता की वजह से - कमरे के दरवाजे पर खड़ी बार-बार घड़ी को देखती डॉली बडबड़ाई कि तभी कमरे से बाहर की ओर भागते हुए ललिता आई - सॉरी यार , तुझे तो पता है कि मैं कितनी आलसी हूँ इसलिए तो कहती हूं कोचिंग टाइम से 2 घंटे पहले जगाया कर मुझे । अब देख हो गए ना लेट ,पर तू मेरी सुनती ही कहा है ?

उसकी बात सुन अब डॉली हैरानी से बोली - मेरी वजह से लेट हो गए हैं या तेरी वजह से ? और तू 2 घंटे की बात कर रही है , मैं 3 घंटे से जगा रही हूं तुझे ।

हमारा कोचिंग टाइम 10 बजे का है और मैं 7 बजे से तुझे जगा रही थी पर मैडम जी जागती ही कहा है ? कुंभकरण की बहन जो है ।

ललिता - अच्छा चल, रास्ते मे सुना लेना जितना सुनाना है । लेट हो रहे है ना ?

अब दोनों पीजी से बाहर निकल सड़क पर आ गईं, उनके कदम तेजी से कोचिंग सेंटर के लिए बस पकड़ने को बस स्टैंड की ओर बढ़ चले ।

डॉली - रोज का नाटक हो गया है तेरा ये।

ललिता - अरे तो हो गए लेट ,क्या हो गया ? हमें कौन सा पढ़ना है - कहते वह हंसने लगी ।

डॉली - हम नहीं, सिर्फ तु । मुझे तो इस बार कैसे भी करके बैंक का यह एक्जाम निकालना ही है । पिछले दो बार से कभी दो नंबर से तो कभी चार नंबर से रह जाती हूं लेकिन इस बार तो निकाल कर ही दम लूंगी ।

ललिता (हंसते हुए) - तू तो अपने पापा की बेटी है ,उनका सपना है तुझे बैंक ऑफिसर बनाने का । ठीक भी है लेकिन यही जिंदगी के कुछ अच्छे दिन है हमारे पास तो थोड़ा मजा तो करना ही चाहिए वरना बाद में मां-बाप शादी कर ही देंगे फिर उसके बाद आजादी कहां मिलेगी - कहते हुए ललिता ने हवा में अपने दोनों हाथों को फैला दिया ।

डॉली ने जल्दी से ललिता के हाथों को नीचे किया - सामने देख बस आ गई है , थोड़ा ध्यान रख वरना जिंदगी से आजादी मिल जाएगी फिर कहना कि ऐसी आजादी और कहाँ ?

बस के रूकते ही दोनों फटाफट से उसमे बैठ गई। ललिता अपनी बातों से डॉली को पूरे रास्ते पकाती रही।

थोड़ी देर मे दोनों कोचिंग सेंटर के सामने खड़ी थी । डॉली उसके अंदर जाने को हुई तो ललिता ने उसे रोक लिया - आज बंक मारते है यार प्लीज ।

डॉली (खींझकर ) - नहीं , एक तो वैसे ही लेट हो गए हैं और तेरा ये रोज का बंक का अलाप । एक काम कर, तू जा घूमने। मैं तो चली - कहते हुए वह कोचिंग सेंटर मे चली गई । ललिता भी अब बेमन से उसके पीछे पीछे चली गई।

तीन घंटे बाद जब डॉली और ललिता कोचिंग से निकले कि डॉली के पापा का फोन आया ।

पापा - कैसी हो बेटा?

डॉली - बढ़िया ।

पापा - ऐसे ही मन लगाकर पढ़ाई किया करो , तुम को बैंक ऑफिसर बनना है । यह सुन डॉली थोड़ी उदास हो गई ।

पापा - क्या हुआ , हमारी बेटी चुप कैसे हो गई ?

डॉली - पापा पिछले दो बार से मैं आपका सपना पूरा नहीं कर पाई , इस बार भी कहीं ....

यह सुनकर डॉली के पापा हँस पड़े - तो क्या हुआ ? दुनिया में सभी लोग बस बैंक ऑफिसर होते हैं क्या ? हां , यह मेरा सपना जरूर है कि तुम बैंक ऑफिसर बनो लेकिन यह तुम्हारे जीवन का कोई आखिरी लक्ष्य नहीं है ।

मैं जानता हूं कि मेरी बेटी मेहनत करती है तो बस वही करो लेकिन याद रखना , तुम चाहे बैंक ऑफिसर बनो या ना बनो पर मेरी बेटी हमेशा रहोगी । हमेशा स्वाभिमान और खुद्दारी से जीना , कभी कोई ऐसा काम नही करना कि तुम खुद से ही नजरे ना मिला पाओ । जो भी करो , गर्व से करो।

डॉली ( मुस्कुराकर ) - जी पापा। मैं हमेशा यह बात याद रखूंगी ।

पापा - चलो , अब मुझे भी जाना है - कह कर फोन रख दिया।

ललिता - वाह यार, तेरे पापा ने अपने सपने से तुझे आजाद कर दिया है । तू फालतू ही टेंशन लेती है । अब तो चल यार , थोड़ा घूम आते है आस पास ।

डॉली ( हंसते हुए ) - मेरे पापा ने आजाद किया है पर तेरे पापा ने तुझे आजाद नहीं किया । तुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ता ?

