भाभी का बदला

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jay
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Re: भाभी का बदला

Post by jay » 05 Dec 2017 14:40

super hot update bhai
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(ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना running.......).
(वक्त का तमाशा running)..
(ज़िद (जो चाहा वो पाया) complete).
(दास्तान ए चुदाई (माँ बेटी बेटा और किरायेदार ) complete) .. (सातवें साल की खुजली complete)
(एक राजा और चार रानियाँ complete).............(माया complete...)-----(तवायफ़ complete).............
(मेरी सेक्सी बहनें compleet)........(दोस्त की माँ नशीली बहन छबीली compleet)............(माँ का आँचल और बहन की लाज़ compleet)..........(दीवानगी compleet )....... (मेरी बर्बादी या आबादी (?) की ओर पहला कदमcompleet)........(मेले के रंग सास,बहू और ननद के संग)........


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(कोई तो रोक लो)
(ननद की ट्रैनिंग compleet)..............( सियासत और साजिश)..........(सोलहवां सावन)...........(जोरू का गुलाम या जे के जी).........(मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन)........(कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास)........(काले जादू की दुनिया)....................(वो शाम कुछ अजीब थी)

Re: भाभी का बदला

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Dolly sharma
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Re: भाभी का बदला

Post by Dolly sharma » 05 Dec 2017 19:46

superb ......... waiting next

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rajsharma
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Re: भाभी का बदला

Post by rajsharma » 06 Dec 2017 12:48

धन्यवाद दोस्तो
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
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rajsharma
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Re: भाभी का बदला

Post by rajsharma » 06 Dec 2017 13:15

भाभी मालकिन से सारी ड्रिंक एक साथ पी ली और फिर से गिलास में ड्रिंक डाली और मुझसे बोली-“रंडी बैठी क्यों है? बहन की लौड़ी चूत कौन तेरा बाप चाटेगा या तेरी रंडी माँ ? बहन की लौड़ी चाट मेरी चूत को और पी मेरा रस…”

मैं भाभी मालकिन गुस्सा देखते ही डर गई और तुरंत ही उनकी चूत के पास आ गई। भाभी ने मेरे बाल पकड़े और अपनी चूत पर मुँह दबा दिया। मैं पैंटी के ऊपर से ही चूत को चाटने लगी। भाभी की चूत गीली होने के कारण उनका रस मजबूरी में पी रही थी। मुझे कुछ अजीब सा लगा, नमकीन सा टेस्ट था और मैं चाट रही थी। भाभी अपनी चुची को मसलने लगी और-“आआआअ साली रांड़ चाट अपनी मालकिन की चूत …” और मैं चाट रही थी।

फिर भाभी ने मुझे अपनी पैंटी उतारने को बोला तो मैंने खुद की पैंटी निकाल दी। भाभी मेरी गोरी चिकनी चूत के देखते ही खुश हो गई और हाथ फिराकर बोली-“वाउ… मेरी रंडी ननद, क्या मस्त चूत है… तुझे तो कोई भी चोद देगा। साली इस सेक्सी चूत को आज मैं खा ही जाउन्गी…”

मैं तो शर्मा गई।

भाभी मालकिन ने मुझे देखा और कहा-“रंडी कैसे शर्मा रही है साली भोसड़ी की?” और फिर भाभी ने खुद की पैंटी उतारने को बोला।

तो मैंने उनकी पैंटी उतार दी, उनकी चूत देखा तो एकदम गीली हुई लाल चूत थी, बहुत प्यारी चूत थी क्लीन सेव की हुई और बहुत गीली थी। मैं देखती ही रह गई।

तभी भाभी मालकिन ने बोला-“अब चाट अपनी मालकिन की चूत । आज तुम मुझे खुश करो, मैं तुमको भी खुश कर दूँगी …”

उसके बाद मैं भाभी की चूत को चाटने लगी। भाभी की चूत बहुत गीली और लाल थी, उनके चूत के दोनों होंट बाहर की तरफ थे।

भाभी मुझसे बोली-“साली इन होंठों को चूस मुँह में लेकर…”

मैं-“जी मालकिन…” और चूस ने लगी।

भाभी सिसकने लगी-“आआऽऽ रन्डी, चुस्स मादरचोद आआऽ अह्ह… उम्म्म्म… बहन की लौड़ी…” और धीरे-धीरे चूत पर ड्रिंक डालने लगी।

मुझे अब उनकी चूत चाटने में मजा आ रहा था और मैं पागल हुए जा रही थी, मुझे सब कुछ अच्छा लग रहा था। मुझे भाभी मालकिन से कोई शिकायत नहीं थी, और फिर ड्रिंक के कारण उनकी चूत को चाटने में और मजा आने लगा, मैं नशे में होने लगी तो मैं जोर-जोर से चाटने लगी। फिर मैं इतनी तेज चाटने लगी की भाभी की चूत को होंठों में भर लिया और काट लिया।