ललिता (लापरवाही से ) - अरे तो ऑफिसर बनके क्या कर लूंगी? वैसे यह सब मैं अपने पापा के लिए ही कर रही हूं कि की पढ़ नहीं रही ढंग से ।

डॉली (हैरानी से ) - वह कैसे ?

ललिता - देख अगले 1 साल में पापा मेरी शादी कर ही देंगे । है ना ?

डॉली - हां तो ?

ललिता - तो अगर मैं बैंक ऑफिसर बन भी गई तो क्या फायदा? अभी 2 महीने में प्री होगा , उसके बाद उसका रिजल्ट आएगा। फिर मेन होगा, फिर उसका रिजल्ट फिर इंटरव्यू और उसके बाद सलेक्शन फिर ट्रेनिंग और उसके बाद जॉइनिंग । इस चक्कर में ही पूरा साल भर से ऊपर ही लग जाएगा लेकिन तब तक तो मेरी शादी हो जाएगी फिर मेरी सैलरी आ जाएगी मेरे ससुराल और पति के पास तोे मेरे पापा का फायदा थोड़े हुआ ? मेरे पापा को क्या मिलेगा? कुछ नहीं ना, उल्टा शादी में दहेज और देना पड़ेगा ।

तो फिर मैं क्यों मदद करूं नौकरी कर अपने ससुराल वालों की जिन्हें मै जानती भी नहीं कि कौन होंगे वो ? बिल्कुल नहीं मैं उनके लिए इतनी मेहनत क्यों करूं ?

डॉली - तेरा कुछ नहीं हो सकता । तू एक काम कर, पापा से कह देती कि तेरे बस का नहीं है यह सब ।

ललिता - पागल है क्या ? अगर मैंने ऐसा कह दिया तो 1 साल में नहीं 1 महीने में ही मेरी शादी करवा देंगे यार । इसी के बहाने तो कुछ वक्त के लिए आजादी मिल रही है खुल के जीने की ।

डॉली यह सुनकर हंसने लगी- तु सच में चापली ही है।

ललिता - श्श..... कोई सुन लेगा यार ,फिर सबको पता पड़ जाएगा कि मेरी मम्मी मुझे चापली कह कर बुलाती है ।

डॉली - यह बात तो सबको वैसे ही पता पड़ जानी है तेरी बातें सुन के ।

ललिता (मुंह फुलाते हुए ) - जा , मैं नहीं बात करती तुझसे ।

डॉली - हाँ , जैसे मै तो जानती नहीं कि मेरी चापली खाना खाए बिना रह सकती है पर बात बनाए बिना नहीं । अच्छा चल तुझे आइसक्रीम खिलाती हूं ।

ललिता ( खुशी से उछलते हुए ) - फिर मैं तुझे माफ करती हूँ ।

दोनों आइसक्रीम खाकर अपने पीजी में आ गई ।

ललिता - चल, बाकी लोगों से मिलते हैं । भावना , मीरा यही है ना आज।

डॉली - तू चल, मैं भी आती हूं ।
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(हुस्न की आग़ और इश्क की बारिश Running ) ......(Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए ) ......(उलझन मोहब्बत की ) ......(शिद्द्त - सफ़र प्यार का ) ......(प्यार का अहसास ) ......(वापसी : गुलशन नंदा) ......(विधवा माँ के अनौखे लाल) ......(हसीनों का मेला वासना का रेला ) ......(ये प्यास है कि बुझती ही नही ) ...... (Thriller एक ही अंजाम ) ......(फरेब ) ......(लव स्टोरी / राजवंश running) ...... (दस जनवरी की रात ) ...... ( गदरायी लड़कियाँ Running)...... (ओह माय फ़किंग गॉड running) ...... (कुमकुम complete)......


साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
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Re: Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

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ललिता उनके कमरे में चली गई । अब डॉली जैसे ही कमरे से निकली कि उसका फोन बज उठा - यह किसका नंबर है , वह सोच में पड़ गई । पता नहीं किसका होगा , उठाऊँ या नहीं ? वह अभी इसी कशमकश में थी कि फोन बजना बंद हो गया - लगता है कोई गलती से लग गया होगा और अगर कोई जान पहचान का हुआ तो दोबारा कर देगा ।

डॉली अपने दोस्तों से मिलने उनके कमरे में चली गई । शाम होते-होते वह उस फोन के बारे में भूल ही गई ।

डॉली अब पढ़ाई कर रही थी और उसके पास ही ललिता अपने बिस्तर पर लेटी दोस्तों से चैटिंग कर रही थी कि तभी डॉली का फोन उठा ।

उसका फोन ललिता के बगल में ही पड़ा हुआ था। ललिता ने फोन उठाया तो देखा कि अनजान नम्बर है - पता नहीं यार , नंबर है कोई - कहते हुए उसने हाथ उठा डॉली की ओर फोन बढ़ा दिया कि देख तो, किसका नंबर है ?

डॉली ने देखा कि यह तो वही दोपहर वाला नंबर है , उसने फोन उठाया - हेलो ।

दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई।

डॉली ने एक बार फिर कहा - हेलो , कौन बोल रहा है लेकिन दूसरी तरफ एकदम सन्नाटा पसरा था।

डॉली ने गुस्से में फोन काट दिया ।

ललिता - क्या हुआ ,किसका नंबर था ?

डॉली - पता नहीं यार , यह दोपहर को भी आया था पर उठाया नही था। अब उठाया है तो दूसरी तरफ से कोई बोल ही नहीं रहा - कहते हुए उसने वापस ललिता की तरफ अपना फोन बढ़ा दिया - ले रख ले ।

ललिता - यार मैं चैटिंग कर रही हूं , डिस्टर्ब मत कर।वही रख ले अपने पास।

डॉली - अच्छा बता कहां जगह दिख रही है तुझे इस टेबल पर ? किताबों से भरा पड़ा है , वही रख लेना।

ललिता - ला , इधर ही रख तु - कहते हुए उसने फोन अपने बगल में रख लिया ।

अब थोड़ी देर बाद फिर से उठा , डॉली ने पलट कर ललिता की ओर देखा तो वह गुस्से से उसे ही देख रही थी।

डॉली - साँरी , कह कर मुस्कुरा दी ।

ललिता ने फोन उठाकर देखा तो बोली - यह फिर वही नंबर है।

डॉली अब परेशान हो गई - पता नहीं यार , जब कोई बोल ही नहीं रहा तो क्यों बार-बार फोन कर रहा है ?

ललिता - तू परेशान मत हो, इसे तो मैं देखती हूं , कहते हुए उसने फोन उठाया - हेलो ।

दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आई।

ललिता जोर से चिल्लाई - हेलो ।

दूसरी तरफ से जवाब में फिर वही खामोशी मिली ।

ललिता गुस्से में बोली - अरे भैया जब बात करनी ही नहीं है तो क्यों बार-बार फोन करके अपना और हमारा टाइम खराब कर रही हो ? बात करने में शर्म आ रही है या मुंह में जुबान ही नहीं है ? हेलो बोलेगा कोई या फोन काट दूं पर कोई नहीं बोला।

ललिता - अगर तूने अगली बार फोन किया ना तो तेरा मुंह तोड़ दूंगी इसी फोन में से निकल कर, रख फोन गधे कहीं के। दोबारा फोन किया तो सीधा पुलिस को नंबर दे दूंगी - कहते हुए उसने फोन काट दिया।

ललिता की बात सुन डॉली हँसने लगी - तुमने तो कमाल कर दिया।

ललिता - अरे यार लातों के भूत बातों से नहीं मानते । कब से दिमाग खराब कर रहा है , बोलना है तो बोल । अगर अगली बार फोन आए तो बताना मुझे , ऐसी सुनाऊंगी कि फोन करना ही भूल जाएगा।

डॉली - वैसे मुझे लगता नहीं है कि इसके बाद वह दोबारा फोन करेगा और अगर करेगा भी तो तू तो है ही ।

ललिता (हंसते हुए) - शुक्रिया शुक्रिया लेकिन कभी कोई ऐसा फोन आए तो सुना दिया कर ढंग से। जितना डरेगी , लोग उतना डराऐंगे।

उसके बाद सच में वह फोन दोबारा नहीं आया । अगले दिन डॉली और ललिता का दिन यूं ही मस्ती करते हुए गुजर गया । रात के 12 बज रहे थे , डॉली और ललिता अपने बिस्तर पर चैन की नींद सो रही थी कि डॉली का फोन बज उठा ।

डॉली ने अधखुली आंखों से अपने पास रखे टेबल पर से उठाया तो नम्बर देख चौक गई - यह तो वही अनजान नंबर है । मुझे तो लग रहा था कि चापली की फटकार सुनने के बाद दोबारा फोन नहीं करेगा । लगता है कोई बेशर्म, है ।