मेरे काटने के कारण भाभी चीख पड़ी-“ओह्ह… रांड़ बहन की लौड़ीऽ छिनाल्ल मादरचोद भोसड़ी की…” और जोर से धक्का दिया तो मैं दूर चली गई। फिर भाभी खड़ी हुई, मेरे बाल पकड़े और मुझे सीधा लेटा दिया। फिर मेरे मुँह पर बैठ गई और मेरे दोनों पैरों को सीधा करके चौड़ा कर दिया, यानी मैं और भाभी मालकिन 69 की पोजीशन में थे, बस भाभी मेरे ऊपर और मैं नीचे थे, और मेरी चूत में एक साथ उसने दो उंगली घुसा दी।

उंगली घुसते ही मैं चीख पड़ी-“हुउऊ माँ ऽ” पर मुँह भाभी मालकिन की चूत के कारण बंद हो गया था तो बस गुन्न्न- गुन्न्न कर रही थी, और भाभी मुझे अपनी दो उंगली से चोद रही थी। उसके बाद मुझे कुछ देर दर्द होता रहा। मैं नीचे दबी रोती और भाभी मेरे मुँह पर चूत रगड़ती रही। फिर मुझे भी मजा आने लगा और मैं भी भाभी की चूत को जीभ से चाटने लगी।

भाभी भी अब सिसकारने लगी-“ऊऊऊओ रंडी चाट साली छिनाल अह्ह… कुतिया जोर से चाट अपनी मालकिन की चूत और हराम्म की लौड़ी… चाट बहनचोद चाट अह्ह… अम्म्म्म… ओह्ह… मुऊउउ अह्ह… पी मेरा रस्स साली… नामर्द की भैन्न रन्डी, मेरी कुतिया…” भाभी पता नहीं क्या-क्या गालियाँ दे रही थी।

और मैं चूत चाटे जा रही थी। भाभी बस चूत को मेरे मुँह पर रगड़ते हुए मुझे चोद रही थी। मैं भी सिसिया रही थी-“ओह्ह… मालकिन मेरी चूत … ओ माँ ऽ हुम्म माल्लकिन ओह्ह… मालकिन चोदो और चोदो… ओह्ह… मजा आ रहा है… भाभी मालकिन प्लीज़्ज़ जोर से…” और मैं भी अब उनका साथ दे रही थी।

उसके बाद भाभी मेरे ऊपर खड़ी हो गई, मेरा पूरा मुँह उनकी चूत के रस से गीला हो चुका था, उनका मुँह मेरी चूत के रस से गीला था। फिर भाभी ने मेरे होंठों को चूस ना शुरू कर दिया तो मुझे और मजा आया, क्योंकी उनके मुँह से मेरी चूत का रस चूस ने में बहुत मजा आया, और मेरे मुँह से वो खुद का रस चाट रही थी।

फिर भाभी ने मुझसे पूछा -“बोल रांड़, मज़्ज़ा आया?”

मैं बस मुश्कुरा दी।

भाभी बोली-“अब है त मेरी ननद रंडी, साली चुदक्कड़ है, त बहुत-बहुत चुदेगी, त बहुत से लण्ड लेगी इस चूत में…”

मैं तारीफ सुनकर बस मुश्कुरा दी। फिर मैं बोली-“मालकिन और कोई हुकुम है अपनी इस रंडी कुतिया के लिए?”

भाभी बोली-“हाँ मेरी कुतिया, आज से तू रोज मेरी चूत की मालीश करेगी ऐसे ही…”

मैं बस हँस दी।

भाभी ने कहा-“चल खड़ी हो…” और मुझे उठाकर सोफे पर बैठा दिया।
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
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rajsharma
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Re: भाभी का बदला

Post by rajsharma » 06 Dec 2017 13:18

मैं और भाभी दोनों पूरी नंगी थी, हमें कोई शर्म नहीं थी। भाभी ने अपनी बेड का साइड बाक्स खोला और उसमें से एक प्लास्टिक का लण्ड निकाला और मुझे दिखाती हुई बोली-“देख रंडी, तेरा भाई मुझे इससे चोदता है। साले के खुद के बस की तो है नहीं तो इससे मेरी चूत को शांत करता है…”

मैं देखती रही, उस प्लास्टिक के लण्ड का साइज 5” इंच लंबा और 2½ इंच मोटा था, उसको भाभी ने पैंटी की जगह बांध लिया और भाभी को अब लण्ड लग चुका था, यानी भाभी अब एक लड़के के जैसे मुझे चोदने को तैयार हो चुकी थी।