वह अपने बिस्तर से उठी और पास में सो रही ललिता को जगाया लेकिन ललिता तो घोड़े बेच कर सो रही थी ।

डॉली ने फोन उठाया नहीं , वह फोन को देखती रही । फोन बजना बंद हो गया । डॉली ने राहत की सांस ली और वापस अपने बिस्तर की ओर बढ़ी कि फोन फिर बज उठा।

डॉली ने सोचा कि फोन बंद कर दे लेकिन यह कोई हल तो है नहीं क्योंकि मैं कब तक बंद रखूंगी फोन को फिर उसे ललिता की बात याद आई कि सुनाया कर ऐसे लोगों को ।

डॉली ने फोन उठाया और गुस्से में बोली - हेलो , कौन है जो आधी रात को फोन करके बार-बार तंग कर रहा है । कहीं से नंबर मिल गया तो क्या तुम हर वक्त फोन मिलाते रहोगे ? अगर बात करने का इतना ही शौक है तो अपनी मां बहन को मिलाओ लेकिन दोबारा फोन किया तो तुम्हें ढंग का सबक सिखाऊंगी डॉली ने एक सांस में यह सब बोल दिया । लगता है , ललिता का असर उस पर भी हो रहा है - डॉली यह सोच ही रही थी कि उसके कानों में आवाज गूंजी - बोल दिया या कुछ और भी बाकी है ?

डॉली ने ध्यान दिया दूसरी तरफ से किसी लड़के की आवाज है लेकिन उसके बोलने के तरीके और आवाज से तो ऐसा नहीं लग रहा था कि वह कोई लोफर है पर यह है कौन?

डॉली अब खामोश रही , दूसरी तरफ से वह लड़का बार-बार बोल रहा था - हेलो ? हेलो डॉली , तुम सुन रही हो ?

डॉली अपना नाम सुनकर हैरान रह गई कि यह लडका उसका नाम कैसे जानता है ?

डॉली ने खुद को संभाला और हडबड़ाते हुए बोली - कौन बोल रहा है ?

दूसरी तरफ से लड़का बोला - मैं जय बोल रहा हूं ।

डॉली सोच में पड़ गई - कौन जय ? मैं तो किसी जय को नहीं जानती थी पर वह यह भी नहीं जानती थी इसके बाद उसकी जिंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी.....

डॉली - जय ? कौन जय ? मैं किसी जय को नहीं जानती।

जय यह सुनकर हंसने लगा - तो मैंने कब कहा कि तुम मुझे जानती हो ?

डॉली - तो फिर तुम मेरा नाम कैसे जानते हो ?कहां से मिला मेरा नंबर तुम्हें ?

जय - नंबर कहां से लिया यह मैटर नहीं करता लेकिन क्यों लिया , यह मैटर करता है ।

डॉली (गुस्से में ) - अच्छा बताओ फिर क्यों लिया?

जय ( मुस्कुरा कर) - मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूं।

डॉली - दिखा दिया ना अपना असली रंग ? तुम सब लड़के एक जैसे होते हो । पहले कहीं से नंबर ले लेते हो फिर लड़की को अच्छे होने का नाटक कर दिखाते हो कि मैं तो बस दोस्ती चाहता हूं उसके कुछ दिन बाद ही तुम अपना असली रंग दिखा देते हो ।-तुम्हारे जैसे मजनू को मैं अच्छे से पहचानती हूं ।

जय - मैं मानता हूं कि आजकल लड़के ऐसा करते हैं लेकिन मेरा यकीन मानो मैं ऐसा नहीं हूं , मैं बस तुमसे दोस्ती करना चाहता हूं । ना तो मैं कोई लोफर हूं और ना ही कोई मजनू ।

डॉली - अच्छा अगर तुम्हारे दिल में कुछ और नहीं था तो पहले तीन बार कॉल करने पर बोले क्यों नहीं और मैं दोस्ती क्यों करूं तुमसे ? मान ना मान मैं तेरा मेहमान ?

जय - अच्छा ठीक है , मत करो । मैं फोर्स नहीं करूंगा पर तुम कम से कम तीन-चार दिन मुझसे बात करके तो देखो, अगर उसके बाद तुम्हें जरा भी शक हो मुझ पर तो फिर मैं कभी फोन नहीं करूंगा तुम्हें । रही बात पहले ना बोलने की तो सच यह है कि शुरू में मैं ही तुमसे बात करने में घबरा रहा था कि कैसे बात करूं और क्या कहूं ? तीसरी बार में हिम्मत कर बात करने की सोची तो तुम्हारी दोस्त ने फोन उठा अच्छा खासा सुना दिया । रही सही कसर अब तुमने अभी पूरी कर ली - कहते हुए वह हँसने लगा ।

डॉली - और मेरा नंबर कहां से मिला? मुझे कैसे जानते हो, इस सवाल का जवाब नहीं दिया अभी ।

जय - यह नहीं बताऊंगा कि नंबर कहां से मिला लेकिन मैं तुम्हारे बारे में सब जानता हूं कि तुम यहाँ कोचिंग के लिए रहती हो ,तुम्हारे साथ तुम्हारे दोस्त ललिता भी रहती है । तुम्हारे पापा प्राइवेट बैंक में काम करते हैं लेकिन चाहते हैं कि तुम सरकारी बैंक में जॉब करो । तुम अपने घर से 50 किलोमीटर दूर यहां रहती हो क्योंकि तुम्हारे पापा नहीं चाहते कि तुम्हारी पढ़ाई में कोई भी डिस्टर्ब हो।
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Re: Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

Post by rajsharma »

जय ने डॉली के स्कूल कॉलेज सब के बारे में सही सही बताया तो डॉली के जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई कि यह लड़का उसके बारे में इतना कैसे जान सकता है ? वह अपने दिमाग के घोड़े दौडाने लगी कि कौन हो सकता है यह लड़का?

डॉली को चुप देख जय बोला - ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है। मैंने कहा ना कि तुम मुझे नहीं जानती फिर क्यों बेवजह दिमाग के घोड़े दौड़ा रही हो ।

डॉली - तो तुमने मुझे फोन करने से पहले ही मेरी जानकारी निकाल ली है ? लगता है कोई लंबा प्लान है तुम्हारा लेकिन मैं ऐसी लड़की नहीं हूं कि तुम्हारी बातों में आ जाऊंगी। तुम्हारे जैसे लोगों को मैं अच्छे से जानती हूं , दोबारा फोन मत करना - कहते हुए उसने फोन काट दिया ।

डॉली काफी देर तक बिस्तर पर लेटी लेटी सोचती रही कि कौन है यह लड़का और मेरे बारे में इतना सब कुछ कैसे जानता है ? जय का फोन फिर नहीं आया।

अगले दिन रविवार था तो कोचिंग की छुट्टी थी । ललिता और डॉली रूम पर ही थी।

ललिता ने डॉली को आज कुछ शांत सा देखा तो बोली - क्या बात है ?आज कैसे तेरी बोलती बंद है ? कोई परेशानी है क्या?

डॉली - यार समझ नहीं आ रहा कैसे कहूं ?

ललिता - मुंह से बोल और किससे बोलेगी? इसमें समझने की बात क्या है ?

डॉली (खींझते हुए ) - मुझे पता है कि मुँह से ही बोला जाता है चापली ।अब चुपचाप मेरी बात सुन, कहते हुए उसने रात की सारी बात बताई।

ललिता ( गुस्से में ) - तु ना पागल है । मुझे रात में जगाया क्यों नहीं ? मैं ऐसी ऐसी गाली देती है उसकी अकल ठिकाने आ जाती।

डॉली - तू तो बस चुप ही बैठी रह , पूरी दुनिया जानती है चापली तुझे कि तू मिनी कुंभकरण है ।एक बार सो गई तो तेरा जागना मुश्किल है । पता है कितनी बार जगाया मैंने तुझे। वैसे मुझे लग तो नहीं रहा उसके बात करने के तरीके से कोई लोफर टाइप है?

ललिता - ओह! तु कोई संत, ज्ञानी है जो उसकी आवाज से पता चल गया कि जय लोफर टाइप नहीं है ?

डॉली - वह मुझे नहीं पता लेकिन जो लगा , वह कह दिया।

ललिता - कहीं तुझे वो पसंद तो......

डॉली (गुस्से मे) -बिल्कुल नहीं।

ललिता - अरे हाँ मै तो भूल ही गई कि तुझे तो अभी तक एक ही लडका अच्छा लगा है जो स्कूल मे तेरा वो सुपर सीनियर था ना जिसने कभी तेरी ओर देखा तक नहीं और जिसकी शक्ल भी तुझे ढंग से याद नहीं है । चल,एक काम कर - अगली बार इस जय का फोन आए तो मेरी बात कराना इससे, मैं भी तो देखूं ऐसी कौन सी शराफत की चाशनी में डुबोकर बातें की है इसने कि तुझे बेचारा लगा है।

उसी दोपहर जब डॉली और ललिता एक साथ बैठकर बातें कर रही थी कि डॉली के फोन पर जय का फोन आया ।

ललिता ने झाँक कर देखा तो फोन में जय का नाम फ्लैश हो रहा था - अरे वाह, एक रात में ही नाम भी सेव कर लिया ? ला दे मुझे । अभी इसने जो शराफत का चोला ओढ रखा है, मेरी जली कटी सुन दो मिनट मे उतार फेंकेगा - कहते हुए ललिता ने डॉली के हाथ से फोन लिया और कॉल रिसीव की।