भाभी बोली-“मुबारक हो मेरी रंडी कुतिया… आज तेरी चूत की सील टूट ने वाली है…”

मैं थोड़ा डर गई की दो उंगली से इतना दर्द हुआ तो ये तो मेरी चूत को फाड़ देगा।

मैं भाभी से बोली-“प्लीज़ मालकिन, ऐसे ना घुसाओ। मेरी चूत में बहुत दर्द होगा…”

भाभी मेरे पास आई और बोली-“साली अभी तो बहुत भौंक रही थी, और अभी तेरी बिना चुदे चूत फट रही है। साली रांड़, आज ही होगा दर्द फिर तो तुझे मजा आएगा, और रोज लण्ड माँगेगी तू फिर…” और मुझे किस करने लगी।

फिर भाभी ने मुझे हुकुम दिया और बोली-“रंडी चूस अब इस प्लास्टिक के लण्ड को…” मैं सोफे पे बैठी थी, और भाभी ने उसे मेरे मुँह में दे दिया और आगे पीछे करने लगी।

मेरे पूरे जिस्म पर भाभी के दांतों के निशान पड़ गये थे, और मेरा जिस्म गोरे से लाल हो गया था। अब भाभी ने मेरे मुँह को जोर-जोर से चोदना शुरू किया और मेरे बाल कसकर पकड़ लिए। मैं भी धक्के लगाने लगी।

उसके बाद भाभी बोली-“साली रांड़, अपने थुक से पूरा गीला कर दे, नहीं तो आराम से तेरी चूत में नहीं घुसेगा…”

मैं वैसा ही कर रही थी। उसके बाद भाभी मालकिन ने लण्ड को मुँह से निकाला और मेरी टांगों पकड़कर सोफे पर लिटा दिया। मेरा सिर सोफे के किनारे टिका था और गाण्ड बैठने वाले के हिस्से के किनारे पर थी। मेरी गोरी नंगी टांगे हवा में उठी हुई थीं। भाभी ने मेरी चूत पर मुँह लगा दिया और चाटने लगी।

उसका चटना मुझे बहुत मजा दे रहा था और मैं सातवें आसमान पर थी। मैं सब कुछ भूल चुकी थी और बस वासना के सागर में डूब रही थी। भाभी मालकिन एक उंगली घुसाकर मेरी चूत को चाट रही थी बीच-बीच में मेरी चूत को जीभ से चोद रही थी।

उसके बाद भाभी ने मुझसे बोला-“रंडी, अब देख तेरी चूत को कि कैसे ये लण्ड लेती है पूरा ?”

मैं वासना में डूबी बस इतना ही बोली-“भाभी मालकिन बना दो ना रंडी। आज बहुत आग लगी है मेरी चूत में…”

भाभी मालकिन ने मेरी उठी टांगों के नीचले हिस्से, यानी गाण्ड के पास चांटा मारा और बोली-“वाह… मेरी रंडी कुतिया, बहुत जल्दी आ गई चुदने की लाइन पर…”
और मैं सिसकी-“आअह्ह… भाभी मालकिन चोद दे आज मुझे, बना दे रंडी मुझे आह्ह…”

भाभी ने मेरी चूत पर थूक दिया और बोली-“ले रंडी, आज तेरी चूत की सील तोड़कर तुझे आजाद कर देती हूँ …” और भाभी ने मेरी दोनों टांगें पकड़कर उस प्लास्टिक के लण्ड को मेरी चूत पर रगड़ने लगी।

मैं बस सिसिया रही थी-“ओह्ह… भाभी मालकिन…”

भाभी ने वो प्लास्टिक का लण्ड ऐसे बांध रखा था, जैसे कोई सच में लड़के का लण्ड हो, और मेरी चूत पर घिसने लगी। उसका घिसने का अंदाज मुझे और वासना में डुबो रहा था।

भाभी उसे रगड़ रही थी, मेरी चूत का रस उसे गीला कर रहा था, भाभी ने अपने थूक से और गीला कर दिया। फिर भाभी ने उसे मेरी चूत के मुँह के ऊपर लेकर रख दिया और मेरी टांगों को कसकर पकड़ लिया और धीरे-धीरे उसे चूत में घुसाने लगी। मेरे नंगे शरीर में एक तेज सिरहन की लहर आ गई और टांगे कांपने लगी और मीठे से दर्द का एहसास हुआ। भाभी का प्लास्टिक का लण्ड मेरी चूत के मुँह को खोलता हुआ अंदर घुस गया। मुश्किल से एक इंच घुसा होगा कि मुझे थोड़े दर्द का एहसास हुआ।

फिर भाभी ने मुझे एक जोर से झटका दिया, तो भाभी का प्लास्टिक का लण्ड मेरी चूत फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, और मैं कुछ नहीं कर सकी बस भाभी को कसकर पकड़ लिया और चीख उठी-“ओह्ह… भाभी बहुत दर्द हो रहा है… उईई माँ ऽ…”