ललिता - श्रीमान जय महोदय, आपसे निवेदन है कि हमारे मित्र को बार-बार फोन कर परेशान ना करें । हम आपके जैसे दुष्ट जाति के लोगों को भली-भांति जानते हैं कि अभी तो आप भगवान राम की तरह मर्यादा वाले बनेंगे फिर कुछ ही दिनों में रावण वाला नीच रूप दिखाने से भी गुरेज नहीं करेंगे पर याद रखना कि हम तुम्हारी चिकनी चुपड़ी बातों में नहीं आएंगे इसलिए यह सारा घी तुम अपने घर की रोटियाँ चुपडने में लगाओ -कहते हुए उसने फोन काट दिया ।

डॉली नाराज होकर बोली - यार ऐसे बात करने की क्या जरूरत थी ? उसने कुछ गलत बात थोड़े ही की थी ।

ललिता - हे भगवान , क्या लड़की है ? जब वह कोई गलत बात कहेगा तो क्या उसे तभी जवाब देगी? यह लोग ऐसे ही होते हैं, ज्यादा भाव देने की जरूरत नहीं है इसे । चल थोड़ी देर घूम कर आते है - ललिता डॉली को अपने साथ लेकर बाहर निकल गई ।

जय दिन में दो तीन बार फोन कर ही लेता था लेकिन हर बार ललिता उसे उल्टा सीधा सुना कर फोन रख देती थी लेकिन जय बस चुपचाप सब कुछ सुनता रहता था ।

डॉली रात में फोन को स्विच ऑफ कर देती थी क्योंकि चापली ने बोला था कि अगर मुझे पता चला तूने फोन बंद नहीं किया है तो फिर तेरी खैर नहीं ।

इन दस दिनों में डॉली को आदत हो गई थी जय के फोन के आने की और ललिता को भी क्योंकि वह कितना भी बुरा बोलती उसको ,वह बस चुपचाप सुनता रहता था ।
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Re: Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

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11 वें दिन दोनों दोस्त जय के फोन का इंतजार करती रहीं लेकिन उसका फोन नहीं आया । ललिता बार-बार डॉली से पूछ रही थी कि चैक तो कर फोन सही है तेरा या नहीं ? आज कैसे जय का फोन नहीं आया?

डॉली - क्यों ,तू भी तो यही चाहती थी ना कि उसका फोन नहीं आए। मैंने तो पहले ही कहा था कि यह ऐसा लड़का नहीं लगता वरना 10 दिन तक चुपचाप क्यों सुनता रहता तेरी बकवास?

ललिता - लेकिन अब तो बंद हो गया ना ? क्योंकि अब उस पर सहन नहीं हुआ होगा कि कहीं वह अपना असली रंग ना दिखा दे इसलिए फोन करना ही बंद कर दिया ।

अगले चार-पांच दिनों तक जय का कोई फोन नहीं आया। डॉली का मन अब पढ़ाई में नहीं लग पा रहा था ।

एक दिन शाम को डॉली और ललिता ने डिसाइड किया कि वह पीसीओ से जय को फोन करेंगी। जरा देखे तो उसका नाम सच में जय है या कुछ और ? ललिता ने डॉली को समझा दिया कि तुफोन करना क्योंकि जय से तेरी एक ही बार बात हुई है। ललिता ने तो उसे इतनी गालियां दी थी कि जय अब भीड़ में से भी उसकी आवाज पहचान ले लेकिन वह शायद डॉली की आवाज नहीं पहचाने।

अगले दिन कोचिंग जाने से पहले दोनों पास ही के पीसीओ पर गईं और जय को फोन लगाया । एक बार तो उसने फोन उठाया नहीं लेकिन दूसरी बार में फोन उठा लिया।

जय - हेलो।

मैली - हेलो ।

जय - कौन ? आप कौन बोल रहे हैं ?

डॉली - मुझे मोहन से बात करनी है ।

जय शायद थोड़ा जल्दी में था - नहीं , यह मोहन का नंबर नहीं है ।

डॉली -लेकिन मुझे तो यही नंबर दिया था मोहन ने ।

जय - अरे नहीं है उसका नंबर, मैंने कहा ना आपसे ।

डॉली - तो फिर किसका है ,कौन बोल रहे हैं ?

जय - मैं जय बोल रहा हूं - कहकर उसने फोन काट दिया।

डॉली - यार इसनेे तो फोन ही काट दिया!

ललिता - नाम बताया ?