फिर भाभी ने उसे मेरी चूत में पूरा घुसा दिया था।

और मैं बस चीखती रही, कमरे में मेरी चीख गूँज रही थी-“ओह्ह… माँ ऽऽ भाभी निकालोऽ इसे बार… बहुत दर्द हो रहा है…”

भाभी मेरी चुची को हाथों से मसलने लगी और होंठों को मुँह में लेकर चूस ने लगी, और मैं गुन्न - गुन्न करने लगी। भाभी मेरे उपर पड़ी थी, मुझसे बिल्कुल भी सहन नहीं हो रहा था।
भाभी उसे निकाल ही नहीं रही थी और भाभी ने जोर-जोर से मेरी चुची को रगड़ना शुरू कर दिया था। मेरी चुची में दर्द हो रहा था, और निपल का बुरा हाल हो चुका था। पर आज मेरी भाभी ने मुझे अपनी रंडी बनाने की सोच रखी थी और वो बस मुझे किस कर रही थी, और मैं दर्द से बिलबिला रही थी।

करीब 10 मिनट तक भाभी ने मेरे होंठ चूसे और चुची को रगड़ा, जिसके कारण मेरी चुची में जलन हो रही थी और निपल लाल हो चुके थे। अब मेरे अंदर कोई ताकत नहीं थी कि मैं इस रंडी को पटा सकूँ । आज मेरी चूत की हालत खराब हो गई थी और मेरे शरीर ने मेरा साथ देना बंद कर दिया। मेरे शरीर पर कई जगह रंडी ने अपने दांतों से निशान बना दिए थे। मैं बंडल सी पड़ी थी, मेरे पैर भाभी की कमर के ऊपर थे और हाथों ने भाभी को कस रखा था।

*****
उसके बाद भाभी ने धीरे-धीरे अपनी गाण्ड को उठाना शुरू कर दिया, तो मेरी चूत में वो प्लास्टिक का लण्ड अंदर-बाहर होने लगा। पर मैं डर के मारे बिलबिला रही थी और मेरी चूत फट चुकी थी। मुझे ऐसा लगा की जैसे भाभी ने मेरी चूत में प्लास्टिक का लण्ड नहीं चाकू डाला हो, मेरी चूत से थोड़ा बहुत खून निक ला जो मेरी गाण्ड के छेद पर से होकर बह रहा था।

पर भाभी पर वासना और बदले की भावना सवार थी और ऊपर से वो नशे में थी, मुझपर कोई रहम नहीं कर रही थी। फिर मुझे उस लण्ड से चोदना शुरू कर दिया, बीच-बीच में मेरे होंठों को चूस लेती और चुची को मसल देती। और एक मैं थी जिस पर वासना और कामदेव पूरी तरह सवार थे, हर दर्द सह रही थी और फिर कुछ ही देर में मुझे भी मजा आने लगा। तो मैंने भी अपनी गाण्ड उठाना शुरू कर दिया।

जैसे ही भाभी को पता चला की मैं गाण्ड उठाने लगी हूँ तो भाभी ने धक्के की स्पीड बढ़ा दी और बोली-“ले रंडी साली, आज तक कोई लड़की ने प्लास्टिक के लण्ड से सील नहीं थोड़ी, आज त है जो प्लास्टिक के लण्ड से चुद रही है मादरचोदी ओह्ह… आज तेरी माँ को भी चोद दूँगी साली कुतिया… रंडी हो तुम दोनों माँ बेटी… बहन की लौड़ी नाजायज हो तुम दोनों भाई बहन…”

मुझे भी उनकी गालियाँ असीम आनद दे रही थीं, और मैंने भी उनका साथ देना शुरू कर दिया। मैं चाहती थी आज मुझे मेरी भाभी अच्छे से चोदे। मैं अब तय कर चुकी थी की मुझे अपनी जवानी का पूरा मजा लेना है, चाहे किसी से भी चुदना पड़े।

फिर मैं भी अब सिसियाने लगी-“ऊओह्ह… भाभी… आह्ह… चोदो मुझे ओह्ह… मालकिन ओह्ह… फाड़ दे आज मेरी चूत … ओह्ह… मालकिन चोद मुझे… हाँ औरिर जोर से… बना दे रंडी आज्ज… थक्क गई उंगली घुसा-घुसाकर और तुम लोगों की चुदाई देख-देखकर ह्म् म्म्म… चोद मुझे और बना दे मेरी चूत का भोसड़ा… अह्ह माल्लकिन्न ओह्ह… घुसा पूरा एसे ही और फाड़ दे मेरी चूत … बहुत तड़पाती है…”
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
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बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
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