डॉली - हां नाम तो जय ही बताया ।

अब दोनों कोचिंग सेंटर चली गईं, वहां से 3 घंटे की क्लास लेकर वापस पीजी पहुंची और खाना खा कर आराम करने लगी कि तभी एक बार फिर डॉली का फोन बज उठा ।

डॉली ने फोन उठा कर देखा तो जय का फोन था।

ललिता में जब जय का फोन देखा तो बोली - यह कैसे फोन कर रहा है इतने दिनों बाद ? उठा जल्दी।

डॉली - लेकिन फिर तू ही तो मना करती है ।

ललिता - अरे पागल लड़की उठा कि आखिर उसने आज फोन क्यों किया है ? और फोन स्पीकर पर डाल ।

डॉली ने फोन का स्पीकर आँन किया - हेलो ।

जय - क्या बात है ? आज ललिता ने फोन नहीं उठाया ?लगता है उसके पास बोलने के लिए अब कुछ नहीं है ।अगर है , तो वह भी कह दे ।

डॉली ने ललिता की ओर देखा, ललिता यह सुनकर झेंप गई ।

डॉली - अच्छा आज फोन क्यों किया ?

जय हँसते हुए बोला - यही बात तो मैं भी जानना चाहता हूं कि तुमने सुबह फोन क्यों किया?

यह सुन डॉली , ललिता एक दूसरे को हैरानी से देखने लगी कि इसे कैसे पता चला ?

जय - अब तुम सोच रही होगी कि मुझे कैसे पता चला ? मै डॉली की आवाज पहचान गया था पर जल्दी में था तो चुप रहा । तुम जाना चाहती थी ना कि मैंने तुमसे झूठ तो नहीं बोला?

डॉली (गुस्से में ) - हां तो क्या हुआ? तुमने भी तो मेरे बारे में सारी जानकारी निकाली है ।

जय ( हंसते हुए ) - तुम मुझसे वैसे ही पूछ लेती, मैं बता देता तुम्हें ।

तभी ललिता बोल पडी - अब तो पूछ रहे हैं ना, तो बताओ?

ललिता की आवाज सुन जय एक पल को चुप हो गया फिर बोला - ओह तो तुम भी यहां हो ? ठीक है , अगर तुम लोगों का हो गया हो तो मैं बोलूं ?

डॉली - हां बोलो, हम सुन रहे हैं ।

जय - डॉली मैं तुम्हें कैसे जानता हूं , यह तो मैं बाद में बताऊंगा लेकिन यह सच है कि मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूं । मेरा नाम जय शर्मा है , मैं आर्मी में लेफ्टिनेंट हूं ।
मैंने तुम्हें अभी तक देखा भी नहीं है कि तुम कैसी दिखती हो लेकिन मैं बस इतना चाहता हूं कि तुम मेरी दोस्त बनो।

लेफ्टिनेंट शब्द सुनते ही ललिता के चेहरे की हवाइयां उड़ने लगी क्योंकि उसने पिछले 10 दिनों में जय को बहुत कुछ उल्टा सीधा सुनाया था । कहीं इसने मुझे जेल भेज दिया तो?

डॉली (हैरानी से )-तुम लेफ्टिनेंट ?

जय - हां । वैसे ललिता ने मुझसे बहुत कुछ कहा पर मैं इसलिए चुप रहा क्योंकि वह अपनी जगह सही थी । अब ललिता कुछ बोल क्यों नहीं रही ?

ललिता डरते हुए बोली - तुम मुझे जेल तो नहीं भेजोगे ?

यह सुनकर जय हंस पड़ा - सोच तो रहा हूं लेकिन अगर तुम इस डॉली को मुझसे दोस्ती के लिए मना लोगी तो मैं तुम्हें माफ कर सकता हूं ।

ललिता ने डॉली को देखा - यार प्लीज हां बोल दे , मुझे नहीं जाना जेल। प्लीज प्लीज प्लीज हां बोल दे ।

डॉली - ठीक है, मैं दोस्ती के लिए तैयार हूं लेकिन बस दोस्ती।

जय - मंजूर है , मुझे भी बस दोस्ती ही चाहिए ।
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(हुस्न की आग़ और इश्क की बारिश Running ) ......(Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए ) ......(उलझन मोहब्बत की ) ......(शिद्द्त - सफ़र प्यार का ) ......(प्यार का अहसास ) ......(वापसी : गुलशन नंदा) ......(विधवा माँ के अनौखे लाल) ......(हसीनों का मेला वासना का रेला ) ......(ये प्यास है कि बुझती ही नही ) ...... (Thriller एक ही अंजाम ) ......(फरेब ) ......(लव स्टोरी / राजवंश running) ...... (दस जनवरी की रात ) ...... ( गदरायी लड़कियाँ Running)...... (ओह माय फ़किंग गॉड running) ...... (कुमकुम complete)......


साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
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Re: Romance प्यार ही काफी है मेरे लिए

Post by rajsharma »

उस दिन के बाद से डॉली , जय दोस्त बन गए। दोनों में फोन पर बात हुआ करती थी । जय उसे अपनी रेजीमेंट और दोस्तों के बारे में बताता रहता था । ललिता भी जय से बात करती थी पर कम क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसने कुछ उल्टा सीधा बोल दिया तो जय उसे जेल ना भेज दे ।

20 दिन हो गए थे डॉली और जय को बातें करते हुए। दोनों अब एक दूसरे को अच्छे से समझ चुके थे।

एक रात डॉली और जय आपस में बातें कर रहे थे, डॉली ने नोटिस किया कि जय आज कुछ उदास सा है ।

डॉली - क्या बात है, आज कैसे शांत हो ?

जय - डॉली मैंने तुमसे कुछ छुपाया है ।

डॉली यह सुनकर नाराज होकर बोली - क्या छिपाया है, बताओ मुझे अभी ।

डॉली को अब डर लगने लगा कि कहीं किसी मुसीबत में तो नही फंस गई । उसने ललिता की ओर देखा पर वह तो चादर तान कर सो रही थी ।

जय - तुम सुन रही हो ना ?

डॉली - हां ।

जय - दरअसल तुमसे दोस्ती करने के पीछे एक बहुत बड़ी वजह थी .....

डॉली अब घबराते हुए बोली - कहीं तुम मेरा कोई इस्तेमाल तो नहीं कर रहे थे ?

जय ( हंसकर ) - नहीं , ऐसा कुछ भी नहीं है , वह दरअसल....

डॉली - जल्दी बताओ ना, यहां मुझे बहुत टेंशन हो रही है।

जय ने अब एक गहरी सांस ली और बोला - मेरी बात ध्यान से सुनो डॉली , मेरा एक दोस्त है राज शर्मा और वह तुम्हें बहुत पसंद करता है । उसी ने मुझे तुम्हारी सारी डिटेल्स और नंबर दिया था , वह तुमसे बात करने में बहुत हिचकिचा रहा था इसलिए वह चाहता था कि मैं तुमसे बात करूं और उसके बारे में बताऊँ कि वह तुम्हें पिछले 7 सालों से बहुत पसंद करता है ।

डॉली के लिए जय की कही हर बात समझ से बाहर थी - कौन राज ? उसे तो जानती तक नहीं फिर वह मेरे बारे में इतना कैसे जानता है और 7 साल पहले तो मैं 10th क्लास में थी फिर वह कहां से पसंद करने लगा ?

कि जय ने उसे पुकारा - डॉली ? डॉली तुम सुन रही हो ना? कुछ तो बोलो?

डॉली - क्या बोलूं ? तुमने तो मुझे भूल भुलैया में डाल दिया। अभी तक तो मैं तुम्हारे बारे में ही सब कुछ नहीं जान पाई थी कि अब यह राज कौन है , मैं तो उसे भी नहीं जानती।

जय - वह मेरा बेस्ट फ्रेंड है, उसने कहा है कि कल दोपहर 2:00 बजे को तुम्हें फोन करेगा तभी तुम उससे अपने सारे सवालों के जवाब मांग लेना। वैसे तुम्हारे एक सवाल का जवाब तुम्हें मिल ही गया।

डॉली ( हैरानी से ) - क्या ? किस सवाल का जवाब ?

जय - तुम हमेशा जानना चाहती थी ना कि मैं तुम्हें कैसे जानता हूं ? कैसे तुम्हारे बारे में इतना सब कुछ पता है ? याद आया ? वो जवाब मिल गया ।

डॉली - हां लेकिन मैं क्या बात करूंगी उससे ? तुम तक तो ठीक है लेकिन अब यह राज भी आ गया। कल कोई और भी..

जय गंभीर होकर बोला - बस , हर बात मजाक नहीं होती। तुम एक बार राज से बात करो, उससे पूछो कि कैसे जानता है वह तुम्हें ? उसके अलावा कभी कोई और नहीं आएगा हमारे बीच में । मैं दोस्त हूं तुम्हारा और वादा करता हूं कि अगर कल राज से बात करने के बाद अगर तुम दोबारा उससे बात नहीं करना चाहोगी तो वह फिर कभी तुम्हें फोन नहीं करेगा , यह वादा है मेरा तुमसे ।

डॉली थोड़ा शांत हो गई ।

जय - चलो अब तुम सो जाओ, कल कोचिंग के लिए भी जाना है तुम्हें ।

डॉली - तुम राज को कैसे जानते हो ? मतलब दोस्ती कैसे हुई ?

जय - वह भी एक लेफ्टिनेंट है । उसकी और मेरी ट्रेनिंग साथ साथ ही हुई थी और दोस्ती भी तभी हुई । रहने वाला तो तुम्हारे शहर का ही है । बाकी वो बता ही देगा कल ।

डॉली - ठीक है ।

जय ने फोन काट दिया ।
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